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जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोरोना वायरस से बचाव के भारत सरकार द्धारा जारी दिशा निर्देश

 कोरोना वायरस *कोरोना वायरस NOVEL CORONA VIRUS ( n- CON) लक्षण   • सर्दी खाँसी • गले में खराश  • फेफड़ों में संक्रमण • साँस लेनें में तकलीफ • बुखार  • निमोनिया *उपचार - भारत बायोटेक की कोवेक्सिन मानवीय परीक्षण की प्रक्रिया में है।* *संक्रमण की पुष्टि होनें पर घबराये नही यह रोग असल मे चमगादड़ और सांप में होता है, लेकिन चीन में चमगादड़ के सूप पीने की वजह से यह मनुष्यों में फैला है ! छींकने और सम्पर्क में आने से फैल रहा है यह खतरनाक वायरस !  coronavirus बचाव ● यात्रा करते वक़्त मास्क ज़रूर पहने ! ● किसी भी जुकाम या सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का तुरंत इलाज कराए। ● सांप ,समुद्री उत्पाद कच्चा माँस  और पक्षियों का सेवन बिल्कुल भी न करे । ● किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने के बाद हाथ साबुन से धोये बिना धोए अपने आंख ,नाक को ना छुये। • छींकते और खाँसते समय रूमाल नाक और मुँह पर अवश्य रखें । • भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जानें से बचें यदि जाना आवश्यक हो तो समुचित चिकित्सकीय सलाह के बाद ही जायें। • गर्म पेय पदार्थों जैसें तुलसी अदरक और हल्दी का

शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे जानकर हेरान हो जायेंगें Tel ke fayde jankar heran ho jayenge

तेल के फायदे प्राचीन चिकित्सा पद्धति में तेल के माध्यम से व्यक्ति को निरोग रखा जाता था । ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण तेलों का वर्णन चरक संहिता में किया गया हैं आईये जानतें हैं इन तेलों के फायदे के बारें में , तेल के फायदे जानकर आप भी आश्चर्यचकित रह जायेंगे । तिल के तेल के फायदे ::: कषायानुरसंस्वादुसूक्ष्ममुष्णंव्यवायिच।   पित्तलंबद्धविण्मूत्रंन चश्लेष्माभिवर्द्धनम् ।।वातन्घेषूत्तमंबल्यंत्वच्यंमेधाग्निवर्धनम् तैलसं। तैलंसंयोगसंस्कारात्सर्वरोगापहंमतम्।। अर्थात  तिल का तेल स्वाद में कषाय ,स्वादिष्ट और हल्का होता हैं । तिल के तेल के अणु बहुत सूक्ष्म होतें हैं जिससे यह शरीर के जिस अंग पर लगता हैं उस अँग के अंदर तक पहुँचकर फायदा पहुँचाता हैं ।  तिल के तेल के फायदे तिल का तेल गर्म प्रकृति का होता हैं इसके सेवन से पित्तवर्धन होता हैं । और भूख खुलकर लगती हैं । तिल का तेल मल और मूत्र को रोकता हैं अर्थात  इसके सेवन से मूत्राशय और मल संस्थान मज़बूत बनते हैं ।  कफ प्रकृति के लोग तिल का तेल सेवन करते हैं तो उन्हें सर्दी खाँसी आदि की समस्या नही होगी ।  तिल का तेल वात रोगों गठ

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण और पलाश वृक्ष की प्रकृति

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण   पलाश वृक्ष के औषधीय गुण पलाश या ढ़ाक सम्पूर्ण भारत में पाया जानें वाला वृक्ष हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में इस वृक्ष को दिव्य औषधी की तरह प्रयुक्त किया जाता हैं । पलाश के वृक्ष 15 से 20 फीट तक लम्बें होतें हैं । पलाश वृक्ष के पत्तें एक साथ तीन के गुच्छे में होतें हैं । पलाश पर केशरिया रंग के तोतें की चोंच समान फूल खिलते हैं और लम्बी - लम्बी फलियों में इसके बीज रहतें हैं । पलाश वृक्ष की छाल मोटी और खुरदरी होती हैं । जिस पर गोंद निकलता हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में पलाश के फल,फूल,पत्तें जड़ और गोंद समेत सम्पूर्ण वृक्ष का उपयोग किया जाता हैं ।  पलाश वृक्ष के विभिन्न भाषाओं में नाम  पलाश का संस्कृत नाम ::: पलाश, किशुक ,रक्तपुष्प और कमलासन  हिन्दी नाम ::: ढ़ाक , टेसू ,केसू ,खाकरा ,पलाश पलाश का लेटिन नाम ::: Butea frondosa ,Butea monosperma आयुर्वेद मतानुसार पलाश की प्रकृति ::: आयुर्वेद मतानुसार पलाश अग्निदीपक ,स्निग्ध, गर्म और कसेला होता हैं । पलाश वृक्ष के औषधीय गुण ::: आँतो की कृमि निकालनें में :

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं । पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia populcea हैं ।