29 जन॰ 2020

कोरोना वायरस से बचाव के भारत सरकार द्धारा जारी दिशा निर्देश



वायरस
 कोरोना वायरस


*कोरोना वायरस NOVEL CORONA VIRUS ( n- CON)


लक्षण 

 • सर्दी खाँसी

• गले में खराश 

• फेफड़ों में संक्रमण

• साँस लेनें में तकलीफ

• बुखार 

• निमोनिया

*उपचार - भारत बायोटेक की कोवेक्सिन मानवीय परीक्षण की प्रक्रिया में है।*




*संक्रमण की पुष्टि होनें पर घबराये नही

यह रोग असल मे चमगादड़ और सांप में होता है, लेकिन चीन में चमगादड़ के सूप पीने की वजह से यह मनुष्यों में फैला है !
छींकने और सम्पर्क में आने से फैल रहा है यह खतरनाक वायरस !


China
 coronavirus

बचाव


● यात्रा करते वक़्त मास्क ज़रूर पहने !

● किसी भी जुकाम या सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का तुरंत इलाज कराए।

● सांप ,समुद्री उत्पाद कच्चा माँस  और पक्षियों का सेवन बिल्कुल भी न करे ।

● किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने के बाद हाथ साबुन से धोये बिना धोए अपने आंख ,नाक को ना छुये।

• छींकते और खाँसते समय रूमाल नाक और मुँह पर अवश्य रखें ।


• भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जानें से बचें यदि जाना आवश्यक हो तो समुचित चिकित्सकीय सलाह के बाद ही जायें।

• गर्म पेय पदार्थों जैसें तुलसी अदरक और हल्दी का काढ़ा पीते रहें । 

• ॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉॉ 



19 जन॰ 2020

शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे जानकर हेरान हो जायेंगें Tel ke fayde jankar heran ho jayenge

तेल के फायदे

प्राचीन चिकित्सा पद्धति में तेल के माध्यम से व्यक्ति को निरोग रखा जाता था । ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण तेलों का वर्णन चरक संहिता में किया गया हैं आईये जानतें हैं इन तेलों के फायदे के बारें में , तेल के फायदे जानकर आप भी आश्चर्यचकित रह जायेंगे ।


तिल के तेल के फायदे :::




कषायानुरसंस्वादुसूक्ष्ममुष्णंव्यवायिच।   पित्तलंबद्धविण्मूत्रंन चश्लेष्माभिवर्द्धनम् ।।वातन्घेषूत्तमंबल्यंत्वच्यंमेधाग्निवर्धनम् तैलसं। तैलंसंयोगसंस्कारात्सर्वरोगापहंमतम्।।

अर्थात  तिल का तेल स्वाद में कषाय ,स्वादिष्ट और हल्का होता हैं । तिल के तेल के अणु बहुत सूक्ष्म होतें हैं जिससे यह शरीर के जिस अंग पर लगता हैं उस अँग के अंदर तक पहुँचकर फायदा पहुँचाता हैं ।

तिल
 तिल के तेल के फायदे

तिल का तेल गर्म प्रकृति का होता हैं इसके सेवन से पित्तवर्धन होता हैं । और भूख खुलकर लगती हैं ।


तिल का तेल मल और मूत्र को रोकता हैं अर्थात  इसके सेवन से मूत्राशय और मल संस्थान मज़बूत बनते हैं । 

कफ प्रकृति के लोग तिल का तेल सेवन करते हैं तो उन्हें सर्दी खाँसी आदि की समस्या नही होगी । 

तिल का तेल वात रोगों गठिया,जोड़ो का दर्द आदि को प्रभावी रूप से शमन करता हैं ।

तिल का तेल सेवन करनें से बल,बुद्धि और शरीर का तेज बढ़ता हैं । यह बुढ़ापा रोकता हैं ।


तिल का तेल जिस बीमारी की औषधीयों से   संतृप्त होता हैं उस बीमारी को नष्ट़ कर देता हैं ।

तिल के तेल को लिंग पर लगाकर मालिश करनें से लिंग से सम्बधिंत समस्त प्रकार की कमज़ोरी दूर होती हैं ।

 



ऐरण्ड़ तेल ::




ऐरण्ड़तैलंमधुरंगुरूशलेषमाभिवर्धनम् ।वातासृग्गुल्मह्रदरोगजीर्णज्वरहरंपरम् ।।

ऐरण्ड़ का तेल प्रकृति में भारी ,मधुर और कफ को बढ़ाता हैं ।

ऐरण्ड़ का तेल सेवन करनें से वातकारक बीमारीयाँ जैसें पेट में गैस,गठिया संधिवात आदि शांत होता हैं ।

