29 मई 2021

Corona Vaccine : वो सभी जानकारी जो आपको जानना चाहिए

Corona Vaccine 

कोविशील्ड़ Covishield


कोविशील्ड़ ब्रिटेन की एस्ट्रोजेनेका और भारत की सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोरोना वायरस प्रतिरोधी वैक्सीन है ।

कोविशील्ड़ ChAdoxInCov 19 Recombinant तकनीक पर आधारित टीका हैं जिसे चिंपाजी के शरीर में पाए जाने वाले एडिनो वायरस [जो मानव शरीर में प्रतिकृति नहीं बना पाते] और SARS Cov 19 वायरस के स्पाइक प्रोटीन [जो मानव भ्रूणीय गुर्दे पर आनुवांशिक रूप से परिवर्तित कर] (Genetically modified) तैयार किया जाता है।

एशिया,अफ्रीका और यूरोप में हुए परीक्षणों के आधार पर कोविशील्ड़ कोरोनावायरस के प्रति प्रभावकारी साबित हुई और इसने कोरोनावायरस की घातकता से बचाकर जीवन की रक्षा की है। 


कोविशील्ड़ का प्रभाव



• कोविशील्ड़ टीके के पहले डोज के बाद दूसरे डोज में 6 सप्ताह से कम समय का अंतर रखने पर टीके का प्रभाव 53.28 प्रतिशत पाया गया ।

• जिन लोगों को प्रथम खुराक के बाद टीके की दूसरी खुराक के बीच अंतराल 40 से 60 दिन रखा गया उनमें टीके की प्रभाविता 51.08 प्रतिशत पाई गई ।

• जिन लोगों को टीके की प्रथम खुराक के बाद दूसरी खुराक में 9 से 11 सप्ताह का अंतर रखा गया उनमें टीके की प्रभाविता 60.55 प्रतिशत पाई गई ।

• जिन लोगों को कोविशील्ड़ का प्रथम टीका लगाने के बाद कोविशील्ड़ का दूसरा टीका 12 सप्ताह या 84 दिन बाद दिया गया उनमें कोविशील्ड़ की प्रभाविता 78.79 प्रतिशत पाई गई ।

• कोविशील्ड़ उन लोगों में 73.43 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है जिन्हें कोमोर्बिडिटी यानि कैंसर, मधुमेह, ह्रदयरोग,उच्च रक्तचाप आदि बीमारीयां हैं ।

उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि कोविशील्ड़ के प्रथम टीके के बाद दूसरे टीके के बीच तीन महिने का अंतराल टीके प्रभाविता को बढ़ा देता है । ऐसे लोगों में एंटीबाडी का अधिक स्तर होने से कोरोनावायरस का घातक प्रभाव नहीं होता हैं और कोविड़ होने के बाद भी व्यक्ति साधारण सर्दी,खांसी, बुखार, मुंह का स्वाद खत्म होना और नाक से गंध नही आना जैसी समस्या पीड़ित होकर व्यक्ति कोरोना को मात दे देता है । 
 

कोविशील्ड़ के बारें पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न


प्रश्न 1.जिन्हें कोविशील्ड़ वैक्सीन का पहला टीका लग चुका है क्या उन्हें दूसरा टीका भी कोविशील्ड़ का लगेगा ?

उत्तर :: जी हां, जिन लोगों को कोविशील्ड़ का पहला टीका लगा हैं उन्हें दूसरा टीका भी कोविशील्ड़ का ही लगेगा ।

प्रश्न 2.क्या कोरोना से ठीक होनें के तत्काल बाद कोविशील्ड़ का टीका लगाया जा सकता है ?

उत्तर ::जी नही,कोरोना से ठीक होने के तत्काल बाद कोविशील्ड़ का टीका नहीं लगाना चाहिए बल्कि ऐसे मामलों में कोविड़ से ठीक होने के तीन महिने बाद टीकाकरण करवाना चाहिए ।

यदि साधारण सर्दी,खांसी और बुखार है तो टीकाकरण करवाया जा सकता हैं ।

प्रश्न 3.क्या गर्भावस्था के दौरान कोविशील्ड़ वैक्सीन लगाई जा सकती हैं ?

उत्तर :: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अनुसार गर्भावस्था के दौरान टीका तभी लगवाना चाहिए जब टीके के फायदे मां और शिशु के लिए संभावित खतरें से कहीं अधिक हो । इस बारें में अंतिम निर्णय गायनेकोलॉजिस्ट से परामर्श से ही लिया जाना चाहिए।

हालांकि गर्भस्थ पशुओं में जो परीक्षण हुए हैं उसके अनुसार टीके के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए हैं । 

प्रश्न 4.क्या टीका लगवाने के बाद प्रजनन क्षमता पर कोई असर पड़ता हैं ?

उत्तर :: इस संबंध में अभी तक कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है अतः यह कहना कि टीका लगवाने के बाद प्रजनन क्षमता खत्म हो जाएगी या पुरुष नपुंसक हो जाएगा पूरी तरह से असत्य और भ्रामक है ।

प्रश्न 5.क्या स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को कोविशील्ड़ वैक्सीन लगवाना चाहिए ?

उत्तर :: भारत सरकार ने स्तनपान करवानें वाली महिलाओं को टीकाकरण करवानें की अनुमति प्रदान की है। क्योंकि टीकाकरण से माता के दूध पर क्या विपरीत असर होता है अभी तक इसका कोई विस्तृत अध्ययन उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न 6.कोविशील्ड़ की पहली डोज और दूसरी डोज के बीच कितना अंतराल रखा जाता हैं?

उत्तर:: भारत सरकार के कोविन पोर्टल के अनुसार पहली डोज लेने के 84 से 112 दिन के अंतराल पर कोविशील्ड़ वैक्सीन की दूसरी डोज दी जाती है।

vaccine कोविशील्ड़ कोवैक्सीन स्पूतनिक वी स्पूतनिक लाइट
Vaccine


कोवैक्सीन Covaxin BBV152


कोवैक्सीन भारत में निर्मित पूर्णतः स्वदेशी कोरोना वायरस प्रतिरोधी वैक्सीन है जिसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ICMR , नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलाजी और भारत बायोटेक ने मिलकर बनाया है ।

कोवैक्सीन पूर्व की वैक्सीन बनाने वाली प्रचलित तकनीक पर आधारित वैक्सीन है जिसमें SARS Cov 2 के मृत वायरस का इस्तेमाल किया जाता है ।

जब इस मृत कोरोनावायरस को जो कि शरीर की कोशिकाओं से चिपककर अपनी प्रतिलिपि बनाने में अक्षम होता है को शरीर में डाला जाता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम इन वायरस के प्रति एंटीबाडी बना लेता है और जब कभी वास्तविक कोरोनावायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है तो शरीर का प्रतिरोधी तंत्र इस वायरस को पहचान कर नष्ट कर देता हैं। 

प्रश्न 1.क्या एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति कोवैक्सीन ले सकता है?

उत्तर :: कोवैक्सीन  SARS Cov एंटीजन , एल्युमिनियम हाइड्राक्साइड़ जेल,इमिडायोक्यूनोलिनोन,फिनोक्सीथेनोल,और फास्फेट सफर साल्यूशन को मिलाकर बनाई जाती है। यदि उपरोक्त पदार्थों से किसी को एलर्जी है तो कोवैक्सीन का टीका नहीं लगवाना चाहिए, इसके अतिरिक्त  धूल, धुंआ, परागकण, लेटेक्स,विनोम, मुंह से ली जाने वाली दवाओं और खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने पर कोवैक्सीन का टीका लगाया जा सकता है ।

प्रश्न 2.क्या गंभीर बीमारी से पीड़ित रोगी जैसे कैंसर,एड्स आदि को कोवैक्सीन का टीका लगाया जा सकता है?

उत्तर :: जी हां, गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का टीकाकरण किया जा सकता है। इन लोगों से पीड़ित व्यक्तियों को अपना टीका प्राथमिकता से लगवाना चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्तियों का प्रतिरोधी तंत्र कमजोर होने से कोविड होने की संभावना अधिक रहती है ।

प्रश्न 3.कोवैक्सीन कोरोनावायरस के प्रति कितनी प्रभावशाली है ?
उत्तर : कोवैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके व्यक्तियों के अध्ययन से पता चलता है कि कोवैक्सीन 78 प्रतिशत प्रभावी है। 

कोवैक्सीन दुनियाभर में फैले कोरोनावायरस के अलग-अलग वेरियंट जैसे ब्राजील वेरियंट्स,यूके वेरियंट,डबल म्यूटेंट आदि के विरुद्ध भी बहुत प्रभावी हैं। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के अनुसार को वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके व्यक्तियों में कोरोनावायरस से मृत्यु की आशंका 100 प्रतिशत कम हो जाती हैं। अर्थात इस वैक्सीन को लेने के बाद कोरोनावायरस से कोई नहीं मरता या फिर कोरोना होने पर सामान्य सर्दी,खांसी और बुखार होकर ठीक हो जाता है ।

प्रश्न 4.कोवैक्सीन की पहली और दूसरी डोज के बीच कितना अंतराल रखा जाता हैं ?

