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मई, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विश्व स्वास्थ संगठन । World health organization परिचय, क्षेत्रीय कार्यालय, संरचना और कार्यप्रणाली

#1.विश्व स्वास्थ संगठन परिचय ::: विश्व स्वास्थ  संगठन (world health organisation) या W.H.O संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) का आनुषंगिक अभिकरण हैं. स्थापना --- 7 अप्रेल 1948 मुख्यालय--- जेनेवा (स्विट्जरलेंड़) सदस्य देश-- 194 अमेरिका ने जुलाई 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने की घोषणा की है। #2.क्षेत्रीय कार्यालय::- विश्व के विभिन्न भागों में स्थित छ: क्षेत्रीय कार्यालय हैं,इनमें शामिल हैं:::- 1.दक्षिण-पूर्व एशिया ---- नई दिल्ली (भारत) 2.पूर्वी भू-मध्यसागर ---- अलेक्सजेन्ड्रिया (मिश्र) 3.पश्चिमी प्रशांत      ----  मनीला (फिलीपींस) 4.अमेरिका            ----   वाशिगंट़न डी.सी. 5.अफ्रीका             ----   ब्रेंजाविलें (कांगों) 6.यूरोप                 ----   कोपनहेगन (डेनमार्क) #3.संरचना:::- 1.विश्व स्वास्थ  महासभा. 2.कार्यकारी बोर्ड़. 3.क्षेत्रीय समितीयाँ. 4. सचिवालय. #4.उद्देश्य:::- विश्व के समस्त राष्ट्रों में निवासरत व्यक्तियों की बिना किसी जाति,प्रजाति, धार्मिक भेदभाव,राजनितिक

TULSI ,THE MEDICINAL PLANTS FOR HUMAN BEINGS

     #1.परिचय::-   हिन्दू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक धर्म माना गया हैं,और इसको वैज्ञानिक बनानें में इस धर्म के प्रतीकों जैसें तुलसी ,पीपल का विशिष्ठ स्थान हैं.तुलसी के बिना हिन्दू  धर्मावलम्बीयों का आँगन सुना माना जाता हैं.बल्कि यहाँ तक कहा जाता हैं,कि जहाँ  तुलसी का वास नहीं होता वहाँ देवता भी निवास नहीं करतें हैं.बिना तुलसी के चढ़ाया हुआ प्रसाद भी ईश्वर ग्रहण नहीं करतें हैं.                        Tulsi plant                              तुलसी की 6 से 7 प्रकार की किस्में होती हैं,परन्तु     मुख्य रूप से तीन प्रकार की ही तुलसी अधिक  अधिक प्रचलन में हैं.जो निम्न हैें::- # 1. राम तुलसी जिसका वानस्पतिक नाम (scientific name) आँसीमम ग्रेटिकम हैं. # 2.काली तुलसी या कृष्ण तुलसी जिसका वानस्पतिक नाम आँसीमम अमेरिकन हैं. # 3.पवित्र तुलसी इसे वानस्पतिक जगत में आँसीमम सेक्टम कहतें हैं. भारतीय घरों में राम तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी (green) तथा कृष्ण तुलसी जिसकी पत्तियाँ बैंगनी रंग की होती हैं ,पायी जाती हैं.    #2.संगठन (compositions)::-  तुल

