रविवार, 27 नवंबर 2016

Donate for better world

पूरी दुनिया में भारत सहित विकासशील राष्ट्रों के गरीब नागरिक बेहतर स्वास्थ सेंवाओं के लियें प्रतीक्षारत हैं.बेहतर स्वास्थ सेंवाएँ मात्र प्रायवेट अस्पतालों में उपलब्ध हैं,जो इन गरीबों के बस की बात नहीं हैं,फलस्वरूप ये गरीब अकाल मोंत के आगोश में समा जातें हैं,एक सर्वे के मुताबिक लगभग 63% कैंसर,एड्स, टी.बी.ह्रदय रोग और अन्य रोगों के मरीजों के पास दवाईयों के लियें पैसें नही होतें दवाईयों की उपलब्धता में इनका सबकुछ बिक जाता हैं ,आईयें  इन ज़रूरतमंद लोगों के साथ खड़े होकर इनकी तक़लीफों को कम करने में उनकी मदद करें.यदि आप मदद करना चाहतें हैं,तो सम्पर्क करें.

Email - svyas845@gmail.com

शनिवार, 26 नवंबर 2016

सिकल सेल sickle cell में ज़रूरत जागरूकता की

#1.बीमारी का परिचय :::

सीकल सेल (sickle cell) रक्त से सम्बंधित बीमारी हैं,जिसमें रक्त में उपस्थित हिमोग्लोबीन (Haemoglobin) जो रक्त में स्वतंत्र रूप से घूमता हैं,असामान्य रूप में आपस में गुच्छा बना लेता हैं.फलस्वरूप लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) अपना रूप गोल से बदलकर सिकल (sickle) या हँसिया के शेप में परिवर्तित हो जाती हैं.

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

तनाव प्रबंधन Stress management

 


आजकल की भागती दोड़ती जीवनशैली में हर व्यक्ति इतना तनाव में जी रहा हैं,कि व्यक्ति का सामाजिक, पारिवारिक जीवन संकट़ग्रस्त सा हो गया हैं.यह तनाव कई कारणों से पैदा हो रहा हैं, जैसें असफलता,व्यापार में घाटा,प्रतिस्पर्धा,किसी प्रियजन का बिछड़ना आदि कहनें का तात्पर्य यही कि तनाव हर आमो - ख़ास के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका हैं.एक सर्वेक्षण के मुताबिक दुनिया की 33% आबादी गंभीर तनाव से गुजर रही हैं,और इसमें उन लोगों का प्रतिशत एक तिहाई हैं,जो समाज के शीर्ष पर हैं.




 लोग तनाव से निपट़ने के लिये तरह - तरह की गोली दवाईयों को भी आजमातें हैं,किन्तु तनाव आनें पर उसका प्रबंधन करना सीख लिया जावें तो शायद मनुष्य बिना दवा गोली के बेहतर और लम्बा जीवन जी सकता हैं.

 

#1.ऊँ के उच्चारण द्धारा तनाव प्रबंधन :::

अमेरिका भारत सहित अनेक देशों में ऊँ ध्वनि उच्चारण के मन मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया हैं,और इसके नतीजें उत्साह जनक रहें.अमेरिका में 2500 तनावग्रस्त व्यक्तियों को सुबह - शाम 20 बार गहराई से ऊँ उच्चारण करवाया गया ऐसा लगभग 6 माह तक लगातार किया गया 6 माह पश्चात इनके मस्तिष्क की मेंपिंग की गई जिसमें पाया गया कि ऊँ उच्चारित करनें वालें प्रत्येक व्यक्ति के मस्तिष्क में आक्सीजन का स्तर बढ़ गया जिससे उन हार्मोंनों के सक्रिय होनें में मदद मिली जो मूड़ को बेहतर बनातें हैं.
अत: तनाव दूर करनें में ऊँ का उच्चारण किसी चमत्कार से कम नहीं हैं,यह बात हमारी रिषी - मुनि वर्षों से कहतें आयें हैं.ऊँ का उच्चारण तनाव को घट़ाने के अलावा हमारें आसपास के वातावरण को स्पंदित कर सकारात्मक बनाता हैं.
stress
 stress


#2.रंगों के द्धारा तनाव प्रबंधन :::

भारतीय समाज और संस्कृति रंगों के बिना अधूरी हैं,और इसका scientific कारण भी हैं,कि रंग मनुष्य को प्रफुल्लित कर मस्तिष्क को तरोताजा रखतें हैं.जैसें
० सफेद रंग असीम शांति प्रदान करता हैं.
लाल रंग ऊर्जा का संचार करता हैं.
हरा जीवन में खुशियों के संचार का रंग हैं.
केशरिया त्याग और बलिदान सीखाता हैं.
तो जब भी जीवन तनाव में हो इन रंगों को अपनें पहनावें में सम्मिलित कर इन रंगों से प्रेरणा अवश्य ग्रहण करें.

