22 सित॰ 2019

मुनगा या सहजन या सुरजना के लाभ

सहजन
 मुनगा या सहजन या सुरजना


# मुनगा या सहजन या सुरजना के लाभ :::



दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन (मुनगा)। इसकी जड़ से लेकर फूल, पत्ती, फल्ली, तना, गोंद हर चीज उपयोगी होती है। 

           आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना :- विटामिन सी- संतरे से सात गुना अधिक। विटामिन ए- गाजर से चार गुना अधिक। कैलशियम- दूध से चार गुना अधिक। पोटेशियम- केले से तीन गुना अधिक। प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना अधिक। 

            स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाते हैं। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं। 

          सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है। इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं। 

          सहजन की पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।

० नीम के औषधीय उपयोग

० मधुमक्खी पालन एक लाभदायक व्यवसाय

            सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। 

          सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है। ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है। 

            सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है, इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं। 

          सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।

            कैंसर तथा शरीर के किसी हिस्से में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में भी लाभकारी है |

            सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द तथा दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक आदि के होने का खतरा टल जाता है। 

           सहजन में अधिक मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होती है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।

           सहजन के फली की हरी सब्जी को खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है। सहजन को सूप के रूप में भी पी सकते हैं,  इससे शरीर का खून साफ होता है। 

            सहजन का सूप पीना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी के अलावा यह बीटा कैरोटीन, प्रोटीन और कई प्रकार के लवणों से भरपूर होता है, यह मैगनीज, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह सभी तत्व शरीर के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। 

            कैसे बनाएं सहजन का सूप? सहजन की फली को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। दो कप पानी लेकर इसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रख देते हैं, जब पानी उबलने लगे तो इसमें कटे हुए सहजन की फली के टुकड़े डाल देते हैं, इसमें सहजन की पत्त‍ियां भी मिलाई जा सकती हैं, जब पानी आधा बचे तो सहजन की फलियों के बीच का गूदा निकालकर ऊपरी हिस्सा अलग कर लेते हैं, इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए। 

           १. सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है। 

           २. सहजन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार है. इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है। 

          ३. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है, इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं। 

          ४. अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना फायदेमंद होता है. सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है। 

          ५. सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है, खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है। 

          ६. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भी सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है।



० तुलसी


० ह्रदयघात पूर्व संकेत और सावधानी


० प्याज के औषधीय उपयोग



० गिलोय के फायदे



० हरसिंगार के फायदे




० तुलसी के फायदे




० काला धतूरा के फायदे और नुकसान




० मोतियाबिंद क्या होता हैं

11 सित॰ 2019

मुलेठी (mulethi) के अनसुने सेहत सुधारनें वाले उपयोग

*मुलेठी एक अनमोल औषधी*
☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘



🌷 दोस्तो नमस्कार, मुलेठी की जडे ज्यादातर उपयोग मे लि जाती है जिनको *मुलेठी, मुलहठी, यष्टीमधु, जेढीमध* के नामसे भी जानां जातां है मुलेठी के चमत्कारीक फायदे जानने के लिये लेख पुरां पढे़. 

☘ *कफ- खांसी,गले मे खराश*☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ १ चम्मच मुलेठी का चूरन १ चम्मच शहद मे मिक्स करके सुबह नास्ते के बाद लिजिये | 

☘ *दिल के रोगो मे* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ १-१ चम्मच सुबह शाम गुनगुने पानी से  नास्तेके बाद लेने से काफी राहत मिलती है | 

☘ *फोडे- फुन्सी*☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ शहद के साथ मुलेठी का चुरन को मिक्स करके लगाने से ढिक होते है | 

☘ *लिवर के रोग* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ १ चम्मच सुबह खाने के बाद लेने से लिवर के रोगो से बचा जा सकतां है | 

☘ *खून बढा़ये* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ आधा ग्राम सुबह लेने से खून मे व्रृद्धि होती है | 

☘ *जलजाने पर* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ मुलहठी आैर चंदन को समान लेकर गायके धी के साथ मिलाकर लैप करने से जलन दूर होती है | 

☘ *खिल- मुंहासे* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ मुलेठी + चंदन को मिक्स करके गुलाबजल के साथ मिक्स करके लैप करने से खिल मुंहासे दूर होते है| 

☘ *मुंह कै छाले* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ १ चम्मच मुलेठी का चूरन सुबह १ कप दूध मे मिलाकर लिजिये एवं मुलेठी का चूरन को पानी मे डालकर मुंह मे भरकर कुल्ले करने से ढिक हो जाते है | 

☘ *पित्त वृद्धि* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ मुलहठी+ शतावर जड को बकरी के दूध या गायके दूध या गुनगुने पानी  के साथ लिजिये १ चम्मच सुबह -शाम | 

☘ *आंखो की रोशनी बठाने*☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ मुलेठी + शतावरजड  का चूरन मिक्स करके १ चम्मच चूरन +२ चम्मच गायका धी के साथ लेने से नंबर कम होता है रोशनी बढ़ती है | 

☘ *गांठ* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ हल्दी + मुलेठी + शहद को मिक्स करके लैप करने ये कीसी भी प्रकार की गांठ दूर होती है | 

☘ *ऐचआइवी-ऐड्स* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
☘ मुलेठी + अश्वगंधा+ शतावर जड का चूरन १ चम्मच सुबह शाम लेने से रोग प्रतिकार शकित बढ़ती है | 

☘ *पेट का अल्सर* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
⚛ सौंफबिज + गिलोय + मुलेठी को मिक्स करके सुबह शाम १-१ चम्मच लेने से पेट का अल्सर ठिक होता है | 

☘ *शुक्राणु की कमी* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
मुलेठी + अश्वगंधा + बबुल की फली + इनसे तिन गुनां मिश्री मिक्स करके सुबह शाम १-१ चम्मच दूध के साथ लेने से ताकत आती है , शुक्राणु मे व्रृद्धि होती है | 

☘ *वाइरल फिवर* ☘
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
मुलेठी + निम के पत्ते + हल्दी को मिक्स करके शहद के साथ १-१ चम्मच सुबह शाम लेने से फिवर दूर होतां है | 


० केले के औषधीय प्रयोग


० गिलोय के फायदे


० पलाश वृक्ष के औषधीय गुण


० पारस पीपल के औषधीय गुण


० पंचनिम्ब चूर्ण


० प्याज के औषधीय उपयोग


० तेल के हेरान कर देनें वाले फायदे



० अश्वगंधा



० लक्ष्मीविलास रस नारदीय के फायदे



० रूमेटाइड आर्थराइटिस


❇❇❇❇❇❇❇❇❇❇❇

10 सित॰ 2019

morning motivation WhatsApp post in hindi

1*ऐ परिंदे!!*
*यूँ ज़मीं पर बैठकर क्यों*
*आसमान देखता है..*
*पंखों को खोल, क्योंकि,*
*ज़माना सिर्फ़ उड़ान देखता है !!*


*लहरों की तो फ़ितरत ही है*
*शोर मचाने की..*
*लेकिन मंज़िल उसी की होती है, जो नज़रों से तूफ़ान* *देखता है !!

2#.*वो '' दोस्त '' मेरी नजर में बहुत '' मायने  " रखते है .*
*जो सही वक्त पर मेरे*
*सामने ''आईने '' रखते है*

3#.*जिव्हा पर विराम लगाकर देखिए*
*क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा*

*इच्छाओं को थोड़ा घटाकर देखिए*
*खुशियों का संसार नज़र आएगा*

     
4#.*मंगलमय-सुप्रभात* 🙏🌹🙏🙏 *जयहाटकेश-जयमहाकाल-जयगजानंद-ऊँसुर्यायनम:* 🌹🙏
*आर्थिक स्थिति कितनी भी अच्छी हो,*
                 *परन्तु*-
 *जीवन का आनंद तो मानसिक*
        *स्थिति पर निर्भर है।*

             *!! जयहिंद !!*

5#.*_*_जिस रफ्तार से तू निकल रही है ना जिदंगी_*

*_एक चालान तो तो तेरा भी बनता है_*

6#.
*जिन्दगी की तपिश को सहन किजिए, अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती है !*

7#.
*केवल समय ही अपना है, अगर वो सही है तो सभी अपने हैं वरना कोई अपना नहीं है!*
🌞🌞सुप्रभात🌞🌞

8#.
*जो दिल में हो उसे कहने का साहस रखो, जो दूसरों के दिल में हो उसे समझने की समझ रखो।*
🌞🌞सुप्रभात🌞🌞

9#.
-------------------------------------   🙏🏼
*कुछ हँसकर बोल दो कुछ हँसकर टाल दो,*

*परेशानियाँ तो बहुत हैं,कुछ वक़्त पर डाल दो।*

10#.🌞🚩 *मंगलमय-सुप्रभात* 🚩🌞
🙏🏻🌺 *जयहाटकेश-जयमहाकाल-जयशनिदेव-जयहनुमान* 🌺🙏🏻
👇🏽👇🏽 *ध्यान रखें* 👇🏽👇🏽
*कोई साथ हो या ना हो,पर*

*याद रखो प्रभु हमेशा हमारे साथ है !!*🙏🏻🌺
🙏🏻🥁

5 सित॰ 2019

सोरायसिस क्यों होता हैं



                *सोरायसिस(Psoriasis)*

🔻सोरायसिस क्रॉनिक यानी बार बार होनेवाला आॅटोइम्यून डिजीज हैं। इसके कारण त्वचा पर लाल और सफेद रंग के धब्बे हो जाते है। वैसे तो यह रोग 2-3 प्रतिशत के लोगों में ही पाया जाता है लेकिन फिर भी इस रोग में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है। इस समस्या का इलाज न करवाने पर यह बार-बार होती रहती है। इसके बारे में पूरी जानकारी होने पर आप इसका सही इलाज करवा सकते है।

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦
*आइए जानते है 6 तरह में पाई जाने वाली इस बीमारी के बारे में।*

🔹 *1. प्लेक सोरायसिस*
8-10 प्रतिशत लोगों में होने वाली इस समस्या के कारण शरीर पर सिल्वर और सफेद रंग की लाइन बन जाती है। कोहनी, घुटने, स्कैल्प और पीठ मे नीचे होने वाला इस सोरायसिस से लाल धब्बे और जलन होने लगती है।

🔹 *2. गटेट या चित्तीदार सोरायसिस*
युवाओं में पाया जाने वाला ये सोरायसिस शरीर पर छोटे गुलाबी चित्ती सी उभर कर आती है। यह समस्या ज्यादातर बाजू, कोहनी और स्कैल्प पर पाई जाती है। इसमें तनाव, त्वचा में चोट जैसे निशान और दवाइयों का रिएक्शन होने लगता है। ज्यादातर मामलों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

🔹 *3. इन्‍वर्स सोरायसिस*

इस टाइप के सोरायसिस बाइट रेड, स्मूथ, शाइनी और बिना लाइन के होते है। यह समस्या आर्मपिट्स, ग्रोइन और स्तन के नीचे होती है। यह परेशानी पसीने और रगड़ने के कारण होती है।
🔹 *4. पस्‍चुलर सोरायसिस*

बड़ी उम्र के लोगों में पाई जाने वाली समस्या संक्रमित होती है। हाथों-पैरों में होनी वाली इस परेशानी के कारण बुखार, उल्टी और खुजली होने लगती है।

🔹 *5. एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस*
इस प्रकार के गंभीर सोरायसिस से खुजली, हार्ट रेट बढ़ जाना और शरीर का तापमान कम या ज्यादा होने जैसी समस्याएं हो जाती है। इस संक्रमित सोरायसिस का इलाज न करवाने पर निमोनिया भी हो सकता है।

🔹 *6. नेल सोरायसिस*

हाथों-पैरों के नाखूनों पर होने वाली यह समस्या अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में होती है। इसके कारण नाखून मे दर्द, नाखूनों के रंग में बदलाव, नाखूनों के अंदर चॉक जैसा तत्व भर जाता है। ज्यादातर यह समस्या फंगल इंफेक्शन के कारण होती है।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
🔻सोरायसिस को एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया से चिह्नित किया गया है। शरीर के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी को इसका कारण माना जाता है। हमारी त्वचा पुरानी कोशिकाओं को बदलने के लिए और नई कोशिकाओं का निर्माण करने में लगभग 28 दिनों का समय लेती है, लेकिन सोरायसिस से पीड़ित लोगों की त्वचा सिर्फ 4-5 दिनों में नई कोशिकाओं का उत्पादन करती है। इससे कोशिकाओं का जमना शुरू हो जाता है।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
         *सोरायसिस (छाल रोग) के लक्षण*
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
सोरायसिस एक बार बार होने वाली बीमारी है जो आपकी त्वचा को प्रभावित करती है। त्वचा पर बहुत खुजली होती है और कभी-कभी कंडीशन अधिक खराब होकर त्वचा पर सूजन हो सकती है। कई बार आप दर्द भी महसूस कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप त्वचा पर छोटे परतदार धब्बे, शुष्क, फटी त्वचा जिसमें से खून निकल सकता है। इसमें कई बार आपकी त्वचा पर छाले बनने लगते हैं। निरंतर खुजली की ज़रूरत बहुत परेशान कर सकती है। सोरायसिस जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है और जोड़ों में सूजन का कारण बन सकता है।

✍🏼✍🏼० केले के औषधीय प्रयोग 


० बैंगन के औषधीय उपयोग✍🏼✍🏼✍🏼



० पारस पीपल के औषधीय गुण



० तेल के औषधीय गुण



० गंधक के औषधीय गुण

✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼


टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्स इन हिंदी। Top smart health gadgets

Top smart health gadgets।टाप स्मार्ट हेल्थ गेजेट्सस इन हिंदी  कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर जितना दबाव पैदा हुआ उतना शायद किसी भी काल...