रविवार, 11 अगस्त 2019

वेद ज्ञान

📚📒📋✒ *हमारे आर्य संस्कृति (हिंदु) का संक्षेप में संपूर्ण वैदिक ज्ञान:*


🛑 *वैदिक साहित्य*


🛡 *वेद किसे कहते हैं ?*

✒ *ईश्वर के उपदेश को वेद कहते हैं।*

🛡 *वेद का ज्ञान कब दिया गया था ?*

✒ *वेद का ज्ञान सृष्टि के आरंभ में दिया गया था।*

🛡 *ईश्वर ने वेद का ज्ञान किसे दिया था ?*

✒ *उत्तर: ईश्वर ने वेद का ज्ञान चार ऋषियों को दिया था।*

🛡 *हमारा धर्मिक ग्रन्थ कौन सा है ?*

✒ *हमारा धर्मिक ग्रन्थ वेद है।*

🛡 *हमें वेद को ही क्यों मानना चाहिए ?*

✒ *वेद ईश्वरीय ज्ञान है। वेद में सब सत्य बातें हैं, इसलिए वेद को ही मानना चाहिए।*

🛡 *वेद किस भाषा में है ?*

✒ *वेद संस्कृत भाषा में है।*

🛡 *क्या वेद ऋषियों ने नहीं लिखा है ?*

✒ *नहीं, वेद ऋषियों ने नहीं लिखा है।*

🛡 *उन ऋषियों के नाम बताइए जिन्हें वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ ?*

✒ *उन ऋषियों के नाम हैं - अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा।*

🛡 *वेद पढ़नें का अधिकार किसे है ?*

✒ *उत्तर: सभी मनुष्यों को वेद पढ़ने का अधिकार है।*

🛡 *वेद ज्ञान किसने दिया ?*

✒ *ईश्वर ने दिया।*

🛡 *ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?*

✒ *मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए।*

🛡 *वेद कितने है ?*

✒ *चार प्रकार के : ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।*

🛡 *वेदों के ब्राह्मण कौन है ?*

✒ *वेद ब्राह्मण*

*ऋग्वेद - ऐतरेय,*
*यजुर्वेद - शतपथ,*
*सामवेद - तांड्य,*
*अथर्ववेद - गोपथ ।*

🛡 *वेदों के उपवेद कितने है ?*

📌 *वेदों के चार उप वेद है।*

✒ *वेद उपवेद*

*ऋग्वेद - आयुर्वेद,*
*यजुर्वेद - धनुर्वेद,*
*सामवेद - गंधर्ववेद,*
*अथर्ववेद - अर्थवेद ।*

🛡 *वेदों के अंग कितने होते है ?*

📌 *वेदों के छः अंग होते है।*

✒ *शिक्षा,*

✒ *कल्प,*

✒ *निरूक्त,*

✒ *व्याकरण,*

✒ *छंद,*

✒ *ज्योतिष ।*

🛡 *वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?*

📌 *वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया।*

✒ *वेद ऋषि*

*ऋग्वेद - अग्नि,*
*यजुर्वेद - वायु,*
*सामवेद - आदित्य,*
*अथर्ववेद - अंगिरा ।*

🛡 *वेदों का ज्ञान ईश्वर ने कैसे दिया ?*

✒ *वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया ।*

🛡 *वेदों में कैसे ज्ञान है ?*

✒ *वेदों मै सत्य विद्याओं का ज्ञान विज्ञान है*

🛡 *वेदो के विषय कौन कौन से हैं ?*

📌 *वेदों के चार विषय है।*

✒ *वेद विषय*

*ऋग्वेद - ज्ञान,*
*यजुर्वेद - कर्म,*
*सामवेद - उपासना,*
*अथर्ववेद - विज्ञान ।*

🛡 *किस वेद में क्या है ?*

📌 *ऋग्वेद में...*

✒ *मंडल - १०,*

✒ *अष्टक - ०८,*

✒ *सूक्त - १,०२८,*

✒ *अनुवाक - ८५,*

✒ *ऋचाएं (मंत्र)- १०,५८९ ।*

📌 *यजुर्वेद में...*

✒ *अध्याय - ४०,*

✒ *मंत्र - १,९७५ ।*

📌 *सामवेद में...*

✒ *आरचिक - ०६,*

✒ *अध्याय - ०६,*

✒ *ऋचाएं - १,८७५ ।*

📌 *अथर्ववेद में...*

✒ *कांड - २०,*

✒ *सूक्त - ७३१,*

✒ *मंत्र - ५,९७७ ।*

🛡 *वेद पढ़ने का अधिकार किसको है* 

✒ *मनुष्य मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।*

🛡 *क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?*

✒ *मूर्ति पूजा का विधान नहीं।*

🛡 *क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?*

✒ *वेदों मै अवतारवाद का प्रमाण नहीं है।*

🛡 *सबसे बड़ा वेद कौनसा है ?*

✒ *सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है।*

🛡 *वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?*

✒ *वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात १ अरब ९६ करोड़ ८ लाख ४३ हजार १२० वर्ष पूर्व ।*

🛡 *वेद के सहायक दर्शन शास्त्र(उपअंग) कितने हैं और लेखकों का क्या नाम है ?*

📌 *६ है।*

✒ *दर्शनशास्त्र लेखक*

*न्याय दर्शन : गौतम मुनि*
*वैशेषिक दर्शन : कणाद मुनि*
*योगदर्शन : पतंजलि मुनि*
*मीमांसा दर्शन : जैमिनी मुनि*
*सांख्य दर्शन : कपिल मुनि*
*वेदांत दर्शन : व्यास मुनि*

🛡 *शास्त्रों के विषय क्या है ?*

✒ *आत्मा, परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति, मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान आदि।*

🛡 *प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?*

✒ *प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।*

🛡 *उपनिषदों के नाम बतावे ?* 

✒ *ईश (ईशावास्य),*

✒ *केन,* 

✒ *कठो,*

✒ *प्रश्न,*

✒ *मुंडक,*

✒ *मांडूक्य,*

✒ *ऐतरेय,*

✒ *तैत्तिरीय,*

✒ *छांदोग्य,*

✒ *वृहदारण्यक,*

✒ *श्वेताश्वतर ।*

🛡 *उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?*

✒ *उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !*

🛡 *चार वर्ण कौन कौन से होते हैं ?*

✒ *ब्राह्मण,*

✒ *क्षत्रिय,*

✒ *वैश्य,*

✒ *शूद्र।*

*जो कर्म आधारित हैं|*

🛡 *चार युग कोन कोनसे होते है और कितने वर्षों के ?*

✒ *सतयुग : १७,२८,००० वर्षों का है।*

✒ *त्रेतायुग : १२,९६,००० वर्षों का है।*

✒ *द्वापरयुग : ८,६४,००० वर्षों का है।*

✒ *कलयुग : ४,३२,००० वर्षों का है।*

📌 *कलयुग के ४,९७७ वर्षों का भोग हो चुका है अभी ४,२७,०२३ वर्षों का भोग होना बाकी है।* 

🛡 *पंच महायज्ञ कोन कोनसे होते है ?* 

✒ *ब्रह्म यज्ञ,*

✒ *देव यज्ञ,*

✒ *पितृ यज्ञ,*

✒ *बलिवैश्वदेव यज्ञ,*

✒ *अतिथि यज्ञ।*

🛡 *स्वर्ग और नरक कहां है ?* 

✒ *स्वर्ग : जहाँ सुख है।*

✒ *नरक : जहाँ दुःख है।*


🛡 *‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक ग्रन्थ की रचना किसने की थी ?*

✒ *‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक ग्रन्थ की रचना महर्षि दयानन्द ने की थी।*


