गुरुवार, 26 मार्च 2020

Allergy क्या होती हैं किन - किन चीजों से मनुष्य में एलर्जी हो सकती हैं

Allergy क्या होती हैं

एलर्जी कितनें प्रकार की होती हैं
 Allergy क्या होती हैं

"Allergy शरीर के द्धारा की जानें वाली एक ऐसी प्रतिक्रिया हैं जो तब होती हैं जब मनुष्य का शरीर किसी ऐसी वस्तु या Antigen या एलर्जन के सम्पर्क में आता हैं।"


जब मनुष्य का शरीर किसी Allergic पदार्थों के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर द्धारा असाधारण प्रतिक्रिया होती हैं । जैसें छींके आना,आँखों से पानी आना,त्वचा पर खुजली,चकते पडना ,अस्थमा होना आदि ।


जो पदार्थ Allergy पैदा करतें हैं उन्हें एलर्जन या एंटीजन कहतें हैं ।



Allergy में शरीर कैसें प्रतिक्रिया व्यक्त करता हैं ?




जब कोई Antigen पदार्थ शरीर के सम्पर्क में आता हैं तो शरीर इस पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता हैं और उस पदार्थ को नष्ट़ करनें के लियें एंटीबाडी  का निर्माण करना शुरू कर देता हैं । फिर एंटीजन और एंटीबाड़ी में संघर्ष होता हैं । संघर्ष की वजह से एक पदार्थ "Histamine" पैदा होता हैं । यह Histamine ही एलर्जी के लिये उत्तरदायी होता हैं ।



किन - किन चीजों से Allergy होती हैं ?




Allergy के लियें कई कारक उत्तरदायी होतें हैं 



1.धूल धुँए और परागकणों से एलर्जी




जब व्यक्ति धूल धुंए के सम्पर्क में आता हैं तो एलर्जी पैदा होती हैं जैसें छींक आना,आँखों से पानी आना ,चेहरा लाल होना,अस्थमा होना ,शरीर पर चकतें निकलना ,खुजली होना आदि ।


फूलों के परागकण के सम्पर्क में आनें से भी व्यक्ति एलर्जी से ग्रस्त हो जाता हैं । 




2.खानें की चीजों से एलर्जी 



खाद्य पदार्थों में मोजूद प्रोटीन शरीर में एलर्जी पैदा करता हैं । जो खाद्य पदार्थ एलर्जी पैदा करतें हैं उनमें शामिल हैं गैंहू,चावल,दूध,अंडें,मछली,मूंगफली,सोयाबीन,खट्टे पदार्थ आदि ।



इन पदार्थों के सेवन से पेट में मरोड होना,दस्त लगना,मुहँ में छालें होना,उल्टी होना,पेट में गैस बनना आदि समस्याएँ पैदा हो जाती हैं ।



3.दवाईयों से एलर्जी 



कुछ विशेष दवाईयों जैसें पेनिसिलीन,पैरासीटामोल,और अन्य प्रकार की दवाईयों से एलर्जी पैदा होती हैं । इस प्रकार की एलर्जी में शरीर पर सूजन आना, पेट में छालें हो जाना, शरीर पर चकतें हो जाना, आदि समस्या हो जाती हैं ।


दवाईयों से होनें वाली एलर्जी कभी - कभी जानलेवा भी सिद्ध हो सकती हैं अत: दवाई लेने के बाद समस्या बढ़ती हैं तो एलर्जी टेस्ट अवश्य करना चाहियें ।


टीकाकरण के बाद होनें वाली एलर्जी बहुत गंभीर मानी जाती हैं । अत : टीकाकरण के पूर्व एलर्जी का इतिहास अवश्य पता करना चाहियें ।




4.मौसम के बदलाव से एलर्जी 




मौसम भी कई लोगों के लिये एलर्जी का कारक  होता हैं । सर्दी में कई लोगों को परेशानी होती हैं,कई लोगों को गर्मी,में परेशानी होती हैं ।

इसके अलावा कई लोगों को धूप और नमी से भी एलर्जी होती हैं ।


मौसम बदलाव से त्वचा पर चकतें ,खुजली ,अस्थमा, नाक से पानी निकलना,आंखों में खुजली आदि समस्या पैदा हो जाती हैं ।



5.जानवरों से एलर्जी 



जानवरों के लार,त्वचा मूत्र ,बाल और पसीनें में मोजूद एलर्जिन तत्व हवा में घूलकर सांस के माध्यम से शरीर में पहुँचकर एलर्जी पैदा करतें हैं ।




6.कपड़ों से एलर्जी 



कई लोगों को काटन ,सिंधेटिक कपड़ों और रबड़ से एलर्जी होती हैं । इन एलर्जन को छूनें पहनने या घर में रखनें से एलर्जी पैदा हो जाती हैं । 




7.गंध से एलर्जी 



कई लोगों को परफ्यूम की तेज गंध,मिर्च मसालों की छोंक,फूलों की खूशबू ,पेंट वार्निश की गंध से एलर्जी हो जाती हैं । इस प्रकार की एलर्जी में आँख नाक से पानी निकलना,छींके आना,सिरदर्द होना आदि समस्या हो जाती हैं ।



8.कीड़ों के काटनें पर एलर्जी 



चींटी,ततैया,मधुमक्खी, बिच्छू ,मच्छर आदि के काटनें से व्यक्ति को पूरे शरीर में खुजली चलती हैं। चकते उठ जातें हैं । अस्थमा हो जाता हैं।  कभी - कभी व्यक्ति बैहोश भी हो जाता हैं ।




9.धातुओं से एलर्जी




धातुएँ जैसें सोना चाँदी तांबा,पीतल आदि धारण करनें वालों में जिस जगह उसनें ये धातु धारण की हैं उस जगह लाल होना, सूजन आना ,सफेद दाग होना आदि समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।



एलर्जी एक आम समस्या हैं जिससे पीडित व्यक्ति एंटी एलर्जिक दवाई लेकर कुछ समय तक फौरी राहत प्राप्त कर लेता हैं किन्तु अब तक इसका सर्वमान्य उपचार नही खोजा जा सका हैं । सिर्फ एलर्जन पदार्थों के सम्पर्क में आनें से बचना ही इसका इलाज हैं ।


योग की कुछ क्रियाएँ जैसें प्राणायाम,भ्रामरी ,कपालभाँति आदि एलर्जी के विरूद्ध प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाती हैं ।

इसके अलावा गर्म पानी का सेवन,अदरक,लौंग,तुलसी,हल्दी ,और काली मिर्च में पायें जानें वाले एन्टी एलर्जिक गुण शरीर को एलर्जी से बचातें हैं ।











क्या हैं एलर्जिक रायनाइटिस--:


अस्थमा
 allergic rhinitis


Rhinitis allergy एक प्रकार की नाक की एलर्जी हैं.नाक साँस लेनें के अलावा हवा को फिल्टर करनें का काम भी करता हैं.जब बाहरी कण जैसे धूल,परागकण आदि नाक द्धारा शरीर में प्रवेश करतें हैं,तो राइनाइटिस एलर्जी का खतरा बढ़ जाता हैं.यह किसी भी मौसम में और उमृ में हो सकता हैं.


प्रकार-



यह दो प्रकार का होता हैं-



१.मौसमी -यह किसी विशेष मौसम में होता  हैं.



२.स्थाई- यह साल भर पीड़ित को अपनी चपेट में लेकर रखता हैं.मौसम बदलनें का इस पर कोई प्रभाव नहीं होता हैं,बल्कि किसी खास मौसम में यह और अधिक विकराल रूप धारण कर लेता हैं.



कारण-



१.परागकण


२.धूल,धुआँ,प्रदूषण,


३.नमी


४.जानवरों के बाल रेशे.


५.अचानक मौसम परिवर्तन.


६.डस्ट माइट्स



लछण::-



१.लगातार छींक आना.



२.सूंघनें की शक्ति कम होना.



३.लम्बें समय तक खाँसी ,गलें में खींच-खींच.


४.नाक से पानी बहना या बंद हो जाना.



५.साँस लेनें में तकलीफ.



६.गलें व आँखों में खुजली.



सावधानी::-



१.घर से निकलतें वक्त मास्क का प्रयोग करें.


२.घरों में फूलों वाले पौधे ना लगावें.


३.पालतू जानवर न रखें व इनसे दूरी बनाकर चलें.


४.परफ्यूम व अन्य सुगंधित पदार्थों का प्रयोग न करें.


५.नाक की नियमित रूप से सफाई करें.


उपचार-:


१.गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें जैसें चाय,और मसालेदार चाय काढ़ा.

२.नाक में गोघ्रत को नियमित रूप से डालते रहें.

 अन्य औषधियों से संबधित उपचार के लियें वैघकीय परामर्श लें.


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