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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जल प्रबंधन [WATER MANAGEMENT] आज की महती आवश्यकता

जल प्रबंधन [WATER MANAGEMENT] आज की महती आवश्यकता  नर्मदा नदी  भारत सहित दुनिया के सभी विकासशील देश चाहें वह अफ्रीकी राष्ट्र हो,लेटिन अमरीकी हो या एशियाई सभी पानी की गंभीर कमी से जूझ रहें हैं,इस कमी का मूल कारण जल का प्रबंधन नही कर पाना हैं. उदाहरण के लिये भारत में प्रतिवर्ष 4,000 अरब घन मीटर पानी प्राप्त होता हैं.जो कि भारत समेत तमाम एशियाई राष्ट्रों की ज़रूरतों के लियें पर्याप्त हैं,लेकिन बेहतर प्रबंधन के अभाव में लगभग 1500 अरब घन मीटर जल बहकर समुद्र में चला जाता हैं.यही 1500 अरब घन मीटर जल जब नदियों के माध्यम से बहता हैं,तो साथ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा भी लाता हैं जिससे भारत में प्रतिवर्ष 30 करोड़ आबादी,करोड़ों पशु एँव अरबों रूपये की फसल बर्बाद होती हैं.इसी तरह पानी की कमी यानि सूखे से प्रतिवर्ष 10 करोड़ लोग प्रभावित होतें हैं. भारत के पास दुनिया की आबादी का 18 प्रतिशत हैं जबकि दुनिया की कुल बारिश का मात्र 4 प्रतिशत बारिश भारत में होती हैं,इसी प्रकार भारत की प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में 133 वें स्थान पर है । यहां प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की उपलब्धता 140 लीटर है जब

क्रिकेट cricket अतीत से वर्तमान तक का सफ़रनामा

 Cricket दुनिया में क्रिकेट खेलनें वाले जितनें राष्ट्र हैं,उनमें आधे एशियाई राष्ट्र हैं,और इन देशों में क्रिकेट़ की लोकप्रियता का आलम यह हैं,कि करोड़ों लोगों के लिये यह खेल धर्म हैं,और इसको खेलनें वाले खिलाड़ी भगवान . भारत में यह खेल इस कदर लोकप्रिय हैं,कि जिस दिन भारत का कोई मैच किसी दूसरें देशों की टीम से होता हैं,उस दिन देश के स्कूल,कालेज,बाजार,और कार्यालयों में अघोषित अवकाश हो जाता हैं. 1990 के दशक में क्रिकेट अपने क्रिकेट केरियर की शुरूआत करनें वाले सचिन तेंडुलकर जैसें खिलाड़ी ने सपने में भी यह नही सोचा होगा कि एक दिन यह खेल उन्हें क्रिकेट का भगवान बना देगा.आईयें जानतें हैं इस भद्रपुरूषों के खेल के सफ़रनामें के बारें में ■ क्रिकेट की उत्पत्ति किस देश से हुई थी ::: क्रिकेट की उत्पत्ति इंग्लेड़ से मानी जाती हैं,जहाँ  13 वी शताब्दी से यह खेल गेंद और बल्ले के साथ खेला जा रहा हैं. सन्  1709 में यह खेल लंदन और केंट़ टीम के मध्य खेला गया. इसके पश्चात 1730 के दशक तक यह खेल केम्ब्रिज और आक्सफोर्ड़ विश्वविधालय के छात्रों के बीच लोकप्रिय हो गया . ■ प्रथम क्रिकेट क्लब

महिलाओं की आम समस्या यूटेराइन फाइब्राइड्स [UTERINE FIBROIDI]

यूटेराइन फाइब्राइड्स Uterine fibroid यूटेराइन फाइब्राइड (uterine fibroid) महिलाओं में गर्भाशय की आंतरिक दीवारों पर बननें वाली नरम माँसपेशियों की गांठे हैं,जिनका आकार अंगूर की तरह होता हैं.इन गांठों की वज़ह से महिलाओं में तीव्र रक्तस्त्राव और पेडू में बहुत तेज दर्द की समस्या सामनें आती हैं. 3 में सें हर दो महिला अपनें जीवनकाल में इस समस्या से जूझती हैं.   यूटेराइन फाइब्राइड के लक्षण :: • माहवारी के समय अत्यधिक रक्तस्त्राव जो आठ से दस दिन या इससे भी अधिक समय तक चलता हैं। • कमर और पेडू में तीव्र दर्द • पेट के निचलें भाग में भारीपन महसूस होना साथ ही उभार निकलना • बार - बार पैशाब जानें की इच्छा होना तथा पैशाब करते समय दर्द होना • शरीर में अकडन होना • कब्ज होना • गर्भधारण में समस्या • अधिक रक्तस्त्राव से शरीर में खून की कमी ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// महिलायें समाज और परिवार • 9 नेचुरल सुपरफूड फार हेल्दी वेजाइना ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// यूटेराइन फाइब्राइ

