27 फ़र॰ 2018

सिंधु घाट़ी सभ्यता (Indus velly civilisation) के पतन का कारण

सिंधु घाट़ी सभ्यता के पतन के कारण :::




विश्व की सबसे प्राचीन नदी घाट़ी सभ्यताओं में शामिल सिंधु घाट़ी सभ्यता लगभग 600 वर्षों तक फलीभूत होनें के पश्चात ईसा के लगभग 1700 वर्षों पूर्व नष्ट़ हो गई इसके नष्ट़ होनें के कई कारण रहें हैं जैसें






#1. प्राकृतिक कारण =:




अनेक विद्धानों का मानना हैं कि यह सभ्यता प्राकृतिक आपदाओं जैसें महामारी,भयंकर आग,भूगर्भीय हलचल,नदियों का मार्ग परिवर्तन होनें,बाढ़ आदि की वज़ह से अपना मूल स्वरूप और आर्थिक आधार खो बैठी.




#2.विदेशी आक्रमण =:




अनेक विदेशी विद्धानों जैसें मार्शल,पिग्गट़ और व्हीलर का मानना हैं,कि आर्यों के आक्रमण ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ों को नष्ट़ कर दिया.




#3.आर्थिक कारण =:




सिंधु घाट़ी सभ्यता (Indus velly civilisation) व्यापार केन्द्रित  सभ्यता थी जिसके साक्ष्य हमें अनेक सैंधव स्थलों से प्राप्त हुये हैं.

व्यापार का शनै : शनै: पतन होनें से यह सभ्यता भी धिरे - धिरे नष्ट हो गई.

इसी प्रकार कृषि उत्पादन में कमी से भी इसका पतन सुनिश्चित हो गया.




# मानवीय कारण =:




सिंधु घाट़ी सभ्यता नगरीय सभ्यता थी. कालान्तर में इसके नगरों में बसनें हेतू लोगों का भारी दबाव पड़ा फलस्वरूप नगरों के संसाधन में कमी हुई और यह कमी नगर पूरी करनें में नगर असफल साबित हुए.अत : शनै: शनै: लोग इन नगरों से पलायन कर गये और सभ्यता नष्ट हो गई.

वास्तव में इस सभ्यता के पतन का कोई एक निश्चित कारण नहीं था बल्कि कई कारणों के अलग - अलग घट़ित होनें से यह सभ्यता नष्ट हो गई.

26 फ़र॰ 2018

बिटकाँइन (Bitcoin) क्या हैं भविष्य की मुद्रा या फिर बुलबुला :: एक विश्लेषण

## बिटकाँइन (Bitcoin) क्या हैं :::

वेदिक काल से लगाकर आज तक मनुष्य अपनी ज़रूरतों की वस्तु या पदार्थ क्रय करनें हेतू मुद्रा प्रणाली का उपयोग करता आया हैं.
आभासी मुद्रा, क्रिप्टोकरेंसी,Blockchain,
 बिटकाइन

इसी मुद्रा प्रणाली से अर्थव्यवसथा का संचालन होता हैं.विभिन्न राष्ट्रों की अपनी - अपनी मुद्रा हैं,जैसें अमेरिका का ड़ालर $ ( Doller) ,जापान (Japan) का येन ¥ (yen) भारत का  ₹ रूपया आदि.


इसी प्रकार से जापान के एक छद्म नाम के व्यक्ति सतोशी नाकामोतो (Satoshi Nakamoto) ने इंटरनेट़ (Internet) पर एक आभासी Digital मुद्रा का निर्माण किया इसी छद्म या आभासी मुद्रा को बिट़काइन कहतें हैं.
इसे क्रिप्ट़ोंकरेंसी (Cryptocurrince) भी कहतें हैं.

##  आभासी (virtual) से क्या आशय हैं ?

आभासी (virtual) मुद्रा से तात्पर्य हैं,कि इस मुद्रा का कोई भौतिक (Physical) आकार नहीं हैं, अन्य मुद्राओं की तरह इसे छुआ नहीं जा सकता ,पर्स में नहीं रखा जा सकता बल्कि Digital vollet में खरीदकर रखा जाता हैं.


## इसका निर्माण कैसें होता हैं ?

बिट़काइन ( Bitcoin)  निर्माण करनें की प्रक्रिया को बिट़काइन माइनिंग ( Bitcoin mining) कहा जाता हैं.

इस कार्य के लिये इंट़रनेट के साथ शक्तिशाली कम्प्यूट़र (Computer) और special Software की आवश्यकता होती हैं. इस software के माध्यम से जट़िल गणितीय प्रक्रिया को हल करना पड़ता हैं फलस्वरूप व्यक्ति को कुछ Points मिलतें हैं.

