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दिसंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या आप जानतें हैं हरसिंगार का संस्कृत नाम क्या हैं हरसिंगार शरीर के किन रोगों में फायदेमंद हैं

हरसिंगार या पारिजात के फायदे   हरसिंगार हरसिंगार का संस्कृत नाम क्या हैं ? हरसिंगार को संस्कृत में पारिजात ,प्रजापत ,हारश्रृंगार ,नल कुंकुम और रागपुष्पी नामों से जाना जाता हैं । हरसिंगार का देशी नाम क्या हैं ? हरसिंगार को देशी भाषा में सियारी,बिनारी, सिंगार और पारिजात के नाम से जाना जाता हैं । हरसिंगार का लेटिन नाम क्या हैं ? हरसिंगार का लेटिन नाम निकटेथिस आरबेस्ट्रिटस   Nyctanthes arbortristis हैं। हरसिंगार को इंग्लिश में क्या कहतें हैं ? हरसिंगार को इंग्लिश में coral jasmine कहतें हैं।     हरसिंगार का परिचय ::: हरसिंगार के वृक्ष की लम्बाई 5 से लेकर 12 फीट तक होती हैं । इसमें सफेद रंग के फूल आतें हैं जिनकी खुशबू  बहुत आनंदमय होती हैं । हरसिंगार के फूलों की डंडिया केसरिया रंग की होती हैं।  हरसिंगार के औषधीय उपयोग ::: वातव्याधि में हरसिंगार के फायदे ::: गठिया, जोड़ों के दर्द जैसी वातव्याधि  वाली बीमीरियों में हरसिंगार के पत्तों और ताजें फूलों का क्वाथ  बनाकर पिलानें से रोगी ठीक हो जाता हैं । जीर्ण ज्वर में हरसिंगार क

गिलोय के फायदे । GILOY KE FAYDE

  गिलोय के फायदे GILOY KE FAYDE गिलोय का संस्कृत नाम क्या हैं ? गिलोय का संस्कृत नाम गुडुची,अमृतवल्ली ,सोमवल्ली, और अमृता हैं । गिलोय का हिन्दी नाम क्या हैं ? गिलोय GILOY का हिन्दी नाम 'गिलोय,अमृता, संशमनी और गुडुची हैं । गिलोय गिलोय का लेटिन नाम क्या हैं ? गिलोय का लेटिन नाम Tinospra cordipoolia (टिनोस्पोरा  कोर्ड़िफोलिया ) गिलोय की पहचान कैसें करें ? गिलोय सम्पूर्ण भारत वर्ष में पाई जानें वाली आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधी हैं । Ayurveda ki suprasiddh oshdhi hai यह बेल रूप में पाई जाती हैं, और दूसरें वृक्षों के सहारे चढ़कर पोषण प्राप्त करती हैं । गिलोय के पत्तें दिल के (Heart shape) आकार के होतें हैं।  गिलोय का तना अंगूठे जीतना मोटा और प्रारंभिक   अवस्था में हरा जबकि सूखनें पर धूसर हो जाता हैं । गिलोय के फूल छोटे आकार के और हल्का पीलापन लियें गुच्छों में लगतें हैं । गिलोय के फल पकनें पर लाल रंग के होतें हैं यह भी गुच्छों में पाये जातें हैं । गिलोय में पाए जाने वाले पौषक तत्व 1.लोह तत्व : 5.87 मिलीग्राम 2.प्रोटीन : 2.30 मिलीग्राम 3.विटाम

एंकेलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस Ankylosing Spondylitis

    *एंकेलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस*, जिसे कभी-कभी "स्पॉन्डिलोअर्थराइटिस" कहा जाता है, गठिया का एक रूप है जो आम तौर पर रीढ़ की हड्डी में होता है, हालांकि यह अन्य जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है। वास्तव में, "स्पॉन्डिलाइटिस" शब्द संबंधित बीमारियों के समूह से जुड़ा हुआ है जिनकी प्रगति और लक्षण तो समान हैं, लेकिन ये बीमारियां शरीर के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। यह कशेरुक (वर्टिब्रे: कई कशेरुक मिल कर रीढ़ की हड्डी बनाती हैं) की गंभीर सूजन का कारण बनती है जो अंततः गंभीर पीड़ा और अक्षमता का कारण बनती है। कई गंभीर मामलों में, सूजन के कारण रीढ़ की हड्डी पर एक नई हड्डी बन सकती है (बोन स्पर)। इससे शारीरिक विकृति भी हो सकती है। इसमें, पीठ में कशेरुक एक साथ फ्यूज हो जाते हैं जिससे कूबड़ होता है और लचीलेपन में कमी आती है। कुछ मामलों में, इससे पसलियां भी प्रभावित होती हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। स्पॉन्डिलाइटिस महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। 🔹 *Ankylosing Spondylitis के लक्षण ▪सुबह उठते ही कमर में अकड़न खराब मुद्रा होना। ▪

