28 फ़र॰ 2021

हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है

 हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है  


 आसपास,पास पड़ोस, परिवार में,समाज में आपने ऐसे कई लोगों को कहते सुना होगा कि डाक्टर बदल बदलकर थक गये है पर अचानक से हाथ पैर,सिर ठंडा होना, बुखार आना बंद नहीं हो रहा हैं । पता नहीं कोंन सी बीमारी है जो पीछा ही नहीं छोड़ रहीं हैं । लम्बे समय तक बीमारी पीछा नहीं छोड़ती तो मनुष्य अवसाद, तनावग्रस्त होकर आत्महत्या करने की सोचने लगता हैं ।


वास्तव में हाथ पैरों तलवों सिर का ठंडा होना (cold hand,cold feet), बुखार जैसा महसूस होना किसी एक कारण से नहीं होता हैं इसके पीछे पहले से चली आ रही बीमारी या होनें वाली संभावित बीमारी मुख्य कारण होती हैं ,तो आईए जानते हैं हाथ पांव ठंडे रहने के कारणों के बारें में जिनसे बेवजह हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं 
 
 
हाथ पांव ठंडे रहने के कारण




हाथ पांव ठंडे रहने के कारण ::


 मधुमेह


हाथ पांव ठंडे सोनें का सबसे आम कारण मधुमेह हैं , मेडिसिन भाषा में इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता हैं। इस अवस्था में हाथ पैरों में के पंजों में ठंड लगती हैं किंतु हाथ से छूने पर उनमें गरमाहट लगती हैं । इसका कारण मधुमेह से नसों का क्षतिग्रस्त होना होता हैं । यदि लम्बें समय तक समस्या बनी रहती हैं तो यह समस्या स्थाई हो जाती हैं और मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी बहुत कष्टप्रद बन जाती हैं ।


ह्रदयरोग 


जब ह्रदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होकर ह्रदय की धमनियों को जाम कर देता हैं तो हाथ और पांव तक खून की आपूर्ति नहीं हो पाती हैं फलस्वरूप धिरे धिरे हाथ पांव की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं । और हाथ पांव ठंडे पड़ने लगते हैं। इस प्रकार की समस्या में कभी कभी एक ही हाथ या एक ही पांव ठंडा होता हैं या दोनों हाथ पांव कम या ज्यादा ठंडे होतें हैं । 

इस प्रकार की समस्या में हाथ पांव ठंडे होनें की जगह दर्द,सुन्नहोना, पांव हाथ पतले होना और हाथ पांव में कमजोरी भी हो सकती हैं ।


एनिमिया 


ज्यादातर युवाओं और किशोरीयों में जब खून की कमी हो जाती हैं और यह कमी लम्बें समय तक बनी रहती हैं तो हाथ पांव के तलवों में ठंडा महसूस होता हैं। चूंकि युवावस्था शारीरिक विकास की अवस्था होती हैं अतः शरीर में खून की पूर्ति होनें पर यह समस्या भी बहुत तेजी से ठीक हो जाती हैं ।


किडनी संबंधित समस्या

यदि किडनी से संबंधित कोई समस्या हैं तो  किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती हैं और शरीर का रक्तचाप ऊपर-नीचे होता रहता है, फलस्वरूप या तो पूरे शरीर में कंपकंपी महसूस होगी या हाथ पैरों में ठंडा महसूस होगा ।


एनोरेक्सिया नर्वोसा 


यह खानपान से संबंधित एक बीमारी है जिसे कामन मेडिकल भाषा में इटिंग डिस आर्डर कहते हैं।इस बीमारी में शरीर में वसा की कमी हो जाती हैं फलस्वरूप हल्की ठंड में भी शरीर में गरमाहट महसूस नहीं होती और शरीर के साथ साथ पांव ठंडे हो जातें हैं ।



हार्मोन असंतुलन

हार्मोन असंतुलन की वजह से शरीर में हार्मोन या तो कम बनते हैं या अधिक बनते हैं उदाहरण के लिए थायरायडिज्म, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन , एड्रीनलीन हार्मोन असंतुलन की वजह से शरीर और हाथ पांव ठंडे हो जातें हैं । 

कभी कभी शरीर के जोड़ों में भी बहुत अधिक ठंड महसूस होती हैं । 

रेनोज बीमारी


रेनोज बीमारी में हाथ पांव की नसें तनाव या ठंड बढ़ने पर बहुत तेजी से सिकुड़ जाती हैं और इस वजह से नसों में खून का प्रवाह रुक जाता हैं।यह अवस्था पैरों की उंगलियों के लिए और शरीर के अंगों के लिए बहुत घातक साबित होती हैं। और प्रभावित अंग में ठंड लगने के साथ अंग सफेद और नींदें भी पढ़ जातें हैं ।


अत्यधिक ठंड


जिन इलाकों में तापमान शून्य से नीचे रहता है वंहा सबसे ज्यादा ठंड का प्रभाव हाथ पैरों में और उंगलियों में ही महसूस होता है । यदि हाथ पैरों में लम्बे समय तक बिना ऊनी मोजे  पहने शून्य से निचें तापमान में रहें तो हाथ पांव की नसें स्थाई रुप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और इनमें ठंड महसूस होती रहती हैं । 


शराब, तम्बाकू का अधिक सेवन


यदि शराब और तंबाकू का अत्यधिक सेवन किया जाता हैं तो धीरे-धीर मस्तिष्क का तापमान नियंत्रण केंद्र हाइपोथेलेमस  शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाता है । फलस्वरूप हाथ पांव ठंडे होतें हैं । 

दवाईयों का अत्यधिक सेवन


कुछ विशेष प्रकार की दवाईयों जैसे पेरासिटामोल का अत्यधिक इस्तेमाल करने से शरीर का तापमान असंतुलित होकर हाथ पांव ठंडे होना शुरू हो जातें हैं । 


रासायनिक पदार्थों के सम्पर्क से


यदि हाथ और पांव लगातार रासायनिक पदार्थों के सम्पर्क में रहते हैं तो हाथ और पांव की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती है फलस्वरूप हाथ पांव में ठंड महसूस होती हैं उदाहरण के लिए खेतों में काम करने वाले किसान बिना सुरक्षा उपकरण के रासायनिक दवा,खाद का छिड़काव करतें हैं तो हाथ पांव में ठंडा महसूस होता हैं ।


विशेष अवसरों पर शरीर की प्रतिक्रिया


कभी कभी कुछ विशेष धार्मिक क्रियाकलापों और ढोल नगाड़ों की आवाज़ में व्यक्ति का शरीर बहुत तेजी से कंपकंपाता हैं, लम्बे समय तक व्यक्ति इस अवस्था में रहता है तो हाथ और पांव सफेद हो जाते हैं और उनमें ठंडक महसूस होती हैं । 


जेट लेग के कारण


जो लोग लगातार लम्बी लम्बी हवाई यात्रा करतें हैं उनके पैरों में खून का प्रवाह कम हो जाता हैं फलस्वरूप पांवों के तलवों और घुटनों से नीचे ठंड महसूस होती हैं।  


दुर्घटना

यदि किसी कारणवश दुर्घटना में हाथ पांव की मांसपेशियां अधिक क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो अधिक उम्र होनें पर हाथ पांव में ठंडक महसूस होती हैं ।


शरीर में विटामिन की कमी


कुछ विटामिन जैसे विटामिन डी, विटामिन बी 12, विटामिन ई  आदि की कमी के कारण भी हाथ पांव ठंडे रहते हैं।


 बचाव के उपाय


यदि हाथ पांव ठंडे हो रहें हों तो तुरंत उचित कारण जानकर विशेषज्ञ से परामर्श कर निदान करें इसके अलावा इस बीमारी से बचाव हेतू कुछ सावधानियां भी बरतें जैसे

1.संतुलित खानपान को जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बना लें, कुछ विशेष फल और सब्जियां इस बीमारी से बचाव हेतू प्रयोग कर सकते हैं जैसे चुकंदर,पालक,गराडू,अनार और पाइनेप्पल ।

2.त्रिकोणासन और शलभासन जैसे योग बीमारी से बचाव और बीमारी होनें के बाद भी बीमारी को बढ़ने से रोकते हैं ।

