23 जुल॰ 2018

INSPIRE AWARD (इंस्पायर अवार्ड) क्या हैं

# INSPIRE AWARD इंस्पायर अवार्ड क्या हैं ?
award for student
 Inspire award

इंस्पायर अवार्ड INSPIRE AWARD  मानक,भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित एक विशिष्ट कार्यक्रम हैं।इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किशोरावस्था में आकर्षित करना और उन्हें विज्ञान की रचनात्मक खोज से परिचित कराना हैं ।



साल 2009 - 10 में भारत सरकार के विज्ञान और प्रोधोगिकी विभाग ने इंस्पायर अवार्ड की शुरुआत की थी ।कुछ बदलावों के साथ अब इंस्पायर अवार्ड मानक का आयोजन राष्ट्रीय नवपर्वतन प्रतिष्ठान भारत के सहयोग से किया जा रहा हैं ।




इस कार्यक्रम में देशभर के कक्षा 6 से 10 तक सभी मान्यता प्राप्त सरकारी अथवा निजी/सहायता प्राप्त/गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों के मौलिक विचारों और नवप्रवर्तनो को आमंत्रित किया जाता हैं।जिससे भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा और मजबूती देने के लिये एक बेहतर मानव बल श्रृंखला तैयार की जा सके,इसके साथ ही शोध और विकास के आधार को मजबूती दी जा सके ।

 इंस्पायर अवार्ड मानक के तहत किस प्रकार के आवेदन आमंत्रित किया जाता हैं ?


इंस्पायर अवार्ड्स मानक के तहत विद्यार्थियों के मौलिक विचारों/नवप्रवर्तनो को आमंत्रित किया जाता हैं, जो समाज की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान कर सके ।इसके अलावा घरेलू और मजदूरों के श्रम को कम करने के उपाय जो उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ साथ सेवाओं को भी आसान कर दे ।




# प्रतियोगिता में कोंन कोंन भाग ले सकता हैं :::

खोज
 नवप्रवर्तन 


इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 तक ( 10  से 15 साल उम्र के) सभी विद्यार्थी भाग ले सकते हैं ।



# क्या सभी शिक्षा समितियों (  राष्ट्रीय और राज्य ) के विद्यार्थी इसमें भाग ले सकते हैं ?



हाँ, इंस्पायर अवार्ड मानक में सभी शिक्षा समितियों ( राष्ट्रीय और राज्य)के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं ।






# कोंन कोंन सी भाषाओं में विद्यार्थी अपना आवेदन जमा कर सकते हैं ?


विद्यार्थी निर्धारित प्रारूप में भारत सरकार से मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में अपना आवेदन विद्यालय में जमा कर सकते हैं ।






# प्रतियोगिता की समय सीमा क्या हैं ?


इंस्पायर अवार्ड के लिए नामांकन प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई तक किया जा सकता हैं।






# योजना का कार्यान्वयन कैसे किया जायेगा ?






* राज्य एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों में इंस्पायर अवार्डस मानक कार्यक्रम के प्रति जागरूकता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिये देश में क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन,जिसमें साहित्य और ऑडियो वीडियो टूल के जरिये योजना से सम्बंधित सभी जानकारियो से अवगत कराया जाएगा।




* प्राचार्य / मुख्य अध्यापक द्वारा स्कूलों में आईडिया प्रतियोगिता के जरिये विद्यार्थियों के दो से तीन अच्छे विचारों/ नवप्रवर्तनो का चयन किया जायेगा, जिसका ऑनलाइन नामांकन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के वेब पोर्टल पर किया जाएगा ।




*  नये विद्यालय वेब पोर्टल पर स्वंय को पंजीकृत कर सकते हैं ।




* केवल उत्तर पूर्व क्षेत्र के राज्य ( असम,अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा ) और जम्मू कश्मीर के स्कूल विद्यार्थीयो के विचारो / नवप्रवर्तनो को तय प्रारूप में स्पीड पोस्ट के जरिए राष्ट्रीय नव प्रवर्तन प्रतिष्ठान को भेज सकते हैं ।




* विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार और राष्ट्रीय नव प्रवर्तन प्रतिष्ठान द्वारा एक लाख विचारों का चयन किया जाएगा।सभी छात्रों को 10 हजार रुपए की पुरुस्कार राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के जरिए सीधे उनके खातों में भेजी जाएगी।





* राज्य और जिला स्तर के प्राधिकारियों द्वारा जिला स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कॉम्पिटिशन का आयोजन, यहाँ से 10 हजार विचारों/नवप्रवर्तनो का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता और प्रदर्शनी के लिए किया जाएगा  ।




