रविवार, 27 मार्च 2016

DISASTER MANAGEMENT AND HEALTHY LIFESTYLE आपदा प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली

 आपदा प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैलीDISASTER MANAGEMENT AND HEALTHY LIFESTYLE::



आजकल आपदा जिस गति से मानवीय स्वास्थ और जीवनशैली को प्रभावित कर रही हैं,ऐसा पिछली शताब्दी में पहलें कभी नहीं हुआ .

इन सबके पीछें अनेक मानवीय और पर्यावरणीय कारक जैसे जलवायु परिवर्तन,नाभिकीय कारक,युद्ध आतंकवादी घट़नायें,आदि तत्व प्रमुख रूप से जिम्मेंदार हैं. लेकिन आपदा से निपट़ने और उसके प्रबंधन में सरकारों की भूमिका को ज्यादा महत्व न देते हुए हमें स्वंय अपनें स्तर पर  सजग रहकर इन चुनौतियों से निपट़ना चाहिये क्योंकि जीवन आपका अपना हैं,तो जिम्मेंदारी भी आपकी अपनी हैं.

आईयें जानतें हैं आपदा के दोरान स्वस्थ जीवनशैली को कैसें बनायें रखें.

प्रबंधन::-


१. भूकम्प आनें के दोरान ज्यादा चीख पुकार करनें की बजाय तुरन्त सुरक्षित जगह पर पहुँच जावें,इन सुरक्षित  जगहों में शामिल हैं,खुली जगह,यदि मकान कच्चा हो तो पलंग,सोफा,टेबल ,मेंज सुरक्षित जगह मानी जावेंगी.


२. बुजुर्गों को आपदा के दोरान शांतचित्त रखनें का प्रयास करें.


३. कुछ चीजें जो हमेशा अपनें पास रखना चाहियें और ऐसी जगह रखी हो जँहा से आसानी से मिल सकें इन वस्तुओं में शामिल हैं,खानें का सामान,टार्च,प्राथमिक उपचार कीट,सूचना प्राप्त करनें का साधन जैसें रेड़ियो,मोबाइल,हेम रेड़ियों आदि.


३.  भूकम्प के बाद तुरन्त एक पल गँवायें प्रभावित लोगों की यथासंभव मदद करें .


४.सरकार या संबधित संस्था द्धारा दी जानें वाली सूचनाओं और निर्देशों का गंम्भीरतापूर्वक पालन करें और सूचना को अन्य प्रभावित लोगों के साथ बाँट़े.


५. आपदा के दोरान इंसानों से ज्यादा पशु पक्षी प्रभावित होते हैं अत: तुरन्त इन्हें खुलें में छोड़कर मारें गयें पशु पक्षी का उचित निस्तारण करें जिससे महामारी न फैल सकें.


७.बाढ़ आनें के दोरान तुरन्त ऊँचें स्थलों की और चलें जावें.


८. बम विस्फोट़ के दोरान घट़नास्थल को तुरन्त छोड़ दें तथा तुरन्त पुलिस को सूचित करें विस्फोट़ की चपेट़ में आयें व्यक्ति के रक्त रोकनें का प्रयास करें इसकें लियें प्रभावित स्थान के ऊपर रक्त शिराओं को बाँध दें.


९. बाढ़ के दोरान जलजनित बीमारीं से बचनें के लियें पानी साफ ,और उबालकर पीयें.


१०. बच्चों को आपदा के दोरान लगातार और उसके बाद भी खतरों से निपट़नें के लिये प्रशिक्षित करें .


११. यदि आपनें आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लिया हो तो आपदा से निपट़ने की रणनिति समुदाय के साथ बाँट़तें रहें क्योंकि हो सकता कि आप आपदा में फंसें हो और बचानें वाला आपके द्धारा प्रशिक्षित हो.



 म ॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉ







बुधवार, 23 मार्च 2016

TURMERIC, हल्दी के ऐसे फायदे जिन्हें आपनें पहले कभी नही पढ़ा होगा और हल्दी से बनने वाली औषधी हरिद्राखण्ड़ का परिचय



पीला रंग
Turmeric हल्दी  

हल्दी का परिचय :::

हल्दी कंद रूप में पायी जानें वाली विशिष्ट औषधि हैं,जो भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा हैं.इसका स्वाद कड़वा और कसेला होता हैं.इसकी प्रकृति उष्ण होती हैं.इसमें करक्यूमिन  नामक विशिष्ट रसायन पाया जाता है.

