शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

sarkari nokri KE liye samany gyan सरकारी नौकरी के लिये सामान्य ज्ञान


sarkari nokri KE liye samany gyan
प्रश्न 1.राजधानी दिल्ली से आगरा स्थानांतरित करनें वाला शासक कोंन था ?


उत्तर = सिकन्दर लोदी ने राजधानी दिल्ली से आगरा स्थानांतरित की थी । सिकन्दर लोदी ने ही सन् 1504 में आगरा नगर की स्थापना की थी ।


प्रश्न 2.भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर कौंन था ?


उत्तर = अल्मीड़ा भारत में पुर्तगाल का प्रथम गवर्नर था ।
विधा की देवी सरस्वती
 सरस्वती माता



प्रश्न 3."दीन - ए - इलाही" धर्म किसनें चलाया था ? 


उत्तर = दीन - ए - इलाही अकबर द्धारा चलाया गया धर्म था ।


प्रश्न 4.प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान किस समय और किसके शासनकाल में भारत की यात्रा पर आया था ?



उत्तर = चीनी यात्री फा्ह्यान  सन् 399 ई.से सन् 414 तक भारत यात्रा पर आया था ।

जिस समय वह भारत यात्रा पर आया था उस समय भारत पर  "चन्द्रगुप्त द्धितीय " विक्रमादित्य का शासन था ।



प्रश्न 5.भारत में " जजिया कर " लगानें वाला प्रथम मुस्लिम शासक कौंन था ?


उत्तर = "मुहम्मद - बिन - कासिम " प्रथम मुस्लिम शासक था जिसनें अरब आक्रमण  के पश्चात सिंध में  " जजिया कर " लागू किया था ।



प्रश्न 6.एलोरा में गुफाएँ ,शैलकृत मंदिर किन धर्मों से संबध रखते हैं ?

उत्तर = बौद्ध धर्म ,जैन धर्म और हिन्दू धर्म


प्रश्न 7.भगतसिंह को फाँसी bhagat Singh KO fansi के साथ दो अन्य व्यक्तियों को फाँसी दी गई थी ? ये दो व्यक्ति कौंन थे और इन पर कौंन सा मुकदमा था ?


उत्तर = भगत सिंह के साथ फाँसी पर चढ़नें वाले व्यक्ति सुखदेव और राजगुरू थे जबकि इन पर जो मुकदमा चल रहा था उसका नाम "लाहोर षडयंत्र केस " था । 


प्रश्न 8 . आनंदमठ उपन्यास किसनें लिखा था ?


उत्तर = बंकिचन्द्र चट्टोपध्याय 


प्रश्न 9.Depressed class league दलित वर्ग संघ किसनें स्थापित किया था ?


उत्तर = डाँ.भीमराव  अम्बेड़कर द्धारा



प्रश्न 10.साँची का स्तूप sanchi ka stup किसनें बनाया था ? और sanchi ka stup किस राज्य में हैं ?



उत्तर = अशोक ने साँची का स्तूप का निर्माण करवाया था । यह स्तूप मध्यप्रदेश में स्थित हैं ।



प्रश्न 11.बाजार नियंत्रण करनें वाला शासक कौंन था ?


उत्तर  = अलाउद्दीन खिलजी 


प्रश्न 12.प्लासी का युद्ध किस सन् में और किनके मध्य लड़ा गया था ?


उत्तर = प्लासी का युद्ध plasi ka yudh सन् 1757 में अंग्रेज सेनापति राबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला के मध्य लड़ा गया था ।



प्रश्न 13. ईश्वरचन्द्र विधासागर का प्रमुख योगदान था ?



उत्तर = ईश्वरचन्द्र विधासागर उन्नीसवीं शताब्दी के प्रमुख समाजसुधारक थें । इन्होंनें ने विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया था ।



प्रश्न 14. भारत में सर्वप्रथम सोनें का सिक्का किस राजवंश ने जारी किया था ?


उत्तर = कुषााा




प्रश्न 15.भारत में स्थित सर्वाधिक प्राचीन पर्वत कौंन - सा हैं ?


उत्तर = अरावली पर्वत Aravali parvat




प्रश्न 16. मकराना संगमरमर makrana sangmarmar की खानें भारत के किस राज्य में स्थित हैं ?


उत्तर = राजस्थान



प्रश्न 17. रबर का सबसे ज्यादा उत्पादन करनें वाला राज्य कौंन सा हैं ?


उत्तर = केरल



प्रश्न 18.पोखरन किस राज्य में स्थित हैं ?



उत्तर = राजस्थान




प्रश्न 19.राज्यसभा का अध्यक्ष कोंन होता हैं ?



उत्तर = भारत का उप - राष्ट्रपति



प्रश्न 20.प्रथम लोकसभा स्पीकर pratham loksabha speaker कोंन थें जिनके विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था ?


उत्तर = जी.वी.मावलंकर 



प्रश्न 21. वित्त विधेयक किस सदन में प्रस्तुत किया जाता हैं ?



उत्तर = लोकसभा में 



प्रश्न 22. सर्वसम्मति से चुने गये भारत के एकमात्र राष्ट्रपति कोंन थे ?


उत्तर = नीलम संजीव रेड्डी 




प्रश्न 23.लोकसभा और राज्यसभा की प्रथम संयुक्त बैठक किस विधेयक के सन्दर्भ में हुई थी ?



उत्तर =  दहेज उन्मूलन विधेयक के संबध में


प्रश्न 24. आपातकाल में किसी राज्य विधानसभा की अवधि कौंन बढा सकता हैं ?


उत्तर = संघीय संसद 




प्रश्न 25. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों की अधिकारिता में आनें वाला मामला कौंन सा हैं ?


उत्तर = मूल अधिकारों का प्रवर्तन




प्रश्न 26 .भारत का संविधान कब स्वीकृत हुआ था ?


उत्तर = 26 नवम्बर 1950



प्रश्न 27.सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म स्थान कौंन सा हैं ?


उत्तर = करमसद (गुजरात)


प्रश्न 28. इंटरपोल क्या हैं interpol kya hai 



उत्तर = इंटरपोल एक अन्तर्राष्ट्रीय पुलिस संगठन हैं ।




प्रश्न 29.E-mail की खोज किसनें की थी ?


उत्तर = रे टामलिसन 



प्रश्न 30. w.h.o. द्धारा दिया गया कोरोना वायरस का आधिकारिक नाम क्या हैं ?


उत्तर = कोवाइड़ - 19



प्रश्न 31.Yuan युयान किस देश की मुद्रा हैं yuan kid desh ki mudra hai



उत्तर = चीन की 



प्रश्न 32.सार्क का सचिवालय कहाँ हैं saarc ka sachivaly knha hai  



उत्तर = काठमांडू (नेपाल)



प्रश्न 33.किस एकमात्र भारतीय महिला  को भारत रत्न ,नोबल पुरूस्कार और रेमन मैगसेस पुरूस्कार से सम्मानित किया जा चुका हैं ?



उत्तर = मदर टेरेसा 


प्रश्न 34. W.T.O. ka mukhyalay knha sthit hai W.T.O.का मुख्यालय कहाँ स्थित हैं ?


उत्तर = जेनेवा 


प्रश्न 35.अंकलेश्वर किल राज्य में हैं ?


उत्तर = गुजरात में



प्रश्न 36. विश्व की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कौंन थी visv ki pahli mahila antriksh yatri kon thi



उत्तर = वेलेन्तीना तेरेशकोवा Valentena Tereshkova 



प्रश्न 37. हरित क्रान्ति के जनक harit kranti KE janak कौंन थे ?



उत्तर = एम.एस. स्वामिनाथन 


प्रश्न 38. आपरेशन फ्लड़ क्या हैं operation flood kya hai



उत्तर = आपरेशन फ्लड़ दुग्ध उत्पादन में क्रान्तिकारी बदलाव लानें की परियोजना हैं । 



प्रश्न 39.जिम कार्बेट नेशनल पार्क कहाँ स्थित हैं ?


उत्तर = उत्तराखंड़



प्रश्न 40.बाँदीपुर राष्ट्रीय पार्क कहाँ स्थित हैं ? 