3.तिल तेल और सरसों तेल से शरीर की नियमित मालिश करने से शरीर का रक्त संचार सुधरकर बीमारी दूर होती है ।

4. शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए प्रर्याप्त मात्रा में पानी पीतें रहें।

5.यदि मधुमेह और रक्तचाप से पीड़ित हैं तो नियमित रूप से शरीर की जांच अवश्य कराएं।

6.ठंडी जगहों पर रहने वालों को हर समय अपने हाथ और पांव को ढक कर रखना चाहिए ।

7.मस्तिष्क को भ्रमित करनें वाले खानपान जैसे मोनोसोडियम ग्लूटामेट का इस्तेमाल भोजन में नहीं करें ।

8.नियमित रुप से तीन किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलने से बीमारी नहीं होती हैं।

9.चिकित्सकीय सलाह के बिना लगातार पेरासिटामोल या अन्य दर्द निवारक दवा का इस्तेमाल न करें ।

10.हाथ पांव में घाव हैं तो इसके तुरंत उपचार कराएं।
















26 फ़र॰ 2021

औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा ।Genda

 औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा  


गेंदा भारत की धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक आदि न जानें कितनी दिनचर्या में रचा बसा हुआ है,हर समारोह,रिती रिवाज, धार्मिक कार्य गेंदा फूल के बिना अधूरा है या यूं कह लो "बिन गेंदा सब सूना"

गेंदा फूल बिना जाति धर्म,पंथ,सम्प्रदाय, में भेदभाव किए जन्म से लेकर श्मसान तक मनुष्य का साथ निभाता हैं ।

 गुलाब फूलों का राजा है तो गेंदा फूल भी प्रधानमंत्री हैं । यदि गेंदा के औषधीय गुण की बात करें तो 3 से 4 फ़ीट तक बढ़ने वाला यह पौधा बहुत सी बीमारियों को जड़ मूल से समाप्त कर देता हैं ।  तो आईए जानते हैं गेंदा के औषधीय गुण के बारे में

  
  
गेंदा के औषधीय गुण
गेंदा




गेंदा का संस्कृत नाम


पुष्पा,झंडु


गेंदा का हिंदी प्रचलित नाम

हजारी,गुल जाफरी,मखमली


गेंदा का अंग्रेजी नाम

Marigold 


गेंदा का वैज्ञानिक नाम

Tagetes 


आजकल गेंदा फूल की 150 से ज्यादा प्रजाति प्रचलन में हैं किंतु हम यहां मूल देशी प्रजाति के औषधीय गुण की चर्चा करेंगें



आयुर्वेद मतानुसार गेंदा की प्रकृति


गेंदे की पत्ती,तना और जड़ तीखी, कड़वी, कसैली, इसका फल और फल मधुर होता हैं ।


गेंदा के औषधीय गुण


बुखार में गेंदा के औषधीय गुण


यदि बहुत तेज बुखार हो और हाथ पैरों में जलन हो रही हो तो गेंदा फूल का रस निकालकर हाथ पैरों और सिर पर मालिश करें । चाहें तो गेंदा फूल का रस निकालकर फ्रीजर में बर्फ बना लें और इसकी ठंडी पट्टी सिर पर रखें। बहुत लाभदायक है ,आजमाया हुआ अद्भूत देशी, घरेलू नुस्खा है ।



मिर्गी रोगी में गेंदा


मिर्गी आनें पर गेंदा फूल का रस दो दो बूंद दोनों नाक में डालें, इसके अलावा प्रतिदिन जैविक विधि से तैयार गेंदा की जड़ पीसकर 3 ग्राम शहद के साथ सुबह शाम सेवन करें ।


अवसाद को दूर करने में


मन अवसाद में हो, कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा हैं तो गेंदा फूल से अपने बेडरूम, बैठने की टेबल, आदि सभी जगहों पर सजावट करें । दो चार गेंदा फूल को रात को पीनें वाले पानी में डालकर सुबह यह पानी पी लें, मन प्रसन्न और शांत रहने लगेगा । 

गेंदा फूल का तेल इत्र की भांति लगाने से भी मन प्रसन्नचित रहता है।

जानें मानें अमेरिकी व्यक्तित्व जेमी बैरेट जिन्होंने फूलों की उपयोगिता और उनसे होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में कई जागरूकता अभियान चलाएं हैं का मानना है कि फूलों को विटामिन एफ कहना चाहिए क्योंकि ये हमारी भावनात्मक सेहत और मानसिक क्षमता को बढ़ाते हैं और हमें तनाव से मुक्ति दिलाते हैं।



• तनाव प्रबंधन के उपाय

खून बढ़ाने में


गेंदा की पत्तियां खून बढ़ाती है , इसके लिए गेंदा की साफ पत्तियां पीसकर रस निकाल लें,इस रस को सुबह-शाम एक-एक चम्मच सेवन करें ।


मांसपेशियों की जकड़न दूर करने में


गठिया, सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस, जोड़ों का दर्द आदि में गेंदा की पत्तियों का रस निकालकर प्रभावित भाग पर हल्दी और गेरु मिट्टी मिलाकर गर्म करले और बांध लें, बहुत आराम मिलेगा । इसके अलावा गेंदे के तेल की मालिश दर्द प्रभावित जगह पर करने से आराम मिलता हैं ।




खूनी बवासीर का इलाज


रासायनिक खाद कीटनाशक दवा के बिना इस्तेमाल जैविक विधि से तैयार गेंदा फूल की पंखुड़ियों को आग पर भून लें,इन भूनी हुई पंखुड़ियों को रात को सोने से पहले 3 ग्राम का लें, खूनी बवासीर की  दवा है जो बहुत लाभदायक है । 



कानदर्द में लाभदायक गेंदा


गेंदे के फूल या पत्तों का रस एक दो बूंद कान में डालने से कानदर्द में आराम मिलता हैं ।


 दाद खाज खुजली की दवा गेंदा


गेंदे के पत्तों का रस निकालकर दाद खाज खुजली पर कपूर, नारियल तेल के साथ लगाएं। लगाने की विधि 30 मिलीलीटर मात्रा में गेंदे के पत्तों का रस, समान मात्रा में नारियल तेल और दो तीन कपूर की गली अच्छी तरह मिलाकर सुबह-शाम लगाएं ।


गेंदा फूल को पानी में उबालकर ,इस पानी से स्नान करने से खुजली समाप्त होती हैं ।


स्तनों की सूजन


यदि किसी कारणवश स्तनों में सूजन और दर्द हो रहा हैं तो इसके पत्तों का रस स्तनों पर लगाएं बहुत जल्दी दर्द और सूजन से आराम मिलेगा ।

• how to increase breast size in Hindi

माइग्रेन में


गेंदा फूल को सुखाकर चूर्ण बना लें ,इस चूर्ण में सरसों तेल मिलाकर सिर में मालिश करें । 


दांतो के दर्द में


गेंदा के बीस पच्चीस पत्तें 250 मिलीलीटर पानी में ,पानी 100 मिलीलीटर होने तक उबालें । गुनगुना होनें पर कुल्ला करें दांत दर्द बंद हो जाता हैं ।


खांसी और अस्थमा में


गेंदे के पके बीज 3 ग्राम को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें । खांसी और अस्थमा में श्वास नली की सूजन कम होती हैं ।


मस्तिष्क के लिए


गेंदे के फूलों के बीच स्थित भाग जिसे गेंदे की बाटी कहतें हैं को निकालकर रोज चार पांच की मात्रा में खाने से मस्तिष्क मजबूत बनता है,स्मरण शक्ति बढ़ती है, डिमेंशिया से बचाव होता है और ब्रेन हैमरेज की संभावना कम होती हैं ।


वीर्य गाढ़ा करने हेतू उपाय


गेंदे की जड़ 3 ग्राम और गाय का घी 3 ग्राम मिलाकर रात को भोजन करने के बाद गुनगुने पानी से लें ,वीर्य गाढ़ा होकर ,बिस्तर पर टाइम बढ़ता है ।


