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LUPUS DISEASE, ल्यूपस डिसीज क्या हैं इसका आयुर्वेदिक इलाज

ल्यूपस डिसीज़ (lupus disease) ::: ल्यूपस नामक बीमारी मात्र एक बीमारी न होकर बीमारीयों का समूह हैं, जिससे शरीर के प्रत्येक अंग प्रभावित होतें हैं,इसमें शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र स्वंय के शरीर के प्रति संवेदनशील होकर शरीर के उत्तकों (Tissues) और अंगों को शत्रु मानकर हमला कर देता हैं.इस बीमारी में जो अंग प्रभावित होता हैं,उससे संबधित बीमारी भी हो जाती हैं,जैसें फेफडें प्रभावित होनें पर अस्थमा, त्वचा प्रभावित होनें खुजली, चकते निकलना, जोड़ प्रभावित होनें पर गठिया आदि बीमारीयाँ पैदा हो जाती हैं.   ल्यूपस डिसीज का कारण क्या हैं    ल्यूपस डिसीज़ का वास्तविक कारण अभी तक पता नही चल पाया हैं.और इस पर वर्तमान समय में काफी शोध चल रहा हैं ,कुछ शोधों का निष्कर्श हैं,कि यह बीमारी शरीर की जीन संरचना में परिवर्तन की वज़ह से होती हैं,किन्तु यह परिवर्तन क्यों होता हैं,इस पर लगातार शोध जारी हैं.                               ● अलसी हैं गुणों की खान ल्यूपस डिसीजन होने पर क्या करें  यदि बीमारी का पता लगतें ही जीवनशैली को संतुलित और खा

synthetic milk सिंथेटिक दूध में क्या मिला होता हैं जिससे जान को खतरा हो जाता हैं

  सिंथेटिक दूध (synthetic milk) क्या हैं  सिंथेटिक दूध (synthetic milk) कृत्रिम रूप से बनाया गया दूध होता हैं,जो गाय या भैंस के दूध से वसा निकालकर बचे हुये सपरेटा दूध में यूरिया,डिटरजेंट़,कास्टिक सोड़ा, स्टार्च आयल,ग्लूकोज शेंपू,हाइड्रोजन पराआँक्साइड़,डालडा आयल,चाक,चूना आदि मिलाकर बनाया जाता हैं.स्किमड़ दूध पावड़र में भी यही वस्तुएँ मिलाकर उसे दूध में परिवर्तित कर दिया जाता हैं.     सिंथेटिक दूध से जान को खतरा ::: सिंथेटिक दूध मानव के लिये धीमा ज़हर होता हैं,इससे मानव शरीर बीमारी के घर में बदल जाता हैं,आईयें जानतें हैं, इससे होनें वाली स्वास्थ समस्याओं को  ० सिंथेटिक दूध का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव छोट़े बच्चों पर होता हैं,क्योंकि उनका सम्पूर्ण आहार दूध ही होता हैं, इस दूध के सेवन से बच्चा कुपोषित हो जाता हैं,क्योंकि बच्चों के विकास के लिये ज़रूरी विटामिन, प्रोटीन इस दूध से बच्चों को नही मिलतें हैं. ० सिंथेटिक दूध में यूरिया,पेंट,और डिटरजेंट मिला होता हैं, जिनसे किड़नी फेल होनें का का खतरा पैदा हो जाता हैं. ० वर्षों तक लगातार सिंथेटिक दूध के सेवन से स्त्रीयों को

Mushroom मशरूम एक उपयोगी पौधा

  Mushroom कुकुरमुत्ता एक उपयोगी पौधा ::: आपनें बरसात के मौसम में पेड़ों,कुड़े - कचरें के ढ़ेर के ऊपर या भूसे  पर सफेद,मट़मेला या पीलापन लिये छतरीनुमा मखमली पौधा अवश्य देखा होगा, यही पौधा मशरूम कहलाता हैं.मशरूम की किस्में mashrum ki kishme भी कई होती हैं जो भारत और दुनिया भर में उगती हैं, परन्तु खाद्य फसल के रूप में सीप मशरूम या oyster mushroom अत्यन्त लोकप्रिय हैं. oyster mushroom की  भी अनेक किस्में दुनियाभर में उगाई जाती हैं.जैसे भारत में प्लूटोरस सजोरकाजू,चीन में प्लूटोरस एबोलनस तथा प्लूटोरस सिस्टीडिओसस,यूरोप में प्लूटोरस औस्ट्रिएटस प्रमुख हैं.  Oyster mushroom मशरूम में पाए जाने वाले पोषक तत्व ::: थायमीन.          | 4.8 mg राइबोफ्लेविन    | 4.7 mg नियासीन.         | 108 .8 mg कैल्सियम.        | 34 mg फाँस्फोरस.       | 1347 mg सोड़ियम.         | 837 mg पोटेशियम.       | 3793 mg.                         (per 100 gm mushroom) इसके अतिरिक्त मशरूम में पर्याप्त मात्रा में पानी,लगभग 9 प्रकार के अमीनों एसिड़ खनिज़ लवण,  फ्रक्टोज ,कार्बोहाइ

