23 अक्तू॰ 2020

वात-पित्त-कफ प्रकृति के लक्षण कैसे होते हैं vat pitt kaf prakriti ke laxan

 वात-पित्त-कफ प्रकृति के लक्षण vat pitt kaf prakriti ke laxan

वात-पित्त-कफ प्रकृति
वात-पित्त-कफ प्रकृति 



आयुर्वेद चिकित्सा त्रिदोष सिद्धांत के आधार पर रोगी का उपचार करती हैं ,इस त्रिदोष सिद्धांत के अनुसार मनुष्य के शरीर में वात पित्त और कफ के असंतुलन की वजह से बीमारियां उत्पन्न होती हैं । आईए जानते हैं वात पित्त और कफ प्रकृति के लक्षण


वात प्रकृति के लक्षण

वातस्तुरूक्षलघुचलबहुशीघ्रशीतपरुषविशदस्तस्यरौक्ष्याद्धातलारूक्षापचिताल्पशरीरा:प्रततरूक्षक्षामभिन्नसक्तजर्जरस्वराजागरुकाश्चभवन्तिलघुत्वाच्चलघुचपलगतिचेष्टाहारविहारा:चलत्वादनवस्थितसन्ध्यक्षिभ्रूहन्वाष्ठजिहाशिर:स्कन्धपाणिपादा:बहुत्वाइहुप्रलापकण्डराशिराप्रताना:शीघ्रत्वाच्छीघ्रसमारम्भक्षोभविकारा:शीघ्रोत्रासरागविरागा:श्रुतग्राहिण:अल्पस्मृतयश्चशैत्याच्छीतासहिष्णव:प्रततशीतकोद्धैपकस्तम्भा:पारूष्यात्परूषकेशष्मश्रुरोमनखदसनवदनपाणिपादाग्डावैशघात्स्फुटिताग्डावयवा:सततसन्धिशब्दगामिनश्चभवन्ति तऍवगुणयोगाद्धातला:परायेणाल्प्पबलाश्चल्पापत्याश्वाल्पसाधनाश्वाधन्याश्चधन्याश्च ।।


श्लोक के अनुसार वात प्रकृति वायु (Air) या आकाश से संबंधित हैं । वायु का स्वभाव हल्का,रूखा,चल,बहुल, शीघ्र,शीत पुरुष और विश्व गुण वाला होता हैं । वात प्रकृति मनुष्य का शरीर वायु के समान ,दुबला पतला और रूखा सा रहता हैं । वात प्रकृति के व्यक्तियों की आवाज़ तेज होती हैं वे जल्दी जल्दी बोलते हैं, और थोड़ी जर्जर  होती हैं ।


वात प्रकृति के लोगों में नींद का अभाव होता हैं अर्थात इन्हें नींद कम आती है । वात प्रकृति होने के कारण ये फुर्तीले, वाचाल,और कम भोजन करने वाले होते हैं ।


वात प्रकृति के कारण इनके शरीर के जोड़,हड्डीयां,हाथ पांव सिर ताकतवर नहीं होतें हैं और ये फड़कते अधिक है । इन्हें अवसाद, बातों को भूलना जैसी बीमारी अधिक होती हैं। इनके मन में वैरागपन अधिक आता हैं । 


वात प्रकृति के व्यक्ति में वात के शीत गुण हो तो वे शीघ्रता से ठंड को ग्रहण कर लेते हैं ऐसे व्यक्ति को शरीर में कंपकंपी अधिक होती हैं । यदि वात के कठोर गुण होते हैं तो ऐसे व्यक्ति के बाल,रोम, नाखून, दांत, मुंह,हाथ, पांव कठोर होते हैं ।


वात प्रकृति के व्यक्ति बहुत अच्छे धावक,तैराक,और ऐसे खेलों में निपुण होते हैं जहां ताकत से ज्यादा फुर्ती की ज़रूरत होती हैं ।