यही points बिट़काइन कहे जातें हैं जिनसे वस्तु खरीदी,होट़ल बुक ,ट़िकिट बुक आदि काम किये जा सकतें हैं,या इसे बिट़काइन Exchange के माध्यम से बेचा जा सकता हैं.

## बिट़काइन (Bitcoin) इतनी लोकप्रिय क्यों हो रही हैं ?

बिट़काइन की लोकप्रियता की मुख्य वज़ह इसमें किये जा रहें निवेश से हैं,इस मुद्रा को खरीदनें वाले व्यक्तियों को इसनें कुछ माह में ही 500% से 600%  तक रिटर्न दिया जिससे दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान इस मुद्रा की ओर गया .

## बिट़काइन ( Bitcoin) का क्या भविष्य हैं ?


भारत सहित दुनिया के कई देशों ने इस मुद्रा को अवैध (Invalid) घोषित कर रखा हैं वही दुसरी और जापान समेत कुछ अन्य देशों नें इस मुद्रा को वैध ( valid) घोषित कर इससे लेन देन को भी वैध कर दिया हैं.

यही स्थिति इस मुद्रा के भविष्य को लेकर निवेशकों सलाह देंनें वाले अर्थशास्त्रीयों की हैं ,ये लोग भी दो भागों में बट़े हैं आइयें जानतें हैं इनके बारें में 

## बिट़काइन (Bitcoin) के पक्ष में :::


अनेक अर्थशास्त्री इस मुद्रा को भविष्य की मुद्रा बताते हुये इसमें निवेश करनें वालों को भविष्य में इसकी किमत बढ़नें को लेकर आश्वस्त करते हुये देखे जा सकतें हैं.इसके पिछे उनका तर्क हैं,कि Digital currency के भविष्य को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता .

विश्व के अनेक राष्ट्रों ने इस मुद्रा में लेन देन को वैधानिक मान्यता प्रदान कर रखी हैं और भविष्य में जो राष्ट्र जितनी अधिक देर इस मुद्रा के वैधानिकिकरण  में करेगा वह उतना ही पिछडा हुआ माना जावेगा.

एक अन्य तर्क इसके निर्माण को लेकर दिया जाता हैं,कि इस मुद्रा का निर्माण अत्यंत सीमित हैं,और भविष्य में भी इसके सीमित रहनें की सम्भावना हैं फलस्वरूप अन्य मुद्राओं के समक्ष इसके मूल्य में गिरावट़ नही आयेगी.

## बिट़काइन के विपक्ष में तर्क :::


जिस तरह से भौतिक मुद्राओं की विनियामक संस्थाँए पूरी दुनिया में मोजूद है ऐसा बिट़काइन के साथ बिल्कुल भी नहीं हैं.

इसकी कीमत में बहुत तेजी से उतार चढ़ाव होता हैं,जो एक व्यवस्थित मुद्रा के मान्य सिद्धांत के पूर्णत: विपरीत हैं.और इसमें निवेश पोंजी (pongy) स्कीम की तरह हैं जिसमें निवेश के फायदों के बड़े - बड़े सपनें दिखाई जातें हैं.

बिट़काइन ( Bitcoin) investor ऐसे Account में पैसा  Transfer करतें हैं,जिसके बारें में कोई पता नहीं होता और जिसके बदले में उन्हें अपनें computer पर कुछ अंक मिलते हैं.
इन अंकों की भौतिक मुद्रा के समान कोई guarantee देनें वाला केन्द्रीय बैंक भी नही होता.


वास्तविकता में यदि Bitcoin का मूल्याकंन किया जाये तो अर्थशास्त्रीयों के समान दुनिया के देश भी इसी प्रकार से Bitcoin के पक्ष और विपक्ष में बंट़ चुके हैं.

जिन राष्ट्रों में इसे मान्यता प्राप्त है वहाँ इसका निर्बाध रूप से लेनदेन प्रचलन में हैं और वहाँ के केन्द्रीय बैंक इस मुद्रा में अपना भविष्य देख रहें हैं.

दूसरी ओर जो राष्ट्र इसे अपनी मुद्रा और केन्द्रीय बैंक के लिये ख़तरा मान रहे हैं वो इस मुद्रा को लेकर काफी सतर्क और संशकित हैं.और इसे पोंजी स्कीम बताकर नागरिकों को इसमें निवेश को लेकर सचेत कर रहें हैं.

