16_03

आंवला,औषधीय गुणो का खज़ाना

 आंवला

                

आँवला  परिचय::



स्कंद पुराण ,गरूड़ पुराण में आंवले की महिमा का विशद वर्णन मिलता हैं. महर्षि च्यवन ने पुन: युवा होनें के लिये आंवलें से बनायें गये च्यवनप्राश का प्रयोग किया था.
आंवला यूकोरबियेसी कुल का सदस्य हैं जिसे वनस्पति जगत में एमाब्लिका आफिलिनेलिस   के नाम से जाना जाता हैं.


अंग्रेजी में इसे इंडियन गुजबेरी और संस्कृत में आमलकी के नाम से जाना जाता हैं ।


उपस्थित तत्व::-




1.पानी :: 8.12%



2.कार्बोहाइड्रेट :: 14.1%




3.फायबर :: 3.4%



4.प्रोटीन ::0.5%




5.फैट ::0.1%



6.खनिज लवण :: 0.7%



7.विटामीन सी :: 121 मिली ग्राम



8.आयरन:: 12 मिली ग्राम



9.फास्फोरस ::20 मिली ग्राम




                                                    [प्रति 100 ग्राम ]









आंवले में सबसे अधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता हैं,जो अन्य फलों जैसे नांरगी,निम्बू से  बीस गुना अधिक होता हैं.
इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड़, ग्लूकोज,टैनिक एसिड़ एल्बयूमिन आदि तत्व भी पायें जाते हैं.



आंवला के उपयोग::-



आंवला त्रिदोष यानि वात, पित्त, कफ का शमन करनें वाला एक उत्तम फल हैं,इसका उपयोग निम्न दोषों में सफलता के साथ किया जाता हैं


१. स्कर्वी रोग में आंवले का सेवन रोग को जड़ से नष्ट करता हैं.


२.यह अस्थमा (Asthma)और फेफडों से संबधित रोगों में बहुत लाभदायक फल हैं यदि इसका सेवन कच्चा या रस निकाल कर किया जावें.


३.इसका रस आँखों में डालनें से नेत्र ज्योति बढाता हैं,और नेत्र सूजन को कम करता हैं.


४.स्वपनदोष में  दस ग्राम आंवला चूर्ण में बीस ग्राम चीनी मिलाकर सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैं.


५. पेचिस,प्रवाहिका तथा खूनी बवासीर में सूखा आँवला चूर्ण बहुत फायदे करता हैं.


६.आंवला चूर्ण, सोंठ चूर्ण, तथा अश्वगंधा चूर्ण को क्रमश: १:२:४ में मिलाकर  एक-एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करनें पर मानसिक रोग नष्ट हो जातें हैं ,विधार्थीयों को सेवन करवानें से बुद्धि तीक्ष्ण बनती हैं.


७.पेड़ का पका हुआ आंवला यदि हक़लानें वाला व्यक्ति नियमित रूप से खायें तो उसका हकलाना समाप्त हो जाता हैं.



८.आंवला खानें से रक्त में आक्सीजन का स्तर कभी कम नही होता फलस्वरूप चिर योवनता बनी रहती हैं,यही कारण हैं,कि महर्षि च्यवन ने आंवले का प्रयोग च्वयनप्राश में कर पुन: योवनता को प्राप्त किया था.



९.इसके अलावा आंवले का प्रयोग मुरब्बें के रूप में करनें से यह शरीर को शीतलता और तरोताजा रखता हैं.




१०.आंवले में हरड़,बहेड़ा को मिलानें से त्रिफला बनता हैं जो समस्त रोगों को नष्ट कर आरोग्य प्रदान करनें वाली औषधि हैं.




११.आंवला अंड़े की अपेक्षा एक हजार गुना दोष रहित फल है अत: स्वस्थ रहनें के लिये आंवले का सेवन अवश्य करें.




१२.आंवला का ताजा रस कोरोनावायरस से पीड़ित व्यक्ति को सुबह शाम  10 ग्राम पीलानें से बहुत तेजी से व्यक्ति ठीक होता हैं ।



१४.टीबी रोग में आंवले का रस बहुत आशातीत लाभ प्रदान करता हैं और इसके सेवन के बाद टीबी की दवाईयों की कार्यक्षमता में बढोतरी होती हैं ।



१५.आंवले के बीजों से निकला तेल बालो के बहुत उपयोगी माना जाता हैं। यह आंवला तेल बालों में लगाने से बाल काले,घने,मुलायम और मज़बूत बनते हैं ।



१६.आंवला के सूखे बीजों को उबालकर  बचे हुए पानी से बाल धोनें से बालो की रूसी समाप्त हो जाती हैं ।



१७.आंवला शरीर को डिटाक्स करता हैं जिससे किडनी, लीवर,ह्रदय  जैसे महत्वपूर्ण अंग बिना किसी रूकावट के काम करते रहते हैं ।


१८.यदि किसी को मूत्र की रूकावट हो गई हैं तो आंवला पावड़र पानी में घोलकर पेडू के आसपास लपेट दे,मूत्र खुलकर आने लगेगा ।




१९.माइग्रेन होनें पर आंवले का रस सिर पर लगानें से बहुत शीघ्रता से आराम मिलता हैं ।









० पलाश वृक्ष के औषधीय गुण



100 साल जीनें के तरीके


कोई टिप्पणी नहीं: