27 जून 2021

वैदिक गोत्र प्रणाली Vs xy गुणसूत्र

वैदिक गोत्र प्रणाली Vs xy गुणसूत्र


हम आप सब जानते हैं कि स्त्री में गुणसूत्र xx और पुरुष में xy गुणसूत्र होते हैं । 


इनकी सन्तति में माना कि पुत्र हुआ (xy गुणसूत्र) अर्थात इस पुत्र में y गुणसूत्र पिता से ही आया यह तो निश्चित ही है क्योंकि माता में तो y गुणसूत्र होता ही नही है !

और यदि पुत्री हुई तो (xx गुणसूत्र) यानी यह गुण सूत्र पुत्री में माता व् पिता दोनों से आते हैं ।

DNA


१.xx गुणसूत्र

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xx गुणसूत्र अर्थात पुत्री , अस्तु xx गुणसूत्र के जोड़े में एक x गुणसूत्र पिता से तथा दूसरा x गुणसूत्र माता से आता है । तथा इन दोनों गुणसूत्रों का संयोग एक गांठ सी रचना बना लेता है जिसे Crossover कहा जाता है ।


2.xy गुणसूत्र

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xy गुणसूत्र अर्थात पुत्र , यानी पुत्र में y गुणसूत्र केवल पिता से ही आना संभव है क्योंकि माता में y गुणसूत्र है ही नही । और दोनों गुणसूत्र असमान होने के कारन पूर्ण Crossover नही होता केवल ५ % तक ही होता है । और ९५ % y गुणसूत्र ज्यों का त्यों (intact) ही रहता है,तो महत्त्वपूर्ण y गुणसूत्र हुआ । क्योंकि y गुणसूत्र के विषय में हमें निश्चित है कि यह पुत्र में केवल पिता से ही आया है ।


बस इसी y गुणसूत्र का पता लगाना ही गोत्र प्रणाली का एकमात्र उदेश्य है जो हजारों / लाखों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों ने जान लिया था ।


वैदिक गोत्र प्रणाली और  गुणसूत्र

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अब तक हम यह समझ चुके है कि वैदिक गोत्र प्रणाली y गुणसूत्र पर आधारित है अथवा y गुणसूत्र को ट्रेस करने का एक माध्यम है । 


उदहारण के लिए यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है तो उस व्यक्ति में विद्यमान y गुणसूत्र कश्यप ऋषि से आया है या कश्यप ऋषि उस y गुणसूत्र के मूल हैं । 


चूँकि y गुणसूत्र स्त्रियों में नही होता यही कारण है कि विवाह के पश्चात स्त्रियों को उसके पति के गोत्र से जोड़ दिया जाता है ।


वैदिक / हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित होने का मुख्य कारण यह है कि एक ही गोत्र से होने के कारण वह पुरुष व स्त्री भाई बहन कहलाएंगे क्योंकि उनका प्रथम पूर्वज एक ही है । 

परन्तु ये थोड़ी अजीब बात नही कि जिन स्त्री व पुरुष ने एक दुसरे को कभी देखा तक नही और दोनों अलग अलग देशों में परन्तु एक ही गोत्र में जन्मे , तो वे भाई बहन हो गये ?


 इसका मुख्य कारण एक ही गोत्र होने के कारण गुणसूत्रों में समानता का भी है । आज के आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार यदि सामान गुणसूत्रों वाले दो व्यक्तियों में विवाह हो तो उनकी सन्तति आनुवंशिक विकारों के साथ उत्पन्न होगी ।


ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा , पसंद , व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता । ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है।


 विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगोत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात मानसिक विकलांगता , अपंगता , गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं । शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगोत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था ।


 इस गोत्र का संवहन यानी उत्तराधिकार पुत्री को एक पिता प्रेषित न कर सके , इसलिये विवाह से पहले कन्यादान कराया जाता है और गोत्र मुक्त कन्या का पाणिग्रहण कर भावी वर अपने कुल गोत्र में उस कन्या को स्थान देता है , यही कारण था कि उस समय विधवा विवाह भी स्वीकार्य नहीं था , क्योंकि , कुल गोत्र प्रदान करने वाला पति तो मृत्यु को प्राप्त कर चुका है।


इसीलिये , कुंडली मिलान के समय वैधव्य पर खास ध्यान दिया जाता और मांगलिक कन्या होने पर ज्यादा सावधानी बरती जाती है ।

आत्मज या आत्मजा का सन्धिविच्छेद तो कीजिये ।

आत्म + ज अथवा आत्म + जा 

आत्म = मैं , ज या जा = जन्मा या जन्मी , यानी मैं ही जन्मा या जन्मी हूँ।


यदि पुत्र है तो 95% पिता और 5% माता का सम्मिलन है । यदि पुत्री है तो 50% पिता और 50% माता का सम्मिलन है । फिर यदि पुत्री की पुत्री हुई तो वह डीएनए 50% का 50% रह जायेगा , फिर यदि उसके भी पुत्री हुई तो उस 25% का 50% डीएनए रह जायेगा , इस तरह से सातवीं पीढ़ी में पुत्री जन्म में यह प्रतिशत घटकर 1% रह जायेगा ।

अर्थात , एक पति-पत्नी का ही डीएनए सातवीं पीढ़ी तक पुनः पुनः जन्म लेता रहता है , और यही है सात जन्मों का साथ ।

लेकिन , जब पुत्र होता है तो पुत्र का गुणसूत्र पिता के गुणसूत्रों का 95% गुणों को अनुवांशिकी में ग्रहण करता है और माता का 5% ( जो कि किन्हीं परिस्थितियों में एक % से कम भी हो सकता है ) डीएनए ग्रहण करता है , और यही क्रम अनवरत चलता रहता है , जिस कारण पति और पत्नी के गुणों युक्त डीएनए बारम्बार जन्म लेते रहते हैं , अर्थात यह जन्म जन्मांतर का साथ हो जाता है ।

इसीलिये , अपने ही अंश को पित्तर जन्म जन्मान्तरों तक आशीर्वाद देते रहते हैं और हम भी अमूर्त रूप से उनके प्रति श्रध्येय भाव रखते हुए आशीर्वाद ग्रहण करते रहते हैं , और यही सोच हमें जन्मों तक स्वार्थी होने से बचाती है , और सन्तानों की उन्नति के लिये समर्पित होने का सम्बल देती है ।

एक बात और , माता पिता यदि कन्यादान करते हैं , तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि वे कन्या को कोई वस्तु समकक्ष समझते हैं।

 बल्कि इस दान का विधान इस निमित किया गया है कि दूसरे कुल की कुलवधू बनने के लिये और उस कुल की कुलधात्री बनने के लिये , उसे गोत्र मुक्त होना चाहिये । डीएनए मुक्त तो हो नहीं सकती क्योंकि भौतिक शरीर में वे डीएनए रहेंगे ही , इसलिये मायका अर्थात माता का रिश्ता बना रहता है।

 गोत्र यानी पिता के गोत्र का त्याग किया जाता है । तभी वह भावी वर को यह वचन दे पाती है कि उसके कुल की मर्यादा का पालन करेगी यानी उसके गोत्र और डीएनए को दूषित नहीं होने देगी , वर्णसंकर नहीं करेगी , क्योंकि कन्या विवाह के बाद कुल वंश के लिये रज का रजदान करती है और मातृत्व को प्राप्त करती है । यही कारण है कि प्रत्येक विवाहित स्त्री माता समान पूज्यनीय हो जाती है ।

यह रजदान भी कन्यादान की ही तरह कोटि यज्ञों के समतुल्य उत्तम दान माना गया है जो एक पत्नी द्वारा पति को दान किया जाता है ।

भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अलावा यह संस्कारगत शुचिता किसी अन्य सभ्यता में दृश्य ही नहीं है।


24 जून 2021

डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावशाली है ।Delta plus variant

 डेल्टा प्लस वेरिएंट,Delta plus variant

भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर का चरम निकल चुका है और एम्स के निदेशक डाक्टर रणदीप गुलेरिया 6 से 8 हफ्तों में तीसरी लहर के आनें का अंदेशा जता चुके हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस के डेल्टा वेरिएंट में म्यूटेशन कर बने ने डेल्टा प्लस वेरिएंट ने लोगों को संक्रमित करना शुरू कर दिया है और डाक्टर रणदीप गुलेरिया की बात पर मुहर भी लगना शुरू हो गई है।

तो क्या भारत में तीसरी लहर के पीछे डेल्टा प्लस वेरिएंट जिम्मेदार होगा आईए जानते हैं डेल्टा प्लस वेरिएंट के बारें में विस्तार से
कोरोनावायरस, डेल्टा प्लस वेरिएंट


डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है ?

