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मई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आश्रम व्यवस्था [Asharama system] :: एक विश्लेषण

 गुरु और शिष्य  आश्रम का अर्थ ::: भारतीय जीवन पद्धति मनुष्य जीवन को 100 वर्षों का मानती हैं.और 100 वर्षों के जीवन चक्र को शरीर की ,समाज की उपयोगिता आवश्यकता के दृष्टिकोण से चार भागों में विभाजित करती हैं. आश्रम का अर्थ भी श्रम यानि उघम हैं,अर्थात मनुष्य श्रम करता हुआ जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त करें. आश्रम का एक अन्य अर्थ ठहराव या पड़ाव भी हैं.ये वे ठहराव स्थल हैं जहाँ मनुष्य कुछ समय रूककर अपनी आगामी जीवन यात्रा की तैयारी करता हैं. महाभारत के अनुसार जीवन के चार आश्रम व्यक्तित्व और समाज के विकास की चार सीढ़ीयाँ हैं,जिन पर चढ़कर व्यक्ति परम ब्रम्ह को प्राप्त करता हैं. भारतीय संस्कृति के जो चार कर्तव्य (धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष ) हैं,इन कर्तव्यों के द्धारा समाज,परिवार,और व्यक्तित्व का विकास भी आश्रम व्यवस्था द्धारा ही संभव हैं.जब एक आश्रम में व्यक्ति सफल जीवन जीता हैं,तो उसका दूसरा आश्रम भी सफ़ल हो जाता हैं. मनुष्य जीवन को 100 वर्षों का मानकर चार आश्रमों में विभाजन किया हैं. आईए जानते हैं आश्रम और  आश्रम व्यवस्था की प्रासंगिकता और आश्रमों के बारें मे

गर्मीयों में लू [Heat stroke] से बचाव के तरीके

लू से बचाव गर्मीयों की बात करतें ही कई लोगों को गांव के वो  दादी नानी के आंगन यादों में उतर आतें हैं,क्या जमाना था हैं ना पूरी गर्मीयों की छुट्टी वही बितती थी.साथ में पूरी की पूरी हमउम्र के बच्चों की  टीम हुआ करती थी,जिनमें मोसी के बच्चें, मामा के बच्चें, मामी के भाई के बच्चें और न जानें कितनें हमउम्र बच्चों का जमावड़ा नानी के ,दादी के आँगन में हुआ करता था. तुलसी के गुणों के बारें में जानें आपको यह भी याद होगा जब आप सब बच्चें भरी दोपहरी में चुपके - चुपके  कच्ची केरी तोड़नें बागों में जाया करते थें,तो गर्म - गर्म हवा के थपेड़ों से कई बार बीमार भी पड़ें होंगें,तब दादी या नानी कहा करती थी,कि तुझे तो लू लगी हैं,चल उतार देती हूँ. तब नानी केसें चुट़की में बिना किसी डाँक्टर के आपकी लू उतार कर फिर से भला चंगा कर देती थी,हैं,ना. समय के साथ हमनें उन देशी तरीकों या दादी नानी के नुस्खों को विस्मृत कर दिया आईयें जानतें हैं,उन तरीकों के बारें में जो हमें लू से बचातें हैं.   परन्तु इससे पहलें लू के बारें में जान लेतें हैं. # लू कैसें लगती हैं ::: मनुष्य के शरीर

आम की खेती समस्याएँ और संभावनाँए [ mango crop ]

# 1.परिचय :::                             आम की उन्नत प्रजाति आम को फलों का राजा कहा गया हैं.यह फल अत्यंत पोष्टिक और स्वाद में बेजोड़ होता है.जिसको कच्चे से लगाकर पकने तक बड़े चाव से भिन्न - भिन्न रूप में खाया जाता हैं. भारतीय संस्कृति में आम इस कदर रचा है कि हर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम में आम के पत्तों का उपयोग सजावट और पूजा में किया जाता है। आम का वानस्पतिक नाम aam ka vansptik nam  मैंगीफेरा इंडिका हैं.इसकी प्रजातियों में भिन्नता के कारण लगभग हर जलवायु और मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती हैं. # 2.आम की विभिन्न किस्में ::: आम की सेैंकड़ो किस्में प्रचलित हैं,जिसमें कुछ नियमित फल देनें वाली हैं,तो कुछ 2 साल में फल देती हैं.इनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं. # 3.नियमित फल देनें वाली ::: • आम्रपाली • मल्लिका • नीलम • बैंगनपल्ली # 4.एकान्तरिक फल देनें वाली ::: जो किस्में 1 वर्ष के अन्तराल में फल देती हैं,उन्हें एकान्तरिक किस्में कहतें हैं जैसें • दशहरी • रानीरमन्ना • लंगड़ा • चौंसा • हापुस     # 5.आम क