यह सही हैं कि बिट़काइन का कोई नियामक तंत्र नहीं हैं और इसमें पैसा Invest करनें वाला इसके भुगतान को लेकर आशंकित रहता हैं,किंतु यह भी सही हैं कि जो देश जितनी जल्दी इस मुद्रा को अपना रहा हैं वह इसके नियामक तंत्र को लेकर भी सक्रिय हैं.

हो सकता है देर सबेरे बिट़काइन (Bitcoin) में वैश्विक मुद्रा के रूप में स्थापित होनें की क्षमता हो क्योंकि इसका तेजी से विस्तार तो यही परीलक्षित कर रहा हैं.




25 फ़र॰ 2018

पुनर्जागरण या रेंनसा क्या हैं .इसका क्या महत्व और कारण था ?


# पुनर्जागरण :::
रेनसा
 पुनर्जागरण

14 वीं से 16 वीं शताब्दी के मध्य यूरोप में मध्यकालीन अंधकार को समाप्त करतें हुये एक नवीन चेतना का उदय हुआ जिसे पुनर्जागरण या रेंनसा के नाम से जाना जाता हैं.

# महत्व :::

१.पुनर्जागरण ने ज्ञान और सत्ता की प्रतिष्ठा को कायम किया.

२.पुनर्जागरण काल में धार्मिक एँव परंपरागत विचारों को झकझोरकर उन पर कुठाराघात किया गया.

३.इस काल में स्वतंत्र विचारों को महत्व दिया गया इन विचारों को बनाये रखनें के लिये विचारक मर मिट़नें को तैयार रहतें थे.

# पुनर्जागरण का कारण :::


                       १.धर्मयुद्ध

११ वीं से १३ वीं शताब्दी के मध्य ईसाई धर्मस्थल यरूशलम को लेकर ईसाई और मुसलमानों के मध्य युद्ध हुआ जिसे क्रूसेड़ या धर्मयुद्ध कहा गया.

धर्मयुद्ध के पश्चात सामंतवादी व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया और आधुनिक तर्कपूर्ण विचारों को प्रश्रय दिया जानें लगा.

            २.व्यापार वाणिज्य का विकास

व्यापार वाणिज्य के विकास न
से एक नवीन  पूंजीपति वर्ग का उदय संभव हुआ, यह नवीन पूँजीपति वर्ग सामंतों के समक्ष ही था किंतु अधिकारों में उनसे कमज़ोर था .

नवीन चेतना के द्धारा पूंजीपतियों ने भी सामंतवादीयों के समान विशेषाधिकारों की माँग रखी फलस्वरूप इन दोंनों वर्गों में सत्ता संघर्ष पनपा.

० इंग्लैंड की क्रांति


            ३.कुस्तुनुतुनिया का पतन

453 ई.में तुर्की ने कुस्तुनुतिनिया पर हमला कर दिया कुस्तुनुतिनिया व्यापार वाणिज्य और कला क्षेत्र में संपन्न था.हमलें की वज़ह से व्यापारी कलाकार आदि इट़ली और जर्मनी की और निर्वासित हो गये ,जब ये लोग यहाँ पहुँचे तो अपनें साथ अपनी कला ,व्यापार भी लेकर गये जिससे यूरोप में नई चेतना का प्रादुर्भाव हुआ.


          ४.मुद्रणयंत्र और कागज का विकास


जर्मनी में गुंट़ेनबर्ग द्धारा मुद्रणयंत्र का आविष्कार हुआ ,इस आविष्कार ने और कागज के आविष्कार ने बाईबिल को जनसामान्य तक पहुँचा दिया फलस्वरूप पादरियों के लिये जो अब तक बाईबिल की मनमानी व्याख्या करतें थे और जनता पर शासन करतें रहें के प्रति रोष उत्पन्न हुआ और पुनर्जागरण संभव हो सका.









23 फ़र॰ 2018

11 शत्रु संपत्ति संशोंधन कानून क्या हैं [enemies empathy]


# शत्रु संपत्ति  क्या हैं ?

पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेनें वाले व्यक्तियों द्धारा भारत में छोड़ी गई संपत्ति को शत्रु संपत्ति की परिभाषा में रखा गया हैं.

## शत्रु संपत्ति से संबधित नया कानूून क्या हैं ?

भारत सरकार ने लगभग 49 साल पुरानें कानून को संशोंधित किया हैं.

नये कानून के अनुसार चीन और पाकिस्तान की नागरिकता लेनें वाले नागरिको द्धारा भारत में छोड़ी गई संपत्ति पर अब उनके वारिसों का अधिकार नही होगा .

