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अक्तूबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एंटीबायोटिक इंजेक्शन- मोनोसेफ, उपयोग, साइड-इफेक्ट

  एंटीबायोटिक इंजेक्शन मोनोसेफ एक Broad spectrum एंटीबायोटिक हैं जिसमें मौजूद दवा का नाम Ceftriaxone हैं। Ceftriaxone इंडियन फार्मोकोपिया की मेडिसिन हैं।  मोनोसेफ ग्राम पाज़िटिव और ग्राम नेगेटिव बेक्टेरियल इन्फेक्शन के विरुद्ध प्रभावी कार्य करता हैं।  आईए जानतें हैं ग्राम पाज़िटिव और ग्राम नेगेटिव उन बेक्टेरिया के बारें में जिन पर मोनोसेफ प्रभावी साबित होता हैं। ग्राम पाज़िटिव बेक्टेरिया Gram positive Bacteria 1.स्टेफायलोकस आरिअस Staphylococcus aureus 2.स्टेफायलोकस एपिडर्मिडिस, Staphylococcus epidermidis 3.स्ट्रैप्टोकोकस न्यूमोनी streptococcus pneumoniae 4.स्ट्रैप्टोकोकस पायोजिनस, Streptococcus pyogenes 5.विरीदान समूह के स्ट्रेप्टोकोकोई 6.स्ट्रैप्टोकोकस एगालाक्टी, Streptococcus agalactiae ग्राम नेगेटिव बेक्टेरिया Gram negative Bacteria 1.एसिनिटोबेक्टर केल्कोएसिटीकस, Acinetobacter Calcoaceticus 2.एंटीरोबेक्टर एरोजिनस, Enterobacter aerogenes 3.एंटीरोबेक्टर क्लोसिए, Enterobacter Cloacae 4.इश्चिरिया कोलाई , Escherichia Coli 5.हेमोफिलस इन्फ्लुएन्जा, Haemophilis influenzae 6.हेमोफिलस पैरा

आईवीएफ क्या हैं, भारत में आईवीएफ करवाने में कितना खर्चा आता हैं

आईवीएफ या In-vitro fertilization चिकित्सा विज्ञान की एक तकनीक हैं, जिसके माध्यम से निसंतान दंपतियों को संतान सुख उपलब्ध कराया जाता हैं। सबसे पहले सन् 1978 में इंग्लैंड में आईवीएफ पद्धति का जन्म हुआ था। जिस महिला का फेलोपियन ट्यूब ब्लाक हो जाता हैं वे जब पति के साथ सहवास करती हैं तो फेलोपियन ट्यूब ब्लाक होने की वजह से पुरुष के शुक्राणु महिला के अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते हैं फलस्वरूप निषेचन fertilization की प्रक्रिया पूरी नहीं होती हैं। ऐसी परिस्थिति में Ivf center में महिला के ताज़े अंडाणु एकत्र कर पुरुष शुक्राणु से Test tube में निषेचन fertilization करवाया जाता हैं।  यदि यह निषेचन सफल होकर कुछ सप्ताह में भ्रूण बनने लगता हैं तो इस भ्रूण को बच्चें के पैदा होने तक माता के गर्भ में प्रतिस्थापित कर दिया जाता हैं। इस विधि को आईवीएफ या In-vitro fertilization कहतें हैं। आईवीएफ कब करवाना चाहिए  चिकित्सकों के अनुसार यदि महिला और पुरुष एक साल से बिना किसी गर्भनिरोधक तरीके के सहवास कर रहें हों और उसके बाद भी महिला को गर्भधारण नहीं हो रहा हैं तो उन्हें "Ivf center near me" सर्च कर वहां मौ