पित्त प्रकृति के लक्षण

पित्तमुष्णंतीक्ष्णंद्रवंविस्नमम्लंकटुकश्च।तस्यौष्णायातपित्तलाभवन्तिउष्णासहा:शुष्कसुकुमारावदातगात्रा:प्रभूतपिल्पुव्यहतिलकपिडका:क्षुत्पिपासावन्त:क्षिप्रवलीपलितखालित्यदोषा:।प्रायोमृद्धल्पकपिलश्मश्रुलोमकेशा:तैक्ष्ण्यात्तीक्ष्णपराक्रमा:तीक्ष्णाग्नय:प्रभूताशनपाना:क्लेशसहिष्णवोदन्दशूका:द्रवत्वाच्छिथिलमृदुसन्धिबन्धमांसा:प्रभूतसृष्टस्वेदमूत्रपुरीषाश्चविस्नत्वात।प्रभूतपूतिवक्ष:कक्षस्कन्धास्यशिर:शरीरगन्धा:कटुम्लत्वादल्पशुक्रव्यवायापत्या: ।तयवंणुणयोगात्पित्तलामध्बलामध्यायुषोमध्यज्ञानविज्ञानवित्तोपकरणवन्तश्चभवन्ति।।



आयुर्वेद ग्रंथों में पित्त प्रकृति के व्यक्तियों वर्णन करते हुए कहा गया है कि पित्त प्रकृति का व्यक्ति स्वभाव में गुस्सैल प्रकृति का,तेज और जल्दी ही उत्तेजित होने वाला होता हैं । ऐसे व्यक्तियों को गर्मी सहन नहीं होती हैं । 


रोगों की बात करें तो ऐसे व्यक्तियों को खुजली होना,असमय बाल सफेद होना , गंजापन जैसी समस्या अधिक होती हैं । 


पित्त के अधिक गुण होने से ऐसे व्यक्ति पराक्रमी होते हैं, ये अधिक भोजन और जल ग्रहण करने वाले होते हैं । और अधिक अन्न खाने के बाद शीघ्रता से पचाने वाले होते हैं । इन्हें मल मूत्र और पसीना बहुत अधिक आता हैं ।


पित्त प्रकृति के व्यक्ति बुद्धिमान, एकाग्रता से कार्यों को संपन्न करने वाले और न्यायप्रिय होते हैं । ऐसे व्यक्ति



कफ प्रकृति के लक्षण

श्लेेष्मा्मााहििस्नि्नििग्ध्धश्लक्ष्णमृदुमधुरसारसान्द्रमंदस्तिमितगुरूशीतविज्जलाच्छ:अस्यस्नेहाच्छेष्मला:स्निग्धाग्डा:श्लक्ष्णत्वाच्छक्ष्णाग्डा:मृदुत्वादृष्टिसुखसुकुमारावदातशरीरा:माधुर्य्यात्परभूतशुक्रव्यवायापत्या:सारत्वात सारसंहतस्थिरशशीरासान्द्रत्वादुपचितपरिपूर्णसर्वगात्रा:मन्दत्वान्मन्दचेष्टाहारविहारा:स्तैमित्यादशीघ्रारम्भक्षोभविकारा:गुरूत्वात्साराधिष्ठितगतय:शैत्यादल्पक्षुतृष्णासन्तापस्वेददोषा:विज्जलत्वातसुश्लिष्टसारबन्धसन्धाना:तथाच्छत्वात्प्रसन्नदर्शनाननना:प्रसन्नस्निग्धवर्णस्वरश्चभवन्ति।तयेवंगुणयोगाचष्मलाबलवन्तोवसुमन्तोविधावन्तऒजस्विन:शान्ताआयुष्मन्तश्चभवन्ति


कफ प्रकृति का व्यक्ति शीतल प्रकृति का स्वभाव में शांतचित्त और बलवान होता हैं । कफ प्रकृति के शीतल होने से कफ प्रकृति का व्यक्ति शीत जनित रोगों से आसानी से ग्रस्त हो जाता हैं । ऐसे व्यक्ति तनाव को आसानी से झेल लेते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्वकर्ता होते हैं।


कफ प्रकृति के व्यक्तियों की आवाज़ भारी, गंभीर और स्पष्ट होती हैं । कफ प्रकृति के व्यक्ति निशानेबाज, पहलवान, शतरंज तथा ऐसे खेल जिसमें धैर्य और ताकत के संतुलन की जरूरत होती हैं के उत्तम खिलाड़ी होते हैं।