स्वस्थ सामाजिक जीवन के 3 पीलर

#3.ख़ुशबू द्धारा तनाव प्रबंधन :::

हर आदमी ख़ुशबू पसंद करता हैं,चाहे वह किसी भी धर्म,जाति,समाज या सम्प्रदाय को मानता हो अत: तनाव की स्थिति में अपनी मनपसंद प्राकृतिक ख़ुशबू को अपनें कपड़ो ,घरों और अपनी मनपसंद वस्तुओं में रखकर देखिये तनाव छूमतंर हो जायेगा.

#4.सकारात्मक चिंतन द्धारा तनाव प्रबंधन :::

तनाव के समय मनुष्य का मन - मस्तिष्क सबसे ज्यादा नकारात्मक होता हैं.ऐसी हालात में चिंतन भी नकारात्मक ही होगा ,वास्तव में नकारात्मक चिंतन से आयु,स्वास्थ, तेज क्षीण हो जातें हैं.अत: कहा जाता हैं,कि दुख : में भगवत स्मरण करना चाहियें, अर्थात सकारात्मक चिंतन करना चाहियें."महात्मा गाँधी" कहा करते थे कि यदि मेंरा मन उदास होता हैं, तो में हमेशा उस व्यक्ति की कल्पना करता हूँ जो दीन - हीन हैं,और समाज के अन्तिम छोर पर खड़ा हैं.ऐसा सोचनें से मैं पुन: उस व्यक्ति के कल्याण में जुट़ जाता हूँ.
'हरिवंशराय बच्चन' अपनी कविता के माध्यम से संदेश देतें हैं,कि " कोशिश करनें वालों की कभी हार नहीं होती " अत : इन महापुरूषों के जीवन से प्रेरणा ग्रहण कर सकारात्मक चिंतन करें.

#5.ख़ान पान द्धारा तनाव प्रबंधन :::

कुछ खाद्य पदार्थ हमारे मस्तिष्क में शांति और स्फूर्ति का संचार करते हैं जैसे काजू,बादाम,अखरोट,अंजीर,अलसी हरी सब्जिया और ताजा मौसमी फल इन्हें अपनें खानें की आदतों में जरूर शामिल करें साथ ही नशा और तम्बाकू से दूर रहे.नशा करने और तम्बाकू के सेवन से शरीर में आक्सीजन का स्तर घटता हैं,जो अंतत : तनाव बढ़ानें में मदद करता हैं.

#6.पर्यटन के द्धारा तनाव प्रबंधन :::

कुछ जगह ऐसी होती हैं,जहाँ पहुँचते ही मस्तिष्क तरोताजा होकर सारें तनाव दूर हो जातें हैं,जैसे हील स्टेशन या कोई समुद्री किनारा या फिर कोई धार्मिक स्थान ,वैसे भी देखा गया हैं,कि जो लोग नियमित रूप से घूमनें जातें हैं उनका स्वास्थ और आयु सदैव उनका साथ लम्बें समय तक निभातें हैं.

#7.योग द्धारा तनाव प्रबंधन :::

योगिक क्रियाएँ जैसें कपालभाँति, अनुलोम - विलोम,प्राणायाम और भ्रामरी करनें से तनाव कभी भी मनुष्य के साथ नही रहता हैं.यह बात अनेक शोधों द्धारा साबित हो चुकी हैं.गहरी श्वास लेकर यदि हम अपना ध्यान उन आती जाती श्वास पर केन्द्रित कर कल्पना करें की प्रत्येक अन्दर जानें वाली श्वास हमारी रगो में जाकर असीम शांति प्रदान कर रही हैं, साथ ही प्रत्येक बाहर जानें वाली श्वास जीवन से निराशा दुख को बाहर निकाल रही हैं.यह प्रयोग तनाव घटानें का अचूक उपाय हैं.

