गुरुवार, 30 जून 2016

बैंगन के ऐसे अचूक फायदे जिनको जाननें के बाद आप बैंगन खाना कभी नही भूलोगे

#बैंगन का परिचय :::

बैंगन भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण भाग हैं,सदियों से यह सब्जी और अनेक व्यंजन के रूप में भारतीय रसोई में मोजूद हैं.

आयुर्वैद में इसे औषधि के रूप में मान्यता प्राप्त हैं.वैसे तो बैंगन की कई किस्में मोजूद हैं किन्तु तीन चार प्रकार का बैंगन ही खानें और औषधिगत उपयोग के लियें महत्वपूर्ण हैं.जिनमें लम्बा बैंगन,गोल बैंगन,हरा बैंगन और सफेद बैंगन प्रमुख हैं.इसका पौधा 25 से 30 इंच लम्बा और कांटेदार होता हैं.

#प्रकृति 

बैंगन गर्म प्रकृति का होता हैं.

गोल बैंगन
बैंगन

#पोषणीय महत्ता (nutrition value)


कार्बोहाइड्रेट.        प्रोटीन.         कोलेस्ट्राल.          5.7 gm.           1 gm.            00 

फाइबर.                एनर्जी              वसा.        
3.4 gm.                24 kcl.          0.19 mg

विटामिन A.           थायमिन.       राइबोफ्लोविन
27 I.U.                 0.039 mg.      0.037 mg

पाइरीडाँक्सीन.     पेन्टा.एसिड़     नियासिन

0.084 mg.               0.282 mg.   0.650 

फोलिक एसिड़         विटामिन C.    विटामिन E.   22 mcg                  2.2 mg.      0.30 mg

विटामिन k.             सोड़ियम.        पोटेशियम
3.5 mcg                   2 mg.           230 mg

कैल्सियम.                काँपर.          आयरन.        9 mg.                  0.082mg.      0.35 mg

मैग्नीशियम.                  जिंक
14 mg.                  0.16 mg (प्रति 100 gm)

इन सब के अलावा बैंगन में फ्री रेड़ीकल,पानी,और फाइटोन्यूट्रीयन्ट्र पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहते हैं.

#औषधिगत उपयोग:::

:::: पेट से संबधित समस्यओं बैंगन रामबाण औषधि हैं,यदि पाचन सम्बंधित समस्या हैं तो बैंगन भूनकर काला नमक मिला लें इसे भोजन के साथ चट़नी की तरह उपयोग करें, कुछ दिन सेवन करनें समस्या समाप्त हो जावेगी.

:::: पथरी होनें पर कच्चा बैंगन का जूस बनाकर नियमित सेवन करतें रहें .

::: टाइफाँइड़ होनें पर कच्चा बैंगन मिश्री मिलाकर 10 से 20 ग्राम सुबह शाम खायें.

:::: लू (heat stroke) लगनें पर कच्चें बैंगन का रस हाथ,पैर के तलुओं तथा हाथों की कलाई पर लगा दें तुरन्त आराम मिलता हैं.

:::: चोंट़ ,मोंच आ जानें की शर्तिया दवा बैंगन हैं,इसके लियें बैंगन को भूनकर नमक,हल्दी, और दही मिलाकर मोंच वालें स्थान पर बाँध दें.

:::: बैंगन "मस्तिष्क आहार" हैं.इसके सेवन से स्मरण शक्ति तीव्र बनती हैं.

::::  इसमें पाया जानें वाला फायबर कब्ज, एसीडीटी जैसी समस्या को समाप्त करता हैं.

:::: बैंगन में पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में होता हैं,जो कोलेस्ट्राल (cholesterol) के कारण अवरूद्ध हुई धमनियों की सफाई का काम करता हैं.

::::  गठिया (arthritis) में जोड़ों में जमनें वाला विषेला पदार्थ बैंगन में उपस्थित फ्री रेड़ीकल और पानी शरीर से बाहर निकलता हैं.

:::: इसमें उपस्थित सोड़ियम रक्त दबाव (blood pressure) को नियमित करनें में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.इसके लियें बैंगन भूनकर ज़रूर सेवन करें.