आयुर्वेद चिकित्सा ग्रन्थों में इन्हीं तीनों प्रकृतियों के आधार पर रोगों की परीक्षा कर किसी विशेष प्रकृति के असंतुलन का निर्णय किया जाता हैं । वात पित्त और कफ के असंतुलन या साम्यावस्था का निर्णय नाडी परीक्षा द्वारा किया जाता हैं। कुशल वैध नाड़ी पकड़ कर तुरंत ही निर्णय कर लेते हैं कि रोगी में किस प्रकृति का असंतुलन हैं। 



० हर्ड इम्यूनिटी क्या है


० सर्दीयों में खानपान कैसा होना चाहिए


आयुर्वेद मतानुसार ज्वर के प्रकार






18 अक्तू॰ 2020

हेपिटाइटिस सी hepatitis c कैसे होता हैं ।इसके खोजकर्ता कौंन थे

हेपिटाइटिस सी hepatitis c कैसे होता हैं ? इसके खोजकर्ता कौंन थे ?



Heapatitis c
Hepatitis c

  हेपिटाइटिस सी लीवर से संबंधित विषाणुजनित बीमारी हैं ।   विश्व स्वास्थ संगठन ( W.H.O.) के मुताबिक हेपिटाइटिस सी hepatitis c से पूरी दुनिया में सात करोड़ से अधिक लोग पीड़ित हैं और प्रतिवर्ष तकरीबन चार लाख लोग hepatitis c से पूरी दुनिया में मर जाते हैं । hepatitis c से पीड़ित रोगी लीवर कैंसर और लीवर सिरोसिस से भी ग्रस्त हो जातें हैं ।


hepatitis c virus ki khoj kisne ki thi


hepatitis c virus की खोज का श्रेय अमेरिका के हार्वे थे आल्टर (HARVEY J.ALTER), ब्रिटेन के चार्ल्स एम.राइज (CHARLES M.RISE), और कनाडा की National University of Alberta में पढ़ाने वाले और ब्रिटेन में जन्में Mike hueton माइक ह्यूटन को जाता हैं ।

हार्वे जे.आल्टर अमेरिका के National institute of health N.I.H. से संबंधित हैं जबकि चार्ल्स एम.राइज अमेरिका के न्यूयार्क स्थित Rockefeller University में पढ़ाते हैं ।

इन तीनों वैज्ञानिकों को हेपिटाइटिस सी वायरस की खोज के लिए सन् 2020 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया हैं ।


हेपिटाइटिस सी hepatitis c कैसे होता हैं


1.हेपेटाइटिस सी से पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संसर्ग से 


2.संक्रमित व्यक्ति का रक्त लेने से


3.संक्रमित सुई,रेजर, तोलिया,ब्रश आदि उपयोग करने से


4.गर्भस्थ शिशु को संक्रमित माता से 


hepatitis c हेपिटाइटिस सी के लक्षण



1.मांसपेशियों में दर्द होना 


2.अत्यधिक थकान होना


3.भूख नही लगना


4.आंखे पीली होना


5.त्वचा का रुखापन और पीला होना


6.शरीर में खुजली चलना


7.बोलने, चलने और निगलने में परेशानी होना



8.चक्कर आना


9.जीभ सफेद होना


10.शरीर में मामूली चोंट से ही अत्यधिक खून निकलना



11.लीवर पर सूजन आना 


12.पैरों में सूजन होना 



12.वजन में अत्यधिक कमी 


13.पेट में दर्द होना 


हेपिटाइटिस सी के कुछ लक्षण दिखाई नहीं देते हैं ऐसे मामलों में लीवर बहुत अधिक क्षतिग्रस्त होने के बाद ही लक्षण प्रकट होते हैं अतः व्यक्ति को हेपिटाइटिस सी वायरस से संक्रमित मरीज से सम्पर्क में आने पर अपना लीवर फंक्शन टेस्ट Liver function test अवश्य करवाना चाहिए ।
 