उपयोग::-
१. हल्दी में कैंसर नाशक गुण होतें हैं,इसमें उपस्थित रसायन करक्यूमिन कैंसर से नष्ट होनें वाली कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता हैं.

२. रक्त कैंसर में हल्दी और लहसुन पेस्ट मिलाकर दूध के साथ सेवन करनें से कैंसर की तीव्रता काफी हद तक कम हो जाती हैं.

३. हल्दी सौन्दर्य को बढ़ानें वाली होती हैं,शहद के साथ या तेल के साथ इसका उबट़न लगानें सें न केवल गोरापन बढ़ता हैं,वरन त्वचा संबधित बीमारीयाँ भी समाप्त हो जाती हैं.

४. शहद के साथ हल्दी को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करनें से खून की कमी दूर हो जाती हैं.

५. टाइफाइड़ होनें पर रोज़ सुबह खाली पेट़ हल्दी लेनें से टाइफाइड़ समाप्त हो जाता हैं.

६. पीलिया (jaundice) रोग में छाछ के साथ हल्दी चूर्ण मिलाकर पीनें से पीलिया कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाता हैं.

७.आँखों से संबधित समस्या में हल्दी को पानी में उबालकर पीनें से और ठंड़ा कर छानकर दो-दो बूँद आँखों में डालते रहनें से चश्मा उतर जाता हैं.

८. हल्दी उत्तम गर्भ निरोधक मानी जाती हैं,गुड़ के साथ मिलाकर लेते रहनें से गर्भ निरोध होता हैं.

९.आन्तरिक चोंटों में हल्दी अत्यन्त प्रभावकारी मानी जाती हैं,मावें के साथ मिलाकर गर्म कर प्रभावित स्थान पर बांधनें से अतिशीघ्र आराम मिलता हैं

१०. हल्दी वात,पित्त, कफ़ तीनों प्रकृति को नियत्रिंत करती हैं.

११. मुँह के छालों में हल्दी अत्यन्त गुणकारी हैं,इसकी ताजा गांठों का रस शहद के साथ मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगानें से अतिशीघ्र आराम मिलता हैं.

१२. बवासीर के लिये हल्दी को छाछ मिलाकर भोजनपरान्त लेनें से बवासीर खत्म हो जाता हैं.

१३. शीघ्र पतन में हल्दी को मिश्री के साथ मिलाकर सुबह शाम लगातार तीन माह तक लें.

१४. हल्दी उत्तम रक्तशोधक हैं.

१५.त्वचा झुलसनें या जलनें पर हल्दी के फूलों का रस बादाम चूर्ण और दही में मिलाकर लगाना चाहियें.











  हल्दी की कितनी मात्रा दैनिक रूप से लेनी चाहियें जिससे यह शरीर को फायदा पहुँचायें इस पर विशेषकर आयुर्वैद में बहुत विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया हैं कि रोग की तीव्रतानुसार रोगी को या सामान्यजन को वैघकीय परामर्श उपरान्त पाँच से दस ग्राम हल्दी लेना उचित रहता हैं.

हल्दी से बननें वाली औषधि

हरिद्राखण्ड़::

हरिद्राखण्ड़ हल्दी से बननें वाली शास्त्रोक्त औषधि हैं,जो कई एलर्जी रोगों की विशिष्ट औषधि हैं.

१. घट़क द्रव्य::

हल्दी, शक्कर,घी,सोंठ, कालीमिर्च,दालचीनी,वायविड़ंग,त्रिफला,नागकेशर,नागरमोथा,शुद्धलोहभस्म,निशोध,गोदुग्ध,पीपली,इलायची,तेजपान .

२.रोगोपयोगी::-

१. शरीर में शीतपित्त की वजह से होनें वाली समस्या पर.
२. लम्बें समय से जारी व्रण.
३. दाद, खाद,खुजली.
४. कुष्ठ .

सेवन विधि ::

वैघकीय परामर्श से







शुक्रवार, 18 मार्च 2016

MIGRAINE HEADACHE AND AYURVEDA,माइग्रेन

परिचय::-

माइग्रेन सिरदर्द के लक्षण
 माइग्रेन

माइग्रेन सिर में,आँखों के निचें बार -बार होनें वाला गंभीरतम दर्द होता हैं.ये दर्द सामान्य सिरदर्द से दर्द की तीव्रता और बारम्बारता की वज़ह से अलग होता हैं.इसे 

लक्षण::-
१.अचानक तेज सिरदर्द होना जो कि जो कि सिर के एक भाग या दोनों भागों में एक साथ हो सकता हैं.