# 8. गेंद द्धारा तनाव प्रबंधन :::

रबर की छोटी बाल जो कि कई शारीरिक कसरतों में प्रयोग की जाती हैं,तनाव से निपट़नें का सबसे सरल और सुरक्षित तरीका हैं,हाथ से बाल को बार - बार दबानें से नसों पर दबाव पड़ता हैं,जिससे नसे फैल जाती हैं,और आक्सीजन का अधिक प्रवाह नसों में होता हैं,यह आक्सीजन मस्तिष्क में जाकर तनाव को कम करनें में मदद करती हैं.
बाल को दबानें से एक्यूप्रेशर भी हो जाता हैं,क्योंकि ये हथेली के कई पाइंट पर दबाव डालकर आंतरिक आराम दिलाती हैं.

# 9.संगीत द्धारा तनाव प्रबंधन ::

संगीत की खोज मानव ने अपने खाली समय में मनोरंजन के लिये ही की थी,और वास्तव में संगीत ने मानव मन को सदैंव प्रफुल्लित ही किया हैं.यदि तनाव की अवस्था में मनपसंद संगीत सुना जाये तो शरीर से कार्टीसोल हार्मोंन का स्तर कम हो जाता हैं,जो तनाव उत्पन्न करने वाला प्रमुख हार्मोंन हैं.

जापान के शोधकर्ताओं के मुताबिक यदि आप तनाव में हैं,ओर कोई भावनात्मक फिल्म देखतें हैं,तो तनाव के स्तर में जबर्दस्त कमी दर्ज होती हैं.




गुरुवार, 24 नवंबर 2016

health news ,स्वास्थ समाचार

#1.हार्ट अटेक का पूर्वानुमान लगाने वाली मशीन के विकास के लिये शोधकर्ता प्रयासरत :::

समाचारों के अनुसार शोधकर्ता एक ऐसे यंत्र का अविष्कार करनें मे लगे हुये हैं,जिससे हार्ट अटेक का संकेत समय रहतें मिल जायें और व्यक्ति का समय रहते इलाज कर जान बचाई जा सकें.

यह यंत्र माचिस की डिब्बी के आकार का होगा जो मनुष्य की कालर बोन के निचें फीट किया जायेगा,दिल में असामान्य गतिविविधि की आशंका होनें पर यह यंत्र उन गतिविविधियों को रिकार्ड कर कम्पन के माध्यम से सूचना दे देगा जो तुरन्त रोगी और उससे सम्बद्ध अस्पताल तक पहुँच जायेगी.

इस यंत्र के अस्तित्व में आने पर लाखों ऐसे रोगी की जान बचायी जा सकेगी जिनका पारिवारिक इतिहास ह्रदय रोगों का रहा हैं,या जो ह्रदय रोग से ग्रसित हैं.


#2 .टेली मेडिसीन (Tele medicine) द्धारा सूदूर क्षेत्रों में स्वास्थ सेंवाओं की बढ़ती लोकप्रियता :::

भारत सहित अनेक विकसित और विकासशील राष्ट्रों में सूदूर ग्रामीण अँचलों में स्वास्थ सुविधायें उपलब्ध करवाना शासन के लियें हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा हैं,अब इस चुनोंती को टेली मेडिसीन के माध्यम से पूरा किया जा रहा हैं.


इस प्रणाली में गाँव में स्थित कामन सर्विस सेन्टर (csc) का उपयोग किया जाता हैं.यहाँ स्थित कम्प्यूटर इन्टरनेट़ के माध्यम से देश के प्रसिद्ध अस्पतालों से जुड़ा रहता हैं.गाँवों में स्थित काँमन सर्विस सेन्टर के आपरेटर को एक विशेष कीट़ दी जाती हैं,जो यूरिन,ब्लड़ प्रेशर और खून की जाँच करती हैं,यह कीट़ कम्प्यूटर से जुडकर ब्लड़,यूरिन,और ब्लड़ प्रेशर से संबधित परिणाम सीधे चिकित्सक के कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करती हैं,जिससे चिकित्सतक बीमारी को पहचान कर उपचार करता हैं.लिखी गई दवाईयाँ आपरेटर के पास उपलब्ध हो जाती हैं.


