सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर #1 से नम्बर #28 तक Homeopathic bio combination in hindi

 1.बायो काम्बिनेशन नम्बर 1 एनिमिया के लिये


होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर 1 का उपयोग रक्ताल्पता या एनिमिया को दूर करनें के लियें किया जाता हैं । रक्ताल्पता या एनिमिया शरीर की एक ऐसी अवस्था हैं जिसमें रक्त में हिमोग्लोबिन की सघनता कम हो जाती हैं । हिमोग्लोबिन की कमी होनें से रक्त में आक्सीजन कम परिवहन हो पाता हैं ।


होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर 1 का उपयोग रक्ताल्पता या एनिमिया को दूर करनें के लियें किया जाता हैं । रक्ताल्पता या एनिमिया शरीर की एक ऐसी अवस्था हैं जिसमें रक्त में हिमोग्लोबिन की सघनता कम हो जाती हैं । हिमोग्लोबिन की कमी होनें से रक्त में आक्सीजन कम परिवहन हो पाता हैं । 


W.H.O.के अनुसार यदि पुरूष में 13 gm/100 ML ,और स्त्री में 12 gm/100ML से कम हिमोग्लोबिन रक्त में हैं तो इसका मतलब हैं कि व्यक्ति एनिमिक या रक्ताल्पता से ग्रसित हैं ।



एनिमिया के लक्षण :::



1.शरीर में थकान


2.काम करतें समय साँस लेनें में परेशानी होना



3.चक्कर  आना 



4.सिरदर्द



5. हाथों की हथेली और चेहरा पीला होना



6.ह्रदय की असामान्य धड़कन



7.ankle पर सूजन आना



8. अधिक उम्र के लोगों में ह्रदय शूल होना



9.किसी चोंट या बीमारी के कारण शरीर से अधिक रक्त निकलना



बायोकाम्बिनेशन नम्बर  1 के मुख्य घटक




० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० फेंरम फास्फोरिकम 3x


० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x



० काली फास्फोरिकम 3x







2.बायोकामबिनेशन नम्बर 2 अस्थमा  के लिये



बायोकाम्बिनेशन नम्बर 2 अस्थमा या दमा के लिये प्रयोग की जाती हैं । अस्थमा या दमा एक ऐसी अवस्था हैं जिसमें फेफड़ें की श्वास नलिकाओं में सूजन आ जाती हैं । जिससे साँस फूलता हैं।



अस्थमा के अनेक कारण होतें हैं जैसें आनुवाशिंकता,एलर्जी,संक्रमण,आदि






बायोकाम्बिनेशन नम्बर  2 के घटक 



० काली फास्फोरिकम 3x



० मैग्निशियम फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x



० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x





3 .बायोकाम्बिनेशन नम्बर #3 पेटदर्द के लिये



बायोकाम्बिनेशन नम्बर 3 पेटदर्द के प्रयुक्त होम्योपेथिक दवा हैं । यह औषधि हर प्रकार के पेटदर्द के लिये उपयोगी हैं । 






बायोकाम्बिनेशन नम्बर 3 के घटक




० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x




० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x





4.बायोकाम्बिनेशन नम्बर  #4 कब्ज के लिये




यह औषधि पेट में बने रहनें वाले कब्ज के लिये प्रयुक्त की जाती हैं । जिसके प्रमुख लक्षण हैं 



० मल का कठोर रहना


० गैस का पेट में ही बने रहना


० हल्का सा पेटदर्द और मल त्यागतें समय पेट में चुभनें सा अहसास होना ।





बायोकाम्बिनेशन नम्बर 4 के घटक द्रव्य



० केल्केरिया फ्लोरिका 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x



० साइलिशिया 6x






5.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 5 सर्दी जुकाम के लिये




सर्दी जुकाम एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण द्धारा फैलता हैं । इस वायरल इन्फेक्शन से नाक से पानी बहना,छींके आना ,खाँसी होना और हल्की ठंड लग कर बुखार आना जैसी समस्या होती हैं ।



सर्दी जुकाम की समस्या ऋतु परिवर्तन के समय अधिक होती हैं ।




बायोकाम्बिनेशन नम्बर 5 के घटक द्रव्य 




० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x




० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x


० काली सल्फ्यूरिकम 3x






6.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 6 खाँसी जुकाम 




यह काम्बिनेशन खाँसी के लिये प्रयोग किया जाता हैं सूखी खाँसी,गीली खाँसी जिसके साथ नाक भी बह रही हो में यह दवा बहुत काम करती हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 6 के घटक द्रव्य 



० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x



० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x


० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x






7.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 7 मधुमेह के लिये



बायोकाम्बिनेशन नम्बर 7 मधुमेह के लियें हैं । मधुमेह के कारण पेनक्रियाज से उत्सर्जित होनें वाला इंसुलिन हार्मोंन नही बनता हैं । यह इंसुलिन रक्त में शर्करा की मात्रा की मात्रा नियत्रिंत करता हैं । जब इंसुलिन के नहीं बननें से रक्त में शर्करा की मात्रा नियंत्रित नही होती हैं । तो मधुमेह हो जाता हैं ।





बायोकाम्बिनेशन नम्बर 7 के मुख्य घटक 



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x


० फेरम फास्फोरिकम 3x


० काली फास्फोरिकम 3x


० नेट्रम फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x




8.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 8 डायरिया के लिये




यह औषधि तीव्र और लम्बे समय से जारी पतले दस्त और उल्टी के लियें बहुत गुणकारी हैं ।





बायोकाम्बिनेशन 8 के मुख्य घटक



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x


० फेरम फास्फोरिकम 3x


० काली फास्फोरिकम 3x


० काली सल्फ्यूरिकम 3x


० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x




9.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 9 खूनी दस्त के लिये



दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से या आँतों में छालें हो जानें के कारण बार - बार खूनी दस्त होतें हैं । बायोकाम्बिनेशन 9 इस प्रकार के तीव्र और पुरानें दस्त में बहुत प्रभावकारी हैं।





बायोकाम्बिनेशन  नम्बर 9 के घटक 



० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x


० काली फास्फोरिकम 3x


० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x





10.बायोकाम्बिनेशन  नम्बर 10 बढे हुयें टांसिल के लिये



गले में दर्दयुक्त सूजन जिसमें निगलनें में परेशानी होती हैं । ऐसी अवस्था में बायोकाम्बिनेशन 10 दी जाती हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 10 के घटक 



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x


० काली म्यूरिटिकम 3x





11.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 11 बुखार के लियें



बायोकाम्बिनेशन नम्बर 11 बुखार की औषधि हैं । ऐसा बुखार जो मौसम में अचानक परिवर्तन से आ रहा हो । आपरेशन के बाद बुखार आ रहा हो । या अचानक से चढ रहा हो और उतर रहा हो । 





बायोकाम्बिनेशन 11 घटक द्रव्य 




० फेरम फास्फोरिकम 3x


० काली म्यूरिटिकम 3x


० काली सल्फ्यूरिकम 3x


० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x


० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x





12.बायोकाम्बिनेशन नंबर 12 सिरदर्द के लिये




तनाव ,अपच,बुखार,एनिमिया,अधिक शराब पीनें  (हेंगओवर) ,उच्च रक्तचाप ,की वजह से होनें वाले सिरदर्द की यह सर्वमान्य औषधि हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 12 के घटक 





० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली फास्फोरिकम 3x



० मेग्नेशिया फास्फोरिका 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x





13.बायोकाम्बिनेशन नम्बर 13 श्वेत प्रदर के लिये



श्वेत प्रदर जिसमें योनि से पतला,सफेद और मटमेला रंग का पदार्थ निकलता हैं । यह बीमारी बेक्टेरिया की वजह से होती हैं । बायोकाम्बिनेशन नम्बर 13 इसकी सर्वमान्य औषधि हैं ।




बायोकाम्बिनेशन नंबर 13 के घटक 



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० काली फास्फोरिकम 3x



० काली सल्फ्यूरिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x





14.बायोकाम्बिनेशन 14 मीजल्स के लियें





मीजल्स एक वायरस जनित बीमारी हैं जो वायरस मोरबीली से होता हैं । इस बीमारी में सर्दी खाँसी बुखार के साथ नाक और आँख से पानी निकलता हैं। कुछ दिन बाद शरीर पर खुजली चालू हो जाती हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 14 के घटक



