सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

14 औषधीय गुण थूहर के

14 औषधीय गुण थूहर केे


थूहर आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत महत्व का पौधा है,इसका पौधा दस फ़ीट तक ऊंचा होता है । थूहर में लगने वाली लम्बी लम्बी डंडे के समान होती हैं ,जिन पर तीखे कांटे निकले रहते हैं ।

थूहर के पत्ते 6 इंच तक लम्बें और ढाई इंच तक चोडे होते हैं । थूहर का कोई भी भाग तोड़ने पर सफेद दूध निकलता है

14 औषधीय गुण थूहर के
थूहर


थूहर का संस्कृत नाम 

थूहर को संस्कृत में स्नूही,सुधा,समन्त दुग्धा,वज्रा नाम से जाना जाता हैं ।

थूहर का लेटिन नाम

थूहर को लेटिन भाषा में fuphorbia nerifolia (यूफोर्बिया नेरिफोलिया) के नाम से जानते हैं ।

थूहर का हिन्दी नाम

थूहर को हिन्दी में सेहुंड,कांटा थूहर, थूहर छोटा के नाम से जाना जाता हैं ।

आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति

आयुर्वेद मतानुसार थूहर गर्म, कड़वी,भारी,होती हैं, थूहर का दूध भी गर्म,तीखा और रेचक होता है ।

थूहर के औषधीय गुण या थूहर के फायदे


1.दस्त लगानें में

यदि किसी को बहुत दिनों से दस्त नहीं हो रहें हैं तो थूहर के दूध में हरड़,पीपल और निशोंध पीसकर चटा दें , बहुत तेज दस्त लगेंगे ‌।

2.बिच्छू का विष उतारने में 

थूहर की जड़ को कालीमिर्च के साथ पीसकर बिच्छू काटने वाली जगह पर लगाने से बिच्छू का जहर उतर जाता हैं। 

3.मस्सों को हटाने में

शरीर पर मौजूद मस्से , गांठें और फोड़े फुन्सी पर थूहर का दूध लगाने से मस्से, फोड़े फुन्सी मिट जाते हैं ।

4.खांसी में थूहर के पत्तों का उपयोग

थूहर के दो पत्तों को आग पर गर्म कर लें, इसके पश्चात इन पत्तों का रस निकालकर इसमें थोड़ा सा सैन्धा नमक मिलाकर पीएं।  खांसी  बंद हो जाती हैं ।

5.अस्थमा में थूहर के औषधीय फायदे

थूहर के दूध को ,अदरक रस,हल्दी,शहद और कालीमिर्च के साथ मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम खाने से अस्थमा में बहुत आराम मिलता हैं।

6.कानदर्द में थूहर के फायदे

थूहर के पत्तों का रस निकालकर एक दो बूंद कान में डालने से कानदर्द बंद हो जाता हैं ।

7.पेटदर्द में

थूहर के दो तीन पत्तों का रस निकालकर , इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस मिला लें,पेटदर्द में दो तीन बार सेवन करें । आराम मिलेगा।

8.आफारा में थूहर के फायदे

थूहर के दूध में थोड़ी सी अजवाइन मिलाकर पीस लें, यदि आफारा (पेट फूलने में) हो गया है तो आधा चम्मच मिश्रण खिलाएं बहुत आराम मिलता हैं ।

9.सूजन उतारने में

थूहर के पत्तें और थूहर का दूध गर्म कर सूजन वाले स्थान पर लगाकर कुछ देर गर्म पानी से सेंकने से बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं।

10.बेहोशी में थूहर के फायदे

यदि व्यक्ति बेहोश हो जाता हैं तो थूहर का दूध एक चम्मच शहद में मिलाकर बेहोश व्यक्ति की जीभ पर डाल दें,ऐसा करने से बेहोश व्यक्ति होश में आने लगेगा ।

11.गेंग्रीन में थूहर के फायदे

थूहर के तने का गुदा , अदरक रस,और हल्दी समान मात्रा में मिलाकर एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को खिलाएं मधुमेह के कारण हुआ गेंग्रीन ठीक होता है ।

12.आंखो के रोग

थूहर का दूध घी में मिलाकर रूई के फुए की सहायता से आंखों पर रखें,ऐसा करने से आंखों से संबंधित परेशान जैसे आंखों का दर्द, आंखों का सुखापन, आंखों से कम दिखाई देना आदि में आराम मिलता हैं ।

13.वजन घटाने में


थूहर का दूध तना और पत्ता बहुत उष्ण होता है। इसके सेवन से शरीर की चर्बी बहुत तेजी से पिघलती है। 

थूहर के दूध को शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक चम्मच चाटने से वजन बहुत तेजी से कम होता है ।

इसी प्रकार थूहर के तने का चूर्ण एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से वजन कम होता है ।

14.अर्श में

अर्श में यदि गुदा मार्ग से मस्से लटक रहें हैं तो थूहर का दूध इन मस्सों पर विशेषज्ञ की देखरेख में लगाएं,मस्से बहुत आसानी से निकल जाएंगे। 


थूहर के नुक़सान

थूहर का पेड़, दूध,तना बहुत ही गर्म प्रकृति के होते हैं,इसकी अधिक मात्रा सेवन करने से बहुत तेज दस्त लग सकतें हैं।

इसी प्रकार इसके सेवन से पेट में मरोड़,उल्टी, चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

[नोट :- थूहर के सेवन से पूर्व वैद्यकीय परामर्श  अवश्य पर्याप्त करें]

• जीवनसाथी के साथ नंगा होकर सोने के फायदे और नुकसान

० नीम के औषधीय गुण

० लहसुन के औषधीय गुण

• नाखून देखकर जानिए सेहत का हाल

• गूलर के औषधीय गुण

• काला धतूरा के फायदे और नुकसान

• चुकंदर खाने के फायदे

• बरगद पेड़ के चमत्कारिक फायदे

• बबूल के फायदे क्या हैं

• ब्रेस्ट कैंसर से बचने के तरीके क्या हैं

• मेफ्रिस्टोन टेबलेट के उपयोग

 • कीटो डाइट के फायदे और नुकसान


• दही खाने के फायदे



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी