21 सित॰ 2018

पर्यटन स्थल ग्वालियर और ओरछा [ PARYATAN STHAL GWALIOR AUR ORCHA]

 पर्यटन स्थल ग्वालियर और ओरछा  

पर्यटन स्थल

                  ।।। ग्वालियर ।।।


ग्वालियर मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक एतिहासिक नगर हैं । यहाँ अनेक राजवंशों ने राज किया जिनमे प्रतिहार , कछवाह और तोमर वंश विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन राजवंशो ने राजप्रसाद ,मन्दिर,और स्मारकों को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था । इसके अतिरिक्त अनेक कवियों ,संगीतकारों ,और साधु संतों ने अपने योगदान से इस नगर को अधिकाधिक समृद्धिऔर सम्पनता दी ।

आज यह नगर भारत के प्रमुख शहरों में शुमार किया जाता हैं जीवन की स्पंदन और हलचल से ओतप्रेत यह नगर देशी विदेशी पर्यटकों के लिये सदैव आकर्षण का केन्द्र रहा हैं ।



●ग्वालियर का इतिहास :::


आठवी शताब्दी में सूरज सेन नामक राजा यहाँ राज करता था । वह एक बार वह भयंकर बीमारी से ग्रस्त हो गया अनेक वैधों से इलाज करवाने के बाद भी जब वह निरोग नही हुआ तो वह ग्वालिपा नामक एक साधु की शरण में गया यह साधु एकांतवास में जीवन व्यतीत करता था । साधु की कृपा से सूरज सेन निरोग हो गया कृतज्ञता स्वरूप सूरज सेन ने इस नगर का नामकरण उन्ही के नाम पर कर दिया ।


ग्वालियर के दर्शनीय स्थल :::


1.ग्वालियर का किला 

किला
 ग्वालियर का किला

ग्वालियर का किला पूरे शहर की अपेक्षा ऊँचे स्थान पर हैं  जहाँ से समूचा शहर बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता हैं । इस किले का निर्माण राजा सूरज सेन ने सन 525 में कराया था । यह किला बलुए की चट्टानों को काटकर बनाया हैं । इस किले में चट्टानों को काटकर तराशी गयी जैन तीर्थकरों की मुर्तिया लगी हैं । किले की बाहय प्राचीर कारीगरी का सर्वोत्कृष्ट नमूना हैं । इस प्राचीर की लम्बाई 2 मिल और ऊँचाई 35 फीट तक हैं । 

 ग्वालियर के किले में राजा मानसिंह तोमर द्वारा सन 1486 से 1516 के मध्य निर्मित हाथी की एक विशाल प्रतिमा स्थापित हैं ।

प्राचीन काल में यह भारत का सबसे अभेद्य दुर्ग था इसी कारण ग्वालियर के किले को " जिब्राल्टर ऑफ़ इंडिया " कहा जाता हैं । बाबर ग्वालियर के किले क़ो "दुर्गों का मोती " कहता था ।



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2.गूजरी महल :::

महल
 गूजरी महल

गूजरी महल ग्वालियर के किले में स्थित हैं । इस महल का निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने 15 शताब्दी में अपनी गुर्जर रानी मृगनयनी के सम्मान में कराया था । इस महल का बाहरी रूप आज भी जस का तस हैं ।जबकि भीतरी भाग में प्राचीन पुरातात्विक संग्राहल संचालित किया जा रहा हैं जिसमे प्रथम सदी तक की प्राचीन दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह हैं ।  इसमें विशेष दर्शनीय ग्यारसपुर की शालाब्न्जिका की मूर्ति हैं  ।  पाषण प्रतिमा होते हुए भी इसमें मोनालिसा की पेंटिंग के समान मनमोहक मुस्कान बिखरी हुई हैं । 

इसके अतिरिक्त यहाँ नटराज प्रतिमा ,वामनावतार प्रतिमा भी रखी गई हैं ।

3.मानमंदिर महल :::

ग्वालियर
 मान मन्दिर

मानमंदिर महल का निर्माण सन 1486 से 1517 के बीच राजा मानसिंह तोमर ने कराया था । इस महल की सुंदर नक्काशी और जालीदार खिडकिया मानमंदिर को अलग ही शोभा प्रदान करते हैं । इस महल के विशाल कक्ष किसी समय संगीत प्रेमी राजा मानसिंह तोमर की संगीत महफ़िलो से सजा करते थे । इन कक्षों में बैठकर रानिया भी संगीत आचार्यों से संगीत बीकी बारिकियों को सीखा करती थी ।

निचे वृत्ताकार काल कोठरियों में मुगलों के जमाने में राजकेदी रहा करते थे  ओरंगजेब ने अपने भाई मुराद को यही केद कर फाँसी पर चढ़ाया था । इसी के निकट ज़ोहर सरोवर हैं जहाँ राजपूत रानियाँ युद्ध में मारे गये पतियों के साथ ज़ोहर कर लेती थी ताकि उनका सतीत्व अक्षुण्य रहे । यहाँ राजपूत रानियाँ सामूहिक ज़ोहर कर लेती थी ।

यहाँ शाम होते ही लाइट एंड साउंड की रंगारंग प्रस्तुति होती हैं जो देखने वालों को मन्त्र मुग्ध कर देती हैं और आँखों के सामने ग्वालियर का गोरवमयी अतीत पुन:जीवित हो जाता हैं ।




4.सूरज कुंड :::


यह कुंड 425 ईसा पूर्व का हैं  । इस कुंड के आसपास ही 15 वी शताब्दी में दुर्ग का निर्माण हुआ था किसी समय यह कुंड बहुत विशाल रहा होगा । यही वह कुंड हैं जहाँ संत ग्वालिपा की कृपा से सूरज सेन या सूरजपाल रोगमुक्त हुए थे ।


5.तेली का मंदिर :::
ग्वालियर
तेली का मन्दिर


 दक्षिण भारतीय शैली का यह मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं । इसका निर्माण राष्ट्रकूट शासकों ने कराया था ।100 फीट ऊँचा यह मंदिर विभिन्न स्थापत्य कला का बेजोड़ मिश्रण हैं । इसकी छत विशिष्ठ द्रविड़ शैली में निर्मित हैं वहीं शृंगारिक अलंकरण उत्तर भारतीय आर्य शैली का हैं । 


6.सास बहु का मंदिर :::
ग्वालियर किला
 सास बहू का मन्दिर


इस मंदिर का निर्माण 11 वी शताब्दी में महिपाल द्वारा कराया गया  था । यह मंदिर ग्वालियर किले के अंदर पूर्वी भाग की ओर स्थित हैं । यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं । इस मंदिर के अंदर और बाहर की नक्काशी बहुत उत्तम कोटि की हैं । मंदिर के अंदर चोकोर आकार निर्मित हैं जिसके तीन ओर मंडप तथा एक ओर गर्भगृह स्थित हैं । गर्भगृह खाली हैं ।



7.जयविलास महल :::

ज्योतिरादित्य सिंधिया
 जय विलास महल

जयविलास महल सिंधिया राजवंश का निवास स्थान हैं । इस महल की शान- ओ- शौकत और वैभव देखते ही बनता हैं । इस महल के कुछ हिस्से को संग्रहालय में बदल दिया गया हैं ,यहाँ सिंधिया राजवंश से जुडी वस्तुएँँ रखी हुई हैं ।

जयविलास महल का स्थापत्य इतालवी शैली का हैं ,जिसमे टस्कन ओर कोरनीथियन वास्तुशैली का मेल हुआ हैं । इसके दरबार कक्ष में दो केन्द्रीय विशाल फानूस लटके हुए हैं ,जिनका वजन कई हजार क्विंटल हैं इन फानूसो को लटकाने से पहले दस हाथियों को इसकी  छत पर चढ़ाकर छत की  मजबूती का परीक्षण कराया गया था ।

इस महल की छत पर सुनहरी कड़ाई की गई हैं जबकी जमीन पर फारस की सुंदर कालीन बिछी हुई हैं । यहाँ के कलात्मक पर्दे फ्रांस और इटली का भव्य फर्नीचर इस महल के कक्षों के एश्वर्य को स्वंय बंया करते हैं ।

इस महल का एक विशेष आकर्षण चाँदी की रेलगाड़ी हैं जिसमे काँच के नक्काशीदार कक्ष हैं यह रेलगाड़ी  डाइनिंग टेबल के चारों और घुमकर यहाँ आने वाले अतिथियों को भोजन सामग्री परोसकर उनका सत्कार किया करती थी ।


यही पर काँच से निर्मित इटली का भव्य पालना हैं जिसमे बैठकर कृष्ण भगवान प्रत्येक जन्माष्टमी को झुला झूलते थे ।

इन सब के अतिरिक्त जयविलास महल में सिंधिया परिवार की अनेक व्यक्तिगत स्मृतियाँ रखी हुई हैं । सिंधिया संग्रहालय वास्तव में राजसी वैभव और गरिमा से ओतप्रोत तत्कालीन भारत की ऐश्वर्यवान संस्कृति और जीवनशैली की अनूठी तस्वीर प्रस्तुत करता हैं ।



8.तानसेन की समाधि :::


तानसेन उर्फ़ रामतनु पांडे अकबर के दरबार के नवरत्नों में थे । इस महान संगीतज्ञ को ग्वालियर में दफनाया गया था । उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिये यहाँ उनकी समाधि पर एक स्मारक बनाया गया हैं । यह स्मारक मुगलकालीन वास्तुकला और शिल्प का उत्कर्ष्ठ नमूना हैं ।

तानसेन की स्मृति को चिरस्थायी बनाने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतू मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा यहाँ "अखिल भारतीय तानसेन संगीत समारोह " का आयोजन किया जाता हैं । जहाँ संगीतज्ञो द्वारा अपनी संगीत प्रतिभा का परिचय कराया जाता हैं । इस समारोह में लाखों संगीत प्रेमी तानसेन की समाधि पर माथा टेकने आते हैं ।




9.मोहम्मद गौस का मकबरा :::

ग्वालियर
 मोहम्मद गोस का मकबरा

मोहम्मद गोस सूफ़ी फ़कीर और तानसेन के गूरू थे ।इनका मकबरा  तानसेन की समाधि के पास ही हैं । यह एक अफगानी थे ।
यह मकबरा मुगल वास्तुकला और शिल्प का बेजोड़ नमूना हैं । बलुए पत्थर से निर्मित इस मकबरे की जालियों पर नक्काशीदार शिल्प कला हैं जो सेकड़ो सालों के बाद भी वेसी ही हैं । तानसेन की समाधि देखने वाला प्रत्येक व्यक्ति मोहम्मद गोस का मकबरा देखना नही भूलता ।


10.सूर्य मन्दिर ::


सूर्य मन्दिर नवनिर्मित रचना हैं किन्तु इस मन्दिर की ख्याति बहुत दूर दूर तक फेली हुई हैं । यह उड़ीसा के कोणार्क सूर्य मन्दिर की प्रतिकृति कर बनाया  गया हैं । जहाँ पुरातन गरिमा का एहसास होता हैं ।


11.नगर पालिका संग्रहालय ::


इस संग्रहालय में पुरातन वस्तुओं का अनुपम संग्रह हैं । इसमें रखी गयी वस्तुओं कों देखे बिना ग्वालियर की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी ।


12.कला वीथिका :::


कला वीथिका देखना भी एक अभूतपूर्व अनुभव हैं । यहाँ सुंदर कलात्मक वस्तुओं का अद्भुत संग्रह हैं । इन वस्तुओ में ग्वालियर के साथ मध्यप्रदेश की शिल्प कला के दर्शन होते हैं ।


13. रानी लक्ष्मीबाई स्मारक :::
ग्वालियर
 रानी लक्ष्मीबाई स्मारक


रानी लक्ष्मीबाई भारतीय स्वतंत्रा समर की वीरांगना थी इनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिये यहाँ स्मारक का निर्माण कराया गया हैं ।

इसी प्रकार का एक स्मारक वीर सेनानी तात्या टोपे का ग्वालियर में स्थापित हैं जहाँ  हर भारतीय माथा टेकने अवश्य जाता हैं ।


ग्वालियर कैसे पहुँचे :::




वायुयान सेवा  ✈



ग्वालियर देश के कुछ प्रमुख शहरों से निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की वायुयान सेवाओं से जुड़ा हैं । और इनकी सेवाओं का उपयोग कर ग्वालियर आसानी से पहुँचा जा सकता हैं ।



रेल सेवा 🚆


ग्वालियर मध्य रेलवे के दिल्ली - मुंबई और दिल्ली - चेन्नई खंड पर पड़ता हैं । ग्वालियर देश के चारों कोनों से सुगमता पूर्वक पहुँचा जा सकता हैं । 


सड़क मार्ग 🚌


ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर पड़ता हैं  जो आगरा को मुंबई से जोड़ता हैं । यह राजमार्ग देश के सबसे लम्बे राजमार्ग में से एक हैं । अत: सड़क मार्ग से भी ग्वालियर आसानी से पहुँचा जा सकता हैं ।


खानपान 🍽🥃☕


ग्वालियर में हर तरह का शाकाहारी और मांसाहारी भोजन आसानी और किफायती मूल्य के साथ उपलब्ध हैं । यहाँ दिसम्बर जनवरी में ग्वालियर मेला लगता हैं । इस मेले में दूर दूर प्रान्तों और विदेशी व्यंजनों के स्टाल लगते हैं । इन व्यंजनों का स्वाद लेने हेतू भारत और विदेशों से लोग आते हैं ।




तापमान 🏖


यहाँ सर्दियों में तापमान 6 से 7 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच और गर्मियों में 35 से 40 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहता हैं । यहाँ घुमने का सबसे उत्तम समय जून से मार्च के बीच हैं ।



होटले 🏣


ग्वालियर में हर आय वर्ग के लिये उत्तम श्रेणी की होटल उपलब्ध हैं । जिनमे सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र की होटले सम्मिलित हैं ।



                                        ।।। ओरछा ।।।




ओरछा  की स्थापना 16 वी शताब्दी में बुन्देल वंश के राजा रूद्रप्रताप ने की थी । बेतवा नदी के किनारे बसा यह नगर अपने महलों मन्दिरों और गोरवगाथा के लिये पुरे विश्व प्रसिद्ध हैं । ओरछा का सौन्दर्य पत्थरों से इस तरह
मुखरित हैं जैसे समय की शिला पर युगों - युगों के लिये एक समृद्ध विरासत के रुप में अंकित हो गया हो । इसके महलों के घनीभूत सौंदर्य को देखकर ऐसा लगता हैं मानों समय यहाँ विश्राम कर रहा हों । वर्तमान में ओरछा मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले में आता हैं ।

ओरछा को बुन्देलखण्ड की अयोध्या भी कहा जाता हैं और यहां के राजा भगवान राम हैं। इसके संबंध में जनश्रृति हैं कि एक बार ओरछा की महारानी कुंवर गणेश और महाराजा मधुकर शाह के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया था कि किसकी ईश्वर भक्ति श्रेष्ठ हैं चूंकि मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे और महारानी गणेश राम भक्त थी अतः मधुकर शाह ने कुंवर गणेश को भगवान राम को अयोध्या से ओरछा लाने की चुनौती दी,इस पर कुंवर गणेश अयोध्या चली गई और वहां सरयू नदी के तट पर लगातार इक्कीस दिनों तक भगवान राम को अपने साथ ओरछा ले जाने हेतू तपस्या की । किन्तु इक्कीस दिनों की तपस्या के बाद भी जब भगवान राम प्रकट नहीं हुए तो रानी गणेश ने सरयू नदी के कूदकर जान देने की कोशिश की इस पर भगवान राम कुंवर गणेश की गोद में बाल रूप में प्रकट हुए और उन्होंने तीन शर्तों के साथ अयोध्या से ओरछा जानें की बात रखी। 

पहली ओरछा चलूंगा तो ओरछा का राजा मैं ही रहूंगा ।

दूसरी यह कि मैं केवल पुष्य नक्षत्र में यात्रा करूंगा।

तीसरी यह कि मुझे जहां बैठा दोगे वहां से नहीं उठूंगा और वही रहूंगा ।

यह घटना सन् 1630 की हैं, जब भगवान राम रानी गणेश के साथ अयोध्या से ओरछा आ रहे थे इस बीच राजा‌ने उनका भव्य मंदिर बनाना शुरू कर दिया किन्तु भगवान राम के ओरछा आने तक मंदिर पूरा नहीं बन सका था।


इस पर रानी ने भगवान राम को रसोईघर में बैठा दिया इसके बाद से ही भगवान राम राजा के रुप में यहीं विराजमान हो गये ।


तब से भगवान राम राजा राम के रूप में ओरछा में विराजमान हैं और रानी गणेश यहां की कौशल्या की उपमा दी गई।




                                          ।।। दर्शनीय स्थल ।।।




1.जहाँगीर  महल :::

ओरछा
जहाँगीर महल 

इस महल का निर्माण 17 वी शताब्दी में महाराजा जूदेव सिंह ने मुगल शासक जहाँगीर की ओरछा यात्रा की स्मृति स्वरूप कराया था । इस महल का स्थापत्य और जालियों में की गई नक्काशी असाधारण प्रकार की हैं ।इस महल के शीर्ष भाग में बनाई गयी छतरिया महल को वैभवशाली रूप प्रदान करती हैं ।

यहाँ से ओरछा के मन्दिरों का मनोहारी स्वरूप दिखाई देता हैं ।


2.राजा महल :::


इस महल का निर्माण राजा जूदेव सिंह के पूर्ववर्ती राजा मधुकर शाह ने कराया था। इस महल का भीतरी भाग सुंदर भित्ति चित्रों से भरा पड़ा हैं जो सदिया गुजर जाने के बाद भी जस की तस हैं । इन भित्ति चित्रों कों आध्यात्मिक विषयों में गुथकर दीवारों पर इस तरह उभारा गया हैं जिससे की देखने वाला मार्मिकता से भर उठता हैं ।

यहाँ की सुंदर छतरिया पर्यटकों को अपनी सादगी और सुन्दरता से पर्यटकों के दिल में अमिट छाप छोडती हैं ।


3.राय प्रवीण महल :::


राय प्रवीण महल ईंटो से बनी दो मंजिला इमारत हैं । इस महल में सुंदर बगीचा,अष्टकोणीय पुष्पकुँज और जलप्रदाय प्रणाली संरचना दर्शनीय हैं ।

राय प्रवीण महल राजा इन्द्रमणी और कवियत्री संगीतज्ञ राय प्रवीण की प्रणयगाथा का जीवंत उदाहरण हैं । राय प्रवीण की विद्वता पर राजा अकबर मोहित हो गया था और उसे दिल्ली आने का आदेश दे दिया किन्तु इन्द्रमणी के प्रति राय प्रवीण की आशक्ति ने अकबर को विवश कर दिया फलस्वरूप अकबर ने राय प्रवीण को पुन: ओरछा भेज दिया ।


4. राम राजा मन्दिर 🚩🚩🚩

ओरछा
राम राजा मन्दिर

यह एक महल था जिसे बाद में मन्दिर में बदल दिया गया इस महल के मन्दिर में रूपांतरित होंने के पीछे एक जनश्रुति यह भी  प्रचलित हैं कि राजा मधुकर शाह को स्वप्न में राम के दर्शन हुए और स्वप्न में ही उन्होंने राजा मधुकर शाह को निर्देश दिये की अयोध्या से मेरी मूर्ति लाकर यहाँ मेरा मन्दिर बनाया जाय ।

स्वप्न के मुताबिक राजा अयोध्या से मूर्ति लाये और प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मूर्ति को महल के एक स्थान में रखवा दिया गया जब प्राण प्रतिष्ठा के लिये मूर्ति को हटाया जाने लगा तो मूर्ति लाख कोशिशों के बाद भी नही उठ पाई ,तभी राजा को स्वप्न वाला निर्देश याद आया उसे कहा गया था की वह जिस जगह रखे जायेंगे उस स्थान से नही हटेंगे फलस्वरूप मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा इसी जगह की गई । और महल को मन्दिर का रुप दे दिया गया ।

राम की पूजा यहाँ राजा मानकर की जाती हैं ।

यह मन्दिर अपने गगनचुम्बी शिखर और वास्तुकला के लिये जाना जाता हैं । इसके शिखर दूर दूर से दिखाई देते हैं  ,और दूर से देखने पर बड़े मनोहारी प्रतीत होते हैं ।



5.चतुर्भुज मन्दिर 🚩🚩🚩

ओरछा
चतुर्भुज मन्दिर

यह मन्दिर अयोध्या से लाई गई राजा राम की मूर्ति स्थापना के लिये बनाया गया था किन्तु राम यहाँ विराजित नहीं हुए ।

यह मन्दिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना हैं मन्दिर तक पहुँचने हेतू सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता हैं । इस मन्दिर की दीवारों पर बनाये गये धार्मिक अलंकरण बहुत आकर्षक हैं । 


6.लक्ष्मी नारायण मन्दिर 🚩🚩🚩 

ओरछा
 लक्ष्मी नारायण मन्दिर

लक्ष्मी नारायण मन्दिर राजा राम मन्दिर के पास ही स्थित हैं ।
इस मन्दिर की वास्तुकला मन्दिर और दुर्ग शैली का अद्भुत समन्वयन हैं । मन्दिर की आन्तरिक दीवारों पर सुंदर भित्ति चित्र उकेरे गये हैं।  इन भित्ति चित्रों में सर्व धर्म समभाव को प्रदर्शित किया गया हैं ।

सदियाँँ गुजर जाने के बाद भी भी इस मन्दिर के भित्ति चित्र वैसे ही हैं जैसे सदियों पूर्व थे ।



7.फूलबाग :::



 फूलबाग बुन्देला राजाओं का ग्रीष्मकालीन शाही विश्रामगृह था । फूलबाग बुंदेला राजाओं के सोंदर्यबोध को प्रकट करने वाला बहुत सुंदर बगीचा हैं जिसके बीचों बीच फव्वारों की लम्बी कतार हैं । इस बाग में एक आठ खम्बों पर टिका भूमिगत महल हैं जिसमे छत से पानी की फुव्वारे आती हैं । 

यह महल तात्कालीन राजाओं की ऐश्वर्यशाली गाथा का परिचायक हैं ।



8.हरदौल महल  :::


यह महल बुन्देलखण्ड के जन जन के पूजनीय हरदौल को समर्पित हैं । हरदौल वीर सिंह देव जूदेव के छोटे पुत्र थे जिन्होंने अपने बड़े भाई द्वारा भाभी के प्रति गलत आरोप लगाने की वजह से प्राण त्याग कर अपनी पवित्रता का परिचय दिया ।

 जिस प्रकार राजस्थान और मालवा में पीर रामदेव को पूजा जाता हैं वैसे ही बुन्देलखण्ड का ऐसा कोई गाँव नही हैं जहाँ हरदौल के ओटले न बने हो । इन ओटलो पर  मनोती मांगी जाती हैं ।



9.सुन्दर महल :::


यह महल जुझारसिंह के पुत्र धजुर्बान समर्पित हैं । यह महल मुसलमानों की आस्था का केंद्र हैं क्योंकि धजुर्बान ने दिल्ली में एक मुस्लिम महिला से विवाह कर इस्लाम धर्म अपना लिया था। 

इस महल की स्थिति इतनी अच्छी नही हैं और यह खंडहर में बदलता जा रहा हैं ।


10.छतरियाँ ☂☂☂


ओरछा में राज करने वाले अनेक राजाओं का अंतिम संस्कार बेतवा नदी के किनारे किया गया और उनकी स्मृति में यहाँ छतरियों का निर्माण कराया गया था। इस तरह यहाँ कुल 14 छतरियाँ निर्मित की गयी हैं । इन छतरियों पर बैठकर बेतवा का कलकल सुनना और यहाँ के राजप्रसादों को देखना बहुत ही अविस्मरणीय पर्यटक अनुभव प्रदान करता हैं ।



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11.शहीद स्मारक :::


स्वतन्त्रता आन्दोलन के वीर चन्द्रशेखर आजाद सन 1926 से 1927 तक ओरछा में भेष बदलकर रहे थे । उन्होंने गुप्त रूप  से यहाँ से आजादी की लड़ाई का संचालन किया था ।

उनकी स्मृति में मध्यप्रदेश सरकार ने यहाँ स्मारक का निर्माण कराया हैं जिसमें शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित की गई हैं । 

इस स्मारक पर पहुँचकर आजादी के इस वीर को नमन करना हर भारतीय को देशप्रेम की भावना से ओत प्रोत कर देता हैं ।

इन स्मारकों के अतिरिक्त यहाँ सिद्धबाबा का स्थान,जुगलकिशोर मन्दिर,जानकी मन्दिर और ओह्रेद्वार का हनुमान मन्दिर महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं ।



12.बेतवा नदी :::


यहाँ बहने वाली बेतवा नदी मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण नदी हैं । इस नदी में पर्यटकों की सुविधा हेतू बोट सुविधा साहसिक बोट राफ्टिंग उपलब्ध कराई गई हैं । यहाँ आने वाला पर्यटक बोट में बैठकर ओरछा के महलों और नदी के जलीय जन्तुओं को देखना नहीं भूलता हैं ।


ओरछा कैसे पहुँचे :::



वायुयान सेवा ✈✈✈


ओरछा वायुयान सेवा से नहीं जुड़ा हैं । यहाँ से निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर हैं जो यहाँ से 117 किमी हैं । इसके अलावा 170 किमी की दूरी पर खजुराहों हैं । यह दोनों स्थान देश के प्रमुख शहरों से नियमित वायुयान सेवा के माध्यम से जुड़े हैं ।

ग्वालियर और खजुराहों से बस या टैक्सी लेकर ओरछा आसानी से पहुँचा जा सकता हैं ।



रेल सेवा 🚉🚉🚉


ओरछा से 160 किमी दूर स्थित झाँसी रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हैं । यहाँ देश के सभी कोनों से पहुँचा जा सकता हैं । 

झाँसी से नियमित बस सेवा ओरछा के लिये उपलब्ध हैं ।




सड़क मार्ग 🚌🚌🚌



ओरछा खजुराहों - झाँसी मार्ग पर पड़ता हैं । झाँसी खजुराहों और झाँसी ओरछा के बीच नियमित बस सेवा और टैक्सी सेवा उपलब्ध हैं ,जिनकी सहायता से आसानी से ओरछा पहुँचा जा सकता हैं ।



होटल 🏣🏣🏣


ओरछा में सरकारी और निजी क्षेत्र की होटले और कॉटेज उपलब्ध हैं । जहाँ गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध हैं  ।




खानपान 🥄☕🍽🥃


ओरछा में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन उपलब्ध हैं । स्थानीय स्तर की छोटी दुकानों में बुन्देलखंडी व्यंजनों का आनन्द लिया जा सकता हैं ।



मौसम :::



ओरछा का तापमान गर्मियों में 48 डिग्री सेंटीग्रेड  तक पहुँच जाता हैं । तथा ठंड में यहाँ का तापमान 6 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता हैं ।

यहाँ घूमने का सबसे उपयुक्त समय जुलाई से मार्च के बीच हैं ।



० चौबीस खम्बा माता मंदिर उज्जैन




युनेस्को विश्व विरासत स्थल


युनेस्को [United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization ] ने ग्वालियर और ओरछा को अपने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम Urban landscape City program के तहत World heritage City में शामिल किया हैं ।


