कोरोना वायरस से बचाव का टीका korona virus se bachav ka tika

कोरोना वायरस पूरे विश्व में जिस तेजी के साथ फैल रहा हैं उससे पूरे विश्व के वैज्ञानिकों और सरकारों के सामनें बहुत बड़ी चुनौंती प्रस्तुत की हैं ।

कोरोना वायरस से बचाव का टीका corona virus se bachav ka tika अब तक विकसित नही किया गया हैं किन्तु भारतीय प्राचीन चिकित्सा शास्त्र की बात करें तो इसमें 5000 हजार साल पूर्व से ही कोरोना वायरस जैसें अनूपसंचारी रोगों से बचाव के तरीकों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया हैं ।

आयुर्वेद में कोरोना वायरस जैसें विदेशों से आनें वालें रोगों को अनूपसंचारी रोग कहकर संबोधित किया गया हैं।


आयुर्वेद में कोरोना वायरस जैसें रोगों से बचाव की क्या चिकित्सा हैं 

कोविड़ - 19 से बचाव का टीका
 कोरोना वायरस से बचाव का टीका


प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र कहता हैं कि यदि देश में अनूपसंचारी रोगों की वज़ह से जनसामान्य हताहत होनें लगें तो इसका उपाय प्रकृति में ही निहित हैं ।


शास्त्र कहतें हैं कि ऐसे रोगों के विषाणु एक निश्चित तापमान में ही पनपते हैं और अपना घातक प्रभाव दिखातें हैं अत : इन विषाणुओंं को नही पनपने देनें के लियें वातावरण के तापमान को अधिक कर देना चाहियें ।

वातावरण के तापमान को अधिक करनें और विषाणुमुक्त करनें का शास्त्रसम्मत  तरीका यज्ञ हैं । जिसमें अग्नि और इसमें आहुति दियें जानें वालें पदार्थों जैसें घी,औषधीयाँ आदि से वातावरण के तापमान में मनचाही वृद्धि की जा सकती हैं ।

जैसा की हम जानतें हैं कोरोना के वायरस का प्रभाव एक निश्चित तापमान तक ही रहता हैं तापमान बढ़नें पर कोरोना वायरस का प्रभाव समाप्त हो जाता हैं अत : यज्ञ के माध्यम से वातावरण के तापमान में वृद्धि कर कोरोना वायरस को समाप्त किया जा सकता हैं ।


शास्त्रानुसार इन रोगों से ग्रसित व्यक्ति  यज्ञ करता हैं तो यज्ञ की अग्नि से तपकर स्वेदित हो जाता हैं अर्थात उसके शरीर से पसीना निकलनें लगता हैं,उसके शरीर के सारें रोमछिद्र खुल जातें हैं और पूरा शरीर यज्ञ की अग्नि से तपकर हल्का हो जाता हैं  इस प्रकार यज्ञ से अनूपसंचारी रोगों का नाश हो जाता हैं । और जिन लोगों में यह रोग नही फैला हैं यज्ञ के धुँए के माध्यम से उनका बचाव हो जाता हैं ।

यज्ञ के माध्यम से स्वेदन करनें से जिन रोगों का शमन होता हैं वे सारें रोग शरीर के ऊपरी भागों के ही हैं जैसें फेफड़ों,कान, मस्तिष्क और नाक के रोग 


इस बारें में शास्त्र कहता हैं  कि


परतिश्यायेचकासेचहिक्काश्वासेष्वलाघवे । कर्णमण्यांशिर:शूलेसवरभेदेगलग्रहे ।।


भारतवर्ष में उत्तम वैधकीय ज्ञान की वजह से यज्ञ कर्म का सही ज्ञान आमजन तक नही पहुँच पा रहा हैं यज्ञ वास्तव में धार्मिक क्रिया से बढ़कर एक चिकित्सकीय विधा हैं जिसमें कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारीयों को नष्ट़ करनें की प्रभावी क्षमता हैं ।



प्राचीन काल में यज्ञ की यह विधा प्रत्येक व्यक्ति द्धारा और बिना धार्मिक  भेदभाव के की जाती थी और सम्पूर्ण शास्त्र सम्मत औषधीयों और पदार्थों का प्रयोग कर की जाती थी इसलिये रोग नियंत्रण बहुत आसान था किंतु आज के परिप्रेक्ष्य में यज्ञ जैसी वैज्ञानिक विधा को हिन्दू धर्म के साथ जोड़कर इसके वैज्ञानिक पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया गया हैं । फलस्वरूप कोरोना वायरस, सार्स जैसी  वायरस जनित बीमारीयाँ खतरनाक स्तर तक पहुँच गई हैं और लाखो लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी हैं ।


