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जुलाई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

DR.ABUL PAKIR JANULLAUDDIN ABDUL KALAM

आयुर्वैद और योग मे गहन आस्था रखने वाले भारत माँ के लाड़ले स्वर्गीय डाँ.ए.पी.जे.कलाम को नम आँखों से नमन.

शारिरीक शक्ति और आयुर्वेद

आजकल की भागती दोड़ती जीवनशैली में व्यक्ति दिन भर काम करते-करते इतना थक जाता हैं, कि उसे अपने निजी सम्बंधों का सुख उठाने की ताकत ही नहीं बचती,फलस्वरूप पारिवारिक जीवन तनावों से घिर जाता हैं.इस पृकार की परिस्थितियों में व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता हैं . आयुर्वैद ने हजारों वषों से व्यक्ति के जीवन को सदैंव मुश्किलों से उबारा हैं,और आज भी इस दिशा में पृयत्नशील हैं. आईयें जानते हैं उपचार-:: १. अश्वगंधा चूर्ण ,बबूल का गोदं,बबूल की फली,केसर,मुलेठी,धायफूल,कोंच बीज को विशेष अनुपात मे मिलाकर सेवन करनें से से केसा भी नामर्द हो चार माह मे मर्द बन जाता हैं. २.अश्वगंधा तेल,महामाष तेल को मिलाकर सुबह शाम लिंग पर मालिश करने से व्यक्ति पारिवारिक जीवन का पूर्ण आनंद लेने के योग्य हो जाता हैं . नोट-:वैघकीय परामर्श आवश्यक हैं. शिलाजित के बारें में जानियें Svyas845@gmail.com

MAHANARAYAN, AND MAHAMASH OIL,

Dear Friend's Today we give information about  oils. Mahanarayan oil::- This oil is very effective in rheumatoid arthritis,paralysis, gout,lock jaw and trismus,tetanus ,deepnessdeepness and osteoarthritis It is very effective in sterility male and women. It acts as a rejuventor . This oil can be used both internally and externally. Note-:doctor advice is essential. Svyas845@gmail.com. kasisadi oil,somraj oil,sadbindu oil Mahamash oil::- Contents::- Shodhit til Tel,Ashwgandha,kachur,Devdaru,bala mool,Rasna,Prasarni,kooth,phalsa,Bharangi,vidarikand,Punarnava,satvari,vijora nimbu,safed jeera,sahajeera,Hong,sound,Gokhuru,piplimool,chitrakmool,sendha namak,jevaneeyagan,urad,Bala mool ,Ashtwarg and other. Action::- Mahamash oil is one of the main oils used in panchkarma therapy in india. This compound herbal oil has many herbal. Therapeutic uses::- Joint pain,inflammation, paralysis, stiffness, poor circulation of blood in joints and muscle, arth

MENTAL PROBLEM AND AYURVEDA

मानसिक तनाव ऐसी अवस्था हैं, जो हर एक व्यक्ति के जीवन को कभी न कभी पृभावित करती हैं. आधुनिक जीवनशैली ने तो तनाव को उस चरम अवस्था तक पहुँचा दिया है कि विश्व अाज नयी-नयी बीमारीं के आगोश मे जा रहा हैं,आज की आधुनिक चिकित्सा पद्ति के सामनें  भी मानसिक रोगों का उपचार एक चुनोतीं बनकर उभरा हैं. क्योंकि आधुनिक चिकित्सा पद्ति  के सामने मस्तिष्क की कार्यपृणाली आज तक अनसुलझी हुई हैं.भारत को इस मामले मे अपने आप को भाग्यशाली मानना चाहिये कि यहाँ हजारों वर्षों पूर्व हमारें रिषि मुनियों ने मानसिक रोगो का न केवल सटीक वर्णन किया बल्कि सटीक उपचार भी दिया इस  बात के साझ्य अनेक पृाचीन चिकित्सा गृंथ हैं. आइये जानतें हैं इसका आयुर्वैद उपचार:- १.बृाम्ही वटी पृभाकर ,आवँला चूर्ण, बादाम,शंख भस्म,जटामासी ,सर्पगंधा, को मिलाकर सेवन करवाते रहने से केसा भी मानसिक विकार हो समाप्त हो जाता हैं. २.चाय की हरी पत्तियाँ, तुलसी पत्र,गाजर पत्र, तेज पत्र, को पानी मे उबालकर उसमे शहद या गुड़ मिलाकर सेवन करने से जटिल मानसिक रोगो मे भी आराम मिलता हैं. ३.योगिक कृियाएँ जैसें भसतिृका, भृामरी,पृाणायाम, कपालभाँति, ध्यान,ऊँ उच्चारण