विशेषज्ञों के अनुसार डेल्टा वेरिएंट जिसे बी.1.617.2 भी कहा जाता है ,इस वायरस के स्पाइक प्रोटीन में  वायरस ने अपनी म्यूटेट होने की पद्धति से म्यूटेशन कर लिया है,जिसकी वजह से यह बहुत तेजी से संक्रमित करता है। 

चिकित्सकों के मुताबिक डेल्टा वेरिएंट जहां फेफड़ों की कोशिकाओं को संक्रमित करने में आठ दिन लगाता है वहीं डेल्टा प्लस वेरिएंट मात्र दो दिन में ही फेफड़ों को संक्रमित कर देता है।

डाक्टर एंथोनी फाउसी जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चिकित्सा सलाहकार हैं का कहना है कि
 "डेल्टा प्लस वेरिएंट बहुत अधिक संक्रामक हैं। यह 15 दिनों के अंदर अपनी संक्रमण दर को दुगनी कर लेता है।"

डेल्टा प्लस वेरिएंट के संबंध भारतीय जीनोमिक्स कंसोर्टियम ( INSACOG)

भारतीय जीनोमिक्स कंसोर्टियम के अनुसार डेल्टा प्लस वेरिएंट पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का असर बहुत कम देखने को मिल रहा है।और यह फेफड़ों की कोशिकाओं के रिसेप्टर से बहुत तेजी से चिपकता हैं।

 

डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावशाली है

भारतीय जीनोमिक्स कंसोर्टियम के अनुसार अभी डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावशाली है इसको लेकर अध्ययन किया जाना है, किंतु यदि अब तक के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो डेल्टा प्लस वेरिएंट से उज्जैन निवासी जिस महिला की मौत हुई थी, उसने वैक्सीन नहीं लगवाया था, जबकि महिला की मौत से कुछ दिन पहले उसके पति को भी कोरोना संक्रमण हुआ था और वह संक्रमण से उबर गए उनके पति वैक्सीनेशन करवा चुके थे,इस आधार पर हम कह सकते हैं कि महिला को संक्रमण उसके पति से ही मिला होगा । 

यदि इस केस के सन्दर्भ में बात करें तो वैक्सीन लगाने के बाद पति के फेफड़ों को कोरोना इतना संक्रमित नहीं कर पाया जितना कि महिला के फेफड़ों को संक्रमित किया। जिला चिकित्सालय उज्जैन के कोरोना रोधी प्रभारी टीम के विशेषज्ञों के मुताबिक जिस महिला की कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट से मौत हुई थी उनके 95 प्रतिशत फेफड़े संक्रमित हो गए थें। 

उज्जैन जिले की एक अन्य महिला जो कोरोनावायरस के ने वेरिएंट डेल्टा प्लस से संक्रमित हुई थी और अब स्वस्थ हो चुकी है उन्हें भी वैक्सीन का पहला टीका लग चुका था और वायरस उनके फेफड़ों को बहुत कम संक्रमित कर पाया।

इस आधार पर हम कह सकते हैं कि डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन बहुत प्रभावी हथियार साबित होंगा ।


क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट का असर बच्चों पर भी होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में तीसरी लहर का कारण डेल्टा प्लस वेरिएंट हो सकता है लेकिन इस वेरिएंट से बच्चे बहुत गंभीर रूप से संक्रमित होंगे ऐसा कहना सही नहीं होगा क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में पूरी तरह सक्षम है और यदि बच्चे संक्रमित भी हुए तो सामान्य सर्दी खांसी और बुखार होकर बच्चे ठीक हो जाएंगे।

बच्चों के गंभीर रूप से संक्रमित नहीं होने के पिछे एक वैज्ञानिक आधार यह भी है कि बच्चों के फेफड़ों की कोशिकाओं में मौजूद रिसेप्टर पर्याप्त विकसित नहीं हो पाता है जिससे वायरस फेफड़ों में प्रवेश नहीं कर पाता और बच्चे तेजी से बीमार होकर ठीक हो जातें हैं।


डेल्टा प्लस वेरिएंट से बचने के क्या उपाय है?

वैज्ञानिकों के अनुसार डेल्टा प्लस वेरिएंट से बचने का उपाय वैक्सीनेशन, पर्याप्त मात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग,मास्क का प्रयोग और हाथों को बार बार साबुन या सेनेटाइजर से साफ करना है।

इसके अलावा संक्रमित होने पर तुरंत जांच और चिकित्सक से परामर्श अवश्य करते रहें।

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20 जून 2021

मध्यप्रदेश के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

 मध्यप्रदेश गेंहू उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य हैं, यहां की मिट्टी की उत्पादकता देश में सर्वाधिक मानी जाती है, किंतु फिर भी प्रति हेक्टेयर गेंहू उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से पिछे है। प्रति हेक्टेयर कम गेंहू उत्पादन का मुख्य कारण किसान भाईयों द्वारा क्षेत्रवार और सिंचाई की सुविधा अनुसार अनुशंसित किस्मों का नहीं बोना है। यदि किसान भाई क्षेत्रवार और सिंचाई की सुविधा अनुसार गेंहू की उन्नत किस्मों का चुनाव करें तो प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन लें सकतें हैं। 

आईए जानते हैं मध्यप्रदेश के क्षेत्रानुसार गेंहू की अनुशंसित उन्नत किस्मों के बारे में


मालवा क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में


मालवा क्षेत्र में मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसौर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर,धार,देवास जिले का सम्पूर्ण क्षेत्र जबकि गुना जिले का दक्षिण भाग सम्मिलित हैं। 

इन क्षेत्रों में औसत वर्षा 750 मिलीमीटर से 1250 मिलीलीटर तक होती हैं।

यहां के अधिकांश क्षेत्रों में भारी काली मिट्टी पाई जाती है।

मालवा क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में निम्न प्रकार है।

गेंहू के पौधे


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 17

2.जे.डब्ल्यू 3269

3.जे.डब्ल्यू 3288

4.एच.आई.1500

5.एच.आई.1531

6.एच.डी.4672(कठिया )


सिंचित क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 नवंबर तक बौने वाली किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1201

2.जे.डब्ल्यू 322

3.जे.डब्ल्यू 273

4.एच.आई.1544

5.एच.आई.8498

6.एम.पी.ओ.1215


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1203

2.एम.पी.4010

3.एच.डी.2864

4.एच.आई.1454


निमाड़ अंचल के लिए गेंहू की उन्नत किस्में

निमाड़ अंचल के अन्तर्गत खरगोन, खंडवा,धार,अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, जिले सम्मिलित हैं

निमाड़ अंचल में औसतन वर्षा 500 से 1000 मिलीलीटर तक होती है।

यहां की मिट्टी हल्की काली से भूरी होती हैं।

निमाड़ अंचल के लिए गेंहू की उन्नत किस्में निम्न प्रकार है

असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 17

2.जे.डब्ल्यू 3269

3.जे.डब्ल्यू 3288

4.एच.आई.1500

5.एच.आई.1531

6.एच.डी.4672 (कठिया)


सिंचित क्षेत्र के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 नवंबर तक बौने वाली किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1201

2.जे.डब्ल्यू 322

3.जे.डब्ल्यू 273

4.एच.आई.1544

5.एच.आई.8498

6.एम.पी.ओ.1215


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1203

2.एम.पी.4010

3.एच.डी.2864

4.एच.आई.1454

बैनगंगा घाटी के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में


बैनगंगा घाटी के बालाघाट और सिवनी जिले के लिए जहां जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है और औसत बारिश 1250 मिलीलीटर तक होती है।


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 3269

2.जे.डब्ल्यू 3211

3.जे.डब्ल्यू 3288

4.एच.आई.1544

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू.1201

2.जे.डब्ल्यू 366

3.एच.आई.1544

4.राज 3067

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1202

2.एच.डी.2932

3.डी.एल.788-2

विन्ध्य पठार के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

विन्ध्य पठार में मध्यप्रदेश के रायसेन, विदिशा,सागर का सम्पूर्ण जिला और गुना का कुछ भाग सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र की औसत वर्षा 1120 से 1250 मिलीलीटर तक होती है। तथा मिट्टी हल्की काली से भारी काली है।

असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 17

2.जे.डब्ल्यू 3173

3.जे.डब्ल्यू 3211

4.जे.डब्ल्यू 3288

5.एच.आई.1531

6.एच.आई.8627

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)


1.जे.डब्ल्यू 1142

2.जे.डब्ल्यू 1201

3.एच.आई.1544

4.जी.डब्ल्यू 273 (कठिया)

