गुरुवार, 23 जुलाई 2020

ब्रेन हेमरेज क्या होता हैं WHAT IS BRAIN HEMORRHAGE IN HINDI

ब्रेन हेमरेज क्या होता हैं WHAT IS BRAIN HEMORRHAGE IN HINDI 

WHAT IS BRAIN HEMORRHAGE IN HINDI
 ब्रेन हेमरेज क्या होता हैं



ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE मस्तिष्क आघात Brain stroke का एक प्रकार हैं। जिसमें मस्तिष्क की धमनी फट जाती हैं और खून आसपास के ऊतकों तक फैल जाता हैं। ऊतकों तक खून का फैलाव होनें से आक्सीजन का स्तर oxygen level कम हो जाता हैं और कोशिकाएं मरने लगती हैं। इस अवस्था को ब्रेन हेमरेज Brain hemorrhage
 कहते हैं ।



ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE के दौरान जब रक्त स्त्राव होता हैं तो मस्तिष्क के आंतरिक भाग में सूजन आ जाती हैं जिससे आसपास के ऊतकों पर दबाव पड़ता हैं और मस्तिष्क कोशिकाएं मरने लगती हैं।





ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE के क्या कारण हैं 





1.मस्तिष्क में लगी चोंट



दुर्घटना में लगी चोंट यदि गंभीर होती हैं तो ब्रेन हेमरेज हो सकता है । भारत में युवाओं में ब्रेन हेमरेज का सबसे बड़ा कारण सड़क दुघर्टना में लगी मस्तिष्क की चोंट ही हैं । BRAIN HEMORRHAGE ka sabse bada karan sadak durghatna me lagi mastishk ki chont hi hai





2.उच्च रक्तचाप high blood pressure





लम्बे समय से बने रहने वाला उच्च रक्तचाप मस्तिष्क की धमनी को कमज़ोर हो जाती हैं जिसके कारण ब्रेन हेमरेज होता हैं । उम्रदराज व्यक्तियों में ब्रेन हेमरेज होने का कारण उच्च रक्तचाप ही होता हैं।







3.एन्यूरिज्म



मस्तिष्क की धमनी की आंतरिक दीवारों में गुब्बारा बन जाता हैं,जिसे आर्टरी वेनस मालफार्मेशन (AVM) कहते हैं, यह AVM जब फटता है तो ब्रेन हेमरेज का कारण बनता हैं।







4.कैंसर‌





यदि मस्तिष्क कैंसर हो और यदि यह कैंसर भविष्य में मस्तिष्क के आंतरिक भाग में फैलता है तो ब्रेन हेमरेज होने की संभावना हो जाती हैं।





5.बढ़ती उम्र 




उम्रदराज व्यक्तियों की रक्त शिराओं में एमलाइड़ नामक प्रोटीन जमा हो जाता हैं यह प्रोटीन रक्त धमनियों की आंतरिक दीवारों को कमज़ोर कर देता है फलस्वरूप ब्रेन हेमरेज होता हैं।






6.जन्मजात विकार





सिकल सेल एनिमिया और हिमोफिलिया जैसे जन्मजात आनुवांशिक विकारों के कारण रक्त प्लेटलेट कम हो जातें हैं फलस्वरूप यदि ब्रेन हेमरेज होता हैं तो रक्त का थक्का नहीं बनता और इस प्रकार यह आनुवांशिक जन्मजात विकार ब्रेन हेमरेज के लिए आदर्श परिस्थिति पैदा करते हैं।





वायु प्रदूषण air pollution



हाल ही में हुए शोध के मुताबिक उच्च रक्तचाप के बाद वायु प्रदूषण ब्रेन हेमरेज का दूसरा सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है । वायु प्रदूषण से होने वाले ब्रेन हेमरेज के पिछे मुख्य कारण कोयला, लकड़ी जैसे घरेलू ईंधन का इस्तेमाल हैं जो आज भी बहुत से भारतीय घरों में इस्तेमाल किया जाता हैं।