हेपिटाइटिस सी का इलाज



हेपिटाइटिस सी इलाज के द्वारा पूर्णतः ठीक होने वाली बीमारी है जिससे सौ प्रतिशत मरीज ठीक हो जातें हैं । कभी कभी तो मरीज की प्रतिरोधक क्षमता Immunity अच्छी होनें पर मरीज बिना इलाज के भी ठीक हो जाता हैं ।

हेपिटाइटिस सी कभी कभी जानलेवा भी साबित हो सकता हैं ऐसा उन मामलों में अधिक होता हैं जहां मरीज की प्रतिरोधक क्षमता Immunity power कम हैं और बीमारी का पता बहुत देर से चलता हैं ।



हेपिटाइटिस सी से बचाव


हेपेटाइटिस से बचाव हेतू तीन टीके लगाए जाते हैं । प्रथम टीके के बाद दूसरा टीका 30 वे दिन लगाया जाता हैं और तीसरा टीका 180 दिन बाद लगाया जाता हैं । 


1. शरीर की साफ सफाई का प्रर्याप्त ध्यान रखना चाहिए


2.बाहर से लाने वाले फल सब्जियां को अच्छी तरह से धोनें के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए 


3.हेपेटाइटिस सी से संक्रमित व्यक्ति से मिलने पर मुंह को ढककर रखना चाहिए और मरीज से लगभग दो गज की दूरी रखना चाहिए । 



4.हेपेटाइटिस सी से संक्रमित व्यक्ति से शारीरिक संपर्क नहीं करना चाहिए


5.घर में यदि हेपिटाइटिस सी संक्रमित व्यक्ति हैं तो मरीज का कमरा, बिस्तर और खाने के बर्तन अलग रखना चाहिए


5.बासी या ठंडा भोजन नहीं करना चाहिए



6.खुले में रखी खाद्य सामग्री का उपयोग नहीं करना चाहिए



7.पीने के पानी के जलस्रोतों के आसपास गंदगी और सीवरेज लाइन नहीं होना चाहिए ।



8.खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साबुन से धोना चाहिए।


9.संक्रमित रक्त, संक्रमित सुई ,रेजर तोलिया आदि के इस्तेमाल से बचना चाहिए ।


10.शराब का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए।









4 अक्तू॰ 2020

कोरोना वायरस टीकाकरण लेटेस्ट न्यूज

  कोरोना वायरस टीकाकरण लेटेस्ट न्यूज

कोरोना वायरस से संक्रमित ऐसे मरीज जिनकी कोरोनावायरस रिपोर्ट नेगेटिव यानि RT PCR TEST नेगेटिव आ रहा है, किंतु शरीर से संक्रमण समाप्त नहीं हो रहा हैं और इसके बाद मरीज की मौत हो रही हैं। यह परिस्थिति चिकित्सा विज्ञानियो के लिए बहुत हैरत पैदा कर रही हैं।



पिछले कई दिनों से ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसमें पहले से अस्थमा, मधुमेह, ह्रदय रोग, किडनी रोग से प्रभावित कोरोना मरीज कोरोना से तो स्वस्थ्य हो गया लेकिन कुछ दिनों के पश्चात उसकी मौत हो जाती हैं । विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कोरोनावायरस से पीड़ित रहने के दौरान शरीर का oxygen level बहुत कम हो जाता हैं और लगातार बहुत दिनों तक oxygen level कम होने से पूर्व की बीमारियों से पीड़ित अंग जैसे ह्रदय, किडनी,श्वसन तंत्र, आदि की कार्यक्षमता कम हो जाती हैं अतः मरीज corona से स्वस्थ्य होनें के बाद भी multiple organ failure के कारण मौत के आगोश में समा रहे हैं ।



कोरोना वायरस से ठीक होनें के बाद भी होने वाली मौत किन बीमारियों से हो रहीं हैं


कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी होने मौतें निम्न कारणों से हो रही हैं 


रेस्पीरटरी फेल्युर


कोरोना वायरस से पीड़ित रहने के पूर्व जिन मरीजों को अस्थमा,cronic obstacle pulmonary disease, pneumonia की समस्या थी उनके फेफड़ो की कार्यक्षमता आक्सीजन की कमी से इतनी कमज़ोर हो जाती हैं कि मरीज को अचानक   Respiratory failure हो जाता हैं और कुछ ही समय में उसकी मौंत हो जाती हैं ।




