19 अक्तू॰ 2019

सर्दियों में ठंड से बचाव करने के लिये खानपान कैसा होना चाहियें

*सर्दियों में ठंड से बचने और शरीर को गर्म रखने के लिए क्या खाए*


सर्दियों का मौसम आ गया है  और इससे आपको ठंड भी लग सकती हैं। सर्दियों के दिनों में सिर्फ स्वेटर पहनने से काम नहीं चलेगा, आपको अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना पड़ेगा जो आपको अंदर से गर्मी दे। आज हम आपको सर्दी से बचने के लिए और शरीर को गर्म रखने के लिए क्या खाना चाहिए? इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

आज के लेख में हम जानेंगे की सर्दी के मौसम में ठण्ड को दूर भगाने और शरीर को अंदरूनी रूप से गर्म रखने के लिए क्या खाना चाहिए? कौन सी चीजों के सेवन से सर्दियों में अन्दर से गर्म रहा जा सकता हैं। सर्दी से बचने के लिए यह आहार आपकी मदद करते हैं। 

सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए जरूर खाए यह चीज़े :-


*हल्दी* (घर की पिसी हुई हल्दी प्रयोग करें)


अगर आप ठण्ड के मौसम में बीमारियों से बचे रहना चाहते हैं तो हल्दी का सेवन जरूर करे। इसलिए लिए आप दूध में हल्दी मिला कर पकाए और पिए। इस हल्दी वाले दूध को रात को सोने से 1 घंटा पहले या फिर दिन में कभी भी पिए। इससे आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और सर्दी से राहत मिलेगी।


*अनार*


अनार में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और polyphenols पाए जाते हैं जो आपको बुखार कम करने में मदद करते हैं और सर्दी लगने से भी बचाते हैं। अनार को खाने से खून साफ़ होता हैं और धमनियों की ब्लॉकेज को खोला जा सकता हैं।


*तिल*


जाड़ो के दिनों में तिल का सेवन करने से शरीर को गर्मी मिलती हैं। तिल के तेल से मालिश करने से ठण्ड से बचाव होता हैं। तिल और मिश्री का काढ़ा बना कर पीने से खांसी जुकाम ठीक होता हैं और कफ़ फेफड़ो से बाहर निकलता हैं।


*दालचीनी*


दालचीनी को भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता हैं। दालचीनी स्वाद में मीठी और शरीर को एक नयी गर्मी देने वाली होती हैं। दालचीनी शरीर में गर्मी पैदा करती हैं जो आपको ठण्ड से लड़ने में मदद करती हैं। दालचीनी को आप खाना बनाने के अलावा चाय, कॉफ़ी में डाल कर इस्तेमाल करे सकते हैं।


*गाजर*


गाजर को खाने से आँखों की रोशिनी बढ़ती हैं। इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोतरी होती हैं, जिससे सर्दियों के मौसम में आपको ठडं नहीं लगती हैं। सर्दियों के दिनों में गाजर का हलवा जरूर खाना चाहिए, इससे एक तो आपको सर्दी से बचाव होगा, शरीर को अंदरूनी रूप से गर्मी मिलेगी ।


*हरी मिर्च*


हरी मिर्च को खाने से शरीर में गर्मी पैदा होती हैं। इसका तीखापन शरीर का तापमान बढ़ाने में मदद करता हैं। इसलिए ठण्ड के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए हरी मिर्च को जरूर खाए।


*शहद*


जब भी आपकी खांसी या जुकाम होता हैं तो एक चम्मच शहद खाने की सलाह दी जाती हैं। यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने का एक नेचुरल तरीका हैं। सर्दियों के दिनों में शहद को खाने से यह आपको सर्दी लगने से बचाता हैं। शहद एक नेचुरल स्वीटनर माना जाता हैं, आप चीनी की जगह इसका इस्तेमाल करे। शहद आपकी कैलोरी को भी कम करने में मदद करता हैं। सर्दी से बचने के लिए और शरीर को गर्म रखने के लिए सर्दियों में शहद को जरूर खाए।