अग्नि स्नान द्धारा कोरोना वायरस का इलाज corona virus ka ilaj 


यज्ञ की भांति साधु संतों के बीच लोकप्रिय अग्नि स्नान पद्धति भी इस प्रकार के वायरस को नष्ट़ करनें की सबसे प्रभावी पद्धति हैं । इस पद्धति में साधु संत अपनें आस पास आग लगाकर उस आग के बीच कई घंटों तक बैठकर साधना करतें हैं । इस पद्धति से शरीर में प्रवेश करनें वालें कई घातक विषाणु नष्ट़ हो जातें हैं ।
धूनी रमाना
 अग्नि स्नान


चूकिं साधु संतु जंगलों में विचरण करतें हैं इन जंगलों में कई घातक जीव जंतु और वनस्पतियों के प्रभाव में आकर इन साधु संतों का शरीर विषेला हो जाता हैं इसी विषेलें प्रभाव को समाप्त करनें में अग्नि स्नान बहुत कारगर मानी जाती हैं।




कोरोना वायरस से बचाव हेतू W.H.O.द्धारा बताया गया सावधानी का टीका 



1.अस्वस्थ्य होनें पर क्या करें ::



w.h.o.का कहना हैं कि यदि आपको बुखार,सर्दी,खाँसी या साँस लेनें में परेशानी हैं तो अपनें आपको सामान्य व्यक्तियों से तुरंत प्रथक कर लें, ऐसा करनें से बीमारी से घर के अन्य व्यक्ति बीमारी से सुरक्षित रहेंगें ।

अगला कदम चिकित्सक से परामर्श का होना चाहियें और बीमारी की सही जानकारी चिकित्सक को दें ।


2. बातचीत में सावधानी बरतें :::


सर्दी,खाँसी,या श्वसन संबधी समस्या होनें पर स्वस्थ्य व्यक्ति से बातचीत में पर्याप्त दूरी बनायें रखे जिससे कि सामान्य व्यक्ति संक्रमण से बचा रहें । 


W.H.O.के अनुसार बातचीत में कम से कम एक मीटर की दूरी रखें ।



3.आँख नाक कान और मुँह को न छुएं




यदि घर से बाहर हैं और सार्वजनिक  स्थानों पर किसी जगह को छुआ हैं तो अपनी नाक,कान,आँख और मुहँ को न छुएँ ऐसा करनें से आप वायरस को शरीर में जानें से रोक सकतें हैं ।


4.खाँसते और छींकतें समय मुँह पर रूमाल या टीश्यू पेपर का प्रयोग करें 




व्यक्तिगत साफ सफाई के प्रति जितनें जागरूक रहेगें संक्रमण उतना ही कम फैलेगा ,सर्दी खाँसी होनें पर मुँह और नाक पर रूमाल रखकर इस तरह का कार्य किया जा सकता हैं ।



5.हाथों को बार - बार धोयें :::



हाथों को बार - बार धोनें से हाथ वायरस और कीटाणुओं से मुक्त हो जातें हैं । इसके लियें किसी अच्छें साबुन या एन्टीसेप्टिक तरल का इस्तेमाल किया जा सकता हैं ।




6.कोरोना वायरस से संक्रमित होनें पर क्या करना चाहियें corona virus we sankrmit hone PR kya karna chahiye




कोरोना वायरस से संक्रमित होनें पर बिल्कुल भी घबरायें नहीं क्योंकि कोरोना वायरस से होनें वाली मौंत corona virus se hone wali mout अन्य बीमारीयों जैसें इबोला Ebola,सार्स SARS तथा मर्स murs के मुकाबले होनें वाली मौंत के मुकाबलें बहुत कम हैं । 


कोरोना वायरस से मृत्य corona virus se mrutyu की दर 3.4% प्रति लाख ही हैं जबकि इबोला में यह 40.40% मर्स की 34.4% तथा सार्स की 9.6% हैं । 


कोरोना वायरस से संक्रमित होनें पर चिकित्सकीय निर्देशों का बहुत गंभीरता से पालन करें और समय - समय पर दवाईयाँ लेते रहें।



कोरोना वायरस से संक्रमित होनें पर उच्च स्तरीय और अनुशंसित मास्क का प्रयोग करना चाहियें ताकि संक्रमण आसपास के व्यक्तियों में ना फैलें । मास्क एक बार में एक ही उपयोग करें । अगली बार नया मास्क उपयोग करें । इस दौरान पुरानें मास्क को चिकित्सकीय मापदंड़ों के अनुरूप नष्ट़ कर दें ।



पर्याप्त मात्रा में नींद लें खान - पान और व्यायाम चिकित्सकीय निर्देंशों के अनुसार रखें । 



7.मांसाहार को त्याग दें 



कोरोना वायरस पक्षी से मानव में आया हैं अत :पशु - पक्षीयों का मांस न खायें । 

भोजन में सब्जी दाल सलाद आदि संतुलित खाद्य पदार्थों का समावेश करें ।






० योग क्या हैं



० लक्ष्मीविलास रस नारदीय के फायदे





० वायरस के लिये विटामीन और Antioxidants




० fitness के लिये सतरंगी खानपान


टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Corona virus ki bhut umda jankari
Unknown ने कहा…
Sahi bat hai yagya me isaka ilaj h

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