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डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावशाली है ।Delta plus variant

  डेल्टा प्लस वेरिएंट,Delta plus variant भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर का चरम निकल चुका है और एम्स के निदेशक डाक्टर रणदीप गुलेरिया 6 से 8 हफ्तों में तीसरी लहर के आनें का अंदेशा जता चुके हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस के डेल्टा वेरिएंट में म्यूटेशन कर बने ने डेल्टा प्लस वेरिएंट ने लोगों को संक्रमित करना शुरू कर दिया है और डाक्टर रणदीप गुलेरिया की बात पर मुहर भी लगना शुरू हो गई है। तो क्या भारत में तीसरी लहर के पीछे डेल्टा प्लस वेरिएंट जिम्मेदार होगा आईए जानते हैं डेल्टा प्लस वेरिएंट के बारें में विस्तार से डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है ? विशेषज्ञों के अनुसार डेल्टा वेरिएंट जिसे बी .1.617.2 भी कहा जाता है ,इस वायरस के स्पाइक प्रोटीन में  वायरस ने अपनी म्यूटेट होने की पद्धति से म्यूटेशन कर लिया है,जिसकी वजह से यह बहुत तेजी से संक्रमित करता है।  चिकित्सकों के मुताबिक डेल्टा वेरिएंट जहां फेफड़ों की कोशिकाओं को संक्रमित करने में आठ दिन लगाता है वहीं डेल्टा प्लस वेरिएंट मात्र दो दिन में ही फेफड़ों को संक्रमित कर देता है। डाक्टर एंथोनी फाउसी जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चिकित्सा सलाहक

मध्यप्रदेश के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

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  मध्यप्रदेश गेंहू उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य हैं, यहां की मिट्टी की उत्पादकता देश में सर्वाधिक मानी जाती है, किंतु फिर भी प्रति हेक्टेयर गेंहू उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से पिछे है। प्रति हेक्टेयर कम गेंहू उत्पादन का मुख्य कारण किसान भाईयों द्वारा क्षेत्रवार और सिंचाई की सुविधा अनुसार अनुशंसित किस्मों का नहीं बोना है। यदि किसान भाई क्षेत्रवार और सिंचाई की सुविधा अनुसार गेंहू की उन्नत किस्मों का चुनाव करें तो प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन लें सकतें हैं।  आईए जानते हैं मध्यप्रदेश के क्षेत्रानुसार गेंहू की अनुशंसित उन्नत किस्मों के बारे में मालवा क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में मालवा क्षेत्र में मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसौर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर,धार,देवास जिले का सम्पूर्ण क्षेत्र जबकि गुना जिले का दक्षिण भाग सम्मिलित हैं।  इन क्षेत्रों में औसत वर्षा 750 मिलीमीटर से 1250 मिलीलीटर तक होती हैं। यहां के अधिकांश क्षेत्रों में भारी काली मिट्टी पाई जाती है। मालवा क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में निम्न प्रकार है। असिंचित और अर्धसिं

Post covid syndrome - पेट साफ नहीं हो रहा है, ये कारण तो जिम्मेदार नहीं

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  जो लोग कोरोना से ठीक हो रहें हैं या हो चुकें हैं उन्हें की तरह के post covid syndrome परेशान कर रहे हैं। किसी टैकीकार्डिया  व्यक्ति को  हो रहा है तो किसी व्यक्ति को छाती में जकड़न महसूस हो रही है।  विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो चुके लगभग 40 प्रतिशत लोग पेट से संबंधित समस्या परेशान हो रहे हैं और ये परेशानी भी केवल एक तरह की न होकर कई तरह की है जैसे • कब्ज होना • पेटर्दद होना • आंतों में दर्द • पेट में गैस बनना या एसिडिटी • भोजन नही पचना • पेट खाली रहने पर भी भोजन करने जैसा एहसास होना • पेट में जलन होना • अर्श या बवासीर होना कारण  चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो रहें लोगों में पेट से संबंधित  परेशानियों के कई कारण जिम्मेदार है जैसे आंतों में कोरोनावायरस का संक्रमण Sars Cov 2 वायरस फेफड़ों के साथ साथ पेट क आंतों को भी संक्रमित करता हैं यदि आंतों में यह वायरस लम्बे समय तक मौजूद रहता है तो आंतों की कार्यप्रणाली को कम कर सकता है जिससे कब्ज, आंतों में दर्द, आंतों में घाव होना,इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, आदि बीमारीयां पैदा हो जाती हैं। यदि निचली आंतों में वायरस का संक्रमण अधिक होत

Homeopathy :: बाख फ्लावर रेमेडीज ।Bach flower remedy

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  बाख फ्लावर रेमेडीज ।Bach flower remedy बाख फ्लावर रेमेडीज होम्योपैथी के सिद्धांत पर आधारित रेमेडीज है,जिनकी खोज डाक्टर एडवर्ड बाख द्वारा की गई थी। ये दवाईयां व्यक्ति की भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक असंतुलन को ठीक कर व्यक्ति को स्वस्थ बनाती है। बाख फ्लावर रेमेडीज 38 प्रकार के जंगली फूलों से बनाई जाती है।  ये रेमेडीज व्यक्ति के मानसिक लक्षणों के आधार पर दी जाती है अर्थात यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इन जंगली फूलों से बनी रेमेडीज को लेगा तो उसे वहींं मानसिक  लक्षण प्रकट होंगे जो बीमार व्यक्ति में प्रकट होते हैं, यदि ये रेमेडीज समान‌ मानसिक लक्षण वाले व्यक्ति को दे दी जाए तो उसकी बीमारी ठीक हो जाती हैं।  आईए जानते हैं इन homeopathy remedy के मानसिक लक्षणों बारें में 1.एग्रीमनी Agrimony के मानसिक लक्षण जो लोग किसी बुरें व्यसन में फंसे हो, चिंतित हो किन्तु ऊपर से हंसमुख बनें रहते हो , जिन्हें नींद नहीं आती हो। लड़ाई झगड़ों से दूर रहते हो और इनसे बचने के लिए अपना बहुत नुक़सान भी करवा लेते हो। एग्रीमनी पेशेंट बहुत अच्छा मित्र होता है। 2.ऐस्पेन Aspen के मानसिक लक्षण ऐस्पेन का मरीज बहुत अधिक डर और प