शरीर पर पड़ने वाले oxidative stress के लिए


अधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, अधिक मीठा, अधिक नमकीन अधिक फैट, जंक फूड, तम्बाकू, धूम्रपान, शराब आदि के सेवन से शरीर के अंगों पर एक तरह का oxidative stess पड़ता है। इस आक्सीडेटिव तनाव को गेंदा की सहायता से कम किया जा सकता है।

गेंदे के फूल को बारिक काटकर,दही या छाछ में मिला लें इसमें स्वादनुसार सैंधा नमक और थोड़ा सा शहद मिला लें प्रतिदिन भोजन के पीनें से शरीर पर पड़ने वाले आक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद मिलती हैं ।



सौन्दर्य प्रसाधन के रुप में


मुल्तानी मिट्टी में पानी की जगह गेंदे के फूलों का रस मिलाकर चेहरे,और गर्दन पर लगाएं और सूखने पर पानी से धो लें, चेहरे की छाईंया,कालापन, झुर्रियां और बढ़ती उम्र के प्रभाव समाप्त हो जातें हैं ।


स्तन में कसावट लाने का उपाय


यदि बढ़ती उम्र या अन्य किसी कारणवश स्तनों में ढीलापन आ गया है तो 100 ग्राम मुल्तानी मिट्टी में गेंदे के 100 ग्राम सूखे बीज  पीसकर मिला लें और पानी में मिक्स कर और स्तनों पर लगाएं । सूखने पर धो लें ,यह प्रयोग लगातार चार हफ्तों तक करें। स्तन सुडोल, आकर्षक और उभरे हुए हो जाएंगे ।

भोजन में अरुचि को कैसे दूर करें

यदि भोजन में अरुचि हो रही है तो गेंदा फूल का शरबत बनाकर सुबह-शाम पीएं,भोजन में अरुचि समाप्त होकर खुलकर भूख लगेगी । दाल सब्जी और चावल का स्वाद बढ़ाने के लिए इन्हें बनाते समय इसमें एक दो फूल गेंदे के डाल सकते हैं । भोजन की खूशबू बढ़ जाएगी ।

फटी त्वचा का इलाज

गेंदा की पत्ती का रस  और मोम को मिलाकर गर्म कर लें,हल्का गर्म होने पर इसे फटी एड़ियों,फटी त्वचा,फंटे होंठ पर लगाएं ,  त्वचा फटना बंद होकर मुलायम और कोमल बन जाएगी।





[ नोट : औषधीय प्रयोग के लिए रासायनिक खाद, कीटनाशक से मुक्त पूर्णतः जैविक विधि से तैयार गेंदा का प्रयोग करें]








24 फ़र॰ 2021

बागपत के आंइस्टीन चाचा,Bagpat ke Einstein chacha

 बागपत के आंइस्टीन चाचा,Bagpat ke Einstein chacha


तो भाई और बहनों, दुनिया क्या याद रखेगी अल्बर्ट आइंस्टीन को अब तो हमारें अपने बागपत ने भी दुनिया को आंइस्टीन दे दिया है,और हां हमारे आंइस्टीन चाचा पिछले दो-तीन दिनों में ही पैदा हुए हैं।😂
बागपत की लड़ाई, आंइस्टीन चाचा
आंइस्टीन चाचा



विडियो में हमारे आंइस्टीन चाचा ने पानीपत की लड़ाई को भी मात देकर "बागपत की लड़ाई"🤼 का जो आविष्कार किया है उसके चर्चे तो बर्लिन तक हो रहें हैं ।

आंइस्टीन चाचा ने बागपत की लड़ाई में जिन शस्त्रों🦯 का प्रयोग किया हैं अब उन शस्त्रों की राष्ट्रीय कीमत बढ़ चुकी है सरकार को चाहिए कि अविलंब इन शस्त्रों को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखवाने की व्यवस्था करें ।😂😂😂


हमारे आंइस्टीन चाचा उर्फ हरिंदर सिंह ने बागपत की लड़ाई में जिन तरीकों से अपने प्रतिद्वंद्वीयों को धरती दिखाई है, उन तरीकों को अपनाकर ओलम्पिक में कोई खेल बनना चाहिए ये हमारी राष्ट्रीय मांग है। और हां हम ओलम्पिक कमेटी को ये भी बताना चाहते हैं कि यदि हमारी मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो हर शहर में बागपत की लड़ाई की भांति डंडों,बैलनो, चिमटों,गैस के लाइटरो  से लड़ाई लड़ी जाएगी और ओलम्पिक कमेटी को यह दिखाया जाएगा कि आप बागपत की लड़ाई को ओलम्पिक में स्थान नहीं दोगे तो जहां जहां ओलम्पिक खेलों का आयोजन होगा हम वहां वहां बागपत करेंगें ।


हमारें मासूम आंइस्टीन चाचा ने बागपत को बर्लिन तक जो पहचान दिलाई हैं उसे देखते हुए जिस स्थान पर बागपत की लड़ाई लड़ी गई है उस स्थान को भी सरकार को पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित करना चाहिए ताकि देश के भावी बच्चों को बागपत की लड़ाई में आंइस्टीन चाचा के जो बाल बलिदान हुए हैं उनका महत्व बताया जा सकें और जो बच्चें आंइस्टीन चाचा के नक्शे कदम पर चलना चाहते हैं उन्हें बागपत की लड़ाई की भांति लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिल सकें ।



बर्लिन के लोग आंइस्टीन को अपने देश का बताकर गोरान्वित महसूस करते हैं अब बागपत के लोग भी ये सीना ठोककर बोल सकते हैं रोड़ पर नागिन डांस🐍 🤸🏊की तरह नाचकर प्रतिद्वंद्वीयों पर वार करनें वाला जिन्दा आंइस्टीन चाचा हमारे पास है। 


आंइस्टीन चाचा की नागिन डांस करते हुए प्रतिद्धिंयों पर हमला करने वाली बड़ी सी प्रतिमा देश विदेश के हर चौराहों पर स्थापित करवाना देश की हर पार्टी का राष्ट्रीय धर्म हैं ।और देश की हर पार्टी को अविलंब इस पुनित कार्य क लिए संसद में बिल पास करवाना चाहिए ।


अंत में एक बात और कहना चाहता हूं  आंइस्टीन चाचा चाट 🧆🧆🧆के लिए बागपत की लड़ाई कर सकते हैं तो अब ये सोच लो कहीं मोर्चें पर तैनात हो गये तो ...... समझने वाले को इशारा काफी हैं । 







20 फ़र॰ 2021

आयुर्वेद चिकित्सा में नमक के फायदे और नुकसान

आयुर्वेद चिकित्सा में नमक के फायदे और नुकसान

लेखक : डाक्टर पी.के.व्यास
         B.A.M.S.आयुर्वेद रत्न

नमक का नाम आते ही हमारे मन-मस्तिष्क में नमक के फायदे के बारें में विचार तैरने लगते हैं। यदि भोजन में नमक नहीं हो तो भोजन बेस्वाद और अस्वास्थ्यकर हो जाता है । हमारे देश की बहुत बड़ी आबादी नमक के फायदे के बारें में अनजान हैं, तो आईये जानतें हैं प्राचीन आयुर्वेद विज्ञानियों के अनुसार विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे

नमक के फायदे
नमक के फायदे


सेन्धा नमक के फायदे

नमक के फायदे
सेंधानमक


आयुर्वेद ग्रंथों में सेन्धा नमक के बारे में लिखा है

रोचनंदीपनंह्रधंंचक्षुष्यमविदाहिच।त्रिदोषन्घंसमधुरंसैन्धवंलवणोत्तमम्।।


✓ सेंधानमक बहुत स्वादिष्ट होता है,यह भोजन के स्वाद को बढ़ाकर उसे रुचिकारक बना देता हैं ।

✓ सेंधानमक खानें से भूख खुलकर लगती हैं।

✓ भोजन के बाद सेंधानमक खानें से भोजन तुरंत पच जाता हैं ।

✓ सेंधानमक ह्रदयरोग में बहुत लाभदायक होता है। यदि टैकीकार्डिया है तो सेंधानमक भोजन में शामिल करें बहुत लाभ मिलेगा ।

✓ सेंधानमक ह्रदयरोग से बचाता है , इसके सेवन से HDL कोलेस्ट्रॉल,LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड संतुलित रहता है ।