::::  मधुमेह (Diabetes) में बैंगन का डंठल सूखाकर बारीक चूर्ण बनाकर गिलोय रस के साथ सेवन करें.

:::: बवासीर (piles) में इसका सेवन संयमित रूप में करना चाहियें,क्योंकि यह उष्ण प्रकृति का होता हैं.

:::: बहरापन आनें पर गोल बैंगन को भूनकर उसकी भाप कान में लें बहुत फायदा मिलता देखा गया हैं.

:::: पेट में कृमि होनें पर बच्चों को इसका रस शहद में मिलाकर दें.

:::: अस्थमा के मरीज को बैंगन का भुर्ता बनाकर उसमें लोंग,काली मिर्च,सौंठ,तुलसी मिलाकर सेवन करना चाहियें.

देखा दोस्तों सामान्य सा दिखनें वाला बैंगन कितनें विशिष्ट गुणों से सम्पन हैं,यही कारण हैं,कि यह भारतीयों की रसोई में सदियों से अपना स्थान बनायें हुयें हैं.


० धनिया के फायदे


० तुलसी


० तनावमुक्त जीवन के लिये करे यह उपाय



० आयुर्वेदिक औषधी सूचि



० यूटेराइन फाइब्राइड़



० अलसी है गुणों की खान



० बरगद पेड़ के फायदे

मंगलवार, 28 जून 2016

congenital heart disease ,कांजिनेटल हार्ट डिजिज,पल्मोनरी एम्बोलिज्म,pulmonary embolism

#1.परिचय 

Congenital heart disease आमतौर पर जन्मजात शिशुओं में होनें वाला ह्रदय रोग हैं.जो ह्रदय से संबधित सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करता हैं. यब बीमारी बच्चों को गर्भावस्था के दोरान ही होती हैं.                         

#2.लक्षण::


:::: शिशु की त्वचा नीली या बैंगनी दिखाई देती हैं,खासतोर पर मुंह,हाथों की ऊँगली,कान,होंठ और नाक .इस अवस्था को साइनोसिस कहतें हैं

:::: बार बार निमोनिया होना.फेफडों में गंभीर संक्रमण.

:::: बच्चा धोड़ा सा चलनें,व्यायाम करनें या खेल खेलनें में अत्यधिक थक जाता हैं.

:::: बच्चा बार बार बेहोश हो रहा हो.

:::: धड़कनों का अनियमित रूप से बढ़ना.

:::: भूख में कमी यदि बच्चा स्तनपान कर रहा हैं,तो स्तनपान के दोरान बार बार स्तनो को छोड़कर जोर जोर से साँस लेता हैं.

:::: बच्चें का वज़न कम होना.

:::: अत्यधिक पसीना निकलना.

:::: शरीर पर सूजन विशेषकर जन्मजात शिशुओं में,बड़े बच्चों में पेट़,पैर,हाथ और आँखों मेंं सूजन.

:::: गहरी नींद में अचानक जाग जाना या बार बार नींद टूटना.

#3.कारण 

above picture shows congenital abnormalities

1.congenital heart disease अधिकांशत: आनुवांशिक होती हैं,यदि माता पिता में से कोई एक जेनेटिक सिंड्रोम से पीड़ित हैं तो बच्चें में बीमारी होनें की संभावना 10 में से 5 होती हैं.

2.यदि माता धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन करती हैं,तो बीमारी होनें का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता हैं.कई शोधों के बाद sciencesist इस नतीजें पर पहुँचे हैं,कि धूम्रपान और शराब का सम्मिलित सेवन इस बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा हैं.W.H.O. के मुताबिक विश्व की एक तिहाई congenital heart disease  गर्भावस्था के दोरान शराब और धूम्रपान बंद करके रोकी जा सकती हैं.

3.गर्भावस्था के दोरान यदि सामान्य बीमारी में ली जानें वाली दवाईं बिना सोच समझकर ली गई हैं,तो यह बीमारी होनें की संभावना बढ़ जाती हैं.

