31 जन॰ 2021

Homeopathy emergency medicine in hindi

 Homeopathy emergency medicine in hindi



मित्रों हमारा उद्देश्य आपकों निरोगी healthy रखना हैं। इसी तारतम्य में हम आपकों हर वो जानकारी उपलब्ध कराते हैं जो आपके स्वास्थ के लिए जरूरी हैं । तो आईए जानतें हैं आज कुछ महत्वपूर्ण Homeopathy emergency medicine in hindi के बारें में ।जो आप अपने घर में रखकर emergency में प्रयोग कर सकतें हैं, लेकिन यह जाननें से पहले हम होम्योपैथी चिकित्सा का थोड़ा सा परिचय प्राप्त कर लेतें हैं ।
मित्रों हमारा उद्देश्य आपकों निरोगी healthy रखना हैं। इसी तारतम्य में हम आपकों हर वो जानकारी उपलब्ध कराते हैं जो आपके स्वास्थ के लिए जरूरी हैं । तो आईए जानतें हैं आज कुछ महत्वपूर्ण Homeopathy emergency medicine in hindi के बारें में ।
Homeopathy



होम्योपैथी चिकित्सा के जनक जर्मनी के डाँ.सैम्युअल हैनीमन हैं। ये एक एलोपैथिक चिकित्सक थे किंतु मानव समाज को निरापद चिकित्सा उपलब्ध करानें की लालसा ने इन्हें होम्योपैथी जैसी निरापद चिकित्सा की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया ।और सन् 1796 में डाँ.सैम्युअल हैनीमन ने होम्योपैथी चिकित्सा का प्रादुर्भाव किया ।

डाँ.सैम्युअल हैनीमन का जन्म सन् 1755 ईस्वी में जर्मनी के मीसेन शहर में हुआ था । इन्होनें  होम्योपैथी चिकित्सा का सिद्धांत प्रतिपादित किया जो कि सम:सम्म शमयति 
के नाम से विश्व विख्यात हुआ । 
इस सिद्धांत के अनुसार एक स्वस्थ शरीर में जो पदार्थ बीमारी उत्पन्न करतें हैं वही पदार्थ उसी लक्षण वाली बीमारी को ठीक कर सकता हैं । 

तो आईए मित्रों जानतें हैं Homeopathy emergency medicine in hindi के बारें में 

• पेटदर्द के लिए Homeopathy emergency medicine


• कोलोसिन्थेसीस ---- 30 Potency ----5 से 6 गोली 

• डायस्कोरिया ---- 30 Potency --- 5 से 6 गोली

• दस्त होनें पर Homeopathy emergency medicine


• नक्स वोमिका ---- 30 Potency--- लक्षणों की गंभीरता के आधार पर 5 से 6 गोली

• पोडोफायलम ----- 30 Potency--- 5 से 6 गोली

• वेराइट्रम एल्बम --- 30 Potency --- 5 से 6 गोली

० बायोकाम्बिनेशन नम्बर 1 से 28 तक


• पेचिस होनें पर Homeopathy emergency medicine


• मर्कसाल ---- 30 Potency --- 5 से 6 गोली

• मर्ककार  ---- 30 Potency --- 5 से 6 गोली

• काल्चिकम ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• कब्ज के लिए Homeopathy emergency medicine


• सल्फर ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• ऐल्यूमिना ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• नक्स वोमिका----30 Potency --- 5 से 6 medicine

• सर्दी जुकाम के लिए Homeopathy emergency medicine



• एकोनाइट ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• आर्सेनिक एल्बम ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• एलियम सीपा ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• सिरदर्द के लिए Homeopathy emergency medicine



• सेंग्यूनेरिया ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• स्पाइजेलिया ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• बेलाडोना ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• खाँसी के लिए Homeopathy emergency medicine



• मर्कसाल ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• रियूमेक्स ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• हायोसियामस ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• लू लगना Homeopathy emergency medicine


• ग्लोनाईन  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• नेट्रमम्यूर  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• बेलाडोना ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• दांतदर्द के लिए Homeopathy emergency medicine


• मर्कसाल  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• प्लान्टेगो मदर टिंचर - बाह्य प्रयोगार्थ

• कैमोमिला  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• आँखों में दर्द के लिए Homeopathy emergency medicine


• एकोनाइट  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• यूफ्रेसिया  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• बेलाडोना  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• कान दर्द के लिए Homeopathy emergency medicine



• बेलाडोना  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• मर्कसाल  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• कैमोमिला  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• बच्चों की दाँत निकलने की तकलीफ़ में Homeopathy emergency medicine


• केल्केरियाफाँस ---- 6 एक्स -- 5 से 6 गोली प्रतिदिन

• कैमोमिला  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• टांसलाइटिस के लिए Homeopathy emergency medicine


• मर्क बिन आयोड  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• फायटोलक्का  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• बेलाडोना  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• सामान्य बुखार के लिए Homeopathy emergency medicine


• एकोनाइट  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• बेलाडोना  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली

• ब्रायोनिया  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• मलेरिया बुखार के लिए Homeopath emergency mediciney


 • मलेरिया आँफ----200 Potency --- 5 से 6 गोली

• प्रिविऐंटिव चिनिनम  सल्फ  ----200 Potency --- 5 से 6 गोली

• टाइफाइड़ ज्वर  ----200 Potency --- 5 से 6 गोली

• बैप्टीसिया  ----30 Potency --- 5 से 6 गोली


• चिकनगुनिया के लिए Homeopathy emergency medicine


• इपीटोरियम पर्फ  ----200 Potency --- 5 से 6 गोली


• रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी के लिए Homeopathy emergency medicine


• आर्सेनिक एल्बम  ----200 Potency --- 5 से 6 गोली सप्ताह में एक बार

• जस्टीसिया मदर टिंचर - 10 बूंद गुनगुनें जल के साथ सप्ताह में एक बार 


[नोट - उपरोक्त जानकारी आयुष विभाग के अनुसार हैं होम्योपैथिक दवाई लेनें से पूर्व चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लें ]
 

यहां भी पढें

बाख फ्लावर रेमेडीज या Batch flower remedy



 


























 

25 जन॰ 2021

द्राक्षारिष्ट के फायदे [DRAKSHARISHTA KE FAYDE]

 द्राक्षारिष्ट के फायदे [DRAKSHARISHTA KE FAYDE]

 

आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में द्राक्ष यानि किशमिश का चिकित्सकीय उपयोग विस्तारपूर्वक बताया गया हैं । द्राक्ष से बनने वाली औषधि "द्राक्षारिष्ट" एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि हैं आईये जानतें हैं द्राक्षारिष्ट के फायदे के  बारें में


द्राक्षारिष्ट के घटक Draksharishta content :



द्राक्षारिष्ट के फायदे Draksharishta ke fayde
द्राक्षारिष्ट


                              

1.द्राक्षा (मुनुक्का).- ( Vitis vinifera)


2.परियांगु - (callicarpa macrophylla)

3.लोंग (piper longum)

4.सौंठ (Zingiber officinale)

5.पीपली ()

6.वायविडंग (Embelia ribes)

7.धायफूल (Woodfordia fruticosa)

8.इलायची

9.नागकेशर

10.गुड़ 


० द्राक्षारिष्ट के फायदे



द्राक्षारिष्ट के फायदे बताते हुए आयुर्वेद ग्रंथों में लिखा हैं 


तृष्णादाहज्वर श्वासरक्तपित्तक्षतक्षयान।वात्तपित्तमुदावर्तस्वरभेदंमदात्यम्।।तिक्तास्यतामास्यशोषंकाशच्चाशुव्यपोहति।मृद्धीकाबृंहणीवृष्यामधुरस्निग्धशीतला।।




 द्राक्ष या मुनुक्का प्यास,जलन,बुखार,श्वास,दूषित रक्त,चोंट,वातपित्त,स्वरभेद,खाँसी,क्षय को नष्ट करता हैं । यह शरीर के लिए पुष्टिकारक वीर्य की वृद्धि करने वाला,मधुर, स्निग्ध और शीतल होता हैं।


एक अन्य ग्रंथ में द्राक्ष का वर्णन करतें हुए लिखा हैं


उर:क्षतंक्षयं हन्ति कासश्वासगलामयान्।द्राक्षाअरिष्ठाह्रय:प्रोक्तो बलकृन्मलशोधन।।



सुश्रुतसंहिता में द्राक्षा के बारें में लिखा हैं



परूषकद्राक्षाकट्फलदाडिमराजद नकतकफलक शाक फलाने त्रिफलाचेति ।तेषां द्राक्षा सरा सावरिया मधुरास्निग्धशीतला।।रक्तपित्तज्वरश्वासतृष्णादाहक्षयापहा।।


 


इस प्रकार द्राक्षारिष्ट के फायदे निम्न प्रकार हैं




1.श्वास में द्राक्षारिष्ट का सेवन बहुत फायदेमंद होता हैं।


2.खाँसी में 


3.न्यूमोनिया में


4.बुखार में,


5.पेट संबधित विकारों जैसें पेटदर्द, कब्ज आदि में


6.भूख कम लगना,




8.मूत्र रूकावट में,


9.बाजीकरण कारक


द्राक्षारिष्ट में एंटीआक्सीडेंट़ और बैक्टेरिया गुण भी पाए जातें हैं ।



उपयोग विधि



12 से 24 मिलीलीटर दिन में दो बार समान मात्रा में जल मिलाकर



द्राक्षा फल के बारें में जानकारी



द्राक्षा या किशमिश अँगूर को सुखाकर बनने वाला एक प्रकार का ड्रायफ्रूट हैं । जब यह कच्चा होता हैं तो हरा और पकनें पर बैंगनी रंग का होता हैं । 

आयुर्वेदिक फार्मोकोपिया आफ इंडिया के अनुसार द्राक्षा फल में पाए जानें वाले प्रमुख घटक


1.फारेन मैटर - 2%


2.टोटल एश - 3%


3.अल्कोहल साल्यूबल एक्सट्रेट -25%


4.वाटर साल्यूबल एक्सट्रेट - 70%





द्राक्षा के प्रकार



निघंटु प्रकास में द्राक्षा के कई प्रकारों का वर्णन किया गया हैं जैसें


1.पक्व द्राक्षा


2.अपक्व द्राक्षा


3.लघु द्राक्षा


4.गो स्तनी द्राक्षा


5.पर्वतज द्राक्षा


6.काली द्राक्षा


7.मधुर द्राक्षा







० लोध्रासव के फायदे




# द्राक्षासव [Drakshasava]


द्राक्षासव के घटक द्रव


1.द्राक्षा


3.धायफूल

4.जायफल

5.लौंग

6.कंसोल

7.जल

8.गुड़

9.श्वेत चंदन

10.पिप्पली

11.दालचीनी

12.इलायची

13.तेजपत्ता


रोगाधिकार


1.अर्श में 


3.भोजन में अरूचि

4.पीलिया

5.पेट संबधी रोगों में

6.बुखार में

7.सूजन में


सेवन मात्रा


12 से 24 मिलीलीटर बराबर मात्रा में जल के साथ ,दिन में दो बार भोजन के बाद या चिकित्सकीय निर्देशानुसार


० नीम के औषधीय गुण





23 जन॰ 2021

औषधीय गुणों का खजाना हैं गेंहू के जवारें का जूस [ Javare ke juice ke fayde]

औषधीय गुणों का खजाना हैं गेंहू के जवारें का जूस  [ Javare ke juice ke fayde]


गेंहू से बनी रोटी,गेंहू से बनी ब्रेड और गेंहू से निर्मित नूडल्स लोगों की भूख मिटाती हैं । किंतु बहुत कम लोग जानतें हैं कि गेंहू के जवारे रोगों को मिटाते हैं तो आईयें जानतें हैं गेंहू के जवारे के औषधीय गुणों के बारें में
javare ke juice ke fayde


गेंहू के जवारे के औषधीय गुण
       गेंहू के जवारे



गेंहू के जवारे में पाए जानें वाले पौषक तत्व


गेंहू के घास कुल का पौधा हैं जिसका वानस्पतिक नाम "ट्रिटिकम वेस्टिकम" हैं । गेंहू के जवारें में विटामीन ए, बी,विटामीन बी 17(लेट्रियल),विटामीन सी,विटामीन ई,विटामीन के,अमीनो एसिड़, आयोडिन,सेलेनियम, लौह तत्व, जिंक आदि महत्वपूर्ण तत्व पर्याप्त मात्रा में पाये जातें हैं ।



प्रति 100 मिली ग्राम जवारें में पाए जानें वाले पौषक तत्व



1.विटामीन ई ---------------- 24948 mcg



2.विटामीन बी 12 ------------- 8.5 mg


3.विटामीन सी -------------------- 28.3 mg


4.प्रोटीन -----------------------24381 mg


5.पोटेशियम -------------------1190 mg


6.आयरन ----------------------- 18.7 mg


7.मैग्निशियम-------------------226.8 mg



8.कैल्सियम ------------------ 204.12 mg


9.फास्फोरस ------------------ 595.mg


10.बीटा केरोटिन ------------ 3402 iu




इसमे पाए जानें वाले पौषक तत्वों की महत्ता को देखते हुए डाँ.एम.विग्मोर जो कि अमेरिका की बहुत प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक थी ने गेंहू के जवारे को "हरित रक्त " की संज्ञा दी थी ।उनका कहना था कि गेंहू के जवारे में सभी रोगों को समाप्त करने की क्षमता मौजूद हैं । तो आईयें जानतें हैं गेंहू के जवारे के औषधीय गुणों के बारें में 

पुरूष नपुसंकता में 

गेंहू के जवारें में आरजीनिन नामक अमीनो एसिड़ पाया जाता हैं,यह अमीनों एसिड़ पुरूष नपुसंकता को दूर कर वीर्य वृद्धि करता हैं ।


वृद्धावस्था को रोकनें में Anti aging


गेंहू के जवारें में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व S.O.D.और अमीनो एसिड़ लाइसिन प्रचुरता से पाया जाता हैं यह दोनों ही तत्व कोशिकाओं के तेजी से क्षरण को रोकते हैं और नवीन कोशिकाओं के लिए उत्प्रेरक का कार्य करतें हैं । जिससे कि वृद्धावस्था बहुत तेजी से नहीं आती हैं । 

एनिमिया में 

गेंहू के जवारें का पीएच मान 7.4 होता हैं यह पीएच मान मानव रक्त के पीएच मान के बराबर होकर क्षारीय होता हैं । जवारें में आयरन बहुतायत में मिलता हैं इसके अतिरिक्त एलेनिन नामक एंजाइम पाया जाता हैं जो लाल रक्त कणिकाओं [WBC] के निर्माण में सहायता करता हैं ।  यदि जवारें का रस प्रतिदिन सेवन किया जाए तो खून की कमी को दूर किया जा सकता हैं ।

गर्भावस्था में 

गेंहू के जवारें में आइसोल्यूसीन नामक एंजाइम पाया जाता हैं जो भ्रूण का विकास सही तरीके से करता हैं । इसके अतिरिक्त विटामीन ई भी पाया जाता हैं जो गर्भपात रोकता हैं । अत:जो स्त्री गर्भावस्था के दौरान जवारे का जूस का सेवन करती हैं उसे गर्भावस्था के दौरान उपरोक्त समस्या नहीं होती हैं।

कैंसर के उपचार में 

गेंहू के जवारें पर रिसर्च करनें वाले प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक डाँ.विगमोर का मानना था कि यदि गेंहू के जवारें का नियमित सेवन किसी कैंसर रोगी को करवाया जाए तो उसका कैंसर बहुत जल्दी समाप्त हो जाता हैं । उनका कहना था कि गेंहू के जवारें में पाया जानें वाला विटामीन बी [लेट्रियम] एक कैंसररोधी विटामीन हैं जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को समाप्त कर देता हैं ।



रोग प्रतिरोधक क्षमता की बढ़ोतरी में

गेंहू के जवारें में मौजूद विटामीन सी,और खनिज तत्व शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है 

गेंहू के जवारें में मिथियोनिन नामक एमिनो एसिड़ पाया जाता हैं । यह तत्व शरीर में प्रवेश कर गये विषैले तत्वों को बाहर निकालता हैं । और किडनी लीवर और फेफडों की सफाई करता हैं । 

