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फ़रवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है

 हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है    आसपास,पास पड़ोस, परिवार में,समाज में आपने ऐसे कई लोगों को कहते सुना होगा कि डाक्टर बदल बदलकर थक गये है पर अचानक से हाथ पैर,सिर ठंडा होना, बुखार आना बंद नहीं हो रहा हैं । पता नहीं कोंन सी बीमारी है जो पीछा ही नहीं छोड़ रहीं हैं । लम्बे समय तक बीमारी पीछा नहीं छोड़ती तो मनुष्य अवसाद, तनावग्रस्त होकर आत्महत्या करने की सोचने लगता हैं । वास्तव में हाथ पैरों तलवों सिर का ठंडा होना (cold hand,cold feet), बुखार जैसा महसूस होना किसी एक कारण से नहीं होता हैं इसके पीछे पहले से चली आ रही बीमारी या होनें वाली संभावित बीमारी मुख्य कारण होती हैं ,तो आईए जानते हैं हाथ पांव ठंडे रहने के कारणों के बारें में जिनसे बेवजह हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं      हाथ पांव ठंडे रहने के कारण ::   मधुमेह हाथ पांव ठंडे सोनें का सबसे आम कारण मधुमेह हैं , मेडिसिन भाषा में इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता हैं। इस अवस्था में हाथ पैरों में के पंजों में ठंड लगती हैं किंतु हाथ से छूने पर उनमें गरमाहट लगती हैं । इसका कारण मधुमेह से नसों का क्षतिग्रस्त

औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा ।Genda

  औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा   गेंदा भारत की धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक आदि न जानें कितनी दिनचर्या में रचा बसा हुआ है,हर समारोह,रिती रिवाज, धार्मिक कार्य गेंदा फूल के बिना अधूरा है या यूं कह लो "बिन गेंदा सब सूना" गेंदा फूल बिना जाति धर्म,पंथ,सम्प्रदाय, में भेदभाव किए जन्म से लेकर श्मसान तक मनुष्य का साथ निभाता हैं ।  गुलाब फूलों का राजा है तो गेंदा फूल भी प्रधानमंत्री हैं । यदि गेंदा के औषधीय गुण की बात करें तो 3 से 4 फ़ीट तक बढ़ने वाला यह पौधा बहुत सी बीमारियों को जड़ मूल से समाप्त कर देता हैं ।  तो आईए जानते हैं गेंदा के औषधीय गुण के बारे में       गेंदा गेंदा का संस्कृत नाम पुष्पा,झंडु गेंदा का हिंदी प्रचलित नाम हजारी,गुल जाफरी,मखमली गेंदा का अंग्रेजी नाम Marigold  गेंदा का वैज्ञानिक नाम Tagetes  आजकल गेंदा फूल की 150 से ज्यादा प्रजाति प्रचलन में हैं किंतु हम यहां मूल देशी गेंदा की प्रजाति के औषधीय गुण की चर्चा करेंगें आयुर्वेद मतानुसार गेंदा की प्रकृति गेंदे की पत्ती,तना और जड़ तीखी, कड़वी, कसैली, इसका फल और फल मधुर होता हैं । गेंदा के औषधीय गुण बुखार में गें

नमक के फायदे और नुकसान

 नमक के फायदे और नुकसान लेखक : डाक्टर पी.के.व्यास          B.A.M.S.आयुर्वेद रत्न नमक का नाम आते ही हमारे मन-मस्तिष्क में नमक के फायदे के बारें में विचार तैरने लगते हैं। यदि भोजन में नमक नहीं हो तो भोजन बेस्वाद और अस्वास्थ्यकर हो जाता है । हमारे देश की बहुत बड़ी आबादी नमक के फायदे के बारें में अनजान हैं, तो आईये जानतें हैं प्राचीन आयुर्वेद विज्ञानियों के अनुसार विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे नमक के फायदे सेन्धा नमक के फायदे sendha namak ke fayde सेंधानमक आयुर्वेद ग्रंथों में सेन्धा नमक के बारे में लिखा है रोचनंदीपनंह्रधंंचक्षुष्यमविदाहिच।त्रिदोषन्घंसमधुरंसैन्धवंलवणोत्तमम्।। ✓ सेंधानमक बहुत स्वादिष्ट होता है,यह भोजन के स्वाद को बढ़ाकर उसे रुचिकारक बना देता हैं । ✓ सेंधानमक खानें से भूख खुलकर लगती हैं। ✓ भोजन के बाद सेंधानमक खानें से भोजन तुरंत पच जाता हैं । ✓ सेंधानमक ह्रदयरोग में बहुत लाभदायक होता है। यदि  टैकीकार्डिया है तो सेंधानमक भोजन में शामिल करें बहुत लाभ मिलेगा । ✓ सेंधानमक ह्रदयरोग से बचाता है , इसके सेवन से HDL कोलेस्ट्रॉल,LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड संतुलित रहता है ।