धनिया के फायदे । DHANIYA KE FAYDE

धनिया के फायदे।Dhaniya ke fayde #१.धनिया का संस्कृत नाम क्या हैं ? धनिये को संस्कृत में धन्याक,धनिक, धन्य,कुस्तुम्बरू,तथा ध्यगन्धा नामों से जानतें हैं।   #२.धनिया का लेटिन नाम क्या हैं ? coriandrum sativum ३.धनिया का अँग्रेजी नाम क्या हैं ? Coriander  ४.धनिया की प्रकृति  आयुर्वेद मतानुसार धनिया स्निग्ध,कसैला,उष्णवीर्य,जठराग्नि को बढ़ानें वाला और त्रिदोष नाशक होता हैं।  धनिया विटामीन‌ ए, विटामीन C,विटामीन K,फोलेट पोटेशियम, मैंगनीज और बीटा केरोटिन का बहुत उत्तम स्रोत हैं । धनिया धनिया के बारें संस्कृत  में श्लोक है - धान्यकंचाजगन्धासुमुखाश्वेतिरोचना: ।सुगन्धानातिकटुकादोषानुत्क्लेशयन्तितु  ।। अर्थात धनिया सुगन्धित और त्रिदोष को उखाड़ने वाला हैं। ५.आँखों के रोग में धनिया के  फायदे Dhaniya KE fayde ::: आँखों में जलन होनें और आँखें दर्द करनें पर साबुत धनिया के बीजों को कूट ले और इन्हें पानी में उबालकर कपड़ें से छान लें ।इस पानी से आँखों को धोयें इस प्रकार  आँखों को धोनें से उपरोक्त समस्या में बहुत आराम मिलता हैं । धनिया में विटामीन A प्रचुरता में म

11 वी शताब्दी से सन 2020 तक भारत पर शासन करनें वालें व्यक्तियों के नाम

  11 वी शताब्दी से सन 2020 तक भारत पर शासन करनें वालें व्यक्तियों के नाम  :::  Narendra modi *गौरी शासन* 1.1193 मोहम्मद गौरी 2.1206 कुतुबुद्दीन ऐबक 3.1210 आराम शाह 4. 1211 अलतत्मिश 5.1236 रुकनुद्दीन फीरोज शाह 6. 1236 रज़िया सुल्तान 7 1240 मुईजुद्दीन बहराम शाह 8.1242 अलाउद्दीन मसूद शाह 9.1246 नासिरुद्दीन मोहम्मद 10.1266 ग़्यासुद्दीन बल्बन 11.1286 रंगखुसरु 12.1287 मजदुद्दीन 13..1290 शम्सुद्दीन  गौरी शासन समाप्त  (शासन काल 97 वर्ष लगभग) *" ख़िलजी शासन 1.1290 जलालुद्दीन फीरोज शाह ख़िलजी 2.1292 अलाउद्दीन ख़िलजी 3 . 1316 शाहबुद्दीन उमर शाह 4.1316 क़ुतुबुद्दीन मुबारक शाह 5.1320 नासिरुद्दीन खुसरु शाह (ख़िलजी शासन समाप्त) ( शासन काल 30 वर्ष लगभग) *तुगलक़ शासन 1.1320 ग़्यासुद्दीन तुगलक़ 2.1325 मोहम्मद पुत्र तुगलक़ 3.1351 फीरोज शाह तुगलक़ 4.1388 ग़्यासुद्दीन तुगलक़ ( द्धित्तीय) 5.1389 अबु बकर  शाह 6. 1389 मोहम्मद तुगलक़ (तृतीय) 7.1394 अलेक्जेंडर 8.1394 नासिरुद्दीन शाह 9.1395 नुसरत शाह 10.1399 नासिरुद्दीन मोहम्मद  (व्

नीम के औषधीय उपयोग

नीम के औषधीय उपयोग  नीम सम्पूर्ण भारत में पाया जानें वाला महत्वपूर्ण औषधीय उपयोग वाला वृक्ष हैं ।यह जनसमाज के काम आनें वाली सबसे महत्वपूर्ण घरेलू दवा हैं ।नीम का औसत जीवन काल डेढ़ सौ से 200 वर्ष तक का होता है और औसत ऊंचाई 15 से 20 मीटर तक की होती है।प्राचीन आयुर्वेद शास्त्र में नीम का प्रयोग लगभग 5000 वर्ष पूर्व से ही हो रहा है। नीम नीम का संस्कृत नाम क्या हैं Neem ka Sanskrit Nam kya hai ::: नीम का  संस्कृत  नाम निम्ब,नियमन,अरिष्ट,हिंगु,पीतसार और रविप्रिय  हैं ।   नीम का अँग्रेजी नाम Neem ka angreji Nam ::: नीम का अंग्रेजी या इंग्लिश नान Indian lilac हैं । नीम का लेटिन नाम क्या हैं  Neem ka Latin nam kya hai :::  नीम का लेटिन नाम   Azadirachta Indica हैं । आयुर्वेदमतानुसार नीम की प्रकृति कैसी हैं ? आयुर्वेदमतानुसार नीम हल्का ,शीतल, और कटु(कड़वा) होता हैं । नीम के औषधीय उपयोग ::: १.मलेरिया ज्वर :: ३० ग्राम नीम की छाल कूटकर २५० मिलीलीटर  पानी में तब तक उबालें जब तक पानी १०० मिलीलीटर के करीब रह जायें ।इस प्रकार उबले काढ़े को दिन में 3 बार पीलानें

प्याज (ONION) खानें के फायदे। pyaj khane ke fayde

प्याज खाने के फायदे pyaj khane ke fayde  प्याज    प्याज का संस्कृत नाम ::: प्याज का संस्कृत नाम pyaj ka sanskrit name पलांडु ,भवनेष्ट,मुखदुषक,कृमिघ्न प्याज का   हिन्दी नाम ::: प्याज को हिंदी में प्याज,कांदा,लाल प्याज आदि नामों से जानतें हैं । प्याज का लेटिन नाम pyaj ka Latin Nam ::: Allium cepa प्याज का लेटिन नाम "एलियन सीपा" हैं। प्याज खाने के फायदे pyaj Khane ke fayde  ::: आयुर्वेदानुसार प्याज चरपरी,बलकारक,पित्तनाशक,भारी,रोचक,स्निग्ध और वमन के दोष को शांत करने वाला हैं । प्याज  स्वादिष्ट ,ठंडा,कफ कारक, वातनाशक,बलकारक,वीर्यवर्धक और भारी रहता हैं । लाल प्याज  ठंड़़ा,पित्तशामक, और अत्यंत निद्राकारक, होता हैं । प्याज के बीज pyaj ke bij प्रमेह ( मधुमेह )दाँतों के कीड़े,श्वास को दूर करने वाले होतें हैं । पूर्णत: पका हुआ प्याज आँतों की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर खुलकर दस्त लाता हैं । और पाचनशक्ति मज़बूत करता हैं । प्याज का सलाद pyaj ka salad khane se  खानें से कब्ज,अर्श,भगंदर की समस्या जड़ से समाप्त हो जाती हैं । प्याज का

माँ अन्नपूर्णा जयन्ति कब मनाई जाती हैं जानोगे तो माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलेगा

 माँ अन्नपूर्णा  माँअन्नपूर्णा जन्मोत्सव विशेष 〰〰🌼〰〰🌼〰〰 माँ अन्नपूर्णा जन्मोत्सव मागर्शीष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है।  जब पृथ्वीं पर लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं था तो मां पार्वती ने अन्नापूर्णा का रूप रखकर पृथ्वीं को इस संकट से निकाला था। अन्नपूर्णा जयन्ती का दिन मनुष्य के जीवन में अन्न के महत्व को दर्शाता है।  इस दिन रसोई की सफाई और अन्न का सदुपयोग बहुत जरूरी होता है। माना जाता है कि इस रसोई की सफाई करने और अन्न का सदुपयोग करने से मनुष्य के जीवन में कभी भी धन धान्य की कमीं नही होती। इसलिए अन्न का सदुपयोग अवश्य करना चाहिए। आज गुरुवार 12-12-19को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के उपलक्ष में मां अन्नपूर्णा के पूजन व अनुष्ठान का विशेष महत्व है। ब्रह्मवैव‌र्त्तपुराण के काशी रहस्य अनुसार भवानी अर्थात पार्वती ही अन्नपूर्णा हैं। मार्गशीर्ष माह में इनका व्रत सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाला है व इस का वैज्ञानिक महत्व भी है। इस समय कोशिकाओं के जेनेटिक कण रोग निरोधक होकर चिरायु व युवा बनाने में प्रयत्नशील होते हैं। इन दिनों किया गया षटरस भोजन

