7 अप्रैल 2021

सावधान : कोरोनाकाल में कार में बेठते ही कभी न करें ये काम

सावधान : कोरोनाकाल कार में बेठते ही कभी न करें ये काम


भारत में कार रखना एक समय उच्च वर्ग का स्टेटस सिंबल बन गया था, किन्तु आज के कोरोनाकाल के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो कार दैनिक जरूरत का एक अंग बन गई है क्योंकि कोरोनावायरस के संक्रमण के मद्देनजर हर कोई सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहन को ही वरीयता देने लगा है। 

गर्मी और कोरोनाकाल है और कार घर के बाहर या पार्किंग में 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तापमान में  खड़ी खड़ी भट्टी बन जाती हैं, और यदि हमें कहीं जानों हो तो कार में बैठते ही Air-conditioner चालू कर देते हैं , स्वास्थ के दृष्टिकोण से यह बिल्कुल भी उचित नहीं है आईए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए
सावधान : कार में बेठते ही कभी न करें ये काम



• कार के अंदर की अधिकांश संरचना प्लास्टिक से निर्मित होती हैं जब कार के शीशे चढ़े हो और कार 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में घर के बाहर खड़ी होती हैं तो कार के अंदर का तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता हैं जो किसी भी प्लास्टिक संरचना को वाष्पित करने के लिए पर्याप्त होता है,50 डिग्री सेल्सियस तापमान में कार के अंदर लगे प्लास्टिक से बैंजीन नामक  जहरीली और कैंसर कारक गैस तथा प्लास्टिक कण निकलते हैं। यदि कार के शीशे चढ़े हो और हम हम तुरंत ए.सी.चालू कर कार में बैठ जाते हैं तो कार में फैली बैंजीन और प्लास्टिक के कण सांस के माध्यम से फेफड़ों,पेट और त्वचा में चिपक जाएंगे जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती हैं।


• यदि गर्भवती स्त्री बार बार बैंजीन के सम्पर्क में आती हैं तो उसके गर्भ का विकास रुक जाता हैं। साधारण महिला को मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और उसके अंडे का आकार सिकुड़ सकता है।

• बैंजीन गैस फेफड़ों में जातें ही फेफड़ों की आक्सीजन सोखने की क्षमता को घटा देती हैं फलस्वरूप शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती हैं।

• प्लास्टिक के कण सांस के माध्यम से पेट में चले जाने पर पेटदर्द, उल्टी - दस्त, एसिडिटी हो सकती हैं।

• यदि पूर्व में कार में कोई संक्रमित व्यक्ति बैठा था और कोरोनावायरस प्लास्टिक पर चिपका रह गया तो वह ए.सी.के चालू करते ही श्वसनतंत्र में प्रवेश कर सकता है।

• बार बार बैंजीन के सम्पर्क में आने से व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है,और व्यक्ति को माइग्रेन तनाव, अवसाद में हो सकता हैं। 

• बैंजीन व्यक्ति की बोनमेरो को प्रभावित कर लाल रक्त कोशिकाओं R.B.C. का निर्माण बंद कर सकती हैं फलस्वरूप व्यक्ति के शरीर में रक्त की कमी या एनिमिया हो सकता है।


• 45 डिग्री सेल्सियस तापमान को एकाएक 23 डिग्री कर देने पर मस्तिष्क का हाइपोथेलेमस भाग यानि तापमान नियंत्रण सिस्टम प्रभावित होता हैं जिससे व्यक्ति का शरीर गर्म और हाथ पांव ठंडे होना,या अचानक शरीर ठंडा गर्म होना जैसी बीमारी हो सकती हैं।

• बैंजीन गैस के सम्पर्क में आने से नवजात शिशु के अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

• बैंजीन गैस और प्लास्टिक के कण आंखों के सम्पर्क में आने से आंखें लाल होना,कम दिखाई देना, आंखों से पानी आना जैसी समस्या हो सकती है।

• कार के अंदर रखा अल्कोहल युक्त परफ्यूम या सेनिटाइजर वाष्पित होकर एलर्जी पैदा कर सकता है जिससे छींके आना,नाक बहना, सिरदर्द जैसी समस्या हो सकती हैं।

• कार में बैठकर सिगरेट पीने से धुंए में मौजूद बैंजीन के कण कार की दीवारों पर चिपक जाते हैं फलस्वरूप बैंजीन की सांद्रता कार में बढ़ जाती हैं जो व्यक्ति की अचानक मौत का कारण बन सकती हैं।


कार का ए.सी.चालू करने से पहले ये सावधानियां जरुर रखें


• गर्मी में कार से कहीं जाना हो तो सबसे पहले कार के शीशे और दरवाजे खोलकर ए.सी.चालू कर दें और पांच मिनट तक एक.सी.को आटो मोड़ पर चलने दें। ताकि प्लास्टिक से मुक्त हुए कण और बैंजीन गैस कार से बाहर निकल जाए

• नवजात शिशुओं को डेशबोर्ड के पास वाली सीट पर लेकर नहीं बैठें क्योंकि कुछ प्लास्टिक कण ए.सी.के आसपास भंवर बनाकर तैरते रहते हैं जो नवजात को नुकसान पंहुचा सकते हैं।


• सप्ताह में एक दिन कार के अंदर की सीट, डेशबोर्ड,ऊपर की छत,ए.सी.विंडो को वेक्यूम क्लीनर से अवश्य साफ करें।

• कार यदि अधिकांश समय खुली पार्किंग या घर के बाहर खड़ी रहती हैं तो उसमें लिक्विड परफ्यूम या हेंड सेनिटाइजर बिल्कुल भी नहीं रखें।

• कार का उपयोग करने से पहले उसके महत्वपूर्ण भागों जैसे दरवाजे, स्टियरिंग,गियर आदि को सेनेटाइजर अवश्य करें।

• कार में बैठकर सिगरेट बीड़ी कभी न पीएं।

• खुलें में पार्क  रखी कार में कभी सिंगल यूजेबल प्लास्टिक जैसे पानी की बोतल,कोक की बोतल कभी नहीं रखें। क्योंकि इस प्रकार के प्लास्टिक से बैंजीन और प्लास्टिक के खतरनाक कण भारी मात्रा में उत्सर्जित होते हैं।


