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चरक संहिता पुस्तक के अनुसार मूली खाने के फायदे

चरक संहिता पुस्तक के अनुसार 'मूली खाने के फायदेे'


आयुर्वेद में मूली त्रिदोषनाशक होनें के कारण हर बीमारी में उपयोगी हैं तो आईयें जानतें हैं आयुर्वेद की महान पुस्तक"चरक संहिता के अनुसार मूली खाने के फायदे" 

बालंदोषहरंवृद्धंत्रिदोषंमारूतापहम्।स्निग्धसिद्धंविशुष्कन्तुमूलकंफवातजित्।।


अर्थात मूली जब कच्ची होती हैं तो यह त्रिदोषनाशक होती हैं,पकी हुई मूली त्रिदोषकारक होती हैं। तेल,घी से सिद्ध की गई मूली और मूली के पत्ते वातनाशक होतें हैं।इसी प्रकार सूखी हुई मूली वात,कफ को समाप्त कर देती हैं ।

 

मूली स्वाद में कषाय,चरपरी होती हैं । मूली में आयरन,कैल्सियम, मैग्निशियम, सोडियम, विटामिन ए ,गंधक,क्लोरीन आदि तत्व बहुत प्रचुरता में पाए जातें हैं ।


आईयें जानतें हैं मूली खानें के  फायदे के बारें में

मूली खाने के फायदे


• कच्ची मूली सलाद के रूप में यदि सुबह शाम खाई जाए तो यह पेट में मौजूद रूकी हुई हानिकारक वायु को बाहर निकाल देती हैं,लेकिन आजकल लोग मूली मात्र इसीलिये नही खाते की यह पेट में गैस बनाती हैं। वास्तव में यह धारणा सही नहीं हैं ।


#मूलीखानेकेफायदे

• पेट में एसिडिटी की समस्या हैं तो मूली का रस एक चम्मच और निम्बू रस एक चम्मच मिलाकर पीनें से बहुत आराम मिलता हैं ।

• कब्ज होनें पर मूली का सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता हैं,इसके लिए मूली का सलाद या मूली के पत्तों की बनी सब्जी का सेवन करना चाहिए ।

• पथरी होने पर मूली के 10 ग्राम बीज को एक गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक की पानी आधा न रह जाए इस पानी को चार बार सुबह शाम मिलाकर पीनें से पथरी धीरे धीरे बाहर आ जाती हैं।

• पेट में कीड़े हो गये हो तो मूली का रस रात को सोते वक्त पीलानें से पेट के कीड़े निकल जाते हैं ।

• जिन लोगों को पीलिया और फेटी लिवर की समस्या हो उन्हें मूली के पत्तों को पानी में उबालकर पीना चाहिए इससे पीलिया रोग बहुत जल्दी समाप्त हो जाता हैं ।


• मूली का रस मूत्र संबधी रोगों में आशातीत लाभ प्रदान करता हैं, यदि पैशाब रूक रही हो,मूत्रमार्ग में जलन हो तो मूली का एक चम्मच रस पानी के साथ मिलाकर पी ले बहुत आराम मिलेगा ।


• गले में खराश होनें पर मूली के बीज बहुत फायदा पहुंचातें हैं,इसके लिए 10 ग्राम मूली के बीजों को पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में तब तक उबाले जब तक की पानी आधा नही रह जाए इस पानी से दिन में दो तीन बार गरारें करें बहुत फायदा मिलेगा ।

• पकी हुई मूली खोखली और वजन में हल्की हो जाती हैं,इस मूली में गर्मी को सोखने की अद्भुत क्षमता मौजूद रहती हैं, यदि इस मूली को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाया जाए तो जलन बहुत जल्दी मिट जाती हैं।


• जोड़ो में दर्द होनें पर मूली का सेवन बहुत फायदा पहुंचाता हैं, इसके लिए मूली के पत्तों की सब्जी या मूली का सलाद खाना चाहियें ।


• मूली स्त्री और पुरूष दोनों की सेक्स पावर बढ़ाती हैं,यदि सेक्स पावर कम हो गई हो,तो मूली में गाय का घी एक चम्मच मिलाकर खाना चाहियें ।


• शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ गई हो तो मूली के पत्तें सरसों के तेल में गर्म करके सूजन वाली जगह पर रात को सोनें से पहले बाँध दें,सूजन बहुत जल्दी कम हो जायेगा ।

• मूली का रस यदि बालों में लगाया जाए तो रूसी और जुंए नहीं होगी ।

• मूली का रस कानदर्द ,बहरेपन में बहुत लाभदायक होता हैं,इसके लिए मूली के रस को गर्म कर दो तीन बूंद कान में डालें ।


• मूली के पत्तों को सरसो के तेल में तब तक गर्म करें जब तक की पत्तें कुछ कुछ काले न हो जाए ,इस तेल की दो बूंद कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता हैं। 

• यदि खाँसी बहुत तेज हो तो एक चम्मच मूली का रस गर्म कर थोडी सी शहद मिलाकर लें ।


• अस्थमा के दौरो  में मूली का रस एक चम्मच, एक चम्मच अदरक रस और आधा चम्मच हल्दी पावडर मिलाकर लें ।


• मूली का क्षार प्रतिदिन आधा चम्मच सुबह शाम लेनें से पथरी बाहर निकल जाती हैं ।


• मुंह में छाले हो गये हो तो मूली के पत्तों का रस एक चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर छालो पर लगाये बहुत शीघ्रता से छाले ठीक हो जातें हैं ।


• मूली में मौजूद विटामीन ए आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं,यह आँखों के रेटिना को स्वस्थ रखता हैं,जिससे बुढापे में भी आँखें खराब नही होती हैं ।


• मूली में मौजूद सोडियम मांसपेशियों को लचीला बनाता हैं जिससे खेल के दौरान चोंट की संभावना नहीं रहती हैं ।


• मूली में मौजूद कैल्सियम हड्डीयों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत मददगार होता हैं।यदि मूली के पत्तों की सब्जी,मूली का अचार और मूली का सलाद नियमित रूप से खातें रहें तो हड्डीयों से संबधित समस्याँए नहीं होगी ।


• मूली त्वचा से संबधित कई समस्याओं में लाभ प्रदान करती हैं ,इसमें मौजूद गंधक खुजली,कील मुहांसे आदि को ठीक करता हैं।


• मूली बार बार गर्भपात की समस्या और गर्भधारण में बहुत लाभकारी होती हैं, यदि बार बार गर्भपात होता हैं तो मूली के पत्तों को पानी में उबालकर पानी पीना चाहिए। 

इसी प्रकार यदि गर्भधारण में समस्या आ रही हैं तो रात को सोने से पूर्व कच्ची मूली का सेवन करें ।


• पकी हुई मूली को सुखाकर पावड़र बना ले यह पावड़र आधा आधा चम्मच सुबह शाम लें ,मोटापा कम करनें में मदद मिलेगी ।


• यदि फेफडों में सूजन हो तो मूली के बीजों को पीसकर पानी के साथ खानें से फेफडों की सूजन दूर हो जाती हैं।


• यदि पेटदर्द हो तो एक चम्मच पकी मूली का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेनें से बहुत आराम मिलता हैं ।


• मूली के बीज सफेद दाग में बहुत फायदेमंद होतें हैं,इसके लिए मूली के बीजों को पीसकर शहद के साथ सेवन करें ।


• सिरदर्द होनें पर मूली के पत्तों का रस सेवन करने पर बहुत आराम मिलता हैं,यदि सिरदर्द बहुत दवाई लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा हो तो मूली के पत्तों का रस एक चम्मच और कच्ची हल्दी का रस एक चम्मच मिलाकर लें।


• मूली में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं । अत:मूली का नियमित इस्तेमाल करते रहने से व्यक्ति जल्दी जल्दी बीमार नहीं होता हैं ।

• यदि हिचकी आ रही हैं तो मूली के पत्तों को चबाने से हिचकी में आराम हो जाता हैं।


मूली खाने के नुकसान


• मूली खानें के बाद कई लोगों को बहुत अधिक गैस बनने लगती हैं अत:ऐसे लोग मूली खानें से पूर्व वैधकीय परामर्श अवश्य लें ।


• मूली कई लोगों को एलर्जी पैदा करती हैं अत:जिन लोगों को मूली से एलर्जी हो वे मूली न खांए ।

Author:

Dr.p.k.vyas
Ayurvedacharya

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