पाईल्स या बवासीर या अर्श के कारण ,प्रकार और बीमारी का प्रबंधन

पाईल्स या बवासीर या अर्श के कारण ,प्रकार और बीमारी का प्रबंधन आयुर्वैद चिकित्सा जिन बीमारींयों के उन्मूलन का दावा करती हैं, उनमें अर्श अर्थात (Piles) पृमुख हैं .अर्श वास्तव में गुदा मार्ग में होने वाली बीमारीं हैं  जिसमें गुदा मार्ग में शोच के वक्त ज्यादा दबाव पड़ने से गुदा मार्ग की रक्त नलिकाएं फूल जाती हैं. और इनमें जलन व खून भी निकलता हैं. आयुर्वेद ग्रन्थों में अर्श का वर्णन करतें हुए लिखा हैं  अरिवतप्रणानहिंस्ति   बवासीर अर्थात अर्श [Piles] वह बीमारी हैं जो प्राणों को इतना कष्ट पहुंचाती है कि व्यक्ति का पूरा ध्यान अपने सामान्य कामकाज से हटकर दुश्मन की भाँति उसी पर लग जाता हैं ।  बवासीर या अर्श # बवासीर या अर्श के प्रकार ::: बवासीर मुख्यत : दो तरह के होते हैं :: #1. अंदरूनी बवासीर या अर्श इस अवस्था में रोगी को रोग की तीव्रता का अंदाज़ा बहुत बाद में चलता हैं ।अंदरूनी बवासीर की भी चार अवस्था होती हैं जो निम्न हैं  1.प्रथम अवस्था ::: इस अवस्था में गुदामार्ग के अंदर रक्त नलिकाओं पर सूजन होती हैं ,किन्तु दर्द नहीं होता हैं ।कभी मल त्यागते समय मल के साथ रक्त आ

Ayurveda and jaundice

आज हम आयुर्वैद उपचार के अन्तर्गत कामला अर्थात पीलिया (jaundice) की चर्चा करेंगें आयुर्वैद में स्वस्थ शरीर के लिये वात, पित्त एँव कफ का संतुलित रहना आवश्यक है. इन तीनों का असन्तुलन रोग उत्पन्न करता हैं. पीलिया पित्त का असन्तुलन हैं, यह रोग लीवर यानि यकृत को पृभावित करता हैं, और रक्त निर्माण बाधित करता हैं, आयुर्वैद में पीलिया का बहुत सटीक उपचार वर्णित हैं, १.पुर्ननवा मन्डूर, नवायस लोह, दृाछा, अश्वगंधा, शिलाजित ,हल्दी ,बायबिडंग को विशेष अनुपात मे मिलाकर रोगी को लगातार चार हफ्तों तक सेवन करवाने से बीमारीं समाप्त हो जाती हैं. २.रोगी को दिन में दस बारह बार एक गिलास गन्नें का रस दाडिमाष्टक चूर्ण स्वादानुसार मिलाकर पिने से रोग जड़ मूल से नष्ट हो जाता हैं और भविष्य मे दुबारा वापस नहीं होता हैं. ३.योग की अनेक किृयाएँ जैसे कपालभांति, सू्र्यनमस्कार ,शीर्षासन ,पद्मासन और पृाणायाम इस रोग को समाप्त करता हैं. संतुलित आहार के बारें में जानियें ० नीम के औषधीय उपयोग ० गिलोय के फायदे Email-Svyas845@gmail.com