* राज्य स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कॉम्पिटिशन का आयोजन, जहां से एक हजार विचारों/नव प्रवर्तनो का चयन किया जाएगा।इस स्तर पर राष्ट्रीय नवपर्तन प्रतिष्ठान देश के विभिन्न तकनीकी संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थियों के प्रोटोटाइप/मॉडल विकसित करने में मदद और सलाह उपलब्ध कराएगा ।





*  विचारों का चयन उसकी नवीनता,व्यहवारिकता ,सामाजिक उपयोगिता, पर्यावरण की अनुकूलता और वर्तमान में मौजूद तकनीक से बेहतरी के आधार पर होगा ।




* चयनित 1000 प्रतिकृति को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में रखा जायेगा, जहां से श्रेष्ठ 60 को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चयनित किया जाएगा ।





* राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान चयनित सभी 60 प्रोटोटाइप की उपयोगिता, व्यावसायिकता की संभावना की जाँच कर उसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान की अन्य योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करेगा ।और सभी प्रोटोटाइप को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले नवप्रवर्तन एवं उद्यमिता उत्सव में प्रदर्शित किया जायेगा ।





* पुरुस्कार की घोषणा कब की जायेगी और इसे कब दिया जायेगा ?





* अक्टूबर में विचारों/ नवप्रवर्तनो का चयन और पुरुस्कार राशि का हस्तांतरण



* नवम्बर में जिलास्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता का आयोजन




* नवम्बर में राज्यस्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता का आयोजन



* दिसम्बर के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता का आयोजन




* प्रतिवर्ष मार्च माह में राष्ट्रपति भवन में आयोजित होंने वाले नवप्रवर्तन उत्सव में विशिष्ठ 60 विचारों/नवप्रवर्तनो का प्रदर्शन।




# क्या प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के आवेदन की कोई संख्या तय की गई हैं ?





 नहीं, विद्यार्थीयो को उनकी इच्छानुसार एक साथ अनेकों विचारों/ नवप्रवर्तनो के आवेदन के लिये प्रोत्साहित किया जाता हैं।






22 जुल॰ 2018

CPR , COMPRESSION PULMONARY RESUSCITATION यानि सांस पुनः लाने की तकनीक सीपीआर



यदि आप बाजार में हो,कहि सफ़र में हो या घर पर हो और अचानक कोई घटना घट जाए जिसमें कोई व्यक्ति अचानक गिर जाये, उसे करंट लग जाये या पानी में डूब जाये और उसकी सांस थम जाये तब आप क्या करेंगे ? यह सवाल मैंने लगभग 3000 लोगों से पूछा किंतु लगभग सभी ने कहा की हम व्यक्ति को आपातकालीन चिकित्सा के लिये एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल ले जाएंगे।

मैंने फिर पूछा भारत जैसे देश में जहां दूर दूर तक कोई आपातकालीन चिकित्सा आसानी से उपलब्ध नहीं हैं या फिर जब तक आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो जाती आप क्या करोगे ?  आप को जानकर आश्चर्य होगा कि इन 3000 लोगों में से मात्र 340 लोगों ने ही आपातकालीन चिकित्सा में CPR की बात की,परन्तु कोई भी सी,पी, आर, का सही तरीका नहीं बता पाया।
क्या आप जानते हैं आपातकालीन स्थिति में प्रथम 10 मिनिट में C.P.R.शुरू कर देने से व्यक्ति के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती हैं।
आइये जानते हैं आपातकालीन चिकित्सा की इस "संजीवनी विद्या" को

C.P.R.या CHEST COMPRESSION PULMONARY RESUSCITATION क्या हैं ? ::::


चेस्ट कम्प्रेशन पल्मोनरी रेसेसशन एक आधुनिक तकनीक हैं, जिसके माध्यम से sudden cardiac arrest,heart attack,डूबने, या करंट लगने पर व्यक्ति की गायब हुई साँसों को पुनः स्थापित किया जाता हैं ।

सी.पी.आर. करने की विधि ::



1.सबसे पहले मरीज को सीधा पीठ के बल लिटा दे ।

2.उसके सिर को सीधा रखें ।

3.सी.पी.आर. शुरू करने से पहले छाती के बीचों बीच जहां हृदय स्थित होता हैं, वहां एक से डेढ़ फीट की दूरी से दो कसकर मुक्के मारे ,मुक्के मारने की यह विधि " मेडिकल थंब वर्शन" कही जाती हैं ।जिसके द्वारा हॄदय को सामान्य कार्य करने हेतू पुनः सक्रिय किया जाता हैं ।
how to perform cpr
 CPR Technique