इस कार्यक्रम के अन्तर्गत यूनेस्को और मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग इन स्थलों पर मौजूद प्राकृतिक और ऐतिहासक स्थलों का संरक्षण और विकास उत्कृष्ठ मानव मूल्यों के अनुसार करेगा ।








12 सित॰ 2018

उज्जैन के दर्शनीय स्थल। UJJAIN KE DARSHNIY STHAL

उज्जैन के दर्शनीय स्थल UJJAIN KE DARSHNIY STHAL

परिचय :::

उज्जैन भारत के मध्यप्रदेश राज्य में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पौराणिक और ऐतिहासिक नगर हैं । इस नगर को
अवन्तिका,कनकश्रृंगा,,उज्जयिनी,प्रतिकल्पा,कुमुदवती,पद्मावती,अमकावती ,कुशस्थली,भोगवती,विशाला  आदि पौराणिक नामों से जाना जाता हैं ।इस नगर में ऐसे कई विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं जिनके दर्शन हेतु देश विदेशों से लाखों श्रद्धालु आते हैं ।


वर्तमान उज्जैन 75 डिग्री 50 अंश पूर्व देशांतर व 23 डिग्री 11 अंश उत्तरी अक्षांश पर क्षिप्रा नदी के दाहिनें तट पर समुद्र से 1698 फुट की ऊँचाई पर मालवा के पठार पर स्थित हैं  ।


प्राचीन उज्जैन नगरी वर्तमान उज्जैन के उत्तर में स्थित गढ़कालिका क्षेत्र में स्थित थी । सूर्य के ठीक नीचें की स्थिति उज्जैन के अलावा संसार के अन्य किसी स्थान की नही हैं । इसके अक्षांश व सूर्य की कांति दोनों 24 अक्षांश हैं ।


आइये जानते हैं इन दर्शनीय स्थलों के बारे में

1.महाकाल मंदिर  🚩🚩🚩


उज्जैन
 महाकाल 

महाकाल भारत भर में फैले 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ज्योर्तिलिंग हैं ।यह एक मात्र ज्योर्तिलिंग हैं जो दक्षिण मुखी हैं । इसी वज़ह से शैव मत के मानने वालों में इस ज्योर्तिलिंग का महत्व तांत्रिक साधना के लिये अधिक हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं ।

इस मंदिर का निर्माण वैसे तो अनादिकाल से ही हैं परंतु वर्तमान महाकाल मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवँश के समय राणोजी सिंधिया के मंत्री रामचन्द्र शेणवी ने कराया था ।

महाकाल मंदिर में दर्शन के लिये आने वाले श्रद्धालुओं के लिये दो तरह की दर्शन व्यवस्था लागू की गई हैं 


1.सामान्य :::


इस दर्शन व्यवस्था में दर्शनार्थियों को मुफ़्त दर्शन कराया जाता हैं । कोरोना की वजह से आजकल दर्शन मंदिर समिति की वेबसाइट पर प्री बुकिंग और मंदिर पहुंचकर मंदिर के कांउटर पर बुकिंग द्धारा हो रहें हैं। दर्शन के पूर्व श्रद्धालुओं से मोबाइल और अन्य भारी सामान मन्दिर समिती द्वारा संचालित लॉकर रूम में रखवा लिया जाता हैं । 

सामान्य दर्शनार्थियों को दर्शन करने में 1 से 2 घन्टे लगते हैं साथ ही रास्ता 1से 2 किमी लम्बा और घुमावदार हैं अतः बच्चो और बुजुर्गों के लिये यह व्यवस्था अनुकूल नहीं हैं । बुजुर्गों के लिये मन्दिर समिति द्वारा संचालित तिपहिया से मन्दिर में दर्शन करवाया जा सकता हैं यह व्यवस्था पूर्णतः निशुल्क हैं।
  



2.विशेष दर्शन व्यवस्था :::


श्रद्धालुओं को जल्दी और सुगम दर्शन कराने के लिये मन्दिर समिति द्वारा सशुल्क दर्शन व्यवस्था लागू की गई हैं जिसमे 250 रुपए देकर श्रद्धालु सीधे दर्शन कर सकता हैं । 

मन्दिर में 1500 रुपये देकर विशेष दर्शन की व्यवस्था भी की गई हैं जिसमें श्रद्धालु को गर्भगृह के अंदर से दर्शन करने की सुविधा मिलती हैं ,परन्तु गर्भगृह से दर्शन करने के लिये पुरुषों को धोती कुर्ता और स्त्रियों को साड़ी पहनना अनिवार्य हैं।

उज्जैन
 महाकाल मन्दिर


3.सामान्य दिनों में दर्शन व्यवस्था


सामान्य दिनों यानि मंगलवार,बुधवार,गुरुवार,और शुक्रवार को श्रद्धालुओं की कम संख्या को देखते हुए मन्दिर समिति दर्शनार्थियों को सीधे गर्भगृह में प्रवेश करवाकर दर्शन करवाती हैं । गर्भगृह से दर्शन करने का एक अलग ही आध्यात्मिक आनन्द होता हैं।जिसे कोई भी दर्शनार्थी जीवनभर नहीं भूलना चाहता ।

०शरदपूर्णिमा

० अटल बिहारी वाजपेयी


4.विशेष दिनों या पर्व उत्सवों के समय दर्शन व्यवस्था 


पर्वों उत्सवों और भीड़भाड़ वाले दिनों में महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति विशेष दर्शन व्यवस्था लागू करती हैं जिसमे गर्भगृह में प्रवेश वर्जित कर दिया जाता हैं । और दर्शन दूर से करवाये जाते हैं । 


महाकाल मंदिर विश्व का एकमात्र मन्दिर हैं जहाँ प्रतिदिन तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती हैं।भस्मारती के लिये महाकाल मंदिर कार्यालय और वेबसाइट से अनुमति प्राप्त करनी होती हैं ।  इसके अलावा प्रतिदिन भोग आरती, संध्या आरती,और शयन आरती होती हैं ।

महाकाल के ऊपर इसी मंदिर में ओम्कारेश्वर भगवान का मंदिर हैं ।इस मंदिर में भी भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं,यहाँ दर्शन शीघ्र आसानी से और बिना शुल्क के हो जाते हैं ।

ओम्कारेश्वर मन्दिर के ऊपर नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर हैं । यहाँ दर्शन साल में केवल एक बार  नागपंचमी को ही होते हैं। बाकी पूरे साल यह मंदिर बन्द रहता हैं ।नागपंचमी के अवसर पर इस मंदिर में देश विदेश के भक्तों का जनसैलाब उमड़ता हैं ।

महाकाल मंदिर के प्रांगण में ही अनेक देवी देवताओं के मंदिर हैं जहाँ दर्शन उपरान्त श्रद्धालु तिलक लगवाते और कलेवा बंधवाते हैं ।

महाकाल मंदिर प्रांगण में ही मन्दिर समिति के काउंटर लगे हुए हैं जहाँ से आप सशुल्क प्रसाद,महाकाल के फोटो आदि प्राप्त कर सकते हैं साथ ही मंदिर समिति को दान भी दे सकते हैं ।

महाकाल अतिथि निवास महाकाल मंदिर के पास स्थित सर्वसुविधायुक्त निवास स्थान हैं यहाँ कमरा बुक कराने के लिये महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट पर जाना होता हैं ।

अतिथि गृह के समीप ही महाकाल मंदिर समिति द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र हैं हैं जहाँ सुबह शाम श्रद्धालुओं के लिये स्वादिष्ट भोजन प्रसादी की व्यवस्था निशुल्क की गई हैं ।



2.बड़ा गणेश मंदिर 🚩🚩🚩:::


महाकाल अतिथि निवास के सामने बड़ा गणेश का मंदिर स्थित हैं । इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा बहुत विशाल हैं इसलिए इसे बड़ा गणेश के नाम से जानते हैं । बड़े गणेश की प्राण प्रतिष्ठा पद्मविभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास के पिता श्री नारायण व्यास ने की थी । 

बड़े गणेश की प्रतिमा देश की प्रसिद्ध नदियों और मिट्टियों से निर्मित की गई हैं ।

इस मंदिर के अंदर विभिन्न देवी देवताओं की झांकी सजाई गई हैं । जिसके दर्शन से असीम शान्ति का अनुभव होता हैं ।


3.रुद्रसागर :::


बड़े गणेश मंदिर से कुछ ही मिनिट की दूरी पर सड़क के दाएं और बाएं जो तालाब हैं इसी को रुद्रसागर कहते हैं । आज से 50 वर्ष पूर्व इसी तालाब के जल से महाकाल का अभिषेक किया जाता था किंतु बाद में यह तालाब शहर के गंदे नालों की चपेट में आ गया जिससे इसका पानी गन्दा हो गया ।

सिंहस्थ 2016 में इस तालाब के सौंदर्यीकरण के प्रयास किये गये जिससे यह तालाब सीवेज मुक्त हुआ है । इस तालाब के किनारे उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य 32 पुतलियों और उनके दरबारियों की मूर्ति स्थापित की गई हैं । इन मूर्तियों के नीचें इनके सम्बन्ध में रोचक वर्णन हैं । आज यह स्थल सेल्फी पॉइंट बन चुका हैं ।

यदि इस तालाब में बोटिंग सुविधा शुरू हो जाये तो पर्यटकों को एक नया अनुभव मिल सकता हैं ।


4.हरसिद्धी मन्दिर 🚩🚩🚩:::


रुद्रसागर से थोड़ा सा चलने पर एक चौराहा आता हैं इस चौराहे से दायीं ओर दस कदम चलने पर माता हरसिद्धि का मंदिर आता हैं ।
हरसिद्धि उज्जैन
 माता हरसिद्धी



उज्जैन विश्व का एकमात्र स्थान हैं जहाँ शिव और शक्ति उपासना के पौराणिक स्थान एक साथ उपलब्ध हैं ।

यह सिद्ध शक्तिपीठ  स्थल हैं जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थीं । इस मंदिर में जहां माता सती की कोहनी गिरी थी वहाँ माता की मूर्ति स्थापित हैं । 
मन्दिर प्रांगण में दो विशाल दीपमाला स्तम्भ हैं जहां नवरात्रि पर्व उत्सवों और मन्नत पूरी होने दीपों का प्रज्वलन किया जाता हैं ।

दीप स्तम्बभ मराठा कालीन हैं । इन स्तम्भों पर प्रज्वलित होते दीप आपकी शाम को उर्जा से भर देते हैं और आँखों को असीम आंनद प्रदान करते हैं ।




5.चारधाम मन्दिर🚩🚩🚩:::


हरसिद्धि मन्दिर के दर्शन उपरांत सीधे दक्षिण दिशा की और लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्वामी शांतिस्वरूपानंद जी द्वारा स्थापित चारधाम मंदिर हैं जिसमें भारत के चारधाम मंदिर की प्रतिकृति स्थापित की गई हैं ।

इस मंदिर में एक कृत्रिम गुफा का निर्माण किया गया हैं जिसमें विभिन्न देवी देवताओं की लीलाओं को प्रदर्शित किया गया हैं ।गुफा में प्रवेश  सशुल्क हैं ।

मन्दिर में ही ब्राह्मण बच्चों को निशुल्क कर्मकांड शिक्षा प्रदान की जा रही हैं ।


6.रामघाट :::


शिप्रा के तट पर स्थित रामघाट करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं । उज्जैन आने वाला कोई भी श्रद्धालु रामघाट पर क्षिप्रा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करना नहीं भूलता हैं । 

रामघाट का नाम भगवान राम के नाम से जुड़ा हैं इस स्थान पर भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था । 

रामघाट पर प्रतिदिन शाम के समय क्षिप्रा आरती होती हैं । यह आरती देखकर वाराणसी की गंगा आरती की याद तरोताजा हो जाती हैं ।

रामघाट पर अनेक छोटे बड़े मन्दिर हैं इन मंदिरों में कुछ मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 मंदिर श्रृंखला के हैं । रामघाट पर अपने निकटस्थजनों का पिंडदान करते हुए लोग देखे जा सकते हैं ।



7.गोपाल मंदिर🚩🚩🚩 :::


 गोपाल मंदिर उज्जैन के व्यस्ततम बाज़ार में स्थित हैं । इस मंदिर का निर्माण सिंधिया वंश की रानी बायजा बाई ने कराया था । भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर भी लोगों की आस्था का केन्द्र हैं । 

मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति इस मन्दिर के आसपास स्थित बाज़ार में खरीददारी करना नहीं भूलता । इस बाज़ार में धार्मिक पुस्तकें,कुंकुम,चन्दन,भगवान की मूर्तियां,चित्र आदि बहुतायात में मिलते हैं ।


8.काल भैरव मंदिर🚩🚩🚩 :::


काल भैरव मंदिर प्राचीन अवन्तिका नगर के नगरीय सीमा में स्थित हैं । इसका निर्माण राजा भद्रसेन ने करवाया था ।

  काल भैरव महाकाल के सेनापति हैं । इस मंदिर की प्रसिद्धि भी देश विदेश में हैं । यह मंदिर कपालिक अघोरी और तांत्रिक सम्प्रदाय के मानने वालों की आस्था का केंद्र बिन्दु हैं । 
कालभेरव उज्जैन
 मदिरापान करते कालभेरव

मंदिर के गर्भगृह में भगवान भैरव की प्रतिमा स्थापित हैं । इस प्रतिमा की एक बहुत बड़ी विशेषता हैं कि यह मदिरापान करती हैं , जी हाँ सही पढा  आपने यह प्रतिमा मदिरापान करती हैं । आपको मंदिर के बाहर देशी विदेशी शराब की दुकानें मिल जाएगी यहाँ से आप देशी विदेशी मदिरा ख़रीदये और मंदिर के पुजारी को दीजिए पुजारी मदिरा एक पात्र में डालकर जैसे ही भैरव बाबा की मूर्ति के होठों को स्पर्श कराता हैं पात्र में रखी शराब ग़ायब हो जाती हैं ।