🛑 *ईश्वर*


🛡 *ईश्वर का मुख्य नाम क्या है ?*

✒ *ईश्वर का मुख्य नाम ‘ओ३म्’ है।*

🛡 *ईश्वर के कुल कितने नाम हैं ?*

✒ *ईश्वर के असंख्य नाम हैं।*

🛡 *ईश्वर के नामों से हमें क्या पता चलता है ?*

✒ *ईश्वर के नामों से हमें उसके गुण, कर्म और स्वभाव का पता चलता है।*

🛡 *ईश्वर एक है या अनेक ?*

✒ *ईश्वर एक ही है उसके नाम अनेक हैं।*

🛡 *क्या ईश्वर कभी जन्म लेता है ?*

✒ *नहीं, ईश्वर कभी जन्म नहीं लेता। वह अजन्मा है।*

🛡 *स्तुति, प्रार्थना, उपासना किसकी करनी चाहिए ?*

✒ *स्तुति, प्रार्थना, उपासना केवल ईश्वर की ही करनी चाहिए।*

🛡 *ईश्वर से अध्कि सामर्थ्यशाली कौन है ?*

✒ *ईश्वर से अध्कि सामर्थ्यशाली और कोई नहीं है। वह सर्वशक्तिमान् है।*

🛡 *‘इन्द्र’ नाम किसका है ?*

✒ *जिसमें सबसे अधिक ऐश्वर्य होता है उसे इन्द्र कहते हैं अर्थात् ‘इन्द्र’ ईश्वर का नाम है।*

🛡 *दुःख कितने प्रकार के और कौन-कौन से होते हैं ?*

📌 *दुःख तीन प्रकार के होते हैं -*

✒ *(१) आध्यात्मिक, (२) आधिभौतिक, (३) आधिदैविक दुःख।*

🛡 *आध्यात्मिक दुःख किसे कहते हैं ?*

✒ *अविद्या, राग-द्वेष, रोग इत्यादि से होने वाले दुःख को आध्यात्मिक दुःख कहते हैं।*

🛡 *आधिभौतिक दुःख किसे कहते हैं ?*

✒ *मनुष्य, पशु-पक्षी, कीट-पतंग, मक्खी-मच्छर, सांप इत्यादि से होने वाले दुःख को आधिभौतिक दुःख कहते हैं।*

🛡 *आधिदैविक दुःख किसे कहते हैं ?*

✒ *अधिक सर्दी-गर्मी-वर्षा, भूख-प्यास, मन की अशान्ति से होने वाले दुःख को आधिदैविक दुःख कहते हैं।*

🛡 *ईश्वर के कोई दस नाम बताइए।*

✒ *(१) विष्णु, (२) वरुण, (३) परमात्मा, (४) पिता, (५) अनन्त, (६) शुद्ध, (७) निराकार, (८) सरस्वती, (९) न्यायकारी, (१०) भगवान्।*

🛡 *ईश्वर के तीन गुण बताइए।*

✒ *ईश्वर के तीन गुण हैं - न्याय, दया और ज्ञान।*

🛡 *ईश्वर के तीन कर्म बताइए।*

✒ *(१) ईश्वर संसार को बनाता है।*
✒ *(२) ईश्वर वेदों का उपदेश करता है।*
✒ *(३) ईश्वर कर्मों का फल देता है।*

🛡 *‘अनन्त’ का अर्थ क्या है ?*

✒ *जिसका कभी अन्त नहीं होता उसे अनन्त कहते हैं। ईश्वर अनन्त है।*

🛡 *क्या ‘गणेश’ ईश्वर का नाम है? क्यों ?*

✒ *हाँ, क्योंकि वह पूरे संसार का स्वामी है और सबका पालन करता है।*

🛡 *‘सरस्वती’ से आप क्या समझते हैं ?*

✒ *‘सरस्वती’ ईश्वर का एक नाम है। संसार का पूर्ण ज्ञान जिसे होता है, उसे सरस्वती कहते हैं।*

🛡 *ईश्वर को ‘निराकार’ क्यों कहते हैं ?*

✒ *ईश्वर का कोई आकार, रुप, रंग, मूर्ति नहीं है। अतः उसे निराकार कहते हैं ।*

🛡 *क्या राहु और केतु ग्रहों के नाम हैं।*

✒ *नहीं, इस नाम के कोई ग्रह नहीं होते। ये दोनों नाम ईश्वर के हैं।*

🛡 *ईश्वर के किन्हीं दो नामों की व्याख्या कीजिए।*

✒ *(क) ब्रह्मा - ईश्वर जगत् को बनाता है इसलिए उसे ब्रह्मा कहते हैं।*

✒ *(ख) शुद्ध - राग-द्वेष, छल-कपट, झूठ इत्यादि समस्त बुराइयों से वह दूर है। उसका स्वभाव पवित्र है।*

🛡 *नास्तिक किसे कहते हैं ?*

✒ *जो व्यक्ति ईश्वर को ठीक से नहीं जानता, नहीं मानता और उसका ध्यान नहीं करता है उसे नास्तिक कहते हैं।*

🛡 *मनुष्य के समस्त दुःखों का कारण क्या है ?*

✒ *ईश्वर को न मानना ही मनुष्य के समस्त दुःखों का कारण है।*

🛡 *जड़ और चेतन मे अंतर बताइए ?*

📌 *जड*

✒ *इच्छा नहीं होती है।*
✒ *सुख आदि की अनुभूति नही होती है।*
✒ *परिवर्तन सड़ना, गलना होता है ।*
✒ *ज्ञान नहीं होता है।*
✒ *लंबाई, चौडाई, रूप रंग होते हैं ।*

📌 *चेतन*

✒ *इच्छा होती है।*
✒ *सुखादि की अनुभूति होती है।*
✒ *परिवर्तन सड़ना गलना नहीं होता है।*
✒ *ज्ञान होता है।*
✒ *निराकार होता है।*

🛡 *जड़ और चेतन के उदाहरण दीजिए।*

✒ *जड़ के उदाहरण -पत्थर, लकड़ी, लोहा, अग्नि, वायु, कार, कम्प्यूटर, मोबाइल।*

✒ *चेतन के उदाहरण - आत्मा और परमात्मा।*

🛡 *क्या ईश्वर सर्वव्यापक है ?*

✒ *हाँ, ईश्वर सर्वव्यापक है। ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ पर ईश्वर न हो।*

🛡 *यदि ईश्वर सब जगह है तो वह दिखाई क्यों नहीं देता है ?*

✒ *निराकार होने के कारण ईश्वर दिखाई नही देता है।*

🛡 *न्याय किसे कहते हैं ?*

✒ *कर्मों के अनुसार पफल देने को न्याय कहते हैं।*

🛡 *बुरे कर्मों का पफल माफ होता है अथवा नहीं ?*

✒ *नहीं, बुरे कर्मों का फल माफ नहीं होता है।*

🛡 *क्या दण्ड से बचने के लिए पूजा, प्रार्थना, यज्ञ करना चाहिए ?*

✒ *एक बार अपराध कर लेने पर उस कर्म का फल भोगना ही पड़ता है। यह ईश्वर का नियम है। अतः दण्ड से बचने के लिए पूजा, प्रार्थना, यज्ञ, करना व्यर्थ है।*

🛡 *दया किसे कहते हैं ?*

✒ *दूसरों के दुःखों को दूर करने की इच्छा को दया कहते हैं।*

🛡 *ईश्वर दयालु है तो हमारे पापों को क्षमा क्यों नहीं करता ?*

✒ *पाप क्षमा होने से सुधार नहीं होता बल्कि व्यक्ति पहले से और अधिक पाप करने लग जाता है। ईश्वर की इच्छा है कि हमारा सुधार हो । जिससे हम भविष्य में बुरे कर्म न करें । इसलिए ईश्वर हमारे पापों को क्षमा नही करता है।*