२.सिरदर्द के साथ उल्टी ,जी मचलाना,चक्कर,बेहोशी होना.

३. तेज आवाज़,रोशनी के कारण तेज सिरदर्द.

४.सुनने,बोलनें में परेशानी.

५. हाथ,पैरों में कंपकंपी या सुन्नपन.

६.कई रोगीयों में आँखों के सामनें चमकनें जैसा अहसास होता हैं,ऐसा इसलिये होता हैं,कि माइग्रेन के कारण पैदा होनें वाली इलेक्ट्रिक और केमिकल तरंगे पूरें मस्तिष्क में फेल जाती हैं, और उस हिस्सों को घेर लेती हैं,जिससे चीजों को देखतें हैं.

७.दर्द के दोरान कानों से कम सुनाई देता हैं.

कारण::-

१. माइग्रेन का पारिवारिक इतिहास होनें पर.

२.अनियमित दिनचर्या.

३.औषधियों के साईड़ इफेक्ट से.

४. हार्मोंन के असंतुलित होनें से.

४. सायनस या नाक से संबधित समस्या होनें पर.

५. सिर में चोंट़ की वज़ह से.

६. शराब,तम्बाकू उत्पादों के सेवन से.


नीम के औषधीय उपयोग


० पलाश वृक्ष के औषधीय गुण



उपचार::-



सर्वप्रथम पंचकर्म चिकित्सा के साथ शुरूआत कर रोग की तीव्रता को कम किया जाता हैं.
१. सिरसूलादि वज्र रस एक गोली सुबह शाम भोजन के बाद.

२. त्रिफला चूर्ण रोज़ रात को सोते समय गुनगुने जल के साथ.

३. भ्रामरी और अनुलोम - विलोम प्राणायाम का इस रोग में विशेष महत्व हैं.

४. पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिये.

५. सोनें का समय निश्चित होना चाहियें.

६. संतुलित भोजन होना चाहियें जिसमें पर्याप्त सब्जियाँ और सलाद हो.

७. तेज मिर्च मसालेदार भोजन से परहेज करें.

८. मोबाइल या कम्प्यूट़र का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखना चाहियें कि कमरें में पर्याप्त रोशनी हो.

९. सोतें समय तकियें की ऊँचाई अधिक नहीं होनी चाहियें.

१०. गाजर का रस ,ककड़ी ,तरबूज तथा खीरा ककड़ी इस बीमारीं को नियत्रिंत करते  हैं अत: इनका सेवन करें ।

११.कार्यस्थल या घर का वातावरण ऐसा हो जहाँ पर्याप्त मात्रा में हवा का प्रवाह हो यदि हवा का प्रवाह कम होगा तो  मस्तिष्क में आक्सीजन की आपूर्ति कम होगी फलस्वरूप माइग्रेन का अटेक आनें की सम्भावना बढ़ जाएगी ।

१२.शोधों से यह बात स्पष्ट हुई हैं की सेब फल का लगातार सेवन मस्तिष्क में ग्लूटेमिक एसिड की मात्रा को संतुलित करता हैं । ग्लूमेंटिक एसिड मस्तिष्क में रक्त संचार को सुचारू रखता हैं जिससे मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी नहीं हो पाती हैं ।

१३.एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा हाथ के कुछ विशेष पॉइंट पर दबाव बनाकर इस रोग का प्रभावी उपचार सम्भव किया जा सकता हैं । देखें चित्र
migrain ka ilaj
 migrain accupressure point


कोई भी रोग जल्दी ख़त्म हो सकता हैं,यदि बीमारीं को पहचान कर उसका समय पर उपचार शुरू कर दिया जायें अत:बीमारीं शरू होते ही  जितना जल्दी हो सकें किसी अच्छे चिकित्सक से ज़रूर सलाह लें. 


वैघकीय परामर्श आवश्यक






मंगलवार, 15 मार्च 2016

CLIMATE CHANGE AND HEALTH ,जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ

क्या हैं जलवायु परिवर्तन ::-

पिछलें तीन चार दशकों से पृथ्वी के वातावरण में मानवीय क्रियाकलापों के कारण कार्बन डाई आँक्साइड़,मिथेन,नाइट्रस आँक्साइड़,क्लोरो फ्लोंरों कार्बन आदि गैसों की वज़ह से पृथ्वी के तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो गई है फलस्वरूप मौसम चक्र में भारी परिवर्तन हुआ हैं और असमय बाढ़,हिमपात,चक्रवात आनें लगे हैं,यह स्थिती जलवायु परिवर्तन से निर्मित हुई हैं.
जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ
 जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ

 स्वास्थ पर प्रभाव::-

१.ध्रुवों की बर्फ पिघलनें की दर अत्यधिक बढ़ जानें से मिठे पानी के स्त्रोंत सिमटते जा रहें हैं,फलस्वरूप आने वालें दशकों में बढ़ती हुई आबादी को पीनें का पानी उपलब्ध नहीं होगा.एशिया ,अफ्रीका,लेटिन अमेरिकी देशों में तो पानी के लियें युद्ध तक हो सकता हैं.



२. बढ़तें तापमान का असर पेड़ पौधों पर पर भी हो रहा हैं,फलस्वरूप फलदार वृक्ष अपना पेटर्न बदल रहें हैं,भारतीय देशी  आम इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं,जो एक साल छोड़कर फल देनें लगा हैं,इसकी वज़ह से कुपोषण बढ़ेगा.



३. फसलों की पैदावार कम होगी क्योंकि दुनिया की महत्वपूर्ण खाद्य फसल चावल और गेंहूँ एक निश्चित तापक्रम पर बढ़ती और पकती हैं,फलस्वरूप भूखमरी फैलेगी.



४.जलवायु परिवर्तन सें रोगों के जीवाणु अपना डी.एन.ए.बदल रहें हैं,जिससे मानव नित नयी-नयी बीमारींयों की चपेट़ में आ रहा हैं.डेँगू, जीका,स्वाईन फ्लू इसका सबसे बड़ा और सटीक उदाहरण हैं.

५.    तूफान लगातार और अधिक तीव्रता से आनें लगें हैं फलस्वरूप मानवीय हानि बढ़ रही हैं.

७.विश्व के छोटे द्धीप जलमग्न होनें की कगार पर हैं और वहॉ के निवासी गंभीर संकट में पड़ेगें जिससे निपटना संयुक्त राष्ट्र के लियें भी चुनोतीं होगा.

८.कार्बन मोनो आँक्साइड़ गैस के अधिक उत्सर्जन से साँस और फेफडों से संबधित बीमारीयॉ जैसे अस्थमा का अधिक प्रसार होगा.

बचाव के उपाय::-

यदि हमें हमारी प्रथ्वी को बचाना हैं,तो जलवायु परिवर्तन से निपट़नें के लियें गंभीर प्रयास करनें होगें जिनमें

१.पेंड़ पौधा का अधिकाधिक रोपण.

२. जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा.

३. ऐसे उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देना जिनके निर्माण में पर्यावरणीय मानको का प्रयोग किया गया हो और जो पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें जैसें प्लास्टिक की जगह मिट्टी के बर्तनों का उपयोग.

४.वाहनों के प्रयोग में सार्वजनिक परिवहन को वरीयता.

५.ऊर्जा के लियें स्वच्छ प्रोधोगिकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देना.

उपरोक्त प्रयासों को यदि हम ईमानदारी से करनें लगें तो एक बेहतर समाज और रहनें योग्य पर्यावरण के निर्माण में मदद मिलेंगी.





गुरुवार, 10 मार्च 2016

निम्बू एक फायदे अनेक

निम्बू
 Lemon
                         
# परिचय::-


निम्बू विश्व के हरेक राष्ट्र में उगाया और उपयोग किया जानें वाला फल हैं. आयुर्वैद में इसको रहस्यमय औषधि के रूप में माना जाता हैं.इसके रस में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं,इसके अलावा इसके छिलकों में उड़नशील तेल होता हैं.निम्बू अकेला न लेकर किसी पदार्थ जैसे पानी, खाद्य पदार्थ आदि में मिलाकर लिया जाता हैं.


निम्बू में प्रोटीन १ प्रतिशत ,वसा ०.९ प्रतिशत ,कार्बोहाइड्रेट ११.१ प्रतिशत, लोह तत्व ०.२६ प्रतिशत, कैल्सियम ७० मि.ग्राम,नियासिन ०.१ मि.ग्राम ,जल ८५ प्रतिशत तथा ऊर्जा लगभग ५७ कैलोरी होती हैं.