4. यदि गर्भावस्था के समय पर्याप्त पोषक तत्वों का अभाव रहा हैं,तो बीमारी होनें की दोगुनी संभावना रहती हैं.

5. यदि किसी महिला को मधुमेह (Diabetes) हैं,और गर्भवती हैं,तो यह स्थिति भ्रूण के ह्रदय विकास में अत्यधिक बाधक होती हैं.भारत जो कि विश्व की मधुमेह राजधानी (capital of Diabetes) कहा जाता हैं में यह स्थिति अधिक देखी गई हैं,कि बीमारी से पीड़ित बच्चें की माँ मधुमेह से ग्रसित हैं,और उन्हें पता भी नहीं हैं,कि वे मधुमेह से पीडित हैं,और गर्भवती हो जाती हैं,इस बात की जानकारी उन्हें भी तब मिलती हैं जब बीमारी से पीड़ित बच्चें की family history निकालनें के लियें माता की जाँच की जाती हैं.

ह्रदय की अनियमित धड़कन के बारें में विस्तारपूर्वक जानियें इस लिंक पर


समय पर यदि congenital heart abnormalities को पहचान कर चिकित्सा शुरू कर दी जावें तो बीमारी को प्रभावी रूप से नियत्रिंत किया जा सकता हैं,आजकल शल्य चिकित्सा की नई नई तकनीकों ने इसकों ओर आसान बना दिया हैं.ऐसी ही एक पद्धति हैं,डिवाइस क्लोजर 

#4.डिवाइस क्लोजर :::

डिवाइस क्लोजर में बिना आपरेशन किये दिल के छेदों को बंद किया जाता हैं,इस पद्धति में न तो चीरा लगानें की आवश्यकता नही होती हैं,एंजियोग्राफी की तरह पैरों की नसों द्धारा प्रक्रिया सम्पन्न होती हैं.इसमें लम्बें समय तक अस्पताल में भर्ती रहनें की आवश्यकता नही होती हैं.एक दो दिन पश्चात अस्पताल से आसानी से छुट्टी मिल जाती हैं.यह पद्धति सुगम,सरल,और आपरेशन पश्चात की जट़िलताओं से मुक्त हैं.इस वज़ह से बच्चों विशेषकर शिशुओं के लियें वरदान हैं.

#पलमोनरी एमबोलिज्म (pulmonary embolisms)


पल्मोनरी एम्बोलिज्म (pulmonary embolism) फेफडों से संबधित बीमारी हैं,जिसमें फेफडें की रक्त नलिकाएं खून की रूकावट की वज़ह से जाम हो जाती हैं. और रोगी की तुरन्त मृत्यु हो जाती हैं.यह सबकुछ इतना तेजी से घटित होता हैं,कि एकाएक किसी को सम्भलनें का मोका ही नहीं मिलता किन्तु यदि समय रहते लक्षणों को पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जावें तो मृत्यु की संम्भावना को क्षणिक किया जा सकता हैं.

#1.लक्षण :::


० पैरों बिना किसी वज़ह से होनें वाला दर्द.

०  दर्द के दो तीन दिन बाद साँस लेनें में परेशानी महसूस होना.

० फेफडों में जकड़न महसूस होना.

० रक्त नलिकाओं में सूजन होना.

० रक्त नलिकाओं का फूलना.

० चेहरा पीला पड़ना या एकदम कांतिहिन दिखाई देना.

० उल्टी होना.

० रोगी इच्छा व्यक्त करता हैं,कि उसे धूलें हुयें कपड़ों की भाँति नीचोया जावें. या फेफडों को दबाकर रखा जावें.


#2.कारण :::


कम चलनें फिरनें रक्त जमाने वाली दवाओं के सेवन या चोट की वज़ह से शिराओं में खून के थक्के (clots) जम जातें हैं. जब ये clots अधिक बनने लगते हैं,तो ऊपर सरककर फेफडों की रक्त नलिकाओं को जाम कर देते हैं,तब फेफडों को शुद्ध रक्त की आपूर्ति बाधित होती हैं,और ह्रदय पर दबाव पड़नें लगता हैं,और कुछ समय के पश्चात ह्रदय काम करना बंद कर देता हैं.