5.जे.डब्ल्यू 1106

6.एच.आई.8498

7.एम.पी.ओ.1215

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1202

2.जे.डब्ल्यू 1203

3.एम.पी.4010

4.एच.डी.2864

5.डी.एल.788-2

हवेली क्षेत्र के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

हवेली क्षेत्र में जबलपुर, रीवा और नरसिंहपुर जिले के भू-भाग को कहा जाता है।इस क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 1000 से 1375 मिलीलीटर होती हैं। यहां की मिट्टी हल्की युक्त होती हैं।

हवेली क्षेत्र के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में निम्न हैं

असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 3020

2.जे.डब्ल्यू 3173

3.जे.डब्ल्यू 3269

4.जे.डब्ल्यू 17

5.एच.आई.1500

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू 1142

2.जे.डब्ल्यू 1201

3.जे.डब्ल्यू 1106

4.जी.डब्ल्यू 322

5.एच.आई.1544


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)


1.जे.डब्ल्यू 1202

2.जे.डब्ल्यू 1203

3.एच.डी.2864

4.एच.डी.2932


सतपुड़ा पठार के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

सतपुड़ा पठार के अन्तर्गत छिंदवाड़ा और बैतूल का क्षेत्र सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र में हल्की कंकड़ युक्त मिट्टी पाई जाती है और औसत वार्षिक वर्षा 1000 से 1250 मिलीलीटर तक होती है।


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 17

2.जे.डब्ल्यू 3173

3.जे.डब्ल्यू 3211

4.जे.डब्ल्यू 3288


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)


1.एच.आई.1418

2.जे.डब्ल्यू 1201

3.जे.डब्ल्यू 1215

4.जी.डब्ल्यू 366


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)


1.एच.डी.2864

2.एम.पी.4010

3.जे.डब्ल्यू 1202

4.जे.डब्ल्यू 1203

5.एच.आई 1531

नर्मदा घाटी के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

नर्मदा घाटी क्षेत्र में जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद,हरदा क्षेत्र आता है जहां भारी काली और जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1000 से 1500 मिलीमीटर होती हैं।


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू 17

2.जे.डब्ल्यू 3288

3.एच.आई.1531

4.जे.डब्ल्यू 3211

5.एच.डी.4672 (कठिया)

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू .1142

2.जी.डब्ल्यू.322

3.जे.डब्ल्यू 1201

4.एच.आई.1544

5.जे.डब्ल्यू 1106

6.एच.आई.8498

7.जे.डब्ल्यू 1215

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.जे.डब्ल्यू.1202

2.जे.डब्ल्यू.1203

3.एम.पी.4010

4.एच.डी.2932

गिर्द क्षेत्र के लिए अनुशंसित गेंहू की उन्नत किस्में

गिर्द क्षेत्र में ग्वालियर,भिंड, मुरैना और दतिया जिला सम्मिलित हैं जहां जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, यहां की औसत वार्षिक वर्षा 750 मिलीमीटर से 1000 मिलीमीटर तक होती हैं।

गिर्द क्षेत्र के लिए अनुशंसित गेंहू की किस्में निम्न हैं


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)


1.जे.डब्ल्यू.3288

2.जे.डब्ल्यू.3211 

3.जे.डब्ल्यू 17

4.एच.आई.1531

5.जे.डब्ल्यू.3269

6.एच.डी.4672


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.एच.आई.1544

2.जी.डब्ल्यू.273

3.जी.डब्ल्यू.322

4.जे.डब्ल्यू.1201

5.जे.डब्ल्यू 1106

6.जे.डब्ल्यू.1215

7.एच.आई.8498



सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)

1.एम.पी.4010

2.जे.डब्ल्यू 1203

3.एच.डी.2932

4.एच.डी.2864


बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गेंहू की अनुशंसित उन्नत किस्में


बुंदेलखंड क्षेत्र में दतिया, शिवपुरी, गुना का कुछ भाग, टीकमगढ़, छतरपुर, एवं पन्ना का कुछ भाग सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र में वार्षिक औसत वर्षा 1100 मिलीमीटर तक होती है। यह क्षेत्र लाल और काली मिट्टी की अधिकता वाला है। 


असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों के लिए गेंहू की उन्नत किस्में (15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक)

1.जे.डब्ल्यू.3288

2.जे.डब्ल्यू.3211

3.जे.डब्ल्यू.17

4.एच.आई.1500

5.एच.आई.1531


सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 नवंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में)


1.जे.डब्ल्यू.1201

2.जी.डब्ल्यू.366

3.राज 3067

4.एम.पी.ओ.1215

5.एच.आई.8498

सिंचित भूमि के लिए गेंहू की (15 दिसंबर तक बौने वाली गेंहू की उन्नत किस्में

1.एम.पी.4010

2.एच.डी.2864


बीज की मात्रा

•औसत रुप से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ।

•असिंचित और अर्धसिंचित क्षेत्रों में कतार से कतार की दूरी 25 सेमी

•सिंचित क्षेत्रों में 23 सेमी

• बीज और उर्वरक एक साथ मिलाकर बीजाई नहीं करें क्योंकि शोध अनुसार उर्वरक और बीज मिलाने से अंकुरण में 32 प्रतिशत की कमी हो जाती हैं। 

• बीज कम फर्टिलाइजर ड्रिल का उपयोग बीजाई के लिए करें।

बीजोपचार

बुवाई से पूर्व बीजों को उपचारित करके ही बोए, बीजोपचार के लिए बीटावैक्स या बावस्टिन 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।

टेबूकोनाजोल 1 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करने पर फफूंद जनित रोग से बचाव होता है।

पी.एस.बी.कल्चर 5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करने पर फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ती है।

पोषक तत्वों का प्रयोग

• मिट्टी परीक्षण अवश्य करें।

• परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फेट और पोटाश खेतों में डालें

• 25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से जिंक सल्फेट प्रति तीन फसल के उपरांत प्रयोग करें।

सिंचाई

जहां तक संभव हो सिंचाई के लिए स्प्रिंगकिलर का प्रयोग करें। 

उन्नत किस्मों के लिए 3 से 4 सिंचाई पर्याप्त है। 

• पहली सिंचाई बुवाई के 40 दिन बाद करें।

• दूसरी सिंचाई 15 दिन  के बाद करें।

• तीसरी सिंचाई कल्ले निकलते समय करें।

• चौथी सिंचाई गेंहू दूधिया के दाने दूधिया होने पर करें।

• यदि जमीन पानी कम सोखती हैं या रेतीली भूरी है तो पांचवीं सिंचाई भी कर सकते हैं ।

गेंहू में डालने के लिए अनुशंसित उर्वरक की मात्रा


1.असिंचित भूमि के लिए

यूरिया 40% ,। फास्फोरस 20 %। पोटाश 0 कि.ग्रा.।

2.अर्धसिंचित भूमि के लिए

यूरिया 60%। फास्फोरस 38 % । पोटाश 15 किलो/ हेक्टे.

3.सिंचित भूमि के लिए

यूरिया 120 % । फास्फोरस 60 % । पोटाश 30 किलो/हेक्टे

4.सिंचित 15 दिसंबर तक बुवाई के लिए

यूरिया 80%। फास्फोरस 40%। पोटाश 20 किलो/हेक्टेयर



अधिक गेंहू उत्पादन की नवीनतम तकनीक


1.जीरो टिलेज तकनीक 

धान की पछेती फसल की कटाई के उपरांत खेत को गेंहू के लिए जुताई और हकाई का समय नहीं बचता फलस्वरूप गेंहू की बोवनी बहुत लेट हो जाती हैं। और किसान के पास खेत खाली छोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता,ऐसी अवस्था से बचने और किसानों को तंगहाली से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष मशीन का अविष्कार किया है। 

इस मशीन के उपयोग से खेत की जुताई और हकाई की आवश्यकता नहीं होती है,धान की कटाई के बाद सीधे इस मशीन द्वारा बीज और खाद के साथ बुवाई की जा सकती हैं। 

मशीन द्वारा गेंहू की सीधी बुवाई करने की विधि को जीरो टिलेज कहा जाता है।

इस तकनीक को चिकनी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की भूमि में उपयोग किया जा सकता है। जीरो टिलेज मशीन साधारण ड्रिल की तरह है, इसमें टाइन चाकू की तरह है,यह टाइन्स मिट्टी में नारी जैसी आकार की दरार बनाती है, जिससे खाद और बीज उचित मात्रा में गहराई तक पंहुच जाता है।

जीरो टिलेज तकनीक से बुवाई के लाभ

• पछेती फसल की बुवाई समय पर हो जाती हैं जिससे खेत खाली छोड़ने की नोबत नहीं आती हैं और किसान आर्थिक क्षति से बच जाता है।

• ईंधन,ऊर्जा,और समय की बचत हो जाती हैं। एक एकड़ जमीन की जुताई इस मशीन द्वारा एक घंटे में हो जाती हैं।