वायरस जनित रोगों में जवारे के लाभ

गेंहू के जवारे में P4D1 नामक एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता हैं यह एंटीआक्सीडेंट़ पदार्थ वायरस की कोशिकाभित्ति को तोड़नें में श्वेत रक्त कणिकाओं की मदद करता हैं । जिससे वायरस पीड़ित रोगी बहुत जल्दी ठीक हो जाता हैं ।

त्वचा रोगों में 


गेंहू के जवारें में पाया जानें वाला ट्रिप्टौफेन नामक एंजाइम त्वचा की कोशिकाओं का पुनर्निर्माण करता हैं । इस तरह देखा जाए तो सफेद दाग जिसमें त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पंहुचता हैं और मेलेनिन नामक तत्व समाप्त हो जाता हैं गेंहू के जवारों के सेवन से ठीक होता हैं। 

गेंहू के जवारें को सुखाकर बनाया हुआ पावड़र त्वचा पर लगाना और गेंहू के जवारें का जूस इसके लिए उपयोगी होता हैं । 

बालों को लम्बा,घना और मजबूत बनाने में

गेंहू के जवारें में मौजूद विटामीन ई,मिनरल्स बालो के लिए उत्तम टानिक का काम करतें हैं । जिससे बाल काले,घने और मज़बूत बनते हैं । यदि सप्ताह में दो दिन जवारें के पावड़र को शेम्पू की तरह बालों में लगाया जाए और नियमित जवारें का जूस का सेवन किया जाए तो बाल चमकीले काले,घने और मज़बूत बनते हैं ।

जन्मजात रोगों को रोकनें में 

जवारें में मौजूद P4D1 नामक एंटी ऑक्सीडेंट तत्व डी.एन.ए.में आनें वाली विकृतियों को समाप्त कर डी.एन.ए.को सामान्य और स्वस्थ्य रखनें का काम करता हैं इस प्रकार कई जन्मजात विकृतियाँ जैसें हिमोफिलिया, सिकल सेल एनिमिया, कलर ब्लाइंडनेस आदि जवारें के सेवन से दूर करने में मदद मिलती हैं। 

एसिडिटी में 

जवारें का पीएच मान 7.4 होता हैं जो कि हल्का क्षारीय गुण दर्शाता हैं । जब शरीर में एसिडिटी बनती हैं जो कि अम्लीय होती हैं में जवारें का रस सेवन किया जाए तो एसिड़ का स्तर सामान्य हो जाता हैं और एसिडिटी से राहत मिलती हैं । 

पाचन संस्थान के रोगों में 

जवारें में थ्रियोनिन नामक ऐमिनो एसिड़ और फायबर बहुत प्रचुरता से मिलता हैं यह तत्व पाचक संस्थान को मज़बूत बनाकर कब्ज,पेट के छाले को ठीक करता हैं और पेट से अतिरिक्त खाद्य पदार्थ को मल के रूप में बाहर निकाल देता हैं ,जिससे अमाशय में मौजूद दूषित भोजन शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता हैं ।

कोमा में जवारें का जूस


जवारें में मौजूद ग्लूटेमिक एसिड़ और ल्यूसिन नामक एमिनो एसिड़ नाड़ी तंत्र में ऊर्जा का बहुत तेज प्रवाह बनाए रखता हैं । यदि अस्पतालों की ICU में जवारें का जूस कौमा पीड़ित मरीज को पिलाना शुरू कर दिया जाए तो डाँक्टरों का काम बहुत आसान होकर बहुत चमत्कारिक परिणाम मिलेंगे ।


लकवा  में जवारें का जूस 


जवारें में मोजूद "वेलीन" नामक ऐमिनो एसिड़ मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच की कार्यप्रणाली को उसी स्तर का बनाए रखनें में मदद करता हैं जो कि एक सामान्य शरीर के लिए आवश्यक होती हैं । अत:जवारें का सेवन करनें से ऐसी बीमारीयाँ जैसें लकवा जो मस्तिष्क का अंगो पर से नियत्रंण समाप्त होने से पैदा होता हैं का खतरा नहीं होता हैं ।

कान की बीमारीयों में जवारें का जूस


रिसर्च के अनुसार जवारें में मौजूद "हिस्टीडिन" नामक ऐमिनो एसिड़ कान की मांसपेशयों को मज़बूत और सुनने की क्षमता में सुधार लाता हैं ।जिससे बहरापन,टिनिटस,आदि समस्याओं में आराम मिलता हैं। इसके लिए गेंहू के जवारें का रस कान में डालना चाहिए और वैघकीय परामर्श से सेवन करना चाहिए ।


आटो इम्यून बीमारियों में 


जवारें में बहुत शक्तिशाली एंटीआक्सीडेंट़ सुपर आक्साइड डिसम्यूटेज और P4D1,पाया जाता हैं यह एँटी आक्सीडेंट आटो इम्यून बीमारियों जैसें एलर्जी,अर्थराइटिस, ल्यूपस डिजिज में होनें वाली सूजन और दर्द को कम कर बीमारी से राहत दिलाता है।


शरीर में आक्सीजन का स्तर बढ़ाने में


गेंहू के जवारें में क्लोरोफिल अन्य हरी सब्जियों के मुकाबले अधिक पाया जाता हैं । यह क्लोरोफिल शरीर में पहुंचकर कोशिकाओं में आक्सीजन का स्तर बढ़ा देता हैं फलस्वरूप व्यक्ति कई बीमारियों जैसें तनाव,थकान आदि से बचा रहता हैं ।

आजकल कोरोनावायरस के प्रभाव से शरीर में आक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता हैं यदि गेंहू के जवारें का नियमित सेवन कोरोनावायरस पीड़ित करें तो शरीर में आक्सीजन का स्तर कम नहीं होता हैं ।

दाँतों की समस्याओं में


गेंहू के जवारें में विटामीन सी भी बहुत पर्याप्त मात्रा में मोजूद रहता हैं यह विटामीन लेनें से पायरिया,मसूड़े में सूजन जैसी समस्याँए नहीं पैदा होती हैं। अत:इन बीमारीयों में गेंहू के जवारें को साबुत चबाना चाहिए ।

टैकीकार्डिया में 

जवारें में पाया जानें वाला पोटेशियम ह्रदय की अनियमित धडकन जिसे टैकीकार्डिया कहते हैं को नियंत्रित करता हैं । अत:टैकीकार्डिया में जवारें का रस अवश्य सेवन करना चाहिए ।

मधुमेह के उपचार में

गेंहू के जवारें में मौजूद एंजाइम रक्त में मिलकर इंसुलिन का स्तर शरीर में संतुलित रखते हैं । इस तरह गेंहू के जवारें मधुमेह के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभातें हैं ।


कोलेस्ट्राँल का स्तर नियत्रिंत करतें हैं 


गेंहू के जवारें में मौजूद क्लोरोफिल रक्त में मिलकर खराब कोलेस्ट्राँल या लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन LDL का स्तर कम करनें का काम करता हैं । और हाई डेसिंटी लिपोप्रोटीन HDL का स्तर बढ़ाता हैं ।

रक्त का बहाव रोकनें में


अमेरिकन फूड एंड एग्रीकल्चरल के अनुसार एक चम्मच सूखे गेंहू के जवारें पावड़र में 86 मिलीग्राम विटामीन के पाया जाता हैं । यह विटामीन शरीर में रक्त का स्कंदन करता हैं । डेंगू जैसी बीमारी जिसमें प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती हैं और किडनी, लीवर फेफडों से रक्त बहने लगता हैं,में  यदि जवारें का जूस पीया जाँए और रक्त का बहाव रोकनें के लिए इसका पावड़र लगाया जाए तो रक्त का बहाव रूक जाता हैं ।

थैलीसीमिया में जवारें का जूस

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार यदि थैलीसीमिया पीड़ित किसी मरीज को प्रतिदिन गेंहू के जवारें का जूस पिलाया जाए तो रोगी को खून चढ़ानें की रफ्तार कम हो जाती हैं ।


