सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

DIABETES (मधुमेह)CAUSE SYMPTOM AND TREATMENT

#1. मधुमेह क्या हैं ::-



मधुमेह
मधुमेह


मधुमेह या Diabetes mellitusआधुनिक विश्व की सबसे बड़ी एँव चुनोतींपूर्ण बीमारीं के रूप में आज हमारें सामनें  व्याप्त हैं.यह बीमारीं विश्व के हर तीसरें व्यक्ति में देखी जा रही हैं और धीरें इसका दायरा बुजुर्गों से युवा लोगो और बच्चों तक फेलता जा रहा हैं. मधुमेह मे रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती हैं,और अग्नाशय से निकलनें वाला इंसुलिन नामक हार्मोंन जो इस शर्करा को नियत्रिंत करता हैं ,निकलना बन्द हो जाता हैं.

भारत मधुमेह की वैश्विक राजधानी माना जाता है । आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग सात करोड़ लोग मधुमेह से ग्रसित है और 2030 तक यह आंकड़ा दस करोड़ पंहुचने का अनुमान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि भारत में 20 करोड़ लोग मधुमेह की प्रारंभिक अवस्था में जीवन यापन कर रहें हैं।


#2.मधुमेह कितने प्रकार की होती है::-


मधुमेह मुख्यत: तीन प्रकार का होता हैं:


(१).टाइप १ मधुमेह:-इस प्रकार के मधुमेह में अग्नाशय में इंसुलिन बिल्कुल नहीं बनता ओर बाहरी इंसुलिन की सहायता से रक्त में शर्करा को नियत्रिंत करना पड़ता हैं.

(२).टाइप २ मधुमेह:-इस प्रकार के मधुमेह में लगभग नब्बें प्रतिशत इंसुलिन अग्नाशय में नहीं बनता हैं, मात्र दस प्रतिशत इंसुलिन की सहायता से शरीर को शर्करा नियत्रिंत करनी पड़ती हैं.

(३) जेस्टेशनल मधुमेह:-यह गर्भवती महिलाओं में होता हैं.


#3.मधुमेह के कारण:-


वास्तव में मधुमेह के कारणों के सम्बंध में अनेंको अनुसंधान हुये हैं, और जो सर्वमान्य निष्कर्ष निकला हैं उसके अनुसार मधुमेह जीवनशैली से सम्बंधित बीमारीं मानी गई हैं अर्थात

(A).फास्टफूड़ का अत्यधिक खानपान

(B).हाड्रोजेनेटेड़ वसा का खानें में अत्यधिक इस्तेमाल.

(C ).अनियमित जीवनशैली, व्यायाम का ,योग का अभाव.

(D).आनुवांशिक कारणों से

(E).साफ्ट ड्रिंक का अधिक इस्तेमाल.

(F).तनाव ,शराब,तम्बाकू का सेवन.


#4. मधुमेह के लक्षण::-


(A).बार -बार पैशाब होना : जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और इंसुलिन इसे नियंत्रित नहीं कर पाता है तो यह ग्लूकोज किड़नी द्वारा तेजी से बाहर निकाल दिया जाता हैं , फलस्वरूप बार पेशाब आती है । चिकित्सकीय भाषा में इसे polyuria कहते हैं

( b).लम्बें समय तक घावों का ठीक नहीं होना, हाथ पाँवों में सुन्नपन सुई चुभने सा अहसास.

(C).मुंह में चिकनाहट होना

(D).पैशाब सफेद और पैशाब वाले स्थान  पर चींटी होना ।

(E).अत्यधिक प्यास जो बार बार पानी पीनें के बाद भी नहीं बुझ रही हो : अधिक मात्रा में और बार पेशाब जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती हैं अतः बार बार प्यास लगती है।

(F).दाँतो पर मैल जमी होना और मुंह से बदबू आना : मुंह में हल्का सा गांव हो जानें पर इनमें बेक्टेरिया पनपने लगते हैं फलस्वरूप मुंह से बदबू आती है।  


(G).नाखूनों की तीव्र वृद्धि होना 

(h). वजन का लगातार घटना : जब शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज हमारी कोशिकाओं से नहीं मिलता तो शरीर वसा को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करना शुरू कर देता है फलस्वरूप शरीर का वजन लगातार कम होना शुरू हो जाता है। 

(I). लगातार पेशाब में शर्करा का स्तर बढ़ा रहने से बेक्टेरिया और फंगस मूत्रमार्ग में प्रवेश कर जाते हैं, मूत्र में मौजूद शर्करा इनके लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती है । फलस्वरूप बार बार urinary tract infection होता है।

इसके अलावा यदि जाँच करवाने पर निम्न मापदंड़ों से अधिक शर्करा रक्त में मिलें तो इसे मधुमेह मानना चाहिये.