✓ सेंधानमक सेवन करने से आंखों का स्वास्थ उत्तम बना रहता है । नियमित सेंधानमक का सेवन करने से मोतियाबिंद नहीं होता है। यदि फलों पर सेंधानमक डालकर नियमित अंतराल पर सेवन किया जाए तो आंखों का लेंस बढ़ती उम्र के साथ कठोर नहीं होता है।

✓ सेंधानमक खानें से पेट में गैस, एसिडिटी, पेट दर्द की समस्या नहीं होती हैं । और भोजन का अच्छे से पाचन हो जाता है।

✓ सेंधानमक जोड़ों के दर्द, माइग्रेन का दर्द, गठिया और पसली के दर्द में अतिशीघ्र फ़ायदा देता है । इसके लिए सेंधानमक 25 प्रतिशत और बालू रेत 75 प्रतिशत को साथ मिलाकर एक पोटली बना लें और सुबह-शाम इस पोटली को तवे पर गर्म कर प्रभावित भाग की सिकाई करें ।

✓ एक चम्मच सेंधानमक और 250 मिलीलीटर सरसों का तेल मिलाकर गर्म करले इस तेल की मालिश छाती पर करने से निमोनिया, अस्थमा में राहत मिलती है और फेफड़े मजबूत बनते हैं ।

✓ नियमित रूप से सेंधानमक का सेवन करने से मोटापा नहीं होता है ।

✓ शरीर में खुजली, फोड़े फुन्सी हो तो सेंधानमक बहुत लाभदायक होता हैं। इसके लिए सेंधानमक और सरसों तेल मिलाकर प्रभावित भाग पर लगा भी सकते हैं और सेंधानमक भोजन के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं ।

✓ आयुर्वेद मतानुसार सेंधानमक मधुर या मीठा होता हैं , इसका सेवन करने वाला व्यक्ति अधिक मेहनत करने पर भी थकता नहीं है ।

✓ सेंधानमक और निम्बू पानी में मिलाकर पीने से पथरी गल जाती हैं ।

✓ सेंधानमक को पोटली में बांधकर तवे पर गर्म करके नाक के आसपास सिकाई करने से साइनस में आराम मिलता हैं।


✓ जिन लोगों की नाक से सूंघने की क्षमता खत्म हो गई है वे आधा सैंधा नमक और आधा अजवाइन मिलाकर पोटली बना लें और इसे नाक से सूंघे। 


समुद्री नमक के फायदे

सामुद्रकंसमधुरंसतिक्तंकटुपांशुजम्।रोचनंलवणंसर्वंपाकिस्नंस्यनिलापहम्।।


✓ समुद्री नमक भी सेंधानमक के समान भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला होता हैं । 

✓ समुद्री नमक के सेवन करने से शरीर की वायु बाहर निकल जाती हैं अर्थात समुद्री नमक वात के प्रभाव को कम करता हैं ।

 ✓समुद्री नमक का  सेवन करने शरीर का रक्तचाप बढ़ता है ।

✓ समुद्री नमक शरीर की शुद्धि करने का काम करता है ,पंचकर्म चिकित्सा में इसके माध्यम से वमन (vomiting) कराया जाता हैं ।

✓ यह नमक तीखा होता हैं जिससे शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी शीघ्रता से बाहर निकल जाता हैं। यदि शरीर में सूजन हो तो समुद्री नमक का सेवन करवाने से शरीर का सूजन कम हो जाता हैं ।

✓ समुद्री नमक चोंट,मोंच और मांसपेशियों को ठीक करता हैं। यदि समुद्री नमक को पोटली में बांध कर गर्म कर लें और इसे प्रभावित भाग की सिकाई करें तो तुरंत आराम मिलता है ।

✓ समुद्री नमक में सभी आवश्यक खनिज तत्व जैसे सोडियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम,आदि प्रचुरता से मिलते हैं जिससे यह बढ़ते बच्चों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता हैं ।

✓ समुद्री नमक के साथ शक्कर मिलाकर पीनें से यह शरीर में पानी की पूर्ति करता हैं ।

✓ समुद्री नमक की चिकित्सकीय मात्रा कैंसर, हाइपोथायरायडिज्म,त्वचा की समस्याओं जैसे खुजली, सफेद दाग आदि से तुरंत ही राहत प्रदान करती हैं ।

✓ समुद्री नमक शरीर की मेटाबॉलिज्म को सही रखता है ।

✓ समुद्री नमक का संतुलित इस्तेमाल ग्रंथियों से हार्मोन का सही स्त्रावण करवाता है। जिससे शरीर में हार्मोन असंतुलन नहीं होता हैं ।

संचर नमक के फायदे


सौक्ष्म्यादौष्ण्याल्घुत्वाच्चसौगन्ध्याच्चरुचिप्रदम।सौवर्च्चलंविबन्धन्घंहघमुद्धारशोधित।।


✓ संचर नमक प्रकृति से गर्म होता हैं जिससे यह शीत प्रकृति के लोगों के लिए लाभदायक है।

✓ मोटापा कम करने के लिए संचर नमक का सेवन करना चाहिए ।

✓ जिन लोगों का पेट सुबह पूरी तरह से साफ नहीं होता हैं उन्हें रात को सोते समय संचर नमक से बना भोजन करना चाहिए ।

✓ संचर नमक से बना भोजन करने से पेट का भारीपन समाप्त होता हैं, यदि भारी भोजन के साथ संचर नमक का सेवन किया जाए तो भोजन का भारीपन समाप्त हो जाता हैं ।

✓ संचर नमक ह्रदय की कार्यप्रणाली को सुधारकर धड़कन नियमित रखता है ।

✓ संचर नमक बहुत ही सूक्ष्म होता हैं जिससे यह शरीर द्वारा तुरंत अवशोषित हो जाता हैं ।

✓ संचर नमक भोजन के स्वाद को उत्तम बनाता हैं ।

✓ जिन लोगों का साइनस बढ़ जाता है उन्हें संचय नमक की पोटली बनाकर नाक के आसपास के भागों की सिकांई करनी चाहिए।

विड नमक के फायदे


तैक्ष्ण्यादौष्ण्याद्धयवायित्वाद्धीपनंशूलनाशनम्।ऊर्द्धच्जाधश्चवातानामानुलोम्यकरंविडम्।


• विड नमक भूख बढ़ाकर भोजन का पाचन शीघ्रता से करने में मदद करता हैं ।

• विड नमक मिले गर्म पानी को पांव पर डालने से पांव दर्द में आराम मिलता हैं और थकावट दूर होती हैं ।

• विड नमक एसिडिटी,पेटदर्द की समस्या में आराम देता है ।

• विड नमक भोजन के साथ मिलाकर खाने से सिरदर्द, कमरदर्द,पसली का दर्द आदि में आराम मिलता हैं ।


काला नमक के फायदे


सतिक्तकटुसक्षारंतीक्ष्णमुत्क्लेदिचौद्भिदम्।नकाललवणेगन्ध:सौवर्च्चलगुणाश्चते।।


 

• काला नमक शरीर को बल प्रदान कर मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाता हैं ।

• काला नमक फेफड़ों के लिए लाभदायक होता हैं इसके सेवन से फेफड़ों में जमा बलगम बाहर निकल जाता हैं ।

• काला नमक लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर पीलिया, हेपेटाइटिस,आदि से सुरक्षा प्रदान करता हैं ।

• काला नमक स्वादिष्ट और भोजन की पोष्टिकता को बढ़ाता है ।

• काला नमक शरीर में रक्त संचार को व्यवस्थित और नियमित रखता है ।

• काला नमक शरीर से अतिरिक्त वसा की मात्रा बाहर निकाल देता है ।

• काला नमक दिमाग की नसों को मजबूत बनाकर तनाव और अनिद्रा से बचाता है।


उद्भिद नमक के फायदे


• उद्भिद या खारा नमक कड़ुआ होता हैं जिसके कारण यह शरीर और रक्त की अशुद्धि बाहर निकाल देता है ।

• खारा नमक कैल्सियम की अधिकता वाला होकर हड्डीयों के लिए लाभदायक होता हैं । इसके सेवन से बच्चों की लम्बाई बढ़ती है ।