नमस्कार दोस्तों Healthy lifestyle news ������������ पर लिखे गये लेख विश्व प्रसिद्ध स्वास्थ्य सलाहकार  द्धारा लिखे गये हैं । जो कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, एलोपैथी,योगा, समाजशास्त्र,और स्वास्थ्य प्रबंधन में निष्णांत हैं, परंतु कोई भी नुस्खा आजमाने से पूर्व वैधकीय परामर्श अवश्य प्राप्त कर लें ।

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6 अप्रैल 2021

घमोरियां मिटाने के घरेलू नुस्खे

मोरियां मिटाने के घरेलू नुस्खे

गर्मीयां आते ही कई लोगों को घमोरियां इस तरह परेशान करने लगती हैं कि इनके कारण सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित होने लगती हैं। किंतु यदि समय रहते घमोरियों का घरेलू उपचार कर लिया जाए तो ये बहुत आसानी से ठीक हो जाती हैं।
घमोरियां मिटाने के घरेलू नुस्खे
घमोरियां



घमोरियां होने का कारण

घमोरियां गर्म और नम वातावरण के कारण होती हैं गर्मीयों में त्वचा की श्वेद ग्रंथियों से निकला पसीना जब लम्बें समय तक त्वचा पर रहता है तो नमी, और गर्मी के कारण छोटी छोटी फुंसियां बन जाती हैं जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में मिलिरिया कहते हैं। 


घमोरियां  मिटाने के घरेलू नुस्खे


1.ऐलोवेरा 

एलोवेरा घमोरियां मिटाने का सबसे बढ़िया प्राकृतिक उपचार है, घमोरियां होने पर समान मात्रा में एलोवेरा जेल और गुलाब जल लेकर इन्हें मिला लें और नहाने से 30 मिनिट पहले घमोरियों पर लगा लें तत्पश्चात नहा लें, किंतु ध्यान रहे नहाने में ग्लिसरीन साबुन ही उपयोग करें।

2.बर्फ या ठंडा पानी

आइस क्यूब या ठंडे पानी को पालिथीन में भरकर घमोरियों पर 15 - 20 मिनट तक सिकाई करें ऐसा करने से घमोरियां धीरे - धीरे कम होकर कुछ समय बाद स्वत कम हो जाएगी।

3.मिट्टी लेपन

मिट्टी घमोरियां मिटाने का सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार माना जाता हैं रासायनिक खाद से मुक्त खेत की काली मिट्टी या मुल्तानी मिट्टी को बारिक छानकर पानी मिला लें और पेस्ट बनाकर नहाने से पहले घमोरियों पर लगा लें सुखने पर नहा लें। तीन चार बार यह प्रयोग करने से घमोरियां समाप्त हो जाती हैं।

• गेरु मिट्टी के औषधीय प्रयोग

4.मेंहदी

मेंहदी न केवल घमोरियां मिटाती है बल्कि त्वचा की जलन और सूजन भी मिटाती हैं ,रात को सोते समय शुद्ध मेंहदी का पेस्ट बनाकर घमोरियों पर लगा लें ,एक ही बार में बहुत आराम मिलेगा।


5.चंदन 

चंदन की तासीर ठंडी होती हैं यदि चंदन को सीलबट्टे पर घीसकर उतार लें और इसे घमोरियों पर लगा दें,चंदन को ऐसा ही लगा रहने दें, कुछ दिन के प्रयोग से घमोरियां मिट जाएगी।

6.नीम

नीम एंटीसेप्टिक के साथ एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से युक्त होती हैं , घमोरियां होने पर इसके पत्ते और छाल का पेस्ट बनाकर घमोरियों पर लगाना चाहिए और इसके पत्तों को पानी में डालकर नहाना चाहिए। 

7.हल्दी

हल्दी रक्तशोधक के साथ त्वचा की जलन और खुजली में भी आराम प्रदान करती हैं । प्रतिदिन दूध में मिलाकर हल्दी सेवन करने से घमोरियां नहीं होती हैं। और यदि हल्दी का पेस्ट बनाकर घमोरियों पर लगाते हैं तो घमोरियां समाप्त हो जाती हैं।

• दूध पीने के फायदे और नुकसान

8.खीरा ककड़ी 

खीरा ककड़ी का पेस्ट बनाकर घमोरियों पर लगाने से घमोरियां बहुत शीघ्रता से ठीक होती हैं।

9.आम

 कच्चे आम का छोलिया या आम का पना बनाकर पीने से घमोरियां मिट जाती हैं।
इसके अलावा आम की गुठली का चूर्ण दही में मिलाकर घमोरियों पर लगाने से घमोरियों में आराम मिलता हैं। 

10.खाने का सोडा और फिटकरी

घमोरियों पर खाने का सोडा लगाने से घमोरियां मिट जाती है इसके अलावा नहाने से पहले बाल्टी भर पानी में आधा चम्मच फिटकरी मिलाकर स्नान करने से त्वचा के रोमछिद्र खुल जातें हैं। जिससे घमोरियों के कारण होने वाली सूजन समाप्त हो जाती हैं।


11.दही और छाछ

दही और छाछ का नियमित इस्तेमाल करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़कर ,पेट साफ रहता है जिससे त्वचा संबंधी बीमारीयां होने की संभावना समाप्त हो जाती हैं।

12.गुलाब जल और ग्लिसरीन

थोड़ा सा गुलाब जल और ग्लिसरीन मिलाकर नहाने से पहले घमोरियों पर लगा लें और फिर स्नान करें । एक हफ्ते के प्रयोग से घमोरियां मिट जाती है।

घमोरियां पर क्या नहीं लगाना चाहिए

• घमोरियों पर अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर नही लगाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से घमोरियों में जलन बढ़ सकती हैं।

• घमोरियों को गर्म पुल्टिस से सेंकना नहीं चाहिए

•  नहाते समय घमोरियों को पत्थर या कपड़े से नहीं घीसना चाहिए।

• घमोरियों पर टेल्कम पावडर का छिड़काव नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से त्वचा के रोमछिद्र बंद हो सकतें हैं और घमोरियां बढ़कर फोड़े का रुप ले सकतीं हैं।

• घमोरियां होने पर चुस्त कपड़े पहनने के बजाय काटन के ढीले कपड़े पहनना चाहिए।













4 अप्रैल 2021

Immunotherapy: कैंसर उपचार की नई तकनीक

immunotherapy इम्यूनोथेरेपी क्या है

इम्यूनोथेरेपी Immunotherapy कैंसर के उपचार की नवीनतम जैविक तकनीक है जिसमें मनुष्य के प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने हेतू कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया जाता हैं। ताकि प्रतिरोधक कोशिकाएं (T-cell) कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर समाप्त कर सकें। इम्यूनोथेरेपी में प्रयुक्त पदार्थ मनुष्य के शरीर से ही निकाल कर उपचार किया जाता है।

