रविवार, 26 फ़रवरी 2017

भारत में सड़क दुर्घटनाएँ कारण और समाधान [ROAD ACCIDENT]

सड़क दुर्घट़ना
 सड़क दुर्घट़ना का दृश्य
#भारत में सड़कों के माध्यम से होनें वाला माल एँव यात्री परिवहन का क्षेत्र सर्वाधिक  हैं,जहाँ सम्पूर्ण यात्री परिवहन का 87% तथा माल परिवहन का 65% सड़कों के माध्यम से पूरा होता हैं.किन्तु इस मामलें का दूसरा स्याह पक्ष सड़कों पर बढ़ती वाहन दुर्घट़नाओं से जुड़ा हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड़़ ब्यूरों के आकंड़ो की मानें तो भारत में सड़क दुर्घट़नाओं में प्रतिवर्ष 1.50 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं.और लगभग इतनें ही अपंग हो जातें हैं.बढ़ती सड़क दुर्घट़नाओं केे कारण भारत सड़क दुर्घट़नाओं की वैश्विक राजधानी (world capital) बनता जा रहा हैं.
इन बढ़ती दुर्घट़नाओं के कई कारण हैं जैसें

# कारण ::


#1.नशा करके वाहन चलाना ::

भारत में होनें वाली सड़क दुर्घट़नाओं में 75% दुर्घट़नाएँ किसी न किसी प्रकार का नशा करके वाहन चलानें से होती हैं.एक सर्वे के अनुसार भारतीय रोड़ पर वाहन चलानें वाला हर 7 वाँ व्यक्ति कभी न कभी नशा करके वाहन चलाता हैं.
इस प्रकार से नशा करके वाहन चलानें वाला अपनें आप को मानव बम में परिवर्तित कर देता हैं.जो अपनें साथ सड़क पर चलनें वाले दूसरें व्यक्ति की जिन्दगी को गंभीर ख़तरा पैदा करता हैं.

नशा करके सड़क दुर्घट़नाओं में जान गँवानें वालें 85% लोग युवा ओर घर के अकेले कमाने वालें होतें हैं.सोचियें यह स्थिति एक राष्ट्र और परिवार की अर्थव्यवस्था को कितना पीछे ले जाती हैं.

#2.गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाँए :::

देश ही नहीं दुनिया के 70% राष्ट्रों में सड़क दुर्घट़नाओं का प्रमुख कारण घट़िया और गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाएँ हैं.


भारत में तो स्थिति और भी भयावह हैं,यहाँ सड़क निर्माण के नाम पर इतनी मनमानीयाँ की जाती हैं,कि लगभग 99% सड़के सुगम यातायात की दृष्टि से ख़तरनाक हैं.तभी तो लगभग हर एक किलोमीट़र पर हमें अनेक ऐसे संकेतक मिल जायेंगें जो किसी न किसी प्रकार की बाधा होनें की जानकारी देतें हैं.
गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाओं को हम निम्न प्रकार से समझ सकतें हैं.

#3. घट़िया सड़क निर्माण :::

भारतीय सड़कों के निर्माण में अन्तर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानको का पालन लगभग न के बराबर किया जाता हैं,फलस्वरूप सड़के मज़बूत और टीकाऊ नहीं बन पाती और एक बरसात के बाद ही इसमें से झाँकनें वाले बड़े-बड़ें गड्डे  दुर्घट़ना में इजाफा करते हैं.

#4.संकरे पुल - पुलिया ::

राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सड़क परिवहन का दो तिहाई परिवहन करतें हैं.किन्तु इन पर पड़नें वालें पुल - पुलिया से आमनें - सामनें से आनें वाले वाहन नहीं निकल पातें हैं.फलस्वरूप नये वाहन चालक सर्वाधिक दुर्घट़नाओं के शिकार होतें हैं.

#5.ख़तरनाक चौराहे :::

जिस जगह से हाईवे निकल रहे हैं,उनके आसपास की ग्रामीण आबादी को जोड़नें के लियें जो सड़के बनाई गई हैं,उनका मुँह सीधा हाईवे पर आकर खुलता हैं. फलस्वरूप अनेक वाहन चालक साइड़ से आनें वाले वाहन को नहीं देख पातें नतीजन दुर्घट़ना होकर काफी जानमाल का नुकसान होता हैं.एक अनुमान के अनुसार ये चौराहे मौत के हाटस्पाट  बन गयें हैं,जहाँ कुल सड़क दुर्घट़नाओं की 26% मौंतें होती हैं.

#6.यातायात नियमों के पालन में ढ़ीलाई :::

भारत यातायात नियमों का पालन करनें वालें और करवानें वालें राष्ट्रों में अपनें कई पड़ोसीयों से बहुत पीछें हैं,श्री लंका और बांग्लादेश जैसें एशियाई देश हमसे काफी आगे निकल चुकें हैं.
यातायात नियमों का पालन नहीं करनें में शामिल हैं 
#१.बगैर लाइसेंस वाहन चलाना.
#२. सही तरीका अपनायें बिना सिर्फ कागजी औपचारिकता के आधार पर लाइसेंस जारी करना.
#३.वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी और माल लादकर ले जाना.
#४.सीट बेल्ट का उपयोग नही करना.
#५.हेलमेट नहीं पहनकर वाहन चलाना.

#7.सड़क साक्षरता का पूर्ण अभाव :::

भारत में उच्च शिक्षित व्यक्ति भी सड़क साक्षरता में पूर्णत: निरक्षर हैं.जबकि विकसित देशों में सड़क साक्षरता प्रत्येक नागरिक के लियें अनिवार्य हैं,और इसके अभाव में नागरिक असभ्य माना जाता हैं.

# यातायात लेनों का अभाव :::

एक अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसी के सर्वे के अनुसार भारत में यातायात के लियें अलग - अलग लेनों का नितान्त अभाव हैं,जिसके फलस्वरूप हल्के,भारी,साईकिल,हाथठेला,पैदल यात्री,मोटर साईकिल चालक,तेज गति के वाहन एक ही लेन में चलते हैं.इन लेनों में यदा - कदा बड़े वाहन,तेज वाहन छोट़े वाहन और पैदल यात्रीयों को टक्कर मारकर जान को नुकसान पहुँचात हैं.

# समाधान :::

भारत में सड़क दुर्घट़नाओं को रोकनें हेतू अविलम्ब सुधार की आवश्यकता हैं,जिससे की बेशकीमती जानों को असमय काल के गाल में जानें से बचाया जा सकें.

#१. सड़क निर्माण के लिये मानक अन्तर्राष्ट्रीय हो तथा सड़क निर्माण करनें वालें कार्मिक पूर्णत: प्रशिक्षित होनें चाहियें.
#२.लाइसेंस जारी करनें और वाहनों की फिट़नेस जारी करनें से पहले पर्याप्त जाँच पड़ताल होनी चाहियें.
#३.वाहनों में ऐसी टेक्नोलाजी का विकास करना जिससे नशा करनें वाले व्यक्तियों को वाहन चलानें से रोका जा सके.
#४.एक निश्चित अंतराल पर लम्बी दूरी के वाहन चालको के लिये सस्ते,सर्वसुलभ आवासग्रहों का निर्माण जिसमें वाहन चालक आराम कर सकें.
#५.प्रत्येक टोल बूथों पर सर्वसुविधायुक्त एम्बुलेंसों की व्यवस्था करना जँहा से तत्काल दुर्घट़नाओं के समय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकें.
#६. वाहनों की गति सीमा का निर्धारण और इस गतिसीमा का कढ़ाई से पालन करवाना सुनिश्चित होना चाहियें.

यदि हम आनें वाले वर्षों में सड़क दुर्घट़नाओं को कम करनें में सफ़ल हो जातें हैं,तो निश्चित रूप से ये हमारें राष्ट्र के लिये राष्ट्रीय उपलब्धि होगी.



शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

पश्चिमी संरक्षणवाद और ब्रिक्स [BRICS]

ब्रिक्स [BRICS] क्या हैं :::

ब्रिक्स की स्थापना सन् 2009 में हुई थी.यह
ब्रिक्स विश्व के पाँच देशो का संगठन हैं,जिसमें सम्मिलित हैं, ब्राजील,रूस,इंड़िया, चायना और दक्षिण अफ्रीका.इन राष्ट्रों के प्रथम अक्षरों से इस संगठन का नाम BRICS पड़ा.आरम्भ  में इस संगठन में केवल चार ही देश थें,तत्पश्चात 2010 में दक्षिण अफ्रीका को सम्मिलित कर इसकी सदस्य संख्या पाँच हो गई.

इतिहास :::

ब्रिक संगठन की उत्पत्ति के पीछे गोल्ड़मैन सेच बैंक की 2003 में प्रकासित रिपोर्ट "Dreaming with BRICS : The path to 2050" को माना जाता हैं,जिसमें इन देशों की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक दूसरें के पूरक मानकर इनके मध्य सहयोग की भावना पर प्रकाश डाला गया था.
इसी रिपोर्ट की भावना से प्रेरित होकर सन् 2008 में चार राष्ट्रों (ब्राजील,रूस,इंड़िया, चायना) के विदेश मंत्रीयों का सम्मेलन हुआ जिसमें निर्णय लिया गया कि ये देश नियमित शिखर सम्मेलन कर मिलते रहेंगें.

प्रथम सम्मेलन :::

ब्रिक्स का प्रथम शिखर सम्मेलन जून 2009 में रूस के शहर येकैटिरनबर्ग में आयोजित किया गया था.जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनासिओ लूला डि'सिल्वा,रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव,भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा चीन के राष्ट्राध्यक्ष हू जिन्ताओं ने शिरकत की थी.

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जनसँख्या और अर्थव्यवस्था और भौगोलिक आधार :::

ब्रिक्स देश विश्व की कुल 43% जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करते जिसमें दो राष्ट्र चीन और भारत में क्रमश: विश्व की सर्वाधिक जनसँख्या निवास करती हैं.

इन देशों की अर्थव्यवस्था सम्मिलित रूप से विश्व की अर्थव्यवस्था मे 15 खरब डालर का योगदान करती हैं.

ब्रिक्स का सम्मिलित भू - भाग विश्व के भू - भाग का 25 % हैं.जिसमें रूस का विश्व का सरवाधिक क्षेत्रफल वाला राष्ट्र हैं.जबकि चीन ब्राजील ओर भारत क्रमश: तीसरा ,पाँचवा और सांतवा स्थान रखते हैं.

वर्तमान समय में ब्रिक्स की भूमिका :::

ऐसे समय जब अमेरिका और पश्चिमी राष्ट्र अपने यहाँ की नितियों को अपनें नागरिको के हितों के अनूकूल बनानें के लिये प्रयासरत हैं,ब्रिक्स को अपनें बाजारों को एक दूसरे के देशों के कामगारों के अनूकुल बनाना होगा.क्योंकि ब्रिक्स देश विकास की असीम संभावना वालें राष्ट्र हैं.
भारत में चलनें वाला "मेक इन इंड़िया" अभियान इस संभावना को बल प्रदान करनें वाला हैं,कि ब्रिक्स राष्ट्र अपनी टेक्नोलाजी के उघम  भारत में स्थापित कर अपने कामगारों को यहाँ भेजकर भारतीयों को उनकी टेक्नोलाजी से परिचित करायें,रूस इस दिशा 
में ब्रिक्स राष्ट्रों की काँफी मदद कर सकता हैं,क्योंकि रूस जनकमी से जूझ रहा हैं,और अपना उत्पादन बढ़ानें के लिये प्रयासरत हैं,जिसे अन्य ब्रिक्स राष्ट्रों की मदद से आसानी से प्राप्त किया जा सकता हैं.

कृषि क्षेत्र में भी ये राष्ट्र एक दूसरे को काफी बेहतर तरीके से मदद कर सकते हैं .भारत दूध,मसालों,और फल का बड़ा उत्पादक राष्ट्र है,वही रुस के पास कृषि क्षेत्र में उच्च स्तर की टेक्नोलाजी हैं.इस टेक्नोलाजी का लाभ भारतीय किसानों को उपलब्ध करवाकर उनकी दशा उन्नत की जा सकती हैं.जबकि भारत के फल,दूध,मसालों की रूस में बढ़ी मांग हैं.

 दक्षिण अफ्रीका सोनें का उत्पादक और निर्यातक राष्ट्र जबकि भारत आयातक भारत सोनें के आभूषण मूर्ति सजावट़ के सामान,मेड़ल आदि बनाकर यदि ब्रिक्स राष्ट्रों को निर्यात करें तो भारतीय आभूषण बाजार एक नई चमक के साथ अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकता हैं .

चीन दुनिया की दूसरी बढ़ी अर्थवयवस्था बन गया हैं,साथ ही भारत का बढ़ा पड़ोसी भी हैं.आज के हालात में चीन के साथ भारत के सीमा विवाद हैं,परन्तु कई मुद्दों पर सहयोग भी हैं,यदि हम चीन के साथ विवाद के मुद्दो को बातचीत और व्यापार के साथ आगे बढ़ाये तो नई ऊँचाई पर रिस्तों को ले जा सकते हैं.अभी व्यापार संतुलन चीन के पक्ष में हैं जिसे संतुलित करनें की आवश्यकता हैं.

ब्राजील के साथ भी सहयोग के कई मुद्दे हैं जैसे फुट़बाल के खेल में ब्राजील अग्रणी हैं,इस देश का सहयोग भारत में फुट़बाल के विकास में लिया जा सकता हैं,जिससे भारतीय फुट़बाल टीम विश्व की अग्रणी टीम बन सकें.
भारत से ब्राजील को स्वास्थ सेवा के क्षेत्र में मदद की जा सकती भारतीय चिकित्सतको,आयुर्वैद और योग की वहाँ बहुत मांग हैं.
इनके अलावा भी कई महत्वपूर्ण साझा मुद्दे हैं जैसे पर्यावरण,संयुक्त राष्ट्र संघ तथा वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार .
यदि ब्रिक्स राष्ट्र इन मुद्दों के साथ आगे बढ़े तो एक बेहतर विश्व व्यवस्था में इनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा.



गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]




bhagvan ram
 Shri ram

#भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र

रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें

● आत्मविकास के 9 मार्ग

#१.आदर्श पुत्र :::

भगवान श्री राम अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि
रघुकुल रिती सदा चली आई |
प्राण जाई पर वचन न जाई ||
एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं.

दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आग्या का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका.
आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों का विरोध कर घर में महाभारत कर देतें हैं,राम का जीवनचरित्र यह संदेश देता हैं,कि आदर्श पुत्र कैसा हो.

#२.आदर्श मित्र :::

राम मित्रता के आदर्श की भी प्रतिमूर्ति थे.जिन्होंने अपनें परम प्रिय मित्रों में सुग्रीव और निषादराज को स्थान दिया क्योंकि दोनों ने  राम के संघर्षकाल में  भरपूर सहयोग और संसाधन मुहेया करायें थे,कहा गया हैं,कि
धीरज,धर्म,मित्र अरू नारी |
आपतकाल परखिये चारी || 

वास्तव में आदर्श मित्र भी वही होता हैं,जो मित्र के अच्छे समय में दूर बैठकर उसकी ख़ुशी में  शामिल हो और मित्र के दुखी होनें पर उसको को सहारा देने वाला पहला हो.

राम ने इसी भाव को सदैंव समझा और निषादराज जैसे छोटे से इंसान को भी अपने समकक्ष बिठाकर मित्रता के आदर्श प्रतिमान स्थापित कियें.

#३.आदर्श भाई :::

सामाजिक और पारिवारिक जीवन में लोग राम - लक्ष्मण जैसे भाई होनें की उपमा देते हैं,यह उपमा व्यर्थ कदापि नही हैं.एक ऐसे समय में जब राम अकेले वनवास को जा रहे थे लक्छमण को साथ ले गये तथा भरत और शत्रुघ्न को लक्षमण के क्रोध से बचाकर परिवार को टूटन से बचाया क्योंकि राम को भलीभाँति ग्यात था,कि लक्षमण का स्वभाव उग्र हैं,और वह कभी भी उग्र होकर किसी को  कुछ भी कह, कर सकतें हैं.

एक आदर्श भाई वही होता हैं,जिसे अपनें छोटे भाई बहनों के स्वभाव, आवश्यकता का भलीभाँति ग्यान हो.

इसी प्रकार  भरत ने राम की अनुपस्थिति में राजा बनना अस्वीकार कर दिया यह राम का अपनें भाई के प्रति अनुराग का ही नतीजा था.जिसका प्रतिफल राम को मिला.

#४.कुशल नेतृत्वकर्ता :::

भगवान श्री राम ने युद्ध में परम बलशाली रावण को अपने कुशल नेतृत्व की सहायता से ही पराजित कर विजय हासिल की.यह उनके कुशल नेतृत्व का ही नतीजा था,कि युद्ध में नर से लेकर वानर तक को संगठित किया और  समुद्र में सेतू बांध दिया  अन्यथा समुद्र में सेतू बांधना इतना आसान काम नही था.

युद्ध के पूर्व भी भगवान राम ने युद्ध से होनें वाली मानवीय क्षति के प्रति रावण को चेताकर युद्ध टालनें का प्रयास किया किन्तु रावण का अंहकार राम की नितिपूर्ण बातों को समझ न सका.

एक कुशल नेतृत्वकर्ता वही होता हैं,जो सदैव अपने अधीनस्थों को होनें वाली लाभ हानि को भली प्रकार समझे राम नें भी यही कार्य रावण को युद्ध से होनें वाली हानि को समझाकर करना चाहा था.

#५.आदर्श राजा :::

एक ऐसा समय जब राम रावण को हराकर इस प्रथ्वी के परम प्रतापी राजा में गिने जा रहे थें.राम ने प्रजा के बहुमत को सम्मान देते हुये सीता को अपने जीवन और सार्वजनिक जीवन से दूर करना उचित समझा.यह आज के लोकतांत्रिक समाज के लिये बहुत बड़ी सीख हैं,जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनें जानें के बावजूद सार्वजिक जीवन में भ्रष्टाचार,पद के दुरूपयोग,और बहुमत के विरूद्ध कार्य करतें हैं.

राम को यह भलीभाँति परिचय था,कि राजा वही बन सकता हैं,जिसको समाज का निम्न वर्ग भी अपना प्रतिनिधी मानें और राम ने शबरी के झूठे बैर खाकर समाज में  उदाहरण दिया कि राजा को समाज के निम्न तबके के प्रति कैंसा व्यहवार रखना चाहियें.

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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

WHAT IS AIDS एड्स क्या है

#1.एड्स क्या है [WHAT IS AIDS] 
एड्स
 विश्व एड्स दिवस

एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड़ इम्यूनों डेफिसेएन्सी सिंड्रोंंम Acquired immuno deficiency syndrome हैं.

यह वायरसजनित रोग हैं,जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इतना कमज़ोर हो जाता हैं,कि सामान्य बीमारी भी उपचार के द्धारा ठीक नही होती हैं.

अत:एड्स कोई बीमारी नही हैं,बल्कि बीमारीयों से लड़नें की शरीर की प्राकृतिक क्षमता का हा्स हैं.और ऐसी अवस्था में व्यक्ति साधारण बीमारी के भी चपेट़ में आकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता हैं.

#2.एच.आई.वी.[H.I.V.] :::

एड्स के लियें जिम्मेदार वायरस का नाम HIVहैं.इसका पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनोंडिफिसिएंसी वायरस (Human immunodeficiency virus) हैं.इस वायरस की खोज 1983 में फ्रांस के लक मोंटेगनियर नामक scientist ने की थी.
VIRUS
 HIV VIRUS

HIV वायरस भी दो प्रकार का होता हैं ::

• HIV - 1
• HIV - 2

हमारें शरीर में टी - लिम्फोसाइट नामक प्रतिरक्षी कोशिकाएँ होती हैं,यह कोशिकाएँ रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करती हैं.किन्तु जब HIV कोशिकाँए शरीर में प्रवेश करती हैं,तो टी - लिम्फोसाइट कोशिका की सतह पर स्थित CD - 4 और CD - 26 नामक प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर GP - 26 नामक अणु बना लेती हैं.फलस्वरूप HIV कोशिकाँए तेजी के साथ अपना विकास करती  हैं.

जब HIV कोशिकाँए बहुत अधिक सँख्या में हो जाती हैं,तो व्यक्ति सामान्य बीमारीयों से भी अपनी रक्षा नही कर पाता फलस्वरूप व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं.

#3.इतिहास :::

एड्स का प्रथम रोगी संयुक्त राज्य अमेरिका में खोजा गया था,यह एक होमो सेक्सुअल पुरूष था,जिसका नाम गटेन डगास था जो कि एड्स से मरा था.

ऐसा माना जाता हैं,कि इस रोग का प्रसार बंदरो से मनुष्य में हुआ हैं.क्योंकि सिरोलाजिकल प्रमाण बताते हैं,कि मनुष्यों मे यह वायरस 1979 से पूर्व नही था.

भारत में एड्स का प्रथम रोगी सन् 1986 में खोजा गया था.

#4.लक्षण :::

एड्स कई सारे लक्षण प्रकट होतें हैं,किन्तु कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं,जिनकी सहायता से एड्स को पहचाना जा सकता हैं.फिर भी पक्के तोर निष्कर्ष निकालनें से पूर्व परीक्षण करवाना चाहियें.

• वज़न का लगातार कम होना.

• लम्बें समय तक बुखार का होना.

•  दस्त उल्टी होना जो लगातार एक महिनें से हो रही हैं.

• खांसी जो लम्बें समय से चल रही हो या टी.बी.

• शरीर पर जिद्दी खुजली जो लम्बें समय से ठीक नही हो रही हो.

#5.परीक्षण :::

1.एलीसा परीक्षण (Aliza Test)

इस परीक्षण का पूरा नाम एंजाइम लिंक्ड़ इम्यूनोसारबेंट हैं.इस टेस्ट में एंजाइमों की सहायता से एन्टीबाँड़ी का पता लगाया जाता हैं.इस टेस्ट की सहायता से Hiv 1 और 2 का आसानी से पता लगाया जा सकता हैं,तथा परिणाम भी शीघृ आता हैं.

#6.एड्स फैलने के कारण :::

एड्स फैलने की मुख्यत: चार वज़ह होती हैं ::

१.असुरक्षि योन सम्पर्क से ,यदि कोई एड्स संक्रमित पुरूष या महिला स्वस्थ व्यक्ति से शारीरिक सम्पर्क स्थापित करता हैं,तो महिला के योनि दृव्य तथा पुरूष के वीर्य के माध्यम से विषाणु स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं.

२.संक्रमित रक्त के आदान प्रदान से एड्स संक्रमित व्यक्ति का  रक्त किसी सामान्य व्यक्ति को चढ़ाया जाता हैं तो सामान्य व्यक्ति एड्स की चपेट़ में आ जाता हैं.

३.संक्रमित सिरींज के उपयोग से एड्स से संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई यदि सामान्य व्यक्ति को लगाई जाती हैं,तो उसके एड्स से संक्रमित होनें की संभावना होती हैं.

४.एड्स संक्रमित माँ से होनें वाले शिशु में एड्स का संक्रमण होता हैं.किन्तु आजकल ऐसी दवाईयाँ उपलब्ध हो गई हैं,जिससे की एड्स का फैलाव गर्भस्थ में होनें से रोका जा सकता हैं.

#7.एड्स नही फैलता :::

१.हाथ पकड़ने

२.साथ - साथ खानें या पीनें से

३.छींकने,खाँसनें तथा मच्छरो के संक्रमित व्यक्ति को काट़ने के पश्चात स्वस्थ व्यक्ति को काट़ने से क्योंकि एड्स वायरस मच्छर के पेट़ में जीवित नही रह पाता.

४.एक ही शोचालय या स्नानागार के इस्तेमाल से एड्स नही फैलता हैं.

#8.एड्स का उपचार :::

एड्स के उपचार के सन्दर्भ में अनेक परीक्षण और शोध दुनिया के समस्त विकसित और विकासशील राष्ट्रों में चल रहे हैं,किन्तु एड्स उपचार की दिशा में आंशिक सफलता ही मिली हैं.

 कुछ एंटी रिट्रोवायरल दवायें एड्स संक्रमित व्यक्ति के संक्रमण को फैलने से रोकती हैं,जिससे रोगी लम्बी जिंदगी जी सकता हैं,किन्तु यह रोगी के संक्रमण को समाप्त नही करती हैं.
एजिडाथीमाइन और जिड़ोब्यूडायन नामक दवाईयों से गर्भस्थ शिशु को संक्रमित माँ के संक्रमण से बचाया जा सकता हैं.किन्तु यह दवाईयाँ इतनी मंहगी हैं,कि विकासशील देशों के सामान्य आदमी के लिये इनको खरीद पाना लगभग असंभव हैं.

आनें समय में यदि सरकारें और विश्व स्वास्थ संगठन एड्स  पर होनें वाले शोधों को और बढ़ाने का प्रयास करती हैं,तो निश्चित रूप एड्स लाइलाज नही रह पायेगा.




रविवार, 19 फ़रवरी 2017

हाइपोसलाइवेशन यानि लार का कम बनना

लार मनुष्य शरीर की कार्यपृणाली को सुचारू चलानें मे महत्वपूर्ण योगदान देती हैं.क्योंकि इसके माध्यम से अाहार का पाचन बड़ी सरलता से होता हैं.किन्तु यदि लार का बनना हमारें मुँह  में कम हो जाता हैं,या लार ग्रन्थिया पर्याप्त मात्रा में लार का उत्पादन नही कर पाती हैं,तो इस अवस्था को हाइपोसलाइवेशन कहते है.इस बीमारी के कई लक्षण हैं,जैसे

#लक्षण :::

१.मुँह का सुखना .

२.बोलचाल में तकलीफ़ होना

३.खाने - पीनें ,निगलने में परेशानी होना.

४.मुँह में सक्रंमण होना.

५. बार - बार छाले होना.

#कारण :::

१.लार ग्रन्थियों का अपर्याप्त विकास जिसकी वजह से छोटी उम्र से ही यह समस्या पैदा हो जाती हैं.

२.लार ग्रन्थियों में होनें वाला कोई जीवाणुजनित संक्रमण जिससे लार बनना बंद हो जाती हैं.

३.कोई विशेष दवाईयों के प्रभाव की वजह से भी लार बनना बंद हो सकती हैं.

४.कोई बीमारी के प्रभाव से भी  लार उत्पादन की प्रक्रिया बाधित होती हैं,जैसे गठिया रोग में अधिकांशत: देखा गया हैं.

५.बार - बार होनें वाला डिहाइड्रेशन लार उत्पादन में कमी पैदा कर देता हैं.

६.बच्चों या बड़ों द्धारा बार - बार नाखून दाँत से कुतरनें की वज़ह से नाखूनों के बीच से फंगल नाखून से सीधा मुँह में पँहुच जाता हैं,फलस्वरूप लार ग्रन्थियाँ फूलकर लार उत्पादन बंद कर देती हैं.

७.कुछ विशेष माउथवाश का लगातार इस्तेमाल करनें से भी लार कम बनना शुरू हो जाती हैं.

#समस्या का प्रबंधन :::

वैसे यह समस्या कुछ सामान्य से उपायों द्धारा ठीक हो जाती हैं,किन्तु यदि लम्बे समय तक ठीक नहीं हो रही हो तो विशेषग्य से परामर्श करना आवश्यक हो जाता हैं आईयें जानतें कुछ उपायों के बारें में जिससे की बीमारी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकें.

१.कुनकुने पानी में हल्दी पावडर और सेंधा नमक डालकर मुँह में दो मिनिट के लिये भर ले यह प्रयोग सुबह शाम नियमित रूप से करें.

२. चाटकर खानें वाले पदार्थों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहियें जैसे इमली की चटनी,टमाटर साँस आदि.

३.हरड़ को भूनकर उसे मुँह में रखकर चूसना चाहियें.

४.निम्बू पर नमक डालकर चूसना चाहियें परन्तु उच्च रक्तचाप के मरीज यह प्रयोग न करें.

५.पर्याप्त मात्रा में भूख होनें पर ही भोजन करना चाहियें.

६.कम शुगर वाली च्यूइंगम को चबाना चाहियें.

७.पानी की पर्याप्त मात्रा का सेवन करें जिससे शरीर डिहाइड्रेट नही हो.

८.जिन चीजों के स्मरण से मुँह में पानी आता हो उनका स्मरण करने से लार तेजी से पनती हैं,जैसे इमली ,आम की चट़नी,अमरूद बैर आदि.

९. नियमित रूप से भ्रामरी प्राणायाम करनें से लार ग्रन्थि की कार्यपृणाली सुचारू बनती हैं.

१०.यदि इस बीमारी के समय मौन धारण कर लिया जावें तो लार उत्पादन सुचारू रूप से चालू हो जाता हैं.

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सामान्य अध्ययन { GENERAL KNOWLEDGE}

1. Kanchenjunga is the highest mountain peak in India it is situated on the border between India and Nepal.

2.Razia sultan was the first and the last woman ruler of Delhi.

3.The lowest layer of earth's atmosphere is Troposphere.

4.Rain drops are spherical due to surface tension.

5.Soft water can be easily identified by its characteristic of Forms lather with soap.

6.Sulphur dioxide is responsible for acid rain.

7.The working principal of washing machine is Centrifugation.

8.Soil PH of acidic soil can be improved by Adding lime.

9.Venus is the hottest planet of our solar system.

10.The largest gland in the body is Liver.

11.Uranium, plutonium and Radium is a radioactive material.

12. Malala Yousafzai ,a Noble laureate was shot by Taliban to silence her fight against Right to girl education.

13. The author of world famous Harry potter series is Jk Rowling.

14.The term Hypoxia refers to Lack of oxygen.

15.mc mohan line demarcates the boundary between India and China.

16.A nuclear reactor is a device to produce nuclear energy with the help of Controlled chain reaction.

17.founder of Maurya dynasty is Chandragupta Maurya.

18.cloudy nights are warmer than clear nights because cloud prevent escape of heat from the ground.

18.Rainbow is formed due to a combination of Dispersion and total internal reflection of light in water droplets.

19.Sodium azide used for safety in cars contain.

20.The yellow colour of urine is due to the presence of bile.

21.Zika virus or Zika fever is spread through mosquito bite.

22.MOSSAD is the intelligence agency of Iran.

23.operation Meghdoot is related to siachen Glacier.

24. Rio Olympic is organised by Brazil. 

# mppsc 2014 solved paper 


1.firewall is used in communication network for protection from ?

1.Unauthorized attack.
2.Data driven attack.
3. fire attack.
4. virus attack.

2. one byte has ?

1.8- bits.
2.16 - bits.
3.32 - bits.
4.64 - bits.

3.which of the following is  a connecting device ?

1.Router.
2.Hub.
3.Switch.
4.All of these.

4.FTP stands for 

1. file Transfer protocol.
2.file Transit protocol.
3.file Typing protocol.
4.file Transfer Protocol.

5.SMPS stand for

1.Switched Mode power supply.
2.Start mode Power Supply.
3. signal Mode Power supply.
4.Store Mode Power supply.

6.Slowest Internet connection service is

1.Digital Subscriber Line.
2.Dial - up Service.
3.Leased Line.
4.cable Modem.

7.Offences are tried under the Protection of civil Rights Act,1955 by the Court of

1.Session court.
2 Judicial Magistrate First Class.
3.Judicial Magistrate second class.
4.Chief Judicial magistrate.

8.Who is held responsible for the offences committed by companies, under the Protection of Civil Rights Act,1955 ?

1.Director.
2.Manager.
3.Secretary.
4.All the above.


9.Who is empowered for imposition and realization of collective fine under SC and ST (prevention of Atrocities) Act,1989 ?

1.District Magistrate.
2.State Government.
3.Special court.
4.High court.

10.Offence committed by any public servant under Section 3 of the SC and ST (prevention of Atrocities) Act,1989,provides for minimum punishment of

1.Three month.
2.six month.
3.one year.
4. non of the above.

11.Who is not a member of the committee for the appointment of Chairperson and member of the National Human Rights Commission ?

1.Speaker of the House of People.
2.chairman of the Council of the states.
3.Leader of opposition in the House of People.
4.Leader of opposition in the Council of States.


12.Chairperson and member of State Human Rights Commission are appointed by

1.President.
2.Governor.
3.Chief justice of High court.
4.None of the above.

13.Who among the following is not related with the Philosophy of Vedanta ?

1.Shankaracharya.
2.Abhinav Gupt.
3.Ramanuja.
4.Madhava.

14.famous " HAZARA" temple of vijaynagar was built during the reign of

1.Krishnadeva Raya.
2.Deva Raha - I
3.Deva Raha - II
4.Harihara - I

15.Who is the chairman of advisory committee on fundamental right and minorities constituent Assembly ?

1.Pandit Nehru.
2.sardar patel.
3.B.N.Rao.
4.Ambedkar.


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● सिन्धु घाटी सभ्यता

● भारत में सड़क दुर्घटना कारण और समाधान

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16.किस संविधान संशोधन एक्ट के द्धारा मतदाताओं की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई ?

1.61 वाँ.
2.62 वाँ
3.64 वाँ
4.70 वाँ

17. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में चुनाव आयोग का उल्लेख किया गया हैं ?

1.अनुच्छेद 320
2.अनुच्छेद 322
3.अुनुच्छेद 324
4.अनुच्छेद 456

18. रंगराजन समिति का गठन किसलिये किया गया था ?

1.विनिवेश
2.बैंकिंग सुधार
3. विदेश व्यापार
4.कर सुधार

19. निम्न में से किसको  " चिपको आन्दोलन " का नेता माना जाता हैं ?

1.मेधा पाटकर
2.बाबा आम्टे
3. किरण बेदी
4. सुंदरलाल बहुगुणा


20. रेड़ डाटा बुक से संबधित संगठन हैं ?

1.WWF
2.I.u.t.e.s.
3. I.u.c.n.
4.I.w.b.c.


21. ओजोन परत संरक्षण दिवस कब मनाया जाता हैं ?

1.16 सितम्बर.
2.5 जून
3.30 मार्च
4.11 जनवरी

22. मान्ट्रियल प्रोटोकाल किससे संबधित हैं ?

1.क्लोरोफ्लूरो कार्बन
2.सफेद शेर
3. जल प्रदूषण
4.कृषि

23. सूर्य प्रथ्वी से कितना गुना बड़ा हैं ?

1.124 गुना
2.60 गुना
3.109 गुना
4.70 गुना


# सामान्य अध्ययन 

1.निम्नलिखित प्राणियों में से किसमें त्वचा द्धारा श्वसन होता हैं ?

A.गिरगिट़
B.मेंढ़क.
C.समुद्री घोड़ा.
D.गिलहरी.

2. खुरपका और मुहँपका रोग किनमें पाया जाता हैं ?

A.कुत्तें.
B.मानव
C.गाय भैंस.
D.मुर्गी.

3.माचिस की तिली में जलनें वाला पदार्थ कोन सा हैं ?

A.सफेद फास्फोरस.
B.लाल फास्फोरस.
C.सोड़ियम.
D.कार्बोनेट़.

4.कोयले की सर्वाधिक उत्कृष्ठ किस्म कौन सी हैं?

A.एन्थ्रोसाइट़़.
B.लिग्नाइट़.
C.बिटुमिनस.
D.पीट़.

5.मृदा की उर्वरता कोन सा जीवाणु बढ़ाता हैं ?

A.साल्मेला.
B.राइजोबियम.
C.क्लाँसट्रिडियम.
D.स्टैफिलोकाँकस.

6.विकासवादी दृष्टिकोणानुसार कौन मानव के निकट़ माना जाता हैं ?

A.कछुआ.
B.डाँल्फिन.
C.शार्क.
D.समुद्री घोड़ा.

7.साइमन कमीशन की नियुक्ति किस पर विचार करनें के लिये की गई थी ?

A.इण्डियन कौसिल एक्ट़ ,1892.
B.गवर्मेंट़ आफ़ इंड़िया एक्ट़ ,1919,
C.गवर्मेंट़ आफ़ इंड़िया एक्ट़,1909.
D.गवर्मेंट़ आफ़ इंड़िया एक्ट़,1935.

8.निम्नलिखित में से कोन "लोकहितवादी" के नाम से मशहूर हुये ?

A.जी.एच.देशमुख.
B.जी.के.गोखले.
C.जे.जी.फुले.
D.एम.जी.रानाड़े.

9.अन्तर्राषट्रीय तिथि रेखा कहाँ से गुजरती हैं ?

A.हिन्द महासागर.
B.प्रशांत महासागर.
C.काला महासागर.
D.भू - मध्य सागर.

10."अखिल भारतीय हड़ताल" किस के आगमन के फलस्वरूप उपजी थी ?

A.साइमन आयोग.
B.रोलेट़ एक्ट़.
C.अगस्त बिल.
D.इलबर्ट बिल.

11.कावेरी विवाद किन दो राज्यों के मध्य पैदा होता हैं ?

A.म.प्र.और छत्तीसगढ़.
B.उ.प्र.और राजस्थान.
C.बिहार और उड़ीसा.
D.तमिलनाडु और कर्नाट़क.

12.भीमबेठका किस राज्य के कोन से जिले में स्थित हैं ?

A.म.प्र.( रायसेन)
B.उ.प्र.( बिजनोंर)
C.बिहार (पट़ना)
D.गुजरात ( सूरत)

13. मूर्तिकला के लिये प्रसिद्ध "फड़के स्टूड़ियों " कहाँ हैं ?

A.उज्जैन .
B.धार.
C.भोपाल.
D.इन्दौर

14. 'कालिदास अकादमी ' कहाँ स्थित हैं ?

A.रायसेन.
B.विदिशा.
C.जबलपुर.
D.उज्जैन.

15. साँची के स्तूप का निर्माण किसनें करवाया था ?

A.बुद्ध.
B.सूरसेन.
C.अशोक.
D.कनिष्क.


16. म.प्र.का सबसे बड़ा "राष्ट्रीय उघान " कोन सा हैं ?

A.कान्हा किसली.
B.सतपुड़ा .
C.बांधवगढ़.
D.पेंच .

17.म.प्र.उच्च न्यायालय की खंड़ पीठ कहाँ हैं ?

A.इन्दौर - ग्वालियर.
B.उज्जैन - सागर.
C.रायसेन - भोपाल.
D.भोपाल - सागर.

 18. विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मन्दिर कहाँ स्थित हैं ? 

A.विदिशा.
B.काशी.
C.गया.
D.उज्जैन.

19. त्रिपुरी जो जबलपुर में स्थित हैं,किस वंश के राजाओं की राजधानी थी ?

A.कलचुरी.
B.परमार.
C.सिंधिया.
D.होलकर.

20. रानी अवन्ति बाई  किस क्षेत्र में शासन करती थी ?

A.रामगढ़ (मंड़ला)
B.कायथा (उज्जैन)
C.भोजपुर (भोपाल)
D.माँडू (धार)

उत्तर 1. (B) 2.(C),3.(B),4 .(A),5 .(B),6.(B),7.(B),8.(A),9.(B),10.(A),11.(D),12.(A),13.(B),14.(D),15.(C),16.(A),17.(A),18.(D),19.(A),20.(A).







शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

मधुमक्खी पालन एक लाभदायक व्यवसाय [Honeybee]


एपीकल्चर
 मधुमक्खी पालन(एपीकल्चर)
जिस प्रकार से शहद की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं,उसकी पूर्ति के लिये मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) एक लाभप्रद व्यवसाय बन गया हैं.यदि हम उचित विधि अपनाकर मधुमक्खी पालन को अपनायें तो न केवल मधुमक्खी पालन से लाभ कमा सकते हैं,बल्कि फसलों और फूलों की पैदावार भी  बढ़ा सकते हैं क्योंकि मधुमक्खी फसलों का परागण की दर तीव्र कर देती हैं.आईयें जानतें मधुमक्खी पालन के बारें में

#1.शहद निर्माण की प्रक्रिया :::

मधुमक्खी एक साथ समूह में रहती हैं, प्रत्येक मधुमक्खी का काम बँटा रहता हैं जैसे एक समूह में एक रानी मधुमक्खी, लगभग 100 नर मधुमक्खी तथा 20 से 60 हजार नपुसंक श्रमिक मधुमक्खीयाँ होती हैं.

श्रमिक मधुमक्खी फूलो से रस व पराग मुहँ में भरकर लाती हैं,व छत्ते पर आकर मुहँ खाली कर देती हैं,कुछ मधुमक्खीयाँ अपने मुख से रस को ऊपर निचें करती रहती हैं,फलस्वरूप रस गाढ़ा हो जाता हैं,इन मधुमक्खीयों  के शरीर से एक इनवर्ट नामक एंजाइम निकलता हैं,जिसके फलस्वरूप शहद मीठा हो जाता हैं.लगभग 100 ग्राम शहद बनानें में मधुमक्खी को 1 लाख बार फूलों के चक्कर लगानें पड़ते हैं.

#मधुमक्खी पालन हेतू प्रजाति :::

#1.एपिस डोरसेटा :::

यह प्रजाति सम्पूर्ण भारत में पाई जाती हैं,यह सबसे ज्यादा शहद उत्पादन देने वाली प्रजाति हैं.इसके द्धारा 5 से 6 फीट़ लम्बा और 2 से 4 फीट़ चोड़ा छत्ता बनाया जाता हैं.

#2.एपिस इण्ड़िका :::

जैसा कि नाम से स्पष्ट हैं,यह एक भारतीय प्रजाति की मधुमक्खी हैं,जो औसत उत्पादन प्रदान करती हैं.गुणवत्ता के दृष्टिकोण से इसका शहद एपिस डोरसेटा से उत्तम होता हैं.

#3.एपिस फ्लोरिया :::

इस प्रजाति का शहद उत्पादन में नगण्य योगदान रहता हैं,क्योंकि यह लगातार एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहती हैं फलस्वरूप यह ज्यादा बड़ा छत्ता निर्मित नही कर पाती हैं.और इससे निकलने वाला शहद भी कम होता हैं,किन्तु गुणवत्ता के दृष्टिकोण से इसका शहद सर्वोत्तम होता हैं.

#मधुमक्खी के रोग :::

बेहतर शहद उत्पादन के लिये आवश्यक हैं,कि मधुमक्खी स्वस्थ हो और निरन्तर उत्पादन देती रहे किन्तु कई बार मधुमक्खीयाँ बीमार हो जाती हैं,जिसकी जानकारी मधुमक्खी पालको को होना आवश्यक हैं.

#1.अमेरिकन विकृत शिशु रोग :::

इस रोग में शिशु मधुमक्खी प्यूपा अवस्था में मर जाती हैं.तथा रोगग्रस्त शिशु का रंग मैले सफेद से काले रंग का हो जाता हैं.तथा सुखकर कोष्ठ के तल पर चिपक जाता हैं.

इस बीमारी के नियत्रंण हेतू टेरामाइसिन एन्टीबायोटिक कैप्सूल  0.25 - 0.45 ग्राम प्रति 3 लीटर शक्कर का घोल बनाकर मधुमक्खीयों को सप्ताह में दो बार खिलाना चाहियें.

#2. यूरोपियन विकृत शिशु रोग :::

इस रोग में मुडी हुई सुंडी अवस्था में मर जाते हैं,मरे हुये शिशु से ज्यादा खट्टी बदबू आती हैं.तथा मधुमक्खी का रंग भूरा होकर सिर तरफ से काला हो जाता हैं.इस रोग का कोई प्रभावी उपचार नही हैं.

#3. नोशीमा रोग :::

इस रोग में मधुमक्खी रेंगती हुई पत्तियों पर चलती हैं तथा मधुमक्खी का पेट लंबा और मोटा हो जाता हैं.
इसका भी प्रभावी उपचार उपलब्ध नही हैं.

#4.इरीडो रोग :::

यह वायरसजनित रोग हैं.यह रोग गर्मीयों मे अधिक होता हैं इसकी वज़ह से मधुमक्खी सुस्त होकर काम करना बंद कर देती हैं.

#मधुमक्खी के शत्रु कीट़ :::

#1.चींटी :::

चींटीयाँ मौनगृह में घूसकर शहद को चट कर जाती हैं,इसके अलावा प्यूपों का भी शिकार कर शहद उत्पादन को प्रभावित करती हैं.
इससे बचाव हेतू मौनगृहो आधार पायो के निचें पानी की प्यालियाँ भरकर रख देना चाहिये.

#2.मोमी पतंगा :::

यह पतंगा मोनगृह के छत्तों से प्यूपा को पकड़कर शरीर से रस चूसता हैं.
इसके नियत्रंण हेतू फारमलीन या इथलीन डायबरोमाइड़ का धुँआ मौनगृह में करें.

#3.पक्षी :::

पक्षी मौनो को पकड़कर खाते हैं,अत: इनसे बचाव हेतू पक्षी को भगाने की व्यवस्था करें.


#कीट़नाशको का मधुमक्खी पर प्रभाव :::


 फसलों पर अत्यधिक कीट़नाशको के छिड़काव करनें से मधुमक्खी पालन प्रभावित होता हैं,क्योंकि मधुमक्खी पर्यावरण असंतुलन के प्रति सर्वाधिक सवेंदनशील होती हैं.यदि फूलों पर रासायनिक कीट़नाशक का छिड़काव किया जाता हैं,तो मधुमक्खी इन कीट़नाशक प्रभावित फूलों से रस चूसती हैं,फलस्वरूप कीट़नाशक मधुमक्खी के शरीर में जाकर पाचन प्रणाली को नष्ट कर देता हैं,और मधुमक्खी की मृत्यु हो जाती हैं.

#मधुमक्खी के दोस्त पेड़ - पौधें :::

मधुमक्खी की सँख्या बढ़ानें या मधुमक्खी को प्रिय पेड़ - पौधे ,फूल को मौनचर कहा जाता हैं.उदाहरण के लिये सरसों, तोरिया,मूली,गाजर,धनिया,फूलगोभी,पत्तागोभी,सूरजमुखी,प्याज,बरसीम,अरहर,कपास,लीची,जामुन,निम्बू, इमली,आंवला, बेर आदि बहुत अच्छे मौनचर हैं.
पहाड़ी इलाको मे
सेब,आडू,आलूबुखारा,नाशपती,चैरी,खुमानी अच्छे मौनचर हैं.

उत्तम और भरपूर शहद प्राप्त करने के लिये मधुमक्खी पालन घर के आसपास पानी  का पर्याप्त प्रबंधन होना चाहियें.

# विशेष


• मधुमक्खी के वंश और उसमें लगनें वालें शहद के सही उत्पादन हेतू  10 -12 दिनों के अंतराल पर छत्ते का अवलोकन करतें रहना चाहियें.

• मधुमक्खी के बक्से में गंदगी होनें पर इसकी नियमित रूप से सफाई करें.

• रानी मधुमक्खी पर विशेष रूप से नज़र बनाये रखना चाहियें,यदि रानी मधुमक्खी मर गई हैं,या कहीं चली गई हैं,तो तुरंत नयी रानी मधुमक्खी की व्यवस्था करना चाहियें.और यह भी देखना चाहियें कि रानी मधुमक्खी नये वातावरण में ढ़ली हैं या नही.

• मधुमक्खी के छत्तों का निरीक्षण करतें समय तेज ख़ूशबू वाला परफ्यूम,तेल ,पावड़र आदि  इस्तेमाल नही करें अन्यथा मधुमक्खी आक्रमण कर सकती हैं.

• निरीक्षण के दोरान मधुमक्खी के आक्रमण से बचनें हेतू पर्याप्त सुरक्षा उपकरण अवश्य पहनना चाहियें.



यदि उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर मधुमक्खी पालन किया जावें तो शहद उत्पादन के साथ किसान भाई आर्थिक सशक्तता प्राप्त कर सकते हैं.


गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

LOGISTIC EXCHANGE MEMORANDUM OF AGGREMENT {लेमोआ}

लेमोआ का पूरा नाम क्या हैं ::::


लेमोआ का पूरा नाम लाजिस्टिक एक्सचेंज मेमोंरेंड़म आफ एग्रीमेंट़ (logistic exchange memorandum of aggrement) हैं.

इसके बारें में विस्तारपूर्वक चर्चा करें :::

लेमोआ भारत और अमेरिका के बीच होनें वाला सैन्य सुरक्षा समझोता हैं,जिसमें भारत और अमेरिका की सेनायें एक दूसरें की सुरक्षा आवश्यकताओं के मद्देनजर एक दूसरे के आर्मी बेस,नेवी बेस और एयर बेस का उपयोग कर सकेगें.जिससे एक दूसरे की सुरक्षा आवश्यकताएँ पूरी हो सकें.

समझोतें के रणनितिक पहलू 

यह समझोता भारत के लिये भी उतना महत्व रखता हैं,जितना अमेरिका के लिये क्योंकि दक्षिणी एशिया में चीन का दबदबा और आक्रमकता लगातार बढ़ रही हैं.चाहे दक्षिणी चीन सागर को लेकर अन्तराष्ट्रीय पंचाट के फेसले के खिलाफ जाना हो या पाकिस्तान अधिक्रत कश्मीर से गुजरनें वाले इकाँनामिक कारिडोर को लेकर भारत को चेतावनी देना हो,चीन अपने मंसूबे साफ कर चुका हैं,और यदि भारत को सम्प्रभु राष्ट्र के रूप में चीन की चुनोंतीयों से निपट़ना हैं,तो अमेरिका जैसे मज़बूत सुरक्षा साझीदार का होना अत्यन्त आवश्यक हैं.इस समझोते के अन्तर्गत दोनों देशों के विमान,जहाज ,पनडुब्बीयाँ एक दूसरें की जल सीमा में या जहाँ सेनिक बेड़ें हैं वहाँ रूककर ईधन लें सकतें हैं,मरम्मत कर सकते हैं या अन्य साजों सामान लें सकतें हैं.अमेरिका के लिये भी यह समझोता उतना ही महत्वपूर्ण हैं,जितना की भारत के लिये क्योंकि एक तो दक्षिण एशिया में चीन को भारत के साथ मिलकर "काऊन्टर " किया जा सकता हैं,और दूसरा अमेरिकी सैन्य साजों सामान के लियें एक बड़ा बाज़ार ढूंढा जा सकता हैं.क्योंकि भारत निश्चित रूप से भविष्य में अपनी सुरक्षा ज़रूरतों को नये सिरे से रेखांकित करनें वाला हैं.और इसमें भविष्य की आधुनिक टेक्नोंलाजी भी शामिल होगी जिसे दोनों देश मिलकर ही विकसित कर सकतें हैं.

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

महान भारतभूमि के आदर्श विचार [MAHAN BHARATBHUMI KE Aadarsh vichar]

दोस्तों मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति हैं,यह बात सदियों से हमारें पूर्वज कहते आये हैं,और आज के समय में भी हम इस बात को मानतें हैं,मनुष्य ने अपने शक्तिशाली दिमाग की बदोलत पूरें विश्व की भौगोलिक सीमाओं को अनेक साम्राज्यों में विभाजित किया और इन साम्राज्यों पर शासक बन शासन किया

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भारत का वीर सपूत चन्द्रशेखर आजाद

होली पर्व स्वास्थ्य का पर्व

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शासक बनने के साथ ही मनुष्य अंहकारों की प्रतिमूर्ति बन बैठा  और विनम्रता,सादगी ,सरलता,दया जैसे शब्द धिरें - धिरें विस्म्रत होकर अंहकार,राग,द्धेष,हिंसा ने मन मस्तिष्क पर शासन करना शुरू कर दिया.

बुद्ध,महावीर ने दया,करूणा,प्रेम,विनम्रता,अहिंसा जैसे शब्दों को  अपने आचरण में उतारकर जगत प्रसिद्धि दिलाई वही अंहकार, हिंसा,राग,द्धेष जैसे शब्द भारत पर आक्रमण करनें और यहाँ साम्राज्य स्थापित करनें वालें आक्रान्ताओं के साथ आकर आम जनमानस में फैलें.


वैदिक कालीन आक्रान्ताओं,से लगाकर आधुनिक ब्रिटिश आक्रान्ताओं ने भारत में अंहकार ,हिंसा, राग,द्धेष को आम जनमानस में स्थापित करनें का प्रयत्न अपनें कार्यों के द्धारा किया और यह विचार भारतीय लोगों में स्थापित भी हुये क्योंकि इन्हीं विचारों के साथ जब इन लोगों ने सफलता प्राप्त की तो ये विचार सफलता का पर्याय समझे जानें लगे और अनेक भारतीयों ने भी इन विचारों के साथ सफलता प्राप्त की और आज भी इन विचारों के साथ अनेक लोग सफलता प्राप्त करते हुये समाज में देखे जा सकतें हैं.

अनेक लोग जो हिंसा, राग,द्धेष की सहायता से सफल होकर आगे बढ़े हैं,इन विचारों का समर्थन करतें हुये कहतें हैं,कि अहिंसा ,दया,करूणा,प्रेम जैसे विचारों की वजह से ही हम लम्बें समय तक मुठ्ठीभर आक्रान्ताओं के गुलाम बनककी रहें,यदि हमनें हमारें स्वर्णिम समय में हिंसा,राग - द्धेष,जैसे विचारों के साथ विश्व विजेता बनने का प्रयत्न किया होता तो भारतीय साम्राज्य भी इतना विशाल बन पड़ता कि यहाँ सूरज भी अस्त नही होता.

वास्तव में सच्चाई यह हैं,कि जिन लोगों ने अंहकार, राग - द्धेष में लिप्त होकर  सफलता प्राप्त की और जिनका साम्राज्य सीमाओं से परे हो गया था,उनका अन्तिम समय भी  इन विचारों को त्यागनें में ही बिता हैं,चाहें अशोक हो या अकबर हिंसा के दम पर विश्व विजेता बनने के बाद एक ने अपना जीवन धम्मम् शरणम् गच्छामि बुद्धम् शरणम् गच्छामि 
और दूसरें ने दीन - ए - इलाही  का प्रचार करते हुये समाप्त किया.


सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

सूक्ष्म लघु और मध्यम उघोग [MSME]

#क्या हैं MSME 


सूक्ष्म लघु और मध्यम उघोग अधिनियम 2006,  के अनुसार सूक्ष्म, लघु,और मध्यम उघोग की तीन श्रेणी बनाई गई हैं,जिनमें मुख्यत दो श्रेणी बनाई गई हैं 1.,सेवा 2 . विनिर्माण .

#सूक्ष्म उघोग

25 लाख रूपये के निवेश वाले उघोग को सूक्ष्म उघोग के रूप में मान्यता प्रदान की गई है. 

#लघु उघोग 

25 लाख से 5 करोड़ रूपये वाले उघोग को लघु उघोग के रूप में अधिनियमित किया गया हैं.

#मध्यम उघोग 

5 करोड़ से 10 करोड़ रूपयों तक निवेश वाले उघोग मध्यम उघोग के रूप में पहचानें जातें हैं.

सेवा क्षेत्र के उघोगों में रूपये 10 लाख तक सूक्ष्म, 10 लाख से 2 करोड़ तक लघु,तथा 2करोड़ से 5 करोड़ तक निवेश वाले उघोग मध्यम उघोग कहलातें हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था की तेजी का प्रमुख आधार और मंदी के दौर में भी अर्थव्यवस्था  को संभालने वाला प्रमुख आधार MSME ही हैं देश के कुल निर्यात का 45 प्रतिशत इसी उघोग से आता हैं.साथ ही लगभग 7 करोड़ कार्यबल को रोजगार प्रदान करता हैं.

#समस्या 

::::  वित्तीय समस्या इस क्षेत्र की बड़ी समस्या हैं,startup को loan देनें में बैंक संकोच करते फलस्वरूप नवउधमी परेशान योजना बीच में ही छोड़ देता हैं.

::::  विपणन का अभाव जिससे कि नवउधमी बाजार तक पहुँचनें में अधिकांश समय और पैसा खर्च कर देता हैं.

::::  अधोसंरचना का अभाव  MSME के सामनें सबसे बड़ा मुद्दा हैं बिजली ,पानी,गुणवत्ता पूर्ण परिवहन तथा बेहतर Broadband network प्रदान करनें में हम चीन,दक्षिण कोरिया,सिंगापुर जैसे देशों से बहुत पीछें हैं.

::::  गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण समस्या हैं,जिसकी वज़ह से MSME अपना सर्वश्रेष्ठ उत्पादन देनें में बहुत पीछे रह जाता हैं.

::::  लालफीताशाही की वज़ह से अनेक MSME शुरू होनें के पूर्व अपना मन बदल देती हैं,उदाहरण के लियें investor summit में होनें वालें अनेक समझोते बाद में वास्तविक धरातल पर नही पहुचँ पाते हैं,क्योंकि उनसे किये गये अनेक वादे फाइलों के बीच वर्षों तक दोड़तें रहतें हैं.

MSME भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिमान रखनें वाला प्रमुख आधार हैं,यदि महत्वपूर्ण क्षेत्र को महात्मा गांधी के सपनों के मुताबिक ढ़ालना हैं,तो समयबद्ध और ईमानदारीपूर्वक इस क्षेत्र की समस्या को समझकर सुलझाना होगा.




शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

नक्सलवाद और आतंकवाद


भारत की आज़ादी के समय से ही आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनोंतिया भारत के समक्ष विधमान रही हैं.कितनी सरकारे आकर चली गई,कितनी ही आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से सम्बंधित जाँच दल जाँच कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी परन्तु भारत की सुरक्षा चुनोंतियाँ कम होनें के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं,आईयें जानतें हैं इन सुरक्षा चुनोंतियों के बारें में विस्तार से

नक्सलवाद :::

सन् 1975 में पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ ये आंदोलन भारत में सबसे लम्बें समय तक चलनें वाले हिंसक आन्दोंलन में से एक माना जाता हैं.वर्तमान में भारत के 11 राज्य और 165 जिले इसकी चपेट में हैं.नक्सलवादी अपनी माँगों के समर्थन में हर साल 1500 से 2000 सुरक्षा बलों की जान ले लेते हैं.छत्तीसगढ़,उड़ीसा के बड़े भू भाग में इन्होनें अपनी समानांतर सरकार स्थापित की हुई हैं.जहाँ नक्सलवादी कानून ही चलता हैं.लेकिन सरकारें इस आंदोलन को कानून और व्यवस्था का सवाल माननें की बजाय शोषण और विकास की वंचना से उपजा रोष ही मानती चली आ रही हैं.इस सम्बंध में दो बुनियादी सवाल उठतें हैं.

1. विकास की वंचना से उपजा रोष हैं,तो आजादी के 70 वर्षों बाद भी अब तक इन लोगों को विकास की मुख्य धारा में शामिल क्यों नहीं कर सकें ?

2. इन क्षेत्रों में चलनें वालें समानांतर कानून क्या भारत की अस्मिता को चुनोंती नही देतें ?

वास्तव में नक्सलवाद भारत की संम्प्रुता,एकता अखण्ड़ता को उसी तरह की चुनोतीं प्रस्तुत कर रहा हैं,जिस तरह की चुनोतीं भारत को पाकिस्तान से मिल रही हैं.यदि सरकारें नक्सलवाद को अतीत का शब्द बनाना चाहती हैं,तो इन दो बिन्दुओं पर गंभीरता से विचार करें.

1.भारतीय संविधान को सर्वप्रमुख मानतें हुयें नक्सलवाद के विरद्ध प्रभावी सेनिक,पुलिस ,अर्धसेनिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करें.

2. अलगाव और विकास की समस्या खत्म करनें हेतू युद्ध स्तर पर विकासात्मक कार्यक्रमों का संचालन और समुदाय आधारित निगरानी तंत्र को अमल में लायें.

आतंकवाद :::

देश दुनिया में आजतक का सबसे चर्चित कोई शब्द हैं,तो वह आतंकवाद ही हैं.भारत आतंककारी गतिविविधियों से अपनें जन्म के समय से ही जुझ रहा हैं.भारत के कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में तो इसनें अपना स्थाई मुकाम बना लिया हैं.जिस तरह से धर्म की ग़लत व्याख्या के द्धारा युवाओं को कुर्बानी के लिये बड़े पैमानें पर उकसाया जा रहा हैं,उससे आनें वाले समय में इसका और भी विभत्स रूप सामनें आ सकता हैं.अत:यदि आतंकवाद को कुचलना हैं,तो हमें निम्न बिंदुओं को प्रभावी रूप में अमल में लाना पड़ेगा.

1. हर धर्म में ऐसे मूल्य विधमान हैं,जो कि मानवीयता,सहिष्णुता को अपनें धर्म का प्रमुख अंग मानतें हैं.क्यों नहीं हम उन आदर्शों की स्थापना को महत्व दें.

2. मुखबिर और खुफिया जानकारी के लिये एकीकृत कमान बनाकर सूचनाओं का विश्लेषण और साझाकरण तुरन्त होना चाहियें.

3. पुलिस को आतंकवादी गतिविविधियों की रोकथाम हेतू सक्षम बनाया जावें.


Rapo rate Reserve Rapo rate and cash reserve ratio

रेपो दर (Repo rate) 


जिस दर पर रिज़र्व बैंक अन्य  बैंकों को नकदी उपलब्ध करवाता हैं,उस दर को रेपो दर कहा जाता हैं.
यदि बाज़ार में नकदी की कमी हो जाती हैं तो बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से उधार लेकर उस पर रिज़र्व बैंक को ब्याज अदा करतें हैं.इस ब्याज की दर की घोषणा रिज़र्व बैंक समय समय पर अपनी मोद्रिक नितियों के माध्यम से करता हैं. रेपो दर के अधिक होनें या कम होनें का सीधा सम्बंध बैंक के ग्राहकों द्धारा लिये गये लोन से हैं.यदि रेपो दर अधिक होगी तो बैंक भी ग्राहकों से अधिक ब्याज वसूलेंगें.तथा ब्याज दर बढ़ी हुई रहेगी.
नक्सलवाद और आतंकवाद


रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo rate) 

जिस दर पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों से उधार लेता हैं.उस दर को रिवर्स रेपोदर कहतें हैं.यह रेपो दर का विपरित हैं. 
रिज़र्व बैंक को जब यह समाधान हो जाता हैं कि बाज़ार में नकदी का प्रवाह अधिक हो गया हैं,और इससे मुद्रास्फीति होनें की संभावना हैं,तो वह बाज़ार से नकदी उठाने की कार्यवाही करनें लगता हैं. जिससे मँहगाई नियत्रिंत होती हैं.

नकद आरक्षी अनुपात (cash reserve ratio)


प्रत्येक बैंक को सुरक्षा निधि के रूप में कुछ रकम भारतीय रिज़र्व बैंक के चालू खाते में जमा करना पड़ता हैं. इसे नकद आरक्षी अनुपात कहा जाता हैं.
नकद आरक्षी अनुपात को कम रखने से बाज़ार में मुद्रा का प्रवाह बढ़ जाता हैं.जबकि अधिक रखने से बाज़ार से मुद्रा संकुचित हो जाती हैं.रिज़र्व बैंक मुद्रास्फीति के हिसाब से इस दर को कम या ज्यादा रखता हैं



मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

19 fact breastfeeding ke[19 तथ्य स्तनपान के ]



 आंवला

                

आँवला  परिचय::

स्कंद पुराण ,गरूड़ पुराण में आंवले की महिमा का विशद वर्णन मिलता हैं. महर्षि च्यवन ने पुन: युवा होनें के लिये आंवलें से बनायें गये च्यवनप्राश का प्रयोग किया था.
आंवला यूकोरबियेसी कुल का सदस्य हैं जिसे वनस्पति जगत में एमाब्लिका आफिलिनेलिस  के नाम से जाना जाता हैं.

उपस्थित तत्व::-

आंवले में सबसे अधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता हैं,जो अन्य फलों जैसे नांरगी,निम्बू से  बीस गुना अधिक होता हैं.
इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड़, ग्लूकोज,टैनिक एसिड़ एल्बयूमिन आदि तत्व भी पायें जाते हैं.

आंवला के उपयोग::-

आंवला त्रिदोष यानि वात, पित्त, कफ का शमन करनें वाला एक उत्तम फल हैं,इसका उपयोग निम्न दोषों में सफलता के साथ किया जाता हैं
१. स्कर्वी रोग में आंवले का सेवन रोग को जड़ से नष्ट करता हैं.
२.यह अस्थमा (Asthma)और फेफडों से संबधित रोगों में बहुत लाभदायक फल हैं यदि इसका सेवन कच्चा या रस निकाल कर किया जावें.
३.इसका रस आँखों में डालनें से नेत्र ज्योति बढाता हैं,और नेत्र सूजन को कम करता हैं.
४.स्वपनदोष में  दस ग्राम आंवला चूर्ण में बीस ग्राम चीनी मिलाकर सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैं.
५. पेचिस,प्रवाहिका तथा खूनी बवासीर में सूखा आँवला चूर्ण बहुत फायदे करता हैं.
६.आंवला चूर्ण, सोंठ चूर्ण, तथा अश्वगंधा चूर्ण को क्रमश: १:२:४ में मिलाकर  एक-एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करनें पर मानसिक रोग नष्ट हो जातें हैं ,विधार्थीयों को सेवन करवानें से बुद्धि तीक्ष्ण बनती हैं.
७.पेड़ का पका हुआ आंवला यदि हक़लानें वाला व्यक्ति नियमित रूप से खायें तो उसका हकलाना समाप्त हो जाता हैं.
८.आंवला खानें से रक्त में आक्सीजन का स्तर कभी कम नही होता फलस्वरूप चिर योवनता बनी रहती हैं,यही कारण हैं,कि महर्षि च्यवन ने आंवले का प्रयोग च्वयनप्राश में कर पुन: योवनता को प्राप्त किया था.

इसके अलावा आंवले का प्रयोग मुरब्बें के रूप में करनें से यह शरीर को शीतलता और तरोताजा रखता हैं.
आंवले में हरड़,बहेड़ा को मिलानें से त्रिफला बनता हैं जो समस्त रोगों को नष्ट कर आरोग्य प्रदान करनें वाली औषधि हैं.
आंवला अंड़े की अपेक्षा एक हजार गुना दोष रहित फल है अत: स्वस्थ रहनें के लिये आंवले का सेवन अवश्य करें.

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

Chandrasekhar Aajad चन्द्रशेखर आजाद

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
चन्द्रशेखर आजाद
///जीवन परिचय/// :::

1.पूरा नाम -- पंडित चन्द्रशेखर तिवारी
2.दूसरा नाम -- आजाद
3.जन्म       -- 23 जुलाई 1906
4.जन्म स्थान -- भाबरा [मध्यप्रदेश]
5.मृत्यु          -- 27 फरवरी 1931 ,अल्फ्रेड़ पार्क
                          इलाहबाद 

चन्द्रशेखर आजाद के पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी था.वे उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के बदर गाँव के रहने वाले थे.अपने गाँव मे भीषण अकाल पड़ने के कारण वे अपने रिश्तेदार के यहाँ भाबरा आ गये और यही बस गये.आरम्भिक शिक्षा के पश्चात वे बनारस चले गये जहाँ संस्कृत विधापीठ मे भर्ती होकर संस्कृत का अध्ययन करने लग गये.

आजाद बचपन से ही निर्भीक प्रवृत्ति के थे.एक बार दीपावली के समय उनका साथी रंग - बिरंगी माचिस की तीलीयाँ जलाने मे काफी डर रहा था.

आजाद ने यह देखा तो उससे माचिस लेकर कहा कि तुम कितने डरपोक हो और आजाद ने माचिस से सभी तिलियाँ निकालकर उन्हें माचिस पर रगड़ दिया चूंकि तिलीयाँ आडी तिरछी रखी हुई थी और कुछ तिलीयों का मुँह आजाद की तरफ था,अत: उन तिलियों से आजाद का हाथ जल गया परन्तु आजाद ने तब तक तिलीयों को नही छोडा जब तक कि सारी तिलीयाँ जल नही गई

///असहयोग आन्दोलन/// :::

आजाद में राष्ट्रभक्ति कूट कूटकर भरी थी.यही कारण हैं,कि बहुत कम उम्र मे वो मातृभूमि को आजाद करने का व्रत ले चुके थे.

1921 में जब असहयोग आन्दोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व मे चला तो आजाद ने उसमे बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.

एक बार आजाद को धरना देते वक्त पुलिस ने गिरफ़्तार कर मजिस्ट्रेट खरेघाट के समक्ष पेश किया,खरेघाट अपने कठोर फैसलों से बहुत चर्चित थे किन्तु आजाद को इससे कोई फर्क नही पड़ा और जब खरेघाट ने आजाद से प्रश्न पूछना शुरू किया तो उन्होनें निम्न उत्तर दिये 

खरेघाट -- तुम्हारा नाम ?

चन्द्रशेखर -- मेरा नाम आजाद हैं.

खरेघाट   -- पिता का नाम ?

चन्द्रशेखर -- स्वाधीन

खरेघाट   -- घर कहाँ हैं ?

चन्द्रशेखर -- जेलखाना

खरेघाट इन उत्तरों को सुनकर तिलमिला उठे और उसने आजाद को 15 बेंत मारनें की सजा सुना दी निर्भीक आजाद ने 15 बेंतो के भरपूर वार अपनी पीठ पर सहे किन्तु उनके मुहँ से सिर्फ भारत माता की जय और महात्मा गाँधी की जय ही निकला
इस घट़ना के समय आजाद की उम्र मात्र 14 वर्ष थी,किन्तु उनके कामों ने उन्हें देशव्यापी प्रसिद्धि दिला दी,फलस्वरूप आजाद का सभी जगह नागरिक अभिनंदन किया जानें लगा.

///काकोरी काण्ड़/// :::

बनारस में रहकर आजाद क्रांतिकारी विचारधारा की ओर अग्रसर हो गये मन्मथनाथ गुप्ता और प्रणवेश चटर्जी के साथ मिलकर उन्होनें हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन बनाया.इस दल के माध्यम से आजाद मातृभूमि को शीघृ स्वतंत्र करना चाहते थे.

इसी क्रम में इनकी मुलाकात रामप्रसाद बिस्मिल से हुई चूंकि क्रान्तिकारी गतिविविधियों के लिये धन की आवश्यकता थी,अत: इन्होनें ब्रिटिश खजाना लूटने की योजना बनाई.

९ अगस्त १९२५ को इन्होनें लखनऊ के पास काकोरी नामक स्थल पर रेल मे जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया इस घट़ना ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिलाकर रख दिया .और शासन पूरी मुस्तेदी के साथ क्रान्तिकारीयों के पिछे पड़ गया धिरे - धिरे एक - एककर क्रान्तिकारी पकडे गये परन्तु आजाद पुलिस के हाथ नही लगें,वे भेष बदलकर झांसी के पास ओरछा में रहनें लगे,इस दोरान उन्होनें नये सिरे से संगठन खड़ा किया जिसका नाम " हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक आर्मी एण्ड़ एसोसिएशन " रखा.इस दल को मास्टर रूद्रनारायण सिंह का अच्छा सहयोग मिला.

झांसी में ही आजाद को सदाशिव राव मलकापुरकर,भगवान दास माहौर और विश्वनाथ वैश्यपायन नामक अच्छे साथी मिलें.

कुछ दिनों में दल का कार्यक्षेत्र पंजाब तक फैल गया यहाँ उन्हें भगतसिंह और राजगुरू महान क्रान्तिकारियों का भरपूर सहयोग मिला.

///लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला///

जब साइमन कमीशन भारत आया तो उसके विरोध में अनेक नेताओं ने देशभर में शांतिपूर्वक प्रदर्शन किये ,जब लाहोर में साइमन कमीशन का विरोध लाला लाजपत राय ने किया तो पुलिस ने उन पर बेरहमी से लाठीयाँ बरसाई कि कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई यह बात आजाद को चुभ गई और उन्होंनें भगतसिंह ,और राजगुरू के साथ मिलकर लाठियाँ चलवानें वाले पुलिस अधिकारी साँण्डर्स की हत्या कर लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेनें का निश्चय किया.

१७ दिसम्बर १९२८  को चन्द्रशेखर आजाद ,भगतसिंह और राजगुरू ने लाहोर मे पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में साण्डर्स को घेर लिया ज्यो ही साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साईकिल पर बैठकर जानें लगा राजगुरू ने गोली चला दी जो उसके मस्तक पर जा लगी भगतसिंह ने भी आगे बढ़कर चार - पाँच गोलीयाँ साण्डर्स पर चलाकर उसकी जीवनलीला ही समाप्त कर दी.जब उसका अंगरक्षक आगे बढ़ा तो आजाद ने उसको भी गोली से समाप्त कर दिया.सम्पूर्ण भारत में क्रान्तिकारीयों की इस कार्यवाही को सराहा गया.

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///अल्फ्रेड पार्क में आजाद की शहादत///

२७ दिसम्बर १९३१ को आजाद अपने साथी सुखदेव राज के साथ अल्फ्रेड पार्क में बेठकर विचार - विमर्श कर रहे थे,तभी किसी भेदिये ने आजाद के पार्क में बैठे होनें की सूचना पुलिस अधीक्षक नाटबाबर को दे दी .

पुलिस ने आजाद को पार्क में घेर लिया ,आजाद ने सुखदेव को भगा दिया,और स्वंय मोर्चे पर डट गये लम्बें संघर्ष के बाद आजाद को चार गोलीयाँ शरीर में  लगी,जब आजाद के पास मात्र एक गोली बची थी तब उन्होनें जिन्दा पकड़े जानें के भय से अपनी बची हुई गोली को अपनी कनपटी पर रखकर चला दिया,इस प्रकार मात्रभूमि का यह वीर सपूत बिना अंग्रेजों के हाथ लगे "आजाद" हो गया.




प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...