०फेरम फास्फोरिकम 3x


० काली म्यूरीटिकम 3x


० काली सल्फ्यूरिकम 3x




15.बायोकाम्बिनेशन 15 मासिकधर्म की समस्या के लिये 




यह औषधि दर्दयुक्त ,अनियमित,बदबूदार मासिक धर्म के लिये है। किशोरी स्त्री में माहवारी के समय होनें वाला दर्द इस औषधि के सेवन से समाप्त हो जाता हैं ।





बायोकाम्बिनेषन 15 के घटक 



० केल्केरिया फास्फोरिका  3x


० फेरम फास्फोरिका 3x


० काली फास्फोरिकम 3x


० काली सल्फ्यूरिकम 3x


० मेग्नेशियम फास्फोरिकम 3x








16.बायोकाम्बिनेशन नंबर 16 स्नायु दौर्बल्यता के लिये




स्नायु दौर्बल्यता के कारण  कमज़ोरी,वजन कम होना,एकाग्रता की कमी, बेहोशी आना,जैसी समस्याओं में यह औषधि काम में ली जाती हैं ।





बायोकाम्बिनेशन 16 के घटक




० कैल्केरिया फास्फोरिका 3x




० फेरम फास्फोरिकम 3x




० काली फास्फोरिकम 3x




० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x




० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x




17.बायोकाम्बिनेशन नंबर 17 अर्श(piles)के लिये 





यह औषधि सभी प्रकार के आंतरिक और बाहरी अर्श के लिये उपयोगी हैं। 






बायोकाम्बिनेशन 17 के घटक 





० कैल्केरिया फ्लोरिका 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x




० काली म्यूरिटिकम 3x




० काली फास्फोरिकम 3x





18.बायोकाम्बिनेशन नंबर 18 पायरिया के लिये





मसूड़ों में संक्रमण की वजह से पीप या खून निकलता हैं और मुहँ से बदबू आती हैं । ऐसी अवस्था में बायोकाम्बिनेशन 18 दी जाती हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 18 के घटक




० केल्केरिया फ्लोरिका 3x



० केल्केरिया सल्फ्यूरिका 3x




० साइलिशिया 6x





19.बायोकाम्बिनेशन नंबर 19 गठिया के लिये




सभी प्रकार के गठिया रोगों में उपयोगी हैं ।





बायोकाम्बिनेशन 19 के घटक




० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली सल्फ्यूरिकम 3x



० मेग्नेशियम फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x





20.बायोकाम्बिनेशन नंबर 20 त्वचा रोगों के लिये



त्वचा पर निकलनें वाले चकते,खुजली,दाद,अन्य संक्रामक त्वचा रोगों,मुहाँसे आदि पर प्रभावकारी हैं ।



बायोकाम्बिनेशन 20 के घटक





० केल्केरिया फ्लोरिका 6x



० केल्केरिया सल्फ्यूरिकम 6x



० काली सल्फ्यूरिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x



० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x





21.बायोकाम्बिनेशन नंबर 21 बच्चों के दाँतों की समस्याओं के लिये 



बढ़ते हुये बच्चों की दाँतों से संबधित समस्याओं के लिये यह औषधि बहुत फायदेमंद हैं । इसमें दाँतों के विकास के लिये सभी आवश्यक खनिज विधमान होतें हैं ।




बायोकाम्बिनेशन नबंर 21 के घटक



० केल्केरिया  फास्फोरिका 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x



22.बायोकाम्बिनेशन नंबर 22 कंठमाला के लिये




सिर,मुहँ,गले और शरीर के अन्य भागों पर ऐसी गाँठे जो दर्दरहित हो के लिये यह औषधि काम आती हैं ।





बायोकाम्बिनेशन नंबर 22 के घटक





० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x



० साइलिशिया 6x





23.बायोकाम्बिनेशन  नंबर 23 दाँतदर्द के लिये




बढ़ती उम्र के कारण दाँतों का क्षय,ठंडा गरम महसूस होना,दाँतों में संक्रमण होना आदि समस्याओं के लिये यह औषधि बहुत काम की हैं ।





बायोकाम्बिनेशन 23 के घटक



० फेरम फास्फोरिकम 3x



० केल्केरिया फ्लोरिका 3x



० मैग्निशियम फास्फोरिकम 3x







24.बायोकाम्बिनेशन 24 नस और दिमाग के लिये




यह एक जनरल टानिक दवाई हैं जो नसों और दिमागी कमज़ोरी के लिये उपयोग की जाती हैं । इसमें नसों और दिमाग के लियें ज़रूरी मिनरल्स होतें हैं ।




