सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मार्च, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चित्रक के फायदे । chitrak KE fayde

चित्रक  के फायदे । chitrak KE fayde  चित्रक के फायदे चित्रक सम्पूर्ण भारत में पाई जानें वाली वनस्पति हैं । चित्रक की व्यावसायिक रूप से खेती भी की जाती हैं । चित्रक का पौधा chitrak ka podha वर्ष भर हरा भरा रहता हैं । चित्रक के पौधे की लम्बाई 3 से 6 फुट तक होती हैं । इसका तना बहुत पतला होता हैं । चित्रक की जड़ chitrak ki jad के पास से ही छोटी छोटी डालियाँ फुटती हैं यह डालियाँ चिकनी और हरे रंग की होती हैं । चित्रक के पत्ते  chitrak KE patte लम्बे और गोलीय होतें हैं । चित्रक के फूल chitrak KE phul सफेद रंग के और सुगंधहीन होतें हैं । चित्रक के फूल की कलियाँ कोमल शाखाओं में से निकलती हैं ।  चित्रक के बीज फूलों में से निकलतें हैं  जिनका स्वाद कड़वा और तीखा होता हैं । एक फूल में से एक ही बीज निकलता हैं । चित्रक की तीन सफेद,लाल और काली प्रजाति  पाई जाती हैं । चित्रक की प्रकृति आयुर्वेद मतानुसार चित्रक गर्म, रूक्ष,हल्की होती हैं । चित्रक का संस्कृत नाम  चित्रक को संस्कृत में  अग्नि,अग्निशिखा, सप्तीष कहा जाता हैं । चित्रक के हिन्दी नाम  चित्रक को हि

आयुर्वेदिक चूर्ण ::: जिनसें आयुर्वेद विश्व प्रसिद्ध बना

१.तालिसादी चूर्ण :::  तालिसादी चूर्ण कासश्वासरूचिहरं तच्चूर्ण दीपनं परम्।ह्रतपाणडुगरहणीरोगप्लीहशोधज्वरापहम्।छर्घतीसारशूलघ्नं मूढवातानुलोमन्।। तालिसादी चूर्ण खाँसी,श्वास ,पाचन,पीलिया ,शोध ,ज्वर जैसी समस्याओं के लियें बहुत महत्वपूर्ण औषधी हैं । तालिसादी चूर्ण की घटक औषधी 1.तालिस पत्र Abies webbiana 2.दालचीनी cinnamomum zeylanicum 3.पीप्पली  piper longum 4.इलायची Elettaria cardamomum उपयोग uses सामान्य सर्दी खाँसी ,सूखी खाँसी, अस्थमा, ज्वर में उपयोगी 1.तालिसादी चूर्ण अपच,भूख न लगना की सर्वोत्तम औषधी हैं । 2.सांस लेनें में परेशानी की तालिसादी चूर्ण उत्तम औषधी मानी जाती हैं । 3.एलर्जी से उत्पन्न खाँसी की का शमन करती हैं । 4.फेफड़ों में जमा बलगम phlegm को निकालकर फेफड़ों को स्वस्थ बनाती हैं । उपयोग मात्रा वैधकीय परामर्श से २.वैश्वानर  चूर्ण vaishwanar churns  वैश्वानर चूर्ण पीतं जयत्यामवातं गुल्मं ह्रदस्तिजान गदान । प्लीहानं ग्रन्धिशूलादीनशार्स्यानाहमेव च ।। विबं

गूलर के औषधीय उपयोग

गूलर के औषधीय उपयोग  गूलर अंजीर ,बरगद और पीपल के वर्ग का वृक्ष हैं । गूलर का वृक्ष 20 से 30 फुट तक ऊँचा होता हैं । गूलर के पत्ते अंडाकार और घनें होतें हैं ।  गूलर का पेड़ गूलर के फल तनों से फूटतें हैं। तथा गूलर के फूल फल के अन्दर स्थित होतें हैं । इसके पत्ते तोड़नें पर इसमें से दूध निकलता हैं । गूलर के पेड़ का महत्व इसके औषधि गुणों के कारण हैं । गूलर का संस्कृत नाम  औदुम्बर,क्षीरवृक्ष,जंतुफल,उदुम्बर, हेमदुन्धक गूलर का हिन्दी नाम  गूलर ,ऊमर,परोआ गूलर का लेटिन नाम  ficus Racemosa आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति  आयुर्वेद मतानुसार गूलर शीतल ,मधुर,कसैला,तथा भारी होता हैं । गूलर के औषधीय उपयोग  घाव में गूलर के फायदे गूलर में तांबा 12 प्रतिशत होता हैं । तांबा बहुत अच्छा संक्रमण रोधी तत्व होता हैं । गूलर के पत्तों,छाल,का क्वाथ बनाकर उससे घाव धोनें पर घाव बहुत जल्दी सूख जाता हैं ।  गूलर का दूध  चोंट वाले स्थान पर लगाने से अधिक रक्त के बहाव को तुरंत बंद कर देता हैं । अतिसार में  गूलर की जड़ का चूर्ण बनाकर खिलानें से अतिसार में आराम मिलता हैं