*खट्टे फल*


खट्टे फलो में विटामिन सी और फ्लावोनोइड पाए जाते हैं जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह शरीर को गर्म रखने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा खट्टे फलो को खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी बढ़ता हैं।


*बादाम*


ज्यादातर यही कहा जाता हैं की बादाम खाने से दिमाग का विकास होता हैं और याददास्त अच्छी होती हैं। लेकिन सर्दियों में बादाम खाने से कब्ज़ की समस्या दूर होती हैं और सर्दी से भी बचाव होता हैं। इसमें विटामिन ई पाया जाता हैं जो हमे सर्दियों में होने वाले स्किन प्रॉब्लम से बचाता हैं।


*लहसुन*


हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को लहसुन खाने की सलाह दी जाती हैं। लेकिन ठण्ड के मौसम में लहसुन खाने से हमारे शरीर को अंदरूनी रूप से गर्मी मिलती हैं। लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो हमें बैक्टीरिया और वायरस के हमले से बचाते हैं। गले में खराश होने पर 2-3 कच्ची लहसुन की कलियाँ खाने से आराम मिलता हैं। ठण्ड से बचने के लिए लहसुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता हैं।


*लौंग*


लौंग के सेवन से शरीर में गर्मी आती हैं। लौंग का इस्तेमाल ठण्डे इलाको में सबसे ज्यादा किया जाता हैं। लौंग का इस्तेमाल आप चाय में डाल कर भी कर सकते हैं।


*प्याज*


प्याज खाने से बॉडी का टेम्परेचर बढ़ जाता हैं और पसीना आने लगता हैं। इससे बॉडी की इम्युनिटी भी बढ़ती हैं।


*ड्राई फ्रूट*


ठण्ड से बचने से के लिए आपको ड्राई फ्रूट का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके लिए आप अखरोट, मूंगफली और बादाम को खा सकते हैं। यह विटामिन, फाइबर से भरपूर होते हैं जो आपको गर्मी प्रदान करते हैं।


*मूंगफली*


सर्दी के मौसम में मूंगफली को जरूर खाना चाहिए। मूंगफली को खाने से शरीर में गर्मी आती हैं और सर्दी से बचाव होता हैं।


*अमरुद*


खट्टे फले की तरह अमरुद में भारी मात्रा में विटामिन सी होता हैं जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं। इसमें मैग्नीशियम और पोटैशियम भी पाया जाता हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाता हैं और दिल के लिए भी अच्छा माना जाता हैं।


*बाजरा*


बाजरा को खाने से शरीर में गर्मी आती हैं। कई ग्रामीण इलाको में बाजरे की रोटी और टिक्की का इस्तेमाल सर्दी से बचने के लिए किया जाता हैं। दुसरे अनाजों के मुकाबले बाजरे में प्रोटीन सबसे ज्यादा पाया जाता हैं। ठडं से बचने के लिए बाजरा जरूर खाए, आप छोटे बच्चो को भी बाजरे की रोटी खिला सकते हैं।


*मेथी का साग*

मेथी के साग में आयरन और फोलिक एसिड ज्यादा मात्रा में पाया जाता हैं। मेथी के साग को खाने से शरीर में खून की वृद्धि होती हैं और शरीर में गर्मी पैदा होती हैं।


*अदरक*


सर्दी से बचने के लिए और शरीर को गर्म रखने के लिए अदरक से सस्ता उपाय और कोई नहीं हैं। आप सुखी और कच्ची अदरक दोनों का इस्तेमाल करे सकते हैं। अदरक के सेवन से बॉडी की इम्युनिटी बढ़ती हैं। अपने शरीर को गर्म रखने के लिए आप अदरक वाली चाय को भी पी सकते हैं। सर्दी जुकाम को दूर करने के लिए अदरक के रस में शहद मिला कर लेने से फायदा होता हैं। अदरक के सेवन से आप गले की खराश भी दूर कर सकते हैं।