अनियमित धड़कन यानि अरिदमिया (Arrhythmia) को बिना चिकित्सकीय जाँच के कैसे पहचाना जा सकता हैं

अरिदमिया(Arrhythmia) ह्रदय से जुड़ी समस्या हैं. हमारा ह्रदय औसतन रूप से एक मिनिट में 50 से 85 बार धड़कता हैं। जब ह्रदय की  धड़कन heart  ki dhadkan इस स्तर से कम या ज्यादा होती हैं,तो व्यक्ति अरिदमिया से ग्रसित हो जाता हैं.जब ह्रदय की धड़कन 50 बीट्स प्रति मिनिट से कम होती हैं,तो यह अवस्था BradyArrhythmias कहलातीहैं.   इसकेविपरीत  100 बीट्स प्रति मिनिट से अधिक होनें पर यह TachyArrhythmias कहलाती हैं. सम्पूर्ण विश्व में ह्रदय से जुड़ी यह सबसे आम समस्या हैं,जो लगातार बढ़ती जा रही हैं. ० अरिदमिया के लक्षण :: • धड़कनों का तेज या धीमा होना. • ह्रदय की माँसपेशियों में खिंचाव या फड़फड़ाहट • सिर में भारी या हल्कापन • बेहोशी • चक्कर ० अरिदमिया के कारण :: इस बीमारी में धड़कनों को नियमित करनें वाले विधुतीय आवेग ठीक प्रकार से अपना काम नही करते हैं,ये समस्या निम्न कारणों से हो सकती हैं • ह्रदय की धमनियों में कोलेस्ट्राल का जमाव होना जिससे धमनिया ब्लाक हो गई हो. • उच्च रक्तचाप की समस्या होनें पर • पेसमेकर लगा होनें पर • मोबाइल रेडियेशन की वजह से • हाइपर या

राज्यपाल (Governor) लोकतंत्र के परिरक्षक या केन्द्र के एजेंट़

भारत की संविधानिक व्यवस्था केन्द्र में राष्ट्रपति की तरह राज्यों में भी राज्यपाल पद की व्यवस्था करती हैं.संविधान निर्माण के समय अनेक सदस्यों ने इस पद के सृजन से पूर्व गहन विचार किया था. कुछ संविधान निर्माताओं ने इस पद को प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से भरनें का सुझाव दिया था,परन्तु मुख्यमंत्री और मंत्रीपरिषद के साथ होनें वाले संभावित टकराव को देखते हुये इस पद को अप्रत्यक्ष रीति से राष्ट्रपति द्धारा मनोनयन से भरने  का फैसला लिया गया . आईयें जानतें हैं राज्यपाल के बारें में विस्तारपूर्वक कि यह पद पिछले वर्षों में लोकतांत्रिक व्यवस्था में कितना फिट़ बैठा हैं. ० नियुक्ति :: • राज्यपाल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार की जाती हैं,इस अनुच्छेद में कहा गया हैं,कि एक ही राज्य के लिये एक राज्यपाल होगा लेकिन एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिये राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता हैं. • राज्यपाल का कार्यकाल अपनी नियुक्ति तारीख़ से पाँच वर्ष तक होता हैं. • अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्धारा की जाती हैं,यह नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्ष

होली और हमारा स्वास्थ

 होली और हमारा स्वास्थ  हमारें प्राचीन ऋषी  मुनि वैज्ञानिक थें,यह अतिश्योक्ति नहीं हैं,बल्कि अनेक ऐसे पर्व हैं,जो उनकी इन बातों का समर्थन करतें हैं. रंग इन प्राचीन ऋषि मुनियों ने अनेक पर्व एँव त्योहारों के माध्यम से आमजनों को स्वस्थ एँव निरोगी रहनें का संदेश  दिया साथ ही इन पर्वों ,त्योहारों को धार्मिक जीवनशैली के साथ जोड़कर सदैंव अविस्मरणीय बनानें का प्रयत्न किया. होली भी एक ऐसा त्योहार हैं,जो स्वास्थ और प्रसन्नता को समर्पित हैं,होली पर्व holi parv   फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा से चैत्र कृष्ण पंचमी तक मनाया जाता हैं,चैत्र कृष्ण पंचमी को रंगपंचमी rangpanchami    भी कहा जाता हैं. भारतीय मोसमानुसार होली उस समय आती हैं,जब ठंड़ समाप्त होकर गर्मी शुरू होनें वाली होती हैं,यह संक्रामक मौसम हवा में पनपनें वाले हानिकारक  बेक्टेरिया और वायरस  को यकायक बढ़ानें वाला होता हैं,इस बात की पुष्टि scientist भी करतें हैं.  बाबा महाकाल के आंगन की होली होली के दिन पूर्णिमा होती हैं,इस दिन महिलायें,और पुरूष होली की पूजा holi ki puja कर इसे जलानें के बाद इसकी परिक्रमा करतें हैं,क्योंकि होलीका