जोखिम वाली गर्भावस्था 


अधिक उम्र में गर्भधारण और इसके साथ मधुमेह, शरीर में इलेक्ट्रो लाइट का असंतुलन, ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप का जोखिम ब्रेन हेमरेज के खतरे को बढ़ा देता है ।







7. ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE के लक्षण 




ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE होने के बहुत सारे अलग-अलग लक्षण प्रकट होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता हैं कि खून निकलने की जगह कोंन सी हैं। खून कितना निकल रहा है और इससेे मस्तिष्क के कितने ऊतक प्रभावित हो रहें हैं। 



ब्रेन हेमरेज के लक्षण BRAIN HEMORRHAGE ke laxan अचानक उभर सकते हैं या धिरे धिरे भी उभरते हैं । जिन्हें निम्न लक्षण के आधार पर सामान्य व्यक्ति भी पहचान सकता हैं।





० मुंह का टेढ़ा होना 




० एक तरफ का चेहरा लकवाग्रस्त हो जाना





० अचानक बहुत तेज सिरदर्द




० बांहों या टांगों में बहुत ज्यादा कमजोरी




० चक्कर आना




० उल्टी होना




० एकाग्रता में कमी





० आंखों में कमजोरी





० बोलने और समझने में परेशानी





० निगलने में परेशानी





० पढ़ने और लिखने में परेशानी





० शरीर को संतुलित करने में परेशानी





० जीभ का स्वाद समाप्त होना




० साधारण रोशनी से भी आंखें चौंधिया जाना






F.A.S.T.TEST FOR STROKE ब्रेन हेमरेज की पहचान के लिए करें F.A.S.T. TEST





F.A.S.T.TEST सन् 1998 में अस्तित्व में आया था जिसका मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क आघात या ब्रेन हेमरेज होने पर व्यक्ति इसकी तीव्रता से पहचान कर सकें ताकि बिना समय गंवाए व्यक्ति को शीघ्र उपचार दिया जा सके । 




F.A.S.T. TEST में प्रत्येक शब्द का अलग-अलग अर्थ होता हैं जैसे





F मतलब FACE या चेहरा , यदि व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा निचें गिरा हुआ लगें तो इसका मतलब यह है कि यह संभावित ब्रेन हेमरेज या स्ट्रोक का लक्षण है ।






A मतलब ARM या बांह ,व्यक्ति को अपनी दोनों बांहों को उठाकर चेहरे के बराबर लानें को कहें यदि व्यक्ति ऐसा करने में असमर्थ रहता है तो यह ब्रेन हेमरेज या मस्तिष्क आघात का एक ओर संभावित लक्षण होता हैं।






S मतलब SPEECH या बोलना, व्यक्ति को कोई सरल वाक्य बोलने को कहें यदि व्यक्ति बोलने में कठिनाई महसूस करता है तो यह एक अन्य लक्षण है।





T मतलब TIME , यदि उपरोक्त तीनों टेस्ट का परिणाम पाज़िटिव positive हैं तो इसका मतलब है कि बिना समय गंवाए व्यक्ति को आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल में ले जायें या आपातकालीन एंबुलेंस को फोन लगायें।







ब्रेन हेमरेज के प्रकार BRAIN HEMORRHAGE ke prakar





1.इंट्राक्रेनियल हेमरेज 





खोपड़ी के आंतरिक भागों में कहीं पर भी रक्त स्त्राव इंट्राक्रेनियल हेमरेज कहलाता हैं।


प्री मेच्योर डिलेवरी वाले बच्चों में इंट्राक्रेनियल हेमरेज की संभावना बहुत अधिक होती है क्योंकि इनके मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होता हैं जो बाद के जीवन में ब्रेन हेमरेज होने की संभावना को जन्म देता है।







2.सुब्राकेनाइड़ हेमरेज




मस्तिष्क के ऊपरी खोल और आंतरिक ऊत्तकों के मध्य खून का निकलना सुब्राकेनाइड़ हेमरेज के नाम से जाना जाता हैं।