ज्यादा नमक खाने के नुकसान


एक तरफ नमक खाने के बहुत से फायदे वहीं दूसरी ओर अधिक नमक खाने से स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानी पैदा हो सकती है जैसे

• अधिक नमक उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है।

• भोजन में अधिक नमक का इस्तेमाल मल्टीपल स्क्लेरोसिस नामक बीमारी का कारण बन सकता है, जिससे एकाग्रता, याददाश्त और चलने में परेशानी पैदा हो सकती है।

• अमेरिका की जार्जिया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार नमक का अधिक इस्तेमाल शरीर की कोशिकाओं को जल्दी जल्दी खत्म करता है जिससे मनुष्य समय से पहले बुढ़ा हो जाता है।

• हमारें शरीर में मौजूद अधिक नमक किडनी द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता हैं किन्तु जरुरत से ज्यादा नमक किडनी की कार्यप्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे किडनी फेलियर होने की संभावना बढ़ जाती हैं।




[नोट::नमक का चिकित्सा के रुप में उपयोग वैद्यकीय परामर्श के बिना नहीं करें ]


० लहसुन के फायदे और नुकसान


 

18 फ़र॰ 2021

14 औषधीय गुण थूहर के

14 औषधीय गुण थूहर केे


थूहर आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत महत्व का पौधा है,इसका पौधा दस फ़ीट तक ऊंचा होता है । थूहर में लगने वाली लम्बी लम्बी डंडे के समान होती हैं ,जिन पर तीखे कांटे निकले रहते हैं ।

थूहर के पत्ते 6 इंच तक लम्बें और ढाई इंच तक चोडे होते हैं । थूहर का कोई भी भाग तोड़ने पर सफेद दूध निकलता है

14 औषधीय गुण थूहर के
थूहर


थूहर का संस्कृत नाम 

थूहर को संस्कृत में स्नूही,सुधा,समन्त दुग्धा,वज्रा नाम से जाना जाता हैं ।

थूहर का लेकिन नाम

थूहर को लेटिन भाषा में fuphorbia nerifolia (यूफोर्बिया नेरिफोलिया) के नाम से जानते हैं ।

थूहर का हिन्दी नाम

थूहर को हिन्दी में सेहुंड,कांटा थूहर, थूहर छोटा के नाम से जाना जाता हैं ।

आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति

आयुर्वेद मतानुसार थूहर गर्म, कड़वी,भारी,होती हैं, थूहर का दूध भी गर्म,तीखा और रेचक होता है ।

थूहर के औषधीय गुण या थूहर के फायदे


1.दस्त लगानें में

यदि किसी को बहुत दिनों से दस्त नहीं हो रहें हैं तो थूहर के दूध में हरड़,पीपल और निशोंध पीसकर चटा दें , बहुत तेज दस्त लगेंगे ‌।

2.बिच्छू का विष उतारने में 

थूहर की जड़ को कालीमिर्च के साथ पीसकर बिच्छू काटने वाली जगह पर लगाने से बिच्छू का जहर उतर जाता हैं। 

3.मस्सों को हटाने में

शरीर पर मौजूद मस्से , गांठें और फोड़े फुन्सी पर थूहर का दूध लगाने से मस्से, फोड़े फुन्सी मिट जाते हैं ।

4.खांसी में थूहर के पत्तों का उपयोग

थूहर के दो पत्तों को आग पर गर्म कर लें, इसके पश्चात इन पत्तों का रस निकालकर इसमें थोड़ा सा सैन्धा नमक मिलाकर पीएं।  खांसी  बंद हो जाती हैं ।

5.अस्थमा में थूहर के औषधीय फायदे

थूहर के दूध को ,अदरक रस,हल्दी,शहद और कालीमिर्च के साथ मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम खाने से अस्थमा में बहुत आराम मिलता हैं।

6.कानदर्द में थूहर के फायदे

थूहर के पत्तों का रस निकालकर एक दो बूंद कान में डालने से कानदर्द बंद हो जाता हैं ।

7.पेटदर्द में

थूहर के दो तीन पत्तों का रस निकालकर , इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस मिला लें,पेटदर्द में दो तीन बार सेवन करें । आराम मिलेगा।

8.आफारा में थूहर के फायदे

थूहर के दूध में थोड़ी सी अजवाइन मिलाकर पीस लें, यदि आफारा (पेट फूलने में) हो गया है तो आधा चम्मच मिश्रण खिलाएं बहुत आराम मिलता हैं ।

9.सूजन उतारने में

थूहर के पत्तें और थूहर का दूध गर्म कर सूजन वाले स्थान पर लगाकर कुछ देर गर्म पानी से सेंकने से बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं।

10.बेहोशी में थूहर के फायदे

यदि व्यक्ति बेहोश हो जाता हैं तो थूहर का दूध एक चम्मच शहद में मिलाकर बेहोश व्यक्ति की जीभ पर डाल दें,ऐसा करने से बेहोश व्यक्ति होश में आने लगेगा ।

11.गेंग्रीन में थूहर के फायदे

थूहर के तने का गुदा , अदरक रस,और हल्दी समान मात्रा में मिलाकर एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को खिलाएं मधुमेह के कारण हुआ गेंग्रीन ठीक होता है ।

12.आंखो के रोग

थूहर का दूध घी में मिलाकर रूई के फुए की सहायता से आंखों पर रखें,ऐसा करने से आंखों से संबंधित परेशान जैसे आंखों का दर्द, आंखों का सुखापन, आंखों से कम दिखाई देना आदि में आराम मिलता हैं ।

13.वजन घटाने में


थूहर का दूध तना और पत्ता बहुत उष्ण होता है। इसके सेवन से शरीर की चर्बी बहुत तेजी से पिघलती है। 

थूहर के दूध को शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक चम्मच चाटने से वजन बहुत तेजी से कम होता है ।

इसी प्रकार थूहर के तने का चूर्ण एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से वजन कम होता है ।

14.अर्श में

अर्श में यदि गुदा मार्ग से मस्से लटक रहें हैं तो थूहर का दूध इन मस्सों पर विशेषज्ञ की देखरेख में लगाएं,मस्से बहुत आसानी से निकल जाएंगे। 


थूहर के नुक़सान

थूहर का पेड़, दूध,तना बहुत ही गर्म प्रकृति के होते हैं,इसकी अधिक मात्रा सेवन करने से बहुत तेज दस्त लग सकतें हैं।

इसी प्रकार इसके सेवन से पेट में मरोड़,उल्टी, चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

[नोट :- थूहर के सेवन से पूर्व वैद्यकीय परामर्श  अवश्य पर्याप्त करें]


० नीम के औषधीय गुण

 

० लहसुन के औषधीय गुण









  


11 फ़र॰ 2021

चरक संहिता, के अनुसार मूली खाने के फायदे

चरक संहिता के अनुसार 'मूली खाने के फायदेे'


आयुर्वेद में मूली त्रिदोषनाशक होनें के कारण हर बीमारी में उपयोगी हैं तो आईयें जानतें हैं आयुर्वेद के महान ग्रंथ"चरक संहिता के अनुसार मूली खाने के फायदे" के अनुसार मूली खाने के फायदेे निम्न हैंं 


बालंदोषहरंवृद्धंत्रिदोषंमारूतापहम्।स्निग्धसिद्धंविशुष्कन्तुमूलकंफवातजित्।।



अर्थात मूली जब कच्ची होती हैं तो यह त्रिदोषनाशक होती हैं,पकी हुई मूली त्रिदोषकारक होती हैं। तेल,घी से सिद्ध की गई मूली और मूली के पत्ते वातनाशक होतें हैं।इसी प्रकार सूखी हुई मूली वात,कफ को समाप्त कर देती हैं ।

 

मूली स्वाद में कषाय,चरपरी होती हैं । मूली में आयरन,कैल्सियम, मैग्निशियम, सोडियम, विटामिन ए ,गंधक,क्लोरीन आदि तत्व बहुत प्रचुरता में पाए जातें हैं ।