# उपयोग::-



१. कब्ज होनें पर दो चम्मच निम्बू रस तथा दो चम्मच शक्कर एक कप पानी में घोलकर रात को सोतें समय लेंनें से आराम मिलता हैं.


२.हिचकी होनें पर निम्बू के रस में काला रस मिलाकर सेवन करें.


३. निम्बू के छिलकों को सुखाकर उसमें काला नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर  लगानें से पायरिया में आराम मिलता हैं.


४. सिर में फुंसिया होनें पर निम्बू रस में बराबर मात्रा में सरसों तेल मिलाकर बालों की जड़ों में लगायें और एक घंटे बाद बालों को धो लें परन्तु शेम्पू का प्रयोग न करें.


५. कानों में दर्द होनें पर सरसों के तेल में १:२ में निम्बू रस मिलाकर उसे हल्का गर्म कर कानों में ड़ालें.


६. निम्बू एसीडीटी का दुश्मन माना जाता हैं, एसीडीटी होनें पर भोजन से आधा घंटे पहलें ठंडे पानी में पूरा निम्बू निचोड़कर पीनें से बहुत फायदा होता हैं.


७. किड़नी की पथरी होनें पर दिन में दो चार बार निम्बू रस पानी में मिलाकर पीना चाहियें.


८. निम्बू के पत्तियों का रस निकालकर फोड़े फुंसियों पर लगायें.


९.श्वेत प्रदर में निम्बू पत्तियों का रस योनि प्रक्षालन में उपयोग करें.


१०. बच्चों के पेट़ में कृमिं होनें पर दस बूंद निम्बू रस को पचास ग्राम दही में मिलाकर नियमित रूप से भोजन के बाद दें.


११. प्याज के रस और निम्बू रस को समान मात्रा में मिलाकर बालों में लगानें से बाल कालें चमकदार होकर असमय सफेद नहीं होतें हैं.


१२. मुलतानी मिट्टी में निम्बू रस मिलाकर चेहरे पर लगाते रहनें से झुर्रिया गायब हो जाती हैं.


१३.निम्बू का सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करता हैं,जिससे डिहाइड्रेशन से होनें वाली समस्याओं जैसें लू लगना,थकान,दस्त - उल्टी में आराम मिलता हैं.



वास्तव में निम्बू गुणों की खान हैं इसिलियें विद्धानों ने कहा भी हैं    सावन निम्बू सोने का   अर्थात सावन महिनें में निम्बू का सेवन सोनें जैसा लाभकारी हैं.



बुधवार, 9 मार्च 2016

Amazing benefits of Amla

 आंवला

                

आँवला  परिचय::



स्कंद पुराण ,गरूड़ पुराण में आंवले की महिमा का विशद वर्णन मिलता हैं. महर्षि च्यवन ने पुन: युवा होनें के लिये आंवलें से बनायें गये च्यवनप्राश का प्रयोग किया था.
आंवला यूकोरबियेसी कुल का सदस्य हैं जिसे वनस्पति जगत में एमाब्लिका आफिलिनेलिस  के नाम से जाना जाता हैं.


उपस्थित तत्व::-



आंवले में सबसे अधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता हैं,जो अन्य फलों जैसे नांरगी,निम्बू से  बीस गुना अधिक होता हैं.
इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड़, ग्लूकोज,टैनिक एसिड़ एल्बयूमिन आदि तत्व भी पायें जाते हैं.



आंवला के उपयोग::-



आंवला त्रिदोष यानि वात, पित्त, कफ का शमन करनें वाला एक उत्तम फल हैं,इसका उपयोग निम्न दोषों में सफलता के साथ किया जाता हैं


१. स्कर्वी रोग में आंवले का सेवन रोग को जड़ से नष्ट करता हैं.


२.यह अस्थमा (Asthma)और फेफडों से संबधित रोगों में बहुत लाभदायक फल हैं यदि इसका सेवन कच्चा या रस निकाल कर किया जावें.


३.इसका रस आँखों में डालनें से नेत्र ज्योति बढाता हैं,और नेत्र सूजन को कम करता हैं.


४.स्वपनदोष में  दस ग्राम आंवला चूर्ण में बीस ग्राम चीनी मिलाकर सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैं.