🛡 *सर्वशक्तिमान् शब्द का क्या अर्थ है ?*

✒ *जो अपने किसी भी कार्य को करने में दूसरों की सहायता नही लेता उसे सर्वशक्तिमान् कहते हैं ।*

🛡 *ईश्वर ने संसार क्यों बनाया है ?*

✒ *ईश्वर ने इस संसार को हमारे सुख, कल्याण, और शान्ति के लिए बनाया है।*

🛡 *हमें ईश्वर से क्या मांगना चाहिए ?*

✒ *हमें ईश्वर से विद्या, बल, बुद्धि, शक्ति और समृद्धि मांगना चाहिए।*

🛡 *क्या प्रार्थना करने से सब चीजें मिल जाती हैं ?*

✒ *केवल प्रार्थना करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। प्रार्थना के साथ पूर्ण पुरुषार्थ करना चाहिए।*

🛡 *उपासना शब्द का क्या अर्थ है ?*

✒ *उपासना शब्द का अर्थ है मन से शुद्ध होकर ईश्वर के गुणों की अनुभूति करना।*

🛡 *उपासना करने से क्या लाभ हैं ?*

✒ *उपासना करने से हमारा आत्मिक बल बढता है, दुःख दूर होते हैं, विद्या, बल, और आनंद की प्राप्ति होती है।*

🛡 *ईश्वर निराकार है तो बिना हाथ-पैर के संसार को कैसे बना लेता है ?*

✒ *जैसे चुम्बक बिना हाथ के लोहे को खींच लेता है, सूर्य की किरणें जिस प्रकार बिना पैर के गति करती हैं, वैसे ईश्वर भी अपने शक्ति सामर्थ्य से बिना हाथ - पैर के ही संसार की रचना कर लेता है।*

🛡 *क्या ईश्वर अवतार लेता है ?*

✒ *नहीं, ईश्वर अवतार नहीं लेता है।*

🛡 *ईश्वर का अवतार मानने में क्या दोष है ?*

📌 *ईश्वर का अवतार मानने में निम्न दोष हैं -*

✒ *अवतार लेने के लिए जन्म लेना होगा।*
✒ *जो सर्वव्यापक है उसका जन्म लेना असंभव है।*
✒ *जो जन्म लेगा उसे सुख-दुःख, भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी की अनुभूति होगी।*
✒ *ईश्वर निराकर है अतः उसका अवतार नहीं हो सकता।*

🛡 *क्या आत्मा और परमात्मा एक ही है ?*

✒ *नहीं, आत्मा और परमात्मा एक नहीं है।*

🛡 *हम अपनी इच्छा से कर्म करते हैं अथवा परमात्मा की ?*

✒ *हम अपनी इच्छा से ही कर्म करते हैं, परमात्मा की इच्छा से नहीं।*

🛡 *परमात्मा की इच्छा से कर्म करना मानने में क्या दोष है ?*

✒ *हम परमात्मा की इच्छा से ही कर्म करना मानेंगे तो संसार में बुराई नहीं रहनी चाहिए। क्योंकि ईश्वर की इच्छा कभी बुरी नहीं हो सकती है।*

🛡 *ईश्वर के साथ हमारा क्या संबंध है ?*

✒ *ईश्वर हमारा पालक, रक्षक, बन्धु, गुरु, आचार्य, स्वामी, राजा और न्यायाधीश है।*


🛑 *बाल शिक्षा*


🛡 *प्र. १: शिक्षक कितने और कौन-कौन से होते हैं ?*

✒ *उत्तर: शिक्षक तीन होते हैं - (१) माता (२) पिता (३) गुरु।*

🛡 *प्र. २: माता को सबसे उत्तम शिक्षक क्यों कहते हैं ?*

✒ *उत्तर: संतानों के लिए प्रेम, हित की भावना सबसे अध्कि माता में होती है । इसलिए वह सर्वोत्तम शिक्षक है।*

🛡 *प्र. ३: संतानों के प्रति माता के क्या कर्त्तव्य हैं ?*

📌 *उत्तर: संतानों के प्रति माता के निम्न कर्त्तव्य हैं-*

✒ *(१) शुद्ध उच्चारण सिखलाना,*
✒ *(२) संतानों को उत्तम गुणों से युक्त करना,*
✒ *(३) छोटे-बड़ों से व्यवहार करना सिखलाना,*
✒ *(४) धर्म की शिक्षा देना।*

🛡 *प्र. ४: क्या भूत-प्रेत वास्तव में होते हैं ?*

✒ *उत्तर: नहीं, भूत-प्रेत नहीं होते, उनको मानना अंध्विश्वास है।*

🛡 *प्र. ५: संसार में बहुत से लोग भूत-प्रेत क्यों मानते हैं ?*

✒ *उत्तर: अविद्या, कुसंस्कार, भय, आशंका, मानसिक रोग, ध्ूर्तों के बहकाने से लोग भूत-प्रेत मानने लग जाते हैं।*

🛡 *प्र. ६: हम मरने के बाद कहाँ जाते हैं ?*

✒ *उत्तर: मरने के बाद हम पाप-पुण्य का फल भोगने के लिए पिफर से जन्म लेते हैं।*

🛡 *प्र. ७: हमें दूसरे जन्म में कौन भेजता है ?*

✒ *उत्तर: हमें दूसरे जन्म में ईश्वर भेजता है।*

🛡 *प्र. ८: क्या मन्त्र-फूंकने से किसी रोग की चिकित्सा होती है ?*

✒ *उत्तर: नहीं, मन्त्र फुंकने से किसी रोग की चिकित्सा नहीं होती है।*

🛡 *प्र. ९: हमारे जीवन में सुख-दुःख क्या ग्रहों के कारण हैं ?*

✒ *उत्तर: नहीं, हमारे जीवन में सुख-दुःख ग्रहों के कारण नहीं है।*

🛡 *प्र. १०: मंगल, शनि आदि ग्रहों का हमारे कर्मों पर कोई प्रभाव पड़ता है ?*

✒ *उत्तर: नहीं, हमारे कर्मों पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।*

🛡 *प्र. ११: जन्म-पत्रा में लिखी गई बातें क्या सच होती है ?*

✒ *उत्तर: हमारे भविष्य की बातें कोई नहीं जान सकता, इसलिए जन्म-पत्रा की बातें सच नहीं होती हैं।*

🛡 *प्र. १२: छल-कपट किसे कहते हैं ?*

✒ *उत्तर: दूसरों की हानि पर ध्यान न देकर केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना छल-कपट कहलाता है।*

🛡 *प्र. १३: विद्यार्थी का मुख्य कर्त्तव्य क्या है ?*

✒ *उत्तर: विद्यार्थी को अपनी विद्या और शरीर का बल सदैव बढाते रहना चाहिए।*

🛡 *प्र. १४: माता-पिता, गुरु हमें दण्ड क्यों देते हैं ?*

✒ *उत्तर: हमारे जीवन से बुराइयों को हटाने के लिए माता-पिता, गुरु हमें दण्ड देते हैं।*

🛡 *प्र. १५: दण्ड प्राप्त होने पर क्या विचारना चाहिए ?*

✒ *उत्तर: दण्ड प्राप्त होने पर हमें विचारना चाहिए कि मेरे सुधर के लिए दण्ड दिया गया है। क्रोध न करते हुए सुधरने का प्रयास करना चाहिए।*

🛡 *प्र. १६: सदाचार के तीन उदाहरण दीजिए ?*

✒ *उत्तर: (१) शान्त, मधुर और सत्य बोलना,*
*(२) बड़ों को नमस्ते करना,*
*(३) माता, पिता, गुरु की सेवा करना।*

🛡 *प्र. १७: माता-पिता का परम कर्त्तव्य क्या है ?*

✒ *उत्तर: अपने संतानों को विद्या, धर्म, श्रेष्ठ आचरण, उत्तम संस्कारों से युक्त करना ही माता-पिता का परम धर्म है ।*