आलू में पाए जाने वाले पौषक तत्वों का वर्णन और आलू के फायदे

आलू में पाए जाने वाले पौषक तत्वों का वर्णन और आलू के फायदे   #1.परिचय::- आलू वैश्विक,और संतुलित खाद्य   फसल हैं,जो कि चावल,गेंहूँ ,मक्का के बाद उपभोग के मामलें में चौथें स्थान पर हैं.आलू का वानस्पतिक नाम सोलेनम ट्यूबोरोसम हैं.यह सोलोनेसी परिवार का सदस्य हैं.आलू जमीन के अन्दर कंद रूप में मिलता हैं.आलू की फसल के लियें कम तापक्रम आवश्यक हैं.  आलू (potato) #2.आलू में पाए जाने वाले पौषक तत्व प्रति 100 ग्राम आलू में पायें जानें वाले पौषक तत्व नमी     प्रोटीन .     वसा .     खनिज़ पदार्थ.  रेशा. 7.5g. 1.6gm.   0.1g.        0.6 gm.    0.4g कार्बोहाइड्रेट .    कैलोरी.   कैल्सियम. मैग्निशियम 22.6 gm.         17 gm.   10 gm.  20 gm.  आक्जैलिक अम्ल.  निकोटिनिक अम्ल.  विटा.c       20 gm.                 1.2 gm.         17 mg फास्फोरस.     लोहा.    सोड़ियम.   पोटेशियम.     44 mg.     0.7.         1.9 mg.    247 mg  कापर.   सल्फर.   थायमिन.  क्लोरिन. राइबोफ्ले. 0.02mg.3.0.       10 mg.    0.1 mg.   0.01 3.आलू खाने से क्या फायदा होता

महापुरूषों की स्वस्थ विचारधारा,

भारत भूमि पर प्राचीन काल से ही ऐसें विद्धान जन्म लेते रहें हैं,जिन्होनें समाज का पतन होनें पर समाज को अपनें कर्मों और विचारों से आगें  बढ़ाया.चाहे वह भगवान राम हो,कृष्ण हो,स्वामी विवेकानंद हो,या महात्मा गांधी रहे हो. स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद का जन्म भारत में ऐसे समय में हुआ था,जब 1857 की क्रांति असफल हो गई थी,भारतीय दर्शन,वैदिक परपंरा और धर्म की खुलकर बात भी करनें वाला कोई नहीं था,क्योंकि अंग्रेंजी पाशविकता चरम पर थी.पश्चिमी विद्धान भारत को अपनें धर्म प्रचार की उर्वरा भूमि के तोर पर देख रहे थें. ऐसे समय में भारतीय धर्म और दर्शन को प्रतिष्ठित करनें वाले स्वामी विवेकानंद ही थें.जिन्होनें शिकागो धर्मसभा 1893 में जब उद्भोदन देना शुरू किया " मेरें अमेरिकी भाई और बहनों" तो सम्पूर्ण सभासद अवाक् रहकर लम्बें समय तक सिर्फ तालिया ही बजातें रह गयें.इसके पश्चात अनेक जगह घूमकर स्वामी जी नें वेद,भारतीय दर्शन,साहित्य की जो व्याख्या प्रस्तुत की उसे सुनकर अनेक अमेरिकी विद्धानों को कहना पड़ा था कि " उनके देश में पाश्चात्य धर्म प्रचारकों को भेजना कितनी बड़ी मूर्खत

Rabies: रेबीज एक घातक रोग

 रेबीज Rabies रेबीज (Rabies) एक संक्रामक वायरस जनित रोग हैं.जो जानवरों जैसें कुत्ता (Dog),बिल्ली (Cat), बंदर,नेवला,गाय घोड़ा आदि के द्धारा मनुष्यों में फैलता हैं. विश्व स्वास्थ संगठन (world health organisation)  के मुताबिक प्रति वर्ष इस रोग से मरनें वालें लोगों में लगभग 95  प्रतिशत रोगी विकासशील और अल्पविकसित राष्ट्रों के होतें हैं. रेबीज मुख्यतया दो प्रकार की होती हैं 1.Furious Rabies मतिभ्रम और अत्यधिक सक्रियता इस प्रकार की रेबीज की विशेषता होती हैं। रोगी पानी और हवा से डरता हैं जिसें क्रमशः हाइड्रोफोबिया और एयरोफोबिया  कहतें हैं । रेबीज के 100 मामलों में से 80 मामले इसी प्रकार के होतें हैं। 2.Paralytic Rabies लकवा और कोमा इस तरह की रेबीज की विशेषता होती हैं। दुनिया भर में 99 प्रतिशत रेबीज कुत्तों के काटने से होती है [✓]  पागल कुत्ता World Rabies Day 28 September  रेबीज से रोकथाम और रेबीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 28 सितंबर को "विश्व रेबीज दिवस" मनाया जाता हैं। रेबीज का कारण::- रेबीज रोग का प्रमुख कारण