याददाश्त तेज होती हैं 

गेंहू के जवारें में पाया जानें वाला ग्लूटेमिक एसिड़ मस्तिष्क के विकास और याददाश्त बढानें में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता हैं । पार्किन्सन,डिमेंशिया जैसी बीमारी में यदि जवारें का जूस सेवन किया जाए तो आशातीत लाभ मिलता हैं ।

याददाश्त बढानें वाला यह अति उत्तम टानिक हैं ।

हाइपोथायरायडिज्म में गेंहू के जवारें


गेंहू के जवारें में फिनाइलएनेलिन नामक एमिनो एसिड़ पाया जाता हैं यह तत्व थायराइड़ ग्रंथि की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर थायराक्सिन हार्मोन का उत्सर्जन बढ़ाता हैं । अत:जिन लोगों को हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हैं उन्हें नियमित रूप से गेंहू के जवारें का जूस पीना चाहिए ।

एंटीसेप्टिक गुण

गेंहू के जवारे में कई प्रकार के एंटीसेप्टिक एंजाइम मौजूद होतें हैं ।यदि घावों को गेंहू के जवारें का रस लगाकर साफ किया जाए तो घाव बहुत जल्दी भर जाता हैं । 


आयुर्वेद ग्रंथों के मतानुसार गेंहू के गुण

प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथ में भी गेंहू के गुणों का विशद वर्णन किया गया हैं एक जगह लिखा हैं ।


"सन्धानकृद्धातहरोगोधूम:स्वादुशीतल:।जीवनोबृंहणोवृष्य:स्निग्ध: स्थैय्यर्यकरोगुरू:।।"


अर्थात गोधूम (गेंहू) वात को हरने वाला,जीवनशक्ति देने वाला,स्वादिष्ट, शीतल गुणों से युक्त,वीर्यवर्धक,भारी,और शरीर को दृढ करने वाला होता हैं। 

आर्गेनिक गेंहू के जवारे उगाने की विधि 

1.गेंहू के जवारे उगाने से पहले उत्तम प्रकार के गेंहू का चयन कर लें ,जो कि घुन या कीड़ो से पूरी तरह मुक्त हो ।


2.मिट्टी या धातु का कोई थालीनुमा पात्र या गमला ले लें ।

3.पात्र में आधी मात्रा में उत्तम प्रकार की मिट्टी और आधी मात्रा में सड़ा हुआ गोबर का खाद लें लें ।और इसे मिश्रित कर लें ।

4.अब इस पात्र में गेंहू को छितरा कर डाल दें ।और गेंहू के ऊपर हल्की मिट्टी और गोबर के मिश्रण का आवरण चढ़ा दे ।

5.ऊपर से हल्के हल्के हाथों से पानी का छिंटकाव कर दें ,और इसे खुली जगह पर जंहा सूर्य का प्रकाश आता हो वंहा रख दे ।


6.दो तीन दिन में जब गेंहू अँकुरित हो जाए एक बार फिर इसमें पानी डालें ।


7.सात से दस दिन में गेंहू अँकुरित होकर तीन से पाँच सेंटीमीटर हो जाएगा ।

8.यह नवीन अँकुरित गेंहू ही जवारें के नाम से जानें जातें हैं ।

9.गेंहू के जवारें में किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों या रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करें ।

गेंहू के जवारें का जूस बनानें की विधि


1.पूरी तरह तैयार गेंहू के जवारों को जड़ सहित उखाड़कर जड़ वाले  सफेद भाग को काटकर फेंक दें ।

2.बचे हुए गेंहू के जवारें को सिलबट्टे या मिक्सर में थोड़ा सा पानी डालकर पीस लें ।

3.अब पीसे हुयें भाग को बारिक कपडे़ या छलनी से छान लें ।और इसे पीनें के लिए उपयोग करें ।

4.इसमें स्वादनुसार शहद या मिश्री मिलाकर पीयें ।

5.गेंहू के जवारें का जूस तीन घंटे तक उपयोग कर सकतें हैं । तीन घंटे बाद इसके पौषक तत्व नष्ट हो जातें हैं । 

गेंहू  जवारें से होनें वाला नुकसान


1.गेंहू जवारें का  सेवन करनें से कई लोगों चक्कर,उल्टी,सिरदर्द और दस्त जैसी समस्याँए पैदा हो जाती हैं अत:जिन लोगों को जवारें सेवन के बाद इस प्रकार की समस्याँए होती हैं वे गेंहू के जवारें का सेवन नहीं करें ।


2.गेंहू से कई लोगों को एलर्जी होती हैं अत:जिन लोगों को एलर्जी की समस्या हो वे इसके सेवन से पूर्व वैधकीय परामर्श अवश्य कर लें ।

3.गेंहू के जवारें का जूस अधिक सेवन करनें से आँखों  के सामनें अंधेरा छानें और कब्ज की समस्या पैदा हो जाती हैं ।


4.गर्भवती स्त्री,दूध पिलानें वाली माताओं को जवारें का जूस पीनें से पहलें वैघकीय परामर्श अवश्य प्राप्त करना चाहियें ।


5.जवारें का जूस खाली पेट सेवन करना चाहिए ।

6.जवारें के सेवन से पूर्व एक दिन का उपवास करें ।

7.पहले से कोई दवाई चल रही हैं तो जवारें का सेवन करनें से पूर्व वैधकीय परामर्श प्राप्त कर लें ।

8.तीन घंटे से अधिक पुराना जवारें का जूस सेवन नहीं करना चाहिए ,पुरानें जवारें का जूस पेट में कब्ज,या पेटदर्द की समस्या पैदा कर सकता हैं । 

9.गेंहू के जवारें wheat grass juice uses in hindi  में विपरित गुणों वालें पदार्थों जैसें चाय काफी मिलाकर सेवन नहीं करें ।

10.जिन लोगों का रक्त ग्लूकोज कम रहता हों,वे जवारे के जूस सेवन नहीं करें ।


० अमरूद में पाए जानें वाले पौषक तत्व






12 जन॰ 2021

सर्जरी [SURGERY] और ऐनेस्थिसिया के जनक :आचार्य सुश्रुत

 सर्जरी [SURGERY] और ऐनेस्थिसिया के जनक :आचार्य सुश्रुत

भारत सरकार ने अभी हाल ही में आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी [SURGERY] का अधिकार देकर आयुर्वेद चिकित्सा विधा सर्जरी को अपनी मूल जड़ों की ओर लोटाने का काम किया हैं । जबकि आमजनों में यही धारणा विधमान हैं कि सर्जरी ऐलोपैथिक विधा हैं । विश्व में सबसे पहले सर्जरी का आविष्कार लगभग 2500 वर्ष पूर्व [प्राचीन भारत में शल्य चिकित्सा]  आयुर्वेद के महान चिकित्सक आचार्य सुश्रुत द्धारा किया गया था । आचार्य सुश्रुत नें अपने लिखित चिकित्सा ग्रंथ "सुश्रुत संहिता" Shushrut Sanhita में सर्जरी के कई प्रकार और इन सर्जरी के लिए उपयोग होने वाले कई उपकरणों का वर्णन किया हैं ।


इसी प्रकार आचार्य सुश्रुत ने अपनी सर्जरी के लिए रोगी को सर्वप्रथम संज्ञाहारक [ऐनेस्थिसिया] दिया था । तात्कालिन समय में आचार्य सुश्रुत शल्यक्रिया [SURGERY] से पूर्व रोगी को अल्कोहल युक्त विभिन्न पेय पदार्थ पीलाकर सर्जरी के दौरान होनें वाले दर्द से मुक्ति दिलानें के लिए बेहोश करते थे । इस प्रकार आचार्य सुश्रुत विश्व के प्रथम ऐनेस्थेसिओलोजिस्ट थे। 



आचार्य सुश्रुत का जीवन परिचय और सुश्रुत संहिता का संक्षिप्त परिचय 


आचार्य 'सुश्रुत का जन्म,' ईसा पूर्व छठी शताब्दी में काशी [वर्तमान में उत्तरप्रदेश राज्य का बनारस या वाराणसी] में हुआ था । आचार्य सुश्रुत के पिता का नाम विश्वामित्र था । आचार्य सुश्रुत के गुरू का नाम दिवोदास और आचार्य धन्वंतरी था ।