भारत का राष्ट्रपति [The president of india] ये लेख नही पढा तो फिर प्रतियोगिता परीक्षा में सफ़लता नही मिलेगी

दोस्तों,आज में आपको भारत के राष्ट्रपति के बारें में विस्तारपूर्वक बताना चाहूँगा कई लोग मुझसें पूछतें हैं,health blog में सामान्य जानकारीयों का क्या काम ? मैं उनसे यही कहना चाहता हूँ, कि स्वस्थ जीवनशैली के लिये न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी ऐसा होना चाहियें जो अपने आसपास के परिवेश की समझ रखता हो,तभी एक बेहतर समाज के निर्माण की कल्पना को साकार किया जा सकता हैं. दोस्तों आईंयें जानतें हैं,भारत के राष्ट्रपति के बारें में  President of India • राष्ट्रपति की नियुक्ति :: भारत के राष्ट्रपति का पद ब्रिटेन के संविधान से प्रभावित हैं.इस व्यवस्था में वास्तविक कार्यपालिक शक्ति मंत्रीपरिषद में निहित होती हैं,जिसका प्रधान प्रधानमंत्री  होता हैं. राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग मंत्रीपरिषद (council of minister's) की सहायता से ही करता हैं. भारतीय संविधान (Indian constitution) के अनुच्छेद (Article) 53 राष्ट्रपति के बारें में कहा गया हैं,कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित हैं.किन्तु अनुच्छेद 74 में राष्ट्रपति को अपनी इन शक्तियों का प्रयोग करनें हे

गैर परपंरागत ऊर्जा भारत का भविष्य

विगत दिनों अनेक शोधों से यह स्पष्ट़ हुआ की प्रथ्वी पर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत जैसे तेल,गैस,कोयला अत्यन्त सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं.और आनें वालें कुछ दशकों में ये समाप्त हो जायेगें.ऐसे में मनुष्य अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को कैसें बनाये रखे इस प्रश्न का उत्तर गैर - परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर आकर टीकता हैं.आईयें जानतें हैं,कि वे कौन से ऊर्जा स्रोत हैं,जो भविष्य में हमारी ताकत बन सकतें हैं. • बायोगैस [Biogas]  बयोगैस मुख्यत: पादप कचरें,मानव मलमूत्र,जानवरों के मलमूत्र का वायुरहित अवस्थाओं में जीवाणुओं द्धारा अपघट़न होनें से निर्मित होती हैं.यह गैस ज्वलनशील होती हैं.जिसमें 65% मिथेन पाई जाती हैं. भारत पशु और मानव जनसँख्या के मामले में विश्व का अग्रणी राष्ट्र हैं.यदि मानव,पशु मलमूत्र और पादप कचरें का समुचित प्रबंधन कर इसका उपयोग बायोगैस बनानें में किया जावें तो न केवल भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का समुचित निदान होगा बल्कि अरबों रूपयें की मुद्रा की भी बचत होगी,जो भारत तेल गैस आयात पर खर्च करता हैं.एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 13000 टन गोबर प्रतिवर्ष होता हैं.जिससे 1 अरब 43 करोड़ किल

बाघ बचाये जंगल [The tiger save forest]

 बाघ (Tiger) एक बच्चा मुझसे प्रश्न पूछता है.सर,क्या मैं अपनें " मन की बात" पूँछू ? मैनें कहा पूछों उसनें शुरू किया दुनिया के बड़े - बड़े देश,कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठन जैसें विश्व पर्यावरण संगठन ,पेटा आदि बाघ को क्यों बचा रहें हैं ?  मैनें कहा क्योंकि वह विलुप्त हो रहा हैं. उसनें फिर प्रश्न दागा तो उसको बचानें में हमारा क्या फायदा ? इतना सारा पैसा कही और लगातें तो शायद कई लोगो के लिये अच्छे घर ,भरपेट़ भोजन की व्यवस्था की जा सकती थी ? बाघ तो मजे से जंगल में रहकर शिकार करता हैं,और आराम करता हैं ? मैनें बच्चें के बालमन को विस्तारपूर्वक उत्तर देने के लिये उसे अपनें पास बिठाया और फिर समझाना शुरू किया. "जानतें हो जब 18 वीं शताब्दी में विश्व में लगभग 50,000 हजार बाघ थें.तब धरती के 50% भाग में घनें जंगल थें.और आज 21 वी सदी में जबकि विश्व में 3900 के करीब बाघ हैं,धरती पर मात्र 14% ही जंगल बचे हैं,जबकि पर्यावरण संतुलन के दृष्टिकोण से सम्पूर्ण धरती के 33% भाग पर जंगल होना चाहियें."  भारत में बाघों का क्षेत्र संकुचित हो रहा है देश के दो राज्यों मध्यप्रदेश और कर्नाटक में