🛑 *अध्ययन - अध्यापन*

*प्र. १: किन बातों से मनुष्य सुशोभित होता है ?*

*उत्तर: विद्या, संस्कार, उत्तम गुण, कर्म और स्वभाव से मनुष्य सुशोभित होता है।*

*प्र. २: श्रेष्ठ मनुष्य बनने के लिए क्या आवश्यक है ?*

*उत्तर: श्रेष्ठ मनुष्य बनने के लिए निम्न बातों का होना आवश्यक है -*
*(१) विद्या प्राप्ति (२) अभिमान न होना (३) दूसरों का सहयोग।*

*प्र. ३: अध्यापक कैसे होने चाहिए ?*

*उत्तर: अध्यापक पूर्ण विद्वान् व धर्मिक होने चाहिए।*

*प्र. ४: वैदिक नियम के अनुसार शिक्षा व्यवस्था कैसी होनी चाहिए ?*

*उत्तर: वैदिक नियम के अनुसार शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए -*
*(१) विद्यालय नगर से दूर, शान्त, एकान्त स्थान में होने चाहिए।*
*(२) लड़के व लड़कियों के विद्यालय अलग-अलग होने चाहिए।*
*(३) विद्यार्थी का जीवन तपस्वी, संयमी होना चाहिए।*

*(४) सभी विद्यार्थियों की सुविधएँ एक समान होनी चाहिए।*

*प्र. ५: गायत्री मंत्र कौन सा है ?*

*उत्तर: गायत्री मंत्र निम्न है -*
*ओऽम् भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात्।*

*प्र. ६: गायत्री मन्त्र का संक्षिप्त अर्थ बताइए।*

*उत्तर: गायत्री मन्त्र का संक्षिप्त अर्थ इस प्रकार है -*
*हे संपूर्ण जगत् के निर्माता, शुद्धस्वरुप, सुखों को प्रदान करने वाले परमपिता परमेश्वर! कृपा करके हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग में प्रेरित करें।*

*प्र. ७: प्रतिदिन स्नान क्यों करना चाहिए ?*

*उत्तर: स्नान करने से शरीर शुद्ध तथा स्वस्थ रहता है, इसलिए प्रतिदिन स्नान करना चाहिए।*

*प्र. 8: मन की शुद्धि कैसे होती है ?*

*उत्तर: मन की शुद्धि सत्य के आचरण से होती है।*

*प्र. 9: प्राणायाम के क्या लाभ हैं ?*

*उत्तर: प्राणायाम के निम्न लाभ हैं -*
*(1) स्मृति शक्ति का बढ़ना, (2) ज्ञान की प्राप्ति, (3) बल का बढ़ना, (4) सूक्ष्म बुद्धि की प्राप्ति।*

*प्र. 10: ईश्वर का ध्यान कब करना चाहिए ?*

*उत्तर: ईश्वर का ध्यान प्रतिदिन प्रातः व सायंकाल करना चाहिए।*

*प्र. 11: क्या ईश्वर का ध्यान करना आवश्यक है ?*

*उत्तर: हाँ, ईश्वर का ध्यान करना आवश्यक है।*

*प्र. 12: वायु की शुद्धि का क्या उपाय है ?*

*उत्तर: वायु की शुद्धि के लिए प्रतिदिन हवन करना चाहिए।*

*प्र. 13: हवन करना क्यों आवश्यक है ?*

*उत्तर: हवन करने से अनेक प्राणियों का उपकार, वायु-जल-अन्न की शुद्धि, रोगों का दूर होना इत्यादि अनेक लाभ होते हैं।*

*प्र. 14: ब्रह्मचर्य के पालन से क्या लाभ हैं ?*

*उत्तर: ब्रह्मचर्य के पालन से शारीरिक व मानसिक विकास, शुभ गुणों की प्राप्ति, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ, कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति होती है।*

*प्र. 15: यम कितने प्रकार के व कौन-कौन से हैं ?*

*उत्तर: यम पाँच प्रकार के होते हैं । वे निम्न हैं -*
*(1) अहिंसा, (2) सत्य, (3) अस्तेय, (4) ब्रह्मचर्य, (5) अपरिग्रह।*

*प्र. 16: आयु, विद्या, यश और बल बढ़ाने का उपाय क्या है ?*

*उत्तर: माता-पिता, गुरु, वृद्धजनों की सेवा, आदर और उनकी आज्ञाओं का पालन करने से आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।*

*प्र. 17: विद्यार्थी को कौन से कार्य नहीं करने चाहिए ?*

*उत्तर: विद्यार्थी को निम्न कार्य नहीं करने चाहिए -*
*(1) ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, मोह, झूठ बोलना।*
*(2) अंडे, मांस का सेवन।*
*(3) आलस्य, प्रमाद।*
*(4) दूसरों की हानि करना।*

*प्र. 18 : संपूर्ण सुख किसे प्राप्त होता है ?*

*उत्तर: जो व्यक्ति विद्या प्राप्त कर धर्म कर आचरण करता है वही संपूर्ण सुख को प्राप्त करता है ।*

*प्र. 19: धर्म किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: श्रेष्ठ कर्मों के आचरण को धर्म कहते हैं ।*

*प्र. 20: धर्म का ज्ञान कहाँ से होता है ?*

*उत्तर: धर्म का ज्ञान वेद, ऋषियों के ग्रन्थ, महापुरुषों के आचरण से होता है।*

*प्र. 21: सत्य-असत्य की परीक्षा किस प्रकार की जाती है ?*

*उत्तर: सत्य वह होता है जो -*
*(1) वेद के अनुकूल हो, (2) सृष्टि नियम से विपरीत न हो, (3) धर्मिक विद्वानों द्वारा कहा गया हो, (4) आत्मा के अनुकूल हो, (5) प्रमाणों से जांचा गया हो।*

*प्र. 22: प्रमाण कितने प्रकार के होते हैं ?*

*उत्तर: प्रमाण 8 प्रकार के होते हैं।*

*प्र. 23: किन्हीं 4 प्रमाणों के नाम बताइए ।*

*उत्तर: ये चार प्रकार के प्रमाण हैं - (1) प्रत्यक्ष, (2) अनुमान, (3) शब्द, (4) उपमान प्रमाण।*

*प्र. 24: प्रत्यक्ष प्रमाण किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: देखने, सुनने, गंध लेने, स्पर्श व स्वाद की अनुभूति से जो वास्तविक ज्ञान होता है, उसे प्रत्यक्ष प्रमाण कहते हैं।*

*प्र. 25: असंभव बातों के 5 उदाहरण दीजिए ।*

*उत्तर: असंभव बातों के 5 उदाहरण निम्न हैं -*

*(1) पहाड़ उठाना, (2) समुद्र में पत्थर तैराना, (3) चन्द्रमा के टुकड़े करना,*
*(4) परमेश्वर का अवतार लेना, (5) मनुष्य के सींग होना।*

*प्र. 26: आत्मा के गुण कौन-कौन से हैं ?*

*उत्तर: इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख और ज्ञान आत्मा के गुण हैं।*

*प्र. 27: 6 दर्शन शास्त्रों के नाम बताइए।*

*उत्तर: 6 दर्शन शास्त्रों के नाम इस प्रकार हैं*

*(1) योग दर्शन, (2) सांख्य दर्शन, (3) वैशेषिक दर्शन, (4) न्याय दर्शन, (5) मीमांसा दर्शन, (6) वेदान्त दर्शन।*

*प्र. 28: सर्वश्रेष्ठ दान कौन सा है ?*

*उत्तर: विद्या का दान सर्वश्रेष्ठ दान है।*

*प्र. 29: वेद पढ़ने का अध्किार किसे है ?*

*उत्तर: सभी मनुष्यों को वेद पढ़ने का अधिकार है।*

*प्र. 30: देश की उन्नति के लिए तीन उपाय बताइए।*

*उत्तर: देश की उन्नति के लिए (1) ब्रह्मचर्य, (2) विद्या और (3) धर्म का प्रचार आवश्यक है।*