• समय पर बुवाई होने से उत्पादन आशानुरूप लिया जा सकता है।

• बीज और उर्वरक की संतुलित मात्रा डलने से आर्थिक लाभ मिलता है।


फरो इरीगेशन रेज्ड बेड बुवाई विधि


रेज्ड बेड विधि द्वारा गेंहू को ट्रैक्टर चलित रोजर कम ड्रिल से मेड़ों पर दो या तीन कतारों में बुवाई करते हैं। 

रेज्ड बेड विधि के लाभ

• बीज,खाद,और पानी की मात्रा में कमी होती है।

• उच्च गुणवत्ता वाला बीज प्राप्त होता है।

• पौधों का विकास अच्छा होता हैं।

• उत्पादन लागत में कमी होती है।

• बीज गहराई में गिरने से फसल मजबूत होती हैं जिससे तेज हवा आंधी में फसल गिरती नहीं है।

• पानी की बचत होती हैं क्योंकि मेड़ विधि से फसल को पानी कम लगता है।

• कतार से कतार के मध्य पर्याप्त दूरी होने से फसल को हवा और प्रकाश आसानी से मिलता है।

















16 जून 2021

Post covid syndrome - पेट साफ नहीं हो रहा है, ये कारण तो जिम्मेदार नहीं

 जो लोग कोरोना से ठीक हो रहें हैं या हो चुकें हैं उन्हें की तरह के post covid syndrome परेशान कर रहे हैं। किसी टैकीकार्डिया व्यक्ति को  हो रहा है तो किसी व्यक्ति को छाती में जकड़न महसूस हो रही है। 

विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो चुके लगभग 40 प्रतिशत लोग पेट से संबंधित समस्या परेशान हो रहे हैं और ये परेशानी भी केवल एक तरह की न होकर कई तरह की है जैसे

• कब्ज होना
• पेटर्दद होना
• आंतों में दर्द
• पेट में गैस बनना या एसिडिटी
• भोजन नही पचना
• पेट खाली रहने पर भी भोजन करने जैसा एहसास होना
• पेट में जलन होना
• अर्श या बवासीर होना
पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी,अपच,post covid


कारण 

चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो रहें लोगों में पेट से संबंधित  परेशानियों के कई कारण जिम्मेदार है जैसे

आंतों में कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण पेट साफ नहीं होना

Sars Cov 2 वायरस फेफड़ों के साथ साथ पेट क आंतों को भी संक्रमित करता हैं यदि आंतों में यह वायरस लम्बे समय तक मौजूद रहता है तो आंतों की कार्यप्रणाली को कम कर सकता है जिससे कब्ज, आंतों में दर्द, आंतों में घाव होना,इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, आदि बीमारीयां पैदा हो जाती हैं। यदि निचली आंतों में वायरस का संक्रमण अधिक होता है तो आंतों का मूवमेंट बहुत ही कम हो सकता है जिससे कब्ज और पेट भरा हुआ रहने जैसा अहसास होता है । समस्या यदि लम्बें समय तक बनी रहती है तो व्यक्ति मानसिक तनाव से भी ग्रसित हो जाता है।

कोरोना से संक्रमित होने पर ली गई दवाईयों के कारण पेट साफ नही होना

कोरोना संक्रमण के दौरान ली गई एंटीबायोटिक्स,एंटासिड,स्टेराइड, विटामिन,जिंक आदि ने पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड या पाचक रस के स्त्राव को सीमित या बिल्कुल खत्म ही कर दिया जिससे भोजन नहीं पच पाता है और व्यक्ति हमेशा पेट भरा हुआ या पेट फूला हुआ अहसास करता है।

एस्पिरिन या एंटीकाग्युलेंट जो कि खून को पतला करती हैं के लम्बे समय तक उपयोग से आंतों में खून का रिसाव हो जाता हैं और व्यक्ति मल के साथ खून आने से एनिमिया से ग्रसित हो जाता है। आंतों से अधिक खून का रिसाव होने से व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो सकता है और उसे उल्टी,दस्त,ठोस आहार लेने में परेशानी हो सकती है।

जो कोरोना मरीज पहले से मधुमेह या डायबिटीज से पीड़ित हैं और उन्हें स्टेराइड दी गई है तो आंत का मूवमेंट बहुत कम हो जाता है फलस्वरूप पेट पूरा साफ़ नहीं होता और कब्ज बनी रहती है।

कम शारीरिक गतिविधि के कारण पेट साफ नही होना

कोरोनावायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति बहुत लम्बे समय तक अस्पताल में भर्ती रहता है और ठीक होने के बाद भी लम्बे समय तक बिस्तर से नही उठ पाने की वजह से शारीरिक गतिविधि बिल्कुल भी नहीं हो पाती फलस्वरूप ठोस आहार नही पचता है और पेटदर्द, एसिडिटी,अपच,गैस की वजह से छाती में दर्द जैसी समस्या बनी रहती है।

आयुर्वेदिक काढ़े के अधिक सेवन से पेट में समस्या होना

कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद भी व्यक्ति बिना चिकित्सक की सलाह से आयुर्वेदिक काढ़े का अधिक सेवन कर रहा है, चूंकि आयुर्वेदिक काढ़े में इस्तेमाल पदार्थ जैसे कालीमिर्च,सौंठ,पीपली,अजवायन आदि गर्म होते हैं जो अधिक मात्रा में लेने से पेट में गर्मी बढ़ाकर एसिडिटी, कब्ज, बवासीर, पेट दर्द जैसी समस्या पैदा कर रहे हैं।


कम मात्रा में पानी पीना

चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से रिकवर हो रहें लोग कम मात्रा में पानी पीतें है तो भोजन का ठीक से पाचन नहीं हो पाता है फलस्वरुप मल सूख जाता है और शोच के वक्त मलद्वार में घर्षण बढ़ जाता है और शोच के साथ जलन और खून आता है। समस्या लम्बे समय तक बनी रहने से पेटदर्द और कब्ज की शिकायत गंभीर हो जाती हैं।

Post covid में होने वाले पेट संबंधी रोगों का उपचार


भोजन में रेशेदार और कच्ची सब्जियों का सेवन करें

कोरोनावायरस से पीड़ित लोग  हाई प्रोटीन डाइट लेने के चक्कर में रेशेदार भोजन और कच्ची सब्जियों का सेवन उस अनुपात में नहीं कर रहे हैं जो पेट की सफाई के लिए आवश्यक है, अतः भोजन में रेशेदार पदार्थों जैसे गाजर,मूली,प्याज, ककड़ी और कच्ची सब्जियों जैसे लोकी, पत्तागोभी, टमाटर का सेवन अधिक करें। 

रेशेदार भोजन का सेवन आपके भोजन को जल्दी पचा देगा जिससे पेटदर्द, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्या पैदा नहीं होगी।

अनावश्यक दवाईयों का सेवन बंद कर दें

अपने चिकित्सक की सलाह से ऐसी दवाईयों का प्रयोग या तो सीमित कर दें या फिर उन्हें बंद कर दें जो इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, कब्ज़, एसिडिटी,और पेटदर्द जैसे साइड इफेक्ट्स पैदा कर रही है। 

आयुर्वेदिक काढ़े इस्तेमाल भी चिकित्सक की सलाह से बंद कर दें।

योग करें

 ऐसी यौगिक क्रियाएं जो पेट की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करती हो नियमित रूप से करें, जैसे कपालभाति, धनुरासन, सेतुबंधासन, पादहस्तासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, अर्द्ध मत्स्येंद्रासन, पवनमुक्तासन आदि। ( गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप, ह्रदयरोगी  ये योग नहीं करें)



 आयुर्वेदिक डाइट चार्ट के अनुसार भोजन का निर्धारण करें


सोने और जागने का सही समय बनाएं

जो लोग कोरोना के बाद बेड रेस्ट पर है वे दिन में सो लेते हैं किंतु रात में आधी रात तक टीवी देखते रहते हैं,इस तरह से व्यक्ति के शरीर की बायोलाजिकल क्लाक गड़बड़ हो जाती हैं और जिस समय व्यक्ति को टायलेट में होना चाहिए था उस समय वह बिस्तर पर गहरी नींद में सोया रहता है फलस्वरूप लेट उठने से आंतें शोच के लिए सक्रिय नहीं हो पाती है और व्यक्ति पेटदर्द एसिडिटी और कब्ज से पीड़ित हो जाता है, अतः रात को जल्दी सोकर सुबह जल्दी उठने का नियम अपनाएं।


गर्भावस्था हैं तो विशेष ध्यान रखें

यदि आप गर्भावस्था में हैं और कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे तो आपको अपने पाचन संस्थान का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में प्रोजेस्टोरोन हार्मोन बनता है जो आंतों के मूवमेंट को धीमा कर देता है जिससे कब्ज और अपच की शिकायत बनी रहती है, इस समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक डाइट चार्ट फालो कर सकते हैं। 