बायोकाम्बिनेशन नंबर 24 के घटक




० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० फेरम फासफोरिकम 3x



० काली फास्फोरिकम 3x




० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम फास्फोरिकम 3x






25.बायोकाम्बिनेशन नंबर 25 एसिडिटी,अपच और अफारा के लिये






यह औषधि पेट की कार्यपरणाली को सुधारकर एसिडिटी,अपच और अफारा जैसी समस्याओं को दूर करती हैं।



बायोकाम्बिनेशन नंबर 25 के घटक 




० नेट्रम फास्फोरिकम 3x


० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x


० साइलिशिया 12x




26.बायोकाम्बिनेशन नंबर 26 सुगम प्रसव के लिये




यदि सम्पूर्ण गर्भावस्था के दौरान यह औषधि लेते रहें तो प्रसव सुगमतापूर्वक और दर्दरहित होता हैं । महिला और बच्चें का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता हैं । इस औषधी में मौजूद तत्व गर्भपात की संभावना समाप्त कर देते हैं ।




बायोकाम्बिनेशन 26 के घटक 




० केल्केरिया फ्लोरिका 3x




० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० काली फास्फोरिकम 3x



० मैग्नेशिया फास्फोरिका 3x



० Homeopathy emergency medicine in hindi



27.बायोकाम्बिनेशन नंबर 27 कमजोरी दूर करनें के लिये 



यह शक्तिवर्धक औषधि हैं जो शरीर के अँगों की कमज़ोरी दूर कर इनकी कार्यप्रणाली सुधारती हैं ।





बायोकाम्बिनेशन 27 के घटक




० केल्केरिया फास्फोरिका 6x



० काली फास्फोरिकम 3x



० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x






28.बायोकाम्बिनेशन नंबर 28 सामान्य शक्तिवर्धक टानिक




यह एक जनरल health tonic हैं जो बीमारी,आपरेशन के बाद आई कमज़ोरी को दूर करती हैं । यह औषधि कमजोर और बुजुर्ग व्यक्तियों के लिये बहुत फायदेमंद हैं।




बायोकाम्बिनेशन 28 के घटक





० केल्केरिया फ्लोरिका 3x



० केल्केरिया फास्फोरिका 3x



० केल्केरिया सल्फ्यूरिका 3x



० फेरम फास्फोरिकम 3x



० काली म्यूरिटिकम 3x



० काली फास्फोरिकम 3x



० काली सल्फ्यूरिकम 3x



० मैग्नेशियम फास्फोरिकम 3x



 ० नेट्रम म्यूरिटिकम 3x




० नेट्रम फास्फोरिकम 3x




० नेट्रम सल्फ्यूरिकम 3x



० साइलिशिया 3x





० दशमूल क्वाथ के फायदे





० काला धतूरा के फायदे और नुकसान


टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. ० गर्भावस्था के प्रथम तीन महिनें मे किए जानें वाले योगासन # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// ० आँखों का सूखापन क्या बीमारी हैं ? जानियें इस लिंक पर ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? ० चुम्बक चिकित्सा के बारें में जानें ० बच्चों की परवरिश कैसें करें healthy parating

SANJIVANI VATI ,CHANDRAPRABHA VATI,SHANKH VATI

१.संजीवनी वटी::-   संजीवनी वटी का वर्णन रामायण में भी मिलता हैं. जब मेघनाथ के साथ युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हुए तो  संजीवनी  बूटी ने लक्ष्मण को पुन: जीवन दिया था शांग्रधर संहिता में वर्णन हैं कि  "वटी संजीवनी नाम्ना संजीवयति मानवम" अर्थात संजीवनी वटी नाना प्रकार के रोगों में मनुष्य का संजीवन करती हैं.आधुनिक शब्दों में यह वटी हमारें बिगड़े मेट़ाबालिज्म को सुदृढ़ करती हैं.तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity)   बढ़ाती हैं. घटक द्रव्य:: विडंग,शुंठी,पीप्पली,हरीतकी,विभीतकी, आमलकी ,वच्च, गिलोय ,शुद्ध भल्लातक,शुद्ध वत्सना उपयोग::- सन्निपातज ज्वर,सर्पदंश,गठिया,श्वास, कास,उच्च कोलेस्ट्रोल, अर्श,मूर्छा,पीलिया,मधुमेह,स्त्री रोग ,भोजन में अरूचि. मात्रा::- वैघकीय परामर्श से Svyas845@gmail.com २.चन्द्रप्रभा वटी::- चन्द्रप्रभेति विख्याता सर्वरोगप्रणाशिनी उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट हैं,कि चन्द्रप्रभा वटी समस्त रोगों का शमन करती हैं. घट़क द्रव्य::- कपूर,वच,भू-निम्बू, गिलोय ,देवदारू,हल्दी,अतिविष,दारूहल्दी,