 फास्टिंग --100mg/DL से अधिक


 पोस्ट फास्टिंग 140mg/DL से अधिक


#5.मधुमेह का आयुर्वेदिक उपचार:-


आयुर्वैद चिकित्सा प्रणाली हजारों वर्षों से लोगों को स्वस्थ कर रही हैं और मधुमेह में भी इसकी उपयोगिता जग जाहिर हो चुकी हैं,आयुर्वैद में मधुमेह को प्रमेह के रूप में वर्णित किया गया हैं, और उपचार देते हुये कहा गया है,कि यदि रोगी पूरे मनोंयोग से इन उपायों को करें तो निश्चित रूप से शीघ्र स्वस्थ होता हैं.

१. मकरध्वज, नीम बीज,शिलाजित, बेलमज्जा, अर्जुन छाल को समान मात्रा में मिलाकर करेला रस के साथ सुबह शाम सेवन करें.


२.तुलसी, सौंठ, कुट़की ,जामुन बीज चूर्ण को सम भाग मिलाकर भोजन के बाद जल के साथ लें.

३.अश्वगंधा चूर्ण एक चम्मच  रात को सोते वक्त लें.

४.ज्वारें का रस एक कप हर तीसरें दिन लें.

५. योगिक क्रियाएँ जैसें कपालभाँति, अनुलोम-विलोम करतें रहें.

६.जीवनशैली नियमित एँव संतुलित रखे.

७.पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें और सलाद का सेवन करें.

८.फलों का रस न लें बल्कि गाय का दूध सेवन करें

९.दारूहल्दी,देवदारू,त्रिफला चूर्ण, नागरमोथा, को समभाग मिलाकर १५ ग्राम चूर्ण को २०० मि.ली.पानी में उबाले जब पानी एक चोथाई रहने पर आधा- आधा सुबह शाम सेवन करें.

१०.करेले का रस प्रतिदिन १५ मि.ली. के हिसाब से १०० मि.ली.पानी में मिलाकर दिन मे दो बार सेवन करें.

११.नवीनतम शोधों के अनुसार मशरूम मधुमेह का सबसे बढ़िया उपचार हैं,यदि मशरूम को कच्चा सलाद की भाँति खाया जायें तो मधुमेह नियंत्रित रहता हैं.

१२.मूली का नियमित और संतुलित मात्रा में भोजन के साथ इस्तेमाल मधुमेह को नियंत्रित करता हैं ।अत:इसका सर्दियों में सेवन अवश्य करें ।

१३.मैथी के बीज को अंकुरित कर या साबुत बीज को पीसकर प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रित रहता हैं ।

१४.गिलोय का रस प्रतिदिन 15 से 30 मिलीलीटर सुबह शाम सेवन करें ।

१५.पलाश के फूल का चूर्ण 10 ग्राम दिन में दो बार सेवन करने से इंसुलिन का स्त्राव पेनक्रियाज से बढ़ता है ।

१६.जामुन की पत्तियाँ चबाकर खाने से स्टार्च का ग्लूकोज में परिवर्तन नहीं हो पाता हैं ।

१७.त्रिफला चूर्ण रात के समय सेवन करने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर नियत्रिंत होता हैं ।


इंसुलिन थेरेपी 

आजकल Type 2 diabetes रोगी यों में इंसुलिन थेरेपी मधुमेह को नियंत्रित करने का बहुत आसान और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है। चिकित्सक इंसुलिन थेरेपी को Type 2 diabetes की शुरूआत में ही उपयोग करने लगे हैं। 

इंसुलिन थेरेपी में उपयोग किया जाने वाला इंसुलिन हाल ही में खोजा गया इंसुलिन का एक नया प्रकार है जो तेजी से असर करता है। इसमें प्रयुक्त इंसुलिन monocomponent insulin glargine होता है जो  r DNA origin method से बनाया जाता है।



#6.सावधानी::-


० मेदा से बनी चीजों,चावल,डीप फ्राइड पदार्थ, जंक फूड का अधिक सेवन न करें

० आरामदायक जीवनशैली से बचें.

० धूम्रपान,शराब का सेवन न करें.

० शरीर की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें विशेषकर चोटों और फोड़े फुंसियों का.


#7.  मधुमेह होने पर  क्या करें::-


1. Diabetes में सही Diet plan आपको ज़रूर अपनाना चाहियें जैसें फायबर युक्त भोजन , ककडी,चोलाई,मूंग,सहजन,और हरी सब्जियों का सेवन करें.

2. रोज़ ३-४ कि.मी.  सुबह शाम पेदल चलें.