उत्तर = कर्नाटक


प्रश्न 41. नोबल पुरूस्कार किसके द्धारा दिया जाता हैं?


उत्तर = रायल स्वीडिश अकादमी द्धारा


प्रश्न 42.सोवियत कास्मोड्रोम से प्रक्षेपित भारत का प्रथम सेटेलाइट था ?


उत्तर = आर्यभट्ट



प्रश्न 43.नागार्जुन सागर बाँध किस नदी पर बना हैं ?


उत्तर = कृष्णा नदी पर 



प्रश्न 44.मदर टेरेसा मूलत किस देश की थी ?


उत्तर = अल्बानिया



प्रश्न 45. विश्व पर्यावरण दिवस World environment day किस तारीख़ को मनाया जाता हैं ?


उत्तर = 5 जून 



प्रश्न 46.B.C.G.टीकाकरण Tikakaran किस बीमारी से बचाव हेतू किया जाता हैं ?


उत्तर = टी.बी.की रोकथाम के लिये



प्रश्न 47. मेकमोहन रेखा किन देशों के बीच अवस्थित हैं ?


उत्तर = भारत और चीन


प्रश्न 48.जिन ग्रहों के कोई उपग्रह नही हैं ?


उत्तर = बुध और शुक्र


प्रश्न 49.हाइग्रोमीटर से क्या मापन किया जाता हैं ?


उत्तर = वायुमंड़लीय आद्रता


प्रश्न 50.विश्व का सबसे बड़ा फूल कोंन सा हैं ?


० कोरोना वायरस का नया नाम



रविवार, 23 फ़रवरी 2020

MR खसरा रूबैला टीकाकरण के बारें में पूछे जानें वालें सामान्य प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न १ .खसरा रोग क्या हैं तथा यह कैसे फैलता हैं ?
मीजल्स खसरा रूबैला टीकाकरण
MR tikakaran


उत्तर = खसरा वायरस से फैलने वाला जानलेवा रोग हैं । खसरा रोग के कारण khasara rog ke karan बच्चों में विकलांगता या असमय मृत्यु हो सकती हैं ।


प्रश्न २.खसरा रोग कैसे फैलता हैं ?




उत्तर = खसरा  एक संक्रामक रोग sankramak rog हैं जो खसरा प्रभावित व्यक्ति के छींकनें ,खाँसने से फैलता हैं ।



प्रश्न ३.खसरा के लक्षण khasara KE lakshan क्या हैं ?


उत्तर = खसरे के लक्षण khasare KE lakshan निम्न हैं


१.चेहरें या शरीर पर गुलाबी लाल दानें या चकतें होना ।


२.अत्यधिक बुखार ।


३.खाँसी khansi


४.नाक बहना


५.आँखों का लाल होना




प्रश्न ४.खसरा - रूबैला टीकाकरण MR tikakaran किन - किन बीमारीयों से सुरक्षा प्रदान करता हैं ?




उत्तर ::: खसरा - रूबैला टीकाकरण MR tikakaran खसरा और रूबैला बीमारीयों से सुरक्षा प्रदान करता हैं ।


प्रश्न ५.यदि गर्भवती स्त्री को MR tikakaran से प्रतिरक्षित कर दिया जायें तो क्या होनें वाला बच्चा congenital rubella syndrome से सुरक्षित रहेगा ।


उत्तर = हाँ,यदि गर्भवती स्त्री को रूबैला के प्रति प्रतिरक्षित कर दिया हैं तो होनें वाला बच्चा congenital rubella syndrome से सुरक्षित रहेगा ।


प्रश्न ६.यदि बच्चे को M.R.टीकाकरण tikakaran पूर्व में लगाया जा चुका हैं तो क्या दोबारा M.R.tikakaran करवाया जा सकता हैं ?


उत्तर = हाँ, यदि बच्चों को पहले M.R.टीकाकरण M.R.tikakaran करवाया जा चुका हैं तो अतिरिक्त खुराक के रूप में टीकाकरण tikakaran करवाया जा सकता हैं । यह टीकाकरण आपके बच्चें को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता हैं । 


प्रश्न ७.M.R.tikakaran के बाद बच्चों में कुछ स्वास्थ्य संबधी नकारात्मक लक्षण दिख सकते हैं ?


उत्तर = कुछ सामान्य स्वास्थ्य संबधी नकारात्मक लक्षण दिखाई दे सकतें हैं जैसें चिंता व घबराहट परंतु इनसे ड़रने की आवश्यकता नही हैं ।




प्रश्न ८.खसरा रोग कितना गंभीर हो सकता हैं ?


उत्तर = पाँच वर्ष से कम के बच्चों और 20 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में खसरा जानलेवा सिद्ध हो सकता हैं क्योंकि इसके कारण होनें वाले अतिसार ,निमोनिया और मस्तिष्क के संक्रमण की वज़ह से मृत्यु हो सकती हैं ।



प्रश्न ९.खसरे का इलाज khasare ka ilaj हैं या नही ?



उत्तर = खसरे का इलाज khasare ka ilaj अब तक नहीं खोजा गया हैं ,सिर्फ टीकाकरण tikakaran द्धारा ही इससे बचाव किया जा सकता हैं ।



  
प्रश्न १०.खसरा पीड़ित व्यक्ति को क्या करना चाहियें ?


उत्तर =

१.आराम करना चाहियें ।

२.तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहियें ।

३.बुखार को नियंत्रित करना चाहियें ।


४.मरीज को विटामीन A की दो खुराक दी जानी चाहियें ।


प्रश्न ११.रूबैला के लक्षण Rubbela KE lakshan क्या हैं ?


उत्तर =

१.बच्चों में खुजली 


२.कम डिग्री का बुखार 


३.मितली (उल्टी)


४.नेत्र शोध conjutivitis


५.कान के पिछे और गर्दन  सूजी हुई ग्रंथियाँ


६.वयस्कों विशेषकर महिलाओं में जोड़ों में दर्द 




प्रश्न १२.यदि कोई महिला  गर्भावस्था के प्रारंभ  में रूबैला वायरस से संक्रमित हो गई तो इसका क्या परिणाम होता हैं ?




उत्तर = गर्भावस्था की शुरूआत में रूबैला वायरस rubbela virus से संक्रमित हो गई स्त्री के बच्चोंं मेंं congenital rubella syndrome विकसित हो जाता हैं । जो की नवजात के लिये  बेहद गंभीर  और जानलेवा होता हैं ।



यह शिशु को जीवनभर के लिये विकलांग बना देता हैं ,जिसके उपचार शल्य क्रिया पर बहुत अधिक पैसा खर्च होता हैं ।

इस संक्रमण के कारण गर्भपात,premature डिलेवरी या मृत शिशु का जन्म हो सकता हैं ।



प्रश्न १३.जन्मजात रूबैला सिंड्रोम congenital rubbela syndrome क्या हैं ?


उत्तर = जन्मजात रूबैला सिंड्रोम रूबैला वायरस rubbela virus जनित रोग हैं । जिसके कारण बहुत से रोग जैसें आँखों में ग्लूकोमा  ,मोतियाबिंद ,कानों के रोग जैसें सुनने की शक्ति कम होना। मस्तिष्क के रोग जैसें माइक्रोसिफली,मानसिक विकास में अवरोध तथा ह्रदय के विकास को प्रभावित करनें वालें रोग होतें हैं ।


प्रश्न १४.रूबैला से बचाव rubbela se bachav के क्या तरीकें हैं ?


उत्तर = रूबैला से बचाव rubbela se bachav का अब तक ज्ञात एकमात्र तरीका टीकाकरण tikakaran ही हैं ।



प्रश्न १५.M.R.टीकाकरण tikakaran कहाँ किया जाता हैं?



उत्तर = M.R.tikakaran सभी सरकारी अस्पतालों , तथा आंगनवाड़ी में लगाया जाता हैं ।


प्रश्न १६.क्या M.R.टीकाकरण मुफ्त हैं ?


उत्तर = जी हाँ, M.R.टीकाकरण पूरी तरह से मुफ़्त हैं ।


प्रश्न १७.क्या M.R.vaccine के कोई दुष्प्रभाव ( side effects ) हैं ? 