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरू भी उसी श्रेणी की आयुर्वेद औषधी हैं । जो सामान्य मिट्टी से कही अधिक इसके विशिष्ट गुणों के लियें जानी जाती हैं । गेरू लाल रंग की की मिट्टी होती हैं जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्र में मिलती हैं । इसे गेरू या सेनागेरू भी कहतें हैं । गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को रोकनें वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

Ayurvedic medicine list । आयुर्वैदिक औषधि सूची

Ayurvedic medicine list  [आयुर्वैदिक औषधि सूची] #1.नव ज्वर की औषधि और अनुसंशित मात्रा ::: १.त्रिभुवनकिर्ती रस  :::::   १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संजीवनी वटी       :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. ३.गोदन्ती मिश्रण.    :::::     १२५ से २५० मि.ग्रा. #2.विषम ज्वर ::: १.सप्तपर्ण घन वटी  :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. २.सुदर्शन चूर्ण.        :::::     ३ से ६ ग्रा.   # 3 वातश्लैष्मिक ज्वर ::: १.लक्ष्मी विलास रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संशमनी वटी          :::::  ५०० मि.ग्रा से १ ग्रा. # 4 जीर्ण ज्वर :::: १. प्रताप लंकेश्वर रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.महासुदर्शन चूर्ण.     :::::   ३ से ६ ग्राम ३.अमृतारिष्ट              :::::    २० से ३० मि.ली. # 5.सान्निपातिक ज्वर :::: १.नारदीय लक्ष्मी विलास रस. :::::  २५० से ५०० मि.ग्रा. २.भूनिम्बादि क्वाथ.      ::::: १०से २० मि.ली. #6 वातशलैष्मिक ज्वर :::: १.गोजिह्यादि क्वाथ.      ::::: २० से ४० मि.ली. २.सितोपलादि चूर्ण.       ::

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं

#1.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं ?  एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली से अभिप्राय यह हैं,कि मृदा उर्वरता को बढ़ानें अथवा बनाए रखनें के लिये पोषक तत्वों के सभी उपलब्ध स्त्रोंतों से मृदा में पोषक तत्वों का इस प्रकार सामंजस्य रखा जाता हैं,जिससे मृदा की भौतिक,रासायनिक और जैविक गुणवत्ता पर हानिकारक प्रभाव डाले बगैर लगातार उच्च आर्थिक उत्पादन लिया जा सकता हैं.   विभिन्न कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों में किसी भी फसल या फसल प्रणाली से अनूकूलतम उपज और गुणवत्ता तभी हासिल की जा सकती हैं जब समस्त उपलब्ध साधनों से पौध पौषक तत्वों को प्रदान कर उनका वैग्यानिक प्रबंध किया जाए.एकीकृत पौध पोषक तत्व प्रणाली एक परंपरागत पद्धति हैं. ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// यहाँ भी पढ़े 👇👇👇 विटामिन D के बारें में और अधिक जानियें यहाँ प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना ० तम्बाकू से होनें वाले नुकसान ० कृषि वानिकी क्या हैं ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// #2.एकीकृत पोषक त

karma aur bhagya [ कर्म और भाग्य ]

# 1 कर्म और भाग्य   कर्म आगे और भाग्य पिछे रहता हैं अक्सर लोग कर्म और भाग्य के बारें में चर्चा करतें वक्त अपनें - अपनें जीवन में घट़ित घट़नाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालतें हैं,कोई कर्म को श्रेष्ठ मानता हैं,कोई भाग्य को ज़रूरी मानता हैं,तो कोई दोनों के अस्तित्व को आवश्यक मानता हैं.लेकिन क्या जीवन में दोनों का अस्तित्व ज़रूरी हैं ? गीता में श्री कृष्ण अर्जुन को कर्मफल का उपदेश देकर कहतें हैं.     " कर्मण्यें वाधिकारवस्तें मा फलेषु कदाचन " अर्थात मनुष्य सिर्फ कर्म करनें का अधिकारी हैं,फल पर अर्थात परिणाम पर उसका कोई अधिकार नहीं हैं,आगे श्री कृष्ण बतातें हैं,कि यदि मनुष्य कर्म करतें करतें मर  जाता हैं,और इस जन्म में उसे अपनें कर्म का फल प्राप्त नहीं होता तो हमें यह नहीं मानना चाहियें की कर्म व्यर्थ हो गया बल्कि यह कर्म अगले जन्म में भाग्य बनकर लोगों को आश्चर्य में ड़ालता हैं, ]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]][]]]]]][[[[[[[]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]] ● यह भी पढ़े 👇👇👇 ● आत्मविकास के 9 मार्ग ● स्वस्थ सामाजिक जीवन के 3 पीलर

गिलोय के फायदे । GILOY KE FAYDE

  गिलोय के फायदे GILOY KE FAYDE गिलोय का संस्कृत नाम क्या हैं ? गिलोय का संस्कृत नाम गुडुची,अमृतवल्ली ,सोमवल्ली, और अमृता हैं । गिलोय का हिन्दी नाम क्या हैं ? गिलोय GILOY का हिन्दी नाम 'गिलोय,अमृता, संशमनी और गुडुची हैं । गिलोय गिलोय का लेटिन नाम क्या हैं ? गिलोय का लेटिन नाम Tinospra cordipoolia (टिनोस्पोरा  कोर्ड़िफोलिया ) गिलोय की पहचान कैसें करें ? गिलोय सम्पूर्ण भारत वर्ष में पाई जानें वाली आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधी हैं । Ayurveda ki suprasiddh oshdhi hai यह बेल रूप में पाई जाती हैं, और दूसरें वृक्षों के सहारे चढ़कर पोषण प्राप्त करती हैं । गिलोय के पत्तें दिल के (Heart shape) आकार के होतें हैं।  गिलोय का तना अंगूठे जीतना मोटा और प्रारंभिक   अवस्था में हरा जबकि सूखनें पर धूसर हो जाता हैं । गिलोय के फूल छोटे आकार के और हल्का पीलापन लियें गुच्छों में लगतें हैं । गिलोय के फल पकनें पर लाल रंग के होतें हैं यह भी गुच्छों में पाये जातें हैं । गिलोय में पाए जाने वाले पौषक तत्व 1.लोह तत्व : 5.87 मिलीग्राम 2.प्रोटीन : 2.3

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]  म.प्र.भारत का ह्रदय प्रदेश होनें के साथ - साथ नदी,पहाड़,जंगल,पशु - पक्षी,जीव - जंतुओं के मामलें में देश का अग्रणी राज्य हैं.  river map of mp प्रदेश में बहनें वाली सदानीरा नदीयों ने प्रदेश की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर सम्पूर्ण प्रदेश को पोषित और पल्लवित किया हैं.यही कारण हैं कि यह प्रदेश "नदीयों का मायका" उपनाम से प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ प्रदेश में प्रवाहित होती हैं,जिनकी चर्चा यहाँ प्रासंगिक हैं. #१.नर्मदा नर्मदा म.प्र.की जीवनरेखा कही जाती हैं.इस नदी के कि नारें अनेक  सभ्यताओं ने जन्म लिया . #उद्गम  यह नदी प्रदेश के अमरकंटक जिला अनूपपुर स्थित " विंध्याँचल " की पर्वतमालाओं से निकलती हैं. नर्मदा प्रदेश की सबसे लम्बी नदी हैं,इसकी कुल लम्बाई 1312 किमी हैं. म.प्र.में यह नदी 1077 किमी भू भाग पर बहती हैं.बाकि 161 किलोमीटर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बहती हैं. नर्मदा प्रदेश के 15 जिलों से होकर बहती हैं जिनमें शामिल हैं,अनूपपुर,मंड़ला,डिंडोरी,जबलपुर,न

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia