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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Omicron (B.1.1.529): SARS-CoV-2 चिंता का कारण

Omicron  (B.1.1.529): SARS-CoV-2 चिंता का कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन का "SARS-CoV-2 वायरस इवोल्यूशन (TAG-VE)" पर तकनीकी सलाहकार समूह विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र समूह है जो समय-समय पर SARS-CoV-2 के विकास की निगरानी और मूल्यांकन करता है कि क्या विशिष्ट वायरस म्यूटेशन और म्यूटेशन के संयोजन व्यवहार को बदलते हैं। ।  TAG-VE को 26 नवंबर 2021 को SARS-CoV-2 प्रकार: B.1.1.1.529 की जांच करने हेतू विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुलाया था। कोरोनावायरस के  B.1.1.1.529 वेरिएंट या omicron को पहली बार 24 नवंबर 2021 को दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया और उसने इसकी सूचना डब्ल्यूएचओ को दी।    हाल के सप्ताहों में, omicron के संक्रमणों में तेजी से वृद्धि हुई है, इसके पहले omicron के पहले केस की पुष्टि जिसे  B.1.1.529 कहा गया  9 नवंबर 2021 को एकत्र किए गए नमूने से हुई थी।  Omicron में बड़ी संख्या में म्यूटेशन हुए हैं,  प्रारंभिक साक्ष्य के आधार पर यह कहा जा सकता हैं कि अन्य variation of concern की तुलना में omicron संक्रमण के बहुत अधिक बढ़ने का संकेत   देते हैं।   दक्षिण अफ्रीका के लगभग सभी प्रांतों में इस प्

Corona third wave : से बचने के सबसे बेस्ट तरीके

corona third wave की आहट सुनाई देने लगी हैं और इस corona third wave की चपेट में वो लोग अधिक हैं जिन्होंने corona vaccine की दोनों डोज लगवा ली हैं। दोस्तों एक बात समझना बहुत जरूरी हैं कि कोराना अब आपके बीच बहुत लम्बें समय तक रहने वाला हैं यह अब आप पर निर्भर करता हैं कि आप इस वायरस के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं या फिर कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता के साथ कोरोना को आप पर हावी करवाना चाहते हैं। यदि कोरोनावायरस को खतरनाक वायरस से सामान्य फ्लू वायरस के रुप में बदलना हैं तो आपको प्राचीन आयुर्वेद जीवनशैली को हर हाल में अपनाना ही पड़ेगा। तो आईए जानतें हैं 8 बेस्ट तरीकों के बारें में 1.सुबह शाम दोड़ना शुरू करें कोरोनावायरस सबसे ज्यादा श्वसन तंत्र पर हमला करता हैं,कोरोना की दूसरी लहर में में अनेक लोग श्वसन तंत्र फैल हो जानें से मरें थे। ऐसा corona third wave  में न हो इसकी तैयारी हमें पहले से ही करना है।  मैंने अपने निजी अनुभव से देखा हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में खिलाड़ीयों को कोरोना के हल्के लक्षण ही प्रकट हुए थे और कोई भी खिलाड़ी गंभीर रूप से श्वसन तंत्र के संक्रमण से प्रभावित नहीं हुआ

भारत में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत कब हुई थी

  प्रश्न 1.भारत में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत कब हुई थी ? उत्तर - भारत में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत का श्रेय एक फ्रांसीसी पर्यटक डॉ.जान मार्टिन हानिगबर्गर को जाता हैं। डॉ.जान मार्टिन सन् 1810 में भारत घूमने आए तो उन्होंने पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह के गले का इलाज होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से सफलता पूर्वक किया था। महाराजा रणजीत सिंह डॉ.जान मार्टिन हानिगबर्गर के इलाज से बहुत प्रभावित हुए थें। उल्लेखनीय है कि डॉ.जान मार्टिन हानिगबर्गर होम्योपैथी के जनक डॉ.सेमुएल हैनीमैन के शिष्य थे । सन् 1810 के बाद होम्योपैथी का प्रचार प्रसार जारी रहा और बंगाल में यह चिकित्सा पद्धति से बहुत लोकप्रिय हो गई। प्रश्न 2.भारतीय होम्योपैथी का पिता Father of Indian homeopathy किसे कहा जाता हैं ? उत्तर 2. भारतीय होम्योपैथी का पिता Father of Indian homeopathy बाबू राजेंद्र लाल दत्त Babu Rajendra lal Dutta को कहा जाता हैं।  बाबू राजेंद्र लाल दत्त ने भारत में होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया इसीलिए उनकों भारतीय होम्योपैथी का पिता कहा जाता हैं। बाबू राजेंद्र ला

Pulse oximeter : आप कालें हैं तो पल्स आक्सीमीटर को लेकर सावधान हो जाएं

  Author::Healthylifestyehome भारत में कोरोना काल में पल्स आक्सीमीटर हर घर की जरूरत बन गया हैं। लेकिन क्या आप जानतें हैं पल्स आक्सीमीटर काले और गोरे लोगों के आक्सीजन स्तर को अलग अलग नापता हैं। जी हां सही सुना आपने ये चोंकाने वाला खुलासा अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुआ हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डाक्टर फिलीप बिकलर ने इस संबंध में शोध किया हैं। डाक्टर फिलीप बिकलर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हाइपोक्सिया रिसर्च लैब के डायरेक्टर हैं इन्होंने अलग-अलग चरणों में कुल 48097 लोगों पर परीक्षण कर बताया कि काले रंग के लोगों में Pulse oximeter लगभग 12 प्रतिशत तक आक्सीजन का स्तर कम बताता हैं।  जबकि गोरे लोगों में Pulse oximeter लगभग 3.6 प्रतिशत आक्सीजन का स्तर अधिक करके बताता हैं। इस रिसर्च रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने पल्स आक्सीमीटर की स्वतंत्र एंजेसी से जांच कराने की घोषणा कर दी वहीं अनेक देशों ने इस संबंध में विस्तृत जांच कराने का फैसला किया हैं। पल्स आक्सीमीटर भ्रामक परिणाम दे सकता हैं इसको लेकर भारत में भी कई बार Social media पर विवाद हुआ हैं ।  सोशल म

रीढ़ की हड्डी में‌ दर्द खत्म करने की नई तकनीक : Percutaneous disc Nucleoplasty

  भारत समेत पूरी दुनिया में बैठकर काम करने वालों का एक बहुत बड़ा वर्ग रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या को लेकर बहुत परेशान हैं। और रीढ़ की हड्डी में दर्द को समाप्त करनें के तमाम जतन कर रहा हैं उदाहरण के लिए फिजियोथेरेपी,  पंचकर्म चिकित्सा किंतु समस्या का पूर्ण निदान नहीं हो पाता है। और लम्बें समय बाद समस्या ओर गंभीर हो जाती हैं।  रीढ़ की हड्डी में दर्द को स्थाई रूप से समाप्त करनें के लिए आजकल एक नवीन तकनीक Percutaneous disc Nucleoplasty बहुत प्रचलन में हैं । आईए जानतें हैं percutaneous disc nucleoplasty के बारें में 1.Percutaneous disc Nucleoplasty एक प्रकार की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी बिना चीरा बिना टांका पद्धति से की जानें वाली सर्जरी हैं। 2.percutaneous disc nucleoplasty में रीढ़ की हड्डी के उस फैलाव को नियंत्रित किया जाता हैं जिसमें रीढ़ की हड्डी की नस दबती हैं। 3.रेडियोफ्रीक्वेंसी उपकरणों को एक छोटे-से छेद के माध्यम से रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाकर रीढ़ की हड्डी के उन फैलाव को हटाया जाता हैं जो रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण हैं। 4.percutaneous disc nucleoplasty में मरीज को बेहोश करने की