इम्यूनोथेरेपी से न केवल प्रथम स्टेज बल्कि चोथी अवस्था तक के सभी प्रकार के कैंसर का निदान सफलतापूर्वक किया जा रहा है।


इम्यूनोथेरेपी के द्वारा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के दो तरीके होते हैं

1.रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं (T-cell) को शरीर से बाहर निकाल कर लेब में मोडिफाइड किया जाता हैं और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता हैं।

2.कैंसर रोगी के शरीर में विशेष रूप से तैयार एंटीबॉडी Antibody पंहुचा कर कैंसर कोशिकाओं को समाप्त किया जाता है।
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कैंसर कोशिकाएं


कैंसर इम्यूनोथेरेपी के प्रकार

कैंसर इम्यूनोथेरेपी चार प्रकार की होती हैं

1.T-cell ट्रांसफर थेरेपी या एडाप्टिव सेल थेरेपी adoptive cell therapy

T-cell ट्रांसफर थेरेपी या एडाप्टिव सेल थेरेपी में टी सेल कोशिकाओं की कैंसर से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया जाता है। इस थेरेपी में रोगी के खून से T-cell कोशिका लेकर प्रयोगशाला में इस प्रकार मोडिफाइड किया जाता हैंं कि ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पूरी क्षमता से नष्ट कर दें, इसके लिए इन T-cell कोशिकाओं पर विशेष रिसेप्टर उत्पन्न किए जाते हैं जब इन T-cell कोशिकाओं को रोगी के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता हैं तो रिसेप्टर कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उससे चिपक जाते हैं और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। 

T-cell ट्रांसफर थेरेपी या एडाप्टिव सेल थेरेपी ब्लड कैंसर के इलाज में बहुत प्रभावी सिद्ध होती हैं।


2.मोनोक्लोनल एंटीबाडी Monoclonal antibody

हमारे शरीर का प्रतिरोधी तंत्र मोनोक्लोनल एंटीबाडी का निर्माण करता है,यह एंटीबाडी शरीर में बीमारी पैदा करने वाले बेक्टेरिया, वायरस या कैंसर कोशिकाओं के सतह पर स्थित एंटीजन को पहचान कर उससे चिपक जाती हैं और इन्हें समाप्त कर देती हैं। कैंसर के इलाज के लिए इस प्रकार की मोनोक्लोनल एंटीबाडी विशेष रूप से तैयार कर कैंसर रोगी के शरीर में प्रविष्ट कराई जाती हैं । मोनोक्लोनल एंटीबाडी को थेरेपेटिक एंटीबाडी भी कहते हैं।

3.इम्यून चेक प्वाइंट इन्हेबिटर Immune checkpoint inhibitors


इम्यून चेकप्वाइंट इन्हीबिटर एक दवा है जो T-cell पर स्थित प्रोटीन PD-1 को ब्लाक कर देती है,PD-1 प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं का रक्षक बन T-cell को कैंसर कोशिकाओं पर आक्रमण करने से रोक देता है। 

इम्यून चेकप्वाइंट इन्हीबिटर से T-cell सक्रिय होकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह थेरेपी ब्रेस्ट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर,त्वचा कैंसर, किडनी कैंसर, लिवर कैंसर में बहुत प्रभावकारी होती हैं।

4.इम्यून सिस्टम माड्यूलेटर Immune system modulator

इम्यून सिस्टम माड्यूलेटर अंग विशेष की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कैंसर से बचाव करते हैं उदाहरण के लिए इम्यून सिस्टम माड्यूलेटर को गर्भाशय ब्लेडर में प्रविष्ट करवाकर गर्भाशय कैंसर कोशिकाओं और ब्लेडर कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता हैं।


कैंसर वैक्सीन Cancer vaccine

 कैंसर वैक्सीन के द्वारा cervical कैंसर,लिवर कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर से बचाव किया जाता हैं,यह वैक्सीन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को उत्प्रेरित करती है।

कैंसर इम्यूनोथेरेपी की सफलता दर immunotherapy success rate


कैंसर इम्यूनोथेरेपी Cancer Immunotherapy कैंसर के इलाज की बहुत आधुनिकतम तकनीक है जो कैंसर के इलाज में अन्य पद्धतियों जैसे स्टेम सेल थेरेपी, किमोथेरेपी, रेडिएशन और आपरेशन के मुकाबले बहुत प्रभावी हैं । इम्यूनोथेरेपी से तीसरी और चोथी स्टेज कैंसर का भी इलाज संभव है और मरीज कम दुष्प्रभाव के साथ लम्बा जीवन जी सकता हैं। 

कैंसर इम्यूनोथेरेपी के साइड इफेक्ट

✓ ब्लड प्रेशर कम होना

• निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार


✓ बुखार आना

✓ भूख नहीं लगना

✓त्वचा में खुजली, दर्द,त्वचा का लाल होना तथा त्वचा की एलर्जी होना

✓ शरीर और जोड़ों में दर्द बने रहना

✓ सर्दी खांसी होना

✓ चक्कर आना

✓ उल्टी होना

✓ सांस लेने में दिक्कत होना


✓ शरीर में सूजन आना



 किमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी में से कौंन सी बेहतर है


Journal of clinical oncology में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार जान हापकिंस किमेल कैंसर इंस्टीट्यूट  में हुए अध्ययन के अनुसार इम्यूनोथेरेपी किमोथेरेपी के मुकाबले ज्यादा प्रभावकारी और जान बचाने वाली तकनीक है।

Journal of clinical oncology के मुताबिक  Merkel cell carcinoma जो त्वचा का एक प्रकार का कैंसर होता हैं से पीड़ित 50 रोगीयों को जब इम्यूनोथेरेपी दी गई तो 50 में 28 कैंसर पीड़ितों ने बहुत बेहतर महसूस किया जबकि 12 कैंसर पीड़ितों का कैंसर पूरी तरह से ठीक हो गया । 

