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जनवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Til Tail ke fayde [तिल तेल के फायदे]

# तिल के तेल के फायदे   तिल का तेल यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है. और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे. तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को

GAJAR GHAS गाजर घास का उन्मूलन कैसे करें

 गाजरघास गाजर घास का वानस्पतिक नाम gajar ghas ka vansptik nam पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस [ parthenium hysterophorus ] हैं.यह एस्टेरेसी कुल का सदस्य हैं. इसकी पत्तियाँ गाजर के समान होनें के कारण इसे गाजर घास के नाम से जाना जाता हैं.गाजरघास के अन्य नाम भी  हैं Gajarghas KE an anay Nam  जैसे गजरी, गांधी बूटी,अमेरिकन फीवर फ्यू . इसके फूल सफेद रंग के होनें से इसे चटक चांदनी भी कहा जाता हैं.यह मूल रूप से अमेरिका और वेस्टइंडीज का पौधा हैं,जो पूरे विश्व में आयातित पदार्थों के माध्यम से विश्व में फैल गया. भारत में यह पौधा लगभग 35 लाख हेक्टेयर में अनचाहे रूप से उगा हुआ हैं । मनुष्यों पर गाजर घास के हानिकारक प्रभाव  गाजर घास के बहुत ही हानिकारक प्रभाव मानव स्वास्थ पर देखे गये हैं.इसमें घातक एलिलो रसायन जैसें एम्ब्रोसीन ,पार्थेनिन , कोरोनोपीलिन,फेरुलिक अम्ल,वेनिलीक अम्ल, कैफीन अम्ल ,पेरा - हाइड्राँक्सी बेन्जोइक अम्ल, तथा पेरा - काउमेरिक अम्ल पाये जातें हैं.ये घातक रसायन इसके सम्पर्क में आनें व्यक्ति वालें व्यक्तियों की त्वचा में खुजली ,एलर्जी , एक्जिमा जैसे घातक रोग पैदा करते हैं.

चने की खेती और उपयोग [CHANE KI KHETI AUR UPYOG]

भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र  हैं,जहाँ लगभग 72% ग्रामीण आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती किसानी से जुड़ी हुई हैं.किन्तु आज देश का 80 फीसदी किसान कोई अन्य रोजगार मिलनें पर कृषि कार्य छोड़नें को राजी बैठा हैं,एक ज़मानें में खेती के बारें में कई किवंदंतिया प्रचलित थी जैसें    चने की फसल उत्तम खेती ,मध्यम व्यापार और निकृष्ट चाकरी किन्तु आज खेती को सबसे निकृष्ट माना जाता हैं.क्योंकि खेती आज जीवन निर्वाह जीतना भी पैसा परिवार को नही दे पाती उल्टा खेती करने वाला किसान खेती करतें - करतें इतना कर्जदार हो जाता हैं,कि अंत में सिर्फ आत्महत्या ही उसके अधिकार में रह जाती हैं,किसानों की आत्महत्या में बड़ा योगदान घट़िया बीजों का भी रहता हैं,यदि किसान थोड़ी सावधानी रखकर उचित समय पर उचित बीज और परिस्थितियों के अनुसार खेती करें तो निश्चित रूप से मुनाफा कमा सकता हैं,इन्ही परिस्थितियों के अनुसार आज हम चने की खेती और उसके बीजों के विषय में किसानों को जागरूक करना चाहतें हैं. जल प्रबंधन के बारें में विस्तारपूर्वक जानियें #.चने का परिचय ::: चना रबी की फसल हैं,जो अक्टूबर- नवम्बर माह में ब

SINGHADE [WATER CHESTNUT] KE FAYDE

SINGHADE [WATER CHESTNUT] KE FAYDE परिचय :::  Singhade  सिंघाडा जलाशयों में पैदा होनें वाला एक अत्यन्त पोष्टिक,शाकाहारी फल हैं,इसकी बाहरी त्वचा कठोर होती हैं,जबकि अन्दर का फल मुलायम,स्वादिष्ट,और सफेद रंग का होता हैं.भारतीयों समाज में सिंघाड़ा अनुपम स्थान रखता हैं, क्योंकि इसके बने आटे की रसोई उपवास जैसे पवित्र तप में उपयोग लाई जाती हैं. सिंघाड़े की प्रकृति ::: सिंघाड़ा शीत प्रकृति का फल हैं. सिंघाड़े में पाये जानें वालें पोषक तत्व :::   पानी                    प्रोटीन.                 फायबर 70 Gm.                 4.7 gm.              0.6mg   वसा                   शुगर.               खनिज तत्व 0.3 gm.             23.3 gm.            1.1 gm कैल्सियम.            फास्फोरस.           आयरन 020.0mg.              150 mg.            0.8 mg पोटेशियम.             मैग्नीशियम.           काँपर 650 mg.                   72 mg.          1.31mg मैगनीज.                  जिंक               क्रोमियम 0.85 mg.             1.56 mg          0.011mg था