पंचकर्म चिकित्सा अपनाएं

पंचकर्म चिकित्सा शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना देती हैं अतः यदि आप युवा हैं और शरीर मजबूत है तो किसी पंचकर्म विशेषज्ञ से परामर्श कर अपना पंचकर्म करवा लें। 


शराब तम्बाकू और अधिक मांसाहार से दूर रहें

भारत के ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में आमजनों में बहुत बड़ी भ्रांति फैली हुई है कि शराब और मांसाहार के सेवन से कोरोना नही होता हैं,इसी मिथ्या का सहारा लेकर बड़ी आबादी शराब और मांसाहार का बहुत अधिक मात्रा में सेवन कर रही हैं इनमें वे लोग भी शामिल है जो कोरोना से रिकवर हो रहें हैं। 
वास्तव में यह बात पूरी तरह से निराधार है कि शराब और मांसाहार से कोरोना नही होता यदि ऐसा होता तो चीन अमेरिका, ब्रिटेन आदि देशों में कोरोना के एक भी केस नंही मिलना चाहिए थे क्योंकि इन देशों की 98 प्रतिशत आबादी मांसाहार का सेवन करती है। 

कोरोना से रिकवर हो रहें लोग  मांसाहार का सेवन बिल्कुल भी नहीं करें क्योंकि कोरोना संक्रमण से आंतें कमजोर हो जाती हैं और  मांसाहार में अधिक फेट और अधिक कैलोरी होने से आंतें मांसाहारी भोजन को पचाने में असमर्थ हो जाती हैं फलस्वरूप पेट से संबंधित बहुत सी समस्याएं उभर सकती हैं।

तम्बाकू का सेवन करने से हमारे शरीर को भोजन पचाने के लिए जरूरी पाचक रस जो लार के माध्यम से मिलने चाहिए थे नहीं मिल पातें हैं क्योंकि व्यक्ति तम्बाकू खाने के बाद उन्हें थूकता रहता है। और इस तरह भोजन को पचाने में परेशानी पैदा हो जाती हैं।

शराब का अधिक सेवन आंतों के साथ लिवर , किडनी और अग्नाशय को नुकसान पहुंचाता है फलस्वरूप पेट दर्द,फेटी लिवर, किडनी फेलियर जैसी समस्या उभर सकती हैं।



• तम्बाकू से होने वाले नुकसान का स्वास्थगत विश्लेषण









10 जून 2021

Homeopathy :: बाख फ्लावर रेमेडीज के मानसिक लक्षण । Bach flower remedy mental symptoms

 बाख फ्लावर रेमेडीज के मानसिक लक्षण ।Bach flower remedy mental symptoms

बाख फ्लावर रेमेडीज या Batch flower remedy होम्योपैथी के सिद्धांत पर आधारित रेमेडीज है,जिनकी खोज डाक्टर एडवर्ड बाख द्वारा की गई थी। ये दवाईयां व्यक्ति की भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक असंतुलन को ठीक कर व्यक्ति को स्वस्थ बनाती है। बाख फ्लावर रेमेडीज 38 प्रकार के जंगली फूलों से बनाई जाती है।  ये रेमेडीज व्यक्ति के मानसिक लक्षणों के आधार पर दी जाती है अर्थात यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इन जंगली फूलों से बनी रेमेडीज को लेगा तो उसे वहींं मानसिक  लक्षण प्रकट होंगे जो बीमार व्यक्ति में प्रकट होते हैं, यदि ये रेमेडीज समान‌ मानसिक लक्षण वाले व्यक्ति को दे दी जाए तो उसकी बीमारी ठीक हो जाती हैं। 
आईए जानते हैं Bach flower remedy के मानसिक लक्षणों बारें में


1. Bach flower remedy एग्रीमनी Agrimony के मानसिक लक्षण

जो लोग किसी बुरें व्यसन में फंसे हो, चिंतित हो किन्तु ऊपर से हंसमुख बनें रहते हो , जिन्हें नींद नहीं आती हो।
लड़ाई झगड़ों से दूर रहते हो और इनसे बचने के लिए अपना बहुत नुक़सान भी करवा लेते हो। एग्रीमनी पेशेंट बहुत अच्छा मित्र होता है।

2.Bach flower remedy ऐस्पेन Aspen के मानसिक लक्षण

ऐस्पेन का मरीज बहुत अधिक डर और परेशानी में जीता है , उसे ऐसा अज्ञात डर और भय बना रहता है जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं होता हैं। उसे हमेशा ऐसा लगता है कि निकट भविष्य में कुछ भयानक घटना होने वाली है और यह बात वह दूसरों से बताने में भी डरता है।

3.बीच Beech के मानसिक लक्षण

दूसरे के मतों का नहीं स्वीकारने वाला व्यक्ति जो हमेशा अपने आप को ही सर्वश्रेष्ठ समझता हो । दूसरों के मतों, दिनचर्या और आचरण की हमेशा आलोचना करता हो और उनमें कमियां निकालता हो । ऐसे व्यक्ति का स्वभाव भी काफी चिड़चिड़ा हो जो बात बात पर डांटने पर उतारू हो। 

इस प्रकार के मरीजों में बीच बहुत अच्छा असर दिखाती है।

बाख फ्लावर रेमेडीज, होम्योपैथी, homeopathy


4.Bach flower remedy सेन्टोरी Centaury के मानसिक लक्षण

शांत स्वभाव वाले व्यक्ति जो दूसरों की मदद इस हद तक करने के लिए राजी रहते हैं कि अपने जरूरी कामों की उपेक्षा तक कर बैठते हैं। 

सेन्टोरी मरीज कमजोर आत्मशक्ति वालें होते हैं जो किसी भी कार्य के लिए मना नहीं कर पाते हैं।

5.सिराटो cerato के मानसिक लक्षण

सिराटो पेशेंट कोई भी काम करने से पहले दूसरों की सलाह लेकर काम करने वाला होता है और दूसरों द्वारा दी गई गलत सलाह को मानकर भी उस‌ काम को करता है।

6.चेरी प्लम cherry 🍒 plum के मानसिक लक्षण

चेरी प्लम पेशेंट के मन में हमेशा  निराशावादी विचार आते रहते हैं। ये लोग हमेशा ऐसा सोचते रहते हैं कि वो कोई बहुत ख़तरनाक काम न कर बैठे। चेरी प्लम पेशेंट को हमेशा अपना कोई राज बाहर आने का डर सताता है।

7.चेस्टनट बड Chestnut Bud के मानसिक लक्षण

बार बार एक ही गलती दोहराने वाले लोग जो अपनी या दूसरों की गलतियों से बिल्कुल भी नहीं सीखना चाहते हैं और अपना काम बिगाड़ते हैं। ये लोग दूसरों के अनुभवों का लाभ भी उठाना नहीं पसंद करते हैं।

8.चीकोरी Chicory के मानसिक लक्षण

दूसरों के नजदीक जाने के लिए और उनपर अधिकार जमाने वाले लोग जो उनकी हर जरुरतों का ख्याल रखते हैं और उन्हें पूरा करने का भरपूर प्रयास करते हैं। यदि कुछ गलत होता है तो ये गुस्सा भी जल्दी होते हैं।

चीकोरी पेशेंट स्वयं में आत्मकेंद्रित प्रवृति के होते हैं ।

9.क्लेमेटिस Clematis के मानसिक लक्षण

अपनी ही मस्ती में मस्त व्यक्ति जो हमेशा भविष्य की ओर टकटकी लगाए देखता है किंतु वर्तमान की उपेक्षा करता है। बीमार होने पर भी ये लोग बिना दवाई के ठीक होने की अपेक्षा रखते हैं और इस प्रयास में गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं। वाहन चलाते समय इनमें एकाग्रता की कमी होती हैं ऐसे लोग इस कारण दुर्घटनाग्रस्त भी हो जातें हैं।

10.Bach flower remedy क्रेब एप्पल Crab Apple के मानसिक लक्षण

ऐसे लोग जो बीमार होने पर संबंधित अंग को शरीर से बाहर करने की सोच रखते हो उदाहरण के लिए मोटा व्यक्ति यह सोचेगा कि उसका मोटापा तभी कम हो सकता है जब कुछ मांस शरीर से काटकर बाहर निकाल दिया जाए।इस प्रकार की मानसिक स्थिति में यह औषधि अच्छा काम करतीं हैं।

11.Bach flower remedy एल्म Elm के मानसिक लक्षण

अपनी जिम्मेदारी को निभाते निभाते तनावग्रस्त हो जाना और सोचना कि जो काम वह कर रहे हैं वह बहुत कठिन है और इंसान की शक्ति से बाहर है।