#3.प्राथमिक चिकित्सा :::


लक्षण दिखाई देने व रोगी को अस्पताल ले जानें के बीच कुछ प्राथमिक उपचार ज़रूर करना चाहियें जैसे कुछ योगिक क्रियाएँ इसमें अविश्वसनीय परिणाम देती हैं, इन योगिक क्रियाओं में शामिल हैं कपालभाँति और अनुलोम विलोम ये दोनों क्रियाएँ फेफड़ों से खून के थक्के हटाकर शुद्ध रक्त की आपूर्ति बढ़ाती हैं.



० आयुर्वेदिक औषधी सूचि


० यूटेराइन फाइब्राइड़


० अलसी है गुणों की खान



मंगलवार, 21 जून 2016

parasomnia treatment , नींद में बढ़बढ़ाना

क्या हैं पैरासोम्निया (parasomnia)




यदि आप देर रात तक पढ़ाई कर रहें हो और अचानक गहरी नींद में सोया हुआ व्यक्ति तेज स्वर में नींद में ही बोलनें लगें तो शायद आप सुबह उठकर उसका मज़ाक उड़ायेगें कि रात को तुमनें क्या बोला परन्तु सामनें वाला आपकी बातों से असहमति ही प्रदर्शित करेगा कि वह तो जैसा सोया था वैसा ही उठा हैं,उसनें रात में कोई बढ़बढ़ नहीं की यही स्थिति parasomnia या नींद में बढ़बढ़ाना कहलाती हैं.


क्या पैरासोम्निया parasomnia से कोई नुकसान होता हैं.




अधिकांश लोग यही सवाल पूछतें हैं,कि क्या यह स्वास्थगत समस्या हैं,इसका जवाब भी सीदा सरल हैं,अधिकांशत: मामलों में ये समस्या नहीं मानी जाती परन्तु जहाँ बढ़बढ़ाना चिल्लानें के समान हो यह गंभीर नींद सम्बंधित बीमारी (sleep disorder) मानी जाती हैं जिनमें सम्मिलित हैं---



1.REM यानि sleep behaviour disorder.


2. नींद के अतिकारी sleep terror.


उपरोक्त दोनों प्रकार की बीमारीं में रोगी जोर -जोर से चिल्ला सकता हैं.


::  मारपीट़ कर सकता हैं.


::  नींद में चल सकता हैं.


::  किसी बहुमंजिला इमारत से निचें कूद सकता हैं.


कारण ::


1. अत्यधिक मानसिक थकावट़.


2.शराब,गांजा ,चरस,भांग तथा अन्य नशीली वस्तुओं का अत्यधिक प्रयोग.


3.कुछ विशेष दवाईयों का दुष्प्रभाव.


4.मानसिक अस्वस्थता.


5. बुखार .


उपचार Treatment 


इस समस्या को प्रभावी रूप से नियत्रिंत कर रोगी को स्वस्थ जीवनशैली पुन: प्रदान की जा सकती हैं,इसके लियें

:: रोगी को मानसिक रूप से शांतचित्त रखनें का    प्रयास करें.

:: रोगी से प्रसन्नतापूर्वक बातचीत करें.

:: रोगी पर्याप्त नींद लें इसका प्रयास हो पर्याप्त नींद से तात्पर्य 7 से 8 घंटे की बाधारहित नींद से हैं.

:: रोगी को योगिक क्रियाएँ जैसें शवासन ,अनुलोम --- विलोम, भ्रामरी करवातें रहें.

:: सोनें से पूर्व हो सके तो शीतल जल से स्नान करवायें.

:: औषधि जैसें सर्पगंधा का प्रयोग वैघकीय परामर्श से करवायें.

:: पंचकर्म जैसे शिरोधारा करवायें.

:: रोग को बढ़ानें वाली समस्यों पर मनोचिकित्सकीय (psychological) परामर्श अवश्य लें.