उत्तर :: कोवैक्सीन की पहली डोज लेने के 28 से 42 दिन के अंतराल पर दूसरी डोज दी जाती है।


स्पूतनिक वी Sputnik V

स्पूतनिक वी रुसी वैक्सीन है जिसे रुस के गेमेलया नेशनल सेंटर फॉर एपीडोनालाजी और माइक्रोबायोलॉजी ने बनाया है । इस वैक्सीन की भी दो खुराक दी जाती है और पहली डोज लेने के बाद दूसरी डोज में 21 से 90 दिन के अंतराल रखा जाता है। 

स्पूतनिक वी भी कोविशील्ड़ वैक्सीन की तरह एडिनो वायरस को वेक्टर की तरह इस्तेमाल कर और SARS Cov 2 के RNA को मोडिफाइड कर एडिनो वायरस में डालकर बनाई गई है। लेकिन स्पूतनिक वी की दोनों डोज में अलग-अलग प्रकार की ताकत के SARS Cov 2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन mRNA का इस्तेमाल होता हैं ।

स्पूतनिक वी की प्रथम डोज में rAd5 प्रकार का व दूसरी डोज में rAd26 प्रकार के एडिनो वायरस का इस्तेमाल होता हैं।


Effectiveness of Sputnik V स्पूतनिक वी की प्रभावशीलता

स्पूतनिक वी विश्व की तीसरे नंबर की वैक्सीन है जो कोरोनावायरस के प्रति 91.7 प्रतिशत प्रभावशील है। 

स्पूतनिक लाइट Sputnik light

स्पूतनिक लाइट वैक्सीन सिंगल डोज कोरोनावायरस प्रतिरोधी वैक्सीन है । यह वैक्सीन भी एडिनो वायरस को वेक्टर रुप में इस्तेमाल कर और कोरोनावायरस स्पाइक प्रोटीन को आनुवांशिक रूप से परिवर्तित कर इसमें मिलाकर बनाई गई है।

स्पूतनिक लाइट में rAd26 वेक्टर इस्तेमाल किया जाता है जबकि स्पूतनिक वी में rAd5 वेक्टर का पहली डोज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

विभिन्न परीक्षणों के अनुसार स्पूतनिक लाइट लगाने के 28 दिन बाद कोरोनावायरस के प्रति 79.4 प्रतिशत प्रभावी है।

वैक्सीन के दुष्प्रभाव क्या है 

सम्पूर्ण विश्व में सभी देशों में दी जा रही है विभिन्न प्रकार की वैक्सीन व्यापक शोध और विस्तृत परीक्षणों के बाद ही लोगों को लगाई जाती हैं और इन वैक्सीन को बनाने वाले वैज्ञानिक अपने अपने देश के सर्वश्रेष्ठ शोध संस्थानों में काम करते हैं । लगभग सारी वैक्सीन सुरक्षित और कोरोनावायरस से होने वाली मृत्यु को रोकने में सक्षम है । इन वैक्सीन को लगाने के बाद थोड़े बहुत शारीरिक प्रतिक्रिया होती हैं जो कि स्वाभाविक है और यह वैक्सीन की सफलता को दर्शाती है। इन शारीरिक प्रतिक्रिया में

• वैक्सीन लगाने के बाद वैक्सीन लगने वाली मांसपेशी में दर्द होना ।

• वैक्सीन लगने के बाद हल्का सा बुखार आना।

• सिरदर्द होना

• चक्कर आना 

• वैक्सीन लगने वाली जगह  लाल होना और हल्का सूजन आना


कोविशील्ड़ कोवैक्सीन और स्पूतनिक वी वैक्सीन में से मुझे कौंन सी वैक्सीन लगवानी चाहिए ?

उत्तर :: भारत में कोरोनावायरस की सेकंड वेव या दूसरी लहर ने मानव जीवन को जो क्षति पहुंचाई है और विशेषज्ञों ने कोरोनावायरस की तीसरी लहर या कोरोनावायरस थर्ड वेव आने की आशंका जताई है, उसे देखते हुए यह समय यह सवाल पूछने का बिल्कुल भी नहीं है कि मुझे कौंन सी वैक्सीन लगवानी चाहिए ?

 आपको जो वैक्सीन समय और परिस्थितियों के अनुसार मिल रही है वह तुरंत लगवा लें और जानलेवा कोरोनावायरस के घातक प्रभाव को सीमित करें ।

 

Q.1.क्या 16 जनवरी 2021 से कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतू टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो रहा हैं ?

Ans.जी हाँ, 16 जनवरी 2021 से कोरोना वायरस से प्रतिरक्षण हेतू भारत में टीकाकरण अभियान की शुरूआत हो रही हैं ।

Q.2.कोरोना वायरस से बचाव हेतू लगाये जानें वाले टीके का क्या नाम हैं ?

Ans.कोरोना वायरस से बचाव हेतू दो कम्पनीयों के टीको को अब तक भारत सरकार ने अनुमति प्रदान की हैं 

1.सीरम इंस्टिट्यूट का "कोविशील्ड"

2.भारत बायोटेक का "कोवैक्सीन"

3.रुस की स्पूतनिक वी


Q.3.क्या कोरोना वायरस से बचाव हेतू टीकाकरण एक साथ सभी का किया जायेगा ?

Ans.जी नहीं, अभी टीकाकरण के लिए उच्च जोखिम वाले समूह का चयन किया गया हैं उदाहरण के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ,आशा आदि । इसके पश्चात टीके की उपलब्धता के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जायेगा ।

दिनांक 1 मार्च 2021 से भारत सरकार ने कोरोनावायरस के द्वितीय चरण की शुरुआत की है जिसमें 60 वर्ष के अधिक व्यक्तियों और 45 से 59 वर्ष के उन व्यक्तियों का टीकाकरण किया जाएगा जो गंभीर रूप से पीड़ित हैं और इनको इस आशय का प्रमाण पत्र चिकित्सक द्दारा जारी किया गया है।

1 अप्रैल 2021 से कोरोना वायरस टीकाकरण 45 साल से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को लगाने को लेकर भारत सरकार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं ।

1 भी 2021 से कोरोना प्रतिरोधी वैक्सीन 18 से 44 वर्ष के व्यक्तियों के लिए खोल दिया है ।


Q.4.क्या कोरोना वायरस से बचाव हेतू किया जानें वाला टीकाकरण मुफ़्त होगा ?

Ans.अभी स्वास्थ्य सेवा देनें वाले व्यक्तियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं, आशा बहन आदि को दिया दानें वाला टीका सरकार की ओर से मुफ़्त लगाया गया है।

अभी द्वितीय चरण में शासकीय संस्थाओं में जो टीकाकरण किया जा रहा हैं वह मुफ्त है जबकि सरकार द्वारा निर्धारित निजी अस्पतालों में 250 रुपए शुल्क लेकर टीकाकरण किया जा रहा है ।


 Q.5.क्या टीकाकरण के लिए व्यक्तियों को पंजीकरण करना होगा ?

Ans.5. जी हाँ, कोरोना वायरस  प्रतिरक्षण टीकाकरण हेतू लाभार्थियों का पंजीयन Cowin website या आरोग्य सेतू एप,या उमंग एप के माध्यम से किया जाएगा । जिसमें लाभार्थी द्धारा जरूरी जानकारी दर्ज करने के उपरांत टीकाकरण स्थल का चुनाव कर  टीकाकरण दिनांक और समय का चयन किया जा सकता है।


Q.6.क्या कोविड़ वैक्सीन लेना सभी के लिए अनिवार्य हैं ?

Ans.6.कोरोना वायरस प्रतिरक्षा हेतू टीकाकरण पूर्णत: स्वैच्छिक रखा गया हैं । किंतु सलाह यही है कि इस बीमारी से बचाव हेतू टीकाकरण आवश्यक हैं। जिससे स्वंय की परिवार की समाज की कोरोनावायरस से सुरक्षा प्राप्त की जा सकें ।


Q.7.क्या कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति या संदिग्ध मरीज को टीकाकरण किया जा सकता हैं ?

Ans.7.कोरोना वायरस से संक्रमित और संदिग्ध का टीकाकरण नहीं किया जाता हैं क्योंकि संक्रमित व्यक्ति का टीकाकरण से कोरोनावायरस अन्य व्यक्तियों को फैलनें का खतरा रहता हैं । अत:संक्रमित व्यक्ति की रिपोर्ट नेगेटिव आनें के 90 दिन बाद ही टीकाकरण किया जाना चाहिए ।

Q.8.कोविड़ टीकाकरण की कितनी खुराक दी जाएगी ?

Ans.8.कोरोना वायरस से बचाव हेतू टीकाकरण की दो खुराक दी जाती हैं प्रथम खुराक के बाद 6 से 12 हफ्तों के बाद दूसरी खुराक दी जाती हैं । जिसका फैसला वैक्सीन के प्रकार पर निर्भर है।

Q.9.यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरी बीमारीयों जैसें मधुमेह,उच्च रक्तचाप,अस्थमा,कैंसर आदि से पीड़ित हैं और इन बीमारीयों की दवा ले रहा हैं तो क्या उसका टीकाकरण किया जा सकता हैं ?