काल भैरव भी बाबा महाकाल की तरह नगर भ्रमण पर निकलते हैं पर इनका नगर भ्रमण का दिन भैरव अष्टमी और डोल ग्यारस हैं । इस दिन काल भैरव बाबा महाकाल की तरह लाव लश्कर के साथ भैरव गढ़ भ्रमण पर निकलते हैं ।

इस मंदिर के प्रांगण में ही एक गुफ़ा स्थित हैं जहाँ अनेक साधु संत तान्त्रिक क्रिया करतें हैं ।

विश्व प्रसिद्ध भैरवगढ़ प्रिंट का सम्बन्ध इसी स्थान से हैं । यहाँ से निर्मित साड़ी कपड़े ,गलीचे आदि देश विदेश तक जातें हैं । उज्जैन आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भैरवगढ़ प्रिंट से निर्मित वस्तु खरीदना नही भूलता हैं ।



9. मंगलनाथ मन्दिर 🚩🚩🚩:::



क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता हैं । मन्दिर में स्थापित भगवान मंगलनाथ की मूर्ति शिवलिंग रूप में स्थापित हैं । खगोलशास्त्र में इस मन्दिर का विशेष महत्व हैं क्योंकि यहाँ से मंगल गृह सीधा दिखाई देता हैं ।

इस मंदिर में मंगल कार्यों जैसे मांगलिक कुंडली से विवाह में देरी ,घर के मंगल कार्य आदि हेतू विशेष पूजा की जाती हैं । प्रतिदिन यहाँ सैकड़ों श्रद्धालु यह विशेष पूजा करवाने देश विदेश से यहाँ आते हैं । 

मंगलनाथ मंदिर के पास ही क्षिप्रा किनारें अंगारेश्वर मंदिर,विक्रान्त भैरव मंदिर हैं जिनकी जानकारी बहुत कम श्रद्धालुओं को हैं । ये मंदिर भी अपनी अलग पहचान रखते हैं जिसकी जानकारी हमें इनके पुजारियों के माध्यम से ही मिलती हैं ।


10.अंगारेश्वर मंदिर 🚩🚩🚩::::

 मंगलनाथ मंदिर के समीप ही यह मंदिर क्षिप्रा नदी के बीचों बीच स्थित हैं । यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 महादेव मंदिरों की कड़ी का मन्दिर हैं ।

अंगारेश्वर भगवान शिव के रुद्र अवतार थे जिन्हें भगवान शिव ने अपने विरोधियों का संहार करने हेतू  उत्पन्न किया था । 

इस मन्दिर में दूसरे शिव मंदिरों के विपरीत सुर्ख लाल कुंकुम अर्पित किया जाता हैं । 


11.सांदीपनि आश्रम :::


उज्जैन  सम्पूर्ण धरा का अनोखा धार्मिक स्थल हैं जहाँ  से भगवान शिव के साथ भगवान कृष्ण का भी जुड़ाव हैं । मंगलनाथ मार्ग पर ही यह पौराणिक आश्रम स्थित हैं । 

इस स्थान पर भगवान कृष्ण भाई बलराम और सखा सुदामा के साथ गुरू सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने आये थे जहाँ उन्होंने गुरु सांदीपनि से 64 विद्या और 16 कलाओं की शिक्षा ग्रहण की ।

सांदीपनि आश्रम में एक कुण्ड हैं जिसका नाम गोमती कुंड हैं ।

 जहाँ भगवान कृष्ण अपनी स्लेट साफ़ किया करते थे । इस आश्रम में गुरु सांदीपनि का मंदिर,भगवान शिव का मंदिर समेत अन्य छोटे मन्दिर हैं ।

 पुष्टिमार्गीय मत को मानने वाले व्यक्तियों के लिये यह स्थान विशेष महत्व रखता हैं क्योंकि यहाँ महाप्रभु जी की 84 बैठकों में से 73 वी बैठक हैं ।

इस आश्रम में भगवान कृष्ण की 64 कलाओं को प्रदर्शनी के रूप में मनोहारी रूप में प्रदर्शित किया गया हैं ।



12.भृतहरि गुफा :::


यह गुफा मंगलनाथ मंदिर के समीप ही क्षिप्रा नदी के किनारें स्थित हैं । भृतहरि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के सोतेले भाई थे जिन्होंने वैराग्य ग्रहण कर लिया था । इस गुफा का पुननिर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ था ।गुफा पत्थरों से निर्मित हैं । कुल तीन गुफा हैं जिनके अन्दर शिवलिंग स्थापित हैं ।

 इस गुफा के आसपास बंदर बहुतायत में पाये जाते हैं अतः गुफा में जाते समय बंदरो के लिए कुछ ले ले ।




13.गढ़ कालिका मंदिर 🚩🚩🚩 


गढ़ कालिका मंदिर प्राचीन अवन्तिका नगरी के बाहरी भाग में स्थित था । आज भी इसकी अवस्थिति उज्जैन शहर के बाहर ही हैं । मन्दिर का निर्माण 7 वी सदी में हर्षवर्धन ने कराया था इसके पश्चात इसका पुनर्निर्माण परमारकाल में हुआ था ।

इस मंदिर में शक्ति रूपा देवी कालिका विराजमान हैं । देवी गढ़ कालिका महाकवि कालिदास की आराध्य देवी हैं । लोकश्रुति के अनुसार महाकवि कालिदास को देवी उपासना के बाद ही ज्ञान प्राप्त हुआ था ।यहाँ नवरात्रि में श्रद्धालुओं का तांता लगता हैं ।

मन्दिर में स्थापित देवी की मूर्ति अत्यंत चैतन्य और असीम ऊर्जा प्रदान करने वाली हैं । 




14.राम जनार्दन मंदिर 🚩🚩🚩


भगवान राम को समर्पित यह मंदिर समूह भी अत्यन्त प्राचीन धार्मिक स्थल हैं । इस मंदिर के प्रांगण में एक तालाब हैं जिसमें बोटिंग की सुविधा उपलब्ध हैं । यह स्थान उज्जैन के स्थानीय निवासियों का प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट हैं । 

यहाँ बच्चों के लिये झूले, स्लाइडिंग आदि उपलब्ध हैं । 


15. चिंतामण गणेश मंदिर 🚩🚩🚩


जिस स्थान पर शिव और शक्ति हो वहाँ गणेश नहीं हो ऐसा हो ही नहीं सकता । इसी कड़ी में भगवान गणेश का यह मंदिर उज्जैन की आध्यात्मिक परम्परा को प्रतिष्ठित कर रहा हैं ।
चिन्तामण गणेश मंदिर उज्जैन
 चिन्तामण गणेश

चिंतामण गणेश मन्दिर उज्जैन से पश्चिमी दिशा की ओर लगभग 3 किमी की दूरी पर चिंतामण जवासिया गाँव में स्थित हैं । इस मन्दिर में भगवान गणेश और रिद्धि सिद्धि  एक ही प्रतिमा में हैं ।

इस मंदिर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं की यहाँ अबूझ मुहर्त में पुरे वर्ष विवाह सम्पन्न होते हैं । बालिग प्रेमी युगल मन्दिर प्रांगण में विवाह सूत्र में बंधते दिख जायेंगे ।

मन्दिर प्रांगण में एक बावड़ी स्थित हैं जो पोराणिक महत्व की हैं और भक्तों की आस्था की केंद्र बिंदु हैं ।

चिन्तामण गणेश मन्दिर के आसपास दुकानों पर मिलने वाले लड्ड बहुत स्वादिष्ट होते हैं इन लड्डओ को अनेक भक्त दूर दूर तक पैक करवाकर ले जाते हैं ।

चिन्तामण गणेश मार्ग पर ही आपको केंद्र सरकार का महर्षि सान्दिपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान और पंडित कमल किशोर नागर द्वारा संचालित गोशाला भी देखने को मिलेंगे । गोशाला की दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी की गयी हैं ।



16.प्रशांति धाम :::


प्रशांति धाम इंदौर रोड पर शनि मन्दिर के समीप स्थित हैं  । यहाँ अनेक मन्दिर स्थित हैं किन्तु मुख्य मन्दिर साईं बाबा का हैं । यह मन्दिर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित हैं । प्रशांति धाम बहुत ही मनोरम और प्रकृति के बीच स्थापित धार्मिक स्थल हैं जो मन को असीम शांति प्रदान करता हैं । प्रति गुरुवार यंहा दर्शनार्थियों की भीड़ लगती हैं ।

प्रशांति धाम के थोड़ा आगे वन विभाग द्वारा संधारित त्रिवेणी टूरिज्म पार्क हैं । यहाँ स्थित घने जंगल में पेड़ पोधों की विभिन्न प्रजातियाँ,जंगली पक्षी आदि बड़ी आसानी से देखे जा सकते हैं ।फोटोग्राफी और पिकनिक के लिये शहरवासियों का यह पसंदीदा स्थल हैं ।



17.शनि मन्दिर त्रिवेणी 🚩🚩🚩:::




शनि मन्दिर भी इंदौर रोड़ पर स्थित हैं । यहाँ  सभी ग्रहों के मन्दिर स्थापित हैं किन्तु मुख्य मन्दिर शनि देवता का हैं । इस मन्दिर की स्थापना उज्जयनी के राजा विक्रमादित्य ने की थी । इस जगह पर कान्ह नदी और क्षिप्रा नदी का मिलन बिन्दु भी हैं । इसी वजह से इसे त्रिवेणी संगम भी पुकारते हैं ।



शनि मन्दिर स्थित त्रिवेणी संगम पर अमावस्या और विशेष पर्वों पर लाखों आस्थावान डुबकी लगाते हैं ।







18.महावीर तपोभूमि :::


महावीर तपोभूमि इंदौर रोड पर ग्राम राघो पिपलिया में स्थित हैं । यह दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ हैं । इस तीर्थ में भगवान महावीर की विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी हैं ।जिसके दर्शन हेतू जैन धर्मावलम्बी पुरे भारत और विदेशों से उज्जैन आते हैं । यहाँ वर्षभर आयोजन चलते रहते हैं ।



19.पंचक्रोशी यात्रा मार्ग :::


उज्जैन के आसपास चारों कोनों पर भगवान महाकाल के चार द्वारपाल शिव रूप में विराजित हैं । प्रथम द्वारपाल पिन्ग्लेश्वर ,दुसरे द्वारपाल कायावहेनेश्वर,तीसरे दुर्देश्वर,तथा चोथे बिल्केश्वर हैं । ये द्वारपाल 118 किलोमीटर के घेरे में विस्तृत हैं । पंचकोशी मार्ग अध्यात्म,ग्राम्य जीवन और प्रकृति का अनूठा संगम हैं । पंचकोशी मार्ग पर स्थित अम्बोदिया में गम्भीर बांध अपार जलराशि को अपने में संजोये हुए हैं । जंहा पर्यटकों का ताँता लगा रहता हैं।

अम्बोदिया में एक वृद्धआश्रम स्थित हैं इस आश्रम में रहने वाले  निः सहाय वृद्धो की सेवा करने और उनके साथ समय बिताने के बाद असीम आनन्द की अनुभूति होती हैं ।



20.इस्कान मन्दिर 🚩🚩🚩:::



इस्कान मन्दिर उज्जैन शहर में देवास रोड पर स्थित हैं ।

उज्जैन भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली हैं । उनके अनुयायियों ने भगवान कृष्ण की यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए उज्जैन को चुना । इस्कान मन्दिर देश विदेश में फेले करोड़ो अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं । यहाँ सालभर धार्मिक गतिविधियों का आयोजन होता रहता हैं ।

इस मन्दिर में प्रतिदिन हजारों दर्शनार्थी पहुँचते हैं । यहाँ की प्रसाद और कृष्ण से सम्बन्धित साहित्य बहुत प्रसिद्ध हैं ।



इन महत्वपूर्ण स्थलों के अतिरिक्त उज्जैन में पीर मछेन्द्र्नाथ की समाधि,गेबी हनुमान मन्दिर,मनछामण गणेश मन्दिर,रूमी की मस्जिद ,भूखी माता जैसे स्थल हैं । जो लाखों लोंगो की आस्था के केंद्र हैं ।


21.वेधशाला 


उज्जैन कालगणना  ज्योतिष और खगोल विज्ञान का केंद्र रहा हैं । यहाँ वराहमिहिर जेसे खगोलविद राजा विक्रमादित्य के राज में आश्रय पाते थे। उज्जैन की इस महान विशेषता को राजा सवाई जयसिंह ने समझा और यहाँ एक वेधशाला का निर्माण करवाया । यह वेधशाला तत्कालीन समय में कालगणना का प्रमुख केंद्र थी ।

यहाँ सम्राट यंत्र,नंदीवलय यंत्र ,दिमषा यंत्र और यम्योत्रा जैसे उपकरण निर्मित हैं जिनसे ग्रहों की स्थिति ,समय का पूर्वानुमान व्यक्त किया जाता हैं ।


22. केडी पेलेस या कालियादेह महल :::

इस महल का निर्माण मांडू के सुल्तान ने ईस्वी सन 1458 में कराया था । पिंडारियों के आक्रमण से ध्वस्त हुए महल को सिंधिया राजवंश के माधवराव सिंधिया ने सन1920 पुनर्निर्मित कराया था । यह महल क्षिप्रा नदी की दो धाराओं के बीच स्थित हैं । यहाँ क्षिप्रा नदी बहुत उथली होनें से यह स्थल उज्जैन शहर के युवाओं का पसंदीदा पिकनिक स्थल हैं जहाँ युवा क्षिप्रा की धाराओं के बीच अठखेलियाँ करना नही भूलते ।