Allergy क्या होती हैं किन - किन चीजों से मनुष्य में एलर्जी हो सकती हैं

Allergy क्या होती हैं   एलर्जी "Allergy शरीर के द्धारा की जानें वाली एक ऐसी प्रतिक्रिया हैं जो तब होती हैं जब मनुष्य का शरीर किसी ऐसी वस्तु या Antigen या एलर्जन के सम्पर्क में आता हैं।" जब मनुष्य का शरीर किसी Allergic पदार्थों के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर द्धारा असाधारण प्रतिक्रिया होती हैं । जैसें छींके आना,आँखों से पानी आना,त्वचा पर खुजली,चकते पडना ,अस्थमा होना आदि । जो पदार्थ Allergy पैदा करतें हैं उन्हें एलर्जन या एंटीजन कहतें हैं । Allergy में शरीर कैसें प्रतिक्रिया व्यक्त करता हैं ? जब कोई Antigen पदार्थ शरीर के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर इस पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता हैं और उस पदार्थ को नष्ट़ करनें के लियें एंटीबाडी  का निर्माण करना शुरू कर देता हैं । फिर एंटीजन और एंटीबाड़ी में संघर्ष होता हैं । संघर्ष की वजह से एक पदार्थ "Histamine" पैदा होता हैं । यह Histamine ही एलर्जी के लिये उत्तरदायी होता हैं । किन - किन चीजों से Allergy होती हैं ? Allergy के लियें कई कारक उत्तरदायी होतें हैं  1.धूल धु

covid - 19 के लियें प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत करनें वाली आयुष औषधी

covid - 19 के लिये आयुर्वेदिक रोग प्रतिरोधक चिकित्सा   covid 19 KE liye Ayurveda ० संशमनी वटी या गिलोय वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार 15 दिन तक गर्म पानी से लेना चाहिये । ० Ayush -64 की दो गोली दिन में दो बार लेना चाहियें । ० अणु तेल या शीशम तेल को नाक में प्रतिदिन सुबह चिकित्सक के निर्देशानुसार डालें । ० षडंग पानी ( मुस्ता,परपट,अशीर,चंदन,उदीच्य,शुण्ठी ) का 10 ग्राम पावडर बनाकर एक लीटर पानी में उबाले ,आधा पानी शेष रहनें पर इसे उबालना बंद कर दें । दो तीन घंटों में गुनगुना कर यह पानी थोडा - थोडा पीतें रहें । ० त्रिकटु पावडर 5 ग्राम, तुलसी 3 से 5 पत्तियाँ 1 लीटर पानी में तब तक उबाले जब तक की पानी आधा न रह जायें । इस पानी को लगातार पन्द्रह दिनों तक सेवन करें । होम्योपैथिक रोगप्रतिरोधक चिकित्सा   Covid -19 ० आरसेनिक एल्बम 30 की 5 गोली दिन में तीन बार तीन दिनों तक लें । ० ब्रायोनिया अल्बा,बेलाडोना,जैलिसिमियम,यूफेटोरियम,परफोलिटम भी सर्दी जुकाम जैसें लक्षणों पर प्रभावी मानी गई हैं । यूनानी रोगप्रतिरोधक चि

4 सप्ताह में मोटापा [obesity] कैसे कम करें

4 सप्ताह में मोटापा [obesity] कैसें कम करें वैज्ञानिक शोधों से यह ज्ञात हुआ हैं कि यदि हम लगातार 4 सप्ताह तक किसी काम को अपनी दिनचर्या का अँग बना लेतें हैं तो यह आदत जीवनभर के लियें हमारी आदत बन सकती हैं । उदाहरण के लियें यदि हम पूरे चार सप्ताह सुबह ठीक 6 बजे उठनें की आदत बना ले तो यह हमारी दिनचर्या का अंग बन जायेगा ।   ठीक इसी तरह की आदत यदि हम खान पान व्यायाम आदि की बना लें तो यह आदत  जीवनपर्यंत बनी रहेगी । आज हम आपकी दिनचर्या में 4 सप्ताह तक ऐसी आदतों का समावेश करवायेंगें जिससे मोटापा कम करनें में मदद मिलेगी । अर्थात 4 सप्ताह में मोटापे का काम तमाम तो आईए जानतें मोटापा कम करने के तरीके के बारें में पहला सप्ताह  पहले सप्ताह में आपको अपनें खानपान पर नियत्रंण करना हैं । वह चीज जो फैट से भरपूर हैं और आपको प्रिय हैं उसको अपनें खानपान से बाहर निकालना हैं । यदि एकदम   से बिल्कुल  बंद नही होती हैं  तो धीरें - धीरें मात्रा कम करतें जायें । सोडियम की अधिक मात्रा, ट्रांस फेट,उच्च वसा वालें पदार्थ,हाइड्रोजेनेटेड़ तेल , शक्कर मिश्रित वस्तुयें बाजार से लाना बंद कर दें । इसके ब