ऐरण्ड़ तेल की मालिश या इसका निश्चित अनुपान   में सेवन पुरानें बुखार को नष्ट़ कर देता हैं ।

औषधीयों से सिद्ध ऐरण्ड़ तेल ह्रदयरोग ,शरीर की गाँठे तथा रक्तविकार की उत्तम औषधी माना गया हैं । 






सरसो का तेल ::


कटूष्णंसार्षपंतैलंरक्तपित्तप्रदूषणम् ।कफशुक्रानिलहरंकण्डूकोठविनाशनम् ।।



सरसो का तेल स्वाद में तीखा कटू और प्रकृति में गर्म होता हैं । इसके सेवन से कफ रोग समाप्त हो जातें हैं ।

त्वचा रोगों जैसें कुष्ठ खुजली में यह आरामदायक होता हैं ।

वायुविकारों को यह तेल तेजी से समाप्त करता हैं ।   




चिरोंजी का तेल ::





पियालतैलंमधुरंगुरूशलेषमाभिवर्धनम् । हितमिच्छन्तिनातयौष्ण्यातसंयोगेवातपित्तयो : ।।


चिरोंजी के तेल को पियाल का तेल भी कहतें हैं ,यह तेल ऐरण्ड़ तेल के समान मीठा और भारी होता हैं ।


चिरोंजी का तेल कफ की वृद्धि करनें वाला होता हैं । यह तेल न तो ज्यादा गर्म होता है और ना ही ज्यादा ठंडा होता हैं इसके इसी गुण के कारण यह औषधीयों के साथ मिलकर वात और पित्त को नष्ट़ कर देता हैं ।

 

अलसी का तेल ::



आतस्यमधुराम्लनतुविपाकेकटुकंतथा  । उषणवीर्य्यहितंवातरक्तपित्तप्रकोपनम् ।।


अलसी का तेल मीठा ,अम्लीय और कड़वा होता हैं । यह प्रकृति में गर्म और रक्तपित्त रोगों को बढ़ानें वाला और वातरोगों को नष्ट़ कर देता हैं । 



कुसुम का तेल :: 


कुसुम्भतैलमुष्णश्चविपाकेकटुकंगुरू ।विदाहिचविशेषेणसर्वरोगप्रकोपनम्।।



कुसुम का तेल गर्म प्रकृति का कटु ,और भारी होता हैं । यह सर्वरोगों को नष्ट़ कर देता हैं ।


उपरोक्त तेल अपने गुणों और प्रकृति के कारण आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत लोकप्रिय हैं ।

तेल की मालिश करनें से ही इसके अधिक गुण प्राप्त होतें हैं । परंतु आजकल तेलों का सेवन करनें की प्रवृत्ति ही भारतवर्ष में प्रचलित हैं यही कारण हैं कि उच्च रक्तचाप ,ह्रदयरोग ,मधुमेह और अल्प जीवन प्रत्याशा  हमारे देश की राष्ट्रीय समस्या बन गई हैं ।
 

  प्रकृति अनुसार तैल की मालिश करनें से व्यक्ति बलशाली , निरोगी,बहुत श्रम करने के बाद भी  न थकनेवाला और दीर्घायु  प्राप्त करनें वाला  होता हैं।
   

० एड्स के बारें में जानकारी यहाँ दी गई हैं कृपया अवश्य पढ़े  


० बैंगन के फायदे


० सालिड़ बनों इंड़िया


० ह्रदयघात के प्रकार और उपचार


० पंचनिम्ब चूर्ण


० निर्गुण्डी


०१०० साल जीने की गारंटी


० आयुर्वेदिक औषधी सूचि


० बाजरा



० लक्ष्मीविलास रस नारदीय के फायदे




8 जन॰ 2020

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण और पलाश वृक्ष की प्रकृति

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण 

पलाश
 पलाश वृक्ष के औषधीय गुण


पलाश या ढ़ाक सम्पूर्ण भारत में पाया जानें वाला वृक्ष हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में इस वृक्ष को दिव्य औषधी की तरह प्रयुक्त किया जाता हैं ।
पलाश के वृक्ष 15 से 20 फीट तक लम्बें होतें हैं । पलाश वृक्ष के पत्तें एक साथ तीन के गुच्छे में होतें हैं ।

पलाश पर केशरिया रंग के तोतें की चोंच समान फूल खिलते हैं और लम्बी - लम्बी फलियों में इसके बीज रहतें हैं ।