3.तनाव मुक्त रहे इसके लिये योग क्रियाएँ जैसे प्राणायाम करें.

4. विभिन्न अनाजों  को मिलाकर जैसे सोया,चना,जौ,अलसी से बनी रोटी का सेवन करें.

5. मधुमेह में भूखा रहनें से Hypoglycemia का खतरा रहता हैं,अत: भूखा रहनें की स्थिति में बिस्किट़,चना,किशमिश अपनें साथ अवश्य रखना चाहियें.

मधुमेह की जांच कब करना चाहिए

आजकल हर घर में मधुमेह जांच उपकरण ग्लूकोमीटर Glucometer मौजूद हैं । और लोग जब मर्जी चाहे तब ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल की जांच करते रहते हैं । ऐसे मे सही जानकारी बहुत आवश्यक हो जाती हैं । और वह यह की 

1.रेंडम ब्लड शुगर की जांच भोजन के तुरंत बाद नहीं करें इसके लिये भोजन के एक से दो घंटे बाद का समय चुनें ।

2.जिन लोगों का ब्लड शुगर बढ़ा हुआ रहता हैं उन्हें तीन चार दिन में ब्लड शुगर जांच करते रहना चाहिए ।

3.ब्लड शुगर जिनका नियत्रिंत रहता हैं ऐसे लोगों को सप्ताह में एक दिन ब्लड शुगर की जांच करना चाहिए ।

4.घर पर ब्लड शुगर जांच कर जांच रहें हो तो जांच के पहले और बाद में जिस ऊंगली से ब्लड सैंपल ले रहें हो उसे स्प्रिट या डेटाल से सेनेटाइज जरूर करें ।


4.कई बार यह देखने में आता हैं कि व्यक्ति एक ही निडिल को तीन चार बार फिंगर से ब्लड निकालनें के लिए उपयोग करतें हैं और इसके पिछे तर्क देते हैं कि क्या हुआ निडिल मैनै स्वंय ने उपयोग की हैं किसी दूसरें ने उपयोग थोडी ही ना की हैं । ऐसा हरगिज ना करें ,ऐसा करने से ऊंगली में गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता हैं जो मधुमेह रोगीयों के लिए जानलेवा साबित हो सकता हैं ।


5.बार बार एक ही ऊंगली को ब्लड सेंपल लेनें के लिए उपयोग ना करें अदल बदल कर ऊंगली से ब्लड सेंपल लें ।


6.ब्लड शुगर जांचने का समय अलग अलग रखे जैसे कभी सुबह कभी शाम तो कभी दोपहर में ऐसा करने से ब्लड शुगर का औसत पता चल जाता हैं ।


डायबिटिक रेटिनोथैरेपी 

जिन लोगों के खून में शुगर की मात्रा बहुत लम्बे समय तक अनियंत्रित और अधिक बनी रहती है उनकी आंखों के रेटिना की छोटी छोटी रक्तवाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और इस वजह से आंखों को जरूरी पौषक तत्व और आक्सीजन नहीं मिल पाती है। फलस्वरूप आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। डायबिटिक रैटिनोपैथी को चिकित्सकीय भाषा में डायबिटिक मेक्युलोपैथी भी कहते हैं।

डायबिटिक रैटिनोपैथी के लक्षण

√ बार बार चश्में का बदलता हैं।

√ मोतियाबिंद हो जाता है।

√ देखने पर ऐसा लगता है जैसे आंखों में काले धब्बें तैर रहे हैं ।

√ मोतियाबिंद कांचबिंदु में बदल जाता है।

√ ज्यादा परेशानी होने पर आंखों के अंदर रक्तनलिकाएं फूट भी सकती हैं ।

डायबिटिक रैटिनोपैथी का इलाज

डायबिटिक रैटिनोपैथी होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ आंखों का ओसीपी मैक्यूला टेस्ट,फंडस फ्लोरिसीन एंजियोग्राफी जैसी आधुनिक जांचें करते हैं और रोग की गंभीरता के आधार पर आंखों का आपरेशन करते हैं। 

डायबिटिक रैटिनोपैथी से बचाव के तरीके

√ रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रखना चाहिए ‌

√ साल में एक बार आंखों की  जांच करवाना चाहिए।

√ रक्तचाप नियंत्रित होना चाहिए।

√ नियमित रूप से योग, व्यायाम आदि करना चाहिए।

√ शराब, धूम्रपान, मांसाहार से दूर रहें।

√ भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां,गाजर,मूली, चुकंदर, अंकुरित अनाज का अधिक इस्तेमाल करें। 

√ पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए।



नोट- वैघकीय परामर्श आवश्यक

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट