31 मार्च 2020

चित्रक के फायदे । chitrak KE fayde

चित्रक  के फायदे । chitrak KE fayde

आयुर्वेदिक जडी बूटी
 चित्रक के फायदे

चित्रक सम्पूर्ण भारत में पाई जानें वाली वनस्पति हैं । चित्रक की व्यावसायिक रूप से खेती भी की जाती हैं । चित्रक का पौधा chitrak ka podha वर्ष भर हरा भरा रहता हैं । चित्रक के पौधे की लम्बाई 3 से 6 फुट तक होती हैं । इसका तना बहुत पतला होता हैं ।

चित्रक की जड़ chitrak ki jad के पास से ही छोटी छोटी डालियाँ फुटती हैं यह डालियाँ चिकनी और हरे रंग की होती हैं ।

चित्रक के पत्ते  chitrak KE patte लम्बे और गोलीय होतें हैं ।

चित्रक के फूल chitrak KE phul सफेद रंग के और सुगंधहीन होतें हैं । चित्रक के फूल की कलियाँ कोमल शाखाओं में से निकलती हैं । 

चित्रक के बीज फूलों में से निकलतें हैं  जिनका स्वाद कड़वा और तीखा होता हैं । एक फूल में से एक ही बीज निकलता हैं ।

चित्रक की तीन सफेद,लाल और काली प्रजाति  पाई जाती हैं ।

चित्रक की प्रकृति

आयुर्वेद मतानुसार चित्रक गर्म, रूक्ष,हल्की होती हैं ।

चित्रक का संस्कृत नाम 


चित्रक को संस्कृत में  अग्नि,अग्निशिखा, सप्तीष कहा जाता हैं ।

चित्रक के हिन्दी नाम 


चित्रक को हिन्दी में चित्रक, चित्रा और चितावर कहतें हैं ।

चित्रक का लेटिन नाम 


plumbago zeylanica प्लम्बगो सेलेनिका


चित्रक के फायदेे। chitrak KE fayde


1.सफेद दाग lucoderma


चित्रक की छाल को गाय के दूध के साथ पीसकर सफेद दाग पर नहानें से आधा घंटा पूर्व लगानें से सफेद दाग कुछ दिनों में मिटनें लगतें हैं और त्वचा का रंग पूर्व की तरह काला होनें लगता हैं ।  लेकिन त्वचा में जलन होती हैं तो लगानें से पूर्व परामर्श अवश्य ले लें ।


फेटी लिवर

ज्वार या बाजरा के तनें को छीलकर उसके ऊपर चित्रक की जड़ का पावडर चुटकी भर नमक की तरह डालकर ज्वार या बाजरें का तना गन्नें की तरह चूसनें से फेटी लिवर की समस्या कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती हैं ।

गठिया 


 चित्रक के तनें को पीसकर गठिया की वजह से उत्पन्न दर्द पर 10 - 15 मिनिट तक लेप करनें से दर्द में आराम मिलता हैं ।


 बवासीर


चित्रक की जड़ को छाछ या  दही  के साथ मिलाकर पीनें से बवासीर में आराम मिलता हैं ।


सफेद बाल

समय पूर्व सफेद हुए बालों को यदि काला करना चाहतें हो तो काली चित्रक को पीसकर आँवलें के साथ बालों में लगानें से सफेद बाल कालें हो जातें हैं ।


पीलिया रोग 

चित्रक की जड़ को शहद और आंवला रस के साथ मिलाकर रात को चाटनें से पीलिया रोग मिट जाता हैं ।


हाथीपाँव


चित्रक की जड़ और देवदारू की जड़ को गौमूत्र के साथ पीसकर हाथीपाँव पर लेप करनें हाथीपाँव की समस्या समाप्त हो जाती हैं ।


रूकी हुई माहवारी को चालू करनें में

चित्रक की जड़ को गर्भाशय के मुख पर रखनें से रूकी हुई माहवारी चालू हो जाती हैं । गर्भवती स्त्री को चित्रक का सेवन नही करना चाहियें ।

जहरीलें कीड़े मकोड़ें का विष उतारनें में


चित्रक की जड़ को गाय के घी के साथ मिलाकर कीडे मकोड़े काटे स्थान पर लगानें से कीडें मकोडे का जहर उतर जाता हैं ।

खुजली में चित्रक 


शरीर में खुजली होनें पर चित्रक के बीज को पानी के साथ पीसकर नहानें से दस मिनिट पूर्व लगा लें। खुजली में बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं ।

पागलपन में


चित्रक की जड़ और ब्राम्ही समान मात्रा में लेकर पीस लें और पागलपन में 3 - 3 ग्राम सुबह शाम गाय के दूध के साथ खिलानें से बहुत तेजी से आराम मिलता हैं ।


प्रसूति में चित्रक


चित्रक की जड़ एक एक इंच काटकर 10 - 15 जगह सूत की डोरी में बाँध दे । यह डोरी प्रसूता के गलें में बाँध दे और 21 दिन तक बंधी रहनें दें । इससे प्रसूता को ज्वर नही आता हैं और नवजात के आसपास कीटाणु नही आतें हैं । यह सिद्ध और अनूभूत योग हैं ।



चित्रक बहुत गर्म होती हैं इसके उपयोग के पूर्व वैघकीय परामर्श बहुत आवश्यक हैं क्योंकि यह औषधी पेट में जलन पैदा करती हैं । अधिक मात्रा में लेनें पर जहरीले प्रभाव दिखाती हैं और चमड़ी पर बिना वैघकीय परामर्श से लगानें पर छालें उत्पन्न कर सकती हैं ।


30 मार्च 2020

आयुर्वेदिक चूर्ण ::: जिनसें आयुर्वेद विश्व प्रसिद्ध बना

१.तालिसादी चूर्ण :::



आयुर्वेदिक चूर्ण
 तालिसादी चूर्ण

कासश्वासरूचिहरं तच्चूर्ण दीपनं परम्।ह्रतपाणडुगरहणीरोगप्लीहशोधज्वरापहम्।छर्घतीसारशूलघ्नं मूढवातानुलोमन्।।


तालिसादी चूर्ण खाँसी,श्वास ,पाचन,पीलिया ,शोध ,ज्वर जैसी समस्याओं के लियें बहुत महत्वपूर्ण औषधी हैं ।




तालिसादी चूर्ण की घटक औषधी



1.तालिस पत्र Abies webbiana



2.दालचीनी cinnamomum zeylanicum



3.पीप्पली  piper longum



4.इलायची Elettaria cardamomum




उपयोग uses



सामान्य सर्दी खाँसी ,सूखी खाँसी, अस्थमा, ज्वर में उपयोगी


1.तालिसादी चूर्ण अपच,भूख न लगना की सर्वोत्तम औषधी हैं ।


2.सांस लेनें में परेशानी की तालिसादी चूर्ण उत्तम औषधी मानी जाती हैं ।


3.एलर्जी से उत्पन्न खाँसी की का शमन करती हैं ।



4.फेफड़ों में जमा बलगम phlegm को निकालकर फेफड़ों को स्वस्थ बनाती हैं ।




उपयोग मात्रा



वैधकीय परामर्श से




२.वैश्वानर  चूर्ण vaishwanar churns

आयुर्वेदिक चूर्ण
 वैश्वानर चूर्ण


पीतं जयत्यामवातं गुल्मं ह्रदस्तिजान गदान । प्लीहानं ग्रन्धिशूलादीनशार्स्यानाहमेव च ।। विबंध वातजानम् रोगांस्तथैव हस्तपादजान्।वातनुलोमनमिंदं चूर्ण वैश्वानरं स्मृतम ।।



वैश्वानर चूर्ण के घटक द्रव्य 





1.सैन्धा नमक sodii color is um


2.अजवाइन carum Copticum


3.अजमोदा apium graveolans



4.सौंठ Zingiber officinale



5.हरड़ Terminalia chebula



वैश्वानर चूर्ण के उपयोग



1.कब्ज


2.पेटदर्द


3.गठिया 


4.वातरोग


5.मांसपेशियों में दर्द



6.पाखाना न आना




मात्रा 



छाछ,घी या लस्सी से मात्रा वैघकीय परामर्श से





३.महासुदर्शन चूर्ण 


एतत्सुदर्शनं नारदचूर्ण दोषत्रयापहम्।ज्वरांश्च निखिलान्हन्यान्नात्र कार्या विचाराणा ।।शीतज्वरैकाहिकादीन्माहं तन्द्रां भ्रम तृषाम ।श्वासं कासं च पाण्डुं च ह्रदरोगं हन्ति कामलाम् ।। सुदर्शनं चक्रं दानवानां विनाशनम् । तदज्ज्वराणां सर्वेषामिदं चूर्ण परणाश्नम् ।।





महासुदर्शन चूर्ण के घटक द्रव्य


महासुदर्शन चूर्ण के घटक द्रव्य
 महासुदर्शन चूर्ण


1.सुदर्शन crinum latifolium


2.चिरायता Swertia chirayta



3.कुटकी pichrorhiza kurroa



4.पिप्पली piper longum



5. गिलोय Tinospora cordifolia



6.पित्तपापड़ा fumaria indica



7.आँवला Emblica offcinalis



8.हरड़ Terminaia chebula 



9.बहेड़ा Terminalia bellirica 



10. नीम Azadirecta indica 




11.मुलेठी Glycrrhize glabra



12.कुटज Holarrhena antidysenterica 



13.अतीस Aconitum hetrophylum



14.देवदारू cedrus deodars 



15.वायबिडंग Embelia robes




16.पुष्करमूल Inula racemosa



17.दालचीनी Cinnamomum zeylanicum




18.इलायची Elettaria cardamomum




19.लोंग Syzygium aromaticum





20. चित्रक Plumbago zeylanica




21.त्रिकटु piper longum, zingiber officinale, piper nigrum 




22.सफेद चंदन 



23.शालपर्णी


24. इन्द्र जो 



25.चव्य 



26.फिटकरी



27.वंशलोचन 



28.करंज बीज 



29.कालमेघ 



30.प्रसातपर्णी


31.पंखर आदि 



उपयोग 


1.मलेरिया बुखार में उपयोगी



2.बदन दर्द,सर्दी जुकाम में लाभकारी



3.सभी प्रकार के बुखार में उपयोगी



4.एकांतरित ज्वर Typhoid fever



5.इसके सेवन से digestive juice बननें की प्रक्रिया तेज हो जाती हैं ।



मात्रा 



भोजन उपरांत दूध के साथ चिकित्सक के परामर्श से





४.मुलेठी चूर्ण

मुलेठी चूर्ण के घटक द्रव्य
 मुलेठी चूर्ण


सुस्निगधं बृहण केश्यं वातपित्तकफापहम् । सघ:क्षतास्त्रतृटच्छर्दिक्षयशोफव्रणान् हरेत् ।।



घटक द्रव्य

मुलेठी Glycyrrihize glabra 




उपयोग

1.अस्थमा


2.Allergic bronchitis


3.स्वरभंग 



4.खाँसी



५.दाड़िमाष्टक चूर्ण



कर्षोन्मिता तुगाक्षीरी चातुर्जातं द्धिकार्पिकम् । यमानीधान्यकाजाजी ग्रन्थिव्योषं पलांशकम्।। पलानि दाडिमादष्टौ सितायाश्चैकत: कृतम। गुणै: कपित्थाष्टकवच्चूर्णमेतन्न संशयज:



घटक द्रव्य




1.अनार punica granatum


2.दालचीनी Cinmamomum zeylanicum


3.इलायची Elettaria cardamomum



4.हींग



5.सैंधानमक


6.सफेद जीरा


7.निम्ब सत्व




उपयोग


1.भोजन में अरूचि


2.एसिडिटी 



3.कब्ज


4.वातनाशक





27 मार्च 2020

गूलर के औषधीय उपयोग

गूलर के औषधीय उपयोग 

गूलर अंजीर ,बरगद और पीपल के वर्ग का वृक्ष हैं । गूलर का वृक्ष 20 से 30 फुट तक ऊँचा होता हैं । गूलर के पत्ते अंडाकार और घनें होतें हैं ।
गूलर के औषधीय उपयोग
 गूलर का पेड़


गूलर के फल तनों से फूटतें हैं। तथा गूलर के फूल फल के अन्दर स्थित होतें हैं । इसके पत्ते तोड़नें पर इसमें से दूध निकलता हैं । गूलर के पेड़ का महत्व इसके औषधि गुणों के कारण हैं ।

गूलर का संस्कृत नाम 

औदुम्बर,क्षीरवृक्ष,जंतुफल,उदुम्बर, हेमदुन्धक

गूलर का हिन्दी नाम 

गूलर ,ऊमर,परोआ

गूलर का लेटिन नाम 


ficus Racemosa



आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति 


आयुर्वेद मतानुसार गूलर शीतल ,मधुर,कसैला,तथा भारी होता हैं ।



गूलर के औषधीय उपयोग 



घाव में गूलर के फायदे


गूलर में तांबा 12 प्रतिशत होता हैं । तांबा बहुत अच्छा संक्रमण रोधी तत्व होता हैं ।

गूलर के पत्तों,छाल,का क्वाथ बनाकर उससे घाव धोनें पर घाव बहुत जल्दी सूख जाता हैं । 


गूलर का दूध  चोंट वाले स्थान पर लगाने से अधिक रक्त के बहाव को तुरंत बंद कर देता हैं ।


अतिसार में 


गूलर की जड़ का चूर्ण बनाकर खिलानें से अतिसार में आराम मिलता हैं ।

एनिमिया में 

गूलर का फल,पत्तीयाँ ,छाल आयरन से भरपूर होती हैं । दस गूलर के फलों में गर्भवती स्त्री की दैनिक आयरन की आवश्यकता जितना आयरन प्रचुरता में उपलब्ध होता हैं ।

कामउत्तेजना में

गूलर के पेड़ की टहनियों को तोड़नें पर इसमें से दूध टपतकता हैं इस दूध की पाँच - सात बूँद लेनें से महिलाओं और पुरूषों की काम उत्तेजना जागृत हो जाती हैं । किन्तु शीत प्रकृति के स्त्री पुरूष को दूध का सेवन नही करना चाहियें । 

पित्त विकारों में 

इसके चार  पत्तों को पीसकर शहद के साथ सुबह शाम सेवन करनें से पित्त विकार नष्ट हो जातें हैं । 

ज्यादा गुस्सा करनें वालें व्यक्ति को इसके पत्तों का 10 ML ज्यूस बनाकर पिलाना चाहियें । गुस्सा बहुत जल्दी काबू में आता हैं ।


अरिदिमिया में


गूलर के फलों में मैग्नीशियम प्रचुरता में पाया जाता हैं जो ह्रदय की अनियमित धडकनों को नियमित करता हैं । जिन लोगों को अर्दिमिया की समस्या हो उनकों तीन चार गूलर के फलों का सेवन नियमित करना चाहियें ।


रक्त प्रदर में 

गूलर की छाल का क्वाथ 10 मिलीग्राम प्रतिदिन के हिसाब से सुबह शाम लेनें से रक्तप्रदर में आराम मिलता हैं ।

गर्भावस्था में


गूलर कैल्सियम,मैग्निशियम और फास्फोरस का अति उत्तम स्त्रोंत हैं ।  गर्भवती स्त्री को रोज जितनी कैल्सियम की आवश्यकता होती हैं ,उतनी मात्रा की पूर्ति दस बारह गूलर के फलों से हो सकती हैं ।

हड्डी जोड़नें में 

टूटी हड्डी को जोड़नें में गूलर के समान दूसरा वृक्ष नही हैं । यदि इसके कच्चे फलों की सब्जी बनाकर दिन चार दिन तक खा ली जायें तो टूटी हड्डी कुछ ही दिनों में जुड़ जाती हैं ।


मस्तिष्क रोगों में

गूलर में पाया जानें वाला पोटेशियम मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं में आक्सीजन की आपूर्ति को सुधारता हैं । जिससे डिमेंशिया,तनाव,ब्रेनस्ट्रोक,उच्च रक्तचाप का खतरा नही होता हैं ।


कैंसर में

गूलर के पत्तें,छाल,फल एंटी आक्सीडेंट गुणों से भरपूर होतें हैं । इनमें कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि नियंत्रित करनें की क्षमता विधमान होती हैं । अत: इसका सेवन कैंसर रोगियों को करना चाहियें ।

पेप्टिक अल्सर में

गूलर के दूध में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण पेट के छालों को तेजी से ठीक करतें हैं । अत: इसके दूध की चार पाँच बूँदें पतासे के साथ या पानी के साथ सेवन करें ।

ओस्टियोपोरोसीस में


गूलर के पत्ते और फल कैल्सियम और फास्फोरस का उत्तम स्त्रोत होनें से ओस्टियोपोरोसीस बीमारी के लिये बहुत उम्दा उपचार upchar हैं । ओस्टियोपोरोसीस से पीडित व्यक्ति इसके पत्तों और फल का किसी भी रूप में सेवन कर सकतें हैं ।

सौन्दर्य प्रसाधक के रूप में

गूलर की छाल का क्वाथ बनाकर पीनें से मुहाँसे की समस्या कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती हैं । क्वाथ बनानें के लियें गूलर की छाल की 3 ग्राम मात्रा 200 ML पानी में आधा रहनें तक उबाले और इसे दिन में दो बार पीयें ।

बालों की समस्या में

गूलर के पत्तों को पीसकर नहानें से पाँच मिनिट पहलें बालों पर लगानें से बाल काले चमकदार और समय पूर्व सफेद नही होतें हैं ।


बांझपन में

गूलर पेड़ की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं कि यह पेड़ स्त्री और पुरूष दोनों के बांझपन को दूर कर देता हैं ।

गूलर के चार पांच फल और पाँच सात नये पत्ते रात में गाय के दूध के साथ सेवन करें तो बांझपन दूर हो जाता हैं ।

खूनी बवासीर में


गूलर के सूखे पत्तों या कच्चे फलों को सुखाकर मिश्री के साथ समान अनुपात में मिलाकर एक चम्मच प्रतिदिन खानें से खूनी बवासीर में आराम मिलता हैं ।

मुंह के छालों में 

गूलर की छाल पानी के साथ उबालकर कुल्ले करनें से मुंह के छाले बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं। 

मधुमेह में

गूलर के फलों को सुखाकर चूर्ण बना लें,यह चूर्ण एक चम्मच रात को सोते वक्त लिया जाए तो रक्त शर्करा नियंत्रित होती हैं।


शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में

गूलर का फल, पत्ती,छाल शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को डिटाक्स कर देता है। इसके लिए फूल,पत्ती छाल का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए।



26 मार्च 2020

Allergy क्या होती हैं किन - किन चीजों से मनुष्य में एलर्जी हो सकती हैं

Allergy क्या होती हैं

 
एलर्जी
एलर्जी

"Allergy शरीर के द्धारा की जानें वाली एक ऐसी प्रतिक्रिया हैं जो तब होती हैं जब मनुष्य का शरीर किसी ऐसी वस्तु या Antigen या एलर्जन के सम्पर्क में आता हैं।"


जब मनुष्य का शरीर किसी Allergic पदार्थों के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर द्धारा असाधारण प्रतिक्रिया होती हैं । जैसें छींके आना,आँखों से पानी आना,त्वचा पर खुजली,चकते पडना ,अस्थमा होना आदि ।


जो पदार्थ Allergy पैदा करतें हैं उन्हें एलर्जन या एंटीजन कहतें हैं ।



Allergy में शरीर कैसें प्रतिक्रिया व्यक्त करता हैं ?




जब कोई Antigen पदार्थ शरीर के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर इस पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता हैं और उस पदार्थ को नष्ट़ करनें के लियें एंटीबाडी  का निर्माण करना शुरू कर देता हैं । फिर एंटीजन और एंटीबाड़ी में संघर्ष होता हैं । संघर्ष की वजह से एक पदार्थ "Histamine" पैदा होता हैं । यह Histamine ही एलर्जी के लिये उत्तरदायी होता हैं ।



किन - किन चीजों से Allergy होती हैं ?


Allergy के लियें कई कारक उत्तरदायी होतें हैं 


1.धूल धुँए और परागकणों से एलर्जी


जब व्यक्ति धूल धुंए के सम्पर्क में आता हैं तो एलर्जी पैदा होती हैं जैसें छींक आना,आँखों से पानी आना ,चेहरा लाल होना,अस्थमा होना ,शरीर पर चकतें निकलना ,खुजली होना आदि ।


फूलों के परागकण के सम्पर्क में आनें से भी व्यक्ति एलर्जी से ग्रस्त हो जाता हैं । 



2.खानें की चीजों से एलर्जी khane ki chijon se allergy


खाद्य पदार्थों में मोजूद प्रोटीन शरीर में एलर्जी पैदा करता हैं । जो खाद्य पदार्थ एलर्जी पैदा करतें हैं उनमें शामिल हैं गैंहू,चावल, दूध ,अंडें,मछली,मूंगफली,सोयाबीन,खट्टे पदार्थ आदि ।


इन पदार्थों के सेवन से पेट में मरोड होना,दस्त लगना,मुहँ में छालें होना,उल्टी होना,पेट में गैस बनना आदि समस्याएँ पैदा हो जाती हैं ।



3.दवाईयों से एलर्जी Dava se allergy


कुछ विशेष दवाईयों जैसें पेनिसिलीन,पैरासीटामोल,और अन्य प्रकार की दवाईयों से एलर्जी पैदा होती हैं । इस प्रकार की एलर्जी में शरीर पर सूजन आना, पेट में छालें हो जाना, शरीर पर चकतें हो जाना, आदि समस्या हो जाती हैं ।


दवाईयों से होनें वाली एलर्जी कभी - कभी जानलेवा भी सिद्ध हो सकती हैं अत: दवाई लेने के बाद समस्या बढ़ती हैं तो एलर्जी टेस्ट अवश्य करना चाहियें ।

टीकाकरण के बाद होनें वाली एलर्जी बहुत गंभीर मानी जाती हैं । अत : टीकाकरण के पूर्व एलर्जी का इतिहास अवश्य पता करना चाहियें ।


4.मौसम के  बदलाव से एलर्जी mousam me badalav se allergy


मौसम भी कई लोगों के लिये एलर्जी का कारक  होता हैं । सर्दी में कई लोगों को परेशानी होती हैं,कई लोगों को गर्मी,में परेशानी होती हैं ।

इसके अलावा कई लोगों को धूप और नमी से भी एलर्जी होती हैं ।


मौसम बदलाव से त्वचा पर चकतें ,खुजली ,अस्थमा, नाक से पानी निकलना,आंखों में खुजली आदि समस्या पैदा हो जाती हैं ।


5.जानवरों से एलर्जी 

जानवरों के लार,त्वचा मूत्र ,बाल और पसीनें में मोजूद एलर्जिन तत्व हवा में घूलकर सांस के माध्यम से शरीर में पहुँचकर एलर्जी पैदा करतें हैं ।

6.कपड़ों से एलर्जी 


कई लोगों को काटन ,सिंधेटिक कपड़ों और रबड़ से एलर्जी होती हैं । इन एलर्जन को छूनें पहनने या घर में रखनें से एलर्जी पैदा हो जाती हैं । 

7.गंध से एलर्जी 

कई लोगों को परफ्यूम की तेज गंध,मिर्च मसालों की छोंक,फूलों की खूशबू ,पेंट वार्निश की गंध से एलर्जी हो जाती हैं । इस प्रकार की एलर्जी में आँख नाक से पानी निकलना,छींके आना,सिरदर्द होना आदि समस्या हो जाती हैं ।

8.कीड़ों के काटनें पर एलर्जी 


चींटी,ततैया,मधुमक्खी, बिच्छू ,मच्छर आदि के काटनें से व्यक्ति को पूरे शरीर में खुजली चलती हैं। चकते उठ जातें हैं । अस्थमा हो जाता हैं।  कभी - कभी व्यक्ति बैहोश भी हो जाता हैं ।

9.धातुओं से एलर्जी


धातुएँ जैसें सोना चाँदी तांबा,पीतल आदि धारण करनें वालों में जिस जगह उसनें ये धातु धारण की हैं उस जगह लाल होना, सूजन आना ,सफेद दाग होना आदि समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।

एलर्जी एक आम समस्या हैं जिससे पीडित व्यक्ति एंटी एलर्जिक दवाई लेकर कुछ समय तक फौरी राहत प्राप्त कर लेता हैं किन्तु अब तक इसका सर्वमान्य उपचार नही खोजा जा सका हैं । सिर्फ एलर्जन पदार्थों के सम्पर्क में आनें से बचना ही इसका इलाज हैं ।

योग की कुछ क्रियाएँ जैसें प्राणायाम,भ्रामरी ,कपालभाँति आदि एलर्जी के विरूद्ध प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाती हैं ।

इसके अलावा गर्म पानी का सेवन,अदरक,लौंग,तुलसी,हल्दी ,और काली मिर्च में पायें जानें वाले एन्टी एलर्जिक गुण शरीर को एलर्जी से बचातें हैं ।



क्या हैं एलर्जिक रायनाइटिस--:


अस्थमा
 allergic rhinitis


Rhinitis allergy एक प्रकार की नाक की एलर्जी हैं.नाक साँस लेनें के अलावा हवा को फिल्टर करनें का काम भी करता हैं.जब बाहरी कण जैसे धूल,परागकण आदि नाक द्धारा शरीर में प्रवेश करतें हैं,तो राइनाइटिस एलर्जी का खतरा बढ़ जाता हैं.यह किसी भी मौसम में और उमृ में हो सकता हैं.


प्रकार-


यह दो प्रकार का होता हैं-


१.मौसमी -यह किसी विशेष मौसम में होता  हैं.


२.स्थाई- यह साल भर पीड़ित को अपनी चपेट में लेकर रखता हैं.मौसम बदलनें का इस पर कोई प्रभाव नहीं होता हैं,बल्कि किसी खास मौसम में यह और अधिक विकराल रूप धारण कर लेता हैं.


एलर्जी के कारण Allergy ke Karan 


१.परागकण


२.धूल,धुआँ,प्रदूषण,


३.नमी


४.जानवरों के बाल रेशे.


५.अचानक मौसम परिवर्तन.


६.डस्ट माइट्स



एलर्जी के लक्षण Allergy ke laxan



१.लगातार छींक आना.



२.सूंघनें की शक्ति कम होना.



३.लम्बें समय तक खाँसी ,गलें में खींच-खींच.


४.नाक से पानी बहना या बंद हो जाना.



५.साँस लेनें में तकलीफ.



६.गलें व आँखों में खुजली.



एलर्जी में रखने वाली सावधानी:-



१.घर से निकलतें वक्त मास्क का प्रयोग करें.


२.घरों में फूलों वाले पौधे ना लगावें.


३.पालतू जानवर न रखें व इनसे दूरी बनाकर चलें.


४.परफ्यूम व अन्य सुगंधित पदार्थों का प्रयोग न करें.


५.नाक की नियमित रूप से सफाई करें.


एलर्जी का उपचार Allergy ka upchar


१.गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें जैसें चाय,और मसालेदार चाय काढ़ा.

२.नाक में गोघ्रत को नियमित रूप से डालते रहें.

 अन्य औषधियों से संबधित उपचार के लियें वैघकीय परामर्श लें.


25 मार्च 2020

covid - 19 के लियें प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत करनें वाली आयुष औषधी

covid - 19 के लिये आयुर्वेदिक रोग प्रतिरोधक चिकित्सा 

corona virus
 covid 19 KE liye Ayurveda


० संशमनी वटी या गिलोय वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार 15 दिन तक गर्म पानी से लेना चाहिये ।


० Ayush -64 की दो गोली दिन में दो बार लेना चाहियें ।


० अणु तेल या शीशम तेल को नाक में प्रतिदिन सुबह चिकित्सक के निर्देशानुसार डालें ।



० षडंग पानी ( मुस्ता,परपट,अशीर,चंदन,उदीच्य,शुण्ठी ) का 10 ग्राम पावडर बनाकर एक लीटर पानी में उबाले ,आधा पानी शेष रहनें पर इसे उबालना बंद कर दें । दो तीन घंटों में गुनगुना कर यह पानी थोडा - थोडा पीतें रहें ।




० त्रिकटु पावडर 5 ग्राम, तुलसी 3 से 5 पत्तियाँ 1 लीटर पानी में तब तक उबाले जब तक की पानी आधा न रह जायें । इस पानी को लगातार पन्द्रह दिनों तक सेवन करें ।



होम्योपैथिक रोगप्रतिरोधक चिकित्सा 


कोरोना वायरस
 Covid -19


० आरसेनिक एल्बम 30 की 5 गोली दिन में तीन बार तीन दिनों तक लें ।




० ब्रायोनिया
अल्बा,बेलाडोना,जैलिसिमियम,यूफेटोरियम,परफोलिटम भी सर्दी जुकाम जैसें लक्षणों पर प्रभावी मानी गई हैं ।






यूनानी रोगप्रतिरोधक चिकित्सा 





० वेहीदाना 3 ग्राम

० उन्नाब 5 दाना


० सपिस्तान 9 दाना


ये तीनों औषधीयाँ 500 मिलीग्राम पानी में आधा पानी शेष रहनें तक उबाले और दिन में तीन बार पीयें ।




० अर्क अजीब 4 से 8 बूँद ताजे पानी में डालकर दिन में 3 -4 बार पियें ।





० योग चिकित्सा द्धारा रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाना 




० यौगिक क्रियाएँ जैसें प्राणायाम,कपालभाँति,अनुलोम विलोम,सूर्य नमस्कार आदि करतें रहें ।




० भोजन में दाल,हरी सब्जी,सलाद ,फल आदि सम्मिलित करें ।


० साबुन या sanitizer से हाथ साफ करें ।



० अपने आसपास स्व्चछता का ध्यान रखें ।




उपरोक्त औषधी लेनें से पूर्व संबधित चिकित्सक से परामर्श कर लें ।



० प्याज के औषधीय प्रयोग


24 मार्च 2020

4 सप्ताह में मोटापे [obsity] का काम तमाम

4 सप्ताह में मोटापे [obsity] का काम तमाम 


वैज्ञानिक शोधों से यह ज्ञात हुआ हैं कि यदि हम लगातार 4 सप्ताह तक किसी काम को अपनी दिनचर्या का अँग बना लेतें हैं तो यह आदत जीवनभर के लियें हमारी आदत बन सकती हैं । उदाहरण के लियें यदि हम पूरे चार सप्ताह सुबह ठीक 6 बजे उठनें की आदत बना ले तो यह हमारी दिनचर्या का अंग बन जायेगा ।
 

ठीक इसी तरह की आदत यदि हम खान पान व्यायाम आदि की बना लें तो यह आदत  जीवनपर्यंत बनी रहेगी ।


आज हम आपकी दिनचर्या में 4 सप्ताह तक ऐसी आदतों का समावेश करवायेंगें जिससे मोटापा कम करनें में मदद मिलेगी ।

अर्थात 4 सप्ताह में मोटापे का काम तमाम तो आईए जानतें मोटापा कम करने के तरीके के बारें में


पहला सप्ताह 



पहले सप्ताह में आपको अपनें खानपान पर नियत्रंण करना हैं । वह चीज जो फैट से भरपूर हैं और आपको प्रिय हैं उसको अपनें खानपान से बाहर निकालना हैं । यदि एकदम   से बिल्कुल
 बंद नही होती हैं  तो धीरें - धीरें मात्रा कम करतें जायें ।



सोडियम की अधिक मात्रा, ट्रांस फेट,उच्च वसा वालें पदार्थ,हाइड्रोजेनेटेड़ तेल , शक्कर मिश्रित वस्तुयें बाजार से लाना बंद कर दें । इसके बजाय फल सब्जी,अंकुरित अनाज ,दही,छाछ,दालें,मोटे अनाज,बादाम,मखानें,अखरोट आदि पदार्थ घर पर लेकर आयें ।


लगभग एकसाल बाद इस प्रयोग से आपके शरीर में गैर ज़रूरी वसा का जमाव बंद हो जायेगा और आप पहलें से अधिक कम वजन वालेें और ऊर्जावान बन जायेंगें ।



० हर्ड इम्यूनिटी क्या होती हैं



दूसरा सप्ताह


पहलें सप्ताह में बनाई आदत को निरंतर रखतें हुयें दूसरें सप्ताह में टहलनें और दोड़नें की शुरूआत करें । पहलें दिन दिन कम से कम एक एक किलोमीटर घूमनें से शुरूआत करते हुये सप्ताह के अंत तक पाँच किलोमीटर घूमनें का नियम बना लें ।


पाँच किलोमीटर घूमनें के दौरान अपनी सामर्थ्य अनुसार कुछ किलोमीटर दोडें भी ऐसा करनें से शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होना शुरू हो जायेगी ।



अगलें कुछ महिनें आपनें इस आदत को निरंतर रखा तो निश्चित रूप से आपका बहुत सारा वजन कम हो जायेगा ।





तीसरा सप्ताह



दूसरें हफ्ते और पहलें हफ्तें की आदत को निरंतर रखतें हुये तीसरें हफ्तें में एक दिन उपवास करें। 


भोजन करनें और दिनचर्या को व्यवस्थित करनें के लियें एक रूटीन फालों करें उदाहरण के लियें दिन का नाश्ता और भोजन सम्पूर्ण होना चाहियें जिसमें दाल,चावल,सब्जी सलाद आदि पर्याप्त मात्रा में हो और यह भोजन भरपेट हो ।



रात का भोजन सोनें से 3 घंटें पूर्व कर लेना चाहियें । यह भोजन दिन में कियें गये भोजन का एक तिहाई होना चाहियें । सूजी, खिचड़ी ,ओट्स जैसें खाद्य पदार्थ शाम के भोजन में होना चाहियें ।


देर रात होनें वाली शादी पार्टी में मीठा,तला हुआ खानें से बचें ।


 तैल में तलनें की बजाय भून कर खानें का प्रयास करें और दिन भर में 12 से 15 पन्द्रह गिलास पानी पियें ।





 चौथा सप्ताह 



पहलें दूसरे और तीसरें सप्ताह के कामों को नियमित रखतें हुये चौथे सप्ताह से कुछ संकल्प लें जैसे इन स्वस्थ्य आदतों को वजन कम होनें के बाद भी नही छोडूंगा । 


 आफिस से आनें के बाद टीवी और मोबाइल में अधिक समय नष्ट़ नही करूंगा बल्कि बच्चों के साथ कुछ ऐसे खेल खेलूंगा जो हाथ पाँवों को गतिशील रखतें हो ।


चार सप्ताह तक इन आदतों का समावेश कर आप अपनें शरीर को  मज़बूत,मोटापामुक्त और स्फूर्तिवान बना सकतें हैं ।



० बहेडा के बारें में जानें



० fitness के लिये सतरंगी खानपान




० अमरूद पाये जानें वाले पौषक तत्व




० बहेडा का वानस्पतिक नाम और फायदे




० एलर्जी क्या होती हैं




० प्याज के फायदे





० चित्रक के फायदे




० गूलर के औषधीय उपयोग





० मुंह का कैंसर





० काला धतूरा के फायदे और नुकसान




० योग क्या हैं ?



० गेंहू के जवारे के औषधीय गुण

हम आपकी दिनचर्या में 4 सप्ताह तक ऐसी आदतों का समावेश करवायेंगें जिससे मोटापा कम करनें में मदद मिलेगी ।
मोटापा

23 मार्च 2020

अमरूद में पाये जानें वाले पोषक तत्व Nutrition value of guava in Hindi

अमरूद में पायें जानें वालें पोषक तत्व Nutrition value of guava in Hindi



 
अमरूद सम्पूर्ण विश्व में पाया जानें वाला फल हैं । अमरूद संस्कृत शब्द अमरूद्ध : से बना हैं जिसका अर्थ होता हैं जो प्रभावी रूप से बीमारीयों को रोकनें वाला ।


अमरूद को जामफल,जाम ,अफ्रीकी सेब आदि नामों से पुकारा जाता हैं ।


अमरूद की उत्पत्ति अमेरिका के ऊष्णकटिबंधीय भागों और वेस्टंडीज से मानी जाती हैं ।




पका हुआ अमरूद स्वाद, और पौष्टिकता से भरपूर होता हैं ।

आईये जानतें हैं 100 ग्राम अमरूद में पाये जानें वालें पौषक तत्वों की मात्रा को



फाइबर        ।।   22 ग्राम



प्रोटीन           ।।  05 ग्राम




फास्फोरस      ।।   03%





पोटेशियम      ।।  03%




काँपर            ।।  03 %



मैंगनीज          ।। 03 %



मेग्नेशियम       ।। 03 %



विटामीन c      ।।  380%



विटामीन A.    ।। 12%



विटामीन E.    ।। 04%



विटामीन B.    ।। 05%




फाँलिक एसिड़                  ।।  12%





० अमरूद विटामीन A का अच्छा स्त्रोंत हैं जिसके सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती हैं ।



० अमरूद में पाया जानें वाला उच्च किस्म का फायबर कब्ज मिटाकर आँतों की सफाई करता हैं ।



० दाँतों से सम्बधित बीमारी जैसें पायरिया ,दाँत कमजोर होना,आदि में अमरूद का सेवन बहुत फायदेंमंद रहता हैं ।




० अच्छी health  healthylifestyle के लियें अनिवार्य शर्त हैं। अमरूद प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर करनें वायरस से शरीर की रक्षा करता हैं ।



० अमरूद में पाया जानें वाला विटामीन E स्त्रीयों की माहवारी को नियमित करता हैं । साथ ही बांझपन की संभावना समाप्त करता हैं ।


० गर्भवती स्त्री यदि अमरूद का सेवन करती हैं तो हिमोग्लोबिन की कमी नही होती हैं ।



० अमरूद के बीज बहुत अच्छे पाचक मानें जातें हैं अमरूद सेवन से भोजन बहुत जल्दी पच जाता हैं ।



० अमरूद खानें से मुुुुुुुुुंह के छाले बहुत तेजी से ठीक हो जाते हैं ।
अमरूद में पाए जाने वाले पौषक तत्व
अमरूद





० अमरूद त्वचा पर मुहाँसे होनें की संभावना समाप्त कर देता हैं ।


० अमरूद  स्तन कैंसर की संभावना कम कर देता हैं ।


० अमरूद थायराइड़ ग्रंथि के लियें उपयोगी फल हैं अमरूद के सेवन  से थायराइड़ ग्रंथि की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती रहती हैं ।



० अमरूद का सेवन करनें से मोटापा नियंत्रित होता हैं ।




० अमरुद में पाया जाने वाला विटामिन बी मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बेहतर बनाता है जिससे ब्रेन स्ट्रोक,ब्रेन हेमरेज होने की संभावना नही होती हैं ।


० अमरुद में बहुत ज्यादा फायबर fiber और थोड़ी मात्रा में ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता हैं जिससे रक्त शर्करा blood glucose control नियंत्रित होती हैं ।



० अमरुद में पाया जाने वाला फोलिक एसिड folic acid गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का सही विकास करता हैं ।




० पके हुए अमरूद के 100 ग्राम बीजों को 
पीसकर इसमे पानी और शक्कर मिला ले । अब इस मिश्रण को दिन में चार पाँच बार थोड़ा थोड़ा कर पीयें । इस प्रयोग पित्त विकारों  में शीघ्रता से लाभ पहुंचता हैं ।


० वात पित्त कफ प्रकृति के लक्षण




० लक्ष्मी विलास रस के फायदे




० गिलोय के फायदे



० टैकीकार्डिया क्या होता हैं ?

22 मार्च 2020

बहेडा का वानस्पतिक नाम, और औषधीय उपयोग

बहेड़ा 

आयुर्वेदिक औषधी
 बहेडा

बहेडा का वृक्ष baheda ka vruksh बहुत ऊँचा होता हैं । बहेडा का तना 10 से 20 फीट की गोलाई का होता हैं ।इसकी छाल मोटी सफेद रंग की और ऊबड़ खाबड़ होती हैं ।

बहेडे के पत्ते चोड़े ,अंडाकार और 3 से 8 इंच तक लम्बे होतें हैं । पत्तों का रंग कत्थई होता हैं । और इन पत्तों में से बहुत तेज गंध आती हैं । 


शीतकाल के प्रारंभ मेंं इसमें फल लगते हैं जो दिसम्बर तक पकते हैं । ये फल अंडाकार होता हैं ।

बहेडा वृक्ष से बबूल के गोंद की तरह एक गोंद निकलती हैं। 


बहेडा का वानस्पतिक नाम 

Teminalia Belerica टर्मिनेलिया बलेरिका


बहेड़ा का संस्कृत नाम 


विभितकी,बहेडक,विषघ्न

बहेडा का हिन्दी नाम 

गुल्ला,बहेडा,बहुरा,सागोना,गुल्ला 


आयुर्वेद मतानुसार बहेडे की प्रकृति 


रूक्षंस्वादुकषायाम्लंकफपित्तहरंपरम्।रसासृडमांसमेदोजानदोषान्हन्तिविभितम्।।

अर्थात बहेडा रूक्ष,स्वादिष्ट,कषाय,अम्लीय होता हैं कफ पित्त को नष्ट़ करनें वाला । रस,रक्त,मांस,और मेद के सम्पूर्ण दोषों को दूर करनें वाला होता हैं ।


बहेडे के औषधीय उपयोग bheda ka oshdhiy upyog


पित्त की सूजन में 


बहेडे के बीज का छिलका बाँटकर पानी के साथ 3 ग्राम सुबह शाम लेनें से पित्त की सूजन मिट जाती हैं ।


पित्तज कफज बुखार में


ऐसा बुखार जिसमें चक्कर आ रहें हो गीली खाँसी हो में बहेडा का काढ़ा बहुत फायदा पंहुचाता हैं ।


भूख नही लगना 


बहेडा फल का चूर्ण सुबह शाम 3 - 3 ग्राम लेनें से भूख खुलकर लगती हैं । 

खाँसी में बहेड़ा 


बहेडा के छिलके को मुँह में रखकर चूसनें से खाँसी में आराम मिलता हैं ।और बलगम ढीला होकर बाहर निकल जाता है।

शरीर की जलन दूर करनें में


बहेडा को पानी के साथ पीसकर हाथ पैरों पर लगानें से गर्मी के कारण होनें वाली हाथ पैरों की जलन दूर होती हैं ।


गैस की समस्या में


बहेडा को भोजन उपरांत चूसकर खानें से पेट की गैस समाप्त हो जाती हैं ।

ह्रदय की तेज धड़कन में या टैकीकार्डिया में

बहेडा पेड़ की छाल दो चुटकी सुबह शाम गाय के दूध के साथ लेनें से ह्रदय की धडकन सामान्य हो जाती हैं ।

कामेच्छा बढानें में 


बहेडा के छिलके को सुबह शाम शहद या दूध के साथ लेनें से स्त्री पुरूष की बढ़ती उम्र के साथ होनें वाली कामेच्छा की कमी दूर होती हैं ।

आवाज बैठना 


बहेडे को सैंधा नमक के साथ भून ले और इसे लम्बें समय तक चूसे इससे आवाज बैठना की समस्या दूर हो जाती हैं ।


अर्श रोग में 


बहेडा फल अर्श रोग की सर्वमान्य औषधी हैं पके हुये बहेडे फल का चूर्ण सुबह शाम 3 - 3 ग्राम लेनें से अर्श रोग समाप्त हो जाता हैं ।


बलगम बाहर निकालनें में


बहेडा के पत्तों का काढा बनाकर पीनें से छाती में जमा पुरानें से पुराना बलगम बाहर निकल जाता हैं ।


आंखों की रोशनी बढानें में


बहेडा के चूर्ण को रात को पानी में गलाकर सुबह बारीक छलनी से छान लें इस तरह इस पानी से आँख धोनें से आँखों की रोशनी बढ़ती हैं ।

श्वास रोगों में


बहेडे के पत्तों एँव धतूरे के पत्तों को समान मात्र
 में मिलाकर धूम्र लेनें से श्वास रोग में आराम मिलता हैं ।

इसी प्रकार बहेडा का चूर्ण बनाकर आधा - आधा चम्मच बकरी के दूध के साथ लेनें से श्वास रोग समाप्त हो जाता हैं ।


मुहाँसे पर 


बहेडे का तेल सोतें समय मुँहासे पर लगानें से मुहांसे समाप्त हो जातें हैं ।

बालों पर बहेडा 


बहेडे का चूर्ण और आँवला चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर रातभर पानी में भिगो दें सुबह इस पानी से बाल धो लें इस तरह बाल धोनें से बाल सफेद होना बंद हो जातें हैं । और बाल झडना बंद हो जातें हैं ।


खुजली रोग में 


बहेडे का तेल खुजली वाली जगह पर लगानें से खुजली चलना बंद हो जाती हैं ।

बच्चों के मलावरोध में 

बच्चे यदि दो तीन दिन तक मल नही त्यागे तो बहेडे का मुरब्बा बनाकर उन्हें खिलायें यह समस्या हमेशा के लिये समाप्त हो जायेगी ।


दर्द में 


बहेडा उत्तम दर्दनाशक औषधी हैं । बहेडा चूर्ण 5 ग्राम शहद के साथ मिलाकर  लेनें से शरीर में कही भी दर्द हो आराम मिल जाता हैं ।

हरड बहेडा आँवला मिलाकर आयुर्वेद की विश्व प्रसिद्ध औषधी त्रिफला का निर्माण होता हैं । इनके बारें में एक कहावत प्रचलित हैं 

हरड़,बहेडा,आँवला घी शक्कर संग खाय। हाथी दाबे कांख में चार कोस ले जाय ।। 

अर्थात हरड़ बहेडा और आँवला को घी शक्कर के साथ मिलाकर खानें से इतनी ताकत आ जाती हैं की हाथी के बच्चे को उठाकर चार कोस तक ले जाया जा सकता हैं ।

घाव पर बहेड़ा

बहेड़ा के बीज को बारिक पीसकर ऐसा घाव जिसमें रक्तस्राव हो रहा हो लगाने से रक्तस्राव नियंत्रित हो जाता है और घाव शीघ्रता से भर जाता है।
 




21 मार्च 2020

sanitizer बनाने की विधि how to make sanitizer in Hindi

सेनेटाइजर
 sanitizer



*🌿 sanitizer बनानें की विधि how to make sanitizer in Hindi
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COVID - 19 से protection के लिए सैनिटाईजर का उपयोग भी हमें सुरक्षा देता है।


बाज़ार में सैनिटाइजर लगभग समाप्त हो चुके हैं, जो मिल रहे हैं वो नकली और और हल्की quality। होने के कारण protection के लिए सक्षम नहीं हैं।
इसलिए~~

आप घर में ही सैनिटाइजर आयुर्वेदिक पद्धति से तैयार कर लीजिए। इससे ज्यादा विश्वसनीय, हानिरहित और प्रभावशाली सैनिटाइजर आपको बाज़ार में नहीं मिल सकेगा~~


*बनाने की विधि~*


आप नीचे लिखी सामग्री इस प्रकार एकत्रित कर लीजिए:-


1. नीम के 7 डंठल पत्तियों सहित।


(🌿👈 इस प्रकार के 7) इन्हें अच्छी तरह धो लीजिए।
2. तुलसी के लगभग 30 पत्ते उसी प्रकार डंठलों सहित, इन्हें भी धो लीजिए।


3. सफेद फिटकरी पाउडर 2 चम्मच पीसकर तैयार करलें।


4. कपूर पीसकर 2 चम्मच।


5. पानी 2 गिलास।


6. भगोना 1 ढक्कन सहित।


                 ==========
पानी को भगोने में डालकर गेस पर रख दीजिए और उपर ढक्कन लगा दीजिए। ज्योंहि पानी उबलने लगे उसमें नीम और तुलसी डाल दीजिए (इन्हें पीसना नहीं है) और फिर ढक दीजिए।



जब पानी आधा शेष (एक गिलास) रह जाए तब गेस से नीचे उतार लें और ढक्कन हटाकर ठंडा होने दे। अब इसमें फिटकरी और कपूर डालकर अच्छी तरह मिक्स करलें।



इसे छान लीजिए। आपके पास अब बहुत ही प्रभावशाली और विश्वसनीय सैनिटाइजर तैयार है।


                      =======
इसे आपके पास कोई सैनिटाइजर की खाली शीशी/अन्य कोई ऐसी शीशी जिसमें drop सिस्टम हो/या किसी भी शीशी को उबले पानी से साफ कर उसके ढक्कन में छेद करलें;; इनमें से किसी में भी डालकर आप इसको एक पूर्ण विश्वसनीय सैनिटाइजर के रूप में इस्तेमाल कीजिए।


     

० कोरोना से बचाव का टीका                 ✍🏻


तनाव क्या हैं। what is stress in hindi तनाव के प्रकार और तनाव से निपटने के उपाय

तनाव क्या हैं। what is stress in Hindi



तनाव stress एक ऐसी आंतरिक और बाहरी स्थिति हैं जो मनुष्य के सामान्य व्यहवार को प्रभावित करती हैं । तनाव stress व्यक्ति को बाध्य करता हैं कि वह उसका सामना करें और यदि वह तनाव stress का सामना नहीं कर पाता तो तनाव होता हैं । 


stress
तनाव

रोजर एँव ग्रेगरी के अनुुसार " तनाव आंतरिक बाहरी उत्तेजनात्मक अनिष्टकारी स्थिति हैं जिसका समायोजन करना कठिन हैं ।


तनाव एक अदृश्य रोग हैं जब व्यक्ति की आवश्यकता पूरी नही होती हैं तो तनाव उत्पन्न होता हैं उदाहरण के लियें एक व्यक्ति ने रात को देर से भोजन किया सुबह पेट साफ नही हुआ तो थोडी टेंशन हुई । चाय के साथ News paper हाथ में लिया तो कुछ सामाजिक घटनाओं को पढ़ मन विचलित हो गया ।


आफिस जाता हैं तो काम की अधिकता की वज़ह से तनाव पैदा हो जाता हैं । शाम होतें - होतें व्यक्ति इस तनाव को मेनेज नही कर पाता फलस्वरूप सहयोगीयों से रूखा व्यहवार करता हैं । घर पँहुचनें पर बीवी ,बच्चों और पारिवारिक सदस्यों से मनमुटाव हो जाता हैं । 


इसी प्रकार सुख - दुख ,असफलता,प्रतियोगिता ,दबाव आदि तनाव को जन्म देते हैं ।


तनावयुक्त स्थिति में व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी पाता । एड्रिनल ग्रंथि पर नकारात्मक प्रभाव पड़नें से कई शारिरीक लक्षण प्रकट होतें हैं जैसें नींद पूरी नही होना ,भूलनें की आदत,बार - बार बीमार होना ,भूख नही लगना या अधिक भूख लगना ,पेट में मरोड़ होना, उच्चरक्तचाप होना, मधुमेह ,ह्रदयरोग आदि समस्याएँ होना ।


तनाव यदि कई दिनों तक बना रहता हैं तो c.f.s. chronic fatigue syndrome हो जाता हैं । फलस्वरूप व्यक्ति की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होती हैं । व्यक्ति साधारण कार्य भी नही कर पाता हैं ।


तनाव के प्रकार Type of stress in Hindi


तनाव तीन प्रकार के होतें हैं 


1.शारीरिक तनाव 

तनाव की वजह से जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नही ले पाता हैं तो शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता हैं । मनुष्य समय से पूर्व बुढा और कमज़ोर हो जाता हैं । 

2.मानसिक तनाव 

मानसिक तनाव में व्यक्ति अत्यधिक चिढ़चिढ़ा और क्रोधी हो जाता हैं ।

3.भावनात्मक तनाव 


जिस तनाव में व्यक्ति आसक्ति के कारण जुड़ जाता हैं उसे भावनात्मक तनाव कहतें हैं । जैसें किसी व्यक्ति की कल परीक्षा हैं तो उसे रात को नींद नही आती। कोई प्रियजन बिछड़ जाता हैं तो वह परेशान हो जाता हैं । इसी प्रकार तनाव में वह कंधें उचकाता हैं, नाखून खाता हैं, बार बार हाथ धोता हैं । ये सब भावनात्मक तनाव के ही प्रकार हैं ।


हेंस सेले तनाव के संबध में अध्ययन करनें वालें बहुत बड़े विद्धान मानेंं गये हैैंैैैं उन्होंनें तनाव कोो चार भागों में बाँटा हैं।

सेले का मानना हैं कि तनाव का हमारें जीवन में कैवल नकारात्मक प्रभाव ही नही पड़ता बल्कि तनाव सकारात्मक प्रभाव भी लेकर आता हैं । जैसें प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करनें वाला छात्र यदि अपनी तैयारी को लेकर चिंतित होगा तो उसके कार्यक्षमता बढ़ेगी और वह परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पायेगा ।

हेैस सेले के अनुसार तनाव के प्रकार 


1.सुखद तनाव  

इस तनाव के अन्तर्गत सम्मिलित  हैं पदोन्नति,नया कार्य या नौकरी  ,विवाह होना,रोमाचिंत कार्य,लाटरीलियेजाना ।


2.दुखद तनाव

पारिवारिक सदस्य की मृत्यु, कुछ खोना,अस्वस्थता

3.निम्न तनाव 

कार्यविहीन रहना ,कार्य का नया स्थान, अकेलापन,


4.अत्यधिक तनाव 

पारिवारिक कार्यभार,सामाजिक कार्यभार,कार्यालय में अत्यधिक कार्यभार,अत्यधिक मेलजोल 

• तनाव प्रबंधन के उपाय

तनाव से निपटनें के उपाय


1.कार्यस्थल पर तनाव से बचनें के लिये सभी साथीगणों से व्यहवार संयत और विनम्र रखें ।

2.बहुत अधिक कार्य एक साथ करनें की बजाय काम उतना ही हाथ में ले जो पूरा कर सकें ।

3.नकारात्मक विचारों से बचें और ना ही कार्य स्थल पर किसी की बुराई करें ।

4.सकारात्मक विचारों को बढ़ानें वालें कार्य का समावेश अपनी रोज की जीवनशैली में करें ।

5.योग ,व्यायाम को जीवन का अंग बना लें ।


6.सोशल मिडिया और मोबाइल का उपयोग संयम के साथ करें । इन माध्यमों से वही ग्रहण करें जो समाज में आपसी प्रेम को बढ़ावा देता हो .

7.अपने जीवन में सच्चाई, विनम्रता,प्रेम, आदि जैसें उच्च जीवन मूल्यों का समावेश करें ।

8.  मुस्कुराहट के साथ आपके पास आनें वाले का स्वागत करें ।

9.मोबाइल का इस्तेमाल दिनचर्या के कामों जैसें खातें  - पीते ,बिस्तर पर जातें समय न करें ।

10. lifestyle इस तरह व्यवस्थित करें की इसमें किसी काम के लियें जल्दबाजी न हो प्रत्येक काम के लिये पर्याप्त समय हो ।

11.home पर हो तो परिवार को पर्याप्त समय दें।

12.अपनें विचारों को दूसरों पर थोपनें से बचें ।

13.नार्वे में तनाव से निपटने के लिए एक अध्ययन किया गया था जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि यदि हम दिन प्रतिदिन डायरी लिखते हैं तो तनाव दूर करने का यह बहुत अच्छा उपाय माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यदि कोई व्यक्ति गलत करता है और इसके बाद वह तनावग्रस्त रहता है तो डायरी लिखने के बाद वह उस गलती को दोहराने से बच जाता हैं अतः डायरी लेखन से तनाव दूर करने में मदद मिलती हैं।

14.कुछ हरे भरे पौधे जैसे मनी प्लांट, लैवेंडर, स्पाइडर प्लांट घर में आक्सीजन का स्तर बढ़ाकर तनाव को कम करने में मदद करते हैं। अतः घर में ऐसे पौधे अवश्य लगाना चाहिए। 




20 मार्च 2020

GOMUKHASAN योग करोगे तो बहुत जल्दी धूम्रपान की आदत छूट जायेगी

आजकल पूरी दुनिया में धूम्रपान करनें वाले व्यक्ति धूम्रपान के खतरों को जानकर इसे छोड़नें का मन बना रहें ,कोई अपने जन्मदिन पर धूम्रपान छोड़नें का संकल्प लेता हैं तो कोई नववर्ष के उपलक्ष्य में धूम्रपान छोड़नें का संकल्प लेता हैं किन्तु सच्चाई यह हैं कि कुछ चुनिंदा लोग ही अपने संकल्प को पूरा कर धूम्रपान छोड़ पाते हैं । जबकि अधिकांश लोग कुछ ही दिनों बाद धूम्रपान करना शुरू कर देतें हैं ।


आज में आपका ऐसी यौगिक क्रिया  से परिचित करवाना चाहूँगा जिसके करनें से धूम्रपान करनें की आदत कुछ ही दिनों में छूट जाती हैं।


धूम्रपान छोड़नें वाली इस यौगिक क्रिया का नाम हैं "गौमुखासन" Gomukhasan


आईये जानतें हैं गौमुखासन योग करनें के तरीके और गौमुखासन योग के फायदो के बारें में


गौमुखासन योग करनें का तरीका 

Gomukhasan karane ka tarika 


१.दोनों पैरों को सामनें फैलाकर बैंठ जायें ,

गौमुखासन के फायदे
 गौमुखासन करनें की विधि


२.दाँए पैर को चित्र में दिखाई गई स्थिति अनुसार इस तरह मोड़े की पैर की एड़ी कूल्हें के पास रहें ।


३. चित्रानुसार बाँए पैर को भी घुटनें से मोड़कर  दाहिनें कूल्हें के समीप एड़ी रखें ।


४.इस स्थिति में दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर रहना चाहियें ।


५.अब चित्रानुसार बाँए हाथ को अपनी पीठ के पिछे जितना हो सकें लेकर जायें ।


६.दाँए हाथ को भी कोहनी से मोड़कर पेट के पास से ले जाकर पीठ पर लें जाएँ।


७.चित्रानुसार अब दोनों  ऊँगलियों को एक दूसरी ऊँगलियों से  पकड़ लें ।
गौमुखासन
 गौमुखासन के फायदे


८.इस स्थिति में शरीर एकदम तना हुआ होना चाहियें ।


९. नज़र और चेहरा एक दम सीध में होना चाहियें ।


१०. शाँत चित्त होकर इस अवस्था में अपनी सामर्थ्य अनुसार कुछ समय बैठे रहें ।


# सामने से देखने पर आपका शरीर गाय के मुँह की भाँति दिखेगा । इसीलिये इस आसन को "गौमुखासन" कहतें हैं ।


११. थकान या चेहरे पर तनाव आनें पर इस आसन को खोल दें ।


१२.अब इसी प्रक्रिया को बाँए हाथ को पेट के पास से पीठ पर ले जाकर और बाँए पैर से शुरूआत कर करेें ।



गौमुखासन के लाभ Gomukhasan KE labh




१.गौमुखासन करनें से फेफड़ों को सामान्य श्वास से प्राप्त होनें वाली आँक्सीजन के मुकाबले सात गुना अधिक आँक्सीजन मिलती हैं । जिससे धूम्रपान छोड़नें पर होनें वाली शारीरीक और मानसिक बैचेनी समाप्त हो जाती हैं । और धूम्रपान छोड़नें वाला व्यक्ति तेजी से सामान्य जीवन की और उन्मुख होता हैं ।


२.धूम्रपान करनें से हुई फेफड़ों की क्षति को गौमुखासन तेजी से ठीक करता हैं ।


३.गौमुखासन करनें से धूम्रपान करनें से फेफड़ों में जमा धुँआ कार्बन डाइ आँक्साइड़ के साथ  शरीर से बाहर निकल जाता हैं।


४.गौमुखासन करनें से ह्रदय और फेफड़ों में शुद्ध रक्त का प्रवाह बढ़ जाता हैं जिससे धूम्रपान छोड़नें वाला व्यक्ति ह्रदयरोग और श्वास संबधी बीमारीयों से मुक्त हो जाता हैं ।


५.गौमुखासन करनें से कमर ,पीठ दर्द और सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस  में आराम मिलता हैं किन्तु इन बीमारीयों में गौमुखासन करनें से पहले किसी योग्य योग चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लें ।



६.गौमुखासन करनें से रात को उठने वाली धूम्रपान की तलब समाप्त हो जाती हैं क्योंकि फेफड़ों में रक्त का प्रवाह सामान्य रक्त प्रवाह से अधिक होता हैं जिससे नींद में कोई बाधा नही आती और रात को धूम्रपान छोड़नें से होनें वाली बैचेनी समाप्त हो जाती हैं ।


७.गौमुखासन करनें से शरीर लचीला ,मज़बूत , और फेफडे बलशाली बनते हैं जिससे वायरस जनित रोग जैसें कोरोना वायरस, सार्स ,न्यूमोनिया आदि शरीर के प्रतिरक्षातंत्र को नही भेद पातें हैं ।


० योग क्या हैं



19 मार्च 2020

वायरस virus का काम होगा तमाम जब भोजन की थाली में आ जायें कुछ खास Antioxidant

वायरस virus का काम होगा तमाम जब भोजन की थाली में आ जायें कुछ खास Antioxidant

हमारें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली हमें रोगों से बचानें का काम करती हैं । लेकिन जब रोगप्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर हो जाती हैं तो शरीर भी रोग का घर बन जाता हैं । 

रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानें में Antioxidant महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं । Antioxidant शरीर को रोगों से लड़नें के लिये तैयार करतें हैं । Antioxidant प्राप्त करनें के अच्छे स्त्रोंत विटामीन A, विटामीन C,और विटामीन E हैं ।


आईयें जानतें हैं इनके बारें में

० वायरस क्या होता हैं


विटामीन A vitaminA


विटामीन A प्राप्त करनें के दो मुख्य स्त्रोंत हैं प्रथम मांसाहारी पदार्थ और द्धितीय शाकाहारी पदार्थ । जो विटामीन A माँस,दूध से प्राप्त होता हैं वह रेटिनाल के नाम से जाना जाता हैं जबकि जो विटामीन A फल,सब्जी से प्राप्त होता हैं उसे बीटा केरोटीन कहतें हैं । यह केरोटीन एवँ रेटिनाल शरीर में जाकर विटामीन A में बदल जाता हैं । विटामीन A हमारें प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत करनें वाला महत्वपूर्ण विटामीन हैं ।


इस विटामीन के सेवन से वायरस जनित रोग हमारें प्रतिरक्षा तंत्र को भेद नही पातें हैं फलस्वरूप शरीर निरोगी बना रहता हैं ।

विटामीन C

खट्टे फलों जैसें निम्बू, संतरा, आँवला, स्ट्राबेरी में पाया जाता हैं । यह विटामीन  जल में घुलनशील होता हैं । यदि हम अधिक मात्रा में  विटामीन c का सेवन कर लेतें है तो भी हमारें शरीर को कोई नुकसान नही पहुँचता हैं बल्कि अधिक मात्रा में लिया गया विटामीन मूत्र के माध्यम से शरीर के बाहर निकल जाता हैं ।

विटामीन c free redicals से होनें वाली क्षति से शरीर को बचाता हैं । इसी प्रकार विटामीन c वायरस जनित बीमारी होनें पर शरीर में वायरस के फैलाव को नियंत्रित करता हैं । 

विटामीन c के सेवन से कोशिकायें अधिक स्वस्थ्य और लम्बी उम्र वाली होती हैं ।

विटामीन E 


अंकुरित खाद्य पदार्थों से प्राप्त होनें वाला यह विटामीन E श्वेत रक्त कणिकाओं W.B.C.को मज़बूत बनानें का काम करता हैं ताकि वायरस जनित रोगों से लड़नें में श्वेत रक्त कणिकायें w.b.c. अधिक ताकतवर होकर लड़ सकें ।

उपरोक्त तीनों विटामीन Antioxidant के समृद्ध स्त्रोंत हैं जिनकों भोजन में शामिल कर हम आसानी से वायरस जनित रोगों से शरीर की रक्षा कर सकतें हैं ।

विटामिन बी 6 vitamin B 6

विटामिन बी 6 vitamin B 6 वायरस से संक्रमित कोशिकाओं virus se sankramit koshikaon की मरम्मत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । यह रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता हैं और T-cell का निर्माण करता हैं । 

विटामिन बी 6 बैचेनी, अनिद्रा, तनाव से भी मुक्ति दिलाता है क्योंकि यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कार्टिसोल tanav peda Karne wale harmon cartisol का स्त्राव कम करता हैं । कोरोनावायरस प्रभावित व्यक्ति और उसका परिवार सबसे ज्यादा तनाव के दौर से गुजरता है ऐसे में vitamin B6 युक्त खाद्य पदार्थ जैसे केला,सेब,आलू,मटर,हरी सब्जियों का अधिक सेवन करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता हैं ।


० लहसुन के फायदे और नुकसान


० अमरूद पाये जानें वाले पौषक तत्व



० वात पित्त और कफ प्रकृति के लक्षण

वायरस

 

16 मार्च 2020

बेस्ट मोटिवेशन स्टोरी इन हिन्दी BEST MOTIVATION STORY IN HINDI

   बेस्ट मोटिवेशन स्टोरी इन हिन्दी BEST MOTIVATION STORY IN HINDI

 

*एक सेठ जी थे, जो दिन-रात अपना काम-धँधा बढ़ाने में लगे रहते थे। उन्हें तो बस, शहर का सबसे अमीर आदमी बनना था। धीरे-धीरे पर आखिर वे नगर के सबसे धनी सेठ बन ही गए।*



*इस सफलता की ख़ुशी में उन्होने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन, उन्होने एक बहुत शानदार पार्टी का आयोजन किया। जब सारे मेहमान चले गए तो वे भी अपने कमरे में सोने के लिए चले आए। थकान से चूर, जैसे ही बिस्तर पर लेटे, एक आवाज़ उन्हें सुनायी पड़ी...*



*"मैं तुम्हारी आत्मा हूँ, और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!"*



*सेठ घबरा कर बोले*, *"अरे! तुम ऐसा नहीं कर सकती!!, तुम्हारे बिना तो मैं मर ही जाऊँगा। देखो!, मैंने वर्षों के तनतोड़-परिश्रम के बाद यह सफलता अर्जित की है। अब जाकर इस सफलता को आमोद प्रमोद से भोगने का अवसर आया है। सौ वर्ष तक टिके, ऐसा मजबूत मकान मैने बनाया है। यह करोड़ों रूपये का, सुख सुविधा से भरपूर घर, मैंने तुम्हारे लिए ही तो बनाया है!, तुम यहाँ से मत जाओ।"*   



*आत्मा बोली*, *"यह मेरा घर नहीं है, मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था, स्वास्थ्य ही उसकी मजबूती थी, किन्तु करोड़ों कमाने के चक्कर में, तुमने इसके रख-रखाव की अवहेलना की है। मौज-शौक के कबाड़ तो भरता रहा, पर मजबूत बनाने पर किंचित भी ध्यान नहीं दिया। तुम्हारी गैर जिम्मेदारी ने इस अमूल्य तन का नाश ही कर डाला है।"*



*आत्मा नें स्पष्ट करते हुए कहा,* *"अब इसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, मोटापा, कमर दर्द जैसी बीमारियों ने घेर लिया है। तुम ठीक से चल नहीं पाते, रात को तुम्हे नींद नहीं आती, तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है। तनाव के कारण, ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है, ये तुम्हारा शरीर!!"*



*"अब तुम ही बताओ, क्या तुम किसी ऐसे जर्जरित घर में रहना चाहोगे, जिसके चारो ओर कमजोर व असुरक्षित दीवारें हो, जिसका ढाँचा चरमरा गया हो, फर्नीचर को दीमक खा रही हो, प्लास्टर और रंग-रोगन उड़ चुका हो, ढंग से सफाई तक न होती हो, यहाँ वहाँ गंदगी पड़ी रहती हो। जिसकी छत टपक रही हो, जिसके खिड़की दरवाजे टूटे हों!! क्या रहना चाहोगे ऐसे घर में? नहीं रहना चाहोगे ना!! ...इसलिए मैं भी ऐसे आवास में नहीं रह सकती।"*



*सेठ पश्चाताप मिश्रित भय से काँप उठे!! अब तो आत्मा को रोकने का, न तो सामर्थ्य और न ही साहस सेठ में बचा था। एक गहरी निश्वास छोड़ते हुए आत्मा, सेठ जी के शरीर से निकल पड़ी... सेठ का पार्थिव बंगला पडा रहा।*



*मित्रों, ये कहानी आज अधिकांश लोगों की हकीकत है। सफलता अवश्य हासिल कीजिए, किन्तु स्वास्थ्य की बलि देकर नहीं। अन्यथा सेठ की तरह मंजिल पा लेने के बाद भी, अपनी सफलता का लुत्फ उठाने से वंचित रह जाएँगे!!*

             *"पहला सुख निरोगी काया* 🙏🙏🙏


०कोरोना से बचाव का टीका

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