आचार्य सुश्रुत ने अपनी शल्यक्रिया [SURGERY] विधा का व्यवस्थित वर्णन अपने ग्रंथ "सुश्रुत संहिता" में किया हैं।सुश्रुत संहिता में शल्य यंत्रों की संख्या 125 और 300 से अधिक प्रकार की  सर्जरी का वर्णन  हैं । 




आचार्य सुश्रुत
आचार्य सुश्रुत सर्जरी करते हुए

आचार्य सुश्रुत नें अपने शल्यकर्म उपकरणों का नामकरण हिंसक जानवरों और चिडियों के नाम पर किया था । उनका मानना था कि शल्यकर्म उपकरणों को हिंसक पशु के दाँतों के समान तीक्ष्ण होना चाहिए ताकि शल्यकर्म के दौरान रोगी को पीडा न हो ।


आचार्य सुश्रुत Acharya Shushrut नें मोतियाबिंद, प्लास्टिक सर्जरी,सिजेरियन, आदि सर्जरी के बारें में विस्तारपूर्वक वर्णन किया हैं ।

सुश्रुत ने आठ प्रकार की शल्यचिकित्सा का वर्णन किया हैं जिनमें शामिल हैं

1.छेदन कर्म


छेदन कर्म के द्धारा शरीर को बीमार कर रहें उन हिस्सों को काटा जाता हैं जो औषधियों से ठीक नहीं हो रहे हो आजकल इस शल्यक्रिया [SURGERY] के द्धारा अपेंडिक्स,गाँठों,पित्ताशय आदि की सर्जरी की जाती हैं ।


2.भेदन कर्म


भेदन कर्म के द्धारा चीरा लगाकर शल्यक्रिया [SURGERY] की जाती हैं। इस शल्यक्रिया द्धारा फोड़ो को फोड़ना और साफ करना,पेट से और फेफड़ों से पानी निकालना जैसी शल्यक्रिया की जाती हैं ।


3.लेखन कर्म 


शरीर की ऐसी कोशिकाएँ जो शरीर के अँगों को नुकसान पँहुचाती हैं या शरीर में मौजूद मृत कोशिकाएँ इस शल्यक्रिया [SURGERY] द्धारा अलग की जाती हैं। खराब खून बाहर निकालना ,पाइल्स सर्जरी,कैंसर जैसी सर्जरी में यह विधा उपयोग में लाई जाती हैं। 


० लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बारे में जानकारी



4.वेधन कर्म 


वेधन कर्म में सुई की मदद ली जाती हैं । इस शल्यक्रिया द्धारा पेट में भरा पानी या जहर,शरीर के अंदरूनी भागों में भरा खराब मवाद शरीर से बाहर निकाला जाता हैं ।


5.ऐष्ण कर्म 

इस विधा में नाक के अंदर की सर्जरी ,साइनस सर्जरी,फिस्टुला की सर्जरी,आदि की जाती हैं।


6.अहर्य कर्म

अहर्य कर्म द्धारा दाँत निकालना,कानों में कुछ फँस जानें पर सर्जरी द्धारा बाहर निकालना,किड़नी से पथरी बाहर निकालना, तथा शरीर के अन्य हिस्सें जो नुकसान पहुँचा रहे हो को बाहर निकाला जाता हैं ।

7.विश्रव्य कर्म 

इस विधा में भी भेदन कर्म की तरह फोड़े में पाइप डालकर खराब मवाद निकाला जाता हैं । या फिर फेफड़ों से पानी निकाला जाता हैं ।


8.सीव्य कर्म

आपरेशन होनें के बाद सर्जरी की हुई जगह को इस विधा द्धारा सिला जाता हैं ताकि घाव जल्दी भर जाए । इस शल्यक्रिया विधा में सुई और धागे का इस्तेमाल किया जाता था कालान्तर में यह तकनीक और उन्नत होती गई ।

यहाँ उल्लेखनीय हैं कि शल्यक्रिया से पूर्व उस जगह को विसंक्रमित  भी किया जाता था ताकि किसी प्रकार का संक्रमण ना फैले और विसंक्रमण के लिए त्रिफला मिला हुआ गर्म जल उपयोग किया जाता था ।

घाव के भरने हेतू घी की पट्टी उस पर लगाई जाती थी ताकि घाव जल्दी भर सकें । सुश्रुत घाव को जल्दी भरनें के लिए अपने रोगी को हल्दी  और अन्य औषधियों से युक्त पेय भी पिलाते थे ।


आचार्य सुश्रुत ने अपनी शल्यक्रिया को अपने अनुयायीओं को सिखाने हेतू मृत शरीर,मोम के पुतले,फल ,सब्जियों और जीवित रोगी को उपयोग में लिया था आजकल की Plastic surgery जिसमें शरीर के एक हिस्से से चमड़ी निकालकर दूसरे हिस्सें में लगाई जाती हैं ,यह विधा भी आचार्य सुश्रुत ने ही दुनिया को सीखाई थी । 

आचार्य सुश्रुत Acharya Shushrut मोतियाबिंद सर्जरी,सिजेरियन द्धारा बच्चा बाहर निकालना आदि विधा में निष्णांत थें । सुश्रुत के लिखे सुश्रुत संहिता का आठवी शताब्दी में "किताबे -ए-सुसुरद" नाम से अनुवाद भी किया गया था ।


० ओजोन थेरेपी क्या होती हैं ?












2 जन॰ 2021

दूध पीने के फायदे और नुकसान। Benefit of milk in hindi

 दूध पीनें के फायदें और नुकसान 


भारतीय संस्कृति और समाज में दूध इस तरह से रचा बसा हैं कि बिना दूध के किसी सांस्कृतिक या धार्मिक आयोजन की कल्पना करना भी असंभव हो जाता हैं । यहाँ तक की भारतीयों ने अंग्रेजों से विरासत में मिली चाय को भी दूधमय कर दिया हैं आज के सन्दर्भ में बिना दूध के चाय की  कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं ।

दूध का नाम लिया और गोपाल कृष्ण कन्हैया के नाम  का जिक्र न हो तो लेख अधूरा सा लगता हैं कृष्ण भगवान जिनका बचपन ही गाय ,दूध और माखन के इर्दगिर्द घूमता हैं । दूध को सम्पूर्ण आहार माना गया हैं ।और भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राष्ट्र हैं ।

तो आईयें जानतें हैं दूध पीनें के फायदे और नुकसान Dudh pene ke fayde के बारें में जाननें से पहलें दूध के बारें में कुछ आवश्यक जानकारी के बारें में  


गाय के दूध में पाए जानें वाले पौषक तत्व Nutritional value of cows milk


कार्बोहाइड्रेट ---------- 5.26 ग्राम

वसा         -------------- 3.25 ग्राम

प्रोटीन      ---------------- 3.22 ग्राम

विटामीन ए --------------- 28 iu

विटामीन B1---------------- 0.44 मिलीग्राम

विटामीन B2 ----------------- 0.183 मिलीग्राम

विटामीन D -------–----------- 40 IU

कैल्सियम ---------------------- 113 मिलीग्राम

मैग्निशियम ------------------- 10 मिलीग्राम

पोटेशियम -----------------------:143 मिलीग्राम

पानी --–---------------–---------- 88.32 ग्राम 

                            (प्रति 100 मिलीग्राम)





दूध पीने के फायदे और नुकसान
दूध पीने के फायदे और नुकसान


भैंस के दूध में पाए जानें वालें पौषक तत्व Nutritional value of Buffalo milk


प्रोटीन ---------------- 3.5 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट----------- 4.9 ग्राम 

वसा (फेट)-------------- 6.0 ग्राम

सैचुरेटेड फैट----------3.8 ग्राम

पाली और मोनो सैचुरेटेड------------ 1.8 ग्राम

कोलेस्ट्राँल------------------ 17.0 मिलीग्राम

कैल्सियम -------------------- 0.15 ग्राम

विटामीन A -------------------- 90 mcg

विटामीन‌ D ---------------------- 1.0 mcg

फास्फोरस ---------------------- .09 ग्राम

सोडियम ------------------------ .03 ग्राम

पोटेशियम ----------------------- 0.1 ग्राम

ऊर्जा ------------------------------ 85 Kcal.