3.SubDural HEMORRHAGE 



मस्तिष्क की आंतरिक दीवार dura और मस्तिष्क के ऊपरी भाग के मध्य रक्तस्राव को subdural hemorrhage के नाम से जाना जाता हैं।





4.epidural hemorrhage



आंतरिक मस्तिष्क और skull के मध्य रक्तस्राव को epidural hemorrhage कहते हैं।






ब्रेन हेमरेज से बचने के उपाय 





1.विशेषज्ञों के मुताबिक दुनियाभर में 80% ब्रेन हेमरेज का कारण उच्च रक्तचाप होता हैं। अतः ब्रेन हेमरेज से बचने के लिए यदि व्यक्ति की family history उच्च रक्तचाप की हो तो 35 वर्ष की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर अपने रक्तचाप की जांच करवाना चाहिए ।

उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण रखने से ही ब्रेन हेमरेज का बचाव हो जाता हैं ।



जिन व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप की समस्या रहती हैं उन्हें आवश्यक रूप से घर पर रक्तचाप मानिटर घर पर रखना चाहिए।





2.धूम्रपान,खैनी गुटखा, कोकीन, शराब आदि मादक पदार्थों का सेवन खून का संचार मस्तिष्क की ओर तेज कर देता है। जिससे ब्रेन हेमरेज की संभावना बढ़ जाती है अतः इन पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।





3.युवावस्था में ब्रेन हेमरेज yuvavastha me brain HEMORRHAGE का बहुत बड़ा कारण सड़क दुघर्टना में मस्तिष्क में लगी चोंट होती हैं अतः दोपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट अनिवार्य रूप से पहनना चाहिए और वाहन निर्धारित स्पीड में ही चलाना चाहिए।



4.यदि एन्यूरिज्म या मस्तिष्क संबंधी कोई न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर है तो इसका समुचित इलाज विषय विशेषज्ञों से अवश्य करवाना चाहिए।






5.मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग का बहुत घनिष्ठ संबंध होता हैं और इन बीमारियों के साथ ब्रेन हेमरेज साइलेंट किलर की तरह आता है। अतः ऐसे लोग अपनी healthylifestyle को बनाये रखें।





6.सेक्स उत्तेजना प्रदान करने वाली औषधि का प्रभाव मस्तिष्क की धमनी को कमज़ोर बनाता है अतः इन औषधियों का सेवन चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करें।





7.रोजमर्रा की दिनचर्या में तनाव का स्तर बिल्कुल भी न बढ़ने दें।




8.ऐसे मानसिक व्यायाम करें जिससे मस्तिष्क की गतिविधि तेज़ हो जैसे क्रास पजल हल करना, गणितीय पहेलियां हल करना आदि






9.योग को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना लें, ऐसे व्यक्ति जिनके परिवार में ब्रेन हेमरेज की हिस्ट्री हैं, उन्हें नियमित रूप से सुबह शाम अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, प्राणायाम करना चाहिए।




10.यदि जन्मजात आनुवांशिक विकारों जैसे सिकल सेल एनिमिया और हिमोफिलिया से ग्रसित है तो नियमित रूप से न्यूरोलाजिस्ट को दिखाये जिससे कि मस्तिष्क संबंधी कोई समस्या हो तो उसे शुरुआत में ही पकड़ा जा सके ।





ब्रेन हेमरेज का उपचार





यदि ब्रेन हेमरेज हुआ हैं तो ब्रेन हेमरेज का उपचार बहुत तेजी के साथ किया जाना चाहिए। मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के बाद CT scan, MRI द्वारा शीघ्रता से पता किया जाना चाहिए कि मस्तिष्क के किस भाग में खून का कितना रिसाव हैं। 





न्यूरो सर्जन स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मरीज को उपचार देते हैं जिससे मरीज का रक्तचाप स्थिर बना रहे और मस्तिष्क में आक्सीजन का लेवल बना रहे। 



मरीज को बाटल और इंजेक्शन के माध्यम से मस्तिष्क का आंतरिक सूजन कम करने वाली दवाईयां दी जाती है और यदि मस्तिष्क सर्जरी की आवश्यकता हुई तो न्यूरो सर्जन सर्जरी करता हैं।






क्या ब्रेन हेमरेज के बाद मनुष्य की जान बच सकती हैं




ब्रेन हेमरेज के बाद मनुष्य जिंदा रहेगा या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि ब्रेन हेमरेज के दोरान कितना रक्तस्राव हुआ है, मस्तिष्क के कितने  ऊतक क्षतिग्रस्त हुए हैं। उपचार के दौरान मरीज दवाईयां पर कितनी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करता हैं। ब्रेन हेमरेज के बाद के गोल्डन आवर में क्या संबंधित उपचार शुरू हो गया है।




वैसे अधिकांश मामलों में ब्रेन हेमरेज बहुत घातक साबित होता हैं और व्यक्ति की जान बचने के बाद भी लकवा और विकलांगता के साथ व्यक्ति को जीवन गुजारना पड़ता हैं।







कोरोनावायरस और ब्रेन हेमरेज के बीच कोई संबंध है




पिछले कई दिनों से इस बात पर जोरदार बहस चल रही हैं कि क्या कोरोनावायरस ब्रेन हेमरेज जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है ।



विशेषज्ञ इस बात पर विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं जिनके आरंभिक नतीजों के मुताबिक कोरोनावायरस के कारण मनुष्य अत्यधिक तनाव में जीवन व्यतीत कर रहा है । इस वजह से उसके मस्तिष्क संबंधी बीमारियों जैसे अवसाद,ब्रेन हेमरेज, सिरदर्द, माइग्रेन आदि से ग्रसित होने की संभावना दोगनी हों रही हैं । 


 यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल कोरोनावायरस के कारण होने वाली न्यूरोलाजिकल समस्याओं के बारे में विस्तृत अध्ययन कर रहा है ।



लेसेंट साइकेट्री जनरल में प्रकाशित शोध के शोधकर्ता बेनेडिक्ट ने महामारी और न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर का विस्तृत अध्ययन कर यह साबित किया कि कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमित होने के साथ न्यूरोलाजिकल और मानसिक समस्याओं से ग्रसित हो जाता हैं । उन्होंने 125  कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्तियों का अध्ययन किया जिसमें से 77 मरीजों को स्ट्रोक stroke की समस्या पाई गई ।







भारत में ब्रेन हेमरेज से ग्रसित लगभग 70% लोग अपनी जान गंवा देते हैं । यदि ब्रेन हेमरेज से मरने वालों की बात की जाए तो साफ लाख मौंत प्रतिवर्ष के साथ भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है ।


स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाकर ब्रेन हेमरेज से मरने वालों की संख्या को घटाया जा सकता हैं और इस काम में समाज के प्रबुद्ध वर्ग का सहयोग लिया जा सकता हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मी को ब्रेन हेमरेज BRAIN HEMORRHAGE  के संदर्भ में अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।







० मोतियाबिंद क्या होता हैं




० नीम के औषधीय गुण





० बबूल के औषधीय गुण







ठंड में बाथरूम ब्रेन स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ जाता हैं ?



भारत में ठंड के दिनों में बाथरूम में नहाने के दौरान ब्रेन स्ट्रोक के मामले बहुत अधिक बढ़ जाते हैं ऐसा ठंडे पानी से नहाने के कारण होता हैं जब वातावरण का तापमान शरीर के तापमान से कम हो जाता हैं तो ठंडा पानी शरीर और सिर पर डालने से मस्तिष्क में एड्रिनल हार्मोन बहुत तेजी से बनता हैं इस वजह से रक्तचाप एकाएक बहुत बढ़ जाता हैं और मस्तिष्क की धमनी पर दबाव पड़ता है फलस्वरूप ब्रेन स्ट्रोक का खतरा पैदा हो जाता हैं ।













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