महल के सामने की ओर स्थित धारा में 52 कुंड बने हैं जिसमें राजवंश के लोग स्नान करते थे ।

इस महल में सूर्य मन्दिर भी हैं । इस मन्दिर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं की इसमें स्थित सूर्य देव की प्रतिमा महल के बहुत अंदर स्थित हैं किन्तु फिर भी सूर्योदय के समय सूर्य की किरण इस प्रतिमा पर गिरती हैं ।

23.नौलखी पार्क :::


यह वन विभाग द्वारा 55 हेक्टयर में विकसित बहुत सुंदर जँगल हैं जो मक्सी रोड़ पर स्थित हैं । इस पार्क में जंगली जानवर,विभिन्न किस्म के पेड़ पोधें बहुतायत में मिलते हैं । यह स्थल भी बहुत अच्छा वीकेंड डेस्टिनेशन हैं ।




24.सिद्धवट :::


उज्जैन में स्थित यह स्थल पितरों के तर्पण के लियें विश्व प्रसिद्ध हैं । यहाँ एक वट वृक्ष हैं जिसके सम्बन्ध में कहा जाता हैं की यह अक्षय वट वृक्ष हैं अर्थात इसका कभी क्षय नहीं होता हैं । इस अक्षय वट वृक्ष को माता पार्वती ने अपने हाथों से लगाया था ।

मुगलों ने इस वट वृक्ष कों कटवाकर इसमें लोहे की कड़ाई चुनवा दी थी ताकि यह वट वृक्ष पुन : नहीं उग सकें किन्तु इसके बाद भी वट वृक्ष पुन: उग गया ।

इसी वट वृक्ष के नीचें देवताओं ने भगवान शिव के पुत्र कार्तिक को अपना सेनापति नियुक्त किया था ताकि वह तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कर सकें।

अवन्तिका के सम्राट विक्रमादित्य ने इसी सिद्धवट के नीचें तपस्या कर बेताल को वश में किया था ।

सम्राट अशोक ने इसी सिद्धवट को साक्षी मानकर अपने पुत्र पुत्री को बोद्ध धर्म का प्रचार करनें हेतु श्री लंका रवाना किया था ।

यहाँ मृत आत्मा की शांति और पितरों के तर्पण हेतू सालभर श्रदालुओं का तांता लगा रहता हैं ।



25.चोबीस खम्बा माता मन्दिर :::


चोबीस खम्बा माता मन्दिर उज्जैन का अति प्राचीन मन्दिर हैं। जिसमे दो देवियाँ महालाया और महामाया विराजित हैं। ये दोनों देवियाँ उत्तर दिशा में स्थित प्राचीन प्रवेश द्वार के अगल बगल विराजित हैं । प्राचीनकाल में यह स्थल उज्जैन नगर का प्रवेश द्वार था । चोबीस खम्बों पर स्थित होनें के कारण इसे चोबीस खम्बा माता मन्दिर भी कहते हैं ।

कर सहस्त्र पदविस्तीर्ण महाकाल वनं शुभं।द्वारम्हाघ्र्नार्नात्र खन्चित सोभ्य दिग्भ्वम।।
अर्थात महाकाल वन एक हजार पैरों तक विस्तारित होकर इसका द्वार बेशकीमती रत्नों से सुसज्जित हैं। और यह उत्तर दिशा की और स्थित हैं ।

इस मन्दिर के सन्दर्भ में कई किवंदतीयाँ प्रचलित हैं जिसके अनुसार इस मन्दिर में स्थित 32 पुतलियाँ रोज रात को एक राजा बनाकर उनसे सवाल पूछती थी जवाब नही देनें पर राजा को मार देती थी । राजा विक्रमादित्य ने महाअष्टमी को इन पुतलियों को भोग खिलाकर अपने वश में कर लिया था । इन पुतलियों ने राजा को वरदान दिया था की वो जब भी न्याय करेगा वो साश्वत सत्य और राजा की कीर्ति बढ़ाने वाला होगा ।

ये पुतलियाँ राजा को आकाश और पाताल की खबर लाकर देती थी ।

इस मन्दिर में स्थित दोनों देवियों को प्रतिवर्ष महाअष्टमी को मदिरा का भोग प्रसासन द्वारा अर्पित किया जाता हैं । प्राचीनकाल में यहाँ मदिरा के अतिरिक्त भेसों की बलि भी दी जाती थी ।जिसे सम्भवत: बारहवी शताब्दी में बंद कर दिया गया था।



26.चोरासी महादेव :::-



1/84.अगस्तेश्वर महादेव ::: यह मन्दिर क्षिप्रा नदी के किनारे हरसिधि मन्दिर मार्ग पर हैं ।


2/84.गुरिहेश्व्रर महादेव ::: यह मन्दिर भी क्षिप्रा किनारे रामघाट पर स्थित हैं ।


3/84.दूदेशवर महादेव ::: रामघाट क्षिप्रा किनारे स्थित हैं ।


4/84.डमरूकेश्वर महादेव ::: रामघाट क्षिप्रा किनारे ।


5/84.अनादिकल्पेश्वर ::: महाकाल मंदिर परिसर में स्थित हैं


6/84.स्वर्णज्वालेश्वर महादेव ::: राम सीढ़ी पर


7/84.त्रिविष्टपेश्वर महादेव ::: महाकाल मंदिर परिसर में स्थित हैं ।


8/84.कपालेश्वर महादेव ::: बिलोटीपुरा राजपूत धर्मशाला


9/84.स्वर्गद्धारेश्वर महादेव ::: नलिया बाखल


10/84.कर्कोटेश्वर महादेव ::: हरसिद्धी मंदिर परिसर


11/84.सिद्धेश्वर महादेव ::: सिद्धनाथ  मंदिर क्षिप्रा तट


12/84.लोकपालेश्वर  महादेव ::: हरसिद्धी दरवाजा


13/84.मनकामनेश्वर महादेव ::: गंधर्वती घाट


14/84.कुटुम्बरेश्वर महादेव ::: सिंहपुरी दरवाजा


15/84.इन्द्रधुम्नेश्वर महादेव ::: पटनी बाजार


16/84.इशानेश्वर महादेव ::: मोदी की गली बड़े दरवाजें में


17/84.अपशरेश्वर महादेव ::: मोदी की गली कुएँ के पास


18/84.कलकलेश्वर महादेव ::: मोदी की गली कुँए के सामनें


19/84.नागचंद्रेश्वर महादेव ::: पटनी बाजार


20/84.प्रतिहारेश्वर महादेव ::: पटनी बाजार


21/84.दुर्धरेश्वर महादेव ::: रामघाट पर बड़ा उदासीन अखाड़े के पास


22/84.कर्कटेश्वर महादेव ::: खटीकवाड़ा


23/84.मेघनादेश्वर महादेव ::: छोटा सराफा नरसिंह मंदिर के पास


24/84.महालयेश्वर महादेव ::: खत्रीवाडा दरवाजें में


25/84. मुक्तेश्वर महादेव ::: खत्रीवाड़ा नागवाले के सामनें


26/84.सोमेश्वर महादेव ::: राजपूत धर्मशाला बिलोटीपुरा 


27.84.अनरकेश्वर महादेव ::: गधा लोट कुंड के पास मकोडिया आम


28/84.जटेश्वर महादेव ::: गयाकोटा अंकपात 


29/84.रामेश्वर महादेव ::: सती दरवाजें के पास वाली गली

30/84.च्वनेश्वर महादेव ::: पुरूषोत्तम सागर ,ईदगाह के पास


31/84.खंडेश्वर महादेव ::: खिलचीपुर घाटी पर


32/84.पत्तनेश्वर महादेव ::: खिलचीपुर पुल पर


33/84.आनंदेश्वर महादेव ::: चक्रतीर्थ पर 


34/84. कंथडेश्वर महादेव ::: सिद्धवट पर पानी के प्याऊ के पास


35/84.इंद्रेश्वर महादेव ::: बिलोटीपुरा


36/84. मार्कंडेश्वर महादेव ::: अंकपात मार्ग राममंदिर के पिछे


37/84. शिवेश्वर महादेव ::: अंकपात मार्ग राम मंदिर परिसर


38/84.कुसुमेश्वर महादेव ::: अंकपात मार्ग राम मंदिर कुंड़ के ऊपर



39/84.अक्रूरेश्वर महादेव ::: राम जनार्दन मंदिर के सामनें



40/84. कुण्डेश्वर महादेव ::: सांदीपनी आश्रम में



41/84.लुम्पेश्वर महादेव ::: काल भैरव मंदिर के पिछे



42/84.गंगेश्वर महादेव ::: मंगलनाथ पर



43/84.अंगारेश्वर  महादेव ::: मंगलनाथ मंदिर के पिछे क्षिप्रा तट पर



44/84.उत्तरेश्वर महादेव ::: मंगलनाथ मंदिर परिसर में



45/84.त्रिलोचनेश्वर महादेव ::: नामदारपुरा लालबाई - फूलबाई के पास



46/84.वीरेश्वर महादेव ::: ढ़ाबा रोड़ पर सत्यनारायण मंदिर के पास



47/84.नूपूरेश्वर महादेव ::: डाबरीपीठा



48/84. अभयेश्वर महादेव ::: दानीगेट पोरवाल धर्मशाला के पिछे




49/84.प्रुथुकेश्वर महादेव ::: क्षिप्रा तट रपट के पार



50/84.स्थावरेश्वर महादेव ::: नईपेठ शनिमंदिर के पास



51/84.शूलेश्वर महादेव ::: ढ़ाबारोड़ खटीकवाड़ा



52/84.ओंकारेश्वर महादेव ::: ढ़ाबारोड़ खटीकवाड़ा



53/84.विश्वेश्वर महादेव ::: खटीकवाड़ा, छोटे तेलीवाडा के पास



54/84.कंटेश्वर महादेव ::: उर्दूपुरा पीपलीनाका



55/84.सिंहेश्वर महादेव ::: गढ के ऊपर गणपति के पास



56/84.रेवेन्तेश्वर महादेव ::: कार्तिक चोक खातीमंदिर से आगे



57/84.घंटेश्वर महादेव ::: कार्तिक चौक पर 



58/84.प्रयागेश्वर महादेव ::: चक्रतीर्थ पर



59/84. सिद्धेश्वर महादेव ::: खत्रीवाडा में पीपल के निचें



60/84.मातंगेश्वर महादेव ::: पिंजारवाड़ी बुधवारिया


61/84.सौभागेश्वर महादेव ::: पटनी बाजार विधवा आश्रम की गली में



62/84. रूपेश्वर महादेव ::: सिंहपुरी 



63/84.धनुसहस्त्रेश्वर महादेव ::: नयापुरा,वृंदावनपुरा




64/84.पशुपतेश्वर महादेव ::: जानसापुरा



65/84.ब्रम्हेश्वर महादेव ::: खटीकवाड़ा



66/84.जल्पेश्वर  महादेव ::: सोमतीर्थ पर


67/84.केदारेश्वर महादेव ::: शिप्रा तट पर सुनहरी घाट के सामनें


68/84.पिशाचमुकतेश्वर महादेव ::: क्षिप्रा तट पर रामघाट


69/84.संगमेश्वर महादेव ::: जयरामदास शनिरामदास की धर्मशाला के सामनें



70/84.कुक्कुटेश्वर महादेव ::: गंधर्व घाट क्षिप्रा तट पर


71/84.प्रयागेश्वर महादेव ::: हरसिद्धी दरवाजा


72/84.चंद्रादित्येश्वर महादेव ::: महाकाल मंदिर परिसर


73/84.करभेश्वर महादेव ::: काल भैरव मंदिर के सामनें 



74/84.राजस्थलेश्वर महादेव ::: भागसीपुरा


75/84.बडलेश्वर महादेव ::: सिद्धवट के सामनें


76/84.अरूणेश्वर महादेव ::: रामघाट पर


77/84.पुष्पदंतेश्वर महादेव ::: पानदरीबा ,डाकघर के पास वाली गली में


78/84.अभिमुक्तेश्वर महादेव ::: रूपेश्वर महादेव के सामनें सिंहपुरी


79/84.हनुमत्केश्वर  महादेव ::: गढ़कालिका मंदिर के पास


80/84.स्वप्नेश्वर महादेव ::: महाकाल मंदिर परिसर


81/84.पिंगलेश्वर महादेव ::: ग्राम पिंगलेश्वर (महाकाल के द्धारपाल पूर्व दिशा में )


82/84.कायावरोहणेश्वर महादेव ::: ग्राम करोहन (महाकाल के द्धारपाल द्क्षिण दिशा में )



83/84.बिल्केश्वर महादेव ::: ग्राम अम्बोदिया ( महाकाल के द्धारपाल पश्चिम दिशा )



84/84.दुर्दुरेश्वर महादेव ::: ग्राम जैथल ( द्धारपाल उतर दिशा)


नगरकोट की महारानी :::


प्राचीन उज्जैन के विशाल किलें के परकोटे की देवी हैं ।यह मंदिर परमारकालीन हैं । नवरात्रि पर यहाँ देवी की विशेष पूजा अर्चना होती हैं ।


27.सिद्धाश्रम पर पारद शिवलिंग 


एशिया का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग क्षिप्रा नदी के तट पर नृसिंहघाट पर स्थापित किया गया हैं । जो की दर्शनीय स्थल बन चुका हैं ।





28.भूखीमाता मंदिर 



भूखी माता  विक्रमादित्यकालीन देवी हैं जिनका प्राचीन वास नगर में था । अष्टमी को होनें वाली नगर पूजा में भूखी माता का प्रमुख स्थान हैं । 


भूखी माता मंदिर में देवी की दो मूर्तियाँ हैं जिन्हें देवी भुवनेश्वरी और धूमावती के नाम से जाना जाता हैं ।