                                  ( प्रति 100 मिलीग्राम )


दूध पीने के फायदे

मांसपेशियां मज़बूत बनती हैं 


दूध में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मौजूद रहता हैं जिससे शरीर की मांसपेशी मज़बूत बनती हैं । दूध पीनें वालें व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत कम क्षतिग्रस्त होती हैं साथ ही क्षतिग्रस्त मांसपेशी बहुत शीघ्रता से जुडती हैं । प्रोटीन शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और नयें ऊतकों के निर्माण का कार्य करता हैं ।

हड्डीयाँ मजबूत बनती हैं 


दूध में मोजूद कैल्सियम, फास्फोरस और विटामीन‌ D हड्डीयों के स्वास्थ्य को बनायें रखता हैं । प्रतिदिन 300 मिलीलीटर दूध पीनें वाले व्यक्ति को ओस्टियोपोरोसीस होनें की संभावना उन लोगों के मुकाबले जो दूध नहीं पीतें हैं के मुकाबलें 90 प्रतिशत कम होती हैं ।

दूध पीनें से चोंट के दौरान हड्डी फ्रेक्चर होनें की संभावना बहुत कम हो जाती हैं ।

The lancent  journal में लिखे गये लेख के अनुसार नियमित दूध या दूध उत्पाद का सेवन रिकेट्स होनें की संभावना नगण्य कर देता हैं ।

दाँतों को मज़बूत बनाता हैं

दूध में मोजूद फास्फोरस और विटामीन‌ D बच्चों एंव बड़ों के दाँतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता हैं । दूध पीनें से समय से पहलें दाँत गिरनें की समस्या से निजात मिलती हैं। दाँतों पर प्लांक जमनें की समस्या से मुक्ति मिलती हैं ।

 मस्तिष्क का सही विकास होता हैं

दूध पीनें से मस्तिष्क का सही विकास होता हैं । मां के दूध के बाद बच्चे के विकास के लिए गाय का दूध सर्वोत्तम माना जाता हैं , प्रतिदिन गाय का दूध पीनें से बच्चें का मस्तिष्क बहुत तेजी से विकसित होता हैं ।

दूध अवसाद से बचाता हैं 

दूध में मौजूद पोटेशियम,सोडियम और कैल्सियम स्ट्रेस ब्रस्टर Stress burster का काम करतें हैं । अत:तनाव को दूर करनें के लिए रात को दूध का सेवन करना चाहिए ।

• तनाव प्रबंधन के उपाय

हाई फेट high fat दूध वजन बढ़ाता हैं


दुबले पतले व्यक्ति यदि वज़न बढानें की कोशिश कर रहें हैं तो उन्हें प्रतिदिन मलाईयुक्त दूध का सेवन करना चाहिए ।

खिलाड़ियों के लिए दूध के फायदें

खेलों की दुनिया में नाम चाहनें वाले खिलाड़ी जो विगन vegan हैं उनके लिए दूध किसी वरदान से कम नहीं हैं । ऐसें खिलाड़ी यदि प्रतिदिन दूध का सेवन करतें हैं तो खेलों में बहुत शीघ्रता से नाम रोशन करतें हैं ।

आंखों के लिए दूध के फायदें


दूध में मौजूद विटामीन ए आंखो के स्वास्थ को उत्तम बनाए रखता हैं । प्रतिदिन दूध के सेवन से आंखो में चश्मा नहीं लगता हैं,मोतियाबिंद होनें की संभावना कम हो जाती हैं । 

समय समय पर आँखों में दूध से निकली मलाई का अंजन करनें से मोबाइल,कम्प्यूटर से निकलनें वाली रोशनी से आँखें सुरक्षित रहती हैं । और Digital eye strain की समस्या नहीं होती हैं । 


दूध वजन नियत्रिंत करता हैं 

स्किम्ड दूध जिसमें वसा की मात्रा 0.3 प्रतिशत होती हैं का सेवन वज़न नियंत्रित करता हैं । प्रतिदिन दो गिलास स्किम्ड मिल्क का सेवन करनें से मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ जाती हैं और इस तरह शरीर से अतिरिक्त वसा ऊर्जा के रूप में बाहर निकल जाती हैं ।

गर्भावस्था में दूध पीनें के फायदे

गर्भवती महिलाओं के लिए दूध पीना सम्पूर्ण आहार माना जाता है दूध के सेवन से माता और गर्भस्थ शिशु का सम्पूर्ण विकास होता हैं । 

गर्भावस्था के दौरान दूध का सेवन करनें वाली महिलाओं के बच्चें कम रोने वाले,कम चिड़चिड़े और बहुत खुशमिजाज होते हैं ।

गर्भावस्था में दूध पीना अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में बहुत फायदेमंद होता हैं क्योंकि दूध बहुत जल्दी पच जाता हैं जबकि दूसरे खाद्य पदार्थ बहुत देर से पचते हैं इस कारण स्त्री को बदहजमी, उल्टी, सिरदर्द जैसी समस्या नहीं होती हैं ।

कामोत्तेजना बढ़ाने में दूध के फायदे


भैंस का दूध पीनें से स्त्री और पुरुष दोनों की कामोत्तेजना बढ़ती हैं । यदि रात को सोने से एक घंटे पहले एक गिलास दूध स्त्री और पुरूष दोनों पीना शुरू कर दें तो कामोत्तेजना में उल्लेखनीय सुधार आता है । 

पुरूष जल्दी स्खलित हो रहें हो तो भैंस के दूध में समान मात्रा में पानी मिलाकर पीना चाहिए ।

दूध पीनें से पुरुष के शुक्राणु की गति बढ़ती है जबकि स्त्री के अंडाणु स्वस्थ बनते हैं ।

दूध पीनें से त्वचा कोमल होती हैं 

दूध में मौजूद केसिन नामक प्रोटीन त्वचा की मृत कोशिकाओं की मरम्मत कर नई कोशिका का निर्माण करनें में मदद करता हैं । यदि प्रतिदिन एक गिलास दूध खाली पेट पीया जावें तो चेहरें की त्वचा चमकीली और तंदुरुस्त रहती हैं ।

दूध में पानी मिलाकर दूध पीनें के फायदे

दूध का औसत Ph value 6 से 7.50 के बीच होता हैं जो अम्लीय होता हैं पानी का ph value 7 से 8 के बीच होता हैं। जो कि उदासीन से लेकर हल्का क्षारीय होता हैं । यदि हम दूध में उसके भार के मान से 25 प्रतिशत पानी मिलाकर पीतें हैं तो यह मिश्रण हमारें रक्त के ph value के बराबर हो जाता हैं । इस तरह दूध और पानी मिलाकर पीनें से रक्त के सभी अवयव जैसें RBC,WBC आदि अपनें स्वस्थ और नियत अनुपात में बनें रहतें हैं ।

बालों के लिए दूध पीनें के फायदे

दूध में मौजूद प्रोटीन और कैल्सियम बालों को झड़नें से रोकतें हैं । रोज एक गिलास दूध के सेवन से बाल झड़नें और दोमुंहे होनें जैसी समस्या नहीं पैदा होती हैं ।

आपरेशन होनें के बाद दूध पीनें के फायदें


आपरेशन या सर्जरी होनें के बाद प्रतिदिन 300 मिलीलीटर गाय का दूध या डबल टोंड दूध नियमित रूप से पीनें से आपरेशन या सर्जरी के बाद रिकवरी बहुत तीव्र गति से होती हैं और व्यक्ति हास्पिटल से जल्दी डिस्चार्ज होता हैं ।

महिलाओं के स्तनों का सही विकास होता हैं 

जिन महिलाओं के स्तन पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रहें हैं ऐसी महिलाओं को नियमित रूप से भैंस का दूध सेवन करना चाहिए क्योंकि दूध में मौजूद कैल्सियम स्तन ग्रंथि को विकसित करनें में मदद करता हैं ।