*गुड़*


सर्दियों के दिनों में गुड़ का सेवन जरूर करे। सर्दियों के दिनों में तिल और गुड़ से बनी तिलकुट और रेवड़ी खाने से शरीर में गर्मी आती हैं। मूंगफली और गुड़ से बनी गज्जक खाने से भी ठण्ड से बचा जा सकता हैं। इससे सीने में जमी कफ बाहर निकल जाता हैं।




० सर्दी के लिये ब्यूटी टिप्स



० अश्वगंधा


० कद्दू के औषधीय उपयोग



हाइड्रेक्सी क्लोरोक्वीन सल्फेट



13 अक्तू॰ 2019

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) क्या हैं

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)

* सूचना का अधिकार यानी राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है.

* इस कानून के तहत देश के हर नागरिक को सरकार की पॉलिसी और अन्य गतिविधियों व सूचना की जानकारी मांगने का हक दिया जाता है.

* RTI भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ.

* RTI हर नागरिक को अधिकार देता है कि वह
> सरकार से कोई भी सवाल पूछ सके या कोई भी सूचना ले सके.

> किसी भी सरकारी दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ले सके.

> किसी भी सरकारी दस्तावेज की जांच कर सके.

> किसी भी सरकारी काम में इस्तेमाल सामग्री का प्रमाणित नमूना ले सके.

* इस कानून का मकसद सरकारी महकमों की जवाबदेही तय करना होता है और ट्रांसपेरेंसी लाना होता है ताकि करप्शन पर अंकुश लग सके.

* इस कानून का उपयोग सिर्फ भारतीय नागरिक ही कर सकते हैं.

* इस कानून में निगम यूनियन कंपनी वगैरह को सूचना देने का प्रावधान नहीं है क्योंकि यह नागरिक की परिभाषा में नहीं आते.

* अगर आपके बच्चों के स्कूल के टीचर अक्सर गैरहाजिरी रहते हो, आपके आसपास की सड़के खराब हालात में हो, सरकारी अस्पतालों या हेल्थ सेंटर में डॉक्टर या दवाइयां ना हो, अफसर काम के नाम पर रिश्वत मांगे या फिर राशन की दुकान पर राशन ना मिले तो आप RTI के तहत ऐसी सूचना पा सकते हैं.

* नागरिक डिस्क, टेप, वीडियो कैसेट या किसी और इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट आउट के रूप में भी सूचना मांग सकते हैं बशर्ते यह सूचना पहले से ही इस रूप में मौजूद हो.

* RTI के तहत आने वाले विभाग


> राष्ट्रपति प्रधानमंत्री राज्यपाल और मुख्यमंत्री का दफ्तर

> संसद और विधानमंडल

> चुनाव आयोग

> सभी अदालतें

> तमाम सरकारी दफ्तर

> सभी सरकारी बैंक और अस्पताल

> पुलिस महकमा और सेना के तीनों अंग

> पीएसयू

> सरकारी फोन कंपनियां

> सरकारी बीमा कंपनियां

> सरकार से फंडिंग पाने वाले NGO

* खुफिया एजेंसी या ऐसी जानकारियां जिसके सार्वजनिक होने से देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो साथ ही दूसरे देशों के साथ भारत से जुड़े मामले RTI के तहत नहीं आते हैं.

* सूचना का अधिकार प्राप्त करने के लिए कुछ शुल्क भी देनी होती है जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग निर्धारित है.

* आवेदक को सूचना मांगने के लिए कोई वजह या पर्सनल ब्यौरा देने की जरूरत नहीं होती है.

* एप्लीकेशन में फोन या मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं होता.
* एप्लीकेशन आप किसी भी सादे कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप करा कर अधिकारी के पास जमा करा सकते हैं.

* एप्लीकेशन हिंदी अंग्रेजी या किसी भी स्थानीय भाषा में लिखा जा सकता है.