:: रोगी को ऐसे आहार न दे जो मानसिक उत्तेजना प्रदान करतें हों जैसे चाय,काँफी,शराब,तम्बाकू आदि.

:: तरल पदार्थों का जिसमें शामिल हैं,फलों का रस,आंवला रस का सेवन करवातें रहें.साथ ही रेशायुक्त खाद्य पदार्थ जैसे सलाद,प्याज,हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अवश्य करवायें.

यदि उपरोक्त बताई गयी बातों को सुनियोजित तरीकें से अमल में लाया जावें तो समस्या को सम्पूर्ण रूप से समाप्त किया जा सकता हैं.


० तुलसी


० तेल के फायदे



० यूटेराइन फाइब्राइड़

सोमवार, 20 जून 2016

chyawanprash,च्वयनप्राश ,

च्वयनप्राश (chyawanprash)



च्वयनप्राश या चमनप्राश (chamanprash) या चवनप्राश (chavanprash)आयुर्वैद चिकित्सा में प्रयोग होनें वाला एक महत्वपूर्ण रसायन हैं.च्वयनप्राश की खोज chavanprash ki khoj महान रिषी च्यवन ने जरावस्था से पुन: यौवन प्राप्त करनें हेतू की थी.महात्मा च्वयन के नाम से ही इस औषधि को च्वयनप्राश पड़ा था.इस औषधि का वर्णन चरक सहिंता नामक आयुर्वैद चिकित्सा ग्रन्थ में मिलता हैं.
                 
संभोगशक्ति बढ़ानें वाली दवाई
                     च्वयनप्राश chyawanprash


घट़क द्रव्य (ingredients)


1.आंवला (Emblica officinalis).

2.अग्निमंथ.

3.ब्रिहाती.
4.भारंगी.

5.चव्य.

6.दारूहरिद्रा (Berberis aristata).

7.गजपीपली.

8.गोजीहवा.

9.रिषभक.

10.जीवक.

11.काकोली.

12.क्षीरकाकोली.

13.करकटसरंगी.

14.ममीरा.

15.मासपर्णी.

16. मेदा.

17. मुदगापर्णी.

18.परपाट़ा.

19.दक्षिणी परपाट़ा.

20.प्रसारणी.

21.प्रतिविषा.

22.रेवाटेसिनी.

23. रिद्धि.

24. सलामपंजा.

25.सप्तारंगी.

26. रोजा सेंटीफोलिया.

27.उसवा.

28. विधारा.

29.घ्रत.


31.बिल्व.

32.मनुक्का (virus vinifera).

33.इलायची (Elettaria cardamomum).

35.नागकेशर.

36. जीवन्ती.

37.गोक्षुर.

38.सौंठ (Zingiber officinale).

39.पुनर्नवा (Boerhavia diffusa).

40.बला.

41.श्योनक.

42.अन्य 13 प्रकार की औषधि इस प्रकार से कुल 54 औषधि के सम्मिलन से च्वयनप्राश बनता हैं.

उपयोग 


च्वयनप्राश रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ, चिरयौवन,ओर बलवान बनाता हैं.


वर्तमान समय में च्वयनप्राश की शक्ति औषधियों के विलुप्त होनें से समाप्तप्राय हो गई हैं.क्योंकि कुल 54 में से 32 औषधि जैसे रिद्धि,वृद्धि,जीवक,मेदा,काकोली आदि विलुप्त हो गई हैं.

सेवन मात्रा 


वैघकीय परामर्श से.

बुधवार, 8 जून 2016

शहद प्रकृति द्धारा मनुष्य को दिया अनुपम अमृत हैं.Honey nature's gift for mankind

परिचय::-

मधुमक्खी का रस
शहद

 शहद प्रकृति द्धारा मनुष्य को दिया अनुपम अमृत हैं.लगभग सभी प्राचीन धर्म ग्रन्थों जैसें rigveda,कुरान,बाइबिल और एंजिल में शहद (honey) का व्यापक और विशद वर्णन मिलता हैं.