उच्च रक्तचाप का आयुर्वेदिक इलाज

आज  भारत और विश्व के सामने जिन बीमारींयों  ने चुनोंती पृस्तुत की हैं उनमें उच्च रक्तचाप का नाम पृथम पंक्तिं में लिया जाता हैं .उच्च रक्तचाप वास्तव में जीवनशैली (LIFESTYLE) से जुडा रोग माना जाता हैं. आधुनिक चिकित्सा पद्ति इस रोग पर अनुसधांन करते- करते आयुर्वैद और योग चिकित्सा पद्ति की शरण मे आ चुकी हैं., आज विश्व पृसिद् संस्थान एम्स  नासा, इसरो, अमेरिका के सैंकडों अस्पताल  ये मान चुकें है कि उच्च रक्तचाप और  जीवनशैली से जुडीं  अन्य बीमारींयों मे  पृाकृतिक चिकित्सा पद्ति आयुर्वैद और योग का कोई सानी नहीं हैं.आईयें जानते हैं. १. पंचकर्म आयुर्वैद मे उच्च रक्तचाप को नियतिृंत कर उसे जड़ से समाप्त करता हैं. २.आयुर्वैदिक औषधियां जैसें अर्जुन छाल पृभाकर वटी, सर्पगंधा,जटामासी , मालकांगनी और लहसुनादि वटी को  विशेष अनुपात मे मिलाकर उच्च रक्तचाप रोगी को लगातार  सेवन कराया जाता हैं, तो उच्च रक्तचाप जड़ से समाप्त हो जाता हैं. ३.योग की पारपंरिक  पद्तियां जैसें प्राणायाम,भस्त्रिका, शवासन   रोग को समाप्त करने वाली हैं. ४.मूंग में पोटेशियम,मैग्नेशियम और फायबर पर्याप्त मात्रा में पाये जात

ASTHMA TREATMENT अस्थमा का घरेलू इलाज

आज हम अस्थमा के आयुर्वैदिक उपचार के बारे मे चर्चा करेंगें अस्थमा आधुनिक चिकित्सा जगत के सामने सबसे जटिल व्याधि के रूप मे विधमान हैं आज आधुनिक चिकित्सा पद्ति या एलोपैथी अस्थमा को पू्र्णत: समाप्त करने मे सझम नहीं हैं किन्तु आयुर्वैद हजारों वषों   वषों पूर्व से इसको समूल  समाप्त करने का विधान करता हैं हमारें  रिषि - मुनियों ने पृाचीन गृन्थों मे मे इसे कफजनित बीमारीं के  रूप वर्णित किया हैं यदि इसके उपचार की बात करें तो १.श्वास पृणाली में शोथ (inflammation) खत्म करने वाली औषधि दी जाती हैं जिससे रोगी खुलकर श्वास ले सके. २. बलगम बाहर निकालने वाली औषधि का पृयोग किया जाता हैं . ३.इसके अलावा कुछ विशेष जडीं- बूटियां और आयुर्वैदिक औषधि जैसे  चंदृकांत रस श्वास कुठार रस पुर्ननवा को विशेष अनुपात मे मिलाकर रोगी को दिया जाता हैं. यदि इन औषधियों को लगातार ३-४ महिनों तक पृयोग किया जाता हैं तो अस्थमा का पूर्ण रोकथाम    सभंव है. • शहद और पिप्लली एक एक चम्मच सुबह दोपहर शाम लेनें से अस्थमा में आराम मिलता हैं । • तीन चम्मच कटेरी के रस में एक एक चुटकी सौंठ,काली मिर्च और पिप्पली मिलाकर सुबह शाम सेव

स्वाईन फ्लू। SWINE FLU TREATMENT

  स्वाईन फ्लू SWINE FLU TREATMENT ::- स्वाइन फ्लू आज वि्श्व की सर्वाधिक चुनौतीपू्र्ण बीमारी बन कर आधुनिक  चिकित्सा विञान के समझ खडी है जिसका पू्ूूू्र्ण उपचार आधुनिक चिकित्सा पद़़ति के पास नहीं है किन्तु आयुर्वैद चिकित्सा जौ कि विश्व की सबसे पुरानी पद्ति है मे स्वाइन फ्लू  का वर्णन पृतिश्या़य चिकित्सा के रूप मे हुअा है साथ ही इसके पूर्ण उपचार का भी वर्णन हैं।  अब सवाल उठता हैं यदि किसी को स्वाइन फ्लू हो जाए तो सर्व पृथम आयुर्वैद उपचार क्या हो आईए जानते हैं १-अमृता या गिलोय कि ऊगंली बराबर गीली लकडी लेले. २.एक चम्मच हल्दी  पावडर ले. ३.एक छोटा टुकडा अदरक का ले. ४.दस पत्ते तुलसी  के ले. इन चारों को एक गिलास पानी मे मिलाकर तब तक उबाले जब तक पानी १ चोथाई रह जावे इस काडे को लगातार ३ दिनों तक सुबह शाम खाली पेट पीनें से स्वाइन फ्लू की रोकथाम होती हैं। सेवन विधि=  बच्चों को १/२  ० नीम के औषधीय उपयोग ० गिलोय के फायदे ० गौमुखासन ० फिटनेस के लिये सतरंगी खान पान