3.इसके पश्चात तुरंत छाती के बीचों बीच जहां हृदय स्थित होता हैं वहां दोनों हथेलियों को आपस मे बांधकर छाती को डेढ़ इंच या 5 सेंटीमीटर तक दबाते हैं।

4.छाती को इस तरह दबाने की क्रिया एक मिनिट में कम से कम 100 से 120 बार हो जानी चाहिए ।
5.यदि रोगी अनजान हैं,और उसे कृत्रिम सांस देने में हिचकिचाहट हैं तो बिना रुके लगातार सी.पी. आर. देते रहें।

6.यदि रोगी को कृत्रिम सांस देने में हिचकिचाहट नहीं हैं तो भी उसके मुँह पर तोलिया रख कर अपने मुंह से उसके मुंह में सांस भरे इस दौरान उसकी नाक बंद कर दे,कृत्रिम सांस प्रत्येक 30 सी.पी.आर .के बाद दे।

7.सी.पी.आर. देने के दौरान जरा भी नहीं रुके, तब तक, जब तक की मरीज़ को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा नही मिल जाये ।

# याद रखें :::


1.सी.पी.आर.देने के बाद यदि मरीज की धड़कन और सांस लोट आती हैं, तो सी.पी.आर. बन्द कर दे।

2.सी.पी.आर. बच्चों, बुजुर्गों समेत सभी को दिया जा सकता हैं।

3.सी.पी.आर.देने के लिये किसी विशेष शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती हैं।कोई भी व्यक्ति आवश्यकता के समय तुरंत ही सी.पी.आर. दे सकता हैं।

4.सी.पी.आर. देने में हुई 1 मिनिट की देरी मरीज की जान बचाने की 10% सम्भावना कम कर देती हैं, उदाहरण के लिए यदि सांस रुकने के बाद सी.पी. आर. देने में की गई 5 मिनिट की देरी मरीज के बचने की 50% सम्भावना कम कर देती हैं ।

5.हर व्यक्ति जो सी.पी.आर. देना जनता हैं, उसे कम से कम 100 व्यक्तियो को सी.पी.आर. के बारे में जानकारी देना चाहिए ।

6.भारत जैसे देश में जहाँ उच्च स्तरीय आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की गाँवो के आसपास अत्यंत कमी है, सी.पी.आर. आपातकालीन चिकित्सा मिलने तक जान बचाने का बहुत प्रभावी और कारगर तरीका हैं ।

सी.पी.आर. देते रहने से मरीज का ह्रदय मस्तिष्क को खून की आपूर्ति करता रहता हैं, जिससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन मिलता रहता हैं, और मस्तिष्क मृत होने से बचा रहता हैं।

याद रहे भारतीय संस्कृति में " प्राण बचाने वाला " ईश्वर तुल्य माना गया हैं। अतः जीवनदान देने में हिचकिचाहट या संकोच ना करें ।

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17 जुल॰ 2018

जल [water] :: लोक सृष्टि का उपादान

पंच महाभूतों में एक जल भी हैं। जल ही लोक सृष्टि का उपादान हैं।जो जल हमें दिखाई पड़ता हैं वह अपने आप में महत्वपूर्ण हैं। एक यौगिक हैं। प्रथ्वी भी पानी का ही एक रूपांतर हैं।पानी में वायु प्रवेश करके घनीभूत होता हुआ कालांतर में मिट्टी रूप में बदलता हैं।


  • अंतरिक्ष में भी प्राणात्मक पानी का ही साम्राज्य हैं।चंद्रमा भी पानी का ही विरल अवस्था रूप सोम का ही रूपान्तर हैं।जल पिंड हैं।

मृत्यु के देवता
 महाकाल

अंतरिक्ष का जल ही भिन्न- भिन्न लोकों के बीच सूत्र संबंध बनाए रखता हैं।जैसे हमारे तीन चौथाई जल है, वैसे ही पृथ्वी, चंद्रमा आदि पिंडो में भी तीन चौथाई जल होता हैं।सभी जड़ और चेतन भी इसी जल के कारण एक दूसरे से जुड़े रहते हैं।जल में संग्रह करने की एक विशिष्ट शक्ति होती हैं। 

यह सभी ध्वनि तरंगों का संग्रह करता हैं।उसका परिवहन भी करता हैं।हम चाहें हरिद्वार या बनारस में गंगा स्नान करे, गौ मुख से गंगासागर की अनुभूति हो सकती हैं।लोगो के स्नान करने की, धोबी घाटो की,पूजा आरतियों की ध्वनियों पकड़ में आ सकती हैं।प्रत्येक डुबकी में अलग धरातल का अनुभव हो सकता हैं।