शहद मधुमक्खीयों द्धारा फूलों (flower) के रस को छत्तों में एकत्रित करनें से बनता हैं.लगभग आधा कि.ग्रा.शहद तैयार करनें में मधुमक्खीयों को लगभग 37 लाख बार उड़ान भरनी पड़ती हैं.

वनों और फूलों की प्रकृति के आधार शहद की प्रकृति रंग,गंध तथा स्वाद में भिन्नता होती हैं जैसें नीम फूलों के रस की अधिकता होनें पर शहद पतला,गहरे रंग का और स्वाद में कड़वा या कसेलापन लिये होता हैं.

सरसों,गेंदा,गुलाब, सेब के फूलों की अधिकता होनें पर शहद गाढ़ा,स्वाद में मिस्री जैसा और गाय के घी समान पीलापन लियें होता हैं.

शहद के बारें में वर्णन करतें हुयें भारतीय ग्रन्थ शालीग्राम निघण्टु लिखता हैं.

माक्षिक तैलवर्ष स्वादघृत वर्णन्तु पौत्तिकम क्षोद्रं कपिल वर्ष स्वाच्छेत भ्रामर सुच्यते
अर्थात माक्षिक शहद तैलवर्ण का एँव पतला,पैत्तिक शहद घृतवर्ण व गाढ़ा,क्षौद्र शहद काले रंग का और भ्रामर शहद बहुत गाढ़ा,सफेद,स्वाद में मिस्री के समान ,पारदर्शक,और चमकदार होता हैं

मधुमक्खी पालन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें

प्रकार::-


आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक शहद मुख्यत: दो प्रकार का होता हैं,कच्चा शहद और पक्का शहद.कच्चा पतला,खट्टापन लियें और पानी की तरह होता हैं.पक्का शहद गाढ़ा, स्वाद में मीठापन लियें और कालेपन लिये होता हैं.

शुद्ध शहद की पहचान के तरीके::


आजकल शुद्ध शहद के नाम पर गुड़ की चासनी,शक्कर और ग्लूकोज बेचनें वालों की कमी नहीं हैं,ऐसे में शुद्ध शहद की पहचान आवश्यक हैं.

1.पानी से भरें बर्तन में यदि शहद की बूँद टपकायी जावें तो बूँदें ज्यों कि त्यों तली में बैठ जाती हैं,जबकि मिलावटी शहद की बूँदें फैल जाती हैं.

2.शुद्ध शहद तुरन्त आग पकड़ लेता हैं.

3.शुद्ध शहद खानें पर ठंड़क का अहसास होता हैं.

4.शुद्ध शहद और चूना को मिलाकर हाथ पर रगड़ा जावें तो हथेली में असहनीय गरमाहट़ पैदा होती हैं.

5. शुद्ध शहद को कुत्तें कभी नहीं खातें हैं.

6. शहद को आँखों में लगानें पर यदि जलन का अहसास हो तो शहद शुद्ध होता हैं.



संघट़न :::



Glucose.           fructose.        sucrose

   50%.                    37%.                 2%


Maltose.          Dextrose.         gum

    2%.                     2%.                   2%

   Vax.                             chlorophyll

     2%.                                      2%


इन तत्वों के अलावा शहद में विटामीन A,विटामीन B6 ,विटामिन B12,विटामीन K,आयरन, फास्फोरस,पोटेशियम, आयोडिन,सोड़ियम,गंधक,मैंगनीज तथा विटामिन C पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहतें हैं.

इसके अतिरिक्त शहद एन्टीसेप्टि़क गुणों,जल,एमिनों एसिड़ से भरपूर रहता हैं.

शहद का औषधीय  उपयोग::-



० शहद अत्यधिक कीट़ाणुनाशक प्रकृति का होता हैं इसमें लाखों वर्षों बाद भी कीट़ाणु नहीं पनप सकते इसका प्रमाण मिस्र (Egypt) में पाई गयी ममी mumy हैं,जिसके सिरहानें रखा शहद गुणों की दृष्टिकोण से ज्यों का त्यों मिला हैं.यही कारण हैं कि शहद में पेचिस (dysentery) और  मोतीझरा (typhoid) के जीवाणु एक घंट़े से ज्यादा जीवित नहीं रहते हैं.