🛑 *गृहस्थ आश्रम*

*प्र. 1: विवाह करने का अधिकार किसे है ?*

*उत्तर: धर्मिक, विद्वान्, सदाचारी और ब्रह्मचारी व्यक्ति को विवाह करने का अधिकार है।*

*प्र. 2: विवाह करने का मुख्य आधर क्या है ?*

*उत्तर विवाह करने का मुख्य आधर है - अनुकूल गुण-कर्म-स्वभाव का मेल होना।*

*प्र. 3: जन्म-कुंडली के आधर पर विवाह करना क्या उचित नहीं है ?*

*उत्तर: जन्म-कुंडली देखकर विवाह करना उचित नहीं है क्योंकि हमारे भविष्य और परस्पर मेल का जन्म-कुंडली से कोई संबंध नहीं है।*

*प्र. 4: वर्ण व्यवस्था किसे कहते है ?*

*उत्तर वर्ण व्यवस्था एक सामाजिक व्यवस्था है। जिसमें योग्यता के आधर पर समाज को चार वर्णों में बांटा जाता है।*

*प्र. 5: वर्ण कितने होते हैं ? उनके नाम बताइए।*

*उत्तर: वर्ण चार होते हैं । उनके नाम हैं - ;1द्ध ब्राह्मण ;2द्ध क्षत्रिय ;3द्ध वैश्य ;4द्ध शूद्र।*

*प्र. 6: क्या वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं मानी जाती है ?*

*उत्तरः नहीं, वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं मानी जाती है। उसका आधर गुण-कर्म और स्वभाव है।*

*प्र. 7: क्या कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण बन सकता है ?*

*उत्तर: शास्त्रों में ब्राह्मण बनने के लिए कुछ कर्म निश्चित किए हैं। उन कर्मों को करने वाला कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण बन सकता है।*

*प्र. 8: ब्राह्मण बनने के लिए ब्राह्मण परिवार में जन्म लेना आवश्यक है ?*

*उत्तर: नहीं, ब्राह्मण बनने के लिए ब्राह्मण परिवार में जन्म लेना आवश्यक नहीं है।*

*प्र. 9: किन कर्मों को करने से व्यक्ति ब्राह्मण बन सकता है ?*

*उत्तर: ब्राह्मण बनने के लिए इन कर्मों को करना आवश्यक है -* 
*(1) पढ़ना व पढ़ाना, (2) यज्ञ करना व कराना, (3) धर्म का आचरण करना, (4) वेदों को मानना।*

*प्र. 10: क्षत्रिय किसे कहते हैं ?*

*उत्तर जो व्यक्ति प्रजा की रक्षा और पालन करता है उसे क्षत्रिय कहते हैं।*

*प्र. 11: वैश्य का मुख्य कर्म क्या है ?*

*उत्तर वैश्य का मुख्य कर्म व्यापार करना है।*

*प्र. 12: शूद्र किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: जो व्यक्ति पढ़ाने पर भी नहीं पढ़ सकता उसे शूद्र कहते हैं।*

*प्र. 13: शूद्र का मुख्य कार्य क्या है ?*

*उत्तर: शूद्र का मुख्य कार्य सेवा करना है।*

*प्र. 14: क्या शूद्र की संताने ब्राह्मण बन सकती हैं ?*

*उत्तर हाँ, शूद्र की संताने ब्राह्मण बन सकती हैं।*

*प्र. 15: विवाह कितने प्रकार के होते हैं ?*

*उत्तर: विवाह आठ प्रकार के होते हैं।*

*प्र. 16: सबसे उत्तम विवाह कौन सा है ?*

*उत्तर सबसे उत्तम विवाह ब्राह्म विवाह है।*

*प्र. 17: ब्राह्म विवाह किसे कहते हैं ?*

*(उत्तर: पूर्ण विद्वान, धर्मिक, सुशील वर-वधू का परस्पर प्रसन्नता के साथ विवाह होना ब्राह्म विवाह है।*

*प्र. 18: वाणी की चार विशेषताएँ बताइए ?*

*उत्तर: वाणी की चार विशेषताएँ हैं - (1) वाणी सुमधुर हो, (2) सदैव सत्य बोलना, (3) हितकारी बोलना, (4) प्रिय बोलना।*

*प्र. 19: निंदा किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: अच्छे को बुरा कहना और बुरे को अच्छा कहना निंदा कहलाती है।*

*प्र. 20: श्राद्ध क्या होता है ?*

*उत्तर: जीवित माता-पिता, विद्वान्, वृद्धजनों की श्रद्धा से सेवा करने को श्राद्ध कहते हैं।*

*प्र. 21: तर्पण का क्या अर्थ है ?*

*उत्तर: जीवित माता-पिता, विद्वान् आदि को अपने व्यवहार से प्रसन्न रखना तर्पण है।*

*प्र. 22: क्या मृत पितरों का श्राद्ध व तर्पण नहीं हो सकता?*

*उत्तर: नहीं, मृत पितरों का श्राद्ध व तर्पण संभव नहीं है। ऐसा करना वेद आदि शास्त्रों से विरुद्ध है।*

*प्र. 23: पंचमहायज्ञ कौन से हैं ?*

*उत्तर: (1) ब्रह्मयज्ञ, (2) देवयज्ञ, (3) पितृयज्ञ, (4) बलिवैश्वदेव यज्ञ, (5) अतिथियज्ञ।*

*प्र. 24: अतिथियज्ञ किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: धर्मिक, विद्वान्, सत्य के उपदेशक व्यक्ति की सेवा, सत्कार और सम्मान करना अतिथियज्ञ है।*

*प्र. 25: पाप किसे कहते हैं।*

*उत्तर: अधर्म के आचरण को पाप कहते हैं।*

*प्र. 26: अधर्म के आचरण से क्या हानि होती है ?*

*उत्तर: जैसे जड़ से काटा हुआ वृक्ष नष्ट हो जाता है वैसे ही अधर्मिक व्यक्ति भी पूर्णतः नष्ट हो जाता है।*

*प्र. 27: किसे दान नहीं देना चाहिए ?*

*उत्तर: तप से रहित, अधर्मिक, अविद्वान् व्यक्ति को दान नहीं देना चाहिए।*

*प्र. 28: पाखण्डी के लक्षण क्या हैं ?*

*उत्तर: जो व्यक्ति धर्म के नाम पर दूसरों को ठगता हो, अपनी प्रशंसा स्वंय करे, अच्छे-बुरे सब लोगों से मित्राता करे, स्वार्थ के लिए दूसरों की हानि करता हो वह पाखण्डी होता हैं।*

*प्र. 29: बुद्धिमान् किसे कहते हैं ?*

*उत्तर: ईश्वर, वेद पर श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति बुद्धिमान् होता है।*

🛑 *वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम*

*🛡 वानप्रस्थ का अर्थ क्या है ?*

*✒ एकांत स्थान में जाकर स्वाध्याय-साधना करना वानप्रस्थ कहलाता है।*

*🛡 वानप्रस्थ लेने का अधिकार किसे है ?*

*✒ वानप्रस्थ लेने का अधिकार गृहस्थी को है।*

*🛡 वानप्रस्थ कब लिया जाता है ?*

*✒ परिवार के प्रति अपने कर्त्तव्य पूरे हो जाने पर वानप्रस्थ लिया जाता है।*

*🛡 वानप्रस्थ के प्रमुख कर्त्तव्य क्या हैं ?*

*✒ स्वाध्याय करना, पंचमहायज्ञ, धर्म का आचरण और योगाभ्यास करना वानप्रस्थ के प्रमुख कर्त्तव्य हैं।*