यह मंदिर क्षिप्रा तट पर कर्कराज मंदिर के समीप स्थित हैं ।




29.चौंसठ योगिनी मंदिर



तांत्रिक परम्परा में चौंसठ योगिनी का विशेष महत्व हैं । इस मंदिर में चौंसठ योगिनी देवी की बहुत प्राचीन मूर्तियाँ हैं । यह मंदिर नयापुरा बस्ती में स्थित हैं ।


30.चित्रगुप्त मंदिर 


रामजनार्दन मंदिर के निकट ही यह मंदिर स्थित हैं । भगवान चित्रगुप्त का भी उज्जैन से विशेष संबंध हैं । पद्म पुराण के पातालखंड़ के अनुसार भगवान चित्रगुप्त नें भगवान ब्रम्हा के आदेश पर क्षिप्रा नदी के तट पर तपस्या की थी ।


उज्जैन पहुंचनें के लिये आवागमन के साधन ✈🚆🚌




उज्जैन देश के सभी रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ हैं । यहाँ से नजदीक एअरपोर्ट इंदौर हैं जो की 55 किमी की दूरी पर हैं । इंदौर देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों से जुड़ा हैं ।
उज्जैन देश के किसी भी भाग से सड़क मार्ग  द्वारा भी पहुँचा जा सकता हैं।

उज्जैन पहुँचने पर आप रिक्शा,टैक्सी ,लोक परिवहन की सहायता लेकर प्रमुख मन्दिरों में जा सकते हैं ।


उज्जैन में रुकने की व्यवस्था 🏖🏖🏖


उज्जैन में हर आय वर्ग के लिए उत्तमश्रेणी की होटले,धर्मशाला और रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं । इनमे निजी और सरकारी क्षेत्र के होटल सम्मिलित हैं ।



खानपान 🍽☕🥄



उज्जैन में हर प्रकार का खानपान उपलब्ध हैं किन्तु यदि आप उज्जैन पधारे हों तो आपको मालवा की शाही दाल बाटी या बाफला, चूरमा ,कड़ी ,सेव तथा लहसुन की चटनी का स्वाद अवश्य लेना चाहिये ।

बाटी या बाफला गेंहू  के आटे को गोलाकार रूप देकर उसे कंडे की आंच पर सेककर बनाया जाता हैं । तथा इस पर घी लगाकर दाल कड़ी और लहसुन की चटनी के साथ खाया जाता हैं ।

उज्जैन के आसपास के दर्शनीय स्थान


1.ओम्कारेश्वर 🚩🚩🚩

ओम्कारेश्वर उज्जैन से 116 किलोमीटर की दुरी पर हैं । ओम्कारेश्वर मध्यप्रदेश का दूसरा ज्योर्तिलिंग हैं तथा12 ज्योर्तिलिंगो में शामिल होकर अपना विशिष्ठ स्थान रखता हैं । ओम्कारेश्वर नर्मदा नदी के किनारे स्थित हैं । ओम्कारेश्वर में सिद्धनाथ मन्दिर प्रमुख मन्दिर हैं इसके अलावा यहाँ 24 अवतार मन्दिर,शन्कराचार्य गुफा,सप्तमात्रिका मन्दिर आदि प्रमुख मन्दिर हैं ।



2.महेश्वर 🚩🚩🚩


महेश्वर उज्जैन से 90 किमी दूर हैं । यहाँ होल्कर वंश की महान शासिका देवी अहिल्या बाई द्वारा निर्मित घाट ,मन्दिर और महल बहुत दर्शनीय हैं ।



3.देवास 🚩🚩🚩


देवास की दूरी उज्जैन से 36 किमी हैं । यहाँ पहाड़ी पर माता तुलजा भवानी और माता चामुंडा के मन्दिर हैं । इसके अतिरिक्त अन्य छोटे मन्दिर टेकरी पर स्थित हैं ।



4.आगर मालवा 🚩🚩🚩


आगर मालवा की दूरी उज्जैन से  65 किमी हैं । यहाँ बाबा बैजनाथ महादेव का मन्दिर हैं ।



5.नलखेडा 🚩🚩🚩


नलखेडा में शक्तिपीठ हैं । जँहा माता बगलामुखी विराजित हैं । इस स्थल की ख्याति भी बहुत दूर दूर तक हैं ।


6.मन्दसौर 🚩🚩🚩


मन्दसौर उज्जैन से 191 किमी दूर हैं । मन्दसौर रावण का ससुराल हैं उनकी रानी मन्दोदरी यही की थी इसी वजह से इसका नाम मन्दसौर पडा । यहाँ शिवना नदी के तट पर भगवान पशुपतिनाथ की अष्ट मुखी प्रतिमा स्थापित हैं जिसके दर्शन करने लोग बहुत दूर दूर से आते हैं ।


7.इंदौर 


इंदौर की दूरी उज्जैन से 55 किमी हैं । यह शहर मिनी बाम्बे के उपनाम से प्रसिद्ध हैं । यहाँ राजबाड़ा,लालबाग,होल्कर वंश की छतरी जैसे एतिहासिक स्थल स्थित हैं । वहीं इंदौर के आसपास 40 किमी की परिधि में चोरल बांध,तिंचा फाल,परशुराम की जन्मस्थली जनापाव जैसे सोंदर्य से परिपूर्ण प्राकृतिक स्थल भी स्थित हैं ।


8.मांडू 


मांडू उज्जैन से 130 किमी  की दुरी पर स्थित हैं । यह स्थल एतिहासिक इमारतों के लिये विश्व प्रसिद्ध हैं ।


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9.भोपाल


भोपाल उज्जैन से 190 किमी दूर हैं । यह मध्यप्रदेश की राजधानी हैं ।यहाँ की सुंदर झीले ,एतिहासिक इमारते बहुत प्रसिद्ध हैं ।भोपाल के आसपास 45 किमी की परिधी में विश्व धरोहर स्थल साँची और भीमबेटका हैं । जबकि भोजपुर में शिव मन्दिर और सलकनपुर में माता बिजासन विराजित हैं ।


उज्जैन का तापमान 🚩🚩🚩


उज्जैन का तापमान गर्मियों में 40 डीग्री के आसपास जबकि शीत ऋतु में 10 से 12 डिग्री के बीच रहता हैं । वर्षा यहाँ सामान्य ही होती हैं ।


2 सित॰ 2018

18 वे एशियाई खेल 2018 में भारत के पदक विजेता खिलाडी





इंडोनेशिया में आयोजित 18 वे एशियाई खेलों में भारत ने एशियाई खेलों के इतिहास का अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया हैं । भारत ने तीनों पदकों को मिलाकर कुल 69 पदक प्राप्त किये हैं ,इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सन 1951 नई दिल्ली एशियाई खेलों में आया था तब भारत ने कुल 51 पदक प्राप्त किये थे ।

इंडोनेशिया में हुए 18 वे एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण ,रजत और कांस्य पदक विजेता खिलाडी जिन्होंने अपने प्रदर्शन से भारत का मान बढ़ाया हैं ।


18 वे एशियाई खेल 2018 में भारत के पदक विजेता खिलाडी:::


🏅स्वर्ण पदक 🏅 प्राप्तकर्ता खिलाड़ी और टीम

1.🏅बजरंग पुनिया 🏅
Kusti
 Bajrang punia

खेल👉कुश्ती 



बजरंग पुनिया ने 18 वे एशियाई खेलों में कुश्ती प्रतियोगिता में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। बजरंग पुनिया ने फ्री स्टाइल कुश्ती के  65 किलोग्राम भारवर्ग में खेलतें हुए फाइनल मुकाबले में जापान के पहलवान दाइची तकतानी को 11 के मुकाबले 18 अंको से पटखनी देते हुए स्वर्ण पदक अपने कब्जे में किया ।

बजरंग पुनिया ने सन 2014 में हुए इंचियोन एशियाई खेलों में भी 61 किलोग्राम भारवर्ग कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। 

18 वे एशियाई खेलों में भारत को प्राप्त यह पहला स्वर्ण पदक था जिसके बदौलत भारत ने पदक तालिका में अपना खाता खोला था।


2. 🏅विनेश फोगाट 🏅

Mahila kusti
 Vinesh fogat


खेल👉फ्री स्टाइल कुश्ती 

विनेश फोगाट ने महिला कुश्ती के 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल भारवर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया ।उन्होंने फाइनल मुकाबले में जापान की पहलवान इरी युकी को 6 के मुकाबले 2 अंको से हराया।

विनेश फोगाट एशियाई खेलों के इतिहास में कुश्ती का स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला हैं ।
इससे पहले विनेश फोगाट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीत चुकी हैं,इन्होंने सन 2014 में हुए इंचियोन एशियाई खेलों में भी कांस्य पदक जीता था।

इस बार के एशियाई खेलों में विनेश अपने पदक को स्वर्ण में बदलने में सफल हुई हैं।




० मध्यप्रदेश सामान्य अध्ययन


3.🏅सौरभ चौधरी 🏅

Rifleman
 Sourbh choudhry


खेल👉10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी 🎯🎯🎯



सौरभ चौधरी ने 18 वे एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता । सौरभ चौधरी की यह उपलब्धि इसलिये महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सौरभ अभी मात्र 16 साल के ही हैं। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले भारत के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं,इनसे पूर्व जसपाल राणा ने सन 1994 हिरोशिमा एशियाई खेलों में निशानेबाजी का स्वर्ण पदक प्राप्त किया था उस समय उनकी उम्र 18 वर्ष थीं।

सौरभ चौधरी ने एशियाई खेलों का रिकार्ड कायम करते हुए 18 वे एशियाई खेलों में 240.7अंक प्राप्त किये । 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी का काँस्य पदक भी भारत के अभिषेक वर्मा ने 219.3अंको के साथ जीता ।


4.🏅राही जीवन सरनोबत🏅

Shooter
 Rahi jivan sarnobat

खेल👉25 मीटर पिस्टल निशानेबाजी 🎯🎯🎯



राही जीवन सरनोबत ने 18 वे एशियाई खेलों में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल निशानेबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक प्राप्त किया ।ऐसा करने वाली वे भारत की पहली महिला निशानेबाज हैं । 

 थाईलैंड की Nafasvan yangpaibun और राही जीवन सरनोबत के फाइनल मुकाबले में बराबर बराबर 34 अंक थे ,ऐसे में मुकाबला शूटआउट तक खींचा और राही जीवन सरनोबत ने मुकाबला 3 - 2 से जीत लिया ।

राही जीवन सरनोबत ने सन  2012 लन्दन ओलंपिक में भी इतिहास बनाया था ,वे 25 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता में भाग लेने वाली पहली भारतीय ओलम्पियन महिला हैं ।हालांकि ओलंपिक में उन्हें सफलता नहीं मिली थीं और वह इस प्रतियोगिता में 19 वे स्थान पर रही थीं ।


5. 🏅🏅रोहन बोपन्ना और दिविज शरण🏅🏅

एशियाई खेल
 क्रमशः बाँये से दाँये रोहन बोपन्ना और दिविज शरण 


खेल 👉 पुरुष युगल टेनिस 🎾🎾


टेनिस के पुरुष युगल मुकाबले में भारत के इन दोनों जोड़ीदारों ने कजाकिस्तान के अलेक्सन्द्रन बुबलिक तथा डेनिस एवसेवेय को 52 मिनिट चले संघर्ष में 6 - 3, 6- 4 से हराकर  स्वर्ण पदक 🎖🎖 पर कब्ज़ा जमाया । इसके पूर्व एशियाई खेलों में भारत पाँच बार ( 1994,2002,2006,2011)पुरुष युगल टेनिस प्रतियोगिता का स्वर्ण जीत चुका हैं ।

रोहन बोपन्ना ने एशियाई खेलों में पहली बार स्वर्ण पदक 🎖 जीता हैं,जबकी दिविज शरण इंचियोन एशियाई खेल 2014 में युकी भांबरी के साथ कांस्य पदक जीत चुके हैं ।



6.स्वर्ण सिंह, दत्तू भोनाकल,ओमप्रकाश और सुखमित सिंह🏅🏅🏅🏅


खेल 👉 पुरुषों की क्वॉड्रपल स्कलस नोकायन प्रतियोगिता 🚣🚣🚣




भारत के इन चारों खिलाड़ियों ने 6.17.13 सेकंड का समय निकालकर प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक 🎖🎖🎖🎖 अपने नाम किया ।



 7.🏅तेजेंदरपाल सिंह तूर 🏅

एशियाई खेल
 तेजेंदरपाल सिंह तूर

खेल 👉 गोलाफेंक ( शॉटपुट )


भारतीय नोसेना में काम करने वाले तेजेंद्रपाल ने 20.75 मीटर गोला फेंककर एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक 🏅 अपने नाम किया। तेजेंद्रपाल ने सन 2017 की एशियाई चेम्पियनशिप में रजत पदक जीता था ।

एशियाई खेलों के इतिहास में तेजेंद्रपाल से पहले मदनलाल (1951),प्रदुमन सिंह ( 1954,1958),जोगिंदर सिंग (1966,1970), बहादुर सिंह चौहान ( 1978,1982),और बहादुर सिंह सांगू ( 2002 ) इस खेल में भारत के लिये स्वर्ण पदक 🏅जीत चुके हैं ।



8.🏅 नीरज चोपड़ा 🏅


खेल 👉भालाफेंक 


एथलीट नीरज चोपड़ा ने 18 वे एशियाई खेलों में भालाफेंक स्पर्धा का स्वर्ण पदक 🎖 जीतकर देश को गौरान्वित किया । नीरज चोपड़ा ने 88.06 मीटर तक भाला फेंक कर यह सफ़लता प्राप्त की ।

नीरज चोपड़ा एशियाई खेलों में भालाफ़ेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रथम भारतीय हैं ।इससे पूर्व  नई दिल्ली एशियन खेल सन 1982 में भालाफेंक प्रतियोगिता का कांस्य पदक जीता गया था ,जो गुरतेज सिंह ने जीता था ।



नीरज चोपड़ा भारत के उभरते युवा एथलीट हैं जिन्होंने एक ही वर्ष में कॉमनवेल्थ और एशियन चेम्पियन में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर मिल्खा सिंह के 60 वर्ष पुराने रिकॉर्ड की बराबरी की।

नीरज चोपड़ा 18 वे एशियाई खेलों के शुभारंभ समारोह में भारत के ध्वजवाहक थे ।



9.🏅मनजीत सिंह 🏅


खेल👉 800 मीटर पुरुष दौड़



मनजीत सिंह ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ प्रतियोगिता को 1 मिनिट 46.15 सेकंड में जीतकर स्वर्णपदक 🏅अपने नाम किया । इस प्रतियोगिता का रजत भी भारत ने जीता था ।



10.🏅अरपिंदर सिंह 🏅


खेल 👉 एथलीट पुरुष तिहरी कूद


अरपिंदर सिंह ने 16.77 मीटर छ्लांग लगाकर इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक 🏅 भारत की छोली में डाला । अरपिंदर से पहले महिंदर सिंह ने सन 1977 में इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता था ।


11. 🏅स्वपना बर्मन 🏅


खेल 👉 हेप्टाथलान 


स्वप्ना भारत की पहली महिला एथलीट हैं जिन्होंने एशियाई खेलों में इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक 🏅 प्राप्त किया । 

उन्होंने इस प्रतियोगिता में  लंबी कूद में  865 अंक, 100 मीटर दौड़ में 981 अंक, ऊँची कूद में 1003 अंक ,शॉटपुट में 707 अंक ,200 मीटर दौड़ में 790 अंक, भालाफेंक में 872 अंक ,और 800 मीटर दौड़ में 808 अंक हासिल किये इस तरह कुल 6026 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया ।

इससे पूर्व स्वप्ना ने सन 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में पांचवा स्थान हासिल किया था ।




12.🏅 जिनसेन जानसन🏅 


खेल 👉 एथलीट 1500 मीटर पुरुष दौड़ 🏃🏃🏃



जिनसेन जानसन ने 1500 मीटर पुरुष दौड़ में 3.44.72 मिनिट का समय निकालकर इस प्रतियोगिता के स्वर्ण पदक 🏅 पर कब्जा जमाया ।जॉनसन ने  इन्हीं खेलों में 800 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता था ।


13.हिमा दास ,एम . आर.पूवम्मा, सरिता बेन गायकवाड़, विस्मय वेलुवा कोरथ 🏅🏅🏅🏅


खेल👉 4× 400 मीटर महिला रिले दौड़ 🏃🏃🏃🏃



भारत की इन चारों महिला एथलीटों ने 3.28.72 सेकंड का समय निकालकर इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक 🏅🏅🏅🏅 भारत की छोली में डाला ।



14.🏅अमित पंघल🏅


खेल👉मुक्केबाजी पुरूष 49 किलो भारवर्ग


अमित ने उज्बेकिस्तान के हसनबोय दुसटोमोव को फाइनल मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक 🏅 अपने नाम किया।अमित ने इस साल गोल्ड कास्ट राष्ट्रमंडल में रजत पदक जीता था ।


15.🏅शिवनाथ सरकार और प्रणव वर्धन 🏅


खेल👉ब्रिज (ताश)

एशियाई खेलों में पहली बार शामिल इस खेल में भारत ने स्वर्ण पदक🏅जीतकर ऐतिहासिक शुरुआत की ।




रजत पदक विजेता खिलाडी और टीम 



1.लक्ष्य शेरॉन 


खेल 👉 निशानेबाजी 📍 पुरुष ट्रेप प्रतियोगिता


पुरुष निसनेबाजी की ट्रैप प्रतियोगिता में लक्ष्य शेरोन ने 43 अंक प्राप्त कर रजत पदक प्राप्त किया ।


2.दीपक कुमार 


खेल 👉 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाजी 💂


18 वे  एशियाई खेलों में 33 साल के दीपक कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में 247.7 अंकों के साथ रजत पदक जीता । दीपक कुमार इसके पूर्व 2018 ISSF विश्व कप में 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम प्रतियोगिता में मेहुली घोष के साथ काँस्य पदक जीता था ।

दीपक ने 2017 के ब्रिस्बेन राष्ट्रमंडल खेलों में भी काँस्य पदक जीता था ।


3.🎯संजीव राजपूत 🎯


खेल 👉 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन 💂


संजीव राजपूत ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में 452.7 अंक प्राप्त कर प्रतियोगिता में रजत पदक प्राप्त किया । संजीव राजपूत स्वर्ण पदक विजेता चीनी खिलाड़ी से मात्र 1 अंक पीछे रहे ।

4. 🎯शार्दुल विहान 🎯


खेल 👉 डबल ट्रेप पुरुष निशानेबाजी


शार्दुल विहान ने एशियाई खेलों की डबल ट्रैप प्रतियोगिता में रजत पदक जीता । मात्र 15 वर्ष के शार्दुल विहान एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले भारत के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं ।

शार्दुल विहान ने 73 अंक प्राप्त किये जबकि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 34 साल के कोरियाई खिलाड़ी हुन वे शिन ने 74 अंक प्राप्त किये ।


5. महिला कबड्डी टीम 🏃🏃🏃🏃🏃


भारत की महिला कबड्डी टीम ने सन 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था किंतु इस बार पायल चौधरी की कप्तानी वाली टीम ईरान से 3 अंको से हार गयी और रजत पदक से संतोष प्राप्त करना पड़ा । 

6. फ़वाद मिर्जा


खेल 👉 घुड़सवारी 🏇🏇🏇


भारत के फ़वाद मिर्जा ने व्यक्तिगत जम्पिंग घुड़सवारी प्रतियोगिता में 26.40 का स्कोर बनाकर रजत पदक जीता । फ़वाद से पहले आखरी व्यक्तिगत पदक सन 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में जीता गया था ।तब रघुवर सिंह ने स्वर्ण , गुलाम मोहम्मद खान ने रजत और प्रहलाद सिंह ने काँस्य पदक जीते थे ।

फ़वाद मिर्जा ने घुड़सवारी की टीम प्रतियोगिता का रजत पदक भी जीत कर देश का नाम रोशन किया हैं ।



7.घुड़सवारी टीम 🏇🏇🏇🏇


भारत के फ़वाद मिर्जा , राकेश कुमार,आशीष मलिक और जितेंद्र सिंह की चौकड़ी ने 121.30 का स्कोर कर इस प्रतियोगिता का रजत पदक प्राप्त किया ।


8.दुति चन्द 


खेल 👉 100 मीटर महिला दौड़ 🏃🏃🏃🏃


भारत की फर्राटा धावक दुति चन्द ने 100 मीटर की रेस 11.32 सेकंड में पूरी करते हुए रजत पदक जीता वे मात्र 0.2 सेकंड के अंतर से स्वर्ण पदक चूक गयी । 

भारत एशियाई खेलों के 100 मीटर महिला दौड़ में 20 साल बाद पदक जीत सका हैं 


9.हिमा दास 🏃


खेल 👉 400 मीटर महिला दौड़


18 साल की हिमा दास ने 400 मीटर दौड़ में 50.79 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता । हिमा से पहले सन 2006 एशियाई खेलों में मनजीत कौर ने 400 मीटर का रजत पदक जीता था ।




10. मोहम्मद अनस 🏃


खेल 👉 400 मीटर पुरुष दौड़ 🏃🏃🏃


मोहम्मद अनस ने इस प्रतियोगिता में 45.69 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक प्राप्त किया ।अनस ने एशियाई चेम्पियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था । किंतु एशियाई खेलों में यह उनका पहला पदक हैं ।




11.धरून अय्यासमी 🏃


खेल 👉 400 मीटर बाधा दौड़ 🏃🏃🏃🏃


21 साल के धरून अय्यासमी ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 48.96 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता ।


12.सुधा सिंह 🏃


खेल 👉 महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज 


सुधा सिंह ने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीलपलचेज प्रतियोगिता में 9 मिनिट 40.03 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक प्राप्त किया । सुधा ने सन 2010 एशियाई खेलों में इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता था ।


13.मीना वरकिल 


खेल 👉 महिलाओं की लम्बी कूद


महिलाओं की लंबी कूद प्रतियोगिता में भारत की एथलीट सुधा सिंह ने 6.51 मीटर की छ्लांग लगाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया ।




14.मुस्कान किरार,मधुमिता कुमार और ज्योति सुरेखा 🏹🏹🏹



खेल 👉 कंपाउंड महिला तीरंदाजी टीम प्रतियोगिता🏹🏹🏹


भारत की इस तिकड़ी ने 18 वे एशियाई खेलों में सेमीफाइनल में चाइनीज ताइपे को 225 के मुकाबले 222 अंको से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था किंतु यह तिकड़ी फाइनल में कोरीयन टीम से 231 के मुकाबले 228 अंको से हार गई और इस तरह भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा ।


15.रजत चौहान,अमान सैनी और अभिषेक वर्मा 🏹🏹🏹



खेल 👉 पुरुष कंपाउंड तीरंदाजी टीम प्रतियोगिता 🏹🏹🏹


भारत की  पुरुष तीरंदाजी टीम ने कोरिया की टीम के साथ फाइनल में बराबर 229 - 229 का स्कोर बनाया किन्तु शूटआउट में हुए मुकाबले में कोरियाई खिलाड़ी भारत पर भारी पड़े इस तरह भारत रजत पदक जीत सका ।
सन 2014 में हुए इंचियोन एशियाई खेलों में भारत ने इस वर्ग में स्वर्ण पदक 🏅 जीता था ।


16.पिंकी बलहारा 


खेल 👉 कुराश 💃💃💃


कुरास उज्बेकिस्तान का पारम्परिक खेल हैं । यह मार्शल आर्ट्स की तरह खेला जाता हैं । भारतीयों के लिये अनजान इस खेल में पिंकी बलहारा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को रजत पदक दिलाया ।

17.जिनसेन जानसन 

खेल 👉 पुरुष 800 मीटर दौड़



जिनसेन जॉनसन ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में 1 मिनिट 46.15 का समय निकालकर रजत पदक जीता । इस प्रतियोगिता का स्वर्ण भारत के मनजीत सिंह के नाम रहा ।

सन 1962 के बाद यह दूसरा अवसर हैं जब इस प्रतियोगिता का स्वर्ण और रजत भारत के खाते में गया । जबकि इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पिछ्ली बार सन 1982 में चार्ल्स बरामओ ने जीता था ।




18.पी.वी.सिन्धु 🏸🏸🏸


खेल 👉 बेडमिंटन 🏸🏸🏸


भारत की स्टार शटलर सिन्धु ने एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार महिला एकल का रजत पदक दिलाया । फाइनल मुकाबले में सिन्धु को स्वर्ण जितने वाली चीनी ताइपे की खिलाड़ी ताई जु यिंग ने 13 -21,16-21, से हराया । इससे पहले ताई ने सेमीफाइनल मैच में साइना नेहवाल को भी शिकस्त दी थी ।
 एशियाई खेलों के इतिहास में व्यक्तिगत महिला बेडमिंटन प्रतियोगिता में रजत और काँस्य जितने वाली सिन्धु और साइना पहली भारतीय खिलाड़ी हैं ।


19.हिमा दास,पूवाना राजू माचेत्रा,मोहम्मद अनस और राजीव अरोकिया

🏃🏃🏃🏃

खेल 👉 मिश्रित रिले दौड़ 🏃 4 गुणा 400 मीटर 


एशियाई खेलों में प्रथम बार शामिल इस खेल में भारत की महिला पुरुष मिश्रित इस टीम ने 3 मिनिट 15.17 सेकंड का समय निकालकर रजत जीता । इस प्रतियोगिता का स्वर्ण बहरीन के खाते में गया ।



20.दुति चन्द 🏃


खेल 👉 200 मीटर महिला दौड़ 🏃


दुति चन्द का 18 वे एशियाई खेलों में यह दूसरा रजत पदक था । उन्होंने 23.20 सेकंड में यह  दूरी तय करी । 



21.मोहम्मद कुंहु, पृथानपुराकाल,धरून अय्यासामी,मोहम्मद अनस, और अरोकिया राजीव 


खेल 👉 4 गुणा 400 मीटर पुरुष रिले दौड़


भारत के इन चारों खिलाड़ियों ने 3 मिनिट 01.85 सेकेंड का समय निकालकर देश की छोली में रजत पदक डाला ।




22.भारतीय महिला हॉकी टीम 🏑🏑🏑




भारतीय महिला हॉकी टीम सन 1982 में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों में फाइनल खेली थी । और स्वर्ण पदक जीता था । 18 वे एशियाई खेलों में 36 साल बाद भारतीय महिला टीम फाइनल में पहुँची लेकिन जापान के हाथों से 1 के मुकाबले 2 गोल से हार गयी । इस तरह भारत ने इस प्रतियोगिता में रजत प्राप्त किया । भारतीय महिला हॉकी टीम ने सन 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में काँस्य पदक जीता था ।




23.श्वेता शेरवेगर और वर्षा गौतम 


खेल 👉 सेलिंग 🚣🚣 


महिलाओं की 49 ER FX प्रतियोगिता में इन दोनों खिलाड़ियों ने 15 रेस में 44 अंक और कुल 40 नेट अंक प्राप्त कर रजत पदक प्राप्त किया ।

