मंगलवार, 31 मार्च 2020

चित्रक के फायदे chitrak KE fayde

चित्रक 

आयुर्वेदिक जडी बूटी
 चित्रक के फायदे

चित्रक सम्पूर्ण भारत में पाई जानें वाली वनस्पति हैं । चित्रक की व्यावसायिक रूप से खेती भी की जाती हैं । चित्रक का पौधा chitrak ka podha वर्ष भर हरा भरा रहता हैं । चित्रक के पौधे की लम्बाई 3 से 6 फुट तक होती हैं । इसका तना बहुत पतला होता हैं ।


चित्रक की जड़ chitrak ki jad के पास से ही छोटी छोटी डालियाँ फुटती हैं यह डालियाँ चिकनी और हरे रंग की होती हैं ।



चित्रक के पत्ते  chitrak KE patte लम्बे और गोलीय होतें हैं ।



चित्रक के फूल chitrak KE phul सफेद रंग के और सुगंधहीन होतें हैं । चित्रक के फूल की कलियाँ कोमल शाखाओं में से निकलती हैं । 


चित्रक के बीज फूलों में से निकलतें हैं  जिनका स्वाद कड़वा और तीखा होता हैं । एक फूल में से एक ही बीज निकलता हैं ।



चित्रक की तीन सफेद,लाल और काली प्रजाति  पाई जाती हैं ।



चित्रक की प्रकृति



आयुर्वेद मतानुसार चित्रक गर्म, रूक्ष,हल्की होती हैं ।





चित्रक का संस्कृत नाम 



चित्रक को संस्कृत में  अग्नि,अग्निशिखा, सप्तीष कहा जाता हैं ।



चित्रक के हिन्दी नाम 



चित्रक को हिन्दी में चित्रक, चित्रा और चितावर कहतें हैं ।



चित्रक का लेटिन नाम 



plumbago zeylanica प्लम्बगो सेलेनिका



चित्रक के फायदे chitrak KE fayde




1.सफेद दाग lucoderma



चित्रक की छाल को गाय के दूध के साथ पीसकर सफेद दाग पर नहानें से आधा घंटा पूर्व लगानें से सफेद दाग कुछ दिनों में मिटनें लगतें हैं और त्वचा का रंग पूर्व की तरह काला होनें लगता हैं ।  लेकिन त्वचा में जलन होती हैं तो लगानें से पूर्व परामर्श अवश्य ले लें ।




फेटी लीवर 




ज्वार या बाजरें के तनें को छीलकर उसके ऊपर चित्रक की जड़ का पावडर चुटकी भर नमक की तरह डालकर ज्वार या बाजरें का तना गन्नें की तरह चूसनें से फेटी लीवर की समस्या कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती हैं ।



गठिया 



 चित्रक के तनें को पीसकर गठिया की वजह से उत्पन्न दर्द पर 10 - 15 मिनिट तक लेप करनें से दर्द में आराम मिलता हैं ।



बवासीर



चित्रक की जड़ को छाछ या दही के साथ मिलाकर पीनें से बवासीर में आराम मिलता हैं ।



सफेद बाल



समय पूर्व हुये सफेद बालों को यदि काला करना चाहतें हो तो काली चित्रक को पीसकर आँवलें के साथ बालों में लगानें से सफेद बाल कालें हो जातें हैं ।



पीलिया रोग 




चित्रक की जड़ को शहद और आँवला रस के साथ मिलाकर रात को चाटनें से पीलिया रोग मिट जाता हैं ।



हाथीपाँव



चित्रक की जड़ और देवदारू की जड़ को गौमूत्र के साथ पीसकर हाथीपाँव पर लेप करनें हाथीपाँव की समस्या समाप्त हो जाती हैं ।



रूकी हुई माहवारी को चालू करनें में



चित्रक की जड़ को गर्भाशय के मुख पर रखनें से रूकी हुई माहवारी चालू हो जाती हैं । गर्भवती स्त्री को चित्रक का सेवन नही करना चाहियें ।



जहरीलें कीड़े मकोड़ें का विष उतारनें में



चित्रक की जड़ को गाय के घी के साथ मिलाकर कीडे मकोड़े काटे स्थान पर लगानें से कीडें मकोडे का जहर उतर जाता हैं ।


खुजली में चित्रक 



शरीर में खुजली होनें पर चित्रक के बीज को पानी के साथ पीसकर नहानें से दस मिनिट पूर्व लगा लें। खुजली में बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं ।



पागलपन में



चित्रक की जड़ और ब्राम्ही समान मात्रा में लेकर पीस लें और पागलपन में 3 - 3 ग्राम सुबह शाम गाय के दूध के साथ खिलानें से बहुत तेजी से आराम मिलता हैं ।




प्रसूति में चित्रक



चित्रक की जड़ एक एक इंच काटकर 10 - 15 जगह सूत की डोरी में बाँध दे । यह डोरी प्रसूता के गलें में बाँध दे और 21 दिन तक बंधी रहनें दें । इससे प्रसूता को ज्वर नही आता हैं और नवजात के आसपास कीटाणु नही आतें हैं । यह सिद्ध और अनूभूत योग हैं ।



चित्रक बहुत गर्म होती हैं इसके उपयोग के पूर्व वैघकीय परामर्श बहुत आवश्यक हैं क्योंकि यह औषधी पेट में जलन पैदा करती हैं । अधिक मात्रा में लेनें पर जहरीले प्रभाव दिखाती हैं और चमड़ी पर बिना वैघकीय परामर्श से लगानें पर छालें उत्पन्न कर सकती हैं ।



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