12.जेंशियान Gentian के मानसिक लक्षण

पूरी तरह से निरुत्साहित व्यक्ति,ऐसा व्यक्ति यदि किसी बीमारी से उबर रहा है और यदि कोई छोटी समस्या शरीर में आ जाती है तो पुनः घबराहट के कारण बीमारी हो जाता है। 

13.गोर्स Gorse के मानसिक लक्षण

ऐसा व्यक्ति जो घोर निराशावादी हो और अपने साथ दूसरों को भी निराश कर दें चाहे सामने वाला व्यक्ति कितना ही आशावादी दृष्टिकोण वाला हो। बीमारी के दौरान भी ये व्यक्ति अपनी बीमारी को लाइलाज मानकर इधर उधर इलाज कराते रहते हैं।

14.हीदर Bach flower remedy Heather के मानसिक लक्षण

बहुत अधिक बात करने वाले , हमेशा अपने आप को केन्द्र में बनाए रखने की कोशिश करना और अनजान व्यक्ति के साथ बातचीत में भी अपनी व्यक्तिगत परेशानी साझा करना। ये लोग एकांत में रहना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते।

15.होली Holly के मानसिक लक्षण

ऐसे व्यक्ति जो दूसरों की सफलता, समृद्धि और व्यवहार कुशलता के कारण उनसे बहुत ईर्ष्या करते हो और हमेशा दुःखी रहते हो उनके लिए होली बहुत कारगर औषधि है।

16.हनीसकल Honeysuckle के मानसिक लक्षण

ऐसा व्यक्ति जो अतीत की बातों से लगाव रखता हो और मिलने पर बार बार अतीत की बातों का स्मरण करता हो । और भविष्य में ऐसा अतीत या ऐसी खुशी दूसरी बार मिलने की संभावना भी नहीं रखते हो ।

17.हार्नबीम Hornbeam के मानसिक लक्षण

शारीरिक रूप से ताकतवर होते हुए भी अपने आप को कमजोर महसूस करता हैं, मानसिक रूप से थका हुआ।कार्य समय पर पूरा कर लेते हैं लेकिन हमेशा ऐसा महसूस करते हैं कि उन्हें मानसिक और शारीरिक ताकत की जरूरत है।

18.इम्पेशन्स Impatiens के मानसिक लक्षण

काम को लेकर बहुत जल्दबाजी करने वाले लोग , बीमारी के समय भी यही चाहते हैं कि जल्दी ठीक हो जाएं । जो इनके साथ काम करने में सक्षम नहीं होते हैं ये उनसे तालमेल नहीं बना पाते और मानते हैं कि ये लोग समय की बर्बादी कर रहे हैं। किसी प्रोजेक्ट को भी ये अकेले पूरा करने की कोशिश करते हैं।

19.लार्च Larch के मानसिक लक्षण

इंटरव्यू देने से पहले यही सोचते रहते हैं कि कुछ अच्छा नहीं होगा और इसी कारण इनका आत्मविश्वास समाप्त हो जाता है। इंटरव्यू के बीच में यदि कोई सवाल नही आता है तो पूरा इंटरव्यू बिगाड़ बैठते हैं।

20.मिमूलस Mimulus के मानसिक लक्षण

मिमूलस पेशेंट बहुत अधिक शर्मीले स्वभाव का और डरपोक होता है । ये बीमारी, अकेलापन किसी जानवर, अंधेरा,गरीबी और दुर्घटना से बहुत अधिक भयभीत हो जातें हैं।

21.मस्टर्ड Mustard के मानसिक लक्षण

ऐसे व्यक्ति जो किसी सामूहिक प्रयास में शामिल रहता है लेकिन असफल होने पर खुद को जिम्मेदार ठहराता है। और लाख समझाने के बाद भी अपने आप को ही असफलता के लिए जिम्मेदार मानता है।

22.ओक Oak के मानसिक लक्षण

ऐसा व्यक्ति जो अपने क्षेत्र में बहुत सफल हैं,और इसके बाद भी बेहतरीन बनने के लिए प्रयास करता हो। बीमार होने के बाद भी काम करते रहते हैं और अंतिम क्षणों तक हार नहीं मानते हैं।

23.ओलिव Olive के मानसिक लक्षण

मानसिक और शारीरिक रुप से थका हुआ,काम के प्रति निरुत्साहित रहने वाला व्यक्ति, दैनिक कार्यों को करने का मन भी नहीं करना।

24.पाईन pine के मानसिक लक्षण

खुद पर दोषारोपण करने वाला व्यक्ति जो कामयाब होने के बाद भी बेहतरी के लिए प्रयास करता हो। ऐसे व्यक्ति अपने निर्णय से संतुष्ट नहीं होते हैं।

25.रेड चेस्टनट Red chestnut के मानसिक लक्षण

ऐसे व्यक्ति जो अपनों से ज्यादा दूसरों की हद से ज्यादा चिंता करते हो और बार बार इस चिंता को प्रकट करतें हो । दूसरों की चिंता करने के दौरान ये खुद की परेशानी को भी नजरंदाज करते हैं।

26.राक रोज Rock Rose के मानसिक लक्षण

अचानक आई कोई संकटपूर्ण स्थिति उदाहरण के लिए कोई दुर्घटना या हाल ही में कोविड़ 19 के कारण परिवार में हुई एकसाथ कई मौतों में जिसमें व्यक्ति डर या दुख के कारण बार बार बैहोश हो रहा हो में यह औषधि बहुत कारगर है।

27.राक वाटर Rock water के मानसिक लक्षण

बेहद सख्त और अनुशासित स्वभाव, अनुशासन और सख्त स्वभाव के कारण खुशियों में भी अनुशासन भंग नहीं होने देते हैं। ऐसे व्यक्ति चाहते हैं कि वह सदैव मुखिया बना रहे।

28.स्कलेरेन्थस Scleranthus के मानसिक लक्षण

स्कलेरेन्थस पेशेंट बहुत अधिक सोचता है, ऐसे पेशेंट के पास यदि निर्णय करने के लिए दो विकल्प हो तो ये कभी निर्णय ही नहीं कर पाते हैं कि कोंन सा विकल्प चुनना है, उदाहरण के लिए कभी ये लोग बिना पहले से सोचें समझें मतदान करने चले जाते हैं तो बहुत देर तक वोटिंग मशीन के सामने खड़े होकर सोचते रहते हैं। जब ये परेशान होते हैं तो अपनी परेशानी दूसरों को नहीं बताते और अंदर ही अंदर सोचते रहते हैं।

29.स्टार आफ बैथलम Star of Bethlehem के मानसिक लक्षण

ऐसे व्यक्ति जो किसी दुर्घटना, बीमारी या किसी प्रियजन के खोने के बाद अकेले रहना पसंद करते हैं और नहीं चाहते कि कोई उन्हें सांत्वना देने आए ।

30.स्वीट चेस्टनट sweet chestnut के मानसिक लक्षण

स्वीट चेस्टनट का पेशेंट हमेशा यही सोचता रहता है कि शायद ईश्वर ने दुःख और गरीब के लिए उसे ही चुन लिया है और अब इससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल है, लेकिन वह बाहर निकलना चाहता है।

31.वाइल्ड़ रोज Wild rose के मानसिक लक्षण

चीजों को बहुत तेजी से त्यागने वाले ऐसे व्यक्ति जो जरा नाराजगी में चीजों को छोड़ देते हैं उदाहरण के लिए ऐसा व्यक्ति जो बार बार अपनी नौकरी बदलता हो या बार बार अपना काम बदलता हो।

32.वाइल्ड़ ओट wild oat के मानसिक लक्षण

महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व जो जीवन में बहुत कुछ प्राप्त करना चाहता हो, जीवन के हर आनंद का लुत्फ उठाना चाहता हो। लेकिन शुरुआत कहां से करें इसमें बहुत अधिक समय लेते हैं।

33.विलो willow के मानसिक लक्षण

ऐसे व्यक्तित्व जो एक बार प्राप्त कर लेते हैं उसे दूसरी बार प्राप्त करना नहीं चाहतेे और यही शिकायत करते हैं कि जो उन्हें मिला वो उनके द्वारा की गई मेहनत के मुकाबले बहुत कम है।

34.वरवेन vervain के मानसिक लक्षण

वरवेन पेशेंट किसी भी परिस्थिति में अपने आपको बदलने को राजी नहीं होते हैं। जमाना चाहे कितना भी आगे चला जाए ये पुराने रिती रिवाजों और मान्यताओं में उलझे रहते हैं। ये लोग जिन मान्यताओं से चिपके रहते हैं यदि उन्हें कोई दूसरा अपनाना चाहे तो उसे बड़े उत्साह से सिखातें हैं।

35.वाइन wine के मानसिक लक्षण

बेहद प्रतिभाशाली व्यक्तित्व जो अपनी सफलता के प्रति सौ प्रतिशत आश्वस्त नजर आते हैं। मुश्किल समय में विचलित नहीं होने वाले। ये लोग दूसरों को भी मुश्किल समय में विचलित नहीं होने देते हैं।

36.वालनट wallnut के मानसिक लक्षण

अपनी प्राथमिकता पूर्व से निर्धारित कर काम करने वाले व्यक्तित्व लेकिन कभी कभी दूसरों की बातों और आदर्शों को भी अपनाकर काम कर लेते हैं।

37.वाटर वाइलेट water violet के मानसिक लक्षण

अधिकांश चुप रहकर अपने काम करने वाला व्यक्ति जो अपने साथ प्रतियोगिता कर रहे व्यक्ति से चुपचाप आगे निकल जाता है। 

38.वाइट चेस्टनट Bach flower remedy white chestnut के मानसिक लक्षण

बहुत अधिक विचारशील व्यक्ति, इनके मन में इतने उटपटांग  विचार आते हैं कि ये खुद इन विचारों से परेशान रहते हैं। रात को इन विचारों से नींद नहीं आती है। जब दिमाग में ख्याल चलते रहते हैं तो ये बहुत एकाग्र हो जातें हैं और दूसरों के बात करने पर भी बहुत देर तक जवाब नही देते हैं।

39.बाख फ्लावर रेस्क्यू रेमेडीज Rescue Remedy

Rescue remedy पांच दवाईयों का मिश्रण होती हैं जो आपातकालीन स्थिति में बहुत काम करती है उदाहरण के लिए जल जाना,कट जाना, दुर्घटना हो जाना, गंभीर रूप से अचानक बीमार हो जाना, कोई बुरी खबर सुनकर बेहोश हो जाना आदि में यह दवाई काम आती है।

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० होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन 1 से 28 तक

8 जून 2021

Social media - आखिर क्यों कुछ लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के शिकार बन रहें हैं

 हमारे समाज में कुछ लोग सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, वाट्स एप, ट्विटर,पिनट्रेस्ट, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम कू आदि सोशल मीडिया साइट्स पर अकाउंट तो बना लेते हैं और अकाउंट बनाने के बाद ढेरों फ्रेंड और दर्जनों ग्रुप भी जाइन कर लेते हैं और इन साइट्स पर क्या चल रहा है , ग्रुप में क्या हो रहा हैं यह भी बराबर देखते रहते हैं।

 लेकिन ये लोग न के बराबर कोई फोटो अपलोड करतें हैं और बहुत कम किसी पोस्ट पर कमेंट,लाइक करतें हैं, ऐसा ये लोग इसलिए नहीं करते कि ये बहुत व्यस्त रहते हैं या इन्हें अपने काम से इतनी भी फुर्सत नहीं मिल पाती है कि सोशल मीडिया को देख सकें बल्कि ये लोग एक अजीब मानसिक समस्या से पीड़ित रहते हैं जिसे सोशल मीडिया एंग्जाइटी कहते हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति के मन में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने कमेंट करने,लाइक करने में इतनी घबराहट और चिंता उभर आती है कि  यदि वह इस तरह का काम करता है तो उसे करने से पहले घंटों तक सोचेगा और यदि उसने किसी पोस्ट पर कमेंट या लाइक किया है तो प्रतिउत्तर में कोई क्या कहेगा इसको लेकर बार बार अपना कमेंट चेक करेगा इस दोरान यदि किसी ने उसे नकारात्मक जवाब दे दिया तो वह इतना परेशान हो जाता है कि उसे उल्टी, सिरदर्द जी घबराना जैसी समस्या हो जाती हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि कोई पोस्ट शेयर करता है तो उस पर कितने कमेंट, कितने लाइक और कितने शेयर मिले इसको लेकर भी चिंतित रहता है और हर दो मिनट में अपना अकाउंट चेक करेगा।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि अपना कोई फोटो शेयर करेगा तो उसे शेयर करने से पहले बहुत लम्बे समय तक फोटो को हर एंगल से जज करेगा उदाहरण के लिए मेरी ड्रेस कैसी लग रही है,मेरा चेहरा कैसा लग रहा है आदि ,यदि कोई दूसरा उसे कह दे कि फोटो अच्छी नहीं लग रही है तो ऐसा व्यक्ति फोटो अपलोड करने के बाद उसे डिलीट भी कर देता है चाहे उस फोटो पर सैकड़ों लाइक्स मिले हो।

सोशल मीडिया



सोशल मीडिया एंग्जाइटी क्यों होती हैं ?

मनोचिकित्सकों और समाजशास्त्रीयों के मुताबिक पूरी दुनिया में 4 से 5 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के शिकार हैं । इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण है जैसे

• बचपन में बच्चों से माता पिता का बहुत ज्यादा रोक-टोक वाला व्यहवार जिससे बच्चा इतना भयभीत हो जाता है कि वह कोई काम करने से पहले अपने माता-पिता के मुंह की ओर देखने लगे। यही बच्चें जब आगे चलकर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनातें हैं तो थोड़े से नकारात्मक कमेंट और कम लाइक्स की वजह से सोशल मीडिया एंग्जाइटी के आसान शिकार होते हैं।

• बलात्कार जैसी घटना घटना  जिससे कि व्यक्ति के आत्मविश्वास को इतना बड़ा आघात लगता हैं कि वह भविष्य में कोई काम सार्वजनिक रूप से नहीं कर पाता है।

• माता पिता के बीच होने वाले लगातार झगड़े जिससे बालमन बहुत आहत और डरा सहमा रहने को विवश हो ,यही बालमन आगे चलकर सोशल मीडिया एंग्जाइटी से बहुत आसानी से पीड़ित होता है।

• वर्तमान दौर के एकाकी परिवार जिसमें अकेली संतान हो और माता पिता बच्चें के बीच समय व्यतीत न करते हों।

• ऐसे किशोरवय बच्चें जो घर के तनावपूर्ण माहौल में पले बढ़े हो और जिनके घर के तनाव का आस-पड़ोस वाले और दोस्त मजाक बनाते हो।

• मनोचिकित्सकों के अनुसार मस्तिष्क में न्यूरो केमिकल के असंतुलन की वजह से भी व्यक्ति अपनी बात रखने में झिझक महसूस करता हैं।


• शारीरिक दिव्यांगता की वजह से भी कई लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के बहुत आसान शिकार बन जातें यदि किसी ने उनका सोशल मीडिया पर मजाक उडा दिया तो ये बात उनके मन में बैठ जाती हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी के नुकसान क्या हो सकतें हैं?

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि लगातार इस समस्या से पीड़ित रहता है तो उसका पारिवारिक जीवन, सामाजिक जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता हैं, ऐसा व्यक्ति यदि विधार्थी हैं तो वह पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएगा । 

यदि कामकाजी वर्ग से संबंधित हैं तो आफिस में भी अकेला अलग थलग रहना पसंद करेगा।  योग्यता होने के बावजूद पदोन्नति लेने और जिम्मेदारी लेने में ऐसा व्यक्ति असहज महसूस करेगा।

ऐसा व्यक्ति परिवार को बाहर घूमाने भी नहीं ले जाना चाहता है जिससे घर का वातावरण निरस और उबाऊ हो जाता है और यही पारिवारिक कलह कारण बनता है। 

सोशल मीडिया एंग्जाइटी अधिक होने पर व्यक्ति इतना अधिक अवसाद में आ जाता हैं कि वह कभी कभी शराब की ओर उन्मुख हो जाता है और आत्महत्या तक कर लेता है।


सोशल मीडिया एंग्जाइटी से कैसे बचें

• सबसे पहले प्रकृति का एक सिद्धांत अपना लें कि जिस तरह से हर व्यक्ति का डीएनए अलग-अलग होता है उसी तरह व्यक्ति के विचार और व्यवहार एक दूसरे से पूरी तरह से भिन्न होते हैं। सभी व्यक्ति आपके विचारों से सहमत हो ऐसा संभव नहीं है।

• दूसरे आपके बातें में क्या सोचते हैं क्या बोलते हैं इसकी परवाह बिल्कुल भी नहीं करें बल्कि यह सोचें कि मैं जैसा हूं ठीक हूं और ईश्वर की बनाई सर्वश्रेष्ठ रचना हूं।

• यदि सोशल मीडिया एंग्जाइटी के लक्षण दिख रहे हैं तो सबसे पहले उन लक्षणों को दूर करने के लिए किसी बहुत करीबी सोशल मीडिया फ्रेंड्स का साथ लेकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें, ऐसा व्यक्ति आपको पोस्ट डालने के लिए प्रोत्साहित करेगा और पोस्ट पर सबसे पहले लाइक्स और सकारात्मक कमेंट करेगा , धीरे धीरे ऐसा करने से आपका आत्मविश्वास पढ़ेगा।