अमरूद में पाये जानें वाले पोषक तत्व Nutrition value of guava in Hindi

अमरूद में पायें जानें वालें पोषक तत्व Nutrition value of guava in Hindi   अमरूद सम्पूर्ण विश्व में पाया जानें वाला फल हैं । अमरूद संस्कृत शब्द अमरूद्ध : से बना हैं जिसका अर्थ होता हैं जो प्रभावी रूप से बीमारीयों को रोकनें वाला । अमरूद को जामफल,जाम ,अफ्रीकी सेब आदि नामों से पुकारा जाता हैं । अमरूद की उत्पत्ति अमेरिका के ऊष्णकटिबंधीय भागों और वेस्टंडीज से मानी जाती हैं । पका हुआ अमरूद स्वाद, और पौष्टिकता से भरपूर होता हैं । आईये जानतें हैं 100 ग्राम अमरूद में पाये जानें वालें पौषक तत्वों की मात्रा को फाइबर        ।।   22 ग्राम प्रोटीन           ।।  05 ग्राम फास्फोरस      ।।   03% पोटेशियम      ।।  03% काँपर            ।।  03 % मैंगनीज          ।। 03 % मेग्नेशियम       ।। 03 % विटामीन c      ।।  380% विटामीन A.    ।। 12% विटामीन E.    ।। 04% विटामीन B.    ।। 05% फाँलिक एसिड़                  ।।  12% ० अमरूद विटामीन A का अच्छा स्त्रोंत हैं जिसके सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती हैं । ० अमरूद में पाया जानें वाला उच

बहेडा का वानस्पतिक नाम, और औषधीय उपयोग

बहेड़ा   बहेडा बहेडा का वृक्ष baheda ka vruksh बहुत ऊँचा होता हैं । बहेडा का तना 10 से 20 फीट की गोलाई का होता हैं ।इसकी छाल मोटी सफेद रंग की और ऊबड़ खाबड़ होती हैं । बहेडे के पत्ते चोड़े ,अंडाकार और 3 से 8 इंच तक लम्बे होतें हैं । पत्तों का रंग कत्थई होता हैं । और इन पत्तों में से बहुत तेज गंध आती हैं ।  शीतकाल के प्रारंभ मेंं इसमें फल लगते हैं जो दिसम्बर तक पकते हैं । ये फल अंडाकार होता हैं । बहेडा वृक्ष से बबूल के गोंद की तरह एक गोंद निकलती हैं।  बहेडा का वानस्पतिक नाम  Teminalia Belerica टर्मिनेलिया बलेरिका बहेड़ा का संस्कृत नाम  विभितकी,बहेडक,विषघ्न बहेडा का हिन्दी नाम  गुल्ला,बहेडा,बहुरा,सागोना,गुल्ला  आयुर्वेद मतानुसार बहेडे की प्रकृति  रूक्षंस्वादुकषायाम्लंकफपित्तहरंपरम्।रसासृडमांसमेदोजानदोषान्हन्तिविभितम्।। अर्थात बहेडा रूक्ष,स्वादिष्ट,कषाय,अम्लीय होता हैं कफ पित्त को नष्ट़ करनें वाला । रस,रक्त,मांस,और मेद के सम्पूर्ण दोषों को दूर करनें वाला होता हैं । बहेडे के औषधीय उपयोग bheda ka oshdhiy upyog पित्त की सूजन मे

तनाव क्या हैं। what is stress in hindi तनाव के प्रकार और तनाव से निपटने के उपाय

तनाव क्या हैं। what is stress in Hindi तनाव stress एक ऐसी आंतरिक और बाहरी स्थिति हैं जो मनुष्य के सामान्य व्यहवार को प्रभावित करती हैं । तनाव stress व्यक्ति को बाध्य करता हैं कि वह उसका सामना करें और यदि वह तनाव stress का सामना नहीं कर पाता तो तनाव होता हैं ।  तनाव रोजर एँव ग्रेगरी के अनुुसार " तनाव आंतरिक बाहरी उत्तेजनात्मक अनिष्टकारी स्थिति हैं जिसका समायोजन करना कठिन हैं । तनाव एक अदृश्य रोग हैं जब व्यक्ति की आवश्यकता पूरी नही होती हैं तो तनाव उत्पन्न होता हैं उदाहरण के लियें एक व्यक्ति ने रात को देर से भोजन किया सुबह पेट साफ नही हुआ तो थोडी टेंशन हुई । चाय के साथ News paper हाथ में लिया तो कुछ सामाजिक घटनाओं को पढ़ मन विचलित हो गया । आफिस जाता हैं तो काम की अधिकता की वज़ह से तनाव पैदा हो जाता हैं । शाम होतें - होतें व्यक्ति इस तनाव को मेनेज नही कर पाता फलस्वरूप सहयोगीयों से रूखा व्यहवार करता हैं । घर पँहुचनें पर बीवी ,बच्चों और पारिवारिक सदस्यों से मनमुटाव हो जाता हैं ।  इसी प्रकार सुख - दुख ,असफलता,प्रतियोगिता ,दबाव आदि तनाव को जन्म देते हैं ।

GOMUKHASAN योग करोगे तो बहुत जल्दी धूम्रपान की आदत छूट जायेगी

आजकल पूरी दुनिया में धूम्रपान करनें वाले व्यक्ति धूम्रपान के खतरों को जानकर इसे छोड़नें का मन बना रहें ,कोई अपने जन्मदिन पर धूम्रपान छोड़नें का संकल्प लेता हैं तो कोई नववर्ष के उपलक्ष्य में धूम्रपान छोड़नें का संकल्प लेता हैं किन्तु सच्चाई यह हैं कि कुछ चुनिंदा लोग ही अपने संकल्प को पूरा कर धूम्रपान छोड़ पाते हैं । जबकि अधिकांश लोग कुछ ही दिनों बाद धूम्रपान करना शुरू कर देतें हैं । आज में आपका ऐसी यौगिक क्रिया  से परिचित करवाना चाहूँगा जिसके करनें से धूम्रपान करनें की आदत कुछ ही दिनों में छूट जाती हैं। धूम्रपान छोड़नें वाली इस यौगिक क्रिया का नाम हैं " गौमुखासन" Gomukhasan आईये जानतें हैं गौमुखासन योग करनें के तरीके और गौमुखासन योग के फायदो के बारें में गौमुखासन योग करनें का तरीका  Gomukhasan karane ka tarika  १.दोनों पैरों को सामनें फैलाकर बैंठ जायें ,  गौमुखासन करनें की विधि २.दाँए पैर को चित्र में दिखाई गई स्थिति अनुसार इस तरह मोड़े की पैर की एड़ी कूल्हें के पास रहें । ३. चित्रानुसार बाँए पैर को भी घुटनें से मोड़कर  दाहिनें कूल्हें के समीप एड़ी

वायरस virus का काम होगा तमाम जब भोजन की थाली में आ जायें कुछ खास Antioxidant

वायरस virus का काम होगा तमाम जब भोजन की थाली में आ जायें कुछ खास Antioxidant हमारें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली हमें रोगों से बचानें का काम करती हैं । लेकिन जब रोगप्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर हो जाती हैं तो शरीर भी रोग का घर बन जाता हैं ।   रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानें में Antioxidant महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं । Antioxidant शरीर को रोगों से लड़नें के लिये तैयार करतें हैं । Antioxidant प्राप्त करनें के अच्छे स्त्रोंत विटामीन A, विटामीन C,और विटामीन E हैं । आईयें जानतें हैं इनके बारें में विटामीन A vitaminA विटामीन A प्राप्त करनें के दो मुख्य स्त्रोंत हैं प्रथम मांसाहारी पदार्थ और द्धितीय शाकाहारी पदार्थ । जो विटामीन A माँस,दूध से प्राप्त होता हैं वह रेटिनाल के नाम से जाना जाता हैं जबकि जो विटामीन A फल,सब्जी से प्राप्त होता हैं उसे बीटा केरोटीन कहतें हैं । यह केरोटीन एवँ रेटिनाल शरीर में जाकर विटामीन A में बदल जाता हैं । विटामीन A हमारें प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत करनें वाला महत्वपूर्ण विटामीन हैं । इस विटामीन के सेवन से वायरस जनित रोग हमारें प्रतिरक्षा तंत्र को भेद न