५. पेचिस,प्रवाहिका तथा खूनी बवासीर में सूखा आँवला चूर्ण बहुत फायदे करता हैं.


६.आंवला चूर्ण, सोंठ चूर्ण, तथा अश्वगंधा चूर्ण को क्रमश: १:२:४ में मिलाकर  एक-एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करनें पर मानसिक रोग नष्ट हो जातें हैं ,विधार्थीयों को सेवन करवानें से बुद्धि तीक्ष्ण बनती हैं.


७.पेड़ का पका हुआ आंवला यदि हक़लानें वाला व्यक्ति नियमित रूप से खायें तो उसका हकलाना समाप्त हो जाता हैं.


८.आंवला खानें से रक्त में आक्सीजन का स्तर कभी कम नही होता फलस्वरूप चिर योवनता बनी रहती हैं,यही कारण हैं,कि महर्षि च्यवन ने आंवले का प्रयोग च्वयनप्राश में कर पुन: योवनता को प्राप्त किया था.


इसके अलावा आंवले का प्रयोग मुरब्बें के रूप में करनें से यह शरीर को शीतलता और तरोताजा रखता हैं.

आंवले में हरड़,बहेड़ा को मिलानें से त्रिफला बनता हैं जो समस्त रोगों को नष्ट कर आरोग्य प्रदान करनें वाली औषधि हैं.

आंवला अंड़े की अपेक्षा एक हजार गुना दोष रहित फल है अत: स्वस्थ रहनें के लिये आंवले का सेवन अवश्य करें.


० गिलोय के फायदे


० पलाश वृक्ष के औषधीय गुण



100 साल जीनें के तरीके


शनिवार, 5 मार्च 2016

EXAMFOBHIA AND AYURVEDA

क्या है EXAMFOBHIA



दोंस्तों परीक्षा एक ऐसा शब्द हैं जिसका सामना प्रत्येक वर्ष हर विधार्थी  को करना ही पड़ता हैं परन्तु कुछ विधार्थी  पूरे पाठ्यक्रम को पूर्ण  करनें के बाद भी परीक्षा के समय इतनें तनावग्रस्त हो जातें है कि परीक्षा हाल में सब भूल जातें हैं.़ यही स्थिति EXAMFOBIA हैं.

लक्षण::-


१. नींद नहीं आना.


२. पेट़ में मरोड़ ,पेट़ फूलना.


३.उल्टी दस्त.


४.पढ़ाई में मन न लगना.


५.पढ़ा हुआ भूलना.


६.बैचेनी.


७. चिड़चिड़ापन,गुस्सा,हड़बड़ी.


८. हार्मोंन का असंतुलित होना.


९. ब्लड में शुगर लेवल कम होना आदि समस्या उपस्थित हो जाती हैं.



EXAMFOBHIA का सामना ऐसे करें::-



१.परीक्षा के दोरान ध्यान योगिक क्रियाएँ जैसें ग्यान मुद्रा अवश्य करें.


२. लम्बी गहरी सांस लेकर परीक्षा हाल में पूर्ण एकाग्रता से चार - पाँच बार ऊँ का उच्चारण करें.


३. पानी पर्याप्त मात्रा में पीयें.


४. भोजन कम कैलोरी युक्त हो जिसमें हरी सब्जी सलाद और फलों का समावेश हो.


५.पढ़नें के दोरान बीच - बीच में ब्रेक अवश्य लें.


६. पढ़नें के बाद पढ़ा हुआ मन ही मन दोहरावें.


७. सुबह  और रात को सारस्वतारिष्ट दो-दो चम्मच जल के साथ लें इससे एकाग्रता लानें में मदद मिलेगी.


८.ब्राम्ही वटी सुबह शाम एक-एक वटी जल के साथ लें इससे तनाव नहीं होता हैं


क्या न करें-::



१.जंक फूड़ न लें.


२.परीक्षा के दोरान नया पढ़नें की अपेक्षा पूरानें पढ़े हुए को दोहरायें.


३. भूखें न रहें.



अंत में यही कहना चाहूँगा की परीक्षा विषयों की होती हैं जिंदगी की नहीं महात्मा गांधी से लेकर सचिन तेंडुलकर तक अपने जीवन में औसत विधार्थी रहें है क्योंकि उन्होंनें वही किया जो उनके दिल को अच्छा लगा इसलिये वही करें जो मन को अच्छा लगें पढ़ाई और जीवन दोनों में यह बात समानता से लागू होती हैं.






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