14 औषधीय गुण थूहर के

14 औषधीय गुण थूहर केे थूहर आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत महत्व का पौधा है,इसका पौधा दस फ़ीट तक ऊंचा होता है । थूहर में लगने वाली लम्बी लम्बी डंडे के समान होती हैं ,जिन पर तीखे कांटे निकले रहते हैं । थूहर के पत्ते 6 इंच तक लम्बें और ढाई इंच तक चोडे होते हैं । थूहर का कोई भी भाग तोड़ने पर सफेद दूध निकलता है । थूहर थूहर का संस्कृत नाम  थूहर को संस्कृत में स्नूही,सुधा,समन्त दुग्धा,वज्रा नाम से जाना जाता हैं । थूहर का लेटिन नाम थूहर को लेटिन भाषा में fuphorbia nerifolia (यूफोर्बिया नेरिफोलिया) के नाम से जानते हैं । थूहर का हिन्दी नाम थूहर को हिन्दी में सेहुंड,कांटा थूहर, थूहर छोटा के नाम से जाना जाता हैं । आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति आयुर्वेद मतानुसार थूहर गर्म, कड़वी,भारी,होती हैं, थूहर का दूध भी गर्म,तीखा और रेचक होता है । थूहर के औषधीय गुण या थूहर के फायदे 1.दस्त लगानें में यदि किसी को बहुत दिनों से दस्त नहीं हो रहें हैं तो थूहर के दूध में हरड़,पीपल और निशोंध पीसकर चटा दें , बहुत तेज दस्त लगेंगे ‌। 2.बिच्छू का विष उतारने में  थूहर की जड़ को कालीमिर्च के साथ पीसकर बिच्छू काटने वाली जगह पर लगान

चरक संहिता पुस्तक के अनुसार मूली खाने के फायदे

चरक संहिता पुस्तक के अनुसार 'मूली खाने के फायदेे' आयुर्वेद में मूली त्रिदोषनाशक होनें के कारण हर बीमारी में उपयोगी हैं तो आईयें जानतें हैं आयुर्वेद की महान पुस्तक"चरक संहिता के अनुसार मूली खाने के फायदे"  बालंदोषहरंवृद्धंत्रिदोषंमारूतापहम्।स्निग्धसिद्धंविशुष्कन्तुमूलकंफवातजित्।। अर्थात मूली जब कच्ची होती हैं तो यह त्रिदोषनाशक होती हैं,पकी हुई मूली त्रिदोषकारक होती हैं। तेल,घी से सिद्ध की गई मूली और मूली के पत्ते वातनाशक होतें हैं।इसी प्रकार सूखी हुई मूली वात,कफ को समाप्त कर देती हैं ।   मूली स्वाद में कषाय,चरपरी होती हैं । मूली में आयरन,कैल्सियम, मैग्निशियम, सोडियम, विटामिन ए ,गंधक,क्लोरीन आदि तत्व बहुत प्रचुरता में पाए जातें हैं । आईयें जानतें हैं मूली खानें के  फायदे के बारें में • कच्ची मूली सलाद के रूप में यदि सुबह शाम खाई जाए तो यह पेट में मौजूद रूकी हुई हानिकारक वायु को बाहर निकाल देती हैं,लेकिन आजकल लोग मूली मात्र इसीलिये नही खाते की यह पेट में गैस बनाती हैं। वास्तव में यह धारणा सही नहीं हैं । #मूलीखानेकेफायदे • पेट में एसिडिटी की समस्या हैं तो मूली का रस एक चम

यूनानी चिकित्सा पद्धति एक परिचय [Unani ]

  यूनानी चिकित्सा पद्धति एक परिचय यूनानी चिकित्सा पद्धति रोग निदान की एक विस्तृत और व्यवस्थित पद्धति हैं । इस पद्धति के जनक हिप्पोक्रेट्स हैं ।  हिप्पोक्रेट्स ने 460 से 377 ईसा पूर्व के बीच मिश्र,इराक तुर्की के मध्य यूनानी चिकित्सा पद्धति का आविष्कार किया।  इसके बाद 129 से 200 ईसा पूर्व के बीच हकीम जालीनूस ने यूनानी चिकित्सा पद्धति को लोकप्रिय बनाया । इसके बाद यूनानी चिकित्सा शास्त्री जाबिर- इब- हयात और हकीम - इब - सिने ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया । यूनानी चिकित्सा आधुनिक भारत में यूनानी चिकित्सा का इतिहास भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति की शुरूआत 10 वी शताब्दी से मानी जाती हैं किंतु   भारत में यूनानी चिकित्सा (Unani) पद्धति को पुनर्जीवित कर आधुनिक रूप देनें का श्रेय हकीम अजमल खान को जाता हैैं । हकीम अजमल खान के प्रयासो  से ही दिल्ली में यूनानी चिकित्सा में पढा़ई हेतू "तिब्बतिया कालेज" की स्थापना हुई । हकीम अजमल खान के प्रयासो को मान्यता देते हुये भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस 11 फरवरी को 'राष्ट्रीय यूनानी दिवस'के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया जिसकी शुरूआत सन्

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है

  प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है ? प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना  केन्द्रीय बजट 2021 में घोषित एक देशव्यापी स्वास्थ्य योजना हैं । जिसमें  अचानक पैदा होनें वाली वैश्विक महामारियों के उचित समय पर नियंत्रण करनें हेतू उपाय किये गये हैं । पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के लिए केन्द्रीय बजट 2021 में 64,180 करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं । जो अगले 6 सालों में 10 हजार करोड़ प्रतिवर्ष के मान से खर्च कियें जायेंगे । प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के उद्देश्य Aim of pm aatmnirbhar svasth bharat yojna • इस योजना में पैदा होनें वाली बीमारीयों की निगरानी के लिए देश के सभी जिलों में Public health lab की स्थापना होगी और इन सभी को एकीकृत स्वास्थ सूचना प्रणाली से जोड़ा जायेगा ताकि बीमारी का रियल टाइम मानिटरिंग संभव हो सके । • गाँव से लेकर शहरों तक की स्वास्थ्य देखभाल करनें वाली संस्थाओ जैसें प्राथमिक, सामुदायिक ,जिला स्तरीय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से विकास किया जायेगा। • इस योजना के माध्यम से देश