*🛡 वानप्रस्थ के बाद अगला आश्रम कौन सा है ?*

*✒ वानप्रस्थ के बाद अगला आश्रम संन्यास है।*

*🛡 संन्यास ग्रहण क्यों किया जाता है ?*

*✒ ईश्वर को प्राप्त करने के लिए संन्यास ग्रहण किया जाता है।*

🛡 *किन्हीं तीन संन्यासियों के नाम बताइए।*

📌 *तीन संन्यासियों के नाम हैं -*

✒ *स्वामी दयानन्द सरस्वती,*
✒ *स्वामी श्रद्धानन्द,*
✒ *स्वामी दर्शनानन्द।*

🛡 *संन्यास ग्रहण करने के लिए सबसे अनिवार्य योग्यता क्या है ?*

✒ *संन्यास ग्रहण के लिए वैराग्य होना अनिवार्य है।*

🛡 *संन्यासी का मुख्य कार्य क्या है ?*

✒ *संन्यासी का मुख्य कार्य सत्योपदेश और राष्ट्र में वेद का प्रचार करना है।*

🛡 *क्या दण्ड, कमण्डल, काषाय वस्त्र धरण करने वाले को ही संन्यासी कहते है ?*

✒ *नहीं, दण्ड, कमण्डल, काषाय वस्त्र धरण करने मात्र से कोई संन्यासी नहीं होता, उसके लिए संन्यासी के कर्म करने आवश्यक हैं।*

🛡 *समाज में अंधविश्वास क्यों फैलता है ?*

✒ *योग्य संन्यासी के न होने से समाज में अंधविश्वास फैलता है ।*

🛡 *संन्यास ग्रहण करने का अधिकार किसे है ?*

✒ *संन्यास ग्रहण करने का अधिकार पूर्ण विद्वान् को है।*

🛡 *हमारे देश में लाखों की संख्या में संन्यासी हैं, फिर भी इतना अंध्विश्वास क्यों है ?*

✒ *अधिकांश संन्यासी विद्या और वैराग्य से रहित हैं। उनमें अंधविश्वास को दूर करने की न तो इच्छा है और न सामर्थ्य। अतः अंधविश्वास, पाखण्ड फैल रहा है।*

🛡 *धर्म के लक्षण कितने हैं ?*

✒ *धर्म के दस लक्षण हैं।*

🛡 *धर्म के दस लक्षण कौन से हैं ?*

📌 *धर्म के दस लक्षण हैं -*

✒ *धैर्य,*
✒ *क्षमा,*
✒ *मन को धर्म में लगाना,*
✒ *चोरी न करना,*
✒ *शुद्धि,*
✒ *इन्द्रियों पर नियंत्रण,*
✒ *बुद्धि बढ़ाना,*
✒ *विद्या,*
✒ *सत्य,* 
✒ *क्रोध न करना।*

🛡 *योग्य संन्यासी का परीक्षण कैसे होता है ?*

✒ *सत्योपदेश, वेद, धर्म का प्रचार करने वाला संन्यासी योग्य संन्यासी कहलाता है।*

🛡 *योग के कितने अंग होते हैं ?*

✒ *योग के आठ अंग होते हैं।*

🛡 *योग के किन्हीं चार अंगों के नाम बताइए ?*

✒ *यम,* 
✒ *नियम,* 
✒ *आसन,*
✒ *प्राणायाम।*

🛡 *परिव्राजक किसे कहते हैं ?*

✒ *संन्यासी को ही परिव्राजक कहते हैं।*

🛡 *वैराग्य का अर्थ क्या होता हैं ?*

✒ *संसार के विषयों को भोगने की इच्छा न होना वैराग्य कहलाता है।*

🛑 *राजधर्म*

🛡 *राजधर्म का अर्थ क्या है ?*

✒ *प्रजा के प्रति राजा के कर्त्तव्य को राजधर्म कहते हैं।*

🛡 *राज्य करने का अधिकार किसे है ?*

✒ *उत्तर: राज्य करने का अधिकार न्यायप्रिय, वेद को मानने वाले क्षत्रिय को है।*

🛡 *राज्य के अंतर्गत कितनी सभाएँ होती हैं ? उनके नाम बताइए।*

📌 *राज्य के अंतर्गत तीन सभाएँ होती हैं । उनके नाम हैं -* 
✒ *विद्या सभा,*
✒ *धर्म सभा और राज सभा।*

🛡 *तीनों सभाएँ किसके अधीन होती हैं ?*

✒ *तीनों सभाएँ राजा के अधीन होती हैं।*

🛡 *क्या राजा स्वतंत्र होता है ?*

✒ *नही, राजा तीनों सभाओं के अधीन होता है।*

🛡 *विद्यासभा के अधिकारी कौन होते हैं ?*

✒ *वेद के विद्वान् विद्यासभा के अधिकारी होते हैं।*

🛡 *पधर्म सभा में अधिकारी बनने की योग्यता क्या है ?*

✒ *धर्म सभा का अधिकारी धार्मिक और विद्वान् होना चाहिए।*

🛡 *राज सभा का अधिकारी कौन बन सकता है ?*

✒ *धार्मिक व्यक्ति जो दण्डनीति और न्याय की नीति को जानता हो वह राज सभा का अधिकारी बन सकता है।*

🛡 *राजा में कौन से गुण होने चाहिए ?*

✒ *राजा वेद का विद्वान्, शूरवीर, पक्षपात रहित, दुष्टों का नाश करने वाला, श्रेष्ठ पुरुषों का सम्मान करने वाला और प्रजा को संतान के समान समझने वाला होना चाहिए।*

🛡 *धर्म की स्थापना के लिए क्या आवश्यक है ?*

✒ *धर्म की स्थापना के लिए दण्ड व्यवस्था आवश्यक है।*

🛡 *किन व्यक्तियों को सभा में नियुक्त नहीं करना चाहिए ?*

✒ *वेद विद्या से रहित मूर्ख, अधर्मिक व्यक्तियों को सभा में नियुक्त नहीं करना चाहिए।*

🛡 *राजा को किन बुराइयों से दूर रहना चाहिए ?*

📌 *राजा को ५ बुराइयों से दूर रहना चाहिए:*

✒ *जुआ खेलना,*

✒ *नशा करना,*

✒ *अधर्म,*

✒ *निंदा,*

✒ *बिना अपराध के दण्ड देना।*

🛡 *मन्त्री किसे बनाना चाहिए?*

✒ *वेद आदि शास्त्रों को जानने वाला, अपने देश में उत्पन्न उत्तम धार्मिक व्यक्ति को मन्त्री बनाना चाहिए।*

🛡 *राजदूत में कौन से गुण होने चाहिए ?*

✒ *राजदूत निर्भीक, कुशल वक्ता, छल-कपट से रहित और विद्वान् होना चाहिए।*

🛡 *किन व्यक्तियों को युद्ध में नहीं मारना चाहिए ?*

✒ *उत्तर: अत्यन्त घायल, दुःखी, शस्त्र से रहित, भागने वाला योद्धा, हार स्वीकार करने वाले को युद्ध में नही मारना चाहिए।*

🛡 *उपरोक्त व्यक्तियों के साथ क्या करें ?*

✒ *उन्हें बंदी बनाकर जेल में डाल देना चाहिए।*

🛡 *पराजित शत्रुओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ?*

✒ *पराजित शुत्रुओं को भोजन, वस्त्र व औषधि देनी चाहिए। जिनसे भविष्य में हानि की संभावना हो उन्हें जीवन भर जेल में ही रखना चाहिए। उनके परिवार की सुरक्षा करनी चाहिए।*