Heart attack



पहले से ह्रदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति के ह्रदय का बहुत बड़ा हिस्सा यदि आक्सीजन की कमी से क्षतिग्रस्त हो जाता हैं या ह्रदय की कुछ कार्यप्रणाली कमज़ोर हो जाती हैं तो व्यक्ति heart attack आ जाता हैं ।



Chronic renal failure



कोरोना वायरस से प्रभावित व्यक्ति यदि किडनी संबंधित बीमारी से पीड़ित हैं तो शरीर में आक्सीजन का स्तर कम होनें से किडनी पर दबाव पड़ता है फलस्वरूप व्यक्ति की रिपोर्ट नेगेटिव आनें के बाद भी किडनी संबंधित बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती हैं ।



लंग फाइब्रोसिस



कोरोना होनें के बाद चाहें रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती हैं लेकिन कुछ कोरोना पीडित मरीजों में लंग फाइब्रोसिस की समस्या पैदा हो जाती हैं। ऐसा बुजुर्गों, और अस्थमा से पीडित मरीजों में ज्यादा देखनें को मिलता हैं । यदि समस्या को नजरअंदाज किया गया तो लंग फाइब्रोसिस भी बहुत अधिक जानलेवा साबित हो रहा हैं ।




 कोरोना वायरस नई नस्ल Corona virus new strain :::




भारत में एक ओर कोरोना वायरस फैलनें की रफ्तार धीरें धीरें कम हो रही हैं । वहीं सूदूर यूरोप के देशों जैसें इटली, डेनमार्क ,नीदरलैंड और आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन Corona virus new strain नें आमजनों के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों को गंभीर चिंता में डाल दिया हैं । क्योंकि कोरोनावायरस का यह नया स्ट्रेन corona virus new strain पहले के कोरोनावायरस से 70 प्रतिशत अधिक संक्रामक है । तो आईयें जानतें हैं कोरोनावायरस के स्ट्रेन में बदलाव किस प्रकार का आया हैं ।


कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन Corona virus new strain




कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन में बदलाव मुख्यत: वासरस के स्पाइक प्रोटीन spike protien से जुड़ा हुआ हैं । स्पाइक प्रोटीन वायरस की बाहरी संरचना होती हैं जो मनुष्य की स्वस्थ्य  कोशिकाओं से चिपककर उन्हें संक्रमित कर देती हैं । 


ब्रिटेन के शोधकर्ताओं नें कोरोनावायरस वायरस के इस नए बदलाव को या म्यूटेशन को N 501 Y नाम दिया हैं । जो ब्रिटेन के 11 सौ लोगो में पाया गया है । 



कोरोना वायरस में बदलाव क्यों हो रहा हैं ?



कोरोना वायरस सार्स कोविड 2 सिंगल आरएनए वायरस हैं ।  इस वायरस में बदलाव तब होता हैं जब वायरस अपनी कापी बनानें में गलती करता हैं । इस वायरस के स्ट्रेन में बदलाव की वजह अन्य वायरस की तरह ही बहुत सामान्य हैं जिसमें वायरस कुछ समय बाद अपना स्वरूप बदलकर सामनें आता हैं ।




क्या इस समस्या के बाद कोरोना वायरस वैक्सीन निष्प्रभावी हो जाएगी ?



जी नहीं, माडर्न,फाइजर,और आक्सफोर्ड यूनिवर्सटी की एस्ट्रोजेनेका वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन को Target करते हुए बनी हैं । इन वैक्सीन के लगने के बाद जो एँटीबाडी Antibody बनती हैं वह स्पाइक प्रोटीन को नष्ट कर वायरस को बढ़ने से रोकती हैं । अत: यह कहना की वायरस की संरचना में बदलाव के बाद वैक्सीन निष्प्रभावी हो जाएगी बहुत जल्दबाजी होगी । हाँ,इतना जरूर हैं कि कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन पुरानें वायरस के मुकाबले बहुत अधिक संक्रामक है ।