24.जोशना चिन्नपा और सुनयना कुरुविल्ला

खेल👉स्कवैश महिला युगल

महिला  टीम को फाइनल में हांगकांग की महिला टीम ने 2-0 से हराकर रजत पदक पर रोक दिया ।



काँस्य पदक प्राप्तकर्ता खिलाडी और टीम 





1.रवि कुमार और अपूर्वी चंदेला 



खेल 👉 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित वर्ग 🎯🎯


इस वर्ग में इन दोनों खिलाड़ियों ने 429.9 अंको के साथ काँस्य पदक प्राप्त किया ।अपूर्वी चंदेला इससे पहले सन 2014 कामनवेल्थ खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक 🏅 जीता था ,जबकि रवि कुमार ने सन 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था ।



2.दिव्या काकरान 


खेल👉  महिला कुश्ती 💃



दिव्या काकरान ने 68 किलो ग्राम मुकाबले में मात्र 1 मिनिट 29 सेकंड में ताइपे की वेनलिंग चेन को 10 - 0 से हराकर काँस्य पदक प्राप्त किया ।



3.अभिषेक वर्मा 


खेल👉 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी 🎯🎯🎯



भारत के अनुभवी खिलाड़ी अभिषेक वर्मा ने इस प्रतियोगिता में काँस्य पदक जीतकर देश का नाम एशियाई खेलों में रोशन किया इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी भारत के सौरभ चौधरी ने जीता ।ये दोनों खिलाडी उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं ।



4.सेपक तकरा टीम


भारत ने पहली 18 वे एशियाई खेलों में  पहली बार इस प्रतियोगिता का कोई पदक जीता हैं । भारत सेमीफाइनल में थाईलैंड से 0-2 से हार गया इस वज़ह से उसे काँस्य पदक मिला ।


5.सन्तोष कुमार 


खेल👉वुशु 56 किलोग्राम पुरुष वर्ग


सन्तोष कुमार ने 56 किलोग्राम भारवर्ग में काँस्य पदक प्राप्त किया । उन्हें सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा । सेमीफाइनल में उन्हें वियतनाम के तुयांग्जियांग बूई ने 2-0 से पराजित किया ।


6.सूर्यभानु प्रताप सिंह 


खेल👉 वुशु 60 किलोग्राम पुरूष वर्ग 



सूर्यभानु प्रताप सिंह ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में वुशु में भारत को काँस्य पदक दिलाया । सेमीफाइनल में उन्हें ईरान के इरफ़ान अहंगेरियन ने 2-0 से हराया ।


7.नरेंद्र ग्रेवाल 


खेल👉वुशु 65 किलोग्राम पुरुष वर्ग


नरेंद्र ग्रेवाल को सेमीफाइनल में ईरान के फोरोद जाफ़री ने 2-0 से हरा दिया इस तरह उन्हें काँस्य पदक से सन्तोष करना पड़ा । नरेंद्र ग्रेवाल को सन 2014 में इंचियोन एशियाई खेलों में भी काँस्य पदक प्राप्त हुआ था ।


8.नायरेम रोशबीना देवी 


खेल👉वुशु 60 किलोग्राम महिला वर्ग


रोशबीना देवी को सेमीफाइनल में चीन की यिंगयींग कई से 0 -1 से हार का सामना करना पड़ा ।



9.अंकिता रैना 


खेल👉टेनिस 🎾🎾🎾 महिला एकल


अंकिता रैना  दूसरी महिला खिलाडी हैं जिन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में भारत को पदक दिलाया हैं,इससे पहले सन 2006 में सानिया मिर्ज़ा ने रजत पदक और सन 2010 एशियाई खेलों में काँस्य पदक जीता था । 

अंकिता को सेमीफाइनल मुकाबले में चीन की सुहाई चेंग ने 6-4,7-6  (8-6)से हराया इस तरह उन्हें काँस्य से सन्तोष करना पड़ा । 


10. पुरुष कबड्डी टीम 🎴🎴🎴


एशियाई खेलों में सन 1990 से लगातार स्वर्ण पदक जीत रहे भारत का विजयी रथ ईरान ने 18 वे एशियाई खेलों में ईरान के हाथों रुक गया । ईरान ने सेमीफाइनल के मुकाबले में भारत को 27 -18 से हराया । इस तरह भारत को काँस्य पदक से सन्तोष करना पड़ा ।


11.रोहित कुमार और भगवान सिंग 


खेल👉नोकायन लाइटवेट पुरुष युगल स्कल🚣🚣


नोकायन की पुरुष युगल लाइटवेट स्कल प्रतियोगिता में इन दोनों खिलाड़ियों ने 7 मिनिट 04.61 सेकंड का समय लेकर काँस्य पदक प्राप्त किया ।


12.दुष्यन्त कुमार


खेल👉नोकायन पुरुष एकल स्कल


भारतीय सेना के दुष्यन्त कुमार ने बीमार होने के बावजूद प्रतियोगिता में भाग लिया और 7 मिनिट 18.76 सेकंड का समय निकालकर देश को काँस्य पदक दिलाया । प्रतियोगिता समाप्त करने के बाद इन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा ।


13.हिना सिद्दू 


खेल👉10 मीटर  महिला एकल एयर राइफल शूटिंग 🎯


हिना ने 219.2 का स्कोर बनाकर इस प्रतियोगिता का काँस्य अपने नाम किया 


14.प्रजनेश गुणेश्वरम 


खेल👉टेनिस 🎾पुरुष एकल


प्रजनेश गुणेश्वरम ने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतकर एशियाई खेलों में अपनी चमक बिखेरी । उन्हें सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी डेनिस इस्टोमिन से 6-2,6-2 से हार का सामना करना पड़ा ।




15.दीपिका पल्लीकल 



खेल👉स्क्वैश महिला एकल 


दीपिका पल्लीकल ने सेमीफाइनल में हार के साथ 18 वे एशियाई खेलों में काँस्य पदक जीता । दीपिका को मलेशिया की निकोल डेविड ने 11-7,11-9,11-6 से पराजित किया ।
दीपिका ने 2014 एशियाई खेलों में भी काँस्य पदक जीता था ।



16.जोशना चिन्नपा 


खेल👉स्कवैश महिला


स्कवैश खिलाडी जोशना चिन्नपा को मलेशिया की खिलाड़ी शिवसंगरी सुब्रमण्यम से 3-1 से हारकर काँस्य प्राप्त हुआ ।



17.सौरभ घोषाल 


खेल👉 स्कवैश पुरूष एकल


सौरभ ने सन 2014 एशियाई खेलों में व्यक्तिगत मुकाबले में रजत जीता था किन्तु इस बार उन्हें हांगकांग के मिंग चुंग से 3-2 से हारकर काँस्य से सन्तोष करना पड़ा ।



18.ब्रिज (ताश)मिश्रित टीम


भारत की महिला और पुरुषों की मिश्रित टीम ने इस प्रतियोगिता का काँस्य पदक जीता ।  पहली बार एशियाई खेलों में शामिल ब्रिज टीम में किरण नादर,सत्यनारायण बचिराजू,हेमा देवरा,गोपीनाथ मन्ना, हिमानी खण्डेलवाल और राजीव खण्डेलवाल शामिल थे ।


19.ब्रिज पुरुष टीम


जग्गी शिवदासानी,राजेश्वर तिवारी,सुमित मुखर्जी,देबब्रत मजूमदार,राजू तोलानी,और अजय खड़े की पुरुष टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया । इस टीम को सिंगापुर से पराजय मिली ।






20.साइना नेहवाल


खेल👉टेनिस 🎾 महिला एकल


साइना नेहवाल को एशियाई खेलों में कांस्य पदक प्राप्त हुआ । साइना सेमीफाइनल मुकाबले में चीनी ताइपे की ताई जू यिंग से 17-21,14-21 से हार गई और उन्हें काँस्य पदक से सन्तोष करना पड़ा । साइना का एशियाई खेलों में यह पहला पदक हैं ।



21. अचंता सरथ कमल , साथियांन गनशेखरण


खेल👉टेबल टेनिस 🏓🏓 पुरुष युगल


एशियाई खेलों के इतिहास में टेबल टेनिस प्रतियोगिता में भारत को प्राप्त यह पहला पदक काँस्य पदक के रूप में  मिला हैं। सेमीफाइनल में अचंता शरथ कमल को दक्षिण कोरिया के सिक योंग जियोंग ने हराया वही गनशेखरण को सान्ग ली ने पराजित किया।

टेबल टेनिस सन 1958 के एशियाई खेलों में शामिल हुआ था ।



22. मलप्रभा जाधव



खेल👉कुराश


मलप्रभा को 52 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक मिला इस प्रतियोगिता का रजत भी भारत की पिंकी बलहारा को मिला है।


23.अचंता शरथ कमल और मनिका बत्रा



खेल👉टेबल टेनिस ,🏓🏓 मिश्रित युगल



टेबल टेनिस मिश्रित युगल में भारत को चीन से सेमीफाइनल में पराजय मिली ।चीन के वांग चुकींन और सुन यंग्स ने  सेमीफाइनल में इस जोड़ी को 4-1 से पराजित कर काँस्य पदक पर रोक दिया । अचंता शरथ कमल ने इसके पहले पुरुष युगल में भी कांसा जीता था ।


24.सीमा पुनिया


खेल👉डिस्कस थ्रो 🎱🎱🎱


सीमा पुनिया ने 61.03 मीटर डिस्कस फेंककर कांसा जीता । इसके पहले सीमा पुनिया ने 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

इस साल के राष्ट्रमण्डल खेलों में भी सीमा रजत पदक जीत चुकी हैं ।


25.चित्रा उन्नीकृष्णन 


खेल👉एथलीट 1500 मीटर दौड़ 🏃


चित्रा ने चार मिनिट 12.56 सेकंड में 1500 मीटर दौड़ पूरी कर काँस्य पदक अपने नाम किया ।




26.विकास कृष्णन


खेल👉 मुक्केबाजी 75 किलोग्राम भारवर्ग पुरुष 👊👊👊


विकास ऐसे पहले भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्होंने लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीते हैं । इस बार विकास सेमीफाइनल में अपनी लड़ाई के पहले ही अपनी आंखों की चोट की वजह से अयोग्य करार दिये गये और काँस्य पदक ही जीत पाये ।


27.अशोक ठक्कर और के .सी.गणपति


खेल👉नोकायन 49 ER पुरुषवर्ग 


अशोक और गणपति ने 53 अंक और 43 नेट अंक लेकर इस प्रतियोगिता का  काँस्य पदक प्राप्त किया ।


28.हर्षिता तोमर 


खेल👉नोकायन ओपन लेजर 4.7 


16 साल की हर्षिता तोमर ने लड़कों को हराते  हुए काँस्य पदक जीता । इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक मलेशिया के पुरुष मोहम्मद फाजी ने जबकि रजत चीन के वांग जिन्जंग ने जीता ।



29.भारतीय पुरुष हॉकी टीम 🏑🏑🏑


भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पाकिस्तान को 2-1 से  हराकर इस प्रतियोगिता का काँस्य जीता ।



30.भारतीय पुरुष स्कवैश टीम


भारतीय पुरुष स्कवैश टीम ने काँस्य पदक जीतकर इस प्रतियोगिता में अपने कुल पदकों की संख्या 5 कर ली 



खेल आधारित पदक :::


1.एथलेटिक्स 


🏅स्वर्ण पदक  🏅     👉 7


 🎖रजत पदक 🎖👉     10


     काँस्य पदक    👉     02


2.निशानेबाजी 


🏅स्वर्ण पदक 🏅 👉 02


🎖 रजत पदक 🎖 👉 04


      काँस्य पदक 👉     03



3. कुश्ती 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅 👉 02


🎖रजत पदक 🎖 👉 02


     काँस्य पदक   👉   01


4.नोकायन 


🏅स्वर्ण पदक 🏅👉 01


🎖रजत पदक 🎖 👉 00


    काँस्य पदक 👉 02


5.टेनिस 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 01


🏅 रजत पदक 🏅 👉 00


    काँस्य पदक 👉 02


6.तीरन्दाजी


🏅स्वर्ण पदक 🏅 👉 00


🎖रजत पदक 🎖 👉02


   काँस्य पदक 👉 00


7.घुड़सवारी


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 00


🎖रजत पदक 🎖👉 02

  

     काँस्य पदक 👉 02


8.सेलिंग 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 00


🎖 रजत पदक 🎖👉 01


     काँस्य पदक 👉 02


9.बैडमिंटन 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 00


🎖रजत पदक 🎖 👉 01


     काँस्य पदक 👉 01


10.कबड्डी


🏅 स्वर्ण पदक 🏅 👉 00


🎖रजत पदक🎖👉 01


     काँस्य पदक 👉 01



11.कुराश 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅 👉 00


🎖रजत पदक 🎖👉 01


    काँस्य पदक 👉 01



12.स्कवैश 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉00


🎖रजत पदक 🎖 👉 01


     काँस्य पदक 👉 04



13.वुशू


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 00


🎖रजत पदक 🎖👉 00


    काँस्य पदक 👉 04


14.हॉकी 


🏅 स्वर्ण पदक 🏅👉 00


🎖रजत पदक 🎖👉01


    काँस्य पदक 👉 01


15.ब्रिज 


🏅स्वर्ण पदक 🏅👉01


🎖रजत पदक🎖👉00


  काँस्य पदक 👉 02


16.टेबल टेनिस 


🏅स्वर्ण पदक🏅👉 00


🎖रजत पदक🎖👉00


   काँस्य पदक 👉 02


17.मुक्केबाजी


🏅स्वर्ण पदक 🏅👉01


🎖रजत पदक 🎖👉00


    काँस्य पदक👉01


18.सेपक टकरा


🏅स्वर्ण पदक 🏅👉00


🎖रजत पदक🎖👉00


   काँस्य पदक 👉01


० अटल बिहारी वाजपेयी




























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