Ans.9.जी बिल्कुल,ऐसे व्यक्ति जो उपरोक्त बीमारियों से पीड़ित हैं और दवाईयों का सेवन कर रहें हैं ये लोग उच्च जोखिम वाले माने गये है और इनका टीकाकरण आवश्यक हैं ।


Q.10.कोरोना वायरस से प्रतिरक्षा हेतू टीकाकरण के कितने दिनों बाद सुरक्षा प्राप्त होती हैं ?

Ans.10.कोविड़ टीकाकरण की दूसरी खुराक लेने के 15 दिनों के बाद एंटीबाडी विकसित होना शुरू हो जाती हैं । 


Q.11.कोविड़ टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव क्या हो सकता हैं ?

Ans.11. टीकाकरण के बाद टीके वाले स्थान पर दर्द,सूजन और हल्का बुखार आ सकता हैं किंतु इसमें चिंता की कोई बात नहीं होती हैं।कुछ घंटों के बाद सबकुछ सामान्य हो जाता हैं।

टीकाकरण के बाद टीकाकरण केन्द्र पर लगभग 30 मिनिट विश्राम करना चाहियें। यदि इस बीच कोई समस्या जैसें उल्टी होना,चक्कर आना ,बैचेनी महसूस होना आदि जैसी समस्या हो तो स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को सूचना दें ।

Q.12.टीकाकारण  पंजीयन हेतू आवश्यक दस्तावेजों की सूचि कोंन सी हैं ?


Ans.12. 

• आधार कार्ड
• मतदाता पहचान पत्र
• पासपोर्ट
• बैंक या डाकघर की पासबुक 
• राशन कार्ड
• ड्राइविंग लाइसेंस
• गैस कनेक्शन की डायरी
• मनरेगा जॉबकार्ड
• पैनकार्ड
• नियोक्ता द्धारा जारी पहचान प्रमाण पत्र
• कोई अन्य दस्तावेज जो चुनाव आयोग द्धारा पहचान के लिए मान्य दस्तावेजों में शामिल हो ।

किंतु यह ध्यान रहें कि पंजीकरण के समय जो दस्तावेज उपयोग किया गया था वही दस्तावेज टीकाकरण के समय लाना अनिवार्य रहेगा ।


Q.13.क्या कोविड़ टीकाकरण के बाद टीकाकरण पूर्ण कर चुके व्यक्ति की पहचान के लिए कोई दस्तावेज दिया जायेगा ?

Ans.13.जी हाँ,टीकाकरण पूर्ण कर चुके व्यक्ति को टीकाकरण पूर्ण करनें पर इलेक्ट्रॉनिक फार्मेट में टीकाकरण पूर्ण करनें का प्रमाण पत्र दिया जाएगा ।


Q.14.भारत बायोटेक ने टीकाकरण से संबधित कोंन सी एडवाइजरी जारी की हैं जिसके अनुसार किन व्यक्तियों को टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए ?

Q.15.भारत बायोटेक ने टीकाकरण से संबधित भ्रांतियों को दूर करने हेतू कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किये हैं जिनके अनुसार


1.गर्भवती स्त्री को टीकाकरण करवानें से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श प्राप्त कर लेना चाहिए ।


3.बुखार से पीड़ित रोगी का टीकाकारण बुखार उतनें के बाद ही किया जाना चाहियें ।


4.यदि कोई टीका लगा हैं तो कोविड़ टीकाकरण 14 दिनों के बाद ही किया जाना चाहिए ।

Q.15. टीकाकरण में कोमोर्बिड comorbid का क्या मतलब है ?

उत्तर = भारत सरकार ने 45 वर्ष से 59 वर्ष के उन व्यक्तियों का टीकाकरण करने का निर्णय लिया है जो कोमोर्बिड अर्थात गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं । इसके लिए सरकार द्वारा बीमारियों की सूचि दी गई हैं जो निम्न हैं 

1.ऐसे बीमारी जो पिछले एक साल के अन्दर ह्रदयघात की वजह से अस्पताल में भर्ती थे ।

2.ऐसे व्यक्ति जिन्हें cardiac transplant हुआ हो या जिन्हें Left ventricular Assist Device (LVAD) लगा हो ।

3.जिन्हें 40 प्रतिशत से अधिक Left ventricular systolic dysfunction हुआ हो ।

4.ऐसे जिन्हें गंभीर से लेकर मध्यम स्तर तक की ह्रदय वाल्व संबंधित बीमारी हो ।

5.congenital heart disease के साथ गंभीर PAH या idiopathic PAH

6. coronary arteries disease with past CABG/PTCA//MI and Hypertension/Diabetes on treatment

7. जो व्यक्ति angina ,Hypertension और मधुमेह का इलाज लें रहें हों । 

8.CT/MRI में जिन्हें स्ट्रोक की समस्या आई हो ।

9.जिन्हें pulmonary artery से संबंधित हाइपरटेंशन हो

10.जो पिछले दस साल से कम से समय से मधुमेह का उपचार चल रहा हो ।

11.जिनका किडनी,लीवर,Hematopoietic stem cell transplant की सूचि में नाम हो या वेटिंग लिस्ट में नाम हो ।

12. End stage kidney Disease on haemodialysis/ CAPD

13.लम्बें समय से corticosteroid या immunosuppressant मेडिसिन लें रहें व्यक्ति ।

14.Decompensated cirrhosis

15. श्वसन तंत्र से संबंधित गंभीर बीमारी जिनमें व्यक्ति पिछले  दो साल के अन्दर अस्पताल में भर्ती कराया गया हो ।/FEV1 50 प्रतिशत से कम हो ।

16. लिम्फोमा,ल्यूकेमिया,मेलोमा कैंसर हो ।

17.जिन्हें 1 जुलाई 2020 के बाद किसी भी प्रकार का कैंसर हुआ हो या फिर जो इस समय कैंसर से संबंधित कोई थैरेपी ले रहें हों ।

18. सिकल सेल बीमारी,बोन मैरो फैल्यूअर,अप्लास्टिक एनिमिया, थैलीसीमिया से पीड़ित व्यक्ति ।

19.एड्स या कोई अन्य primary immunodeficiency Disease से पीड़ित व्यक्ति ।

20. ऐसे व्यक्ति जो मानसिक दिव्यांग हो,मस्क्यूलर डिस्ट्राफी से पीड़ित,जिनके ऊपर एसिड अटेक हुआ हो और इसमें श्वसन तंत्र प्रभावित हुआ हो, ऐसे दिव्यांग जिन्हें उच्च मददगार उपकरण लगे हो या जिन्हें बहुप्रकार की विकलांगता हो इसमें सुनने से संबंधित समस्या भी हो ।

प्रश्न 16.कोरोना वैक्सीन लगने के कितने समय बाद गर्भधारण किया जा सकता है ?

उत्तर :: भारत में बहुत महिलाएं इस सवाल का जवाब पूछ रही है कि कोरोना वैक्सीन लगने के कितने समय बाद गर्भधारण करना चाहिए? इस विषय पर अनेक स्त्री रोग विशेषज्ञों ने बताया कि दंपति कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लगने के दो माह बाद बच्चा प्लान करें और इस बात की सावधानी न सिर्फ महिला बल्कि पुरूष भी रखें जिन पुरुषों को वैक्सीन का दूसरा डोज लगा है वे भी दो महिने तक बेबी प्लान न करें


प्रश्न 17.क्या मानसिक दिव्यांग को कोरोना वैक्सीन लगाई जा सकती हैं ?

उत्तर 17.जी हां, भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन अनुसार मानसिक दिव्यांग और शारीरिक दिव्यांग वैक्सीन लगाने वाले प्राथमिकता समूह में आते हैं । यदि मानसिक दिव्यांग और शारीरिक दिव्यांग की उम्र 18 वर्ष से अधिक है तो उनका वैक्सीनेशन जरूर करवाएं।

प्रश्न 18.क्या पीरियड में वैक्सीन लगा सकते हैं ?

उत्तर 17.जी हां, पीरियड में वैक्सीन लगवा सकते हैं। पीरियड में वैक्सीन लगवाने से किसी भी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता हैं।

प्रश्न 19.मैनें वैक्सीन का पहला डोज लगवा लिया है यदि मैं वैक्सीन का दूसरा डोज नहीं लगवाऊं तो क्या होगा ?

उत्तर 19.विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन की पहली डोज से एंटीबाडी का वह स्तर प्राप्त नहीं हो पाता है जो कोरोनावायरस के विभिन्न वेरियंट्स के लिए आवश्यक है, अतः इसका दूसरा डोज लगाया जाता है। 

अतः कोरोनावायरस से संपूर्ण सुरक्षा हेतू वैक्सीन के दोनों डोज आवश्यक है।

प्रश्न 20.मेरे शरीर में जगह-जगह गांठ है क्या मुझे वैक्सीन लगाना चाहिए?

उत्तर 20.अभी तक के अध्ययनों में जिन लोगों को वैक्सीन लगाई गई हैं उन्हें कोई दुष्प्रभाव नहीं हुआ है। अतः वैक्सीन पूर्णतः सुरक्षित है।

प्रश्न 21.अभी मेरी बायपास सर्जरी हुई है क्या मैं वैक्सीन लगा सकता हूं?

