सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

इन 10 कारणों से आंखों की पलकें फडकती हैं [Eyelid twitching]

हाल की पोस्ट

हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है

 हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं तो सावधान हो जाएं कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं है    आसपास,पास पड़ोस, परिवार में,समाज में आपने ऐसे कई लोगों को कहते सुना होगा कि डाक्टर बदल बदलकर थक गये है पर अचानक से हाथ पैर,सिर ठंडा होना बंद नहीं हो रहा हैं । पता नहीं कोंन सी बीमारी है जो पीछा ही नहीं छोड़ रहीं हैं । लम्बे समय तक बीमारी पीछा नहीं छोड़ती तो मनुष्य अवसाद, तनावग्रस्त होकर आत्महत्या करने की सोचने लगता हैं । वास्तव में हाथ पैरों तलवों सिर का ठंडा होना (cold hand,cold feet) किसी एक कारण से नहीं होता हैं इसके पीछे पहले से चली आ रही बीमारी या होनें वाली संभावित बीमारी मुख्य कारण होती हैं ,तो आईए जानते हैं हाथ पांव ठंडे रहने के कारणों के बारें में जिनसे बेवजह हाथ पांव ठंडे हो रहें हैं      हाथ पांव ठंडे रहने के कारण ::   मधुमेह हाथ पांव ठंडे सोनें का सबसे आम कारण मधुमेह हैं , मेडिसिन भाषा में इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता हैं। इस अवस्था में हाथ पैरों में के पंजों में ठंड लगती हैं किंतु हाथ से छूने पर उनमें गरमाहट लगती हैं । इसका कारण मधुमेह से नसों का क्षतिग्रस्त होना होता हैं । यदि लम्बें समय तक

औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा,Genda

  औषधीय गुण से भरपूर है गेंदा  गेंदा भारत की धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक आदि न जानें कितनी दिनचर्या में रचा बसा हुआ है,हर समारोह,रिती रिवाज, धार्मिक कार्य गेंदा फूल के बिना अधूरा है या यूं कह लो "बिन गेंदा सब सूना" गेंदा फूल बिना जाति धर्म,पंथ,सम्प्रदाय, में भेदभाव किए जन्म से लेकर श्मसान तक मनुष्य का साथ निभाता हैं ।  गुलाब फूलों का राजा है तो गेंदा फूल भी प्रधानमंत्री हैं । यदि गेंदा के औषधीय गुण की बात करें तो 3 से 4 फ़ीट तक बढ़ने वाला यह पौधा बहुत सी बीमारियों को जड़ मूल से समाप्त कर देता हैं ।  तो आईए जानते हैं गेंदा के औषधीय गुण के बारे में       गेंदा गेंदा का संस्कृत नाम पुष्पा,झंडु गेंदा का हिंदी प्रचलित नाम हजारी,गुल जाफरी,मखमली गेंदा का अंग्रेजी नाम Marigold  गेंदा का वैज्ञानिक नाम Tagetes  आजकल गेंदा फूल की 150 से ज्यादा प्रजाति प्रचलन में हैं किंतु हम यहां मूल देशी प्रजाति के औषधीय गुण की चर्चा करेंगें आयुर्वेद मतानुसार गेंदा की प्रकृति गेंदे की पत्ती,तना और जड़ तीखी, कड़वी, कसैली, इसका फल और फल मधुर होता हैं । गेंदा के औषधीय गुण बुखार में गेंदा के औषधी

बागपत के आंइस्टीन चाचा,Bagpat ke Einstein chacha

 बागपत के आंइस्टीन चाचा,Bagpat ke Einstein chacha तो भाई और बहनों, दुनिया क्या याद रखेगी अल्बर्ट आइंस्टीन को अब तो हमारें अपने बागपत ने भी दुनिया को आंइस्टीन दे दिया है,और हां हमारे आंइस्टीन चाचा पिछले दो-तीन दिनों में ही पैदा हुए हैं।😂 आंइस्टीन चाचा विडियो में हमारे आंइस्टीन चाचा ने पानीपत की लड़ाई को भी मात देकर "बागपत की लड़ाई"🤼 का जो आविष्कार किया है उसके चर्चे तो बर्लिन तक हो रहें हैं । आंइस्टीन चाचा ने बागपत की लड़ाई में जिन शस्त्रों🦯 का प्रयोग किया हैं अब उन शस्त्रों की राष्ट्रीय कीमत बढ़ चुकी है सरकार को चाहिए कि अविलंब इन शस्त्रों को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखवाने की व्यवस्था करें ।😂😂😂 हमारे आंइस्टीन चाचा उर्फ हरिंदर सिंह ने बागपत की लड़ाई में जिन तरीकों से अपने प्रतिद्वंद्वीयों को धरती दिखाई है, उन तरीकों को अपनाकर ओलम्पिक में कोई खेल बनना चाहिए ये हमारी राष्ट्रीय मांग है। और हां हम ओलम्पिक कमेटी को ये भी बताना चाहते हैं कि यदि हमारी मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो हर शहर में बागपत की लड़ाई की भांति डंडों,बैलनो, चिमटों,गैस के लाइटरो  से लड़ाई लड़ी