हमारे  शब्दों का स्पंदन भी जल ग्रहण करता हैं।उसी के अनुरूप उसकी प्रतिक्रिया भी अनुभूत होती हैं।स्नान करते समय वह जल हमें पवित्र तो करेगा ही, गोमुख से गंगासागर तक जोड़े रखेगा।हमारे अर्ध्य को देवता तक पँहुचायेगा।उसी के अनुरुप शरीर के जल मे (रक्त मे) परिवर्तन आता जायेगा।

एक आसान प्रयोग से सिद्ध कर सकते हैं कि ध्वनि के स्पंदन जल को कैसे प्रभावित करते हैं।

दो बोतलों में साफ पानी भरकर ढक्कन लगा ले।दोनों को अलग अलग कक्ष में रखें।एक बोतल के सामने नित्य सुबह शाम प्रार्थना करें,जैसे अपने आराध्य की पूजा करते है।अच्छे वचन बोले।दूसरी बोतल के समक्ष नित्य अपशब्द बोलें।आप देखेंगे कि कुछ दिन बाद जिस बोतल के समक्ष प्रार्थना की, अच्छी बातें की उसके पानी का रंग बदलकर पीला केसरिया सा हो गया हैं।उसमे हल्की खुशबू भी आने लगी।दूसरी तरफ, जिस बोतल के समक्ष अपशब्द बोलें गये उसके पानी का रंग गन्दा सा मटमैला प्रतीत होने लगा।उस पानी में बदबू भी महसूस होगी।

हमारे शरीर की रचना में भी सत्तर प्रतिशत पानी हैं।ध्वनि के स्पंदन के प्रभाव से हमारा शरीर कैसे अछूता रह सकता हैं।प्राणमय कोश, मनोमय कोश, और अंततः आत्मा भी प्रभावित होती हैं।नकारात्मक स्पंदनों का प्रभाव असाध्य रोगों के रूप में परिलक्षित होता हैं।


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# अग्नि-सोम से सृष्टि ::::


पृथ्वी के जल को मर,चन्द्रमा के जल को श्रद्धा, सूर्य के जल को मरीचि, परमेष्ठी के जल को आप:तथा अंतरिक्ष के जल को अम्भस कहते हैं।वास्तव में जल की घन, तरल,विरल अवस्थाये हैं।हमारी सम्पूर्ण सृष्टि ही अग्नि और सोम(जल का ही रूप) से बनी हुई हैं।अग्नि में सोम की आहुति का नाम ही यज्ञ हैं।सोम जल जाता हैं, अग्नि शेष रहता हैं।हमारा सम्पूर्ण जीवन भी इसी प्रकार यज्ञ रूप आगे बढ़ता हैं।चन्द्रमा मन का स्वामी हैं।मन ही कामनाओं का केन्द्र हैं।मन की कामनाये प्राणों में हलचल पैदा करती हैं।प्राणों को ही देवता कहते हैं।वाक् अग्नि रुप बनती हैं।अतः सृष्टि में जो कुछ दृष्टिग़ोचर होता हैं,वह सारा निर्माण अग्नि रूप हैं।सूर्य भी अग्नि पिंड हैं,किंतु उसका पोषण अंतरिक्ष का जल ही (सोम) करता हैं।

सूर्य भी परमेष्ठी की परिकृमा करता है।एक परिक्रमा 25000 साल मे पूरी होती हैं।परमेष्ठी भी स्वंयभू मंड़ल की परिक्रमा करता हैं।इस व्यवस्था से तीन अग्नियों (अग्नि पिंडो) के मध्य दो सोम लोक बने रहते हैं।इन्हीं के कारण अग्नि का स्वरूप प्रतिष्टित रहता हैं।

सोम और जल दोनों ही अग्नि द्वारा भोग्य हैं।भोग्य पदार्थ को अन्न कहते हैं।भोक्ता अग्नि हैं।वर्षा का जल भोग्य हैं।पृथ्वी की अग्नि भोक्ता हैं।जो अन्न पैदा हुआ, वह भोग्य होगा, उसे खाने वाला शरीर भोक्ता होगा।शरीर में सप्त धातुओं का निर्माण होगा।अंतिम धातु शुक्र और रज भी क्रमश :सोम ओर अग्नि रूप होंगे।प्रकृति मे स्त्री को भले ही सौम्य बताकर भोग्या कहते हो।व्यहवार मे शुक्र रूप सोम ही रज रूप अग्नि में आहूत होता हैं।उसी से सृष्टि यज्ञ आगे बढ़ता है।जो निर्माण (सन्तान)  होगा, अग्नि रूप होगा।
                                      (साभार :: गुलाब कोठारी जी )







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