उत्तर 21.भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ह्रदयरोगी कोमार्बिडीटी यानि कोरोनावायरस से जल्दी संक्रमित होने की संभावना वाले व्यक्ति हैं, अतः ऐसे व्यक्ति का टीकाकरण आवश्यक है। अतः ऐसे व्यक्ति को वैक्सीन लगाना चाहिए।

प्रश्न 22.मैनें आज ही रक्तदान किया हैं , मुझे वैक्सीन कब लगवाना चाहिए?

उत्तर.रक्तदान के 24 घंटों के बाद ही कोरोना रोधी वैक्सीन लगवाना चाहिए, रक्तदान के बाद सुलभता से उपलब्ध कोई भी वैक्सीन लगवा लें, इसमें विशेष वैक्सीन का कोई बंधन नहीं है,सभी वैक्सीन समान और कोरोनावायरस से बचाव हेतू हैं।

प्रश्न 23.वैक्सीन लगने के बाद कब रक्तदान करना चाहिए ?

उत्तर 23. वैक्सीन की पहली या दूसरी डोज लगने के 14 दिनों के बाद ही रक्तदान करना चाहिए।

प्रश्न 24.क्या कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं ?

उत्तर 23.कोरोना से गंभीर संक्रमित व्यक्ति दो बार रिपोर्ट नेगेटिव आने का इंतजार करें और दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आने के 6 माह बाद ही रक्तदान करें।

मध्यम  लक्षणों से ग्रसित व्यक्ति भी संभव हो सकें तो छः माह बाद ही रक्तदान करें।

हल्के लक्षणों वाले व्यक्ति रिपोर्ट नेगेटिव आने के 28 दिन बाद रक्तदान कर सकते हैं।

किंतु व्यक्ति यदि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर आदि बीमारी से पीड़ित हैं तो रक्तदान करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।


प्रश्न 25.क्या पहली खुराक कोविशील्ड की लगने के बाद दूसरी खुराक कोवैक्सीन की लगाई जा सकती हैं ?

उत्तर 25.भारत में पहली खुराक कोविशील्ड की लगने के बाद दूसरी खुराक कोविशील्ड की ही लगाई जाती हैं। और कोवैक्सीन की पहली डोज लगने के बाद दूसरी डोज भी कोवैक्सीन की ही लगाई जाती है। 

पहली खुराक कोविशील्ड की लगने और दूसरी डोज कोवैक्सीन की लगने को लेकर अभी शोध बाकि है शोध पूरा होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है, लेकिन श्री लंका में कोविशील्ड की पहली डोज के बाद उसी व्यक्ति को दूसरी डोज फाइजर वैक्सीन की लगाई जा रही है।


 Coronavirus:  जानिए कौंन सा ब्लड़ ग्रुप वाला व्यक्ति सबसे कम संक्रमित होता है

कोरोनावायरस और इसकी मनुष्य पर घातकता को लेकर पूरी दुनिया में रोज नए नए शोध हो रहे हैं ,इन शोधों के अंतिम नतीजों को लेकर अनेक विशेषज्ञों में मतभेद हो सकते हैं लेकिन चिकित्सक इन शोध नतीजों का प्रयोग तब तक करते हैं जब तक कि इन शोधों को खारिज करने वाली नई शोध नहीं आ जाती,ऐसा ही एक शोध ब्लड़ ग्रुप को लेकर हुआ है जिसमें बताया गया है कि o ब्लड़ ग्रुप वाले लोगों में कोरोनावायरस संक्रमण की घातकता कम होती हैं ।

चीन के वुहान शहर में जहां से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला था। यहां के एक शोधकर्ता वुआ ने वुहान के तीन बड़े अस्पतालों में 2100 लोगों पर शोध कर बताया कि ब्लड़ ग्रुप ओ कोरोनावायरस से सबसे कम संक्रमित होता है, यदि संक्रमित हो भी गया तो  इस ब्लड़ ग्रुप के लोगों में रोग के गंभीर होने की संभावना बहुत कम होती हैं । जबकि ब्लड़ ग्रुप ए,बी और एबी के कोरोनावायरस से संक्रमित होने की अधिक संभावना रहती और संक्रमण के बाद इस ब्लड़ ग्रुप के व्यक्ति गंभीर होने की संभावना ब्लड़ ग्रुप ओ के मुकाबले अधिक होती हैं।

इसी प्रकार का एक अध्ययन इटली और स्पेन में हुआ है स्पेन के शोधकर्ता एंग्री फ्रैंकलिन ने 1980 ऐसे कोरोना मरीजों का DNA विश्लेषण कर बताया जो Respiratory system failure के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे उन्होंने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि ब्लड़ ग्रुप ओ की मृत्यु दर अन्य ब्लड़ ग्रुप जैसे ए,बी,और एबी के मुकाबले कम थी । हालांकि इसमें कुछ अन्य पैरामीटर जैसे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि को ध्यान में नहीं रखा गया था जिस पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं ।


कुछ ब्लड़ ग्रुप के कोरोनावायरस से अधिक संक्रमित होने का क्या कारण हो सकता है 
Coronavirus कौंन सा ब्लड़ ग्रुप सबसे अधिक संक्रमित हो सकता है

कोरोनावायरस के कुछ ब्लड़ ग्रुप को अधिक संक्रमित करने पर एक जेनेटिक कंपनी 23 एंड मी ने एक विस्तृत रिसर्च के माध्यम से प्रकाश डाला कि आखिर क्यों एक खास ब्लड़ ग्रुप कम और अन्य ब्लड़ ग्रुप अधिक संक्रमित हो रहें हैं,इस कंपनी ने 750,000 लाख लोगों के ब्लड़ ग्रुप का अध्ययन कर बताया कि

• ब्लड़ ग्रुप ए में पाया जानें शुगर एंटीजन ए, एंटीजन बी के प्रति एंटीबाडी बनाता हैं।

• ब्लड़ ग्रुप बी में पाया जानें वाला शुगर एंटीजन बी, एंटीजन ए के प्रति एंटीबाडी बनाता हैं।

• चूंकि ब्लड़ ग्रुप ओ में कोई एंटीजन नहीं होता अतः यह ए और बी एंटीजन के प्रति एंटीबाडी बनाता है।

इसका यह अर्थ है कि ब्लड़ ग्रुप ओ वाले व्यक्तियों में एंटीजन की अनुपस्थिति के कारण अन्य ब्लड़ ग्रुप वाले व्यक्तियों जैसे ए और बी की अपेक्षा 25 प्रतिशत कम ब्लड़ क्लाटिंग होती हैं इसे वान विलबोर्ड फेक्टर vwf कहते हैं । कोविड़ 19 में मृत्यु का एक बड़ा कारण श्वसन प्रणाली में रक्त का थक्का बनने के कारण होने वाली आक्सीजन की कमी और घातक न्यूमोनिया होता है।

यदि ब्लड़ ग्रुप ओ वाला कोविड़ पाजिटीव व्यक्ति किसी ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति के सामने खांसेगा तो ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति में एंटीबाडी  बी की अनुपस्थिति में वायरस अधिक घातक होकर ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति को प्रभावित करेगा ।इसी प्रकार यदि कोई ब्लड़ ग्रुप ए वाला कोविड़ पाजिटीव व्यक्ति किसी ब्लड़ ग्रुप ओ वाले व्यक्ति के सामने खांसेगा तो ब्लड़ ग्रुप ओ में मौजूद एंटीबाडी ए बी की उपस्थिति के कारण वायरस व्यक्ति को अधिक बीमार नहीं करेगा । 

इस रिसर्च थ्योरी पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं और यह कोई अंतिम परिणाम नहीं है इस विषय पर और अधिक शोध की आवश्यकता है ।





27 मई 2021

बाकुची के फायदे। Bakuchi ke fayde

बाकुची के फायदे । Bakuchi ke fayde


बाकुची के पौधे बरसात में सामान्यतः उगते हैं । Bakuchi ke podho की लम्बाई एक से लेकर चार फीट तक होती हैं । बाकुची की डाली सीधी और पत्ते ग्वार के पत्तों के सदृश्य होते हैं । बाकुची के पत्तों के कोनों में से तीन इंच लम्बे ऊंगली के समान डंठल निकलते हैं और इनके ऊपर गहरे बैंगनी रंग के फूल निकलते हैं। बाकुची bakuchi के फूलों का आकार तुलसी की मंजरी के समान होता हैं ।


बाकुची के फूलों में से पतली तोते के समान फलियां निकलती हैं जो पकने पर काली पड़ जाती हैं । इन फलियों में बीज भी काले रंग के निकलते हैं । 

1.बाकुची के फायदे सफेद दाग में

2.गठान होनें पर बाकुची के फायदे

3.दाद खाज में बाकुची के फायदे

4.बालों के लिए बाकुची के फायदे

5.पीलिया होनें पर बाकुची के फायदे

6.दांतों की सड़न रोकनें में बाकुची के फायदे

7.दस्त रोकनें में बाकुची के फायदे

8.त्वचा के कैंसर को रोकनें में बाकुची के फायदे


बाकुची का संस्कृत नाम 

सोमराज,कृष्णफल,कुष्ठनाशिनी,सोमवल्ली


बाकुची का हिन्दी नाम


बावर्ची,बकुची


बाकुची का लेटिन नाम


Psoralea corylifolia सोरेलिया कोरिलीफोलिया


आयुर्वेद मतानुसार बाकुची की प्रकृति


आयुर्वेद मतानुसार बावची शीतल,कटु और पित्त शामक होती हैं ।


1.बाकुची के फायदे सफेद दाग में


बावची के बीजों को गोमूत्र में पांच घंटे के लिए भिगो दें तत्पश्चात निकालकर छाया में सूखा लें। और बाकुची के बीज से आधा भाग जीरे का मिलाकर इस मिश्रण को पीस लें। रोज सुबह शाम आधा आधा चम्मच इस मिश्रण को लगभग एक साल तक ले । सफेद दाग में बहुत फायदा होता हैं । 