वैज्ञानिकों का मत हैं कि चाहें कोरोना वायरस हो या अन्य वायरस इनमें बदलाव या म्यूटेशन की प्रक्रिया चलती रहेगी हमारा प्रतिरक्षा तंत्र नए वायरस के प्रति सक्रिय होकर वायरस को खत्म कर देगा या फिर वैक्सीन वायरस को फैलने से रोकेगी ।




० लहसुन के फायदे और नुकसान





कान्वलेसेंट प्लाज्मा थैरेपी



कोविड़ टीकाकरण संबधित प्रश्न उत्तर



Q.1.क्या 16 जनवरी 2021 से कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतू टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो रहा हैं ?



Ans.जी हाँ, 16 जनवरी 2021 से कोरोना वायरस से प्रतिरक्षण हेतू भारत में टीकाकरण अभियान की शुरूआत हो रही हैं ।






Q.2.कोरोना वायरस से बचाव हेतू लगाये जानें वाले टीके का क्या नाम हैं ?



Ans.कोरोना वायरस से बचाव हेतू दो कम्पनीयों के टीको को अब तक भारत सरकार ने अनुमति प्रदान की हैं 


1.सीरम इंस्टिट्यूट का "कोविशील्ड"



2.भारत बायोटेक का "कोवैक्सीन"







Q.3.क्या कोरोना वायरस से बचाव हेतू टीकाकरण एक साथ सभी का किया जायेगा ?



Ans.जी नहीं, अभी टीकाकरण के लिए उच्च जोखिम वाले समूह का चयन किया गया हैं उदाहरण के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ,आशा आदि । इसके पश्चात टीके की उपलब्धता के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जायेगा ।

दिनांक 1 मार्च 2021 से भारत सरकार ने कोरोनावायरस के द्वितीय चरण की शुरुआत की है जिसमें 60 वर्ष के अधिक व्यक्तियों और 45 से 59 वर्ष के उन व्यक्तियों का टीकाकरण किया जाएगा जो गंभीर रूप से पीड़ित हैं और इनको इस आशय का प्रमाण पत्र चिकित्सक द्दारा जारी किया गया है।

1 अप्रैल 2021 से कोरोना वायरस टीकाकरण 45 साल से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को लगाने को लेकर भारत सरकार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं ।

1 भी 2021 से कोरोना प्रतिरोधी वैक्सीन 18 से 44 वर्ष के व्यक्तियों के लिए खोल दिया है ।




Q.4.क्या कोरोना वायरस से बचाव हेतू किया जानें वाला टीकाकरण मुफ़्त होगा ?



Ans.अभी स्वास्थ्य सेवा देनें वाले व्यक्तियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं, आशा बहन आदि को दिया दानें वाला टीका सरकार की ओर से मुफ़्त लगाया गया है।

अभी द्वितीय चरण में शासकीय संस्थाओं में जो टीकाकरण किया जा रहा हैं वह मुफ्त है जबकि सरकार द्वारा निर्धारित निजी अस्पतालों में 250 रुपए शुल्क लेकर टीकाकरण किया जा रहा है ।




 Q.5.क्या टीकाकरण के लिए व्यक्तियों को पंजीकरण करना होगा ?



Ans.5. जी हाँ, कोरोना वायरस  प्रतिरक्षण टीकाकरण हेतू लाभार्थियों का पंजीयन Co-win 2.0 website या आरोग्य हेतू एफ के माध्यम से किया जाएगा । जिसमें लाभार्थी द्धारा जरूरी जानकारी दर्ज करने के उपरांत टीकाकारण करवानें हेतू कब आना हैं ,किस स्थान पर आना हैं इसका मैसेज लाभार्थी को प्राप्त होगा ।








Q.6.क्या कोविड़ वैक्सीन लेना सभी के लिए अनिवार्य हैं ?



Ans.6.कोरोना वायरस प्रतिरक्षा हेतू टीकाकरण पूर्णत: स्वैच्छिक रखा गया हैं । किंतु सलाह यही है कि इस बीमारी से बचाव हेतू टीकाकरण आवश्यक हैं। जिससे स्वंय की परिवार की समाज की कोरोनावायरस से सुरक्षा प्राप्त की जा सकें ।






Q.7.क्या कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति या संदिग्ध मरीज को टीकाकरण किया जा सकता हैं ?