• जिन कामों में रुचि हो ऐसे कामों को करने वालों का एक ग्रुप बनाए या जाइन करें जिससे हर वो व्यक्ति आपको समझेगा जो आपके समान कामों में रुचि रखता हो ।

• बच्चों को हर बात पर डांटने और टोकने की आदत से माता पिता दूरी बना लें ।

• बड़े बच्चों के पास मोबाइल हैं और वे सोशल साइट्स पर एक्टिव हैं तो हर अच्छी पोस्ट पर उन्हें लाइक, कमेंट और शेयर द्वारा प्रोत्साहित करें , आमतौर पर देखा जाता है कि बच्चों के पोस्ट पर माता पिता  भाई बहन बहुत कम लाइक्स और कमेंट करते हैं ऐसा करने से बच्चा हतोत्साहित होता है।

• परिवार दोस्तों में यदि कोई सोशल मीडिया एंग्जाइटी का शिकार हैं तो ऐसे लोगों पर विशेष ध्यान दें और इन्हें प्रोत्साहित और उत्साहवर्धक करें।

• सोशल मीडिया पोस्ट डालते समय इस बात को मन से निकाल दें कि दूसरे इस पर क्या कमेंट करेंगे बल्कि यह बात याद रखें कि पोस्ट आपको अच्छी लगी इसलिए डाली है न कि दूसरे की रुचि को ध्यान रखकर यदि किसी को अच्छी या बुरी लगी तो यह उनका विचार हैं आपका नही।

• मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः पोस्ट डालते समय दूसरों के धर्म जाति मजहब आदि की बुराई या टीका टिप्पणी नहीं करें, इससे आपका सोशल नेटवर्किंग हर जाति, धर्म और सम्प्रदाय में मजबूत होगा और आप सोशल मीडिया एंग्जाइटी से बचें रहेंगे।



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3 जून 2021

Rainy season :: ह्रदयरोगी ये सावधानियां जरुर रखें

Rainy season :: ह्रदयरोगी ये सावधानियां जरुर रखें

 Rainy season यानि बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और इसके साथ ही वातावरण में उमस नमी और ठंडाई घुल जाती हैं। ह्रदयरोग विशेषज्ञों की मानें तो बरसात से लेकर ठंड की शुरुआत तक जाती में दर्द,एंजाइना, ह्रदयरोग के बहुत अधिक मामले प्रकाश में आते हैं। 
ह्रदयरोगी को बरसात में कौंन सी सावधानी रखना चाहिए


ऐसे निम्न कारणों से होता है ।


• बरसात में यदि कोई ह्रदयरोगी, उच्च रक्तचाप का मरीज, मधुमेह रोगी लम्बें समय तक गीला होता है तो शरीर में ठंड उतर जाती हैं।

 फलस्वरूप ह्रदय की धमनियां सिकुड़ जाती है और ह्रदय को अधिक क्षमता से कार्य करना पड़ता हैं। जब ह्रदय अधिक कार्यक्षमता से काम करता है तो रक्तचाप बढ़ जाता है और ह्रदयरोग के ओर गंभीर होने की संभावना बन जाती है । दूसरे शब्दों में कहें तो heart attack आनें की संभावना होती है।

• बरसात के मौसम में उमस अधिक होने और पसीना अधिक निकलने के कारण रक्त गाढ़ा होने और रक्त का थक्का बनने की संभावना बहुत अधिक होती हैं । 

• लम्बें समय तक बरसात होने से शारीरिक गतिविधि नहीं हो पाती ऐसा उन बुजुर्गों के साथ अधिक होता है जो सुबह शाम मार्निंग वाक के लिए पार्क में या अपने हमउम्र के साथियों के साथ घूमने जाते हैं और छत पर सीढ़ी चढ़कर घूमने में असमर्थ होते हैं।

• ह्रदयरोगी यदि बरसात में भीगकर घर आता है तो शरीर का तापमान बहुत कम हो जाता है जब शरीर तापमान बढ़ाने की कोशिश करता हैं तो ह्रदय को अधिक खून पंप करना पड़ता है जिससे कभी कभी दिल का दौरा उठ जाता है।

• बरसात के दिनों में सावन की झड़ी लगती है तब सुबह सुबह तापमान बहुत कम हो जाता है ऐसे समय में ह्रदय की धमनी कम तापमान के कारण सिकुड़ जाती है और व्यक्ति को छाती में दर्द की शिकायत होने की संभावना बढ़ जाती है। 

• बहुत से ह्रदय रोगी जिन्हें सर्जरी की जरूरत होती है और चिकित्सक ने उन्हें सर्जरी करवाने की सलाह भी दी है परन्तु बरसात का मौसम देखकर सर्जरी नहीं करवाते और फिर उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है।

• शहरों में बरसात के मौसम में प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है फलस्वरूप पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल पातीं है और व्यक्ति को heart attack आ जाता हैं।

इन समस्याओं से बचने के लिए दिल के मरीज, मधुमेह रोगी,और उच्च रक्तचाप के रोगियों को निम्न सावधानी रखना चाहिए


• ह्रदयरोगी, उच्च रक्तचाप रोगी और मधुमेह के कामकाजी लोग बरसात के मौसम में घर से आफिस और आफिस से घर आते समय अच्छी क्वालिटी का रेनकोट अपने पास जरुर रखें। यदि कार से आफिस जातें हो तो ए.सी.का तापमान सामान्य रखें ।

• ह्रदयरोगी , उच्च रक्तचाप रोगी और मधुमेह रोगी बरसात शुरू होते ही और उसके बाद हर महीने अपने चिकित्सक से परामर्श कर आवश्यक जांचें अवश्य करवा लें। 

•  अगर आप बरसात के मौसम में घूमने बाहर नहीं जा पा रहें हैं तो घर पर ही योग प्राणायाम और वाकिंग करें।

• बरसात के मौसम में यदि घर से बाहर निकलते हैं तो शरीर पर काटन के मोटे कपड़े ही पहनें , जालीदार और पतले कपड़े पहनकर घर से ना निकले।

• बरसात के मौसम अधिक चाय, काफी और तला हुआ रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत तेजी से बढ़ाता है अतः इस तरह के खानपान पर नियंत्रण रखें।

• बरसात के मौसम में ह्रदयरोगी शरीर में पानी का स्तर बनाकर रखें , यदि शरीर में हाइड्रेट रहेगा तो शरीर में रक्त का थक्का नहीं बनेगा और रक्त संचार सही रहेगा।

• यदि ह्रदय की कोई सर्जरी होना है तो की लोग उसे बरसात के मौसम के बाद करवाना उचित समझते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि बरसात में सर्जरी का घाव देर से भरता है,यह एक आम समस्या है। 

ऐसा बिल्कुल भी नही करें यदि आपके सर्जन ने आपको निश्चित समय पर सर्जरी करवाने का बोला है तो तुरंत करवा लें। क्योंकि आजकल तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि व्यक्ति सर्जरी के बाद बहुत तेजी से ठीक होकर घर जाता हैं और वो भी बिना किसी बड़ी चीरफाड़ के।

• ह्रदयरोग विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में ह्रदयरोगी भोजन हल्का और सुपाच्य ही करें क्योंकि बरसात के मौसम में भोजन को पचाने वाले पाचक रसों का स्त्रावण कम हो जाता है यदि अधिक भारी भोजन करेंगें तो यह ह्रदय पर प्रेशर डालेगा और इससे ह्रदयघात हो सकता है।

• बरसात के मौसम में धूप बिल्कुल भी नही निकलती है फलस्वरूप शरीर में विटामिन डी का स्तर कम हो जाता है।

 नए शोधों के अनुसार हृदयाघात heart attack से बचाने में विटामिन डी बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। अतः अपने चिकित्सक के परामर्श से विटामिन डी सप्लीमेंट अवश्य ले।

• जो लोग गांवों में या खेतों के आसपास रहते हैं और पहले से ह्रदयरोगी, उच्च रक्तचाप के रोगी और मधुमेह रोगी है उन्हें बरसात के मौसम में खेतों में छींटे जाने वाले पेस्टिसाइड से विशेष सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि ये जहरीली पेस्टिसाइड सांसों के माध्यम से रक्त में मिलकर शरीर में आक्सीजन का स्तर कम कर देते हैं जिससेे heart attack आनें की संभावना बन जाती है।

• प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर ह्रदयरोगी जहां तक संभव हो सकें यात्रा टाले या फिर उच्च क्वालिटी का मास्क पहनकर ही घर से बाहर निकलें।

• heart attack पूर्व संकेत और बचाव


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