इस प्रणाली से रोगी का बहुमूल्य समय और पैसा बच जाता हैं,जो वह गाँव और शहर के बीच यात्रा करने में खर्च करता हैं,साथ विश्वसतरीय अस्पतालों से इलाज का लाभ भी मिलता हैं.

#3.कैंसर के लियें Nano particle :::

university of Toranto के शोधकर्ता वारेन चान ने करीब दस सालों तक शोध करनें के उपरान्त  कैंसर ट्यूमर तक दवा पँहुचानें वालें विशेष नेनो पार्टीकल की खोज की हैं.


इससे दवा मात्र कैंसर ट्यूमर को ही नष्ट करेगी जिससे मरीज़ के शरीर के साथ स्वस्थ कोशिकाओं पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा.अभी तक कैंसर के लिये दी जानें वाली दवाओं के अनेक साईड़ इफेक्ट़ देखनें को मिलतें हैं,जैसें बालों का झड़ना,उल्टी होना,भोजन के प्रति अरूचि आदि शोधकर्ता इस खोज को कैंसर उन्मूलन की दिशा में मील का पत्थर मान रहें हैं.

# 4.एड्स की नई दवा का परीक्षण :::

एड्स को जड़ से समाप्त करनें हेतू शोधकर्ता एक ऐसी दवाई का परीक्षण कर रहें हैं,जो एक बार की ख़ुराक में ही एड्स को जड़ से समाप्त कर देगी.समाचार पत्रों के मुताबिक यह परीक्षण दक्षिण अफ्रीका में हो रहा हैं,इसको करनी वाली संस्था HVTAN एड्स से जुड़े मामलों का लम्बें समय से शोध कर रही हैं.

# 5.आध्यात्मिक होना स्वास्थ के लिये लाभप्रद :::

अमेरिका के " The State University "के शोधकर्ता proffer Christopher shtetel ने अपनें शोध के द्धारा निष्कर्ष निकाला कि यदि आप नियमित रूप से धार्मिक स्थलों पर प्रार्थना करतें हैं,या किसी धार्मिक संस्था के साथ जुड़े रहतें हैं,तो इससे आपकी स्वस्थ अनुभव करनें की मनोवृत्ति विकसित होती हैं,जो अंतत:स्वस्थ रहनें में मदद करती हैं.


जबकि जो लोग पूर्व में आस्तिक थे किन्तु धिरें - धिरें नास्तिकता की ओर अग्रसर होतें गये उनमें अपनें आप को स्वस्थ माननें की दर आस्तिक लोगों की तुलना में आधी हो गई.यह शोध अलग - अलग धर्मावलम्बीयों के बीच किया गया था.

#6. खेलनें से बढ़ती है रोगप्रतिरोधकता :::

जो बच्चें अपनें माता - पिता की डाँट के डर से धूल मिट्टी में नही खेलतें और सदैव साफ स्वच्छ कीटाणुरहित माहोल में रहतें हैं,उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता उन बच्चों की तुलना में बहुत कमज़ोर रहती हैं,जो हफ्तें में एक या दो बार मैदान में धूल मिट्टी में खेलतें हैं.

हमनें एक वर्ष तक बच्चों के दो समूह बनाकर विश्लेषण किया तो पता चला कि पहला वाला समूह जो सिर्फ स्कूल और उसके बाद सीधे घर चला जाता था में स्वास्थगत समस्याएँ जैसें एलर्जी, एनिमिया, पेट दर्द ,सर्दी - खाँसी,बुखार हर महिनें प्रकट होती थी.

जबकि दूसरें वाला समूह जो स्कूल के बाद एक से दो घंटा मैदान मेंमें धूल,मिट्टी में खेलता था,के सदस्यों में स्वास्थ समस्याएँ लगभग  न के बराबर थी.

#7. देर रात का भोजन बढ़ाता है मोटापा :::

कैलिफोर्निया के साल्क इंस्टीटयूट में कार्यरत शोधकर्ता सच्चिनानंद पंडा के अनुसार यदि आप देर रात तक भोजन करतें हैं,तो आपके मोटापे से ग्रसित होनें की प्रबल संभावना हैं,क्योंकि पेट़ भरा रहनें से ब्राउन फेट सक्रिय नहीं हो पाता जिससे कि शरीर की कैलोरी बर्न नहीं हो पाती हैं.

# 8.कैंसर के लिये म्यूजिक थैरेपी है लाभप्रद :::

कैंसर रोगीयों के लिये यह ख़बर बहुत उम्मीद वाली हैं,कि यदि कैंसर रोगी अपना मनपसंद संगीत सुनें तो इससे कैंसर के डर और इससे उपजे तनाव को काफी कम किया जा सकता हैं,यह शोध कैंसर रिसर्च यूनाइटेड़ किंगड़म द्धारा कैंसर से पीड़ित कई रोगीयों पर संगीत का प्रभाव जाननें के लिये किया गया था.

# 9.तनाव के समय महिलाओं की गर्भधारण क्षमता कमज़ोर हो जाती हैं :::

अमेरिका के बोस्टन विश्वविधालय के शोध में पता चला कि यदि महिलायें अवसाद के दोरान गर्भवती होनें का प्लान बनाती हैं,तो उनकी गर्भधारण क्षमता 38% तक कम हो जाती हैं.इसके अलावा उनके मासिक चक्र पर भी तनाव का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और चक्र अनियमित हो जाता हैं.

#10.लम्बी औरतों को स्तन कैंसर का अधिक ख़तरा रहता हैं :::

हालैंड़ के शोधकर्ताओं के अनुसार लम्बी महिलाओं का विकास कम उम्र से ही शुरू हो जाता हैं,फलस्वरूप ऐसी महिलाओं में हार्मोंन का बदलाव भी बहुत तेज़ी के साथ होता हैं,ऐसे हार्मोंन बदलाव के दोरान स्तन कैंसर की आशंका बढ़ जाती हैं.

# 11.परिवार का साथ लम्बी उम्र देता हैं :::

  • टोरेंटो विश्वविधालय के जेम्स लेवनिक की मानें तो जो लोग परिवार के साथ रहतें हैं,उनकी उम्र लम्बी होनें की संभावना उन लोगों के मुकाबले दुगनी होती हैं,जो अकेले रहतें हैं.क्योंकि परिवार भावनात्मक सुरक्षा को बढ़ाकर अन्तत: उम्र के लम्बी होनें में मदद करता हैं.


# 12.शोरशराबें  में रहनें वालों को ह्रदयघात की अधिक संभावना --

जर्मनी [Germany] के Dresden university के शोधकर्ताओं का कहना हैं,कि जो लोग शोर भरी सड़क या अत्यधिक व्यस्त रेलमार्ग के निकट़ रहतें हैं,उनमें ह्रदयघात का ख़तरा उन लोगों की तुलना में अधिक पाया जाता हैं,जो शांत प्रकृति के बीच रहतें हैं,शोधकर्ताओं के अनुसार इस शोध से ह्रदयघात और ध्वनि प्रदूषण के बीच सम्बधों को समझने में मदद मिलेगी.


# 13.वायु प्रदूषण से होनें वाली मौंतों में भारत का विश्व में दूसरा स्थान :::

अमेरिका के हेल्थ इफेक्ट़ इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के  अनुसार वायु के प्रमुख प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 के कारण भारत में मरने वाले लोगों की सँख्या 11 लाख सालाना हैं.और भारत चीन के बाद दूसरा देश हैं,जहाँ इतनी मौत हो रही हैं.यह सँख्या लगातार बढ़ रही हैं.


सन् 1990 के बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं.जानकारों के मुताबिक यदि इसी रफ़्तार से वायु प्रदूषण  जारी रहा तो अगले पाँच वर्षों में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा.

# 13. मधुमेह का इलाज कड़ी कसरत :::


लंदन एबर्टे यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने लम्बी खोज उपरांत दावा किया हैं कि कड़ी कसरत टाइप 2 मधुमेह को दूर भगा सकती हैं.यदि व्यक्ति रोज मात्र 2 मिनिट कड़ी कसरत कर लें,तो उसे मधुमेह नही होगा.









Kasisadi oil,Shadbindu oil ,Somraj oil

 

Kasisadi oil :::

content :::


name.      | property       | chemical 

kasis.        Raktshodhak.   FeSo4
(Iron sul) vranropak.       7H20

Saunth.      |Arsoghan,     | citral,
(Zingiber)   Deepniy.         Gingerol,
officinale                              Borneal
                                                 camphen

Danti.       | Deepan,          | starch
                    Arshoghna ,    
                    kushdhgan.                      

Pippli.      | Rasayan,        | piperine
(piper        vaathar,                 
longum).  Deepan,            
                    jwarhar.         
                    shwashar.       

vaibidang|kusthaghana,|Embelin,
                     Balya,pachn     vilangin
                     Anuloman.        Quercitl

kalihari.  | krimighan,      |colchicn
(Gloriosa  kusthaghan.      sitosterl
superba)                                  Bechun

shodhit til tel,kaner,pashanbhed.

Uses :::

This oil is Antiseptic and disinfectant. it's very effective on piles,fistula and any type of wound

Dosage :::

local application on the affected part as directed by physian.


Shadbindu oil :::

Shadbindu oil is herbal formulation prepared by mixing different herbs like

० Arand mul Tagar.
० Sounf (Anethum sowa)
० Jeevanti.
० Rasna.
० Sendha Namak.
० Dalchini (cinnamomum zeylanicum).
० vaibidang (Embelia ribes).
० Mulethi (Glycyrrihize glabra).
० Goat milk.
० Bhrangraj swaras.

Uses :::

० It's useful in sinus chronic rhinitis,and gingivitis conjunctivitis.
० it's one of the most popular oil for shiroroga.

Dosage :::

As directed by physian.


Somraj oil :::

Content :::

० Bavachi (Psoralea corylifolia).
० Haldi
० Daruhaldi (Berber is aristata).
० sarso.
० kutaj.
० karanj.
० chakramard.
० Amaltas .
० sarso tail.

Uses :::

leprosy, skin problems like leucoderma,dustavrana,Nazi vrana etc.

Dosage :::

local application at the affected organ.

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

पेट के छाले या पेप्टिक अल्सर कारण लक्षण और बचाव

1.परिचय :::

पेट के छाले
पेप्टिक अल्सर
भारतीय खान पान मिर्च मसालों के बिना अधूरा माना जाता हैं ,और मिर्च मसाला खानें के बाद यदि पेट में एसीडीटी की समस्या हो तो हम भारतीय इसे साधारण समस्या के रूप में लेते हैं,किन्तु यदि समस्या बार - बार उत्पन्न हो रही हो तो हमें सचेत हो जाना चाहियें कि कही यह पेप्टिक अल्सर (peptic ulcer) तो नहीं हैं. 


पेप्टिक अल्सर होनें का मुख्य कारण हेलिकोबैक्टर पायलोरी या H.pylori बेक्टेरिया हैं.

यह बेक्टेरिया पेट की सतह पर  चिपककर एसिड़ रोकनें वाली दीवार को संक्रमित कर दीवार को तोड़ देता हैं, फलस्वरूप पेट की अन्दरूनी दीवार पर छाले बन जातें हैं.स्थिति गंभीर होनें पर छोटी आँत में छेद भी हो सकते हैं.

2.कारण :::

० रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना.

० पेट के उपचार में प्रयोग होनें वाली दवाईयों से.

० जीवनशैली की अनियमितता से.

० कैंसर की वज़ह से.

० आनुवांशिक कारको की वज़ह से.

० लगातार दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल से.

० दूषित खाद्य पदार्थों जैसें सिंथेटिक दूध,मक्खी बैठी हुई खाद्य सामग्री इत्यादि से.

3.लक्षण :::

० पेट के ऊपरी हिस्से मे तीव्र दर्द .

० पेट का फूलना.

० सीने मे तेज जलन.

० खट्टी डकार.

० उल्टी में खून के कतरे आना.

० मल मे खून आना .

4.प्रबंधन :::

पेप्टिक अल्सर या पेट के छाले होनें पर कई बातें महत्वपूर्ण हो जाती हैं,जैसे

० ज्यादा एसिडिक फूड़ का सेवन नहीं करना चाहियें जैसे अचार,मिर्च मसालेदार भोजन आदि.

० शराब और तम्बाकू का सेवन इस बीमारी में जानलेवा साबित हो सकता हैं,अत : इनसे परहेज करें.

० तनाव न लें.