ऐसी संपत्ति जब्त कर ली जायेगी और सरकार द्धारा इसके लिये नियुक्त शत्रु संपत्ति संरक्षक को सोंप दी जायेगी जो इन संपत्तियों को नीलाम कर देगा.

## ऐसी कितनी संपत्तियों का अब तक पता लगाया जा चुका हैं ?

लगभग 9280 शत्रु संपत्तियों का अब तक पता लग चुका है,और इनका अभिभावक " शत्रु संपत्ति संरक्षक " को बनाया जा चुका हैं.



20 फ़र॰ 2018

भावांतर भुगतान योजना क्या हैं ? [What is 'BHAVANTER' Bhugtan yojna

# भावांतर भुगतान योजना 

भावांतर भुगतान योजना कृषि से संबधित योजना हैं,जो म.प्र.शासन द्धारा संचालित हैं.


# उद्देश्य 

इस योजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों को उनकी फ़सल का उचित मूल्य दिलाना हैं ताकि किसानों की फसल उत्पादन लागत से कम दामों पर नहीं बिके और इस तरह किसान घाट़े में रहकर आत्महत्या को मज़बुूर ना हो.

# आधार 

१#.इस योजना में शामिल फसलों का मूल्य मंड़ी का माँड़ल भाव और निर्धारित दो राज्यों की मंड़ियों के माँड़ल रेट़ के आधार पर तय होता हैं.

२#.यदि फसलों का मूल्य निर्धारित माँडल रेट़ से कम होता हैं,तो अंतर की राशि का भुगतान किसानों को किया जाता हैं.

३#.इस योजना में यह भी प्रावधान जोड़ा गया हैं,कि यदि किसान फ़सल को तुरंत नहीं बेचना चाहे और फसल का भंड़ारण भंडारग्रह में करता हैं,तो चार माह तक भंडारग्रह का किराया सरकार वहन करेगी.

४#.फसल भंडारण की अवधि में यदि किसान को पैसो की आवश्यकता हुई तो भंड़ारित फसल के 25% के बराबर राशि ॠण के रूप में सहकारी संस्था से ले सकता हैं.

५#.इस राशि पर ब्याज की अदायगी सरकार करेगी जबकि जबकि मूल राशि फ़सल बिकनें पर किसान को वापस करनी होगी.

# भावांतर में शामिल फसले

मक्का,मूंगफली,तिल,रामतिल,सोयाबीन,उड़द,अरहर ,मूँग,चना,लहसुन,प्याज और सरसो


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# योजना की समीक्षा 


१#.इस योजना का उद्देश्य पवित्र हैं,जबकि क्रियान्वयन ढीला - ढ़ाला और किसानों के लिये हानि वाला हैं जैसें इस योजना में पंजीकरण की अनिवार्यता जो कि सिर्फ कस्बों और बड़े गाँवों के किसानों के लिये संभव हैं,जबकि छोटे गांवों में यह संभव नहीं हैं.

२#.इस योजना में माड़ल रेट़ की गणना अन्य दो राज्यों के संदर्भ में की जाती हैं,जो नितांत अव्यहवारिक हैं,क्योंकि विभिन्न राज्यों में फसल की लागत में दुगने से ज्यादा अंतर हैं,जैसे म.प्र.में प्याज की प्रति एकड़ लागत 75000 हजार बैठती हैं,जबकि महाराष्ट्र में यह प्रति एकड़ 30 से 35 हजार हैं.

३#.फसल बेचनें की अवधि निर्धारित हैं इस अवधि के दोरान मंड़ी व़्यापारी संगठित होकर फसल का दाम गिरा देते हैं फलस्वरूप किसानों को फसल के उचित दाम के लिये भावांतर की राशि के भरोसे रहना पड़ता हैं.

४#.भावांतर भुगतान राशि मिलने की समयावधि किसानों के लिये अनिश्चित हैं यह कई महिनों की प्रक्रिया हैं.

५#.एक अन्य व्याहवारिक समस्या मंड़ी के माँड़ल रेट़ को लेकर हैं,जिसमें कहा गया हैं,कि किसानों को अंतर की राशि का भुगतान दो मंड़ीयों के माँड़ल रेट़ के आधार पर किया जायेगा परंतु वास्तविकता यह हैं,कि सूचना संचार के इस युग में पूरें प्रदेश के व्यापारी अपनें WhatsApp ग्रुप पर सुबह ही तय कर लेतें हैं कि किसानों को क्या रेट़ देना हैं,फलस्वरूप किसानों को बहुत कम अंतर की राशि मिल पाती हैं.

कही - कही तो यह अंतर 20 से 25 रूपये तक ही हैं.



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