आईयें जानतें हैं मूली खानें के  फायदे के बारें में

मूली खाने के फायदे


• कच्ची मूली सलाद के रूप में यदि सुबह शाम खाई जाए तो यह पेट में मौजूद रूकी हुई हानिकारक वायु को बाहर निकाल देती हैं,लेकिन आजकल लोग मूली मात्र इसीलिये नही खाते की यह पेट में गैस बनाती हैं। वास्तव में यह धारणा सही नहीं हैं ।


#मूलीखानेकेफायदे

• पेट में एसिडिटी की समस्या हैं तो मूली का रस एक चम्मच और निम्बू रस एक चम्मच मिलाकर पीनें से बहुत आराम मिलता हैं ।



• कब्ज होनें पर मूली का सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता हैं,इसके लिए मूली का सलाद या मूली के पत्तों की बनी सब्जी का सेवन करना चाहिए ।


• पेट में कीड़े हो गये हो तो मूली का रस रात को सोते वक्त पीलानें से पेट के कीड़े निकल जाते हैं ।



• जिन लोगों को पीलिया और फेटी लिवर की समस्या हो उन्हें मूली के पत्तों को पानी में उबालकर पीना चाहिए इससे पीलिया रोग बहुत जल्दी समाप्त हो जाता हैं ।


• मूली का रस मूत्र संबधी रोगों में आशातीत लाभ प्रदान करता हैं, यदि पैशाब रूक रही हो,मूत्रमार्ग में जलन हो तो मूली का एक चम्मच रस पानी के साथ मिलाकर पी ले बहुत आराम मिलेगा ।


• गले में खराश होनें पर मूली के बीज बहुत फायदा पहुंचातें हैं,इसके लिए 10 ग्राम मूली के बीजों को पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में तब तक उबाले जब तक की पानी आधा नही रह जाए इस पानी से दिन में दो तीन बार गरारें करें बहुत फायदा मिलेगा ।


• पकी हुई मूली खोखली और वजन में हल्की हो जाती हैं,इस मूली में गर्मी को सोखने की अद्भुत क्षमता मौजूद रहती हैं, यदि इस मूली को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाया जाए तो जलन बहुत जल्दी मिट जाती हैं।


• जोड़ो में दर्द होनें पर मूली का सेवन बहुत फायदा पहुंचाता हैं, इसके लिए मूली के पत्तों की सब्जी या मूली का सलाद खाना चाहियें ।


• मूली स्त्री और पुरूष दोनों की सेक्स पावर बढ़ाती हैं,यदि सेक्स पावर कम हो गई हो,तो मूली में गाय का घी एक चम्मच मिलाकर खाना चाहियें ।


• शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ गई हो तो मूली के पत्तें सरसों के तेल में गर्म करके सूजन वाली जगह पर रात को सोनें से पहले बाँध दें,सूजन बहुत जल्दी कम हो जायेगा ।


• मूली का रस यदि बालों में लगाया जाए तो रूसी और जुंए नहीं होगी ।



• मूली का रस कानदर्द ,बहरेपन में बहुत लाभदायक होता हैं,इसके लिए मूली के रस को गर्म कर दो तीन बूंद कान में डालें ।


• मूली के पत्तों को सरसो के तेल में तब तक गर्म करें जब तक की पत्तें कुछ कुछ काले न हो जाए ,इस तेल की दो बूंद कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता हैं। 


• यदि खाँसी बहुत तेज हो तो एक चम्मच मूली का रस गर्म कर थोडी सी शहद मिलाकर लें ।


• अस्थमा के दौरो  में मूली का रस एक चम्मच, एक चम्मच अदरक रस और आधा चम्मच हल्दी पावडर मिलाकर लें ।


• मूली का क्षार प्रतिदिन आधा चम्मच सुबह शाम लेनें से पथरी बाहर निकल जाती हैं ।



• मुंह में छाले हो गये हो तो मूली के पत्तों का रस एक चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर छालो पर लगाये बहुत शीघ्रता से छाले ठीक हो जातें हैं ।


• मूली में मौजूद विटामीन ए आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं,यह आँखों के रेटिना को स्वस्थ रखता हैं,जिससे बुढापे में भी आँखें खराब नही होती हैं ।



• मूली में मौजूद सोडियम मांसपेशियों को लचीला बनाता हैं जिससे खेल के दौरान चोंट की संभावना नहीं रहती हैं ।


• मूली में मौजूद कैल्सियम हड्डीयों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत मददगार होता हैं।यदि मूली के पत्तों की सब्जी,मूली का अचार और मूली का सलाद नियमित रूप से खातें रहें तो हड्डीयों से संबधित समस्याँए नहीं होगी ।


• मूली त्वचा से संबधित कई समस्याओं में लाभ प्रदान करती हैं ,इसमें मौजूद गंधक खुजली,कील मुहांसे आदि को ठीक करता हैं।



• मूली बार बार गर्भपात की समस्या और गर्भधारण में बहुत लाभकारी होती हैं, यदि बार बार गर्भपात होता हैं तो मूली के पत्तों को पानी में उबालकर पानी पीना चाहिए। 

इसी प्रकार यदि गर्भधारण में समस्या आ रही हैं तो रात को सोने से पूर्व कच्ची मूली का सेवन करें ।


• पकी हुई मूली को सुखाकर पावड़र बना ले यह पावड़र आधा आधा चम्मच सुबह शाम लें ,मोटापा कम करनें में मदद मिलेगी ।


• यदि फेफडों में सूजन हो तो मूली के बीजों को पीसकर पानी के साथ खानें से फेफडों की सूजन दूर हो जाती हैं।


• यदि पेटदर्द हो तो एक चम्मच पकी मूली का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेनें से बहुत आराम मिलता हैं ।


• मूली के बीज सफेद दाग में बहुत फायदेमंद होतें हैं,इसके लिए मूली के बीजों को पीसकर शहद के साथ सेवन करें ।


• सिरदर्द होनें पर मूली के पत्तों का रस सेवन करने पर बहुत आराम मिलता हैं,यदि सिरदर्द बहुत दवाई लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा हो तो मूली के पत्तों का रस एक चम्मच और कच्ची हल्दी का रस एक चम्मच मिलाकर लें।



• मूली में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं । अत:मूली का नियमित इस्तेमाल करते रहने से व्यक्ति जल्दी जल्दी बीमार नहीं होता हैं ।



मूली खाने के नुकसान


• मूली खानें के बाद कई लोगों को बहुत अधिक गैस बनने लगती हैं अत:ऐसे लोग मूली खानें से पूर्व वैधकीय परामर्श अवश्य लें ।


• मूली कई लोगों को एलर्जी पैदा करती हैं अत:जिन लोगों को मूली से एलर्जी हो वे मूली न खांए ।



० नमक के फायदे










यूनानी चिकित्सा पद्धति एक परिचय [Unani ]

 यूनानी चिकित्सा पद्धति एक परिचय


यूनानी चिकित्सा पद्धति रोग निदान की एक विस्तृत और व्यवस्थित पद्धति हैं । इस पद्धति के जनक हिप्पोक्रेट्स हैं । 


हिप्पोक्रेट्स ने 460 से 377 ईसा पूर्व के बीच मिश्र,इराक तुर्की के मध्य यूनानी चिकित्सा का आविष्कार किया। इसके बाद 129 से 200 ईसा पूर्व के बीच हकीम जालीनूस ने इसे लोकप्रिय बनाया । इसके बाद यूनानी चिकित्सा शास्त्री जाबिर- इब- हयात और हकीम - इब - सिने ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया ।

यूनानी चिकित्सा
यूनानी चिकित्सा



आधुनिक भारत में यूनानी चिकित्सा का इतिहास


भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति की शुरूआत 10 वी शताब्दी से मानी जाती हैं किंतु भारत में यूनानी चिकित्सा (Unani) पद्धति को पुनर्जीवित कर आधुनिक रूप देनें का श्रेय हकीम अजमल खान को जाता हैैं । हकीम अजमल खान के प्रयासो से ही दिल्ली में यूनानी चिकित्सा में पढा़ई हेतू "तिब्बतिया कालेज" की स्थापना हुई ।

हकीम अजमल खान के प्रयासो को मान्यता देते हुये भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस 11 फरवरी को 'राष्ट्रीय यूनानी दिवस'के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया जिसकी शुरूआत सन् 2016 से हुई थी ।