Ans.7.कोरोना वायरस से संक्रमित और संदिग्ध का टीकाकरण नहीं किया जाता हैं क्योंकि संक्रमित व्यक्ति का टीकाकरण से कोरोनावायरस अन्य व्यक्तियों को फैलनें का खतरा रहता हैं । अत:संक्रमित व्यक्ति की रिपोर्ट नेगेटिव आनें के 14 दिन बाद ही टीकाकरण किया जाना चाहिए ।



Q.8.कोविड़ टीकाकरण की कितनी खुराक दी जाएगी ?



Ans.8.कोरोना वायरस से बचाव हेतू टीकाकरण की दो खुराक दी जाती हैं प्रथम खुराक के बाद 6 से 8 हफ्तों के बाद दूसरी खुराक दी जाती हैं ।



Q.9.यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरी बीमारीयों जैसें मधुमेह,उच्च रक्तचाप,अस्थमा,कैंसर आदि से पीड़ित हैं और इन बीमारीयों की दवा ले रहा हैं तो क्या उसका टीकाकरण किया जा सकता हैं ?



Ans.9.जी बिल्कुल,ऐसे व्यक्ति जो उपरोक्त बीमारियों से पीड़ित हैं और दवाईयों का सेवन कर रहें हैं ये लोग उच्च जोखिम वाले माने गये है और इनका टीकाकरण आवश्यक हैं ।




Q.10.कोरोना वायरस से प्रतिरक्षा हेतू टीकाकरण के कितने दिनों बाद सुरक्षा प्राप्त होती हैं ?



Ans.10.कोविड़ टीकाकरण की दूसरी खुराक लेने के 15 दिनों के बाद एंटीबाडी विकसित होना शुरू हो जाती हैं । 





Q.11.कोविड़ टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव क्या हो सकता हैं ?



Ans.11. टीकाकरण के बाद टीके वाले स्थान पर दर्द,सूजन और हल्का बुखार आ सकता हैं किंतु इसमें चिंता की कोई बात नहीं होती हैं।कुछ घंटों के बाद सबकुछ सामान्य हो जाता हैं।


टीकाकरण के बाद टीकाकरण केन्द्र पर लगभग 30 मिनिट विश्राम करना चाहियें। यदि इस बीच कोई समस्या जैसें उल्टी होना,चक्कर आना ,बैचेनी महसूस होना आदि जैसी समस्या हो तो स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को सूचना दें ।




Q.12.टीकाकारण  पंजीयन हेतू आवश्यक दस्तावेजों की सूचि कोंन सी हैं ?


Ans.12. 


• आधार कार्ड



• मतदाता पहचान पत्र



• पासपोर्ट


• बैंक या डाकघर की पासबुक 


• राशन कार्ड


• ड्राइविंग लाइसेंस


• गैस कनेक्शन की डायरी


• मनरेगा जॉबकार्ड



• पैनकार्ड


• नियोक्ता द्धारा जारी पहचान प्रमाण पत्र


• कोई अन्य दस्तावेज जो चुनाव आयोग द्धारा पहचान के लिए मान्य दस्तावेजों में शामिल हो ।


किंतु यह ध्यान रहें कि पंजीकरण के समय जो दस्तावेज उपयोग किया गया था वही दस्तावेज टीकाकरण के समय लाना अनिवार्य रहेगा ।




Q.13.क्या कोविड़ टीकाकरण के बाद टीकाकरण पूर्ण कर चुके व्यक्ति की पहचान के लिए कोई दस्तावेज दिया जायेगा ?



Ans.13.जी हाँ,टीकाकरण पूर्ण कर चुके व्यक्ति को टीकाकरण पूर्ण करनें पर इलेक्ट्रॉनिक फार्मेट में टीकाकरण पूर्ण करनें का प्रमाण पत्र दिया जाएगा ।





Q.14.भारत बायोटेक ने टीकाकरण से संबधित कोंन सी एडवाइजरी जारी की हैं जिसके अनुसार किन व्यक्तियों को टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए ?