दूध पीनें से कुपोषण समाप्त होता हैं 

दूध में अश्वगंधा, शतावर जैसी औषधियाँ मिलाकर कुपोषित बच्चों को दूध पीलानें से कुपोषित बच्चा अतिशीघ्र सामान्य बच्चों के समान वज़न वाला हो जाता हैं ।

दूध पीनें से पाचन तंत्र सुधरता हैं


दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड़ पाचन तंत्र को सही करता हैं । यदि किसी व्यक्ति को भोजन नहीं पच रहा हैं तो भोजन की मात्रा आधी कर आधी मात्रा दूध की रखें या रोटी दूध के साथ मिलाकर खायें ऐसा करनें से पेट से पर्याप्त मात्रा में पाचक रस  स्त्रावित होना शुरू हो जाता हैं ।

दूध पीनें से कैंसर नहीं होता हैं 


दूध में मौजूद विटामीन और खनिज लवण शरीर में कैंसर कोशिकाओं को विकसित होनें से रोकतें हैं । यदि प्रतिदिन गाय का दूध का सेवन किया जावें तो कैंसर होनें की संभावना नगण्य हो जाती हैं। 

एक तथ्य यह भी हैं कि कैंसर कोशिकाओं की प्रकृति क्षारीय होती हैं जबकि दूध अम्लीय होता हैं जिससे कैंसर कोशिकाओं का विकास बाधित होता हैं ।

रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानें में दूध के फायदें

गाय के दूध में पाया जानें वाला पीलापन इसमें मौजूद कैरोटीन के कारण होता हैं यह कैरोटीन युक्त दूध पीनें से मनुष्य की रोगप्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती हैं ।

दूध पीनें से लम्बाई बढ़ती हैं 


ऊँटनी के दूध में कैल्सियम की मात्रा गाय और भैंस के दूध की अपेक्षा बहुत अधिक होती हैं। ऊँटनी के दूध में मौजूद कैल्सियम हड्डीयों का विकास बहुत तेजी से करता हैं जिससे लम्बाई बढ़ती हैं । अत:लम्बाई बढ़ाने के इच्छुक व्यक्ति को ऊँटनी का दूध अवश्य पीना चाहियें ।

दूध पीनें से पागल आदमी ठीक हो सकता हैं 


गधी का दूध अत्यंत शीतल प्रकृति का होता हैं इस दूध को यदि पागल आदमी को पिलाया जाए तो उसका दिमाग बहुत जल्दी ठीक होता हैं ।

श्वास और टीबी में दूध के फायदें


बकरी और भेड़ का दूध औषधीय गुणों से संपन्न होता हैं यह दूध यदि श्वास रोगीयों और टीबी ग्रस्त रोगीयों को पिलानें से उनकी बीमारी ठीक हो जाती हैं। 

दूध प्राकृतिक टीकाकरण का काम करता हैं

गाय,भैंस,बकरी,ऊँट,और भेड़ के बच्चा पैदा होनें से पाँच दिन तक निकला दूध पीनें से शरीर का प्राकृतिक टीकाकरण हो जाता हैं ऐसा दूध सभी बीमारीयों के विरूद्ध शरीर में एँटीबाडी बनाता हैं ।

दूध पीनें से माहवारी नियमित होती हैं 


दूध में मोजूद प्रोटीन और कैल्सियम गर्भाशय की आंतरिक दीवारों की कोशिकाओं की मरम्मत कर अत्यधिक रक्तस्त्राव को नियंत्रित करता हैं । यदि प्रतिदिन सुबह शाम एक गिलास दूध महिलाएं सेवन करें तो माहवारी नियमित होकर अधिक रक्तस्राव की समस्या से निजात मिलती हैं।


 दूध कितने प्रकार के होतें हैं Types of milk in hindi


स्किम्ड मिल्क क्या होता हैं what is skimmed milk in hindi


जब संपूर्ण दूध में से फैट या वसा को निकाल लिया जाता हैं तो इस प्रकार के दूध को स्किम्ड मिल्क कहतें हैं । स्किम्ड मिल्क में वसा का स्तर 0.3 प्रतिशत होता हैं । जबकि प्रोटीन 10 ग्राम होता हैं ।

टोंड और डबल टोंड मिल्क क्या होता हैं what is tond And Double tond milk in hindi

जब सम्पूर्ण दूध में से वसा को एक बार निकाला जाता हैं तो यह टोंड मिल्क कहलाता हैं जबकि दो बार वसा निकालनें पर यह डबल टोंड मिल्क कहलाता हैं । टोंड मिस्क में वसा 3 प्रतिशत होता हैं वही डबल टोंड मिल्क में वसा 1.5 प्रतिशत रहता हैं । 

स्टेण्डर्ड मिल्क क्या होता हैं standard milk 


सम्पूर्ण दूध में से वसा की मात्रा निकालकर इसे 4.5 प्रतिशत के स्तर पर लाकर इसे पीनें लायक बनाया जाता हैं ।

फिल्ड मिल्क क्या होता हैं 

सम्पूर्ण दूध में से वसा निकालकर उसके स्थान पर वनस्पति वसा मिलाई जाती हैं ।

रि कम्बाइन्ड मिल्क what is Recombined milk in hindi


बटर आइल, स्किम्ड मिल्क और पानी मिलाकर जो दूध बनाया जाता हैं उसे रिकम्बाइण्ड मिल्क कहतें हैं ।

रिकन्स्ट्यूट मिल्क what is Reconsitute milk in hindi

जब दूध पावडर को पानी में मिलाकर दूध बनाया जाता हैं तो इसे रिकन्स्ट्यूट मिल्क कहतें हैं ।

सिंथेटिक दूध के बारें में यहाँ जानें 

आयुर्वेद अनुसार दूध पीनें के फायदे benefit of drinking milk according to expert of Ayurveda


अत:क्षीराणिवक्षयन्तेकर्मचैषांगुणाश्चये।अविक्षीरमजाक्षीरंगोक्षीरंमाहिषंचयत्।।उष्ट्रीणामथनागीनांवडवाया:स्त्रियास्तथा।प्रायशोममधुरंस्त्रिग्धंशीतंस्तन्यंपय:स्मृतम्।।प्रीणनंबृंहणंवृष्यंमेध्यंबल्यंमनस्करम् ।जीवनीयंश्रमहरंश्वासकासनिबहर्णम्।।हन्तिशोणितपित्तश्चजसन्धानंविहतस्यच।सर्वप्राणभृतांसात्म्यंशमनंशोधनंतथा।।तृष्णान्घंदीपनीयंचश्रेष्ठक्षीणक्षतेषुच।पाण्डुरोगेम्लपित्तेचशोषेगुल्मेतथोदरे।।अतीसारज्वरेदाहेश्चयथौचविधीयते।।योनिशुक्रप्रदोषेषुमूत्रेष्वप्रसरेषुच।।पुरीषेग्रथितेपथ्यंवातपित्तविकारिणाम्।।नस्यालेपावगाहेषुवमनास्थापनेषुच।।विरेचनेस्नेहनेचपय:सर्वत्रयुज्यते।यथाक्रमंक्षीरगुणानैकैकस्यपृथक्।।अन्नपानादिकेध्यायेभूयोवक्ष्याम्यशेषत:
आयुर्वेद मतानुसार भेड़,बकरी,गाय,भैंस,ऊँटनी,हथनी,घोड़ी, स्त्री इनका दूध शीतल ,मीठा,चिकना,मांसवर्धक,वीर्यवर्धक, बुद्धि वर्धक, बलवर्धक श्वास और कास का नाश करनें वाला ,टूटे स्थान को जोड़नें वाला,रक्त को शुद्ध करनें वाला,तृष्णा का नाश करनें वाला होता हैं ।

पाण्डुरोग,अम्लपित्त,शोध,गुल्म,उदररोग,अतिसार, ज्वर,दाह,सूजन,योनि दोष,शुक्रदोष,मूत्ररोग,में दूध का सेवन करवाना चाहिए। दूध का सेवन करनें से वात और पित्त रोगों का शमन होता हैं ।


चरक संहिता में लिखा हैं 

उपवासाध्वभारस्त्रीमारूतातपकम्मभि:।क्लान्तानामनुपानाथर्पय:पथ्यंयथामृतम्।।

अर्थात उपवास में,बहुत थके हुये व्यक्ति, स्त्री के साथ संभोग के बाद,अन्य कामों की अधिकता से शारीरिक मानसिक रूप से थके व्यक्तियों के लिए दूध अमृत के समान लाभकारी होता हैं 


दूध पीनें के नुकसान 


यघपि दूध पीनें के असंख्य फायदें हैं लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं जैसें

० दूध में मौजूद लैक्टोज से कई लोगों को एलर्जी की समस्या होती हैं अत:ऐसे लोग जिन्हें दूध पीनें के बाद एलर्जी की समस्या हो उन्हें दूध पीनें से पहलें चिकितकीय परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए ।

० दूध पीनें के बाद कुछ लोगों को पेटदर्द, उल्टी और दस्त की समस्या पैदा होती हैं ऐसे लोगों को दूध नहीं पीना चाहिए ।

० कच्चा दूध किसी भी हालत में नहीं पीना चाहियें क्योंकि ऐसे दूध में अंसख्य हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद रहतें हैं जो मनुष्य को बीमार कर सकतें हैं ।

० उच्च रक्तचाप, ह्रदयरोग में दूध चिकित्सकीय सलाहनुसार ही पीना चाहिए ।

० दवाई गोली के साथ दूध तभी लेना चाहिए जब चिकित्सक ने ऐसा करनें की सलाह दी हो यदि अपनें मन से दवाई के साथ दूध ले लिया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकतें हैं ।

० एक साथ उतना ही दूध पीना चाहिए जितना शरीर की बचानें की क्षमता हो यदि एकसाथ अधिक दूध पी लिया तो दस्त,पेट में मरोड़,उल्टी जैसी समस्या हो सकती हैं ।

० गेंहू के जवारे के औषधीय गुण


० आयुर्वेद मतानुसार दूध शीतल गुण वाला होता हैं अत:जिन लोगों की प्रकृति शीत गुणों वाली हो उन्हें दूध पीनें से पहले वैधकीय परामर्श अवश्य प्राप्त कर लेना चाहिए ।

दूध में हल्दी मिलाकर पीने के फायदे



दूध मे हल्दी
दूध मे हल्दी


आजकल दूध में हल्दी मिलाकर पीने का  विशेषज्ञ सुझाव दे रहें हैं । दूध में हल्दी मिलाकर पीने के अनगिनित फायदे हैं और इसके फायदे को देखते हुये आजकल  हल्दी मिले दूध को "Golden milk " कहा जानें लगा हैं तो आईयें जानतें हैं दूध में हल्दी मिलाकर दूध पीने के फायदें Dudh pene ke fayde

० हल्दी मिला दूध कैंसर होनें की संभावना समाप्त कर शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता हैं ।

० हल्दी मिला हुआ दूध शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाकर शरीर को रोगों से बचाता हैं ।

० हल्दी मिला हुआ दूध श्वसन तंत्र की सूजन कम करता हैं जिससे अस्थमा, खाँसी,और एलर्जी की बीमारी में आराम मिलता हैं ।

० हल्दी मिला दूध त्वचा रोगों की उत्तम औषधि हैं नियमित रूप से हल्दी मिले दूध का सेवन करनें से खुजली,फंगल इंफेक्शन, त्वचा में पित्ती उछलना आदि बीमारीयों में आराम देता हैं ।

० हल्दी मिला दूध पीनें से मधुमेह होनें की संभावना समाप्त होती हैं और यदि मधुमेह हैं तो नियत्रिंत रहती हैं ।

० हल्दी मिला दूध फैटी लिवर की समस्या में आराम दिलाता हैं ।

० हल्दी मिला दूध पीने से टाइफाइड़ की बीमारी बहुत जल्दी समाप्त हो जाती हैं । इसके लिए एक गिलास गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर रात को सोने से तीन घंटें पहले पीना चाहिए ।

चरक संहिता अनुसार विभिन्न पशुओं के दूध के फायदे 

चरक संहिता में विभिन्न प्रकार के पशुओं के दूध का बहुत विस्तृत वर्णन किया गया हैं ,आईयें जानतें हैं इसके बारें में

भैंस का दूध

महिषीणांगुरूतरंगव्याच्छीततरंपय:।स्न्नेहन्यूनमनमनिद्रायहितमत्यग्नयेचतत्।।

 उपरोक्त श्लोक के अनुसार महिष अर्थात भैंस का दूध पीनें पर पेट के लिए भारी,भैंस के दूध में स्नेह या चिकनाई अधिक होती हैं। भैंस का दूध  शीतल गुण वाला होता हैं । जिन लोगों को नींद नहीं आती उन्हें भैंस का दूध सोनें से पहले पीना चाहियें । इसी प्रकार बलवान होनें की चाह रखनें वालों को भैंस का दूध सेवन करना चाहिए।

बकरी का दूध


छागंकषायमधुरंषीतंग्राहिपयोलघु।रक्तपित्तातिसारघ्नंक्षयकासज्वरापहम्।।
बकरी का दूध स्वाद में कसैला,मीठा,और पेट के लिए हल्का और पचने में आसानी वाला होता हैं। यह दूध त्वचा संबधित बीमारीयों को समाप्त करता हैं । बकरी का दूध पीनें से दस्त,खाँसी,बुखार दूर होकर फेफड़े मज़बूत बनते हैं ।

गाय का दूध

स्वादुशीतंमृदुस्निग्धंवहलंश्लक्ष्णपिच्छिलम्।गुरूमन्दंप्रसन्नच्चगव्यंदशगुणंपय:।।तदेवंगुणमेवौज:सामान्यादभिवर्द्धयेत।प्रवरंजीवनीयानांक्षीरमुक्तंरसायनम्।।

 गाय का दूध सभी दूधों में सर्वोत्तम होता हैं,गाय का दूध स्वादिष्ट, हल्का चिकना,पेट के लिए हल्का,ठंडा, और तेज बढ़ानें वाला होता हैं । 

गाय का दूध उत्तम रसायन होता हैं जिसके सेवन से बल,बुद्धि,तेज,आयु,और शुक्र धातु बढ़ती हैं । 

• गाय स्वास्थ कृषि और पर्यावरण


उंटनी का दूध


रूक्षोष्णंक्षीरमुष्ट्रीणामीषत्सलवणंलघु।शस्तंवातकफानाहक्रिमिशोफोदराशर्साम्।।

उंटनी का दूध स्वाद में नमकीन,प्रकृति में गर्म और पेट के लिए हल्का होता हैं,उंटनी का दूध पीनें से मोटापा नहीं होता हैं,पेट संबधित समस्याओं में आराम मिलता हैं। और कैल्सियम का प्रचुर स्त्रोत होनें से मनुष्य की लम्बाई बढ़ाता है।

घोड़ी का दूध कैसा होता हैं 

बल्यंस्थैय्रयकरंसर्वमुष्णश्चैकशफंपय:।साम्लंसलवणंरूक्षंशाखावातहरलघु।।

घोड़ी का दूध पीनें से शरीर मज़बूत बनता हैं, यह दूध गर्म,थोडा नमकीन और खट्टा होकर शरीर से वायु विकारों को नष्ट करता हैं ।

हथिनी का दूध


हिक्काश्वासकरन्तूष्णंपित्तश्लेष्मलमाविकम्।हस्तिनीनांपयोबल्यंगुरूस्थैय्यर्कंरंपरम्।।


हथिनी का दूध शरीर के लिए भारी,बल को बढानें वाला होता हैं । 

स्त्री का दूध 

जीवनंबृंहणंसात्म्येस्न्नेहनंमानुषंपय:।नावनंरक्तपित्तेचतर्पणश्चाक्षिशूलिनाम्।।

स्त्री का दूध परम जीवनकारक होता हैं।यह पुष्टिकारक, मनुष्य के लिए सात्म्य माना गया हैं । नेत्र रोगों में नेत्र मे डालने हेतू स्त्री का दूध बहुत लाभदायक होता हैं । 



 






टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्स इन हिंदी। Top smart health gadgets

Top smart health gadgets।टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्सस इन हिंदी  कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर जितना दबाव पैदा हुआ उतना शायद किसी भी काल...