० बार- बार बेहोशी होती हों,अत्यधिक थकान होती हो तो सम भाग  शहद गुनगुने पानी के साथ सेवन करना चाहियें.

० तुरन्त ऊर्जा और स्फूर्ति प्राप्त करनें के लिये ठंड़े पानी के साथ 30 ग्राम शहद मिलाकर पीना चाहियें.


० यदि नींद नहीं आनें की समस्या हो तो निम्बू पानी में दस ग्राम शहद मिलाकर सेवन करना चाहियें.


० शरीर पर सूजन (swelling) होनें पर आंवला रस के साथ समभाग में मिलाकर नित्य सुबह शाम 15 ml.  सेवन करें.


संम्भोग क्षमता कम होनें पर 10 ml.शहद बारिश के पानी में मिलाकर सेवन करना चाहियें.अन्य दिनों में जब बरसात का पानी उपलब्ध नहीं हो ठंड़े दूध के साथ सेवन करें.


० शहद आयुर्वैदिक औषधियों की कार्यक्षमता दुगनी कर देता हैं यही कारण हैं,कि इसे मिलाकर औषधि सेवन करवाई जाती हैं.

मोट़ापा कम करनें हेतू शहद 15 ml.और अदरक रस 10 ml. मिलाकर नित्य खाली पेट सेवन करें.


० बच्चों के दाँत निकलतें समय यदि सुहागा और शहद मिलाकर बच्चों के मसूड़ों पर दिन में तीन चार बार मालिश की जावें तो दाँत शीघ्र और दर्दरहित निकलते हैं.


० खेलकूद में नाम की चाह रखनें वाले हर एक खिलाड़ी (sportsman) को रोज़ सुबह दोपहर शाम मिलाकर 400 ml. शहद का सेवन करना चाहियें परन्तु 400 ml. तक धिरें-धिरें कर पहुँचाना चाहियें सर्वप्रथम शुरूआत 30 ml. से करनी चाहियें.


० मासिक धर्म menstrual cycle  अनियमित होनें  पर 10 ml  शहद को गाय या बकरी के दूध में मिलाकर रोज़ रात को सोते समय सेवन करें.


० मासिक धर्म दर्दयुक्त आता हो तो मासिक अानें एक सप्ताह पूर्व 15 ml.शहद और दो-दो रज: प्रवर्तनी वट़ी  के साथ सेवन करें.


० किड़नी (kidney) सम्बंधित बीमारी में गुलर के रस के साथ समभाग शहद मिलाकर सेवन करें.


शहद में विटामिन k  पाया जाता हैं जिससे यह रक्तस्त्राव को रोकता हैं.गर्भवती स्त्रीयाँ यदि शहद का नियमित रूप से सेवन करें तो भ्रूण से होनें वाले आन्तरिक रक्तस्त्राव की सम्भावना समाप्त हो जाती हैं.


० यह टीटनस (Titnus) की संभावना नगण्य कर देता हैं.


० प्रसव पश्चात गुनगुनें जल में दस बूँद मिलाकर प्रसूता को देनें से दूध अच्छा निकलता हैं व गुणवत्तापूर्ण रहता हैं.


संतानोंत्पति बाधित होनें पर आधा लीट़र पानी को 20 ग्राम अश्वगंधा मिलाकर चौथाई रहनें तक उबालें तत्पश्चात ठंड़ा कर 30 ml. शहद मिला लें अब इस मिस्रण को चार चम्मच रोज़ रात को सोतें समय मासिक स्त्राव बंद होनें के एक दिन बाद व शुरू होनें के एक दिन पहलें तक सेवन करें.


० शहद में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं,जो कि मस्तिष्क की कार्यपृणाली को सुचारू बनाकर पक्षाघात,डिमेंसिया जैसी समस्याओं से बचाता हैं.


० यदि गर्भवती स्त्रीयाँ नियमित रूप से शहद का सेवन करती हैं,तो सन्तान न केवल हष्ट पुष्ट होगी बल्कि गर्भावस्था के दोरान होनें वाली उल्टी भी नही होगी.


