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सर्दियों में ठंड से बचाव करने के लिये खानपान कैसा होना चाहियें

*सर्दियों में ठंड से बचने और शरीर को गर्म रखने के लिए क्या खाए* सर्दियों का मौसम आ गया है  और इससे आपको ठंड भी लग सकती हैं। सर्दियों के दिनों में सिर्फ स्वेटर पहनने से काम नहीं चलेगा, आपको अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना पड़ेगा जो आपको अंदर से गर्मी दे। आज हम आपको सर्दी से बचने के लिए और शरीर को गर्म रखने के लिए क्या खाना चाहिए? इसके बारे में बताने जा रहे हैं। आज के लेख में हम जानेंगे की सर्दी के मौसम में ठण्ड को दूर भगाने और शरीर को अंदरूनी रूप से गर्म रखने के लिए क्या खाना चाहिए? कौन सी चीजों के सेवन से सर्दियों में अन्दर से गर्म रहा जा सकता हैं। सर्दी से बचने के लिए यह आहार आपकी मदद करते हैं।  सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए जरूर खाए यह चीज़े :- *हल्दी* (घर की पिसी हुई हल्दी प्रयोग करें) अगर आप ठण्ड के मौसम में बीमारियों से बचे रहना चाहते हैं तो हल्दी का सेवन जरूर करे। इसलिए लिए आप दूध में हल्दी मिला कर पकाए और पिए। इस हल्दी वाले दूध को रात को सोने से 1 घंटा पहले या फिर दिन में कभी भी पिए। इससे आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और सर्दी से राहत मिलेगी। *अनार*

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) क्या हैं

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) * सूचना का अधिकार यानी राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है. * इस कानून के तहत देश के हर नागरिक को सरकार की पॉलिसी और अन्य गतिविधियों व सूचना की जानकारी मांगने का हक दिया जाता है. * RTI भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ. * RTI हर नागरिक को अधिकार देता है कि वह > सरकार से कोई भी सवाल पूछ सके या कोई भी सूचना ले सके. > किसी भी सरकारी दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ले सके. > किसी भी सरकारी दस्तावेज की जांच कर सके. > किसी भी सरकारी काम में इस्तेमाल सामग्री का प्रमाणित नमूना ले सके. * इस कानून का मकसद सरकारी महकमों की जवाबदेही तय करना होता है और ट्रांसपेरेंसी लाना होता है ताकि करप्शन पर अंकुश लग सके. * इस कानून का उपयोग सिर्फ भारतीय नागरिक ही कर सकते हैं. * इस कानून में निगम यूनियन कंपनी वगैरह को सूचना देने का प्रावधान नहीं है क्योंकि यह नागरिक की परिभाषा में नहीं आते. * अगर आपके बच्चों के स्कूल के टीचर अक्सर गैरहाजिरी रहते हो, आपके आसपास की सड़के खराब हालात में हो, सर

शरद पूर्णिमा का महत्व और आयुर्वेद

*शरद पूर्णिमा का महत्व और आयुर्वेद   *शरद पूर्णिमा-  शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है, पंचम बंगाल में इस दिन लक्ष्मी पूजा होती है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था।  *मान्यता है कि चन्द्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होने के कारण इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है जो औषधीय व आरोग्यवर्धक होता है। तभी इस दिन भारत के अधिकांश हिस्सों में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है, जिससे खीर में चन्द्रमा के औषधीय आरोग्यवर्धक गुण चांदनी के माध्यम से प्रवेश कर जाएं। इसे खाकर स्वास्थ्य लाभ मिले।* आयुर्वेद कहता है कि चन्द्र किरणों से अमृत झरता है, विभिन्न औषधियां चन्द्रमा की रौशनी से ही बल प्राप्त करती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की रौशनी में स्वयं को नहलाएं, चावल की खीर बना के ठण्डी कर लें और उसे इस तरह रखें क़ि

Kidney prtyaropan ki jankari

1.किडनी प्रत्यारोपण  क्या हैं :::  kidney  गुर्दा या किडनी प्रत्यारोपण  एक शल्य चिकित्सा पद्धति हैं जिसके द्वारा जीवित या मृत व्यक्ति से कार्यशील गुर्दा (किडनी),निकालकर ऐसे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता हैं। जिसके गुर्दे कार्य नहीं कर रहें हैं। प्रथम गुर्दा प्रत्यारोपण सन 1933 में सोवियत यूनियन के युरिव योरोनिव द्वारा किया गया था किन्तु यह प्रत्यारोपण असफल हो गया था। जबकि प्रथम सफल गुर्दा प्रत्यारोपण का श्रेय एक अमेरिकन डॉ.रिचर्ड लानर को जाता हैं । जीवित मनुष्य के शरीर से किडनी प्रत्यारोपण के सफल प्रयास का श्रेय ब्रिटिश चिकित्सक माइकल वुडरफ को जाता हैं,जिन्होंने 30 अक्टूबर 1960 को यह कार्य किया था ।   2.गुर्दा प्रत्यारोपण  की आवश्यकता ::: गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता गुर्दे के अंतिम चरण वाले मरीजों को होती हैं जिनके गुर्दों ने बिल्कुल ही काम करना बंद कर दिया हैं। 3.कोंन गुर्दा दान कर सकता हैं ::: जीवित व्यक्ति ,रिश्तेदार ,परोपकारी गैर रिश्तेदार,मृतक व्यक्ति,विस्तारित मापदंड वाला व्यक्ति। 4.गुर्दा देनें वाला जीवित ::: गुर्दा देने वाले मृत द

चौबीस खम्बा माता मंदिर उज्जैन मध्यप्रदेश

 चौबीस खम्बा माता उज्जैन  चौबीस खम्बा माता मंदिर chobish khamba Mata mandir  महाकाल की नगरी में ऐसे कई  देवी-देवता हैं जो भांग और मदिरापान करते हैं। महाकाल को प्रतिदिन भांग चढ़ाई जाती है, वहीं कालभैरव दिनभर में कई लीटर शराब पी जाते हैं। इस शहर में एक देवी मंदिर ऐसा भी है, जहां नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन माता को स्थानीय प्रशासक अपने हाथों से  शराब पिलाते हैं, इसके बाद नगर पूजा के तहत समस्त देवी-देवताओं को यह भोग अर्पण किया जाता है। चौबीस खंभा मंदिर, जहां विराजमान हैं दो माताएं नगर का अतिप्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है चौबीस खंभा। यहां महालाया और महामाया दो देवियों की प्रतिमाएं द्वार के दोनों किनारों पर स्थापित हैं। सम्राट विक्रमादित्य भी इन देवियों की आराधना किया करते थे। चौबीस खंभा देवी यह  उज्जैन Ujjain नगर में प्रवेश करने का प्राचीन द्वार। पहले इसके आसपास परकोटा या नगर दीवाल हुआ करती थी। अब वे सभी लुप्त हो गई हैं, सिर्फ प्रवेश द्वार और उसका मंदिर ही बचा है।  यहां पर दो देवियां विराजमान हैं- एक महामाया और महालाया, इसके अलावा विराजमान हैं बत्तीस पु‍तलियां। यहां पर