* एप्लीकेशन में लिखना होता है कि क्या सूचना चाहिए और कितनी अवधि की सूचना चाहिए.

* गरीबी रेखा के नीचे की कैटेगरी में आने वाले आवेदक को किसी भी तरह का फीस नहीं देना होता.

* अगर सूचना ना मिले या प्राप्त सूचना से आप संतुष्ट ना हो तो अपीलीय अधिकारी के पास सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुच्छेद 19 (1) के तहत एक अपील दायर की जा सकती है.

० अटल बिहारी वाजपेयी

11 अक्तू॰ 2019

शरद पूर्णिमा का महत्व और आयुर्वेद

*शरद पूर्णिमा का महत्व और आयुर्वेद
शरद पूर्णिमा कब है
 *शरद पूर्णिमा- 

शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है, पंचम बंगाल में इस दिन लक्ष्मी पूजा होती है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। 

*मान्यता है कि चन्द्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होने के कारण इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है जो औषधीय व आरोग्यवर्धक होता है। तभी इस दिन भारत के अधिकांश हिस्सों में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है, जिससे खीर में चन्द्रमा के औषधीय आरोग्यवर्धक गुण चांदनी के माध्यम से प्रवेश कर जाएं। इसे खाकर स्वास्थ्य लाभ मिले।*

आयुर्वेद कहता है कि चन्द्र किरणों से अमृत झरता है, विभिन्न औषधियां चन्द्रमा की रौशनी से ही बल प्राप्त करती हैं।

शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की रौशनी में स्वयं को नहलाएं, चावल की खीर बना के ठण्डी कर लें और उसे इस तरह रखें क़ि चन्द्रमा की रौशनि उस पर पड़े। घर में चांदी या स्टील के बर्तन में ही खीर रखें। स्टील के बर्तन में खीर रखकर उसमे चांदी की चम्मच या चांदी की साफ़ धुली अंगूठी भी डाल कर रख सकते हैं।

जिनके पास छोटा चांदी का बर्तन हो वो उस बर्तन में कच्चा गाय का दूध भरकर उसका अर्घ्य/चढ़ा दें। सौभाग्य की वृद्धि होती है।

हो सके तो मध्य रात्रि 11:30 से 12:30 तक चन्द्रमा को खुली आँखों से देखते हुए चन्द्रमा में अपने ईष्ट आराध्य का ध्यान करें। आपको चश्मा भी लगता हो तो भी खुली आँखों से ही चन्द्रमा देखें और अपने नेत्र की नसों के माध्यम से चन्द्र की रौशनि को आँखों  और मष्तिष्क तक पहुंचने दें।

दस माला गायत्री का जप और एक माला चन्द्र गायत्री का मन्त्र चन्द्रमा में अपने ईष्ट आराध्य की कल्पना करते हुए जपें। और चन्द्रमा में ईष्ट आराध्य का ध्यान करते हुए उनके ध्यान में खो जाएँ।

*उदाहरण- हम युगऋषि परमपूज्य गुरुदेव का ध्यान चन्द्रमा में शरद पूर्णिमा के दिन करते हैं। लगातार चन्द्र को देखते रहते हैं, लगभग 15 से 20 मिनट के अंदर ही गुरुदेव का चेहरा हमारा मष्तिष्क कल्पनाओ के और ध्यान के तीव्र स्पंदन में दिखाने लगता है। चन्द्रमा में ही कल्पना शक्ति और ध्यान की एकाग्रता में ब्लैक एन्ड व्हाईट चांदी सा चमकता हुआ अपने ईष्ट आराध्य के दर्शन किये जा सकते हैं। चन्द्रमा का मन से अभिन्न रिश्ता है। रामचरित मानस में वर्णित है कि श्रीराम जी शरद पूर्णिमा के चाँद में श्री सीता जी को और सीता जी श्रीराम को देखते थे। हमने भी गुरुदेव को देखने की कोशिश की और सफ़लता मिली, जो आपके हृदय में बसा है जिससे आप भावनात्मक रूप से जुड़े हो व मनुष्य हो या देवता हो या सद्गुरु उसकी ब्लैक एंड व्हाइट इमेज चन्द्र में जरूर दिखेगी।*

गायत्री मन्त्र - *ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्*

चन्द्र गायत्री मन्त्र - *ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे, अमृततत्वाय धीमहि। तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्*

महामृत्युंजय मन्त्र- *ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टि वर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।*

० १६ संस्कार का परिचय

2 अक्तू॰ 2019

Kidney prtyaropan ki jankari

1.किडनी प्रत्यारोपण  क्या हैं :::
गुर्दा प्रत्यारोपण
 kidney 

गुर्दा या किडनी प्रत्यारोपण  एक शल्य चिकित्सा पद्धति हैं जिसके द्वारा जीवित या मृत व्यक्ति से कार्यशील गुर्दा (किडनी),निकालकर ऐसे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता हैं। जिसके गुर्दे कार्य नहीं कर रहें हैं।

प्रथम गुर्दा प्रत्यारोपण सन 1933 में सोवियत यूनियन के युरिव योरोनिव द्वारा किया गया था किन्तु यह प्रत्यारोपण असफल हो गया था। जबकि प्रथम सफल गुर्दा प्रत्यारोपण का श्रेय एक अमेरिकन डॉ.रिचर्ड लानर को जाता हैं ।

जीवित मनुष्य के शरीर से किडनी प्रत्यारोपण के सफल प्रयास का श्रेय ब्रिटिश चिकित्सक माइकल वुडरफ को जाता हैं,जिन्होंने 30 अक्टूबर 1960 को यह कार्य किया था । 




2.गुर्दा प्रत्यारोपण  की आवश्यकता :::


गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता गुर्दे के अंतिम चरण वाले मरीजों को होती हैं जिनके गुर्दों ने बिल्कुल ही काम करना बंद कर दिया हैं।


3.कोंन गुर्दा दान कर सकता हैं :::


जीवित व्यक्ति ,रिश्तेदार ,परोपकारी गैर रिश्तेदार,मृतक व्यक्ति,विस्तारित मापदंड वाला व्यक्ति।


4.गुर्दा देनें वाला जीवित :::


गुर्दा देने वाले मृत दानदाता की सीमित उपलब्धता के कारण अधिकांशत : जीवित दानदाता से गुर्दा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता हैं ।ऐसा इसलिये क्योंकि किसी व्यक्ति द्वारा दोनों गुर्दों में से एक गुर्दा दान कर देने पर भी एक गुर्दे के साथ लम्बा और स्वस्थ जीवन व्यतीत किया जा सकता हैं ।

गुर्दा दानदाता जीवित व्यक्ति की निगरानी सावधानीपूर्वक की जाती हैं और निरंतर उसके रक्तचाप,गुर्दे की कार्यप्रणाली का मुल्यांकन किया जाता हैं । इसके लिये निम्न मापदंड निर्धारित किये गये हैं ::-

1.न्यूनतम आयु 18 वर्ष।

2.दोनों गुर्दे सामान्य रूप से कार्यशील होने चाहिये।

3.संक्रमण  नही होना चाहिये।

4.कैंसर का कोई इतिहास नहीं होना चाहियें।

5.उच्च रक्तचाप से ग्रसित नही होना चाहिये।

6.शराब या अन्य नशीली दवाइयों का सेवन करने वाला नही होना चाहिये।

7.मानसिक और शारीरिक स्वास्थ चिकित्सकीय मापदंड़ो के अनुकूल होना चाहिये ।

5.जीवित व्यक्तियों से गुर्दा प्राप्त करनें के लाभ :::


1.सफलता की उच्च दर ।

2.अधिक समय तक प्रतीक्षा करने से मुक्ति ।

3.प्रत्यारोपण के लिये बेहतर गुर्दे की उपलब्धता ।


6.प्रत्यारोपण के प्राप्तकर्ता के कारक :::