० भोजन निश्चित समय पर और आराम से खूब चबाकर करें.

० भोजन में रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करें.

० नियमित पैदल घूमनें को दिनचर्या में शामिल करें.

० प्रतिदिन लगभग 12 - 15 गिलास पानी पीयें.

० खाली पेट नही रहे .

० योगिक क्रियाओं जैसें कपालभाँति नियमित रूप से करें.

० फलों के रस के बजाय साबुत फलों का सेवन करें.

० दही या प्रोबायोटिक दही का सेवन करें.

० आयुर्वैदिक दवाईयाँ जैसें सूतशेखर रस,शंख वटी का सेवन वैघकीय परामर्श से करें.

० बैक्टेरिया को नष्ट करनें वाली औषधियों का चयन चिकित्सतकीय परीक्षणों के बाद करें.



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● यह भी पढ़े👇👇👇

पेप्टिक अल्सर में मशरूम के प्रयोग के बारें में जानियें

● इमली के बारें में जनियें


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5.मुलेठी :::

० मुलेठी में ग्लाइकोसाइड़ (Glycocyde) और ट्राइटर्पी नामक तत्व पायें जातें हैं,जो एसीडीटी को समाप्त कर पेट़ की आंतरिक दीवारों की अल्सर से रक्षा करता हैं.अल्सर होनें पर भी इसका प्रयोग बहुत फायदेमंद होता हैं.










गुरुवार, 3 नवंबर 2016

Digital Disorder डिजीटल डिसआर्डर

सोशल मीडिया लत
 डिजिटल डिसऑर्डर
मनुष्य अपनी उन्नति के नित नये कीर्तिमान सदा से ही रचता आ रहा हैं. उसके इसी प्रयास ने भौगोलिक दूरियों को भी सिमटा कर दुनिया को छोटा सा गाँव बना दिया है.जबसे मोबाइल का अविष्कार हुआ है और सोशल नेट़वर्किंग के माध्यम से लोग एक दूसरे से जुड़नें लगें हैं,तबसे ही स्वास्थ पर इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखने में आ रहे हैं ।

आईयें जानतें हैं सोशल मिड़िया (social media) के कुछ नकारात्मक प्रभावों के बारें में

1).common mental disorder syndrome (c.m.d.) :::

 सोशल मिड़िया पर  सक्रिय रहनें वाला व्यक्ति यदि बार - बार अपनें पोस्ट पर आने वाले कमेन्टस,लाईक्स चेक करता हैं,बार - बार मेल बाक्स चेक करता हैं.और ऐसा वह अपनें महत्वपूर्ण कार्य करनें के दोरान ,आधी रात में बिस्तर से उठकर,करता हैं, और अपनें पोस्ट पर आने वाली नकारात्मक कमेंट़ ,कम लाईक्स से डिप्रेस्ड़, बैचेन,चिड़चिड़ा,और अपने ज़रूरी कार्यों को भी मन लगाकर नहीं कर पाता हैं, तो ऐसा व्यक्ति मनोचिकित्सकों की राय में common mental disorder syndrome से ग्रसित माना जाता हैं.

c.m.d.से पीड़ित व्यक्ति में उच्च रक्तचाप, टेकिकार्ड़िया जैसी समस्या आम हो जाती हैं. कभी - कभी सोशल मीड़िया तनाव को इतना बढ़ा देता है कि व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता हैं. आत्महत्या करनें की यह प्रवृत्ति युवावर्ग में अधिक देखी जा रही हैं क्योंकि युवावर्ग सोशल साइट़ पर सक्रिय रहनें के साथ केरियर और पढ़ाई के दबाव में संतुलन स्थापित करनें में असफल हो रहा हैं.

2).सेल्फी सनक :::


आजकल सेल्फी लेकर सोशल मीड़िया पर पोस्ट करना हर किसी का शगल बनता जा रहा हैं,किन्तु हर ज़गह ,बिना उचित अवसर के सेल्फी लेना सनक की श्रेणी में आता हैं,और कई बार व्यक्ति सेल्फी में इतना मशगुल हो जाता हैं,कि अपनी जान तक दाँव पर लगा देता हैं. 