गाय 😊 स्वास्थ कृषि और पर्यावरण cow health agricultural and environment

गाय 😊 स्वास्थ कृषि और पर्यावरण cow health  agricultural and environment   गाय दुनिया के आधे से अधिक राष्ट्र कृषि अर्थव्यवस्था की प्रधानता वाले हैं, भारत भी अपनी कृषि प्रणाली के साथ सदियों से विश्व का सर्वप्रमुख राष्ट्र था,इसका मूल कारण रासायनिक नहीं बल्कि आर्गेनिक (organic) कृषि थी. और इस आर्गेनिक खेती के मूल में गाय (cow) का स्थान प्रमुख था.आईयें जानतें हैं,किस प्रकार से गाय के योगदान से स्वास्थ,पर्यावरण और कृषि को उन्नत बना सकतें हैं. #स्वास्थ्य ::: गाय का दूध अमृततुल्य होता हैं,ये बात सदियों से हमारी रिषी - मुनि कहतें आयें हैं,किन्तु हमनें इस बात को विस्मृत कर दिया और जब अनेक शोधों में यह बात प्रमाणित हुई तब हमनें इसको माना. शोधों के अनुसार गाय के दूध में जो पीलापन होता हैं वह इसमें उपस्थित सोने की वज़ह से होता हैं. और आयुर्वेदानुसार सोना सुरक्षित और सुदृढ़ शरीर के लिये आवश्यक हैं. यदि शिशु को 6 माह से प्रतिदिन 300 ग्राम दूध पि लाया जावें तो बालक कभी कुपोषित नही होगा. गाय का दूध अन्य पशुओं के दूध के मुकाबले हल्का और सुपाच्य होता हैं,जिसकी वजह से ये

इमली के आयुर्वेदिक उपयोग TAMARIND

इमली के आयुर्वेदिक उपयोग TAMARIND परिचय ::: इमली इमली का पेड़ पादप वर्ग के शिंबी कुल में आता हैं.यह उष्ण कटिबंधीय जलवायु का वृक्ष हैं. जो भारत में जन्मा हैं.   इमली के कई नाम प्रचलित हैं,जैसे संस्कृत में इसे अम्लिका,चुंचिका,दंतशठा,चिंचा बंगाली में तेतुल,गुजराती में आंवली तथा लेटिन में टेमरिण्डस इण्ड़िका लिन्न कहते हैं. इमली के फल और पत्तियों का स्वाद खट्टा,चटपटा और स्वादिष्ट होता हैं.जिसकी वज़ह से यह भारतीय  रसोई का अभिन्न अँग हैं. पाये जानें वाले पोषणीय तत्व ::: फल में ::: इसके फल में कैल्सियम,आयरन,विटामिन बी ,सी,के साथ फास्फोरस बहुतायत में पाया जाता हैं. इसमें टार्टरिक एसिड़ 18%,तक तथा,ग्लूकोज 20% तथा फ्रक्टोज 30% पाया जाता हैं.इसके अतिरिक्त अन्य अनेक तत्व पाये जातें हैं जैसे टरपीन,लिमोनिन,जेरा नियोल,फेनाइल,प्रोपेनाइड़स,सैफाल,सिनामिक अम्ल,इथिलसिनामेट़,मिथाइल,सैलिजिलेट,पेक्टीन,पाइजारीन,और अल्काइथाईजाल्स नामक एसिड़ भी सूक्ष्म मात्रा में पाये जाते हैं. बीज में ::: इसके बीज में अल्बूमिनयडस,वसा,कार्बोहाइड्रेट, फायबर,नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा

sutshekhar ras, AKIKA PISTI Saravajwarhara lauha

Sutshekhar ras ::: content ::: ० shuddha Gandhak. ० pippali (piper longum). ० saunth (zingiber officinale). ० kalimirch (piper nigrum). ० shankh bhasma (Turbinelal pyrum). ० shuddha dhatura (Datura metel). ० shuddha para. ० Tankan bhasma. ० Tamra bhasma. ० Dalchini (cinnamomum zeylanicum). ० Nagkesar (mesua ferrea). ० Elaichi (Elettari cardamomum). ० kapur. ० Belgiri Indication ::: ० Urological disorder. ० Acidity. ० Giddiness. ० Headache. ० Stomatitis. ० Abdominal disturbance. ० chardi (vomiting). ० chronic obstructive jaundice. ० cough. ० Grahni (sprue). ० Diarrhoea with vata,pitta and kapha. Dosage ::: As directed by the physician. Pathya and Apathaya ::: ० oily and fatty foods should be avoided. ० tea and coffee should be avoided. ० saunf (Anissed croomy) and coriander seeds should be taken twice a day. ० sugar and salt mixed in cold lemon water should be taken twice a day. अकीक पिष्टी (Akika pisti)

what is metabolic syndrome

what is metabolic syndrome ?  Metabolic syndrome metabolic syndrome encompasses three or more than three disorders related to metabolism. It is a term which refers to a cluster of conditions, including various interrelated cardio - metabolic risk factors that promote development of atherosclerotic cardiovascular diseases and type 2 diabetes. The cluster of conditions include increase blood pressure, high blood sugar, excess body fat around waist and abnormal cholesterol levels. Although any of these conditions increase risk of serious disease, presence of one of these conditions does not indicate metabolic syndrome. The term metabolic syndrome is necessarily used in conditions where you have most of the above conditions at once resulting in serious complication. cause ::: According to a study in Indians, females were three times more likely to have metabolic syndrome when compared to males, Individuals with hypercholesterolemia were almost two and half times as likely t

vascular tumour, वस्कुलर ट्यूमर

वस्कुलर ट्यूमर (vascular tumour):: आप में से कई लोग ऐसे लोगों से मिलें होगें जिन्हें शरीर के विभिन्न भागों जैसें हाथ,पैर,गर्दन,या शरीर के अन्य भागों पर बड़ी - बड़ी गांठें हो और जो समय के साथ एक जैसी या बड़ी हो रही हो. इन गांठों को चिकित्सतकीय भाषा में एन्युरिज्म,एंजियोमा तथा हिमैंजियोमा कहतें हैं.चूँकि ये गांठें खून की नसों के ऊपर होती हैं,और परजीवी बेल की तरह खून की नसों से पोषित होती हैं,अत : इन्हें वस्कुलर ट्यूमर (vascular tumour) भी कहतें हैं. कारण ::: ० खून की शिराओं में जन्मजात विकृति होनें के कारण खून की नसें फूलकर मोटी हो जाती हैं,जो समय के साथ बड़ी गांठ बन जाती हैं,ज्यादातर वस्कुलर ट्यूमर के मामलें इसी प्रकार के होतें हैं. ० कोलेस्ट्राल की अधिकता की वज़ह से खून की नसों की दीवारों पर दबाव पड़ता हैं फलस्वरूप नसें फूलकर वस्कुलर ट्यूमर में परिवर्तित हो जाती हैं. ० मधुमेह  की  वज़ह से शरीर में चोट़ लग जाती हैं,तो चोट़ वाली जगह फूलकर वस्कुलर ट्यूमर बन जाती हैं. ० दुर्घट़ना की वज़ह से खून की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं,और यदि उचित देखभाल नहीं हो तो नसों की दीवार

रक्तदान ,Blood donation

रक्तदान ::: रक्तदान को सभी दानों में श्रेष्ठ दान माना गया हैं.अन्य दानों में जहाँ हम दान लेनें वाले की आर्थिक और सामाजिक मदद करतें हैं,वही रक्तदान ऐसा दान हैं, जिसमें हम किसी अनजान या परिचित व्यक्ति को जीवनदान देतें हैं.  रक्तदान करता युवा विश्व स्वास्थ संगठन (w.h.o.)  के अनुसार दुनिया में प्रति दो सेकेण्ड़ में रक्त की आवश्यकता पड़ती हैं.यह आवश्यकता दुर्घट़ना में घायल व्यक्ति को,एनिमिया, आपरेशनों आदि अनेक प्रकारों में होती हैं.किन्तु इस आवश्यकता के मुकाबले रक्त की आपूर्ति बहुत कम हो पाती हैं, उदाहरण के लिये भारत में प्रतिवर्ष  100 लाख यूनिट़ रक्त की आवश्यकता के मुकाबले मात्र 60 लाख यूनिट़ रक्त ही एकत्रित होता हैं.और इसमें से भी लगभग 25% रक्त उचित भंड़ारण प्रक्रिया के अभाव में नष्ट़ हो जाता हैं. रक्त का जीवनचक्र ::: रक्त का जीवनचक्र अत्यंत लघु होता हैं.इसके अलग - अलग भागों को मात्र कुछ दिवस तक भण्ड़ारित करके रखा जा सकता हैं ,जैसे --:: ० लाल रक्त कणिकाओं (w.b.c.) को 41 दिन . ० प्लेटलेट्स को पाँच दिन. ० प्लाज्मा तथा कायोप्रेसीपीटेट को एक वर्ष तक रखा जा सकता है

बाड़ी इंटीग्रिटी आइडेंटिटी डिस आर्डर।BIID

 बाड़ी इंटीग्रिटी आइडेंटिटी डिस आर्डर।  body integrity identity disorder बाँड़ी इंटीग्रिटी आइडेंटी डिसआर्डर या BIID एक मनोशारीरिक समस्या हैं,जिससे प्रभावित व्यक्ति अपनें ही शरीर के अँगों से घृणा करनें लगता हैं, और उन अंगों को शरीर से हटा देनें के लियें प्रयत्नशील रहता हैं.  उदाहरण के लिये कई व्यक्ति अपनें पुरूष या महिला होनें से घृणा करतें हैं,और किसी भी कीमत पर अपना लिंग परिवर्तित करना चाहतें हैं,यही समस्या शरीर के अन्य अँगों के प्रति भी रहती हैं. BIID की समस्या लाखों लोगों में एक या दो व्यक्तियों को होती हैं. समस्या क्यों होती हैं ? ० शोध कहतें हैं,कि इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति का मस्तिष्क सामान्य मस्तिष्क के मुकाबले कम विकसित होता हैं,इस वज़ह से प्रभावित व्यक्ति अपने को हानि पहुँचाकर समाज की सहानूभूति या समाज का ध्यान अपनी और आकृष्ठ करवाना चाहता हैं. ० मनोचिकित्सकों के अनुसार  यह समस्या प्रभावित व्यक्ति के मस्तिष्क द्धारा शरीर की संरचना नहीं समझनें की वज़ह से होती हैं.क्योंकि मस्तिष्क शरीर के अँगों से तालमेल नहीं बिठा पाता और अपनें ही अँगों को शरीर से अलग समझनें

जीन संवर्धित फसल और हमारा स्वास्थ,Gm

जीन संवर्धित (Genitcally modified) फसल क्या हैं ? ::: जीन संवर्धन या Genitacally modified फसलें ऐसी फसलें होती हैं,जो परंपरागत फसलों के मुकाबले अधिक कीट़रोधी,तापरोधी,सूखारोधी और बाढ़रोधी होती हैं, इन फसलों का उत्पादन भी सामान्य फसलों के मुकाबलें अधिक होता हैं. ऐसा परिवर्तन इन फसलों के बीजों में डी.एन.ए.परिवर्तन के जरियें होता हैं.दुनिया में जीन संवर्धित फसलों की अनेक किस्में उगाई जा रही हैं जैसें -- भारत में कपास,अमेरिका(U.S.A) में कपास,मक्का,सोयाबीन,चुकंदर,पपीता,और आलू अर्जेंटीना(Argentina) में सोयाबीन,मक्का,कपास चीन(China) में पपीता,कपास बांग्लादेश(Bangladesh) में बैंगन अफ्रीका(Africa) में कपास और मक्का .  Gm फसल का दृश्य Gm फसलों का स्वास्थ पर प्रभाव ::: विश्व के अनेक विकसित और विकासशील देशों में Gm फसलों के स्वास्थगत एँव पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर व्यापक शोध चल रहें हैं.लेकिन इन फसलों के स्वास्थ पर होनें वालें प्रभाव को लेकर शोधगत बातों की अपेक्षा आशंकापूर्ण बातें ज्यादा की जा रही हैं जैसे बीटी बैंगन को लेकर कहा जा रहा हैं,कि इससे शरीर की प्रतिरोधकता