1.यदि गुर्दा देने वाले व्यक्ति के असंगत होने की स्थिति आती हैं तो गुर्दा देने वाले ऐसे व्यक्ति का विचार किया जाता हैं जो अन्य गुर्दा प्राप्तकर्ता से असंगत हो । विनिमय की इस प्रक्रिया में दोनों गुर्दा प्राप्तकर्ता अपने लिये संगत गुर्दा प्राप्त कर उत्तम गुर्दा प्रत्यारोपण को सफल बनाते हैं ।

7.मृत व्यक्ति से गुर्दा प्राप्त करना :::

जब गुर्दा देनें वाला व्यक्ति मृतक हैं तो उसके परिवार की पूर्ण सहमति प्राप्त कर गुर्दा निकाला जाता हैं । मृतक व्यक्ति के गुर्दे का परीक्षण रसायनों द्वारा कर उसे प्रत्यारोपण के लिये उपयुक्त या अनुपयुक्त माना जाता हैं । उपयुक्त पाये जाने पर गुर्दे को बर्फ और पोषक तत्वों से युक्त घोल में रखकर संरक्षित किया जाता हैं ।

गुर्दा निकालने के 36 घंटे के अंदर प्रत्यारोपित करना आवश्यक होता हैं ।यह समय और भी कम हो तो बहुत अच्छा माना जाता हैं क्योंकि यदि गुर्दा लम्बें समय तक बाहर रहेगा तो प्राप्तकर्ता शरीर गुर्दे को अनुकूलित करने में अधिक समय लगाएगा ।


8.गुर्दा प्रत्यारोपण के लाभ :::


1.डायलिसिस की आवश्यकता को समाप्त करता हैं ।

2.जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करता हैं ।

3.गुर्दे की खराबी वाले मरीजों का उत्तम समाधान प्रस्तुत करता हैं ।

4.प्रत्यारोपण के बाद तरल पदार्थों के सेवन पर कम प्रतिबन्ध ।



9.गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद की सावधानी :::


1.मरीज को तब तक चिकित्सकों की निगरानी में रहना होता हैं जब तक की गुर्दा सामान्य रूप से कार्य नहीं करने लगता ।


2.मरीज को धूल धुंए और प्रदूषण से बचनें की सलाह दी जाती हैं ,ताकि गुर्दा शरीर में सामान्य रूप से कार्य करता रहें ।

3.गुर्दे की शरीर द्वारा अस्वीकृति रोकने के लिये प्रतिरक्षादमनकारी दवाइयों को जीवनभर मरीज को लेना होता हैं ।

4.प्रत्यारोपण के बाद शराब तथा अन्य प्रकार के नशे को पूर्णत : बंद करना होता हैं ,अन्यथा गुर्दे की अस्वीकृति की समस्या पैदा हो सकती हैं ।

5.चोट,तनाव मरीज की आगे की जिन्दगी की गुणवत्ता प्रभावित करता हैं अत:इनसे बचने को कहा जाता हैं ।

6.समय - समय पर चिकित्सा जाँच करवाना आवश्यक  हैं । 



यह भी पढ़े 



० 33 रोगों पर प्रभावी कैप्सूल


० अरहर के औषधीय प्रयोग


० गिलोय के फायदे



० बरगद पेड़ के फायदे



Note ::: गुर्दा प्रत्यारोपण के बारें में यह सामान्य जानकारी हैं ।जिसका अर्थ विशेषज्ञता को प्रतिस्थापित करना नहीं हैं।





1 अक्तू॰ 2019

चौबीस खम्बा माता मंदिर उज्जैन मध्यप्रदेश

देवी महामाया महालाया
 चौबीस खम्बा माता उज्जैन 

चौबीस खम्बा माता मंदिर chobish khamba Mata mandir 


महाकाल की नगरी में ऐसे कई
 देवी-देवता हैं जो भांग और मदिरापान करते हैं। महाकाल को प्रतिदिन भांग चढ़ाई जाती है, वहीं कालभैरव दिनभर में कई लीटर शराब पी जाते हैं। इस शहर में एक देवी मंदिर ऐसा भी है, जहां नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन माता को स्थानीय प्रशासक अपने हाथों से  शराब पिलाते हैं, इसके बाद नगर पूजा के तहत समस्त देवी-देवताओं को यह भोग अर्पण किया जाता है।