उत्तर= M.R.vaccine बहुत सुरक्षित vaccine हैं जो पिछलें 40 वर्षों से दुनिया के करोड़ों बच्चों को दी जा रही हैं । यह vaccine विश्व स्वास्थ्य संगठन ( W.H.O.) के मापदंड़ों पर पूरी तरह खरा उतरा हैं ।



प्रश्न १८.M.R.टीकाकरण के लियें बच्चों की उम्र कितनी होना चाहियें ?


उत्तर = M.R.टीकाकरण के लिये बच्चों की उम्र 9 माह से 15 साल के मध्य होना चाहियें । इस आयु वर्ग के बच्चों को यह टीका पूरे जीवनकाल में मात्र एक बार ही दिया जाता हैं । 



प्रश्न १९.किन बच्चों का टीकाकरण नही किया जाना चाहियें ?


उत्तर = टीकाकरण करते समय रखी जानें वाली सावधानी tikakaran karte samay rkhi Jane wali savdhani


1.जिन बच्चों को बुखार हो उनका टीकाकरण नहीं किया जायें ।

2.जिन बच्चों को बच्चों को गंभीर बीमारी जैसें बेहोशी ,दौरे पड़ना आदि हो उनका टीकाकरण नही करना चाहियें ।


3.जिन बच्चों को पहले लगे टीकों से कोई गंभीर एलर्जी की शिकायत हुई हो।


प्रश्न २०.M.R.टीकाकरण होनें के बाद क्या सावधानी रखनी चाहियें ?


उत्तर = बच्चे का टीकाकरण हो जानें के बाद उसे शांत और प्रशन्न रखे ।


उसे आरामदायक महसूस हो ऐसा वातावरण निर्मित  करें ।


हल्का नाश्ता - पानी उसे दें ।


यदि बच्चा टीकाकरण के बाद ज्यादा कमज़ोर थका हुआ महसूस करें तो नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या ए.एन.एम.को सूचना दें। इस अंतराल में बच्चें को लिटा दें और उसके पैरों को थोड़ा ऊँचा कर दें ।


m.r.टीकाकरण
 टीकाकरण के बाद की सावधानी

 


प्रश्न २१.क्या M.R.टीकाकरण नियमित टीकाकरण का हिस्सा हैं ?


उत्तर = वर्तमान में m.r.टीकाकरण स्कूलों तथा आउटरिच सत्रोंं में प्रारंभ किया गया हैैं । जिसे बाद


में नियमित टीकाकरण का हिस्सा बनाया जायेगा ।



० पंचनिम्ब चूर्ण


० रोटावायरस टीकाकरण


० होली पर्व स्वास्थ्य का पर्व



० पारस पीपल के औषधीय गुण




० लक्ष्मीविलास रस नारदीय के फायदे





० तनाव क्या हैं



० योग क्या हैं





० शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे


बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के नाम "कोवाइड़ - 19" के नामकरण में इतनी तेजी क्यों दिखाई

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन w.h.o.ने कोराना वायरस को नया नाम "कोवाइड़ - 19" नाम दिया हैं । इस वायरस के चीन से फैलनें और महामारी बननें के मात्र 40 दिनों में नया नाम देनें के पिछे मुख्य कारण चीन जैसें शक्तिशाली राष्ट्र का विश्व स्वास्थ्य संगठन पर दबाव डालना कहा जाय या फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन की बीमारी फैलनें के प्रति सतर्कता क्योंकि यदि इस वायरस का नाम चीन के साथ जुड़ जाता तो यह चीन की अर्थव्यवस्था,यहाँ के स्वास्थ्य तंत्र और संस्कृति को बहुत गहरे और लम्बे समय  तक प्रभावित करता ।


इसके अलावा चीन के प्रति सम्पूर्ण विश्व का एक नकारात्मक दृष्टिकोण बनता वह अलग क्योंकि इसके पूर्व जापान में फैले  बुखार को जापानी बुखार के नाम से पुकारें जानें की वजह से सम्पूर्ण विश्व में जापान की छवि बहुत  नकारात्मक बन चुकी हैं ।


किसी महामारी के नामकरण के पिछे विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन क्या हैं ?




सन् 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ मानक तय किये थे जिसमें कहा गया था की यदि विश्व के देशों में कही महामारी फैलती हैं तो इस बीमारी का नामकरण इस प्रकार होना चाहियें जिससे वह देश जहाँ से वह बीमारी फैली हैं उस देश ,शहर ,क्षेत्र का नाम बीमारी के नामकरण में में नही प्रदर्शित नही होना चाहियें ।


बीमारी के नामकरण में  ऐसे किसी पशु ,पक्षी या मानवीय समुदाय का नाम भी सम्मिलित नही होना चाहियें जिससे की उस प्रजाति का अस्तित्व खतरें में हो जायें ।


corona virus
 covid 19

कोवाइड़ - 19 नामकरण कैसे दिया गया ?


कोरोना वायरस का नया नाम w.h.o.ने कोवाइड़ - 19 दिया हैं । इसमें 

कोरोना से CO,

वायरस से VI,

डिसीज से D, 

और नये वायरस के प्रसार वर्ष सन् 2019 से 19 लिया गया हैं । इस तरह यह नया "COVID -19 " नाम दिया गया ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्धारा नया नाम रोग के कारक,रोग के लक्षणों, रोग के पड़ने वाले प्रभाव ,पीडित वर्ग आदि के आधार पर दिया जाता हैं । जिससे रोग का वैज्ञानिक नामकरण संभव हो सकें ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्धारा इस बार कोवाइड़ - 19 के नामकरण में इस बार जल्दी करनें की एक वज़ह यह भी रही की यदि लम्बें समय तक एक बड़े क्षेत्र में फैली महामारी नामकरण नही किया जाता हैं तो अनेक अवैज्ञानिक और ऐसे नाम प्रसार में आ जातें हैं जो देश,संस्कृति और प्रजाति को सम्पूर्ण विश्व में बदनाम करते हैं ।


MR टीकाकरण के बारें में पूछे जानें वालें सामान्य प्रश्न



कोरोना वायरस का टीका




तनाव क्या हैं



बबूल के फायदे



मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

वयस्कों का भी टीकाकरण होता हैं जानकर कई बीमारीयों के खतरें से आप और आपका परिवार बचा रह सकता हैं

भारत में टीकाकरण नाम आतें ही आँगनवाड़ी या स्वास्थ्य केन्द्र की वह तस्वीर मन में तैरती हैं जहाँ बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हो रहा होता हैं ।

हमारें यहाँ टीकाकरण बच्चों तक ही सीमित हैं वयस्क टीकाकरण vayask tikakaran की याद हमें तब आती हैं जब अमेरिका या यूरोपीय देशों की यात्रा करनी हो क्योंकि इन देशों में वयस्क टीकाकरण भी राष्ट्रीय टीकाकरण taste it tikakaran का हिस्सा माना जाता हैं ।

आईये जानतें है वयस्क टीकाकरण के बारें में की यह टीकाकरण किन बीमारीयों से बचाव के लिये किया जाता हैं ।


हेपेटाइटिस से बचाव हेतू टीकाकरण

Hepatitis se bachav hetu tikakaran 






हेपेटाइटिस यकृत liver से संबधित गंभीर बीमारी हैं । हेपेटाइटिस कई प्रकार की होती हैं जैसें हेपेटाइटिस ए,बी,सी, 
इस बीमारी से बचाव हेतू निश्चित अंतराल पर दो से तीन टीके लगायें जातें हैं जिससे हेपेटाइटिस बीमारी से बचाव हो जाता हैं ।



ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव हेतू टीकाकरण




ह्यूमन पैपिलोमा वायरस या HPV वैक्सीन महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से और पुरूषो को गले के कैंसर से बचाव Gale ke cancer se bachav हेतू लगाया जाता हैं ।



टाइफाइड़ से बचाव हेतू टीकाकरण



टाइफाइड़ बुखार से बचाव हेतू टीका सुई के माध्यम से और मुहँ के माध्यम से दिया जाता हैं ।

सुई के माध्यम से लगनें वाला टीका तीन बार लगाया जाता हैं । इसके लगनें में एक माह का अंतराल रखा जाता हैं जबकि मुहँ के माध्यम से किया जानें वाला टीकाकरण चार बार एक दिन छोड़कर किया जाता हैं ।

टाइफाइड़ टीकाकरण के बाद टाइफाइड़ बुखार से यह टीका दस साल सुरक्षा प्रदान करता हैं ।



इन्फ्लुएंजा से बचाव हेतू टीकाकरण 


Influenza se bachav hetu tikakaran


कोरोना वायरस ,covid 19 ,स्वाइन फ्लू,सार्स जैसी गंभीर बीमारीयों और मौसमी सर्दी जुकाम बुखार से शरीर की प्रतिरक्षा करता हैं ।

यह टीका मनुष्य के श्वसन संस्थान को मज़बूत करता हैं । साल में एक बार टीकाकरण चिकित्सकीय परामर्श से करवाना चाहियें ।



टीटनस कालीखाँसी और डिप्थीरीया से बचाव हेतू टीकाकरण 


 टीटनस कालीखाँसी और डिप्थीरीया से बचाव हेतू यह टीकाकरण दस साल में एक बार होता हैं ।

इस टीके के बूस्टर डोज भी लगतें हैं जिससे अन्य बैक्टेरियाजनित रोगों से सुरक्षा प्राप्त होती हैं ।

बड़ो के लिये टीकाकरण
 वयस्क टीकाकरण

चिकनपाक्स से बचाव हेतू टीकाकरण


chickenpox se bachav hetu tikakaran



चिकपाक्स या बडी माता छोटी माता से बचाव हेतू यह टीकाकरण होता हैं ।

पूरी जिन्दगी में इसके दो टीके लगानें की जरूरत होती हैं जो चार से आठ सप्ताह के अंतराल से लगाये जातें हैं ।



रिकाँम्बिनेंट जोस्टर वैक्सीन 


हरपिस जोस्टर बीमारी जिसमें शरीर पर दानें निकलतें हैं और इन दानों में पानी भरा रहता हैं से बचाव हेतू यह टीकाकरण होता हैं ।

यदि चिकनपाँक्स से बचाव हेतू टीकाकरण हुआ हैं तो यह टीकाकरण चिकित्सकीय सलाह के बाद करवाना चाहियें ।




मीज़ल,मम्स,और रूबेला (M.M.R.) से बचाव हेतू टीकाकरण 



मीजल्स ,मम्स और रूबेला यानि खसरा ,गलगँड और जर्मन खसरा से बचाव हेतू यह टीकाकरण होता हैं ।

यदि शिशु अवस्था में यह टीकाकरण नही हुआ हैं तो चिकित्सकीय सलाह के बाद यह टीकाकरण करवाना चाहियें ।



न्यूमोनिया से बचाव हेतू टीकाकरण 




कोरोना वायरस ,सार्स और न्यूमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव हेतू यह टीकाकरण होता हैं । यह टीका फेफड़ों को मज़बूत बनाकर इन रोगों से प्रतिरक्षा प्रदान करता हैं ।

बुजुर्ग व्यक्ति को टीकाकरण के एक डोज की ज़रूरत होती हैं जबकि युवा को एक से दो बार टीकाकरण की आवश्यकता होती हैं ।



एच.आई.वी.से बचाव हेतू टीकाकरण

H.I.V.SE BACHAV HETU TIKAKARAN


हिमोफिलियन इन्फ्लुएँजा टाइप बी वैक्सीन का एक डोज लगाया जाता हैं। यह टीका एड्स जैसी जानलेवा बीमारी से प्रतिरक्षा प्रदान करता हैं ।

एड्स से संक्रमित व्यक्ति को यह टीका नही लगवाना चाहियें   

गर्भवती स्त्री ,किसी संक्रामक या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को टीकाकरण करवानें से पूर्व चिकित्सकीय परामर्श अवश्य करवा लेना चाहियें ।





० यम और नियम




० फिटनेस के लिये सतरंगी खानपान



शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

भारतीय थल सेना Indian army में निकली महिला और पुरूष इंजिनियर की भर्ती

भारतीय थल सेना में महिला और पुरूष इंजिनियर अभ्यर्थीयों से आवेदन आमंत्रित किये हैं ।

शार्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से भरे जानें वाले इन पदों की संख्या 191 हैं ।
आर्मी में इंजिनियर भर्ती
 आर्मी भर्ती

चयन का तरीका :::


 चयन मेरिट़ के आधार छांटे गये और एस.एस.बी. इन्टरव्यू के आधार पर चयनित किये गये अभ्यर्थीयों से होगा ।

एस.एस.बी.इन्टरव्यू की प्रक्रिया पाँच दिन चलेगी जिसमें साइकाँलाजिक टेस्ट, समूह टेस्ट ,इंटरव्यू और मेडिकल होगा ।

सभी चरण सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करनें वाले अभ्यर्थीयों को 49 सप्ताह की ट्रेनिंग के लिये भेजा जायेगा ।


प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करनें वाले उम्मीदवारों को मद्रास विश्वविधालय से "पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिफेंस मेनेजमेंट एण्ड स्ट्रेटेजिक स्टडीज" की उपाधी दी जायेगी और भारतीय थल सेना में कमीशन दिया जायेगा ।


शैक्षणिक योग्यता :::


उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त विश्वविधालय से संबधित विषय में इंजिनियर की डिग्री होना आवश्यक हैं ।


उम्र :::


न्यूनतन 20 वर्ष और अधिकतम 27 वर्ष


आवेदन का तरीका :::


आवेदक 20 फरवरी 2020 तक भारतीय थल सेना की वेबसाइट http://www.joinindianarmy.nic.in/ पर जाकर करेंं।

इसके लिये नोटिफिकेशन लिंक पर जायें और शार्ट सर्विस कमीशन टेक्नीकल मेन - 55 और शार्ट सर्विस कमीशन टेक्नीकल वूमन - 26 लिंक पर अपने आवेदन भरें ।

भर्ती संबधी विस्तृत जानकारी के लिये उपरोक्त वेबसाइट का अवलोकन करें ।



















शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में सरकारी नौकरी हेतू निकली सरकारी भर्ती

जबलपुर ।। M.P.high court vacancy,mphc vacancy

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर अन्तगर्त विधिक मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (M.P.S.L.S.A.) में निज सचिव ,कम्प्यूटर आपरेटर और सहायक ग्रेड़ - 3 के नियमित Regular पदों पर देशभर के अभ्यर्थीयों हेतू भर्ती परीक्षा - 2020 का आयोजन करनें जा रहा हैं ,जिसकी विस्तृत  जानकारी निम्न हैं।


उम्मीदवार मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय M.P.High court की वेबसाइट https://mphc.gov.in/में recruitment section पर जाकर  दिनांक 26/02/2020 से आनलाईन आवेदन submit कर सकता हैं ।
जाब वेकेंसी
 सरकारी नौकरी

आनलाइन आवेदन करनें की अंतिम तिथि 16/03/2020 रात 11.59 मिनिट तक हैं । जबकि आनलाइन आवेदन में त्रुटि होनें पर सुधार करनें की तारीख 20/03/2020 से 23/03/2020 रात 11.59 तक रहेगी ।


परीक्षा का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जावेगा ।




# पदों का विवरण निम्नानुसार हैं --

# निज सचिव 

१.निज सचिव का एक पद हैं जो अनारक्षित  महिला के लियें है ।

२.इस पद की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविधालय से स्नातक  उत्तीर्ण आवश्यक हैं ।

३.उम्मीदवार को  अंग्रेजी शार्टहैंड़/टाईपिंग परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड़ /संस्था से 100 वर्ड प्रति मिनिट की दर से उत्तीर्ण होना आवश्यक हैं ।


४.  कम्पयूटर एप्लीकेशन का ज्ञान आवश्यक हैं ।


५.इस पद का वेतनमान 42100 - 135100 हैं ।



#कम्प्यूटर आँपरेटर  


१.कम्प्यूटर आपरेटर के कुल कुल 3 पद हैं ।

२.अनारक्षित महिला के लिये 3 पद हैं।

३.एक पद अनूसूचित जन जाति Shedule tribes के लिये हैं जो कि सामान्य हैं अर्थात अनूसूचित जन जाति का महिला पुरूष या ट्रांसजेंड़र  कोई भी हो ।

४.इस पद का वेतनमान 19500 - 62000 हैं ।


५.इस पद के लिये उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त बोर्ड़ /संस्था से हायर सेकण्डरी  परीक्षा या 10+2 पद्धति से हायर सेकण्डरी परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक हैं ।

६.  मान्यता प्राप्त विश्वविधालय से B.C.A.परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहियें ।

७.मध्यप्रदेश शासन से मान्यता प्राप्त संस्था से हिन्दी मुद्रलेखन की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहियें या मध्यप्रदेश ऐजेंसी फार प्रमोशनल फार इन्फारमेशन टेक्नालाजी MAP -IT द्धारा आयोजित C.P.C.T.परीक्षा उत्तीर्ण जिसनें कम्प्यूटर दक्षता और हिन्दी टाइपिंग उत्तीर्ण की हो । 



# सहायक ग्रेड़ - 3


१. सहायक ग्रेड़ - 3 के कुल 15 पद हैं ।


२.सहायक ग्रेड़ - 3 के कुल 15 पदों में से 5 पद अनूसूचित जन जाति schedule Tribes महिलाओं के लिये आरक्षित हैं.


३.7 पद अनूसूचित जन जाति के लिये सामान्य श्रेणी वालें हैं अर्थात इन पदों पर महिलाओं, पुरूषों या इस श्रेणी के ट्रांसजेंड़र में से कोई भी चुना जा सकता हैं।


४. 2 पद अनूसूचित जन जाति के भूतपूर्व सैनिक के लिये आरक्षित हैं ।


५.1 पद अनूसूचित जन जाति के दिव्यांग (अस्थिबाधित) के लिये आरक्षित हैं ।


इन पदों के लिये भर्ती नियम ,परीक्षा योजना ,आयु आदि के लिये रोजगार और निर्माण का 10 फरवरी 2020 का अंक या मध्यप्रदेश हाइकोर्ट की वेबसाइट https://mphc.gov.in/  का 

अवलोकन करें।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

बिल्वादि चूर्ण ::: शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधी

बिल्वादि चूर्ण :::

घटक द्रव्य ::: 

बिल्वादि चूर्ण के फायदे
 #बिल्वादि चूर्ण

१.बेलगिरी,


२.नागकमोथा,


३.छोटी इलायची,


४.श्वेत चंदन,


५.लाल चंदन,


६.अजवाइन,


७.अजमोदा,


८.निशोथ,


९.चित्रक छाल,


१०.विडनमक,


११.अश्वगंधा,


१२.खरेटी की जड़,


१३.पिप्पली,


१४.वंशलोचन,


१५.शुद्ध शिलाजित,



#उपयोगी :::


१.मस्तिष्क रोग,


२.स्नायु संबधी रोग,


३.उदर रोग,


४.पेट के छाले या ग्रहणी रोग,




#मात्रा :::


३ से ६ ग्राम वैघकीय परामर्श द्धारा दूध छाछ या जल के साथ





० निर्गुण्डी





० गौमुखासन



० पंचकर्म क्या हैं



०मधुमेह


कैशोर गुग्गुल त्रयोदशांग गुग्गुल



० बरगद पेड़ के फायदे



० लक्ष्मीविलास रस नारदीय के फायदे



० यम और नियम



० तनाव क्या हैं




० fitness के लिये सतरंगी खानपान



० शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे



० प्याज के औषधीय प्रयोग

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन W.H.O. के अनुसार भारत में कैंसर के आँकड़े :: जानियें भारत कैंसर के मामलों में कहाँ खड़ा हैं

हाल ही में प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि W.H.O. के आँकड़ों पर यदि गौर करें तो भारत कैंसर के मामलो में दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों मे से एक बनकर उभर रहा हैं ।
कैंसर का चिन्ह
 कैंसर


w.h.o.के अनुसार भारत में सन् 2018 के दौरान कैंसर के 11 लाख 60 हजार रोगी थे, जबकि विश्व भर में कैंसर रोगियों की संख्या 1 करोड़ 81 लाख थी यानि  पूरी दुनिया के कैंसर रोगियों में से 15.60% रोगी भारतीय थे ।

इतना ही नही प्रत्येक 10 भारतायों में से एक भारतीय को कैंसर होनें की संभावना रहती हैं यानि आज के हालात में देश के 12 लाख व्यक्ति कैंसर की संभावना वालें हैं ।


यदि कैंसर से होनें वाली मौंत के आँकड़ो पर गौर करें तो प्रत्येक 15  भारतीय कैंसर रोगीयों में से एक रोगी की मृत्यु होनें की संभावना रहती हैं इसका मतलब यह हैं कि भारत कैंसर से निपटने और इसके प्रभावी इलाज की व्यवस्था में दुनिया के अति पिछड़े राष्टों के समकक्ष माना गया हैं ।

विभिन्न प्रकार के कैंसरों की बात करें तो भारत में सन् 2018 में 11 लाख 60 हजार कैंसर के मामलों में से सर्वाधिक मामले स्तन कैंसर के (1,52000 मामले) पाये गये जबकि वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के मामले समान (18.40%) रूप से पाये गये ।

वैश्विक स्तर पर सबसे कम   प्रकार का कैंसर लीवर का कैंसर रहा  जो कि वैश्विक कैंसर का 4.70% था । भारत की बात करें तो यहाँ सबसे कम कैंसर का प्रकार कोलोरेक्टल कैंसर रहा जिसका प्रतिशत 4.90% रहा ।

भारत में दूसरे स्थान पर मुहँ के कैंसर का स्थान हैं जिसके सन् 2018 में 120000 मरीज थे जो कुल कैंसर का  9.60% था।

W.H.O के अनुसार सन् 2018 में कैंसर की वजह से 96 लाख लोग काल के गाल में समा गये। जबकि भारत में 7 लाख 84 हजार लोग कैंसर से मोंत के मुहँ में समा गयें।

 सबसे घातक रूप फेफडों का कैंसर हैं जिसकी वजह से विश्व में सर्वाधिक मौंते हुई । सन् 2018 में लगभग 17.60 लाख लोग फेफड़ों के कैंसर की वजह से मौंत के मुहँ में समा गयें ।

भारत में फेफड़ो के कैंसर वाले मरीजों की सँख्या विश्व में पाये गये कैंसर के मुकाबले काफी कम हैं क्योंकि हमारे देश में तम्बाकू  उत्पादों को धूम्रपान करनें बजाय मुहँ से खाने का चलन बहुत ज्यादा है । W.H.O. के अनुसार भारत में 68000 हजार फेफड़ों के कैंसर के मामले सन् 2018 में मिले थे ।

भारत में गर्भाशय से संबधित कैंसर भी बहुत अधिक मात्रा में प्रकाश में आ रहे हैं सन् 2018 में यह संख्या 97000 हजार थी ।

 इसी प्रकार पेट से सम्बधित कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले 57 - 57 हजार पाये गयें ।

सम्पूर्ण विश्व के साथ - साथ भारत में भी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यदि भारत को कैंसर जैसी घातक बीमारी से प्रभावी रूप से निपटना हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानको के अनुरूप करना होगा और कैंसर जैसी बीमारी के लिये शोध करने वाले अनुसंधान संस्थाओं को विश्व मानको के अनुरूप सुविधा संपन्न बनाना होगा ।


० निर्गुण्डी


० पंचनिम्ब चूर्ण


० जल प्रबंधन



० बिल्वादि चूर्ण




   

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

इस तरह का भोजन करोगे तो 100 साल जीनें की पक्की गारंटी मिलेगी

आप जानतें हैं हमारें प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों ने मनुष्य की आयु का निर्धारण सौ वर्ष माना हैं । प्राचीन काल में व्यक्ति का शतायु होना कोई अचरज की बात नही होती थी आखिर वे कौंन से खानपान के नियम थे जिनका पालन करने से व्यक्ति सौ साल की जिंदगी जीता था आईये जानतें हैं ---

भोजन
 भोजन करने के नियम


भोजन कैसा होना चाहिये ?


तस्यसाद्धुण्यमुपदेक्ष्याम : उष्णमश्नीयादुष्णंहिभुज्यमानंस्वदतेभुक्तज्ञ्चाग्निमुदीय्र्यमुददीरयति। क्षिप्रज्चरांगच्छति वात ज्चानुलोमयति श्लेष्माणज्चपरिशोषयतितस्मादुष्णमश्नीयात्।।


भोजन कैसा होना चाहियें इसका उल्लेख शास्त्रों में बहुत विस्तारपूर्वक किया गया हैं और लिखा हैं कि भोजन सदैव गर्म और ताजा ही ग्रहण करना चाहियें ।

गर्म भोजन की स्वाद शक्ति बहुत ही उत्तम रहती हैं और इस आहार से  भूख बढ़कर आहार को शीघ्रता से पचा देती हैं । वैज्ञानिक रूप से देखा जाये तो भी गर्म भोजन समस्त प्रकार के हानिकारक कीटाणुओ से मुक्त होकर शीघ्रता से पचनें वाला माना गया हैं ।


गर्म भोजन करनें से पेट की वायु शरीर से बाहर निकल जाती हैं और कफ का शोषण हो जाता हैं , इस तरह शरीर निरोगी और चुस्त बना रहता हैं ।




स्निग्धमश्नीयात् ।स्निग्धंहिभुज्यमानंस्वदते।भुक्तश्चाग्निमुदीरयतिकषिप्रंजरांगच्छतिवातमनुलोमयतिदृढीकरोति।शरीरोपचयं बलाभिवृदधिश्चोपजनयति,वर्णप्रसादमपिचाभिनिवर्तयति।तस्मात् स्निग्धमश्नीयात्।।

भोजन का कुछ भाग आपके परिश्रमानुसार  चिकना और घृतयुक्त होना चाहियें । घृतयुक्त भोजन आपकी भूख को बढ़ाता हैं । और शरीर को ताकत प्रदान करता हैं ।


आधुनिक चिकित्सक आजकल यह कहतें हुये मिल जायेंगें की मनुष्य को घृतयुक्त पदार्थों का सेवन बिल्कुल  भी नही करना चाहियें किन्तु इस बात में थोड़ी भी सच्चाई  नही हैं ।

शास्त्र कहता हैं कि अपने परिश्रम की मात्रानुसार घृतयुक्त पदार्थों का सेवन बल,बुद्धि और शरीर के लिये आवश्यक हैं ।       


भोजन कितनी मात्रा में होना चाहियें ये बात हमारें आयुर्वेदाचार्य ५ हजार साल पूर्व बता गये थे आधुनिक डायटीशियन पाँच हजार वर्ष पूर्व लिखे गये इन विद्धानों के कथनों पर सिर्फ मोहर लगा रहे हैं एक जगह लिखा हैं।


मात्रावदश्नीयात्।मात्राव्रद्धिभुक्तं वातपित्तकफानप्रपीडयदायुरेवविवर्द्धयतिकेवलंसुखंसमयकपकवंविड्भूतंगदमनुपयरयेत्नचोषमाणुमुपहनतिअवयथशचपरिपाकमेति।तस्मानमात्रावदश्नीयात।।  

अर्थात नापतोल कर किया हुआ (अन्न,सलाद,दाल,सब्जी और पानी की संतुलित मात्रा)भोजन हमारें शरीर की तीनों धातुओं वात,पित्त और कफ को समान मात्रा में रखकर शरीर को निरोग रखता हैं  और आयु में वृद्धि करता हैं ।

सही परिणाम में किया हुआ भोजन शीघ्रता से पचकर शरीर से बाहर निकल जाता हैं और अमाशय खाली रहनें से गैस ,अपच ,खट्टी डकार जैसी बीमारीयाँ परेशान नही करती हैं ।



भोजन कब करना चाहियें ?



भोजन कब करना चाहियें इस विषय पर शास्त्रों का मत हैं कि पहले का किया हुआ भोजन जब  पूर्ण रूप से पच जाये तभी नया भोजन  किया जाना चाहियें ।


यदि पहले किया हुआ भोजन नही पचा और पुन: भोजन कर लिया जाये तो पहले किये हुये भोजन का रस कुपित होकर शरीर में बीमारीयाँ उत्पन्न करता हैं ।


खुलकर भूख लगने पर भोजन करनें से ह्रदयघात की समस्या समाप्त हो जाती हैं । मल मूत्र समय पर निकलतें हैं जिससे शरीर की समस्त गतिविधि सूचारू रूप से चलती हैं ।


इष्टेदेशेश्नीयात्हैंहि देशेभुज्जोनोनानिष्टदेशजैर्मनोविघातकरेभार्वैमरनोविघातंप्राप्नोतितथेष्टै:सर्वोपकरणैस्तस्मादिष्टेदेशेतथेष्टसर्वोपकरणश्चाशनीयात्।।

अर्थात भोजन करनें वाला स्थान पूर्ण रूप से पवित्र होना चाहियें पूर्ण रूप से स्वच्छ स्थान पर भोजन करनें से रोगाणु भोजन को दूषित नही कर पाते हैं   और मनुष्य रोगरहित जीवन व्यतीत करता हुआ उत्तम आयु को प्राप्त करता हैं ।   


नातिदु्रतमश्यीनात।अतिदु्रतमं हि भुज्जानस्यउत्स्नेहमवसदनंभोजनस्याप्रतिष्ठानम् ।भोज्यदोषसादगुण्योपलब्धिनियता।तस्मान्नातिदु्रमश्नीयात्।।

भोजन यथोचित रीति से धिरे धिरे चबाकर किया जाना चाहियें यथोचित रीति से चबाकर किये गये भोजन में लार के माध्यम से समस्त पाचक रस मिलकर भोजन को पूर्ण रूप से पचा देते हैं । जबकि जल्दी - जल्दी ग्रहण किये हुये भोजन में पाचक रस नही मिल पातें और यह भोजन अनेक दोषों को उत्पन्न करता हैं ।

अपचे हुये अन्न से लकवा ,शरीर में भारीपन और मस्तिष्क से सम्बधित बीमारी होती हैं ।


   
 नातिविलम्बितमश्नीयात्।अतिविलम्बितंहिभुज्जानोनतृप्तिमधिगच्छतिबहुभुंक्तेशीतीभवतिचाहारजातंविषमपाकश्चभवति तस्मान्नातिविलम्बितमश्नीयात् 

बहुत विलम्ब से किया हुआ भोजन अर्थात भूख लगने के बहुत बाद से किया गया भोजन शरीर में विषम धातु उत्पन्न कर वात पित्त और कफ को असंतुलित कर देता हैं । फलस्वरूप मनुष्य रोग से ग्रसित  होकर जल्दी मृत्यु को प्राप्त हो जाता हैं।    

बोलकर हँसते हुये और खड़े - खड़े भोजन ग्रहण कदापि नही करना चाहियें क्योंकि ऐसा करनें से व्यक्ति एकाग्र होकर भोजन नही कर पायेगा शास्त्र मे इस विषय में लिखा हैं ।

अजल्पन्नहसन्तन्मनाभुज्जीत।जल्पतोहसतोनयमनसोवाभुज्जानस्यतएवहिदोषाभवन्तियएवातिद्रुतमश्नत: ।। तस्महिदजल्पन्नहसंस्तन्मनाभुज्जीत।।

मनुष्य को अपने शरीर की प्रकृति को देखकर भोजन का चयन करना चाहियें। उदाहरण के लिये यदि कफ प्रकृति का मनुष्य सर्दीयों  में आईस्क्रीम या अन्य ठंड़े पदार्थों का सेवन करेगा तो उसका स्वास्थ्य बिगड़ना तय हैं ।

कफ प्रकृति का मनुष्य यदि सर्दीयों में गर्म पदार्थों का सेवन करेगा तो यह उसके शरीर की धातुओं को साम्य करेगा और व्यक्ति निरोग रहकर लम्बी उम्र प्राप्त करेगा ।

इस विषय में शास्त्र कहता हैं


आत्मानमभिसमीक्ष्यभुज्जीतसम्यक्।इदंममोपशेतेइदंनोपशेतेइति।विदितंहिअस्यआत्मनआत्मसात्म्यंभवति।तस्मादात्मनात्मनमभिसमीक्ष्यभुज्जीतस्मयमगिति।।

अर्थात आत्मा को प्रिय लगने वाला भोजन और शरीर के बल अनुसार किया हुआ भोजन करनें वाला मनुष्य शरीर संबधी उत्तम सुखो को भोगता हैं ।  इसलिये मनुष्य को अपनी भूख की इच्छा को जानकर भोजन करना चाहियें ऐसा नही होना चाहियें की व्यक्ति को भूख एक रोटी की हो ओर वह दस - दस रोटी खा रहा हो ।
      



० हरसिंगार के फायदे



० धनिया के फायदे



० आयुर्वेदिक औषधी सूचि



० बाजरा पोषण वाला खाद्य



० स्वास्थ्य बढ़ानें वाली चटनी और रोटी



० निम्बू एक उपयोगी फल



० गाजरघास का उन्मूलन कैसे करें



० सीपीआर कैसें दे


० पेरासोम्निया


० कद्दू के औषधीय उपयोग



० बरगद पेड़ के फायदे



० प्याज के औषधीय प्रयोग


कोरोना वायरस का आयुर्वेदिक इलाज

*कोरोना वायरस से घबराये नहीं इस की दवा भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में वसाका नाम से वर्णित है और लक्षणों के आधार पर कोरोना वायरस काआयुर्वेदिक इलाज निम्न हैं 


कोरोना वायरस का आयुर्वेदिक इलाज
 कोरोना वायरस



*कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण


1. तेज बुखार

2. बुखार के बाद खांसी का आना

3. बेचैनी, सिरदर्द और मुख्य रूप से श्वसन संबंधी परेशानी महसूस होना


भारतीय लोगों को कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसके रोग के लक्षणों का वर्णन हमारे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में दिया हुआ है
आयुर्वेद में दवा का नाम वसाका (अरडूसा)  नाम से उपलब्ध है।



*आयुर्वेदिक इलाज


 आयुर्वेद के सभी कफ सिरफ में वसाका का उपयोग होता है इसलिए आप किसी भी कंपनी का आयुर्वेदिक कफ सिरफ ले सकते है।

*आयुर्वेदिक इलाज 

(1) गोजिव्हादि क्वाथ 10 ग्राम, 

(2)महासुदर्शन चूर्ण 01 ग्राम, 

(3)गिलोय की हरी ताजा लकड़ी 12 ईंच बड़ी, 

(4)तुलसी पत्र 5 - 7, 

(5)कालीमिर्च 3 - 4,

(6) सोंठ पाऊडर 1 ग्राम, 

(7)अडुसा के ताजा पत्र 4 - 5,

(8) हल्दी पाउडर 1 से 2 ग्राम 


इन सबको मिलाकर 250 ML पानी मे मंद आंच मे धीरे धीरे ऊबाले शेष 15 -  20  ML बचने पर सूती सफेद वस्त्र से छान कर गुनगुनाना गुनगुनाना ही पीना है।


लक्षणों से पिड़ित व्यक्ति को दिन में तीन चार बार दिया जा सकता है और स्वास्थ्य व्यक्ति को बचाव की दृष्टि से दिन मे एक बार ले सकता है।


(2). नमक या सफेद फिटकरी के पानी की भाप दिन में तीन चार बार लेनी चाहिए।


(3). प्रत्येक व्यक्ति को प्रति दिन तीन से पांच बार सरसों का तेल नांक के अंदर अंगुली से लगाते रहना चाहिए।


(4). गिलोय की हरी लकड़ी 12 ईंच, तुलसी के 8 - 10 पत्र , शुद्ध शहद एक चम्मच, एक ग्राम हल्दी पाउडर, एक ग्राम सोंठ पाउडर, 3 - 4 कालीमिर्च का पाउडर, इन सबको मिलाकर दिन में दो से तीन बार चाटना या पीना है।


(4). तालिसोमादि चूर्ण 1 ग्राम, गोदंती भस्म 250 MG, सर्वज्वरहर लौह 250 MG, शिर:शुलादि वज्र रस 250 MG, श्वासकुठार रस 250 MG, चंद्रामृत रस 250 MG, श्रृंगाराभ्र रस 250 MG, इन सबका मिश्रण शहद के साथ दिन मे तीन चार बार लेवें।


(5). संजीवनी वटी एक एक गोली दिन मे तीन से चार बार गर्म पानी से लेवे।


(6). एलादि वट्टी या मरिच्यादि वट्टी मे से कोई एक तरह की टेबलेट दिन में चार से छ बार चूसनी है।


(7).  वासकासव सिरप की तीन तीन चम्मच दवाई गुनगुने पानी के साथ दिन में तीन से चार बार लेनी है।


(8). कंटकारी अवलेह या च्यवनप्राश अवलेह की एक एक चम्मच दिन मे दो बार लेनी चाहिए। 

*यह सावधानियां अप्रैल माह तक रखें और स्वस्थ रहे*

(1). आईसक्रीम, कुल्फी, सभी प्रकार की कोल्ड ड्रिंक्स, सभी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव फूड्स, डिब्बा बंद भोजन, मिल्क शेक, कच्चा बर्फ यानी गोला चुस्की, मिल्क शेक या मिल्क स्वीटनर 48 घंटे पुराने खाने से बचे क्योंकि कोरोना वायरस गर्मी से निष्क्रिय हो जाता है इस लिए तेज़ गर्मी यानी 35℃ से ज्यादा होने तक रुके।


(2).किसी से भी हाथ नहीं मिलाए, हाथ जोड़कर ही अभिवादन करे, ओर स्वीकार करें।


(3).नांक पर हर व्यक्ति मास्क लगाकर रखें।


(4).भोजन में नोनवेज (मांसाहार) से बचे।


शुद्ध शाकाहारी भोजन का ही सेवन करें।


(5).भीड़ भाड़, मेले, धरने, प्रदर्शन जैसी जगहों से बचे या दूर रहें।


प्रत्येक औषधि चिकित्सक की सलाह से ही लेवे तथा औषधि की मात्रा आयु के अनुसार ही निर्धारित करे। इसमे लिखी गई मात्रा सामान्य युवा व्यक्ति के लिए लागु है।

     

० पलाश के औषधीय गुण     


० निर्गुण्डी के औषधीय उपयोग    


० आयुर्वेदिक औषधी सूचि 



० w.h.o.के अनुसार कैंसर के आँकड़े


० निम्बू एक फायदे अनेक


० गौमुखासन



० शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे


गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

पंचनिम्ब चूर्ण :: शास्त्रोक्त आयुर्वेद औषधी

इस लेख में मैं आपको शास्त्रोक्त आयुर्वेद औषधी "पंचनिम्ब चूर्ण " के बारें में जानकारी देंगे ।

पंचनिम्ब चूर्ण ::: शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधी

आयुर्वेदिक चूरण
 पंचनिम्ब चूर्ण 

पंचनिम्ब चूर्ण के  घटक द्रव्य   ::

१.नीम छाल


२.नीम फूल


३.नीम पत्ती


४.हरड़ 


५.बहेड़ा


 ६.आँवला


७.शुण्ठी या सौंठ


८.मरिच 


९. पिप्पली 


१०.ब्राम्ही


११.गोखरू


१२.शुद्ध भल्लाटक


१३.चित्रक


१४.विड़ंग


१५.वराहीकंद


१६.लौहभस्म


१७.गिलोय


१८.हरिद्रा (हल्दी)  


१९.दारूहरिद्रा


२०.बाकुची


२१.अश्वगंधा


२२.शर्करा 


२३.कूठ


२४.इन्द्रजौ 


२५.पाठा


२६.आसनकाष्ठ क्वाथ 


२७.  खदिरछाल क्वाथ


२८.पंचनिम्ब क्वाथ


२९.भृंगराज स्वरस


३०.नीम पत्ती क्वाथ   


    

 उपयोग :::


पंचनिम्ब चूर्ण त्वचा रोगों की सर्वोत्तम शास्त्रीय आयुर्वेद औषधी हैं यह निम्न रोगों का प्रभावी रूप से शमन करती हैं 


१.कुष्ठ

२.महाकुष्ठ


३.पित्ती उछलना 


४.एलर्जी

५.दाद


६.खाज


७.खुजली


८.व्रण


मात्रा :::

१ से ५ ग्राम चिकित्सकीय निर्देशानुसार  


  अनुपात :::

शहद


    











शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

तनावमुक्त जीवन के लिये करें यह उपाय why fitness is important



why fitness is important दुनिया में हँसना और हँसाना सिर्फ मनुष्यों की किस्मत में नसीब हैं.लेकिन आज की तनाव भरी जिन्दगी में कई लोगों के चेहरें से हँसी खुशी गायब सी हो गई हैं.लेकिन क्या आप जानतें हैं आपके खुश रहनें के पिछे कुछ विशेष हार्मोंन उत्तरदायी होतें हैं ,यदि आप खुश रहना चाहतें हो तो आसानी से इन हार्मोंन को शरीर में बढ़ाकर तनावमुक्त जीवन का आनंद ले सकते हैं,आईयें जानते हैं ऐसें हार्मोंन और उनकों बढ़ानें के प्राचीन तरीकों के बारें में





डोपामाईन  ::



यह सामाजिक, पारिवारिक जीवन में व्यक्ति को शांत,संयमित और अच्छा महसूस करवानें वाला न्यूरोट्रांसमीट़र हैं.यदि आप अपनें लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहें हैं या आपनें ऐसें बड़े लक्ष्य निर्धारित कर लियें हैं जो आपकी कार्यक्षमता से अधिक हैं तो डोपामाईन का स्तर शरीर में घट़नें लगता हैं. और मनुष्य चिड़चिड़ा ,गुस्सेल और हिंसक हो जाता हैं.लेकिन कुछ यौगिक क्रियाओं को करनें से शरीर में इसका स्तर पर्याप्त बना रहता हैं.जैसें


भ्रामरी प्राणायाम ::



भ्रामरी प्राणायाम को करनें से डोपामाईन का स्तर पूर्णत:संतुलित हो जाता हैं.इसके अलावा तनाव अनिद्रा,जैसी समस्या जड़ से समाप्त हो जाती हैं.विचार और व्यहवार सकारात्मक बनता हैं.एकाग्रता बढ़ती हैं.





विधि ::




::: सर्वप्रथम तर्जनी ऊँगली को दोंनों भोंहों के मध्य लगाते हैं.


::: मध्यमा से आँखों को बन्द करें.



::: अंगूठे से कानों को बंद करके गहरे श्वास के साथ 
"ऊँ" का उच्चारण करतें हैं जिससे भँवरें के मंडरानें के समान आवाज निकालती हैं.



:::  शुरूआत तीन से चार बार करके धिरें -  धिरें बीस से इक्कीस बार तक बढा सकतें हैं.



एस्ट्रोजन :::




महिलाओं का प्रमुख हार्मोंन हैं.इसकी कमी से तनाव,सिरदर्द, और छोट़ी--छोटी़ बातों में घबराहट़,बैचेनी बढ़ जाती हैं.माहवारी अनियमित हो जाती हैं, जिससे मानसिक तनाव हो जाता हैं.आत्मविश्वास में कमी हो जाती हैं.एस्ट्रोजन को नियमित और संतुलित करनें वाला प्राणायाम निम्न हैं-



उद्गीथ प्राणायाम:::



इस प्राणायाम को नियमित रूप से करते रहनें से एस्ट्रोजन का स्तर संतुलित रहता हैं.आत्मविश्वास बढ़ता हैं.माहवारी नियमित आती हैं.



विधि:::



::: सुखासन में बैठकर आँखें बंद करलें.



::: गहरा श्वास भरकर "ऊँ" का उच्चारण करें.



::: अन्त में दोंनों हथेलियों को रगड़कर आँखों से स्पर्श करें.


आक्सीटोसीन :::



यह हार्मोंन प्यार हार्मोंन भी कहलाता हैं.इसकी कमी सम्बंधों को बिगाढ़ देती हैं,व्यक्ति परिवार ,जीवनसाथी आदि के प्रति निष्ठुर हो जाता है फलस्वरूप तलाक अलगाव जैसी समस्या जन्म लेती हैं.मनपंसद काम नही होनें से भी इसका स्त्राव कम हो जाता हैं.इसको बढ़ानें वाला प्राणायाम निम्न हैं ::
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अनुलोम -- विलोम ::



यह प्राणायाम आक्सीटोसीन का स्तर बढ़ाकर व्यक्ति में प्रेम,ममता और संतुष्टी का स्तर बढ़ाता हैं.और काम में रूचि पैदा करता हैं.

विधि :::



::: सर्वपृथम दाहिनें हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका का छिद्र बन्द करते हैं और बांयी नासिका से श्वास गहरा श्वास लेतें हैं.

::: अब बांयी नासिका को तर्जनी और मध्यमा से बंद कर दाहिनी नासिका से श्वास छोड़तें हैं.

::: यह योगिक क्रिया दस से पन्द्रह मिनिट तक कर सकतें हैं.धिरे धिरे समय में इच्छानुसार बढ़ोतरी कर सकतें हैं.

इस प्राणायाम से ह्रदय रोग भी दूर होतें हैं.इसके अलावा कुड़लिनी जागरण,नेत्र ज्योति बढ़ती हैं.इसको नियमित रूप से करनें से शरीर से समस्त विषेैले पदार्थों बाहर निकल जातें हैं.



सिरोटोनिन :::



 यह मनुष्य को अच्छा,खुशमिजाज रखनें वाला न्यूरोट्रांसमीटर हैं.इसका स्तर घट़नें पर मनुष्य आलसी,बेपरवाह और आत्महत्या करने वाला तक हो सकता हैं.इस हार्मोंन को बढ़ानें वाला आसन निम्न हैं.

कपालभाँति :::


इस योगिक क्रिया से सिरोटोनिन का स्तर बढ़नें के अतिरिक्त वज़न नियत्रिंत होता हैं.श्वास रोग,एलर्जी, पेट़ के समस्त रोग नष्ट हो जातें हैं.

विधि :::



:::  सुखासन में बैठकर मध्यम गति से श्वास बाहर की और निकालते हैंं.श्वास लेते नहीं हैं,बल्कि श्वास अपने आप अन्दर चला जाता हैं.

::: शरूआत दस बारह बार से करके धिरें धिरें बढ़ायें.

::: इस आसन को खाली पेट़ ही करें.



प्रोजेस्ट्रोन :::



मनुष्यों को लंबी बाधारहित नींद सुलानें के लियें यही हार्मोंन जिम्मेदार माना जाता हैं..इसके अलावा स्त्रियों में मासिक धर्म से संबधित परेशानियों के लिये यही हार्मोंन उत्तरदायी होता हैं.इसका स्तर संतुलित रखनें के लिये प्राणायाम हैं::::

शवासन ::: 


यह समस्त प्रकार की मानसिक समस्या और तनावों को दूर कर शरीर के समस्त हार्मोंन को संतुलित रखनें वाला आसन हैं.

विधि :::

::: जमीन पर लेट जावें और दोनों पावों ,दोनों भुजाओं को फैला लें.

::: शरीर को शव के समान ढीला छोड़ दें.तत्पश्चात आँखे बंद कर गहरा श्वास लें और धिरें धिरें छोड़ें.

::: यह आसन पन्द्रह मिनिट से अपनी सामर्थ्यानुसार बढ़ाते रहें.

यह कुछ योगिक क्रियाएँ हैं जो शरीर में हार्मोंन का स्तर संतुलित करती हैं,इसके अलावा मनपसंद संगीत सुनने,मनपसंद जगह घुमनें,मनपसंद व्यक्ति के साथ समय गुजारनें  तथा स्वस्थ खानपान की आदतों से भी शरीर में हार्मोंन संतुलित रहकर बीमारी दूर रहती हैं.अत: हमें हर समय सकारात्मक चिंतन करते हुये अपनें आसपास के माहोल को भी हँसी ठहाकों से लबरेज रखना चाहियें. किसी ने कहा भी हैं....जीनें के है चार दिन बाकि सब बेकार दिन......... ॉॉॉ

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