2.गठान होने पर बाकुची के फायदे


बाकुची के बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण को पानी मिलाकर कुछ समय तक गर्म कर लें थोड़ा गर्म रहने पर गांठ पर बांध लें कुछ दिनों के प्रयोग से गठान बैठ जाती हैं ।


3.दाद खाज में बाकुची के फायदे

बाकुची के पत्तों को पीसकर दाद खाज खुजली वाली त्वचा पर लगाने से दाद खाज खुजली मिट जाती हैं ।


4.बालों के लिए बाकुची के फायदे


बाकुची की फलियों को पानी में उबाल लें,इस उबले हुए पानी से बालों को धो लें। बाल घने, चमकीले और घने हो जातें हैं ।



5.पीलिया होनें पर बाकुची के फायदे


बाकुची के फूलों को पानी में कुछ समय तक उबाल लें। और यह पानी थोड़ा थोड़ा करके पीलिया पीड़ित व्यक्ति को पीलाएं बहुत आराम मिलेगा ।


6.दांतों की सड़न रोकने में बाकुची के फायदे


बाकुची की जड़ सडे दांत पर लगाने से सडे हुए दांतों की सड़न रुक जाती हैं ।


7.दस्त रोकने में बाकुची के फायदे


बाकुची के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी को दस्त पीड़ित व्यक्ति को पीलाने से दस्त तीव्रता से बंद हो जातें हैं ।


8.त्वचा के कैंसर को रोकने में बाकुची के फायदे



त्वचा के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था से ही यदि बावची के बीजों और काले तिल को मिलाकर लम्बे समय तक सेवन करना चाहिए ऐसा करने से त्वचा का कैंसर का प्रभाव बहुत सीमित हो जाता हैं ।


 





25 मई 2021

Coronavirus: जानिए कौंन सा ब्लड़ ग्रुप वाला व्यक्ति सबसे कम संक्रमित होता है

 Coronavirus:  जानिए कौंन सा ब्लड़ ग्रुप वाला व्यक्ति सबसे कम संक्रमित होता है

कोरोनावायरस और इसकी मनुष्य पर घातकता को लेकर पूरी दुनिया में रोज नए नए शोध हो रहे हैं ,इन शोधों के अंतिम नतीजों को लेकर अनेक विशेषज्ञों में मतभेद हो सकते हैं लेकिन चिकित्सक इन शोध नतीजों का प्रयोग तब तक करते हैं जब तक कि इन शोधों को खारिज करने वाली नई शोध नहीं आ जाती,ऐसा ही एक शोध ब्लड़ ग्रुप को लेकर हुआ है जिसमें बताया गया है कि o ब्लड़ ग्रुप वाले लोगों में कोरोनावायरस संक्रमण की घातकता कम होती हैं ।

चीन के वुहान शहर में जहां से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला था। यहां के एक शोधकर्ता वुआ ने वुहान के तीन बड़े अस्पतालों में 2100 लोगों पर शोध कर बताया कि ब्लड़ ग्रुप ओ कोरोनावायरस से सबसे कम संक्रमित होता है, यदि संक्रमित हो भी गया तो  इस ब्लड़ ग्रुप के लोगों में रोग के गंभीर होने की संभावना बहुत कम होती हैं । जबकि ब्लड़ ग्रुप ए,बी और एबी के कोरोनावायरस से संक्रमित होने की अधिक संभावना रहती और संक्रमण के बाद इस ब्लड़ ग्रुप के व्यक्ति गंभीर होने की संभावना ब्लड़ ग्रुप ओ के मुकाबले अधिक होती हैं।

इसी प्रकार का एक अध्ययन इटली और स्पेन में हुआ है स्पेन के शोधकर्ता एंग्री फ्रैंकलिन ने 1980 ऐसे कोरोना मरीजों का DNA विश्लेषण कर बताया जो Respiratory system failure के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे उन्होंने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि ब्लड़ ग्रुप ओ की मृत्यु दर अन्य ब्लड़ ग्रुप जैसे ए,बी,और एबी के मुकाबले कम थी । हालांकि इसमें कुछ अन्य पैरामीटर जैसे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि को ध्यान में नहीं रखा गया था जिस पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं ।


कुछ ब्लड़ ग्रुप के कोरोनावायरस से अधिक संक्रमित होने का क्या कारण हो सकता है 
Coronavirus कौंन सा ब्लड़ ग्रुप सबसे अधिक संक्रमित हो सकता है

कोरोनावायरस के कुछ ब्लड़ ग्रुप को अधिक संक्रमित करने पर एक जेनेटिक कंपनी 23 एंड मी ने एक विस्तृत रिसर्च के माध्यम से प्रकाश डाला कि आखिर क्यों एक खास ब्लड़ ग्रुप कम और अन्य ब्लड़ ग्रुप अधिक संक्रमित हो रहें हैं,इस कंपनी ने 750,000 लाख लोगों के ब्लड़ ग्रुप का अध्ययन कर बताया कि

• ब्लड़ ग्रुप ए में पाया जानें शुगर एंटीजन ए, एंटीजन बी के प्रति एंटीबाडी बनाता हैं।

• ब्लड़ ग्रुप बी में पाया जानें वाला शुगर एंटीजन बी, एंटीजन ए के प्रति एंटीबाडी बनाता हैं।

• चूंकि ब्लड़ ग्रुप ओ में कोई एंटीजन नहीं होता अतः यह ए और बी एंटीजन के प्रति एंटीबाडी बनाता है।

इसका यह अर्थ है कि ब्लड़ ग्रुप ओ वाले व्यक्तियों में एंटीजन की अनुपस्थिति के कारण अन्य ब्लड़ ग्रुप वाले व्यक्तियों जैसे ए और बी की अपेक्षा 25 प्रतिशत कम ब्लड़ क्लाटिंग होती हैं इसे वान विलबोर्ड फेक्टर vwf कहते हैं । कोविड़ 19 में मृत्यु का एक बड़ा कारण श्वसन प्रणाली में रक्त का थक्का बनने के कारण होने वाली आक्सीजन की कमी और घातक न्यूमोनिया होता है।

यदि ब्लड़ ग्रुप ओ वाला कोविड़ पाजिटीव व्यक्ति किसी ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति के सामने खांसेगा तो ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति में एंटीबाडी  बी की अनुपस्थिति में वायरस अधिक घातक होकर ब्लड़ ग्रुप बी वाले व्यक्ति को प्रभावित करेगा ।इसी प्रकार यदि कोई ब्लड़ ग्रुप ए वाला कोविड़ पाजिटीव व्यक्ति किसी ब्लड़ ग्रुप ओ वाले व्यक्ति के सामने खांसेगा तो ब्लड़ ग्रुप ओ में मौजूद एंटीबाडी ए बी की उपस्थिति के कारण वायरस व्यक्ति को अधिक बीमार नहीं करेगा । 

इस रिसर्च थ्योरी पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं और यह कोई अंतिम परिणाम नहीं है इस विषय पर और अधिक शोध की आवश्यकता है ।
















24 मई 2021

भारत में सामने आया Yellow Fungus का पहला केस

भारत में सामने आया Yellow Fungus का पहला केस  

 

पीला मशरूम


ब्‍लैक और व्‍हाइट फंगस के बाद अब देश में एक और नए फंगस ने दस्‍तक दे दी है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में येलो फंगस का पहला मामला सामने आया है. 


 पूरा देश पहले ही कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर और उसके बाद आए ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) एवं व्‍हाइट फंगस (White Fungus) से त्रस्‍त है. वहीं अब देश में येलो फंगस (Yellow Fungus) ने भी दस्‍तक दे दी है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) में येलो फंगस का पहला मामला सामने आया है. येलो फंगस का शिकार हुए इस मरीज का फिलहाल गाजियाबाद के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. 


ये हैं Yellow Fungus के लक्षण 

 विशेषज्ञों ने इस फंगस के लक्षण भी बता दिए हैं. येलो फंगस के मरीज को सुस्ती, भूख कम होना या बिल्कुल भूख न लगने जैसे शुरुआती लक्षण आते हैं. साथ ही मरीज का वजन भी कम होने लगता है. वहीं गंभीर मामलों में मवाद आने, घावों के धीमी गति से ठीक होने, कुपोषण, अंगों का काम करना बंद करने जैसे स्थिति पैदा हो जाती है. इसके मरीज की आंखें भी अंदर धंस जाती हैं. 

बाकी दोनों फंगस से है ज्‍यादा खतरनाक 

कहा जा रहा है कि यह येलो फंगस बाकी दोनों यानी कि ब्‍लैक और व्‍हाइट फंगस से ज्‍यादा खतरनाक है क्‍योंकि यह घातक बीमारी शरीर के अंदर शुरू होती है और काफी बाद में इसके लक्षण बाहर दिखाई देते हैं. ऐसे में लक्षण दिखते ही तत्‍काल ट्रीटमेंट शुरू करें. 

येलो फंगस होने के कारण 

बाकी दोनों फंगस की तरह येलो फंगस का संक्रमण होने के पीछे का कारण भी गंदगी और नमी ही है. लिहाजा अपने घर के अंदर और आस-पास सफाई रखें. बैक्टीरिया और फंगस को विकसित होने से रोकने के लिए जितनी जल्दी हो सके पुराने खाद्य पदार्थों को हटा दें. इसके अलावा घर में नमी (stickiness) का होना भी बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ाता है. घर में नमी को मापते रहें और इसे 30% से 40% से ज्‍यादा न होने दें. 



23 मई 2021

डी डायमर टेस्ट क्या होता है। what is D dimer test in hindi

 डी डायमर टेस्ट क्या होता है। what is D dimer test in hindi

डी डायमर टेस्ट क्या होता है। what is D dimer test in hindi
डी डायमर टेस्ट


डी डायमर टेस्ट एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है जिसके माध्यम से रक्त नलिकाओं में मौजूद खून के थक्कों (blood clot) का पता लगाया जाता है।

जब शरीर का कोई भाग नुकीली वस्तु से कट जाता है तो कुछ समय पश्चात खून निकलने के बाद खून निकलना बंद हो जाता है,ऐसा कटी हुई जगह पर रक्त का थक्का या फिब्रीन के जमा होने से होता है। जब कटी हुई जगह ठीक हो जाती है तो रक्त का थक्का या फिब्रीन भी रक्त में घुल जाता है,इसी फिब्रीन की सबसे छोटी इकाई होती हैं जिसे डी डायमर कहते हैं।

 डी डायमर एक प्रोटीन होता है जो इस रक्त के थक्के में मौजूद होता है ,डी डायमर टेस्ट  के द्वारा इसी प्रोटीन की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। रक्त में अधिक डी डायमर का अर्थ होता है कि रक्त में थक्कों की मौजूदगी है।

डी डायमर टेस्ट की नार्मल वेल्यू क्या होती है

डी डायमर टेस्ट करने के लिए रक्त का नमूना लेकर  टरबिडोमेट्रिक इम्यूनोऐसे विधि द्वारा जांच की जाती है । इस विधि द्वारा डी डायमर टेस्ट की नार्मल वेल्यू प्रति मिलीलीटर खून में 500ng/ML से कम होना चाहिए। इससे अधिक होने पर उसे पाजीटिव डी डायमर टेस्ट कहा जाता है।

डी डायमर टेस्ट किन बीमारियों की पहचान के लिए किया जाता है 

डी डायमर टेस्ट उन बीमारियों की पहचान और निदान के लिए किया जाता है जिनमें रक्त नलिकाओं में खून के थक्के जमा हो जातें हैं और जो जीवन के बहुत घातक साबित हो सकते है जैसे

• डीप वेन थोम्ब्रोसिस (DVT)
• पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE)
• कोविड 19 में फेफड़ों की श्वसन प्रणाली में रक्त के थक्के का पता लगाने में।
•ब्रेन स्ट्रोक में
• डिसमेंटेट इन्ट्रावस्कुलर कागुलेशन (DIC) में
• सांप या अन्य जहरीले जानवरों के काटने पर
• लीवर से संबंधित बीमारी में।



डी डायमर टेस्ट कब करवाना चाहिए

आजकल हर वो व्यक्ति जिसे जो कोरोना के हल्के लक्षणों के साथ ठीक हो चुका है या वो व्यक्ति जो किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं है बिना सोचे समझे घबराहट में स्वयं के निर्णय पर डी डायमर टेस्ट करवा रहा है ऐसे में अस्पताल और पेथोलाजी लेब पर अनावश्यक दबाव पड़ रहा है और वास्तविक और गंभीर लक्षणों से पीड़ित व्यक्ति को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, समय पर जांच नहीं हो पाने के कारण ऐसे मरीजों की मौत भी हो रही है ऐसे में यह आवश्यक है कि डी डायमर टेस्ट करवाने से पहले हमें कुछ सामान्य जानकारी रखना चाहिए कि हमें कब डी डायमर टेस्ट करवाना चाहिए

• जब आपको  किसी पूर्व श्वसन तंत्र की बीमारी के श्वास लेने में परेशानी हो रही हो या अस्थमा जैसे लक्षण उभर रहे हो ।

• थोड़ा सा चलने पर सांस भरा रही हो।

• टांगों में दर्द,लालपन और सूजन हो।

• खांसी के साथ फेफड़ों में दर्द ।


• रक्त में खून के थक्के बनने का पूर्व इतिहास हो ।

• खांसी के साथ खून युक्त बलगम आ रहा हो।

• अधिक मोटापा हो।

• धूम्रपान करते हो ।

इसके अतिरिक्त चिकित्सक के परामर्श से डी डायमर टेस्ट करवाना चाहिए। 

किन मेडिकल कडिंशन में डी डायमर टेस्ट की नार्मल वेल्यू अधिक ही आती हैं 

कुछ मेडिकल कंडिशन में डी डायमर टेस्ट की नार्मल वेल्यू अधिक ही आती है अतः इन परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए बल्कि चिकित्सक से परामर्श कर उचित निदान करवाना चाहिए।आईए जानते किन परिस्थितियों में डी डायमर टेस्ट की  वेल्यू अधिक ही आती है 

• यदि कोई सर्जरी हुई है या अंग प्रत्यारोपण हुआ है तो डी डायमर टेस्ट की  वेल्यू अधिक ही आती है।

• गर्भावस्था में।

• ह्रदयरोग होने पर ।


• यदि कोई बड़ी दुर्घटना हुई हो जिसमें अधिक रक्तस्राव हुआ हो।

• कैंसर में ।

• बहुत अधिक बैठे रहने या शारीरिक गतिविधि बहुत कम होने पर।

• एंटीफास्फोलिपिड़ सिंड्रोम नामक बीमारी होने पर।


डी डायमर टेस्ट को अन्य किन नामों से जाना जाता है

• प्रेगनेंट डी डायमर टेस्ट Fragment D-Dimer Test

• फिब्रीन डिग्रेडेशन फ्रेगमेंट टेस्ट Fibrin degradation fragment Test


डी डायमर टेस्ट कितने रुपए में हो जाता है

डी डायमर टेस्ट प्राइस अलग-अलग शहरों में अलग है उदाहरण के लिए इंदौर जैसे शहर में डी डायमर टेस्ट 600 से 800 रुपयों में हो जाता है । वहीं दिल्ली जैसे महानगर में यह 1000 रुपए तक होता हैं। 








21 मई 2021

ब्लैक फंगस [Black fungus] बीमारी क्या होती है। ब्लैक फंगस के लक्षण, कारण और बचाव

 ब्लैक फंगस [Black fungus] बीमारी क्या होती है 

ब्लैक फंगस बीमारी एक फफूंदजनित संक्रमण है जिसे म्यूकरमाइकोसिस या जाइगोमाइकोसिस के नाम से जाना जाता है। ब्लैक फंगस आमतौर पर बहुत कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को प्रभावित करता है। ब्लैक फंगस आंख,नाक,और मस्तिष्क को अधिक प्रभावित करता है। मानव में होने वाला फंगल इंफेक्शन "राइजोपस ऐरिजुस" नामक म्यूकोरेसी परिवार के फंगस से फैलता है। 

कुछ अन्य प्रकार के फंगस भी है जैसे कनिंगमेला,बर्थोलेटिया,एपोफाइसोमाइसिस एलिगेंस,एबिसिडिया स्पेशीज,सकसेनिया स्पेशीज,राइजोम्यूकार प्यूसीलस,एंटोमोपेथोरा स्पेशीज,कंडिय़बोलस स्पेशीज,बेसिडियोबोलस जो कि फंगल इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार होते है।

ब्लैक फंगस बीमारी क्या होती है। ब्लैक फंगस के लक्षण, कारण और बचाव
ब्लैक फंगस


ब्लैक फंगस के लक्षण

ब्लैक फंगस होने पर कुछ आम प्रकार के लक्षण उभरते हैं जैसे

नाक,आंख और मस्तिष्क में संक्रमण होने पर

• नाक से काला तरल पदार्थ निकलता है
• नाक के अन्दर और आंखों में काली पपड़ी जमना
• आंखों का लाल होना,पानी आना और सूजन आना
• नाक बंद होना
• नाक के आसपास साइनस में सूजन और दर्द

फेफड़ों में ब्लैक फंगस का संक्रमण होने पर लक्षण

• फेफड़ों में दर्द
• खांसी
• बुखार
• श्वास चलना

पेट में ब्लैक फंगस का संक्रमण होने पर लक्षण

• पेटदर्द होना
• उल्टी के साथ खून आना

त्वचा में ब्लैक फंगस का संक्रमण होने पर लक्षण

• फोड़े होने के कुछ समय बाद फोड़ा काला हो जाता है और इसका आकार बढ़ने लगता है।

इसके अतिरिक्त ब्लैक फंगस होने पर चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण प्रकट हो सकते है।

ब्लैक फंगस रोग होने के कारण

ब्लैक फंगस के spore मिट्टी, सड़ी हुई लकड़ी, पत्तों ,बडे़ हुए फल सब्जी आदि में मौजूद रहते है और यदि बेहद कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाला व्यक्ति इनके सम्पर्क में आ जाता हैं तो वह संक्रमित हो जाता हैं उदाहरण के लिए एड्स संक्रमित व्यक्ति, अनियंत्रित मधुमेह वाला व्यक्ति, अस्थमा या टीबी का मरीज,अंगप्रत्यारोपण आपरेशन के बाद इससे उबर रहा व्यक्ति ,लम्बे समय तक ICU में रहा व्यक्ति

ब्लैक फंगस कभी भी व्यक्ति से व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलता है।

आजकल कोविड 19 से संक्रमित होने के बाद ठीक हो रहें व्यक्ति ब्लैक फंगस के सबसे आम शिकार बन रहें हैं चूंकि कोविड़ 19 में प्रयोग किए जा रहे स्टेराइड व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को दबा देते हैं अतः ब्लैक फंगस बहुत तेजी से फेफड़ों,आंख,नाक में पहुंचकर फैल जाता है और जानलेवा बन जाता है।

भारत में कुछ विशेषज्ञों ने पुराने अध्यनों के आधार पर ब्लैक फंगस होने के कुछ अन्य संभावित कारणों का पता लगाया है जिसके अनुसार ब्लैक फंगस उन लोगों को अधिक प्रभावित करता है जिन्होंने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जिंक सप्लीमेंट और आयरन सप्लीमेंट का अधिक इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस को पनपने के लिए जिंक और आयरन सप्लीमेंट एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है ।

ब्लैक फंगस से बचाव कैसे करें 

ब्लैक फंगस बहुत आम बीमारी नहीं है बल्कि यह बहुत कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को ही प्रभावित करती हैं अतः ऐसा बिल्कुल भी नही है कि यह बीमारी उन सभी व्यक्तियों को हो सकती है जो कोविड 19 से ठीक होकर बाहर निकलें हैं ।

ब्लैक फंगस को शुरुआती स्तर पर पहचानना बहुत आवश्यक है, नहीं तो यह बाद में जानलेवा साबित हो सकती हैं इस बीमारी की शुरूआती स्तर पर पहचान नही होने का सबसे बड़ा कारण व्यक्ति को होने वाली अन्य बीमारी भी है चूंकि व्यक्ति अन्य बीमारी जैसे कोविड 19 से जूझ रहा होता हैं और उसी दौरान ब्लैक फंगस के कोविड समान लक्षण उभरते हैं जिसे पोस्ट कोविड सिंड्रोम मानकर इलाज किया जाता है कुछ दिन के बाद जब लक्षण गंभीर हो जातें हैं तो जांच शुरू होती हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं।

अतः ऐसे व्यक्ति गंभीर बीमारी से उबर रहे हो, जिन्होंने हाल ही में स्टेराइड की अधिक मात्रा ली हो लक्षणों को शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर उपचार शुरू करें।

ब्लैक फंगस से बचाव हेतू सुबह शाम नीम,से मंजन करें,फिटकरी,नमक या हल्दी को गर्म पानी में डालकर गरारे करें। 

नाक में नारियल तेल या अणु तेल की दो बूंद डालें।

• नीम के औषधीय उपयोग


आज मानव जाति के सामने सबसे बड़ी चुनौती नित नई बीमारियों से पार पाने की बन गई है लेकिन सवाल भी बहुत अधिक खड़े
 हो रहे हैं क्या वायरस,बेक्टेरिया, फफूंद अभी नये नये इस प्रथ्वी पर आये हैं, नहीं ना ,अरे ये तो तब से मानव के साथ है जब से मानव का प्रथ्वी पर अस्तित्व है और तब तक मानव के साथ प्रथ्वी पर रहेंगे जब तक कि मानव का अस्तित्व प्रथ्वी पर है इनमें से कुछ मनुष्य के लिए लाभकारी रहें हैं तो कुछ हानिकारक,अब ये मनुष्य को तय करना है कि वह हानिकारक वायरस,बेक्टेरिया और फफूंद से किस प्रकार निपटना चाहता है। यदि हम वायरस बेक्टेरिया और फफूंद द्वारा मनुष्य को संक्रमित करने के बाद इसका उपचार करने की विधि से निपटेंगे तो हो सकता है कुछ जीवन हमें कुर्बान करना पडे़ और हो सकता है इस विधि में संपूर्ण मानवजाति को खतरा पैदा हो जाए। 

दूसरी विधि है मनुष्य की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को इतना उन्नत रखा जाये जैसा कि प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णित है और हमारे पूर्वजों ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा है कि प्रथ्वी पर मानवजाति को लम्बे समय तक जिंदा रहना है तो सूक्ष्मजीवों के बीच रहकर "योग्यत्तम की उत्तरजीविता"वाला सिद्धांत अपनाना होगा। जिसमें हार हमेशा हानिकारक वायरस, बेक्टेरिया और फफूंद की ही हो ।















20 मई 2021

हैप्पी हाइपोक्सिया या साइलेंट हाइपोक्सिमिया क्या होता है। what is happy hypoxia

हैप्पी हाइपोक्सिया क्या हैं


हैप्पी हाइपोक्सिया जैसा कि नाम से स्पष्ट है इसमें हेप्पी जैसा कुछ भी नही होता बल्कि हाल ही के कोविड - 19 महामारी के दौरान इसने चिकित्सा विज्ञानियों को बहुत अनहेप्पी किया है । हेप्पी हाइपोक्सिया चिकित्सा विज्ञान से संबंधित एक शारीरिक समस्या है जिसमें व्यक्ति का आक्सीजन स्तर अचानक से इतना कम हो जाता है कि आक्सीजन की कमी से व्यक्ति की मौत हो जाती हैं ।

कोविड 19 के सन्दर्भ में बात करें तो हैप्पी हाइपोक्सिया 30 से 45 वर्ष के युवाओं को बहुत अधिक शिकार बना रहा है चूंकि युवाओं का प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता हैं अतः इस कारण बीमारी के लक्षण प्रकट नहीं होते हैं और अन्दर ही अन्दर आक्सीजन का स्तर कम होता रहता है और आक्सीजन की कमी से किडनी,लीवर,ह्रदय, फेफड़े काम करना बंद कर देते है और व्यक्ति की मौत हो जाती हैं। आमतौर पर हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण कोविड संक्रमण के पांचवें या छठे दिन से प्रकट होते हैं।
 
पल्स आक्सीमीटर
हैप्पी हाइपोक्सिया



हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण



• सांस तेजी से लेना या अस्थमा की तरह हांफना

• आक्सीजन का स्तर 95 प्रतिशत से अचानक गिरकर 70 से 50 तक हो जाता हैं 

• थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना 

• घबराहट होना

• होंठों का रंग नीला होना

• मतिभ्रम होना

• शरीर एकदम से शिथिल हो जाना

• ह्रदय की धड़कन 72 प्रति मिनट से अचानक निचे आ जाना


हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण


1.हमारे फेफड़ों में मौजूद कोशिकाएं बाहरी वातावरण से आक्सीजन लेकर कार्बन-डाई-ऑक्साइड को फेफड़ों से बाहर निकालती है जब ये काम किसी कारणवश बाधित होता है तो शरीर में आक्सीजन का स्तर घट जाता हैं। कोविड 19 में फेफड़ों की छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं में खून के छोटे-छोटे थक्के बन जाते है और फेफड़ों से गैस का आदान-प्रदान प्रभावित होता हैं।

2.कोरोना वायरस के कारण फेफड़े की कोशिकाएं इतनी अधिक क्षतिग्रस्त हो जाती हैं कि शरीर के अन्य अंगों में आक्सीजन नहीं पहुंच पाती है । 

3.न्यूमोनिया के कारण फेफड़ों की श्वसन प्रणाली में सूजन आकर बलगम भर जाता है फलस्वरूप आक्सीजन शरीर में नहीं पहुंच पाती और शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती हैं ।



यदि आक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है तो हैप्पी हाइपोक्सिया की पहचान कैसे करें,6 मिनिट वाक टेस्ट

चिकित्सकों के मुताबिक कोविड 19 के कारण होने वाली युवाओं की अधिकांश मौत हैप्पी हाइपोक्सिया को समय पर नहीं पहचानने के कारण हो रही है , यदि  घर में पल्स आक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है और कोविड 19 से पीड़ित हो तो प्रतिदिन 6 मिनिट वाक टेस्ट करके भी हम हेप्पी हाइपोक्सिया को पहचान कर समय रहते चिकित्सक के पास पंहुचा सकते है।

6 मिनट वाक टेस्ट में आपको प्रत्येक 6 घंटे में तेज कदमों के साथ 6 मिनट चलना होता है यदि इस दौरान आपकी सांस बहुत तेज चल रही हो, घबराहट महसूस हो रही हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।



14 मई 2021

साइटोकाइन तूफान क्या होता है। what is cytokine storme in hindi

साइटोकाइन तूफान क्या होता है। What is cytokine storme in hindi 


"साइटोकाइन तूफान या cytokine storme चिकित्सा विज्ञान से संबंधित एक शारीरिक समस्या है जिसमें व्यक्ति का प्रतिरोधी तंत्र (Immune system) शरीर पर हमला करने वाले बाहरी आक्रांताओं (pathogens) जैसे वायरस और बेक्टेरिया के प्रति इतना अधिक सक्रिय हो जाता हैं कि यह शरीर में बहुत अधिक सूजन पैदा कर देता हैं और व्यक्ति का इम्यून सिस्टम pathogens से लड़ने के बजाय स्वयं के शरीर से लड़ने लगता हैं ।"

साइटोकाइन तूफान cytokine storme को Cytokine Release Syndrome (C.R.S.) भी कहते हैं ।

What is Cytokine storme in hindi।साइटोकाइन तूफान
Cytokine storme


Cytokine storme के दौरान क्या होता है


हमारे इम्यून सिस्टम में अलग - अलग तरह के पदार्थ होते हैं जो कि पेथोजेंस या बाहरी तत्वों से लड़ने में मदद करते हैं,इस इम्यून सिस्टम अनेक इम्यून कोशिकाएं जिन्हें Cytokines कहते हैं एक दूसरे cytokines कोशिकाओं से सम्पर्क स्थापित कर अपने अपने काम करती हैं । अलग-अलग साइटोकाइन के अलग-अलग काम होते हैं जैसे

• कुछ साइटोकाइन दूसरे प्रकार की इम्यून कोशिकाओं को भर्ती करते हैं।

• कुछ साइटोकाइन शरीर में एंटीबाडी बढ़ाते हैं, कुछ शरीर में रक्त का थक्का बनाते हैं।

• कुछ बाहरी पदार्थों के शरीर में प्रवेश करने पर शरीर या म्यूकस मेम्ब्रेन  में सूजन पैदा करते हैं।

• कुछ साइटोकाइन शरीर की सूजन कम करते हैं ताकि सूजन नियंत्रण में हो क्योंकि बहुत ज्यादा सूजन शरीर में कई अन्य प्रकार की समस्या पैदा कर सकता है उदाहरण के लिए फेफड़ों की वायु प्रणाली (aloveli ) में अधिक सूजन से सांस लेने में परेशानी होती हैं और शरीर में आक्सीजन का स्तर कम हो जाता हैं। 

एक समय वह होता है जब हमारा शरीर बहुत अधिक सूजन पैदा करने वाले cytokine का उत्पादन करने लगता हैं इसके मुकाबले सूजन को कम करने वाले cytokine बहुत कम उत्पादित हो पाते हैं फलस्वरूप यह संतुलन बिगड़ जाता हैं यह स्थिति Cytokine storme की होती हैं।

कोविड 19 के सन्दर्भ में इसे हम Acute Respiratory distress syndrome या A.R.D.S. कहते हैं इसमें रोगी के फेफड़ों में बहुत अधिक सूजन आ जाता हैं और फेफड़ों की वायु प्रणाली में बलगम जमा होकर आक्सीजन की कमी हो जाती हैं और रोगी की मृत्यु हो जाती हैं।


6 Best reason for Cytokine storme,साइटोकाइन तूफान के 6 मुख्य कारण  


वैज्ञानिक और चिकित्सक साइटोकाइन तूफान के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए बहुत गंभीरता से काम कर रहे हैं यदि हम आजतक की शोध का विश्लेषण करें तो साइटोकाइन तूफान के निम्नलिखित कारण सामने आते हैं


1.हिमोफेगोसाइटिक लिम्फोहिस्टीयोसिस जेनेटिक सिंड्रोम


जिन लोगों को हिमोफेगोसाइटिक लिम्फोहिस्टीयोसिस नामक जेनेटिकल बीमारी होती हैं उन्हें शरीर में इन्फेक्शन होने पर साइटोकाइन तूफान होने की बहुत अधिक संभावना होती हैं।

2.बेक्टेरियल या वायरल इन्फेक्शन

कुछ महत्वपूर्ण प्रकार के बेक्टेरियल और वायरल इन्फेक्शन साइटोकाइन तूफान cytokine storme के लिए उत्तेजक का कार्य करते हैं उदाहरण के लिए सन् 1918 में इन्फ्लुएन्जा ए वायरस संक्रमण के कारण युवाओं की मौत अधिक हुई थी इसका कारण साइटोकाइन तूफान ही था ।

ठीक इसी प्रकार की स्थिति SARS Cov 2 वायरस संक्रमण के कारण देखी जा रही है इसी वायरस के कारण साइटोकाइन तूफान विकसित हो रहा हैं और युवाओं की मौत अधिक हो रही है ।

3.आटो इम्यून बीमारीयां

वे लोग जो आटो इम्यून बीमारियों जैसे एलर्जी,ल्यूपस, आर्थराइटिस आदि से पीड़ित होते हैं उन्हें वायरस संक्रमण के दौरान Cytokine storme होने की अधिक संभावना होती हैं।

4.इम्यूनोथेरेपी 

कैंसर के उपचार हेतु प्रयोग की जाने वाली इम्यूनोथेरेपी के कारण भी साइटोकाइन स्टार्म विकसित हो जाता हैं।

5.अंग प्रत्यारोपण

लीवर, किडनी,लंग्स आदि अंगों के प्रत्यारोपण के बाद भी शरीर में साइटोकाइन तूफान होता हैं।

6.विशेष प्रकार के जीन 

विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के मुताबिक साइटोकाइन तूफान विकसित होने के लिए कुछ विशेष प्रकार के जीन उत्तरदायी होते हैं जो इम्यून सिस्टम को बहुत तेजी से प्रतिक्रियाशील बनाकर साइटोकाइन तूफान बनातें हैं।

क्या कोरोना वायरस प्रभावित व्यक्ति में साइटोकाइन तूफान को रोका जा सकता है

 साइटोकाइन तूफान की शुरुआत कोरोनावायरस के शरीर में प्रवेश करने के पांचवें या छठे दिन होती हैं ,यदि बिना किसी देरी के कोरोना पाज़िटिव होने या कोरोना के लक्षण प्रकट होते ही कोरोना का इलाज शुरू कर दिया जाए तो साइटोकाइन तूफान को रोका जा सकता हैं उदाहरण के लिए साइटोकाइन तूफान को निम्नलिखित सावधानी अपनाकर रोका जा सकता हैं 

• लक्षण प्रकट होने के शुरुआती दिन से ही शरीर का आक्सीजन लेवल प्रत्येक 6 घंटे में जांचते रहें यदि आक्सीजन लेवल 90 से निचें हो तो तुरंत चिकित्सक का परामर्श लें।

• रक्तचाप पर नजर रखें कम होने पर चिकित्सक से परामर्श करें।

• Hrct Test में लंग्स में इन्फेक्शन 9 से अधिक है तो चिकित्सक के परामर्श से वायरस लोड कम करने वाली दवाईयां जरुर लें।

• C reactive protein test 6 mg/ml से अधिक होने पर चिकित्सक से नियमित संपर्क रखें।

• घर पर होम आइसोलेशन में हो तो प्रतिदिन छः मिनिट वाक टेस्ट करें इस टेस्ट में बिना रुके तेजी से वाकिंग करें यदि वाकिंग के दौरान कोई समस्या जैसे सांस फूलना घबराहट होना होती हैं तो चिकित्सक से संपर्क करें।

• डी डायमर टेस्ट सामान्य से अधिक होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।

• बुखार एक दो दिन रहकर उतर गया है तो लापरवाही बिल्कुल न करें बल्कि नियमित रूप से शरीर का तापमान जांचते रहें यदि तापमान सही रहने के बावजूद घबराहट महसूस होती है तो चिकित्सक से संपर्क करें।

 हाई प्रोटीन डाइट,सलाद,सूप,हल्दी वाला दूध और सूखे मेवे प्रतिदिन भोजन में शामिल करें।

• प्रतिदिन सुबह शाम आधा घंटा योग प्राणायाम और फेफड़ों को मजबूती प्रदान करने वाले आसन अवश्य करें।

• शरीर और मन पर बीमारी का डर हावी न होने दें यदि डर हावी हो जाता हैं तो रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं।



चिकित्सक कोविड़ 19 के कारण उत्पन्न साइटोकाइन तूफान Cytokine storme को नियंत्रित करने का बहुत अधिक प्रयास कर रहें हैं और दूसरी बीमारियों में प्रयोग की जा रही विधियों जैसे आर्थराइटिस के उपचार में प्रयोग की जा रही बायोलाजिकल थेरेपी का भी उपयोग भी कर रहे हैं,यह थेरेपी Cytokine IL -1 (इंटरल्यूकिन) को ब्लाक कर देती हैं । चिकित्सकों के मुताबिक यह थेरेपी कोविड 19 के गंभीर मरीजों को बहुत फायदा पंहुचा रही हैं ।

इसके अलावा चिकित्सक रोगी की गंभीरता के आधार पर प्लाज्मा थेरेपी,एंटी काग्यूलेंट दवाई, कुछ विशेष इंजेक्शन जैसे Tocilizumab  और स्टेराइड भी प्रयोग करतें हैं ।










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