शुक्रवार, 27 मार्च 2020

गूलर के औषधीय उपयोग

गूलर अंजीर ,बरगद और पीपल के वर्ग का वृक्ष हैं । गूलर का वृक्ष 20 से 30 फुट तक ऊँचा होता हैं । गूलर के पत्ते अंडाकार और घनें होतें हैं ।
गूलर के औषधीय उपयोग
 गूलर का पेड़


गूलर के फल तनों से फूटतें हैं। तथा फूल फल के अन्दर स्थित होतें हैं । इसके पत्ते तोड़नें पर इसमें से दूध निकलता हैं ।





गूलर का संस्कृत नाम 




औदुम्बर,क्षीरवृक्ष,जंतुफल,उदुम्बर, हेमदुन्धक



गूलर का हिन्दी नाम 




गूलर ,ऊमर,परोआ



गूलर का लेटिन नाम 




ficus Racemosa



आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति 



आयुर्वेद मतानुसार गूलर शीतल ,मधुर,कसैला,तथा भारी होता हैं ।





गूलर के औषधीय उपयोग 




घाव में



गूलर में तांबा 12 प्रतिशत होता हैं । तांबा बहुत अच्छा संक्रमण रोधी तत्व होता हैं ।

गूलर के पत्तों,छाल,का क्वाथ बनाकर उससे घाव धोनें पर घाव बहुत जल्दी सूख जाता हैं । 





अतिसार में 




गूलर की जड़ का चूर्ण बनाकर खिलानें से अतिसार में आराम मिलता हैं ।



एनिमिया में 



गूलर का फल,पत्तीयाँ ,छाल आयरन से भरपूर होती हैं । दस गूलर के फलों में गर्भवती स्त्री की दैनिक आयरन की आवश्यकता जितना आयरन प्रचुरता में उपलब्ध होता हैं ।




कामउत्तेजना में



गूलर के पेड़ की टहनियों को तोड़नें पर इसमें से दूध टपतकता हैं इस दूध की पाँच - सात बूँद लेनें से महिलाओं और पुरूषों की काम उत्तेजना जागृत हो जाती हैं । किन्तु शीत प्रकृति के स्त्री पुरूष को दूध का सेवन नही करना चाहियें । 




पित्त विकारों में 



इसके चार  पत्तों को पीसकर शहद के साथ सुबह शाम सेवन करनें से पित्त विकार नष्ट हो जातें हैं । 


ज्यादा गुस्सा करनें वालें व्यक्ति को इसके पत्तों का 10 ML ज्यूस बनाकर पिलाना चाहियें । गुस्सा बहुत जल्दी काबू में आता हैं ।



अरिदिमिया में




गूलर के फलों में मैग्नीशियम प्रचुरता में पाया जाता हैं जो ह्रदय की अनियमित धडकनों को नियमित करता हैं । जिन लोगों को अर्दिमिया की समस्या हो उनकों तीन चार गूलर के फलों का सेवन नियमित करना चाहियें ।




रक्त प्रदर में 



गूलर की छाल का क्वाथ 10 मिलीग्राम प्रतिदिन के हिसाब से सुबह शाम लेनें से रक्तप्रदर में आराम मिलता हैं ।


गर्भावस्था में



गूलर कैल्सियम,मैग्निशियम और फास्फोरस का अति उत्तम स्त्रोंत हैं ।  गर्भवती स्त्री को रोज जितनी कैल्सियम की आवश्यकता होती हैं ,उतनी मात्रा की पूर्ति दस बारह गूलर के फलों से हो सकती हैं ।



हड्डी जोड़नें में 



टूटी हड्डी को जोड़नें में गूलर के समान दूसरा वृक्ष नही हैं । यदि इसके कच्चे फलों की सब्जी बनाकर दिन चार दिन तक खा ली जायें तो टूटी हड्डी कुछ ही दिनों में जुड़ जाती हैं ।





मस्तिष्क रोगों में



गूलर में पाया जानें वाला पोटेशियम मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं में आक्सीजन की आपूर्ति को सुधारता हैं । जिससे डिमेंशिया,तनाव,ब्रेनस्ट्रोक,उच्च रक्तचाप का खतरा नही होता हैं ।



कैंसर में



गूलर के पत्तें,छाल,फल एंटी आक्सीडेंट गुणों से भरपूर होतें हैं । इनमें कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि नियंत्रित करनें की क्षमता विधमान होती हैं । अत: इसका सेवन कैंसर रोगियों को करना चाहियें ।





पेप्टिक अल्सर में



गूलर के दूध में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण पेट के छालों को तेजी से ठीक करतें हैं । अत: इसके दूध की चार पाँच बूँदें पतासे के साथ या पानी के साथ सेवन करें ।



ओस्टियोपोरोसीस में



गूलर के पत्ते और फल कैल्सियम और फास्फोरस का उत्तम स्त्रोत होनें से ओस्टियोपोरोसीस बीमारी के लिये बहुत उम्दा उपचार upchar हैं । ओस्टियोपोरोसीस से पीडित व्यक्ति इसके पत्तों और फल का किसी भी रूप में सेवन कर सकतें हैं ।



सौन्दर्य प्रसाधक के रूप में



गूलर की छाल का क्वाथ बनाकर पीनें से मुहाँसे की समस्या कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती हैं । क्वाथ बनानें के लियें गूलर की छाल की 3 ग्राम मात्रा 200 ML पानी में आधा रहनें तक उबाले और इसे दिन में दो बार पीयें ।



बालों की समस्या में



गूलर के पत्तों को पीसकर नहानें से पाँच मिनिट पहलें बालों पर लगानें से बाल काले चमकदार और समय पूर्व सफेद नही होतें हैं ।



बांझपन में



गूलर पेड़ की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं कि यह पेड़ स्त्री और पुरूष दोनों के बांझपन को दूर कर देता हैं ।


गूलर के चार पांच फल और पाँच सात नये पत्ते रात में गाय के दूध के साथ सेवन करें तो बांझपन दूर हो जाता हैं ।










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