रविवार, 12 जुलाई 2015

HIGH BLOOD PRESSURE AND AYURVEDA

आज  भारत और विश्व के सामने जिन बीमारींयों  ने चुनोंती पृस्तुत की हैं उनमें उच्च रक्तचाप का नाम पृथम पंक्तिं में लिया जाता हैं .उच्च रक्तचाप वास्तव में जीवनशैली (LIFESTYLE) से जुडा रोग माना जाता हैं. आधुनिक चिकित्सा पद्ति इस रोग पर अनुसधांन करते- करते आयुर्वैद और योग चिकित्सा पद्ति की शरण मे आ चुकी हैं., आज विश्व पृसिद् संस्थान एम्स  नासा, इसरो, अमेरिका के सैंकडों अस्पताल  ये मान चुकें है कि उच्च रक्तचाप और  जीवनशैली से जुडीं  अन्य बीमारींयों मे  पृाकृतिक चिकित्सा पद्ति आयुर्वैद और योग का कोई सानी नहीं हैं.आईयें जानते हैं.



१. पंचकर्म आयुर्वैद मे उच्च रक्तचाप को नियतिृंत कर उसे जड़ से समाप्त करता हैं.

२.आयुर्वैदिक औषधियां जैसें अर्जुन छाल पृभाकर वटी, सर्पगंधा,जटामासी , मालकांगनी और लहसुनादि वटी को  विशेष अनुपात मे मिलाकर उच्च रक्तचाप रोगी को लगातार  सेवन कराया जाता हैं, तो उच्च रक्तचाप जड़ से समाप्त हो जाता हैं.

३.योग की पारपंरिक  पद्तियां जैसें प्राणायाम,भस्त्रिका, शवासन  रोग को समाप्त करने वाली हैं.



४.मूंग में पोटेशियम,मैग्नेशियम और फायबर पर्याप्त मात्रा में पाये जातें हैं जोकि रक्तचाप सामान्य रखनें के अनिवार्य तत्व हैं ।अत: मूंग का सेवन नियमित अँतराल से करते रहना चाहियें ।

० नीम के औषधीय उपयोग


० गिलोय के फायदे



० पारस पीपल के औषधीय गुण








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