वर्तमान में हैदराबाद में स्थित 'Central Research institute of Unani Medicine (C.R.I.U.M) जो कि भारत सरकार केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन हैं।यूनानी चिकित्सा में शोध को बढ़ावा देने वाला शीर्षस्थ संस्थान हैं ।


यूनानी चिकित्सा पद्धति संसार की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति में शुमार की जाती हैं,जिसमें रोग निवारण, स्वास्थ्य प्रोत्साहन के साथ स्वास्थ्य पुनर्स्थापना को महत्व दिया जाता हैं ।

यूनानी चिकित्सा पद्धति का आधारभूत ढाँचा गहरे दार्शनिक अंतदृष्टि तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित हैं । जिसमें चार तत्व ( अरकान) आग,हवा,मिट्टी तथा पानी ,इन तत्वों की कैफियत (Qualities) ,गर्म,सर्द(ठंडा),तर(गीला),तथा ख़ुश्क (सूखा) तथा अखलाक (देह द्रव),दम (रक्त),बलगम(कफ),सूरा (पीला पित्त)तथा सौदा (काला पित्त) के सिद्धांत सम्मिलित हैं ।इनके असंतुलित होनें से बीमारीयाँ पैदा होती हैं ।

जीवित तथा निर्जीव में अरकान तथा उनकी कैफियत के एक विशेष अनुपात में सम्मिलित होनें से जो कैफियत पैदा होती हैं,उसे मिजाज (Temperament) कहते हैं ।

इंसानी मिजाज को देह द्रव से सम्बद्ध किया गया हैं,जैसे कमली,सफरावी,सौदावी,तथा बलगामी जिनका सम्बंध आहार,औषधि तथा वातावरण आदि से जोड़ा जा सकता हैं ।


यूनानी चिकित्सा पद्धति की विशेषता


यूनानी चिकित्सा पद्धति की महत्वपूर्ण विशेषता हैं,इसकी समग्र दृष्टि (Holistic approach) प्रकृति या मिजाज को ध्यान में रखकर इलाज करना ।

यूनानी औषधियाँ आयुर्वेदिक औषधियों की भाँति शरीर पर बिना किसी side effects के काम करती हैं । 

पुरानी और जटिल बीमारीयों के उपचार और गुणवत्तापूर्ण जीवन [Healthylifestyle] के लक्ष्य को हासिल करनें मे यूनानी चिकित्सा पद्धति बहुत उपयोगी साबित हुई हैं । उदाहरण के लिए मानसिक विकार,पाचन संस्थान के रोग,त्वचा संबधित बीमारीयों,रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी,कैंसर,एड्स,ट्यूबरक्लोसिस आदि ।


यूनानी चिकित्सा पद्धति के सिद्धांत

(अ)उसूले इलाज (Principal of treatment)


1.इजाला - ए-सबब  - कारण को दूर करना

2.तादिले मिजाज - स्वभाव की विकृति हटाना

3.तनकिया -  विषाक्त पदार्थ शरीर से निकालना  

4.इलाज बिल ज़िद - विपरित स्वभाव से उपचार करना


5.इलाज बिल यद - शल्यक्रिया (surgery)

6.इलाज -ए-नफसानिया - मानसिक रोगों का इलाज

7.इलाज बिल दवा (Pharmcotherapay)

8.इलाज बिल गिजा (Dieatotherapay)


(ब)इलाज - बिल -तदबीर (Regimenal Therapy)


1.मालिश (message)

2.व्यायाम (Exercise)

3.हमाम (Dedicated Bath)

4.हिजामा (Cupping)

5.जोंक लगाना (Leeching)

6.फसद (Venesection)

7.इदरार -ए-बोल (Diuresis)

8.इसहाल (Purgation)

9.कै (Emesis)

10.तारीक (Diaphoresis)

11.तैय (Cauterization)

(स).रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी



(द).नाडी परीक्षण (Examination of pulse)




यूनानी मेडिसिन के प्रकार



1.हब (Tablet)


औषधीय वनस्पति, पदार्थ आदि को पीसकर उसमें शहद,गोंद और पानी मिलाकर गोली बनाई जाती हैं।चपटी गोली को कुर्स के नाम से जबकि गोल को हब कहते हैं ।


2.कुश्ता (भस्म)


धातु पदार्थों को विशेष विधि से आग में जलाकर राख बना लेते हैं इसके बाद इसमें औषधी मिलाकर रोगी को देते हैं ।


3.लऊफ (चटनी)


गीली और सूखी जड़ी बूटियों को पीसकर चटनी बनाई जाती हैं,जिसे शहद मिलाकर मीठा किया जाता हैं ।



4.सूफूफ (पावड़र)


औषधियों को पीसकर पावड़र बनाया जाता हैं ।


5.जोशांदा (काढ़ा)


औषधियों को पानी के साथ उबालकर काढ़ा बनाया जाता हैं,जिसे जोशांदा कहते हैं ।


6.रोगन (तेल)


विभिन्न प्रकार के तेलों का उपयोग बीमारीयों के उपचार में किया जाता हैं,जिसे रोगन कहते हैं ।



विभिन्न बीमारीयों के लिए यूनानी मेडिसिन लिस्ट 



1.मधुमेह (Diabetes) के लिए यूनानी मेडिसिन लिस्ट


1.कुर्ते जियाबेतिस

2.सफूफ दारचीनी

3.कुर्से तबासीर

4.अर्क चिरायता

5.इलाज - बिल - तिजा

6.रिया जक



2.उच्च रक्तचाप (High blood pressure) के लिए यूनानी मेडिसिन लिस्ट


1.कुर्स दवाउशिफा या इक्सीरे शिफा

2.तिरियाक फिशार

3.असरोफिन

4.हब्बे असरोल

5.इलाज बिल तिजा

6.शर्बते हजूरी,मोतदिल या बनादीकुल बजूर

7.इलाज -बिल-तदवीर [हिजामत,फसाद,इरसाले अलक,रिया जत]



3.जोड़ो के दर्द के लिए यूनानी मेडिसिन लिस्ट


1.हब्बा सूरंजान

2.हब्बे असगंद

3.माजून जोगराज गुग्गुल

4.माजून चोबचीनी

5.रोगन बाबूना

6.रोगन सुर्ख

7.जिमोदे मुहल्लिल

8.हब्बे चोबचीनी

9.हब्बे अजराकी

10.रोगन कुचला

11.इलाज-ए-तदबीर [जिहाद,तिला,नूतन,इंकेबाब,दलक,हिजामत]

12.जिमादे मुहल्लिल



4.अर्श रोग [Piles]


1.हब्बे बवासीर खूनी

2.हब्बे बवासीर बादी

3.इतरीफल मुकुल

4.हब्बे रसोत

5.मरहम साइदा तोब नीम वाला (बाह्य प्रयोगार्थ)

6.माजून खब्सुल हदीदी

7.हमदूराइड कैप्सूल

8.हमदूराइड मरहम (बाह्य प्रयोगार्थ)

9.इलाज बिल गिता

10.रोगन बवासीर (बाह्य प्रयोगार्थ)


5.रक्ताल्पता (Anemia)


1.कुर्स कुश्ता खबसुल हदीश

2.शर्बत फौलाद

3.कुर्ते कुश्ता फौलाद

4.इक्सीरे खास

5.जवारिश आमला सादा

6.माजून खब्सुल हदीश


6.बुखार के लिए यूनानी मेडिसिन


1.जुशांदा 

2.लऊक सपिंस्ता

3.इत्रीफल किशनीज

4.शर्बत बनफशा

5.इत्रीफल उस्तूखुद्दस

6.रोगन गुल (बाह्य प्रयोगार्थ)

7.लऊक नजीर


7.मलेरिया नियंत्रण के लिए पूर्व वितरण हेतू यूनानी मेडिसिन


1.कुर्स असफ़र

2.कुर्स अबयज

3.कुर्स काफूर

4.लरजीन

5.अर्क चिरायता

6.मलेरिया


8.डेंगू नियंत्रण के लिए पूर्व वितरण हेतू यूनानी मेडिसिन


1.कुर्स असफ़र

2.अर्क चिरायता

3.हब्बे करंजवा

4.हब्बे मुबारक

5.शर्बत उन्नाव

6.शर्बत मुरक्कब मुसफी खून

7.दवाए मुसफ्फी


[जानकारी आयुष विभाग द्धारा प्रसारित विभिन्न स्त्रोत के माध्यम से ली गई हैं]














2 फ़र॰ 2021

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है

 प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है ?