विश्व में होनें वाली अनेक सड़क दुर्घट़नाओं,रेल दुर्घट़नाओं,वायु दुर्घट़नाओं, जल दुर्घट़नाओं का प्रमुख कारण सेल्फी बनता जा रहा हैं,ऐसा व्यक्ति जो कार चलाते,रेल चलाते,वायुयान चलाते सेल्फी लेता हैं वह मानव बम के समान होता हैं,क्योंकि वह अपनें साथ अन्य व्यक्तियों की जान का दुश्मन बन जाता हैं.

3).टेक्स्ट नेक (Text neck) :::

लगातार एक ही पोजीशन में मोबाइल पर गर्दन झुकाए रहनें से कंधों ,गर्दन और रीढ़ की हड्डीयों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता हैं,यह दबाव यदि लगातार पड़ता रहे तो गर्दन और कंधों में तीव्र दर्द प्रारंभ हो सकता हैं,और गर्दन और कंधे एक जैसी पोजिशन में रह जातें हैं, यह अवस्था टेक्स्ट नेक कहलाती हैं,जिसके लिये सर्जरी तक करना पड़ सकती हैं.

4)Digital eye strain :::

कम्प्यूटर ,मोबाइल से निकलनें वाली नीली रोशनी स्क्रीन को स्पष्ट दिखानें के लिये प्रयोग की जाती हैं,क्योंकि यह हाई एनर्जी और शार्ट वेव लेंग्थ वाली होती हैं .कम्प्यूटर ,मोबाइल पर लगातार बिना किसी रूकावट के काम करतें रहनें से या रात को अंधेरे में इन पर काम करना आँखों के लिये कई समस्याओं का कारक होता हैं, Digital eye strain इनमें से एक हैं. इस समस्या के होनें पर

 ० व्यक्ति की आँखों का पानी सूख जाता हैं.

० आँखों में सूजन आ जाता हैं.

० आँखों के पिछले भाग में तीव्र दर्द होता हैं.जिससे नींद में बाधा आती है.

० पलकें बार - बार झपकती हैं.

० आँखों की कोशिकाएँ स्थाई रूप से खत्म होकर आदमी अँधा हो जाता हैं.

० आँखे फडफडाती हैं,जिसकी वज़ह से बेचेनी बढ़ जाती हैं.

5).खेल एडिक्सन :::

कुछ लोग लगातार मोबाइल कम्प्यूटर पर गेम खेलनें के इतनें आदि हो जाते हैं,कि इनका अधिकांश समय गेम्स की अलग - अलग स्टेप को पार करनें में खत्म होता हैं,ऐसे लोग जब तक अगली स्टेप नही पार करतें तब तक मोबाइल को नहीं छोड़तें हैं,फलस्वरूप इनकी बाँडी क्लाक परिवर्तित होकर अनेक हार्मोंनल समस्या पैदा हो जाती हैं,जैसें उल्टी ,चक्कर आनें की समस्या जो लगातार बढ़ती रहती हैं.

6).कार्पल टनल सिन्ड्रोम (carpal tunal syndrome) :::

लगातार मेसेज टाइप करनें या टच स्क्रीन पर ऊगंली ऊपर निचें करतें रहनें से हाथों की ऊँगलियों,माँसपेशियों में तीव्र दर्द और झनझनाहट़ पैदा हो जाती हैं,यह अवस्था कार्पल टनल सिन्ड्रोम कहलाती हैं.

7).समाधान :::

डिजीटल डिसआर्डर की समस्या से निपट़नें के लिये आवश्यक हैं,कि व्यक्ति सोशल मीड़िया पर सक्रि रहनें का निश्चित समय बना लें.

० बार - बार ई मेल ,और सोशल मीड़िया स्टेटस चेक करनें से बचें.

० यदि कम्प्यूटर पर काम करतें हैं,तो निश्चित करें कि एक डेढ़ घंटे के बाद 5 मिनिट का काम से अवकाश लेकर घूमें और आँखों से 5 बार 20 फीट़ तक देंखें.

० अंधेरें में मोबाइल या कम्प्यूटर का कदापि इस्तेमाल न करें.

० लोगों से सोशल मीड़िया पर चेट करनें के अतिरिक्त व्यक्तिगत रूप से मिलना सुनिश्चित करें.

० सोशल मीड़िया पर मिलनें वाली प्रतिक्रिया को सकारात्मक रूप से लें.




प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...