पलाश वृक्ष की छाल मोटी और खुरदरी होती हैं । जिस पर गोंद निकलता हैं ।

आयुर्वेद चिकित्सा में पलाश के फल,फूल,पत्तें जड़ और गोंद समेत सम्पूर्ण वृक्ष का उपयोग किया जाता हैं । 


पलाश वृक्ष के विभिन्न भाषाओं में नाम 


पलाश का संस्कृत नाम :::

पलाश, किशुक ,रक्तपुष्प और कमलासन 



हिन्दी नाम :::

ढ़ाक , टेसू ,केसू ,खाकरा ,पलाश


पलाश का लेटिन नाम :::

Butea frondosa ,Butea monosperma

आयुर्वेद मतानुसार पलाश की प्रकृति :::

आयुर्वेद मतानुसार पलाश अग्निदीपक ,स्निग्ध, गर्म और कसेला होता हैं ।


पलाश वृक्ष के औषधीय गुण :::

आँतो की कृमि निकालनें में :::

 पलाश के आठ दस बीजों को रातभर  पानी में भीगो दे सुबह इसका छिलका उतारकर बीज को सुखा ले , तीन दिन तक रोज तीन - तीन बीज रात को दें । और चोथे दिन एक चम्मच एरंड तेल का पान करवा दें ।

इस प्रयोग से आँतों के कीड़े निकल जातें हैं ।



चर्म रोगों में :::

पलाश के बीजों को पीसकर नीम्बू के साथ मिलाकर चर्म रोगों जैसें दाद खाज खुजली में लगानें से बहुत आराम मिलता हैं ।


चोट मोच में :::

चोंट मोच और शरीर के किसी भाग पर सूजन आनें की दशा में पलाश के पत्तों palash ke patton में तेल मिश्रित  हल्दी लपेटकर गर्म करले और हल्का गुनगुना चोट मोच और सूजन पर बाँधे इस प्रयोग से बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं ।



जहरीले जानवरों का विष उतारने में :::

पलाश की छाल और सौंठ समान मात्रा में मिलाकर पीस ले इस तरह पीसा गया यह मिश्रण जहरीले जानवर जैसें बिच्छू,मधुमक्खी ततैया आदि के काटनें पर एक चम्मच पानी के साथ सेवन करवानें से जहर शीघ्रता से उतर जाता हैं ।  


पेशाब रूक जानें पर क्या करना चाहिए :::

पलाश के फूल palash ke ful उबालकर गरमागरम पेडू पर बाँधनें से रूकी हुई पेशाब खुलकर आ जाती हैं । साथ ही गुर्दें के दर्द ,मूत्राशय की सूजन में आराम मिलता हैं ।  

पुरूष अंडाशय की सूजन में :::

पलाश वृक्ष की छाल palash ki chhal पीसकर अंडाशय पर लगानें से अंडाशय की सूजन मिट जाती हैं ।


मिरगी में :::

पलाश वृक्ष की जड़ Palash ki jad पानी मिलाकर पत्थर पर घीस लें, इस घीसी हुई जड़ की दो चार बूँद नाक में टपकाने से मिरगी रोग मिट जाता हैं ।


बाजीकरण शक्ति बढ़ाने में :::


पलाश वृक्ष की जड़ का अंदरूनी नर्म हिस्सा निकालकर इसे दूध के साथ प्रतिदिन   5 ग्राम की मात्र  में सेवन करनें से बाजीकरण में मदद मिलती हैं । और शुक्राणुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती हैं ।  


टूटी ह्ड्डी को जोड़ने में :::

पलाश  के गोंद palash ke gond  की 5 ग्राम मात्रा प्रतिदिन टूटी हड्डी को शीघ्रता से जोड़ने में मदद करती हैं । इसके लिये गोंद को मिश्री या गुड़ के साथ सेवन करना चाहियें ।   


पलाश के फूलों को रातभर पानी में भीगोनें के बाद सुबह इस पानी से स्नान करनें पर लू उतर जाती हैं । और गर्मी के कारण  शरीर में होनें वाली जलन मिटती हैं। 


अतिसार में :::

पलाश वृक्ष का गोंद मल को अवरोधित करता हैं यदि लम्बें समय से अतिसार की समस्या से परेशान है तो 10 ग्राम पलाश का गोंद आधा कप पानी में घोलकर पीलावें ,बहुत जल्दी आराम मिलता हैं ।   


स्त्रीयों के बाँझपन में :::