प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना केन्द्रीय बजट 2021 में घोषित एक देशव्यापी स्वास्थ्य योजना हैं । जिसमें  अचानक पैदा होनें वाली वैश्विक महामारियों के उचित समय पर नियंत्रण करनें हेतू उपाय किये गये हैं ।


पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के लिए केन्द्रीय बजट 2021 में 64,180 करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं । जो अगले 6 सालों में 10 हजार करोड़ प्रतिवर्ष के मान से खर्च कियें जायेंगे ।

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना केन्द्रीय बजट 2021 में घोषित एक देशव्यापी स्वास्थ्य योजना हैं । जिसमें  अचानक पैदा होनें वाली वैश्विक महामारियों के उचित समय पर नियंत्रण करनें हेतू उपाय किये गये हैं ।




प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के उद्देश्य Aim of pm aatmnirbhar svasth bharat yojna



• इस योजना में पैदा होनें वाली बीमारीयों की निगरानी के लिए देश के सभी जिलों में Public health lab की स्थापना होगी और इन सभी को एकीकृत स्वास्थ सूचना प्रणाली से जोड़ा जायेगा ताकि बीमारी का रियल टाइम मानिटरिंग संभव हो सके ।



• गाँव से लेकर शहरों तक की स्वास्थ्य देखभाल करनें वाली संस्थाओ जैसें प्राथमिक, सामुदायिक ,जिला स्तरीय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से विकास किया जायेगा।



• इस योजना के माध्यम से देशभर में 15 आपातकालीन आपरेशन केन्द्रों [ Emergency operation Center] और 2 चलित अस्पतालों [Mobile Hospital] की स्थापना की जाएगी ।



• देश से बाहर से आनें वाली बीमारीयों पर नजर रखनें के लिए इस योजना में 32 एयरपोर्ट ,11 समुद्री बंदरगाह और सात सडकों की सीमाओं पर स्थित स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध करानें वाली संस्थाओ को उन्नत करनें के साथ 17 नई स्वास्थ्य देखभाल करनें वाली संस्थाओ को खोला जायेगा ।


• National Center for disease control की पाँच क्षेत्रीय ईकाईयाँ देश के विभिन्न भागों में खोली जायेगी और इसके 20 सर्विलांस सेंटर देश के महानगरों में खोले जांएगे ।


• National institute of virology पुणे की तरह के चार अन्य National institute of virology देश के अलग अलग भागों में प्रधानमत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से स्थापित किये जांएगें ।



• देश में 9 नए लेबोरेटरी स्थापित होंगे जो कि BSL- 3 मानक के होंगे ।


• विश्व स्वास्थ्य संगठन [W.H.O.] के दक्षिण एशिया क्षेत्र की जरूरतों की पूर्ति हेतू एक विश्वस्तरीय "National institute of One health"की स्थापना की जायेगी ।


• देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 17,788 और शहरी भागों में 11,024 नये हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर Health And wellness centers खोले जाँएगें ।


• देश के 602 जिलों और 12 केन्द्र स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित किये जांएगें ।


• देश के 11 राज्यों के सभी जिलों में Integrated public health laboratory और 3382 ब्लाक स्तरीय पब्लिक हेल्थ यूनिट स्थापित की जाएगी ।


भारत में स्वास्थ सुविधा 


भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बहुत अधिक आवश्यकता हैं क्योंकि हम आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के मामलें में दुनिया के 180 देशों में 145 वें स्थान पर हैं । भारत जैसें तेजी से विकसित होतें राष्ट्र के लिए यह स्थिति बहुत अच्छी नही हैं । 


भारत में स्वास्थ प्राथमिकता में शामिल हो इसके लिए हमें स्वास्थ सेवाओं में खर्च को जीडीपी के 10 प्रतिशत तक बढाना पढेगा जो कि अभी मात्र 2.5 प्रतिशत के आसपास हैं । दुनिया के विकसित देश जैसें अमेरिका,फ्रांस,, जर्मनी,रूस की बात करें तो अमेरिका में जीडीपी का कुल 17 प्रतिशत, फ्रांस में 11.2 प्रतिशत,जर्मनी में 11 प्रतिशत,रूस में 7.1 प्रतिशत खर्च किया जाता हैं ।


भारत स्वास्थ पर खर्च करनें के मामले में अपने पडोसी राष्ट्रों नेपाल,चीन और अफगानिस्तान से भी पिछे हैं । अफगानिस्तान अपनी जीडीपी का 8.2 प्रतिशत,चीन 5 प्रतिशत और नेपाल 5.8 प्रतिशत खर्च करता हैं ।


अभी हाल ही में ब्राजील ने कोरोनावायरस वैक्सीन के लिए हनुमान जी के संजीवनी बूटी लानें वाले चित्र के माध्यम से जो धन्यवाद दिया हैं वह भी स्वास्थ्य क्षेत्र में जीडीपी का 8.3 प्रतिशत खर्च कर में भारत से बहुत आगें है ।


देश में डाँक्टरों और नर्सों की कमी और उनको रोजगार  भी बहुत बडी चुनौती हैं सरकारी आंकडों के अनुसार देश में 14 लाख डाँक्टर और 20 लाख नर्सों की कमी हैं । 


W.H.O. के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डाँक्टर होना चाहिए जबकि वर्तमान में 10198 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध हैं ।


दूसरी और देश में तकरीबन आठ लाख आयुष चिकित्सक रजिस्टर्ड हैं किंतु इनमें से अधिकांश बेरोजगार हैं यदि इन चिकित्सको को प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में तैनात कर दिया जाए तो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता हैं । 


भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र मानव संसाधनों की अनेक विषमताओं से भी जूझ रहा हैं उदाहरण के लिए देश के अनेक भागों में नर्स और फार्मासिस्ट प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों  का वर्षों से सफल संचालन कर रहें हैं किंतु इनका क्षमता उन्नयन कर चिकित्सक बनानें जैसे कोई प्रावधान  स्वास्थ विभागों के पास नहीं हैं । इसके अभाव में इन्हें भी पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पातें फलस्वरूप ये लोग इन्ही पदों से सेवानिवृत्त हो जातें हैं ।



कोरोना जैसी महामारी ने यह संकेत दे दिया है कि हमें बीमारीयों की रोकथाम के लिए विश्व स्तरीय अस्पतालों के साथ मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि का भी काम भी करना है और यह आयुष चिकित्सा पद्धतियों जैसे योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी के बिना संभव नहीं हैं । 


यदि भारत  स्वास्थ क्षेत्र में विकसित होना चाहता हैं तो उसे  विकसित देशों का पिछलग्गू बनने की बजाय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुष [आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी,योग,नैचुरोपैथी, सेवा रिग्पा] में शोध के लिए ओर अधिक प्रयास करना होगा और इसके लिए देश के अलग अलग भागों में स्थित आयुष संस्थानों का सुदृढ़ीकरण करना होगा । क्योंकि आयुष चिकित्सा पद्धति वह  आरोग्य प्रदान कर सकती हैं जिसमें बीमारी होने का इलाज नहीं बल्कि बीमारी हो ही नहीं इस बात का सिद्धांत हैं ।


केन्द्रीय बजट 2021 में 2,23,846 करोड़ रूपये की धनराशि स्वास्थ्य सेंवाओं के लिए रखी गई हैं जो कि पूर्व के वर्षों में 94,452 करोड़ रूपये थी ,इस प्रकार देखा जाए तो यह राशि पूर्व में आँवटित राशि के मुकाबले 137 गुना अधिक हैं । इतनी अधिक बढोतरी कभी नहीं हुई थी,इससे यही अर्थ निकाला जा सकता हैं कि सरकार कोरोनावायरस के बाद ही सही ,पर स्वास्थ्य तंत्र के मजबूतीकरण के लिए गंभीर हुई हैं ।

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