Social media - आखिर क्यों कुछ लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के शिकार बन रहें हैं

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 हमारे समाज में कुछ लोग सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, वाट्स एप, ट्विटर,पिनट्रेस्ट, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम कू आदि सोशल मीडिया साइट्स पर अकाउंट तो बना लेते हैं और अकाउंट बनाने के बाद ढेरों फ्रेंड और दर्जनों ग्रुप भी जाइन कर लेते हैं और इन साइट्स पर क्या चल रहा है , ग्रुप में क्या हो रहा हैं यह भी बराबर देखते रहते हैं, लेकिन ये लोग न के बराबर कोई फोटो अपलोड करतें हैं और बहुत कम किसी पोस्ट पर कमेंट,लाइक करतें हैं, ऐसा ये लोग इसलिए नहीं करते कि ये बहुत व्यस्त रहते हैं या इन्हें अपने काम से इतनी भी फुर्सत नहीं मिल पाती है कि सोशल मीडिया को देख सकें बल्कि ये लोग एक अजीब मानसिक समस्या से पीड़ित रहते हैं जिसे सोशल मीडिया एंग्जाइटी कहते हैं। सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति के मन में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने कमेंट करने,लाइक करने में इतनी घबराहट और चिंता उभर आती है कि  यदि वह इस तरह का काम करता है तो उसे करने से पहले घंटों तक सोचेगा और यदि उसने किसी पोस्ट पर कमेंट या लाइक किया है तो प्रतिउत्तर में कोई क्या कहेगा इसको लेकर बार बार अपना कमेंट चेक करेगा इस दोरान यदि किसी ने उसे नकारात्मक जवाब दे

Rainy season :: ह्रदयरोगी ये सावधानियां जरुर रखें

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Rainy season :: ह्रदयरोगी ये सावधानियां जरुर रखें बरसात का मौसम Rainy season शुरू होने वाला है और इसके साथ ही वातावरण में उमस नमी और ठंडाई घुल जाती हैं। ह्रदयरोग विशेषज्ञों की मानें तो बरसात से लेकर ठंड की शुरुआत तक जाती में दर्द,एंजाइना, ह्रदयरोग के बहुत अधिक मामले प्रकाश में आते हैं।  ऐसे निम्न कारणों से होता है । • बरसात में यदि कोई ह्रदयरोगी, उच्च रक्तचाप का मरीज, मधुमेह रोगी लम्बें समय तक गीला होता है तो शरीर में ठंड उतर जाती हैं फलस्वरूप ह्रदय की धमनियां सिकुड़ जाती है और ह्रदय को अधिक क्षमता से कार्य करना पड़ता हैं। जब ह्रदय अधिक कार्यक्षमता से काम करता है तो रक्तचाप बढ़ जाता है और ह्रदयरोग के ओर गंभीर होने की संभावना बन जाती है । दूसरे शब्दों में कहें तो heart attack आनें की संभावना होती है। • बरसात के मौसम में उमस अधिक होने और पसीना अधिक निकलने के कारण रक्त गाढ़ा होने और रक्त का थक्का बनने की संभावना बहुत अधिक होती हैं ।  • लम्बें समय तक बरसात होने से शारीरिक गतिविधि नहीं हो पाती ऐसा उन बुजुर्गों के साथ अधिक होता है जो सुबह शाम मार्निंग वाक के लिए पार्क में या अपने हमउम्र के स

सितोपलादि चूर्ण के फायदे

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सितोपलादि चूर्ण के फायदे । sitopladi churna ke fayde  सितोपलादि चूर्ण के घट़क (content) ::: ० सितोपला (sitopla). ० वंशलोचन (vanshloshan). ० पिप्पली (pipali). ० एला.(ela). ० दालचीनी (cinnamon).  सीतोपलादि चूर्ण रोगाधिकार (indication) या सितोपलादि चूर्ण के फायदे ::: ० कास (cough). ० पित्त श्वास. (Dry asthma). ० ज्वर (fever). ० हाथ पैरो की जलन (hand's feet burning). ०पीठ में दर्द (backache). ० क्षय रोग (Tuberculosis). ० उर्धगत रक्त पित्त. ० अटोचक. मात्रा (Dosage) ::: घी या  शहद  के साथ वैघकीय परामर्श से. हरीतकी चूर्ण (Haritaki churna) ::: घट़क (content) ::: ० हरड़ फल. रोगाधिकार (indication) या हरीतकी चूर्ण के फायदे ::: ० नेत्र रोगों में (eye Disease). ० अर्श (piles). ० रसायन. ० अतिसार (Diarrhoea). ० अजीर्ण (indigation). ० प्रमेह या मधुमेह (Diabetes). ० मोतीक्षरा (Typhoid). ० कब्ज (constipation). मात्रा (Dosage) ::: शहद  या जल के साथ वैघकीय परामर्श से. ० तुलसी ० पलाश वृक्ष के औषधीय गुण ० पंचनिम्ब चूर्ण ० गिलोय के फायदे