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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर #1 से नम्बर #28 तक Homeopathic bio combination in hindi

  1.बायो काम्बिनेशन नम्बर 1 एनिमिया के लिये होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर 1 का उपयोग रक्ताल्पता या एनिमिया को दूर करनें के लियें किया जाता हैं । रक्ताल्पता या एनिमिया शरीर की एक ऐसी अवस्था हैं जिसमें रक्त में हिमोग्लोबिन की सघनता कम हो जाती हैं । हिमोग्लोबिन की कमी होनें से रक्त में आक्सीजन कम परिवहन हो पाता हैं ।  W.H.O.के अनुसार यदि पुरूष में 13 gm/100 ML ,और स्त्री में 12 gm/100ML से कम हिमोग्लोबिन रक्त में हैं तो इसका मतलब हैं कि व्यक्ति एनिमिक या रक्ताल्पता से ग्रसित हैं । एनिमिया के लक्षण ::: 1.शरीर में थकान 2.काम करतें समय साँस लेनें में परेशानी होना 3.चक्कर  आना  4.सिरदर्द 5. हाथों की हथेली और चेहरा पीला होना 6.ह्रदय की असामान्य धड़कन 7.ankle पर सूजन आना 8. अधिक उम्र के लोगों में ह्रदय शूल होना 9.किसी चोंट या बीमारी के कारण शरीर से अधिक रक्त निकलना बायोकाम्बिनेशन नम्बर  1 के मुख्य घटक ० केल्केरिया फास्फोरिका 3x ० फेंरम फास्फोरिकम 3x ० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x

कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी क्या हैं ? what is convalescent plasma therpy in hindi

कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी क्या हैं  What is Convalescent plasma therpy in hindi convalescent plasma therapy कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी plasma therapy रोग उपचार की एक पद्धति हैं । जिसमें संक्रामक बीमारी से पूर्ण स्वस्थ हो चुकें व्यक्ति के रक्त से एंटाबाडी निकालकर संक्रामक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के रक्त में प्रतिस्थापित कर उपचार किया जाता हैं । "कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी plasma therapy की खोज जर्मन वैज्ञानिक वान बेहरिंग ने की थी । इस पद्धति द्धारा उन्होनें टिटनस और डिप्थीरिया का इलाज किया था" । #कोरोना वायरस के उपचार में कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी किस प्रकार मददगार हो सकती हैं ? लगभग एक शताब्दी पुरानी यह पद्धति फिर से चर्चा में तब आई जब कोरोना वायरस से जूझ रहें पूरे विश्व की सरकारों ने इस पद्धति से कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का उपचार करनें की अनुमति प्रदान की। भारत का ICMR indian council of medical research भी इस पद्धति से उपचार की अनुमति प्रदान कर चुका हैं । कान्वलेसंट प्लाज्मा थैरेपी में कोविड़ 19 बीमारी से पूर्णत : स्वस्थ

how to start living a healthy lifestyle । स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए टिप्स

 how to start living a healthy lifestyle । स्वस्थ जीवनशैली के लिए टिप्स आजकल की lifestyle ऐसी बन गई हैं कि इसमें breakfast लेनें वाले समय पर  इंसान बिस्तर पर नींद निकाल रहा होता हैं । lunch लेनें वाले समय पर breakfast ले रहा होता हैं और जब रात को जब सोनें का समय होता हैं तब टीवी देखते देखते dinner ले रहा होता हैं । कहनें का तात्पर्य यही की स्वस्थ्य जीवनशैली  Healthy lifestyle जिसकी व्याख्या हमारें प्राचीन आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित हैं को अब पुरानें रीति रिवाज के रूप में प्रचारित किया जा रहा हैं । लेकिन वास्तविकता यही हैं कि आनें वाले समय में यदि प्राचीन आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित इस जीवनशैली को नही अपनाया तो रोग भी बहुत तेजी से अपनें पेर जमायेंगें और व्यक्ति की आयु को कम करेंगें ।  आईये जानतें है स्वस्थ्य जीवनशैली healthy lifestyle के लिये उपाय 1.दिनचर्या द्वारा स्वस्थ जीवनशैली कैसे अपनाएं निरोगी जीवन की कामना करने वाले  बुद्धिमान व स्वस्थ्य व्यक्ति द्धारा प्रतिदिन किये जानें वाले आचरण को दिनचर्या कहतें हैं । स्वस्थ्य रहनें के लिये दिनचर्या इस प्रकार होनी च

हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट क्या हैं ,यह कोरोना वायरस के उपचार में किस तरह से प्रयोग की जा रही हैं। Hydroxychloroquine SULFATE in hindi

हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट क्या हैं Hydroxychloroquine SULFATE in hindi   हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट   मलेरिया के उपचार या बचाव के लियें उपयोग की  जानें वाली आधुनिक दवाई हैं । हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन की खोज सन् 1940 के विश्व युद्ध के समय की गई थी ।  हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट जब वैज्ञानिको को यह मालूम पड़ा की मलेरिया के उपचार में प्रयोग की जा रही परंपरागत दवा chlroquine मलेरिया को रोकनें में असफल सिद्ध हो रही हैं तो उन्होनें मलेरिया रोधी एक नई दवा हाइड्राक्सीकलोरोक्विन सल्फेट को इसके विकल्प के रूप में खोजा था । Hydroxychlroquie SULFATE अमेरिका जैसें देशों में गठिया और ल्यूपस बीमारी के उपचार में भी प्रयोग की जाती हैं । यह दवा शरीर के सूजन के विरूद्ध भी उपयोग में लाई जा रही हैं । Hydroxychlroquine SULFATE मुहँ से ली जानें वाली दवाई हैं जो चिकित्सकीय निर्देंशों के अनुसार prescribed की जाती हैं । हाइड्राक्सीकलोरोक्विन के संबध में कई अपुष्ट अध्ययन यह भी हैं कि यह वायरस से लड़नें हेतू शरीर की प्रतिक्रिया की  अधिक क्रियाशीलता को घटाती हैं जिससे कि शरीर की प्रत

आयुर्वेद के अनुसार ज्वर कितने प्रकार के होते हैं :: ज्वर के प्रकार । Type of fever in hindi

आयुर्वेद के अनुसार ज्वर jvar कितने प्रकार के होते हैं :: ज्वर के प्रकार,Type of fever in hindi  ज्वर के प्रकार  आयुर्वेद मतानुसार शरीर में ज्वर jvar ka mul karan का मूल कारण वात,पित्त और कफ का कुपित होना हैं ,तदानुसार ज्वर भी इसी तरह वात,पित्त और कफ से संयोजित होकर उत्पन्न होतें हैं । जैसें १.वातज ज्वर, vataj jvar २.पित्तज ज्वर, pittaj jvar ३.कफज ज्वर, kafaj jvar ४.वातज पित्तज ज्वर vataj pittaj jvar  ५.पित्तज कफज ज्वर pittaj kafaj jvar ६.वातज कफज ज्वर vataj kafaj jvar ७.वातज पित्तज ज्वर vataj pittaj jvar ८.आगन्तुक ज्वर  aagantuk jvar चरक संहिता में वर्णित उपरोक्त आठ प्रकार के ज्वर को विस्तारपूर्वक समझाकर इन ज्वरों के निदान का उपाय jvaro ke nidan ka upay भी बताया हैं । आईयें जानतें हैं इनके बारें में विस्तारपूर्वक १.वातज ज्वर  तद्घथारूक्षलघुशीतव्यायामनविरेचनास्थापनशिरोविरेचनातियोगवेगसन्धारणानजगतवयवायोद्धेगशोकशोणितातिसेकजागरणविषमशमनसेभ्योंअतिसेवितेभ्योवायु:प्रकोमापघते ।। श्लोकानुसार यदि रूक्ष ,लघु,शीतल पदार्थों के स

मुहँ का कैंसर कारण,लक्षण और बचने के उपाय। oral cancer in hindi

  मुहँ का कैंसर कारण, लक्षण और बचने के उपाय। oral cancer in hindi  ओरल कैंसर या मुहँ का कैंसर जबड़ें,तालु,जीभ,और गले में होनें वाला कैंसर का एक प्रकार हैं। ओरल कैंसर में इन भागों में गठान या छाला हो जाता हैं । यह छाला या गठान लम्बें समय तक सामान्य उपचार से ठीक नही होता हैं ।  मुंह का कैंसर मुहँ के कैंसर का लक्षण ०१. मुहँ के अन्दर के भागों पर लाल या सफेद धब्बे होना। ०२.आवाज का भारीपन । ०३. मुहँ पर सूजन लम्बें समय तक रहना । ०४.खानें पीनें या थूक निगलनें में दर्द होना । ०५.मुहँ,जीभ,गला,और तालू पर छाला या गठान होना जो लम्बें समय तक ठीक नहीं हो रहा हो । ०६.मसूड़े या दाँतों में दर्द रहना । ०७.आवाज में भारीपन या गला बैठना । ०८.जबडें में दर्द जो कि लम्बे समय से ठीक नही हो रहा हो । ०९. जीभ से स्वाद का अहसास न होना । १०.पायरिया की समस्या । मुहँ के कैंसर का कारण कैंसर चाहे वह शरीर के किसी भी भाग में हो का मुख्य कारण कोशिकाओं का बिना किसी नियत्रंण के लगातार बढ़ना हैं । कोशिकाओं की यह अनियंत्रित वृद्धि  किस कारण से होती ह

बबूल के औषधीय गुण अनेक । Benefit of acacia tree in Hindi

बबूल के औषधीय गुण Benefit of acacia tree in Hindi बबूल पेड़ बबूल का पेड़ वैसे तो सम्पूर्ण भारत मेें पाया जानें वाला उष्णकटिबंधीय वृक्ष हैं । किन्तु  पश्चिमी भारत विशेेेेषकर राजस्थान ,मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश  आदि  प्रदेशों में यह वृृक्ष  बहुतायत में  मिलता है । बबूल का पेड़ मध्यम कद का  होता हैं । बबूल के पत्ते छोटें छोटें आँवले के पत्तो के समान  होतें हैैं । बबूल के कांटे  बहुत तीक्ष्ण और मज़बूत होतें हैं बबूल के कांटें दो - दो के  जोड़े मेंं लगतें हैं ।  बबूल के फूल पीले रंग के होतें हैं। बबूल की फलियाँ इमली के समान लम्बाई वाली होती हैं । बबूल के पेड़ से गोंद भी प्राप्त होता हैं ।  बबूल की लकड़ी बहुत कठोर और लम्बे समय तक  टीकाऊ होती हैैं । बबूल का संस्कृत नाम  बबूल को संस्कृत में बर्बूर ,बब्बूल ,कफांतक ,स्वर्णपुष्प ,और मालाफल कहतें हैं। बबूल का हिन्दी नाम acacia tree in hindi बबूल को हिन्दी मेें बबूल ,बबूर और कीकर नाम से पुकारतें हैं । बबूल का लेटिन नाम  बबूल को लेटिन भाषा मेें माइमोसा अरेबिका कहतें हैं । आयुर्वेद मतानुुुुसार बबूल की प्रकृति