० इसमें उपस्थित गंधक और  त्वचा को कोमल,मुलायम और सदा जवान रखता हैं,इसके लियें शहद को मुलतानी मिट्टी, मलाई और दूध के साथ मिलाकर त्वचा पर लगाना चाहियें.


० सोतें समय गर्म दूध में मिलाकर इसका सेवन करनें से अनिद्रा [Insomnia]की समस्या ख़त्म हो जाती हैं.


० शहद में उपस्थित कैल्सियम बच्चों और बुजुर्गों के लिये अत्यन्त फायदेमंद रहता हैं,क्योंकि यह आंतों द्धारा तुरन्त अवशोषित हो जाता हैं.


० आदिवासी समाज मोंच आनें,हड्डीयों से संबधित समस्या होनें पर शहद का सेवन व इसकी पट्टी बांधनें को विशेष महत्व देता हैं.


० इसका एन्टीसेप्टिक गुण बिवाईया फटनें,खरोंच आनें पर इसे तुरन्त ठीक कर देता हैं.


० सोतें समय लिंग की मालिश करनें एँव स्त्रीयों को नाभि पर लगानें से कामवासना जागृत होती हैं.


० आँखों में शहद लगानें से आँखों की ज्योति बढ़ती हैं,तथा कभी - भी चश्मा लगानें की नोबत नही आती हैं.


० शहद का सेवन करनें से निमोनिया,टी.बी.तथा फेफडों से संबधित अन्य बीमारींयों में काफी लाभ मिलता हैं.


० शहद भरी बोतल में सूंघने से भी अस्थमा की समस्या दूर होती हैं क्योंकि शहद में पाया जाने वाला ईथर और अल्कोहल सांस की नलियों में मौजूद सूजन कम करता हैं ।


० प्राचीनकाल में मिस्र और भारतीय सभ्यताएँ शहद को मेहमानवाज़ी में प्रयुक्त करती थी,इसका scientific कारण भी था,चूँकि प्राचीन समय में यात्रा ज्यादातर पैदल ही तय की जाती थी और यात्री बहुत थक जाते थे .अत: शहद के सेवन से तुरन्त ही स्फूर्ति आ जाती थी क्योंकि शहद आँतों के ऊपरी भाग से अभिशोषित होता हैं,और शोषित होनें के उपरांत मस्तिष्क और माँसपेशियों में चला जाता हैं,जहाँ लाइक्रोजन में परिवर्तित हो जाता हैं,जिससे थकान तुरंत ही दूर होकर मन मस्तिष्क तरोताजा हो जाता हैं.


० सांस की बदबू आने पर दो चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी को गुनगुने पानी मे मिला कर कुल्ले करने से मुंह से बदबू आना बन्द हो जाती हैं ।


० मधुमेह रोगियों को भी शहद बहुत फायदा पहुंचाता हैं । मधुमेह रोगी को 10 ग्राम शहद 10 ग्राम त्रिफला के साथ मिलाकर लेना चाहिए ।


० उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर शहद को लहसुन के साथ सेवन करना चाहिए।


० पुराना शहद एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता हैं , इसके नियमित सेवन से कोशिकाओं की उम्र लम्बी होती हैं जो अन्ततः मनुष्य की लम्बी उम्र में सहायक हैं ।


० शहद बालों के लिये भी बहुत फायदेमंद रहता हैं इसके लिये इसे बालों में लगाकर कुछ समय धो लेने से बाल मुलायम और चमकदार बनते हैं ।


० शहद खानें से आँतों की कार्यप्रणाली में सुधार आता हैं ।


० शहद में जिंक पाया जाता हैं जो शरीर में निर्जलीकरण और दस्त को रोकता हैं ।


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० नीम के औषधीय उपयोग

० पारस पीपल के औषधीय गुण



आयुर्वैद में शहद को योगवाही कहा गया हैं,अर्थात इसका प्रभाव गर्म औषधि के साथ करनें पर गर्म और ठंड़ी के साथ करनें पर ठंड़ा होता हैं.

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