निर्गुण्डी (INDIAN PRIVETE ) परिचय निर्गुण्डी की पहचान गुण दोष और प्रकृति

 निर्गुण्डी परिचय :: निर्गुण्डी का संस्कृत नाम ::  संस्कृत में निर्गुण्डी को नीलपुष्पा, इन्द्राणी  नील निर्गुण्डी,शैफाली,सुरसा सुवाध और श्वेत सुरसा के नाम से जाना जाता हैं । आयुर्वेद ग्रंथों में निर्गुण्डी का वर्णन करते हुए लिखा है निर्गुडति शरीरं रक्षति रोगेट्टया अर्थात निर्गुण्डी ऐसी निरापद औषधि है जो रोगों से शरीर की रक्षा करती हैं।    निर्गुण्डी के फूल    हिन्दी नाम :: इसका हिन्दी नाम "निर्गुण्डी" हैं।  निर्गुण्डी का  लेटिन नाम :: Vitex Negundo (विटेक्स नेगुण्डों )  निर्गुण्डी की पहचान कैसे करें  ::       निर्गुण्डी के वृक्ष ८ से लेकर १० फीट तक ऊँचें होते हैं। इसमें से बहुत सी पतली - पतली शाखाएँ निकली हुई होती हैं। ये शाखाएँ फीकी,सफेद और भस्मी रंग की होती हैं। इसके पत्तें जुड़वाँ और तीन से पाँच पत्तों के समूह में लगे रहते हैं। ये पत्तें सिरों की ओर थोड़े - थोडें रोंऐदार होतें हैं।  इसके पौधे में से एक तरह की तीव्र और अरूचिकारक गंध आती हैं। निर्गुण्डी के फूल  एक सीधी रेखा में लगते हैं,इनका रंग नीला सफेद होता हैं। निर्गुण्डी क

स्वस्थ्य रहने के ऐसे तरीके जिन्हें बहुत कम लोग जानतें हैं

स्वस्थ्य रहने के तरीके :::  Healthy lifestyle  Healthy lifestyle *बन्दर कभी बीमार नहीं होता।।* किसी भी चिड़िया को डायबिटीज नहीं होती।  किसी भी बन्दर को हार्ट अटैक नहीं आता । कोई भी जानवर न तो आयोडीन नमक खाता है और न ब्रश करता है, फिर भी किसी को थायराइड नहीं होता और न दांत खराब  होता है । बन्दर शरीर संरचना में मनुष्य के सबसे नजदीक है, बस बंदर और आप में यही फर्क है कि बंदर के पूँछ है आप के नहीं है, बाकी सब कुछ समान है।  तो फिर बंदर को कभी भी हार्ट अटैक, डायबिटीज , high BP , क्यों नहीं होता है? एक पुरानी कहावत है बंदर कभी बीमार नहीं होता और यदि बीमार होगा तो जिंदा नहीं बचेगा मर जाएगा!  बंदर बीमार क्यों नहीं होता? हमारे एक मित्र  बताते हैं कि एक बहुत बड़े , प्रोफेसर हैं, मेडिकल कॉलेज में काम करते हैं । उन्होंने एक बड़ा गहरा रिसर्च किया कि बंदर को बीमार बनाओ। तो उन्होने तरह - तरह के virus और वैक्टीरिया बंदर के शरीर में डालना शुरू किया, कभी इंजेक्शन के माध्यम से कभी किसी और माध्यम से । वो कहते है, मैं 15 साल असफल रहा , लेकिन बंदर को कुछ नहीं हुआ । *मित्र  ने प्रोफेसर से

आज का प्रेरक प्रसंग ::-पति-पत्नी का खूबसूरत संवाद...✍👌👍*

सामाजिक,मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उन्नत  करते लेख Healthy lifestyle  आज का प्रेरक प्रसंग  *पति-पत्नी का खूबसूरत संवाद...✍👌👍*  पति - पत्नि  *मैंने एक दिन अपनी पत्नी से पूछा- क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि मैं बार-बार तुमको कुछ भी बोल देता हूँ, और डाँटता भी रहता हूँ, फिर भी तुम पति भक्ति में ही लगी रहती हो, जबकि मैं कभी पत्नी भक्त बनने का प्रयास नहीं करता..??* *मैं भारतीय संस्कृति के तहत वेद का विद्यार्थी रहा हूँ और मेरी पत्नी विज्ञान की, परन्तु उसकी आध्यात्मिक शक्तियाँ मुझसे कई गुना ज्यादा हैं, क्योकि मैं केवल पढता हूँ और वो जीवन में उसका अक्षरतः पालन भी करती है।* *मेरे प्रश्न पर जरा वह हँसी और गिलास में पानी देते हुए बोली- यह बताइए कि एक पुत्र यदि माता की भक्ति करता है तो उसे मातृ भक्त कहा जाता है, परन्तु माता यदि पुत्र की कितनी भी सेवा करे उसे पुत्र भक्त तो नहीं कहा जा सकता ना!!!* *मैं सोच रहा था, आज पुनः ये मुझे निरुत्तर करेगी। मैंने फिर प्रश्न किया कि ये बताओ, जब जीवन का प्रारम्भ हुआ तो पुरुष और स्त्री समान थे, फिर पुरुष बड़ा कैसे हो गया, जबकि स्त्री तो