🛡 *राजा का परम धर्म क्या है ?*

✒ *राजा का परम धर्म प्रजा का पालन करना है।*

🛡 *किन से शत्रुता नहीं करनी चाहिए ?*

✒ *बुद्धिमान्, कुलीन, शूरवीर, धैर्यवान् व्यक्ति से शत्रुता नहीं करनी चाहिए।*

🛡 *क्या राजनीति का धर्म से कोई संबंध नहीं है ?*

✒ *राजधर्म को ही राजनीति कहते हैं इसलिए राजनीति धर्म से अलग नहीं है।*


📌 *जयतु वैदिक विज्ञान...*
*जयतु सनातन वैदिक धर्म...*

📌 *वैदिक धर्म...विश्व धर्म...*

*🙏🙏🙏 नमस्ते 🙏🙏🙏*

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

प्रतिदिन प्रात:स्मरणीय मन्त्र :: कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

*प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह*
उज्जैन
 प्रतिदिन प्रात:स्मरणीय मन्त्र

  *🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹*

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

         *🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸*

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥

*🔺त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण🔺*

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

              *♥ स्नान मन्त्र ♥*

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

           *🌞 सूर्यनमस्कार🌞*

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्
सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥

ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

                *🔥दीप दर्शन🔥*

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

            *🌷 गणपति स्तोत्र 🌷*

गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:।
द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥
विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥
विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।

विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥

        *⚡आदिशक्ति वंदना ⚡*

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

           *🔴 शिव स्तुति 🔴*

कर्पूर गौरम करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदा वसंतं हृदयार विन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि॥

              *🔵 विष्णु स्तुति 🔵*

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

            *⚫ श्री कृष्ण स्तुति ⚫*

कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।
नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥
सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥

मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌॥

            *⚪ श्रीराम वंदना ⚪*

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

               *♦श्रीरामाष्टक♦*

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥

    *🔱 एक श्लोकी रामायण 🔱*

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥

           *🍁सरस्वती वंदना🍁*

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्याऽपहा॥

            *🔔हनुमान वंदना🔔*

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌।
दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥

         *🌹 स्वस्ति-वाचन 🌹*

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

            *❄ शांति पाठ ❄*

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

*॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥*

🌅🌿🍁🌻🔔🚩
बहुत ही सुंदर संग्रह
राधे राधे

🙏🙏🙏

रविवार, 21 जुलाई 2019

जियो जी भरके

*🌴➰गौर से दो बार पढे!➰🌴*


➰जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रह जाता है।➰

➰जब हम जिंदा होते हैं, तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।➰

➰जब हम चले जाते है, तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।➰

➰एक चीनी बादशाह की मौत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा, मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ, अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।➰

        *➰सीख?➰*

ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।

• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता।

*➰तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो!➰*

• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चेक-अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।

*➰बेहतर जीवन जीयें!➰*
    ☘🍃☘🍃☘🍃☘

काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को!
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को!
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को!
काबू में रखें - महफिल मे जाएं तो जबान को!
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को!

       ☘🍃☘🍃☘🍃☘

भूल जाएं - अपनी नेकियों को!
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को!
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को!

       ☘🍃☘🍃☘🍃☘

छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना!
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना!
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना!
छोड दें - दूसरों की चुगली करना!
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना!

       ☘🍃☘🍃☘🍃☘

यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है, तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं।

यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं, तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं।

यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं, तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें।

जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं, बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है!




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💫☘💫☘💫☘💫☘💫


      *🌴➰Eɴᴊᴏʏ EᴠᴇʀʏᴅᴀY➰🌴*

गुरुवार, 11 जुलाई 2019

कुछ उपयोगी जानकारी

❇ *सब बीमारी का एक इलाज*❇
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गौमुञधनसत्व    20 gms 
गंधर्व हरितकी    350 gms 
अजवाइन.         20 gms 
मुलेठी               50 gms 
सौंठ.                20 gms 

उपर बताइ गइ सभी चिजे पंसारी से एवं गौमुञ धनसत्व ( गौमुञ भस्म) आपको कीसी गौशाला से प्राप्त होगी सभी को मिक्स करके चूरन बनाले| 
                     
रात्रि को सोते समय चम्मच पावडर एक गिलास पूरा गुनगुने पानी के साथ लेना है। 

गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। 

यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । 
पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा ।

 चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

❇ पाचनतंञ फिरसे मजबूत हो जायेगा | 

❇ गैस,ऐसीडीटी, दीर होगी | 

❇बालो का गीरनाॉ रुक जायेगा |

❇ शरिरमे खून बढ़ने लगेगा | 

❇ गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।

❇ हड्डियाँ मजबूत होगी ।

❇ आॅख का तेज बढ़ेगा ।

❇ बालों का विकास होगा।

❇ पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।

❇ शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।

❇ कफ से मुक्ति ।

❇ हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।

❇ थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।

❇ स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।

❇ स्त्री का शरीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।

❇ कान का बहरापन दूर होगा ।

❇ भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।

❇ खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी 

❇ शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी ।

❇ दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।

❇नपुसंकता दूर होगी।

❇ डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । 


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सोमवार, 24 जून 2019

आयुर्वैदिक तेल और उनके फायदे



1 महाभृंगराज तेल : सिर पर इसकी धीरे-धीरे मालिश करने पर यह बालों का गिरना बंद करता है और गंजापन समाप्त कर बालों को बढ़ाने में मदद करता है। 

असमय सफेद हुए बालों को काला करने के साथ ही यह सिर की गर्मी को शांत कर माथे को ठंडा करता है।

2  नारायण तेल : सब प्रकार के वात रोग, पक्षघात (लकवा), हनुस्म्भ, कब्ज, बहरापन, गतिभंग, कमर का दर्द, अंत्रवृद्धि, पार्श्व शूल, रीढ़ की हड्डी का दर्द, गात्र शोथ, इन्द्रिय ध्वंस, वीर्य क्षय, ज्वर क्षय, दांतों के रोग, पंगुता आदि के लिए यह एक प्रसिद्ध औषधि है। 

दो-तीन बार पूरे शरीर में मालिश करना एवं 1 से 3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ पीना फायदेमंद है।

3 चंदनबला लाशादि तेल : इसके प्रयोग से शरीर की सातों धातुओं में वृद्धि होती है एवं वात विकार नष्ट होते हैं। 

कास, श्वास, क्षय, शारीरिक क्षीणता, दाह, रक्तपित्त, खुजली, शिररोग, नेत्रदाह, सूजन, पांडू व पुराने ज्वर में यह बेहद उपयोगी है। 

दुबले-पतले शरीर को पुष्ट करता है एवं बच्चों के लिए सूखा रोग में लाभकारी है। सुबह व रात्रि को इसकी मालिश करना लाभकारी है।                        
4 इरमेदादि तेल : यह तेल दांत के रोगों में खास तौर से लाभदायक। मसूढ़ों के रोग, मुंह से दुर्गंध आना, जीभ, तालू व होठों के रोगों में भी यह बेहद लाभप्रद है।

 मुख के रोगों में इसे मुंह में भरना या दिन में तीन-चार बार तीली से लगाना चाहिए।

5 काशीसादि तेल : यह तेल नासूर शोधक तथा रोपण है। इसके लगाने से बवासीर के मस्से नष्ट हो जाते हैं साथ ही यह नाड़ी नासूर एवं दूषित नासूर के उपचार हेतु लाभकारी है। 

बवासीर होने पर दिन में तीन-चार बार संबंधित स्थान पर लगाना अथवा रूई भिगोकर रखना लाभदायक है।

6 जात्यादि तेल : नाड़ी व्रण (नासूर), जख्म व फोड़े के जख्म को भरता है। कटने या जलने से पैदा होने वाले घावों के व्रणोपचार के लिए यह उत्तम है। 

जख्म को साफ करके इस तेल को लगाना या तेल में कपड़ा भिगोकर बांधना फायदेमंद होता है। 