जैविक खेती क्या हैं क्या खेती बिना किसानों की आय दोगुनी नही होगी [organic farming]

Satish Vyas - Organic Farming, Organic, What Is Organic Food # 1.जैविक खेती क्या हैं jevik kheti kya hair::: जैविक खेती jevik kheti  कृषि  करनें की पद्धति हैं.इस पद्धति में रासायनिक उर्वरकों,कीट़नाशकों के स्थान पर जैविक अवशेषों जैसें गोबर की खाद,केंचुआ खाद,हरी खाद ,फसल अवशेषों से बनी खाद तथा जैविक कीट़नाशकों का उपयोग कर फसल पैदा की जाती हैं. जैविक खेती jevik kheti भारत की वैदिक कृषि पद्धति हैं,जिसके दम पर भारतीय लोग 100 वर्षों तक जीवित रहतें थें. और उत्पादन भी अधिक होकर स्वास्थ्यप्रद होता था.किन्तु कालांतर में कम मेहनत व अधिक उत्पादन के चक्कर में फँसकर किसान रासायनिक खेती rasaynik kheti की ओर अग्रसर होता गया परिणामस्वरूप ज़मीन बंजर होती गयी,उत्पादन घट़ता गया तथा  स्वास्थ्य और उम्र भी धट़ती गई.  जैविक फसल स्वास्थ्य और मनुष्य की औसत उम्र कम होनें के मूल कारणों में रासायनिक खेती rasaynik kheti ही हैं,क्योंकि रासायनिक कीट़नाशकों और उर्वरकों के लगातार इस्तेमाल से धरती में मोजूद सूक्ष्म पौषक तत्वों जैसें लोहा,जस्ता,मैगनीज,बोरान,मालीब्डेनम और क्लोरिन मिट्टी से नष्ट

16 संस्कार न केवल हिन्दुओं के बल्कि मानव मात्र के - एक वृहद विश्लेषण [16 Sanskar ]

# 1.संस्कार एक  परिचय ::: भारतीय सभ्यता एँव संस्कृति में सदियों से संस्कार को विशिष्ट स्थान प्राप्त रहा हैं.संस्कार के कारण ही मनुष्य पशुओं से प्रथक होकर संस्कारित हुआ हैं.यदि शाब्दिक दृष्टिकोण से विचार करें तो संस्कार वह हैं जो मनुष्य को निराकार से साकार बनाकर समाज के लिये उपयोगी बना दें. संस्कार के माध्यम से ही मनुष्य शारिरीक,मानसिक,सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से परिष्कृत होता हैं. # 2.संस्कार क्यों ? ::: संस्कार के बिना भी मनुष्य जिन्दा रह सकता हैं,फिर संस्कार की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसका सीधा जवाब यह हैं कि प्राण तो प्रत्येक जीव जगत में मोजूद हैं,परन्तु भारतीय संस्कृति में विकसित संस्कार ने मनुष्य को खानें पीनें और मेथुन की क्रिया से परें हटकर आत्म विकास और समाज विकास हेतू प्रेरित और प्रोत्साहित किया ताकि मनुष्य आगामी पीढ़ी को बेहतर बना सकें.संस्कार ही मनुष्यों को दया,क्षमा,उचित ,अनुचित,में भेद करना सीखाते हैं. भारतीय जीवन दर्शन कुल 16 संस्कारों को व्यक्ति के विकास हेतू जीवन में क्रियान्वित करनें पर बल देता हैं. जो इस प्रकार है. # 1.गर्भाधान सं