बाकि लोग कैंसर इम्यूनोथेरेपी के बाद दो साल से अधिक समय तक जीवित रहे।

इस संबंध में शोधकर्ताओं का मानना है कि 

"इम्यूनोथेरेपी किमोथेरेपी के मुकाबले बेहतर है क्योंकि इसमें सीधे कैंसर कोशिकाओं को लक्ष्य करने के बजाय शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता हैं।"


भारत में कैंसर इम्यूनोथेरेपी का कितना खर्च आता है Immunotherapy cost in india in hindi 2021

भारत में कैंसर इम्यूनोथेरेपी एक नई तकनीक है जो कि देश के बड़े शहरों मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, पुणे,चेन्नई, बेंगलुरु आदि में उपलब्ध हैं, विशेषज्ञों के मुताबिक इम्यूनोथेरेपी के 6 से 8 सत्र होतें हैं जो दो साल तक चलते हैं जिनकी लागत लगभग 80 से 1 लाख प्रतिमाह आती है।


स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी कैंसर उपचार की नई तकनीक है। इस तकनीक में बिना आपरेशन करें कैंसर कोशिकाओं को शक्तिशाली एक्स रे द्वारा नष्ट किया जाता है। 

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी की शुरुआत सबसे पहले लिस्बन पुर्तगाल के प्रोफेसर कार्लो ग्रेनो ने की थी।

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी में जी पी एस तकनीक द्वारा कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की पहचान कर सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर ही हाई डोज रेडिएशन थेरेपी दी जाती है जिससे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नही पंहुचता हैं, जैसा कि कीमौथैरेपी में होता है। 

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी किस प्रकार के कैंसर में प्रभावी होती हैं 

• स्तन कैंसर

• मस्तिष्क कैंसर

• रीढ़ की हड्डी का कैंसर

• फेफड़ों का कैंसर

• आंतों का कैंसर

• प्रोस्टेट कैंसर

• शरीर के आंतरिक भागों का कैंसर जिसमें कीमौथैरैपी देना संभव नही होता हैं ।

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी के लाभ


• कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को टारगेट करती हैं जिससे स्वस्थ कोशिकाओं और शरीर के दूसरे अंगों को कोई नुकसान नही पंहुचता हैं।

• जीपीएस सिस्टम की वजह से ऐसी जगहों पर जहां कैंसर कोशिकाओं के ऊपर निचे होने की संभावना रहती है वहां भी स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी कारगर है । जैसे फैंफडो का कैंसर

• एक साथ शरीर की बीस जगहों पर रेडिएशन दिया जा सकता है।

• स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी की सफलता दर 80 प्रतिशत से ऊपर होती हैं।

• अधिक उम्र में, कमजोर व्यक्तियों या अन्य बीमारियों से ग्रस्त रोगी को भी स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी आसानी से दी जा सकती हैं जबकि उपरोक्त समस्याओं में परंपरागत किमौथैरैपी देना संभव नहीं होता हैं।

• रेडिएशन देने का समय 15 से 20 मिनट होता है जो सामान्य रेडियो सर्जरी के एक घंटे के मुकाबले बहुत कम है।

• आंतरिक अंगों के कैंसर में इस रेडिएशन थेरेपी द्वारा आसानी से रेडिएशन दिया जा सकता है।

स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी की सीमाएं


• स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी 1 से 3 सेमी के ट्यूमर में कारगर होती हैं, इससे बड़े ट्यूमर में इसकी सफलता दर कम रहती है।

• देश के बड़े महानगरों और बडे़ अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं।

• स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी के 3 से 5 बार सेशन होते हैं जिनकी लागत 1 लाख रुपए प्रति सेशन पड़ती है जो गरीब वर्ग के लिए बहुत मंहगी हैं।



3 अप्रैल 2021

निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार

निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार 

निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार जानने से पहले आईए जानतें है निम्न रक्तचाप क्या होता है 

निम्न रक्तचाप क्या होता है 

एक सामान्य व्यक्ति का रक्तचाप 120/80 mmhg यानि सिस्टोलिक रक्तचाप 120 mmhg और डायसिस्टोलिक 80 mmhg होता हैं। यह एक आदर्श स्थिति मानी जाती हैं किन्तु जब सिस्टोलिक रक्तचाप 90 mmhg और डायसिस्टोलिक 60  mmhg होता हैं तो इस स्थिति को निम्न रक्तचाप या हाइपोटेंशन  कहते हैं। 



निम्न रक्तचाप के क्या लक्षण होते हैं 

• चक्कर आना

• शरीर में कमजोरी आना

• हाथ पांव में कमजोरी महसूस होना

• आंखों से कम दिखाई देना

• शरीर का तापमान कम होना

• सिरदर्द होना

• उल्टी होना

• प्यास अधिक लगना

• त्वचा ढीली पढ़ना

• त्वचा में पीलापन

• मानसिक अवसाद में रहना

• सांस बहुत गहरी और अनियमित चलना

• बातचीत करने बहुत बोझिल लगना

निम्न रक्तचाप के कारण


1.शरीर में पानी और खनिज लवणों की कमी

यदि शरीर में पानी और खनिज लवणों जैसे सोडियम पोटेशियम आदि की कमी हो जाती हैं तो शरीर का रक्तचाप कम हो जाता है। सोडियम पोटेशियम जैसे खनिज तत्व रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

हमारे शरीर में सामान्य सोडियम का स्तर 135 से 145 मिलीइक्विलेंट पर लीटर (mEq/L) हैं, जबकि पोटेशियम का सामान्य स्तर 3.6 and 5.2 millimoles per liter (mmol/L) होता है ,इस स्तर से कम सोडियम पोटेशियम होने पर निम्न रक्तचाप हो जाता हैं। 

इसी प्रकार दस्त उल्टी या अन्य किसी कारणवश शरीर में पानी की कमी हो जाती हैं तो निम्न रक्तचाप की समस्या पैदा हो जाती हैं।

• विभिन्न प्रकार के नमक के फायदे

2.विटामीन और आयरन की कमी

विटामीन बी 12 लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है यदि विटामिन बी 12 की कमी हो जाती हैं तो रक्त कोशिकाएं अस्वस्थ होकर व्यक्ति को एनिमिया हो जाता हैं फलस्वरूप पर्याप्त मात्रा में खून नहीं होने से व्यक्ति निम्न रक्तचाप से ग्रसित हो जाता हैं।

3.ह्रदय वाल्व में समस्या होने पर

यदि ह्रदय के वाल्व में समस्या हो जाती हैं या ह्रदय की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है तो ह्रदय की खून पंप करने की क्षमता कम हो जाती हैं और व्यक्ति निम्न रक्तचाप से पीड़ित हो जाता है।

4.गर्भावस्था के कारण

गर्भावस्था में स्त्री का रक्तसंचार तंत्र सक्रिय होकर हैं रक्त भ्रूण की ओर अधिक प्रवाहित होता हैं जिससे स्त्री का रक्तचाप कम हो जाता है।

5.रक्तस्त्राव के कारण

शरीर में से अधिक मात्रा में रक्त निकलने के कारण रक्त कम होकर रक्तचाप कम हो जाता हैं,ऐसा किसी दुर्घटना, आपरेशन या ऐसी बीमारी जिनमें आंतरिक रक्तस्राव हो सकता हैं जैसे डेंगू के कारण हो सकता हैं।


6.सदमा लगने के कारण

 अचानक कोई बुरी खबर सुनकर मस्तिष्क में सदमा लगा जाता हैं फलस्वरूप रक्तचाप कम हो जाता है।

7.दवाईयों के कारण

उच्च रक्तचाप,पार्किसन, तनाव, हाइपोथायरायडिज्म, एड्रीनलीन की समस्या, में उपयोग की जाने वाली दवाओं तथा एनेस्थीसिया दिए जाने के कारण भी निम्न रक्तचाप हो सकता है।

इसके अलावा vaccination वैक्सीनेशन, कैंसर के उपचार में प्रयोग की जाने वाली इम्यूनोथेरेपी Immunotherapy के कारण भी रक्तचाप कम हो जाता हैं।


निम्न रक्तचाप के कारण क्या समस्या हो सकती है

• अचानक से चक्कर आ सकते हैं जिससे व्यक्ति गिरकर चोटिल हो सकता है।

• ब्रेन स्ट्रोक और डिमेंशिया हो सकता है।

• किडनी, लिवर और शरीर के अन्य दूसरे अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

• गर्भस्थ शिशु का मस्तिष्क और अन्य दूसरे अंग अविकसित रह सकते हैं।

• लगातार निम्न रक्तचाप रहने से व्यक्ति अवसाद में चला जाता हैं।

निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार

• चिकित्सक की सलाह से अपना सोडियम और पोटेशियम लेवल पता करें यदि यह कम है तो डायटिशियन की सलाह पर नमक की दैनिक मात्रा बढ़ा दें।

अश्वगंधा,शिलाजीत,केसर या हल्दी दूध में मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए

• च्यवनप्राश एक चम्मच दूध के साथ रात को सोते समय लें

• ऐसी चीजें जो ब्लड प्रेशर लो करती हो जैसे भांग,गांजा, आदि नही ले।

• अनार, चुकंदर, बाजराउड़द , सोया व्यंजन, टमाटर,गाजर,ब्रोकली भोजन में शामिल करें।

• दाल सब्जी में हींग, कालीमिर्च, दालचीनी और सोंठ डालकर बघार लगाएं ।

• अधिक मैदायुक्त चीजें भोजन में न लें।

• स्विमिंग, साइकलिंग, रनिंग जैसी शारीरिक गतिविधियों में भाग लें।

• दिन में 10 से 12 गिलास पानी अवश्य पीएं।

• पसीना अधिक आता है तो दिन में एक या दो बार ORS, निम्बू पानी या नारियल पानी पीना चाहिए।

बीपी लो होने पर तुरंत क्या करना चाहिए

यदि किसी का बीपी अचानक से लो हो जाता है तो सब लोग घबराहट में आ जाते है किंतु ऐसे समय पर शांत रहकर चिकित्सा मिलने तक कुछ उपाय कर लेना चाहिए जैसे

1. सबसे पहले मरीज को पीठ के बल लेटने को कहें

2.इसके बाद पैरों को उठाकर, इनके निचे दो तकिए रख दें

3.पांच मिनट तक मरीज को ऐसे ही लेटने को कहें

4.ऐसा करने से खून का प्रवाह टांगों से ह्रदय और सिर की ओर होने लगता हैं और रक्तचाप में बढ़ोतरी हो जाती हैं।

• मरीज को चाय या कॉफी बनाकर पीलाएं

• ग्लूकोज या ORS पीने को दें



निम्न रक्तचाप के लिए योग


1.पवनमुक्तासन


कैसे करतें हैं - पीठ के बल लेटकर
पवनमुक्तासन


• सबसे पहले दोनों पैरों को बिना मोड़ें धीरे-धीरे श्वास भरकर उठाएं 60 डिग्री पर लाकर दोनों पैरों को उठाना रोकें

• इसके पश्चात चित्र में दर्शाए अनुसार पैरों को मोड़ लें

• अब चित्रानुसार दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ लें

• श्वास छोड़ते हुए सिर को ऊपर उठाकर मुंह को घुटनों से स्पर्श कराएं

• 30 सेकेंड तक इसी स्थिति में रहें

• अब जिस प्रकिया द्वारा योग की शुरुआत की थी उसी के द्वारा एक एक कर सामान्य स्थिति में लोट आएं

• कुछ देर शरीर को आराम दें और पुनः यह प्रक्रिया दोहराएं

• शुरू में एक दो बार करें बाद में समय आपकी सुविधा अनुसार बढ़ाते चलें 


2.शलभासन

कैसे करते हैं - पेट के बल लेटकर
निम्न रक्तचाप के लिए योग
शलभासन


• सबसे पहले चित्रानुसार लेटकर दोनों हाथों की मुट्ठी बना लें और जांघ के पास रखें

• चित्रानुसार श्वास लेते हुए पांव ऊपर करें

• अब दोनों तलवों को मिलाकर पांव मिला लें और पांव में खिंचाव पैदा करें

• कुछ देर इसी स्थिति में रहें और फिर पुनः पहले की अवस्था में लोट आएं


3.धनुरासन

कैसे करते हैं - पेट के बल लेटकर
धनुरासन


• चित्रानुसार दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर दोनों हाथों से श्वास भरकर पकड़े

• कुछ समय श्वास रोककर रूकें तत्पश्चात श्वास धीरे-धीरे छोड़कर पुनः पहले वाली अवस्था में आ जाएं

• सुविधा अनुसार इस क्रिया को तीन चार बार दोहराएं


4.भुजंगासन

कैसे करते हैं - पेट के बल लेटकर
भुजंगासन


• चित्रानुसार श्वास खींचते हुए धीरे धीरे शरीर को उठाएं

• श्वास लेते हुए कुछ सेकंड तक इसी अवस्था में बने रहे

• धीरे धीरे पुनः पहले वाली अवस्था में आ जाएं


निम्न रक्तचाप के लिए प्राणायाम


कपालभाति प्राणायाम


• सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं

• आंखों को बंद कर कंधों को ढीला छोड़ दें

• तेजी से श्वास भरें और छोड़ें यह क्रिया प्रतिमिनिट 60 बार करें

• प्रतिदिन धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाते हुए पांच मिनट तक लें जाएं

• उच्च रक्तचाप का आयुर्वेदिक इलाज



निम्न रक्तचाप के उपचार के लिए प्रथ्वी हस्त मुद्रा 

निम्न रक्तचाप से उबरने में प्रथ्वी हस्त मुद्रा बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है तो जानतें हैं प्रथ्वी हस्त मुद्रा कैसें करें

• दोनों हाथों की अनामिका अंगुली या सबसे छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली को अंगूठे से स्पर्श कराकर इस पर हल्का दबाव डालें और इस मुद्रा में तकरीबन आधा घंटा बैठे। 
निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार, प्रथ्वी हस्त मुद्रा


• नियमित रूप से प्रथ्वी हस्त मुद्रा करने से न केवल निम्न रक्तचाप का स्थाई समाधान होता है बल्कि चेहरे का तेज और मन प्रसन्न रहता है।
















 

2 अप्रैल 2021

कोरानाकाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कर रहे हैं इस्तेमाल तो इन बातों की गांठ बांध लें

 कोरोनाकाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कर रहे हैं इस्तेमाल तो इन बातों की गांठ बांध लें

प्रथ्वी पर जब से इंसानों का अस्तित्व है महामारीयां भी तभी से इंसानों को चुनौती देती आ रही हैं विश्व युद्ध के बाद यदि किसी ने धरती पर जनसंख्या का सबसे अधिक सफाया किया हैं तो वह महामारी ही है । 

चाहें वह सन् 1918 का स्पेनिश फ्लू हो या सन् 1994 का सूरत प्लेग अब यह अलग बात है कि इंसान महामारीयों पर नियंत्रण करने में अधिकांश समय सफल रहा किन्तु कुछ बीमारीयां इंसानी अस्तित्व के लिए इतनी अधिक चुनोतीपूर्ण साबित हुई कि इनसे निपटने के इंसानी प्रयास नाकाफी साबित होने लगे।

कोविड -19 भी इसी प्रकार की एक महामारी है जो अपने स्वरूप में तेजी परिवर्तन लाकर वैक्सीनेशन रुपी इंसानी प्रयासों को नाकाफी साबित करने में लगी है, वुहान से निकलकर अब तक इस बीमारी के वायरस ने नए नए रुप धारण कर लिए हैं जैसे ब्रिटेन स्ट्रेन, दक्षिण अफ्रीका स्ट्रेन, ब्राजील स्ट्रेन आदि ।

महामारीयों को फैलने से रोकने के लिए किए गए कुछ प्रयास सदैव इंसानों के हाथ में रहें हैं किन्तु इंसान ने इन्हें कभी गंभीरता से नहीं लिया ऐसा ही एक प्रयास हम पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के दौरान कुछ सावधानियां रखकर कर सकते हैं जिससे महामारी का फैलाव नियंत्रित हो तो आईए जानते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के दौरान रखी जानें वाली कुछ सावधानियों के बारें में
कोरोनाकाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कर रहे हैं इस्तेमाल तो इन बातों की गांठ बांध लें



1.भूखे पेट यात्रा न करें

जब भी हम भूखे होते हैं हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं और वायरस को तो यही पसंद है यानि वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को बहुत जल्दी अपना निशाना बनाता हैं। यदि आपका पेट भरा रहेगा तो आपके पास बैठा संक्रमित व्यक्ति भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा ।

यदि यात्रा के दौरान उपवास है तो भी कुछ न कुछ खाकर ही घर से निकले अब सवाल उठता है क्या खाएं तो जिन लोगों को उपवास नहीं है वे भोजन में दाल-चावल,हरी सब्जी,दही छाछ ,कुछ मीठा जिन्हें डायबिटीज है वे ड्रायफ्रूट्स स्मूदी ले सकते हैं । 

जिन लोगों को उपवास है वे फल, दूध राजगिरा, साबुदाना से बने व्यंजन काजू-बादाम किशमिश और मूंगफली लें।


यात्रा यदि लम्बी है तो बीच बीच में कुछ खाते रहे ,बाहर से कुछ खाने का लें रहें हों तो वह स्वास्थ्यवर्धक और सफाई से बना हो इसका ध्यान रखें। पिज्जा,बर्गर,समोसा,कचोरी के बजाय उबले हुए खाद्य पदार्थ जैसे इडली,खमंड-ढोकला आदि को वरीयता दें ।


2.तरल पदार्थ लेते रहे 


पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे ट्रेन,बस,हवाई जहाज में लम्बी यात्रा कर रहे हो तो शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत आवश्यक होता हैं। यदि कोशिकाओं में पानी की कमी हो जाएगी तो डिहाइड्रेशन होगा और यदि कोशिकाएं डिहाइड्रेट हुई तो वायरस कोशिकाओं में प्रविष्ट होकर कोशिकाओं को बीमार बना देगा , लगातार पानी पीने से श्वेत रक्त कोशिकाएं W.B.C. स्वस्थ रहेगी और वायरस से लड़कर शरीर को निरोगी रखेगी ।


यात्रा के दौरान सबसे अच्छा पेय पदार्थ पानी ही है आप लगातार बैठे हैं तो आपको पानी की प्यास नहीं लगेगी लेकिन ध्यान रहे हर आधा या एक घंटे में पानी पीते रहे । प्यास बुझाने के लिए चाय काफी, पेप्सी कोक या टाफी का इस्तेमाल हरगिज नहीं करें। 


यात्रा के दौरान चाय काफी लेकर वेंडर बहुत घूमते हैं लेकिन ध्यान रहे अधिक चाय काफी न लें एक या दो बार पर्याप्त है इसके बजाय आप छाछ या फलों का रस ले सकते हैं।


3.पर्याप्त नींद अवश्य लें


कई लोग दो तीन दिन लम्बे सफर  के दौरान बिल्कुल भी नहीं सोते हैं और घर आकर लम्बा सोते हैं ऐसा हरगिज नहीं करें यात्रा के दौरान जब भी रात को आपके सोने का समय हो अपनी बर्थ पर सो जाएं ऐसा करने से आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक नहीं बिगड़ेगी और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी रहेगी। सफर में कोई संक्रमित व्यक्ति आपके आसपास भी हुआ और आप मामूली संक्रमित भी हो गए तो नींद के दौरान आपका शरीर संक्रमण को समाप्त कर देगा । 

कम दूरी के सफ़र के दौरान भी कुछ समय की झपकी शरीर को तरोताजा और ताकतवर बना देती हैं।


4.पब्लिक टायलेट के इस्तेमाल में सावधानी

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जाहिर है पब्लिक टायलेट का इस्तेमाल भी करना पड़ेगा और संक्रमण फैलने का खतरा भी इन्हीं जगहों से सबसे ज्यादा होता है अतः पब्लिक टायलेट  इस्तेमाल करने के बाद जिन हिस्सों का स्पर्श पब्लिक टायलेट से हुआ था उन्हें अच्छी तरह से विसंक्रमित Disinfected कर लें।


5.अपनी सीट को साफ अवश्य करें

सफर लम्बा हो या छोटा लोग आज भी सफर के दौरान बेखोफ होकर सीट को बिना साफ किए बैठ रहें हैं यह स्थिति संक्रमण को बढ़ाने के लिए बहुत अधिक जिम्मेदार हैं अतः सफर से पहले अपने सेनेटाइजर से सीट को विसंक्रमित कर ही बैठे ।

6.यात्रा के दौरान अनावश्यक इधर उधर ना घूमें


यात्रा के दौरान कई लोगों की आदत होती हैं कि वे कुछ समय पश्चात ट्रेन में इधर उधर घूमकर अपना टाइम पास करते हैं और अनावश्यक रूप से ट्रेन रुकने वाले स्टेशन पर उतरते हैं । ऐसा हरगिज ना करें ऐसा करना वायरस को साथ बुलाकर अपने साथ ले जाने के समान है। कोई नहीं जानता कि जिस जगह को आप छू रहें हों,जिस प्लेटफार्म की सीट पर आप बैठें हो वहां थोड़ी देर पहले वायरस संक्रमित व्यक्ति बैठा हो अतः अपनी सीट से अनावश्यक न उठें।

7.मास्क इस्तेमाल करने के सही तरीकों को अपनाएं

भारत में मास्क इस्तेमाल मात्र पुलिस की कार्यवाही से बचने के लिए ही किया जाता है। कई लोग कुछ समय पश्चात मास्क में घबराहट महसूस करते हैं , यात्रा के दौरान सीट पर बैठते ही मास्क खिसकाकर ड्योढ़ी पर ले आते हैं, यदि मास्क में घबराहट महसूस हो रही हो तो उसे निकालने के दौरान सामने वाले यात्री से कम से कम तीन फीट दूरी अवश्य रखें। 

यदि आसपास कोई खांसी या छींक रहा है तो कम से कम दस मिनट तक मास्क लगाकर रखें। 

सफर के दौरान मास्क निकालकर सीट पर न रखें और नियमित अंतराल पर मास्क बदलते रहें।

8.इलेक्ट्रानिक भुगतान को वरीयता दें

सफर के दौरान नगद लें देश के बजाय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली को वरीयता दें ऐसा करने से आप संक्रमण को बढ़ने से रोक पाएंगे और सफ़र को सुरक्षित और रोगमुक्त बना पाएंगे।

9.सफर में कपड़े कैसे पहने

लम्बे सफर के दौरान लोग निक्कर या आधी आस्तिन की टी शर्ट पहनना पसंद करते हैं लेकिन यह आदत अब बदल लेनी चाहिए आधे अधूरे कपड़े वायरस संक्रमण को नहीं रोक पाते, वायरस हाथ पांव की त्वचा पर चिपककर नाक मुंह के रास्ते श्वसन तंत्र में प्रवेश कर जाता हैं । यदि आप शरीर को पूरा ढंककर रखने वाले कपड़े पहनेंगे तो वायरस कपड़े के संपर्क में आकर कुछ समय बाद स्वत: नष्ट हो जाएगा।

10.आवश्यक दवाईयां साथ रखें

अपने चिकित्सक के परामर्श से प्राथमिक चिकित्सा किट बना लें और अपने साथ रखें । इसके अलावा आपकी बीपी ,शुगर आदि की नियमित चलने वाली गोलीयां भी अवश्य साथ रखें।
















1 अप्रैल 2021

Hopshoot : दुनिया का सबसे मंहगा फल

 Hopshoot दुनिया का सबसे मंहगा फल


भारत में आजकल एक पौधा बहुत चर्चा में हैं इस पौधे का नाम है हाप hop और इस पौधे पर जो फल या कह लें फूल लगता है जिसका नाम हापशूट Hopshoot है। उसकी कीमत है एक लाख रुपए किलो जी हां सही पढ़ा आपने एक लाख रुपए किलो। हापशूट्स दुनिया का सबसे मंहगा फल हैं।

बहुत कम लोग जानते हैं कि हापशूट्स Hopshoot दुनिया का सबसे मंहगा फल क्यों है? 

तो इसका भी हम आपको जवाब दे देते हैं , Hopshoot अपनी मादकता, सुगंध,और औषधीय गुणों के कारण यूरोपीय,अमेरिकन देशों में इतना अधिक लोकप्रिय हैं कि लोग हापशूट को खरीदने के लिए 1 हजार यूरो प्रति किलो यानि भारतीय मुद्रा में तकरीबन 80 हजार से एक लाख रुपए आसानी से खर्च कर देते हैं।

 हापशूट का फल,तना, जड़ सबकुछ जटिल बीमारियों को ठीक करने का सामर्थ्य रखते हैं। हापशूट के बीज बियर के स्वाद और इसकी सुगंध को मादक बनाने के लिए भी प्रयोग किए जाते  है।
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हापशूट



हापशूट भांग Cannabaceae कुल का पौधा है जिसका बाटनिकल नाम  botanical name of hops Humulus lupulus हैं।

हापशूट का फल वास्तव में लतारुपी पौधों में लगने वाले एक प्रकार के फूल है ,हापशूट का मूल उद्गम स्थान यूरोप हैं लेकिन इसके बढ़ते महत्व को देखते हुए आजकल यह पूरी दुनिया में उगाया जाता हैं ‌। तो आईए जानते हैं हापशूट के औषधीय गुणों के बारे में


1.हापशूट के लाभ कैंसर में

नवीनतम शोधों के मुताबिक हापशूट में एक्टिव बायो एसिड ह्यूमोलोंस humolones और ल्यूपोलोंस lupulones ,जेंथोंलोंस प्रचुरता से पाया जाता हैं ‌। यह तत्व कोलोन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ओवेरियन कैंसर की कोशिकाओं को मार देता हैं । और इसके सेवन से प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना समाप्त हो जाती हैं।

2.तनाव समाप्त करता हैं

हापशूट भांग के कुल का होने के कारण खाने वाले को नशा देता है, लेकिन हापशूट का सीमित मात्रा में उपयोग औषधि बन जाता हैं। शोध के मुताबिक यदि इसके पत्तों की चाय बनाकर रात को सोने से पहले पीने से तनाव समाप्त हो जाता हैं।

3.हापशूट के लाभ माइग्रेन में

हापशूट में पाए जाने वाला सक्रिय तेल मस्तिष्क की नशों में खिंचाव कम कर माइग्रेन में आराम पहुंचाता है। प्राचीन काल से ही चीन और यूरोप के लोग हापशूट के पत्तों का तकिया बनाकर ऐसे लोगों को सोने के लिए देते हैं जिन्हें माइग्रेन, डिमेंशिया और अनिद्रा की बीमारी है।

शोधकर्ताओं के अनुसार हापशूट में मौजूद जेंथोहूमोल xanthohumol मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है इस प्रकार बुढ़ापे में हापशूट का सेवन पार्किसन और एल्जाइमर से बचाता है।

4.श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियों में हापशूट के लाभ

हापशूट के पत्तों की भाप और इसमें मौजूद एंटी बेक्टेरियल सुगंधित तेल श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियों जैसे अस्थमा, खांसी और एलर्जी में आराम पहुंचाता है। 

चीन में सदियों से हापशूट का प्रयोग ट्यूबरकलोसिस के इलाज में हो रहा है। ब्रिटिश शोधकर्ताओं के मुताबिक हापशूट की एंटी बेक्टेरियल प्रापर्टी टीबी के बेक्टेरिया का सफाया कर देती हैं, हालांकि इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है।


5.मेनोपाज में हापशूट के लाभ

हापशूट में मौजूद केमिकल होपीन की संरचना मानव एस्ट्रोजन के समान होता है । अतः ऐसी महिलाएं जो मेनोपॉज से गुजर रही है यदि वे हापशूट का सेवन शुरू कर दें तो मेनोपॉज की वजह से होने वाले हार्मोनल बदलाव को नियंत्रित कर सकती हैं। 

शोधकर्ताओं के अनुसार हापशूट खाने वाली महिलाएं एस्ट्रोजन थैरेपी जैसी जटिल प्रक्रिया से बच सकती हैं।और menopause की वजह से होने वाले अधिक रक्तस्राव की  समस्या से बच सकती है।


5.वजन कम करने में हापशूट के लाभ

हापशूट में मौजूद फ्लेवनॉयड्स शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट को नियंत्रित कर अतिरिक्त चर्बी को पिघलाता हैं, जिससे मोटापा तेजी से कम होता हैं।

5.गंजापन में हापशूट के लाभ

हापशूट का तना, पत्तों और फल को सुखाकर और फिर इसका पेस्ट बनाकर गंजे सिर पर लगाने से गंजे सिर पर फिर से बाल आने लगते हैं। रिसर्च पेपर्स में छपे लेखों के अनुसार हापशूट में मौजूद सक्रिय तेल सिर के रोमछिद्रों को खोलकर मृत कोशिकाओं Dead skin cells को हटा देता हैं और नवीन कोशिकाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करता है जिससे नए बाल आने की प्रक्रिया तेजी से शुरू होती है।

हापशूट को सिर में लगाने से डेंड्रफ की समस्या का समाधान भी बहुत सरलता से होता हैं।


6.एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण

प्राचीन काल से ही इसके रस को सूजन कम करने के लिए शरीर के विभिन्न भागों पर लगाया जाता है । इसका रस चोंट, घाव, मसूड़ों की सूजन,गठिया और शरीर पर आने वाली  अन्य प्रकार की सूजन को बहुत तेजी से कम करता है।

7.शीघ्रपतन में हापशूट के लाभ

हापशूट में मौजूद तेल पुरुष जननांगों की संवेदनशीलता को कम कर देता है फलस्वरूप पुरुष में लम्बे समय तक सेक्स करने पर भी शीघ्रपतन premature ejaculation नहीं होता हैं।

8.दिमाग को शांत रखता है

हापशूट दिमाग की नसों को आराम प्रदान कर मस्तिष्क को शांत रखता है । ऐसे खेल जहां दिमाग शांत और एकाग्रचित्त करने की आवश्यकता होती है जैसे शतरंज निशानेबाजी आदि में हापशूट खिलाड़ी के प्रदर्शन को सुधारता है ।

हापशूट attention deficit-hyperactivity disorder (ADHD) के इलाज में भी प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है

9.एसिडिटी में राहत प्रदान करता है

हापशूट स्वाद में कड़वा होता हैं और इसकी प्रकृति क्षारीय होती हैं । इसके सेवन से पेट में एसिड कम हो जाता हैं और एसिडिटी,खट्टी डकारें,पेट फूलना आदि में राहत मिलती हैं।

10.मूत्र की रुकावट में

हापशूट खाने के बाद पेशाब बार बार होती हैं अतः जिन लोगों को प्रोस्टेट या अन्य कारणों से मूत्र की रुकावट होती हैं वे हापशूट का सेवन करें तो मूत्राशय बहुत शीघ्र खाली हो जाता है।

11.स्त्रीयों का दूध बढ़ाने में हापशूट के लाभ

हापशूट में पाया जाने वाला तत्व ल्यूपिन स्त्री के स्तनों की दूध नलिकाओं को उत्तेजित कर अधिक दूध निर्माण को प्रोत्साहित करता हैं।

12.एंटी एजिंग क्रीम

हापशूट के रस और इसके तेल से बनने वाली स्कीन क्रीम पूरी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें पाई जाने वाली एंटी एजिंग प्रापर्टी त्वचा को जवान और चमकदार बनाए रखती हैं। 




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