चौबीस खंभा मंदिर, जहां विराजमान हैं दो माताएं
नगर का अतिप्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है चौबीस खंभा। यहां महालाया और महामाया दो देवियों की प्रतिमाएं द्वार के दोनों किनारों पर स्थापित हैं। सम्राट विक्रमादित्य भी इन देवियों की आराधना किया करते थे।

चौबीस खंभा देवी

यह  उज्जैन Ujjain नगर में प्रवेश करने का प्राचीन द्वार। पहले इसके आसपास परकोटा या नगर दीवाल हुआ करती थी। अब वे सभी लुप्त हो गई हैं, सिर्फ प्रवेश द्वार और उसका मंदिर ही बचा है।

 यहां पर दो देवियां विराजमान हैं- एक महामाया और महालाया, इसके अलावा विराजमान हैं बत्तीस पु‍तलियां। यहां पर रोज एक राजा बनता था और उससे ये प्रश्न पूछती थीं। राजा इतना घबरा जाता था कि डर के मारे मर जाता था।


जब राजा विक्रमादित्य raja vikrmaditya का नंबर आया तो उन्होंने अष्टमी के दिन नगर पूजा चढ़ाई। नगर पूजा में राजा को वरदान मिला था कि बत्तीस पुतली जब तुमसे जवाब मांगेंगी तो तुम उन्हें जवाब दे पाओगे। जब राजा ने सभी पुतलियों को जवाब दे दिया तो पुतलियों ने भी वरदान दिया कि राजा जब भी तू न्याय करेगा तब तेरा न्याय डिगने नहीं दिया जाएगा।

इंद्र के   नाती गंधर्व सेन गंधर्वपुरी से आए थे, जो विक्रमादित्य के पिता थे। अवंतिका नगरी के प्राचीन द्वार पर विराजमान हैं दो देवियां जिन्हें नगर की सुरक्षा करने वाली देवियां कहा जाता है। इस प्राचीन मंदिर में सिंहासनारूढ राजा विक्रमादित्य की मूर्ति के अलावा बत्तीस पुतलियों की मूर्तियां भी विराजमान हैं। ये सब परियां हैं जो आकाश-पाताल की खबर लाकर देती हैं।

चौबीस खंबा माता : महाकाल-वन का प्रवेश द्वार


करसहस्र पद विस्तीर्ण महाकाल वनं शुभम।

द्वार माहघर्रत्नार्द्य खचितं सौभ्यदिग्भवम्।।


इस श्लोक से विदित होता है कि एक हजार पैर विस्तार वाला महाकाल-वन है जिसका द्वार बेशकीमती रत्नों से जड़ित रत्नों से जड़ित उत्तर दिशा को है। इसके अनुसार उत्तर दिशा की ओर यही प्रवेश-द्वार है।

इस द्वार के अतिरिक्त 80 वर्ष पूर्व भी दूसरा सरल मार्ग महाकालेश्वर में जाने के लिए नहीं था। पीछे और मार्ग बने हैं। इसमें 24 खंबे लगे हुए हैं इसलिए नाम 24 खंबा कहा जाने लगा है। यह द्वार विशाल है। यहां महामाया और महालया देवी की पूजा होती है और पाड़ों की बलि दी जाती थी। यह प्रथा कब से थी, मालूम नहीं। 150 वर्ष पूर्व एक द्वार इसके आगे था, वहां एक शिला-लेख मिला है, उसमें लिखा है कि 12वीं शताब्दी में अनहिल पट्टन के राजा ने नागर बनियों को व्यापार के लिए उज्जैन लाकर बसाया है। अब यहां बलि प्रथा वर्जित है।

टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्स इन हिंदी। Top smart health gadgets

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