हर्बल चाय पीनें के फायदे

  आपने chai sutta bar का नाम तो सुना होगा छोटी सी दुकान से कुछ वर्ष पूर्व शुरू हुआ इनका सफ़र आज देश विदेश में सफलता फैल चुका हैं।  chai sutta bar लोगों को अलग-अलग फ्लेवर की चाय serve करता हैं। लेकिन क्या आप जानतें हैं, हर्बल चाय Herbal Tea☕ यदि आप पीतें हैं तो आपको चाय के स्वाद के साथ रोगों से लड़ने में भी मदद मिलती हैं। तो आईए आज आपको हर्बल चाय पीनें के फायदे Herbal Tea ke fayde और हर्बल चाय किन रोगों में फायदेमंद है उसके के बारें में बताते हैं। 1.दालचीनी की चाय के फायदे☕ दालचीनी हर घर में उपयोग होनें वाला मसाला हैं। दालचीनी का लेटिन नाम C innamomum Zeylanicum हैं।  दालचीनी में में Cinamom oil, Eugenol,Cinamaldehyde,Cinnazelamine,और camphor पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहता हैं। आधा चम्मच दालचीनी पाउडर चाय में डालकर दस मिनट उबालें और इसे सुबह के समय पीयें इससे आपको निम्नलिखित फायदे होंगे 1.निम्न रक्तचाप सही होगा । 2.चेहरा चमकीला और कान्तिवान बनेगा। 3.जोड़ो के दर्द, गठिया, संधिवात में आराम मिलेगा। 4.जिन लोगों को भूख नहीं लगती वे यदि दालचीनी की चाय पीतें हैं तो भूख खुलकर लगना शुरू हो जात

मेफ्रिस्टोन 200 एमजी + मिसोप्रोस्टोल 200 एमसीजी टेबलेट उपयोग, साइड-इफेक्ट

मेफ्रिस्टोन 200 एमजी + मिसोप्रोस्टोल 200 एमसीजी दो तरह की एलोपैथिक दवाओं का Combination हैं। जिसे अलग-अलग दवा कंपनिया एक KIT के रूप में बेचती हैं। इस MTP KIT में एक मेफ्रिस्टोन 200 एमजी और चार मिसोप्रोस्टोल 200 एमसीजी टेबलेट होती हैं। मेफ्रिस्टोन 200 एमजी मुंह के द्वारा ली जानें वाली गोली हैं जबकि मिसोप्रोस्टोल 200 एमसीजी योनि मार्ग द्वारा गर्भाशय के मुंह पर रखी जाती हैं। यह दोनों दवाएं महिलाओं के 6 से 8 सप्ताह के गर्भ को गिराने की दवाईयां हैं।  यह दोनों दवाएं IP यानि इंडियन फार्मोकोपिया की हैं और Medical Termination of Pregnancy Act, 2002 और Medical Termination of Pregnancy Rules,2002 के अन्तर्गत बिना गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह के नहीं खरीदी जा सकती हैं। मेफ्रिस्टोन 200 एमजी  मेफ्रिस्टोन एक  Antiprogestogen,Antiestrogenic,Antiminaralcorticoid गुणधर्म रखनें वाली दवाई हैं।  मेफ्रिस्टोन गर्भाशय की दीवारों पर मोजूद इंडोमेट्रियम ऊतकों पर Antiprogestogen प्रभाव उत्पन्न करती हैं जिससे गर्भाशय संकुचित हो जाता हैं और गर्भ गर्भाशय की दीवार से अलग होकर बाहर निकल जाता हैं। मिसोप्रोस्टोल 200 एमसीजी मि

चिकित्सकीय परीक्षण :: Intravascular ultrasound [IVUS]

 Heart 💓  blockage का पता लगाने के लिए आजकल बहुत ही उन्नत तकनीक का प्रयोग किया जा रहा हैं। इस तकनीक का नाम है  Intravascular ultrasound  जिसे सामान्यतः IVUS या Intravascular echocardiogrphy  भी कहा जाता हैं। Intravascular ultrasound [IVUS] क्या होती हैं ? Intravascular ultrasound या IVUS ह्रदय की नसों में blockage का पता लगाने वाली एक अति आधुनिक तकनीक हैं जिसके माध्यम से ह्रदय के blockage का एकदम सटीक पता लगाया जाता हैं। Intravascular ultrasound में ह्रदय की नसों की सोनोग्राफी होती हैं। नसों में पतला तार कैथेटर के साथ डाला जाता हैं और ह्रदय के blockage का पता लगाया जाता हैं। IVUS में बहुत high frequency की sound waves का उपयोग होता हैं जब यह sound waves ह्रदय की नसों से टकराती हैं तो उन्नत कम्प्यूटर इस sound waves को स्पष्ट चित्र में बदल देते हैं। Intravascular ultrasound[IVUS] के लाभ क्या हैं? 1.एंजियोप्लास्टी करनें से पूर्व Intravascular ultrasound करनें से blockage का सटीक पता लगाया जा सकता हैं। जिससे ह्रदयरोग विशेषज्ञ ह्रदय में डालने वाले स्टेंट के आकार का बहुत सही अनुमान लगा सकें