Q.15.भारत बायोटेक ने टीकाकरण से संबधित भ्रांतियों को दूर करने हेतू कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किये हैं जिनके अनुसार


1.गर्भवती स्त्री को टीकाकरण करवानें से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श प्राप्त कर लेना चाहिए या फिर कोविड़ टीकाकरण को टालना चाहिए।



2.एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए ।



3.बुखार से पीड़ित रोगी का टीकाकारण बुखार उतनें के बाद ही किया जाना चाहियें ।




4.यदि कोई टीका लगा हैं तो कोविड़ टीकाकरण 14 दिनों के बाद ही किया जाना चाहिए ।


Q.15. टीकाकरण में कोमोर्बिड comorbid का क्या मतलब है ?


उत्तर = भारत सरकार ने 45 वर्ष से 59 वर्ष के उन व्यक्तियों का टीकाकरण करने का निर्णय लिया है जो कोमोर्बिड अर्थात गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं । इसके लिए सरकार द्वारा बीमारियों की सूचि दी गई हैं जो निम्न हैं 


1.ऐसे बीमारी जो पिछले एक साल के अन्दर ह्रदयघात की वजह से अस्पताल में भर्ती थे ।


2.ऐसे व्यक्ति जिन्हें cardiac transplant हुआ हो या जिन्हें Left ventricular Assist Device (LVAD) लगा हो ।


3.जिन्हें 40 प्रतिशत से अधिक Left ventricular systolic dysfunction हुआ हो ।


4.ऐसे जिन्हें गंभीर से लेकर मध्यम स्तर तक की ह्रदय वाल्व संबंधित बीमारी हो ।


5.congenital heart disease के साथ गंभीर PAH या idiopathic PAH


6. coronary arteries disease with past CABG/PTCA//MI and Hypertension/Diabetes on treatment


7. जो व्यक्ति angina ,Hypertension और मधुमेह का इलाज लें रहें हों । 


8.CT/MRI में जिन्हें स्ट्रोक की समस्या आई हो ।


9.जिन्हें pulmonary artery से संबंधित हाइपरटेंशन हो


10.जो पिछले दस साल से कम से समय से मधुमेह का उपचार चल रहा हो ।


11.जिनका किडनी,लीवर,Hematopoietic stem cell transplant की सूचि में नाम हो या वेटिंग लिस्ट में नाम हो ।


12. End stage kidney Disease on haemodialysis/ CAPD


13.लम्बें समय से corticosteroid या immunosuppressant मेडिसिन लें रहें व्यक्ति ।


14.Decompensated cirrhosis


15. श्वसन तंत्र से संबंधित गंभीर बीमारी जिनमें व्यक्ति पिछले  दो साल के अन्दर अस्पताल में भर्ती कराया गया हो ।/FEV1 50 प्रतिशत से कम हो ।


16. लिम्फोमा,ल्यूकेमिया,मेलोमा कैंसर हो ।


17.जिन्हें 1 जुलाई 2020 के बाद किसी भी प्रकार का कैंसर हुआ हो या फिर जो इस समय कैंसर से संबंधित कोई थैरेपी ले रहें हों ।


18. सिकल सेल बीमारी,बोन मैरो फैल्यूअर,अप्लास्टिक एनिमिया, थैलीसीमिया से पीड़ित व्यक्ति ।


19.एड्स या कोई अन्य primary immunodeficiency Disease से पीड़ित व्यक्ति ।


20. ऐसे व्यक्ति जो मानसिक दिव्यांग हो,मस्क्यूलर डिस्ट्राफी से पीड़ित,जिनके ऊपर एसिड अटेक हुआ हो और इसमें श्वसन तंत्र प्रभावित हुआ हो, ऐसे दिव्यांग जिन्हें उच्च मददगार उपकरण लगे हो या जिन्हें बहुप्रकार की विकलांगता हो इसमें सुनने से संबंधित समस्या भी हो ।














टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्स इन हिंदी। Top smart health gadgets

Top smart health gadgets।टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्सस इन हिंदी  कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर जितना दबाव पैदा हुआ उतना शायद किसी भी काल...