पलाश के फूलों को रातभर पानी में भीगों दें सुबह इसमें से फूलों को निकालकर बचे हुये पानी को प्रतिदिन 10 - 10 Ml सुबह शाम सेवन करनें से स्त्रीयों की बाँझपन की समस्या दूर होती हैं । 


रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानें में :::


पलाश के पत्तों से बनी थाली में भोजन करनें से भोजन का स्वाद बढ़ता हैं।  और व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं ।


कुपोषण दूर करनें में :::


आदिवासी समाज पलाश के पत्तों में लपेटकर रोटी को कंड़ो पर सेककर खाता हैं इस रोटी के सेवन से बच्चों का कुपोषण दूर होता हैं । 


० बैंगन के फायदे


० बाजरा एक अनुपम खाद्य पदार्थ



० कद्दू के औषधीय गुण


० बरगद पेड़ के चमत्कारिक फायदे

  


5 जन॰ 2020

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun :::


पारस पीपल
पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल का  वर्णन :::


पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं । 

पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं ।


पारस पीपल का संस्कृत नाम 


पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं। 


पारस पीपल का हिन्दी नाम 


पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।



पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam :::


पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं ।

पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam :::


पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia populcea हैं ।
 

पारस पीपल की प्रकृति 

आयुर्वेद मतानुसार पारस पीपल मधुर ,स्निग्ध ,और वात पित्त विकारों को हरने वाला होता हैं ।  



पारस पीपल के औषधीय गुण paras pipal KE ausdhiy gun,paras pipal ke fayde :::


चर्म रोगों में पारस पीपल के औषधीय गुण

दाद खाज ,खुजली  होनें पर पारस पीपल के पके हुये फलों को जलाकर राख बना लें इस राख को नारियल तेल के साथ मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगानें से दाद खाज और खुजली मिटती हैं।   


ठंड के दिनों में चलनें वाली सूखी खुजली के लिये पारस पीपल के फलों का रस लगानें से खुजली मिट जाती हैं ।

फंगल इन्फेक्शन

पुरानें अतिसार में पारस पीपल के औषधीय गुण 


पारस पीपल की छाल paras pipal ki chal 100 ग्राम  कूटकर आधा लीटर पानी में तब तक उबलना चाहिये जब तक की पानी आधा न रह जायें ।


इस क्वाथ को 10 - 10 ML सुबह शाम पिलानें से पुरानें अतिसार में आशातीत लाभ प्राप्त होता हैं । 



संधिशोध में पीपल के औषधीय गुण :::


घुटनों कोहनी और शरीर के अन्य भागों की संधियों में सूजन और दर्द होनें पर पारस पीपल के पत्तों को गर्म कर प्रभावित स्थान पर बाँधने से दर्द और सूजन में राहत मिलती हैं ।


पारस पीपल का पौधा भी संधिवात में उपयोगी होता हैं, इसके लिए पारस पीपल के पौधा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए



मूत्राशय की सूजन में पारस पीपल Paras peepal


पारस पीपल की छाल paras pipal ki chal का क्वाथ और इसके बीजों से बना तेल मूत्राशय की सूजन में देनें पर मूत्राशय की सूजन तुरंत उतर जाती हैं । 


नशा छुडवानें में पारस पीपल के औषधीय गुण 


किसी भी प्रकार का नशा छुडाना nasha chudana हो तो पारस पीपल की छाल और अर्जुन  की छाल Arjun ki chal को समान मात्रा में पीसकर एक - एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करनें से किसी भी प्रकार के नशे की लत छुट जाती हैं ।

 नाश करता नशा


पेट दर्द में पारस पीपल के औषधीय गुण


पारस पीपल के पत्तों या इसकी छाल का क्वाथ बनाकर पीलानें से पेट दर्द में बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं । 


सिरदर्द में पारस पीपल के फायदे ::

पारस पीपल के तनें को या ताजे फलों को पीसकर सिरदर्द में लेप करनें से सिरदर्द में अतिशीघ्र आराम मिलता हैं ।


कीडे मकोडों के विष पर पारस पीपल के औषधीय गुण


कीड़े मकोड़े के काटनें पर या शरीर के ऐसे स्थान जहाँ कीडे मकोड़े के काटनें पर फफोले पड़ गये हो वहाँ  इसके फलों से निकलने वाले पीले रस को लगानें से बहुत आराम मिलता हैं ।


टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्स इन हिंदी। Top smart health gadgets

Top smart health gadgets।टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्सस इन हिंदी  कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर जितना दबाव पैदा हुआ उतना शायद किसी भी काल...