7 गुडुच्यादि तेल : वात रक्त, कुष्ठ रोग, नाड़ी व्रण, विस्फोट, विसर्प व पाद दाहा नामक बीमारियों के लिए यह तेल उपयुक्त है। एग्जिमा या छाजन होने पर इस तेल का प्रयोग बेहद लाभकारी होता है।

8 महालाक्षादि तेल : यह तेल सभी प्रकार के ज्वर अर्थात बुखार, विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व तपेदिक का नाश करने में सहायक है।

 कास, श्वास, प्रतिशाय (जुकाम), हाथ-पैरों की जलन, पसीने की दुर्गंध, शरीर का टूटना, हड्डी के दर्द, पसली के दर्द एवं वात रोगों को यह नष्ट करता है। 

यह बल, वीर्य कांति बढ़ाकर शरीर को पुष्ट करता है। सुबह व रात्रि को इसककी मालिश करना फायदेमंद है।

9 पंचगुण तेल : संधिवात एवं शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर यह तेल उपयोगी है। 

कर्णशूल होने पर कान में बूंदें डालना लाभदायक होगा। व्रण उपचार में इसका एक फाहा भिगोकर संबंधित स्थान पर बांधे।

10 षडबिंदु तेल : इस तेल के प्रयोग से गले के ऊपर के रोग जैसे सिर दर्द, सर्दी-जुकाम, नजला, पीनस आदि में लाभ होता है। 

दिन में दो-तीन बार 5-6 बूंद नाक में डालकर इसे सूंघना चाहिए।

11 महाविषगर्भ तेल : यह सभी प्रकार के वात रोगों की प्रसिद्ध औषधि। 

जोड़ों की सूजन समस्त शरीर में दर्द, गठिया, हाथ-पांव का रह जाना, लकवा, कंपन्न, आधा सीसी, शरीर शून्य हो जाना, नजला, कर्णनाद, गण्डमाला आदि रोगों में सुबह व रात्रि में इस तेल से मालिश करें।.                                       
12 महामरिचादि तेल : इसके प्रयोग से खाज, खुजली, कुष्ठरोग, मुंह के दाग व झाई, दाद, बिवाई आदि चर्म रोगों और रक्त के रोगों में लाभ होता है। एवं इस तेल से त्वचा के काले व नीले दाग नष्ट होते हैं व त्वचा स्वच्छ होती है।

सोमवार, 17 जून 2019

१०० swasthprad jankariya

*आयुर्वेद से कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए*
1योगभोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।

2 *लकवा*  सोडियम की कमी के कारण होता है ।

3 *हाई वी पी में*   स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

4 *लो बी पी*  सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।

5 *कूबड़ निकलना* फास्फोरस की कमी ।

6 *कफ*  फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है  
फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 

7 *दमा अस्थमा*  सल्फर की कमी ।

8 *सिजेरियन आपरेशन*  आयरन  कैल्शियम की कमी ।

9 *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।

10 *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।

11 *जम्भाई* शरीर में आक्सीजन की कमी ।

12 *जुकाम*  जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।

13 *ताम्बे का पानी*  प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।

14  *किडनी*  भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15 *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो  पुर्तगाल की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।

16 *अस्थमा  मधुमेह  कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

17 *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।

18 *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।

19 *पथरी*  अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 

20 *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा  पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।

21 *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22 *पेट के बल सोने से* हर्निया प्रोस्टेट एपेंडिक्स की समस्या आती है । 

23  *भोजन* के लिए पूर्व दिशा  *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।

24  *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।

25 *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।

26  *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है  यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है । 

27  *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।

28 *वात* के असर में नींद कम आती है ।

29  *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।

30 *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।

31 *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।

33  *आँखों के रोग*  कैट्रेक्टस मोतियाविन्द ग्लूकोमा  आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।

34 *शाम को वात*नाशक चीजें खानी चाहिए ।

35  *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।

36 *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।

37 *व्यायाम*  *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम  *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।

38 *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है  दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।

39 *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए थोडा व्यायाम जरुरी 

40 *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है  मालिश से *वायु* शांति होती है  उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास*  लंघन  से बुखार शांत होता है ।

41  *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है  क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।

42 *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों  

43 *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्लस्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।

44 *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का  दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।

45 *छिलके वाली दालसब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।* 

46 *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।

47 *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 

48 *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।

49 *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 

50 *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 

51 *अवसाद* में आयरन  कैल्शियम  फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है 

52  *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।

53  *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54 *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।

56 *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दोदो बूंद 1010 मिनट पर तीन बार दे ।

57 *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दोदो बूंद 1010 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 

58 *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट  सोंठकालीमिर्च मघा पीपली  भी दे सकते हैं ।

59 *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी  गुड  नारियल दें ।

60 *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 
61  *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।

62  *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।* 

63  *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 

64  *गौमूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*

65  *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।

66  *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है  34 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

67 *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।

68 *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।

69 *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।

70 *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 

71 *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 

72 *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 

73 *रास्ता चलने* श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 

74 *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।* 
75  *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

76 *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।

77 *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।

78 *सुबह के नाश्ते* में फल  *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए । 

79 *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे  दाल  पनीर  राजमा  लोबिया आदि । 
80  *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें  भोजन के समय टी वी ना देखें । 

81 *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान  व आग से दूर रहना चाहिए । 

82 *जो बीमारी जितनी देर से आती है  वह उतनी देर से जाती भी है ।*

83 *जो बीमारी अंदर से आती है  उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*

84 *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है  दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी  लीवर  आतें  हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 

85 *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए  ब्लडप्रेशर बढ़ता है । 

86   *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें  पहले जामुनी  फिर नीला  अंत में लाल रंग । 

87  *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए  क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है  स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 

88 *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं  उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है  क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 

89  *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है  मलमूत्र से 5  कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22  तथा पसीना निकलने लगभग 70  शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 

90 *चिंता  क्रोध  ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज  बबासीर  अजीर्ण  अपच  रक्तचाप  थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।* 

91  *गर्मियों में बेल  गुलकंद  तरबूजा  खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली  सोंठ का प्रयोग करें ।*

92 *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।

93 *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 

94 *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं  हमें उपयोग करना आना चाहिए*।

95 *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है  वही मोक्ष का अधिकारी है । 

96 *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है  लकवा  हार्टअटैक का खतरा कम होता है । 

97 *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*। 

98  *तेज धूप* में चलने के बाद  शारीरिक श्रम करने के बाद  शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है

99 *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात पित्त  कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी  गौमूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।

100 इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है  जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है इसे ना थूके ।

रविवार, 9 जून 2019

ॐ उच्चारण के 11 लाभ

*"ॐ" के उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ:*

*ॐ* ओउम् तीन अक्षरों से बना है। जिनमें है क्रमशः अ उ म्।

*"अ"* का अर्थ है उत्पन्न होना,

*"उ"* का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

*"म"* का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।

*ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।*

*ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।*

ॐ का उच्चारण कैसे स्वास्थ्यवर्द्धक और आरोग्य के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

*उच्चारण की विधि*

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। 

ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। 

इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

*01) ॐ और थायराॅयडः* ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

*02) ॐ और घबराहटः-* अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

*03) ॐ और तनावः-* यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। 

*04) ॐ और खून का प्रवाहः-* यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

*5) ॐ और पाचनः-* ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

*06) ॐ लाए स्फूर्तिः-* इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

*07) ॐ और थकान:-* थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

*08) ॐ और नींदः-* नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

*09) ॐ और फेफड़े:-* कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

*10) ॐ और रीढ़ की हड्डी:-* ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

*11) ॐ दूर करे तनावः-* ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे। साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है।
अपना ख्याल रखिये, खुश रहें।

प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...