प्राचीन आयुर्वेद शास्त्र अनुसार विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे। Salt benifits in hindi according to ancient Ayurveda

प्राचीन आयुर्वेद शास्त्र अनुसार विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे नमक का नाम आते ही हमारे मन-मस्तिष्क में नमक के फायदे के बारें में विचार तैरने लगते हैं। यदि भोजन में नमक नहीं हो तो भोजन बेस्वाद और अस्वास्थ्यकर हो जाता है । हमारे देश की बहुत बड़ी आबादी नमक के फायदे के बारें में अनजान हैं, तो आईये जानतें हैं प्राचीन आयुर्वेद विज्ञानियों के अनुसार विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे नमक के फायदे सेन्धा नमक सेंधानमक आयुर्वेद ग्रंथों में सेन्धा नमक के बारे में लिखा है रोचनंदीपनंह्रधंंचक्षुष्यमविदाहिच।त्रिदोषन्घंसमधुरंसैन्धवंलवणोत्तमम्।। • सेंधानमक बहुत स्वादिष्ट होता है,यह भोजन के स्वाद को बढ़ाकर उसे रुचिकारक बना देता हैं । • सेंधानमक खानें से भूख खुलकर लगती हैं। • भोजन के बाद सेंधानमक खानें से भोजन तुरंत पच जाता हैं । • सेंधानमक ह्रदयरोग में बहुत लाभदायक होता है। यदि टैकीकार्डिया है तो सेंधानमक भोजन में शामिल करें बहुत लाभ मिलेगा । • सेंधानमक ह्रदयरोग से बचाता है , इसके सेवन से HDL कोलेस्ट्रॉल,LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड संतुलित रहता है । • सेंधानमक सेवन करने से आंखों का स्वास्थ उत्तम बना

14 औषधीय गुण थूहर के

  14 औषधीय गुण थूहर के थूहर आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत महत्व का पौधा है,इसका पौधा दस फ़ीट तक ऊंचा होता है । थूहर में लगने वाली लम्बी लम्बी डंडे के समान होती हैं ,जिन पर तीखे कांटे निकले रहते हैं । थूहर के पत्ते 6 इंच तक लम्बें और ढाई इंच तक चोडे होते हैं । थूहर का कोई भी भाग तोड़ने पर सफेद दूध निकलता है । थूहर थूहर का संस्कृत नाम  थूहर को संस्कृत में स्नूही,सुधा,समन्त दुग्धा,वज्रा नाम से जाना जाता हैं । थूहर का लेकिन नाम थूहर को लेटिन भाषा में fuphorbia nerifolia (यूफोर्बिया नेरिफोलिया) के नाम से जानते हैं । थूहर का हिन्दी नाम थूहर को हिन्दी में सेहुंड,कांटा थूहर, थूहर छोटा के नाम से जाना जाता हैं । आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति आयुर्वेद मतानुसार थूहर गर्म, कड़वी,भारी,होती हैं, थूहर का दूध भी गर्म,तीखा और रेचक होता है । थूहर के औषधीय गुण 1.दस्त लगानें में यदि किसी को बहुत दिनों से दस्त नहीं हो रहें हैं तो थूहर के दूध में हरड़,पीपल और निशोंध पीसकर चटा दें , बहुत तेज दस्त लगेंगे ‌। 2.बिच्छू का विष उतारने में  थूहर की जड़ को कालीमिर्च के साथ पीसकर बिच्छू काटने वाली जगह पर लगाने से बिच्छू का ज

चरक संहिता, के अनुसार मूली खाने के फायदे

चरक संहिता के अनुसार 'मूली खाने के फायदेे' आयुर्वेद में मूली त्रिदोषनाशक होनें के कारण हर बीमारी में उपयोगी हैं तो आईयें जानतें हैं आयुर्वेद के महान ग्रंथ"चरक संहिता के अनुसार मूली खाने के फायदे" के अनुसार मूली खाने के फायदेे निम्न हैंं  बालंदोषहरंवृद्धंत्रिदोषंमारूतापहम्।स्निग्धसिद्धंविशुष्कन्तुमूलकंफवातजित्।। अर्थात मूली जब कच्ची होती हैं तो यह त्रिदोषनाशक होती हैं,पकी हुई मूली त्रिदोषकारक होती हैं। तेल,घी से सिद्ध की गई मूली और मूली के पत्ते वातनाशक होतें हैं।इसी प्रकार सूखी हुई मूली वात,कफ को समाप्त कर देती हैं ।   मूली स्वाद में कषाय,चरपरी होती हैं । मूली में आयरन,कैल्सियम, मैग्निशियम, सोडियम, विटामिन ए ,गंधक,क्लोरीन आदि तत्व बहुत प्रचुरता में पाए जातें हैं । आईयें जानतें हैं मूली खानें के  फायदे के बारें में • कच्ची मूली सलाद के रूप में यदि सुबह शाम खाई जाए तो यह पेट में मौजूद रूकी हुई हानिकारक वायु को बाहर निकाल देती हैं,लेकिन आजकल लोग मूली मात्र इसीलिये नही खाते की यह पेट में गैस बनाती हैं। वास्तव में यह धारणा सही नहीं हैं । #मूलीखानेकेफायदे • पेट में एसिडिटी