गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

बबूल का पेड़ फायदे अनेक Benefit of acacia tree in Hindi

बबूल पेड़ के फायदे
बबूल पेड़ 

बबूल का पेड़ फायदे अनेक Benefit of acacia tree in Hindi



बबूल का पेड़ वैसे तो सम्पूर्ण भारत मेें पाया जानें वाला उष्णकटिबंधीय वृक्ष हैं ।किन्तु पश्चिमी भारत विशेेेेषकर राजस्थान ,मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश  आदि  प्रदेशों में यह वृृक्ष बहुतायत में  मिलता है ।


बबूल का पेड़ मध्यम कद का  होता हैं । बबूल के पत्ते छोटें छोटें आँवले के पत्तो के समान होतें हैैं ।

बबूल के कांटे  बहुत तीक्ष्ण और मज़बूत होतें हैं बबूल के कांटें दो - दो के जोड़े मेंं लगतें हैं । 


बबूल के फूल पीले रंग के होतें हैं। बबूल की फलियाँ इमली के समान लम्बाई वाली होती हैं ।


बबूल के पेड़ से गोंद भी प्राप्त होता हैं ।  बबूल की लकड़ी बहुत कठोर और लम्बे
समय तक  टीकाऊ होती हैैं ।


बबूल का संस्कृत नाम 




बबूल को संस्कृत में बर्बूर ,बब्बूल ,कफांतक ,स्वर्णपुष्प ,और मालाफल कहतें हैं।




बबूल का हिन्दी नाम




बबूल को हिन्दी मेें बबूल ,बबूर और कीकर नाम से पुकारतें हैं ।



बबूल का लेटिन नाम 


बबूल को लेटिन भाषा मेें माइमोसा अरेबिका कहतें हैं ।




आयुर्वेद मतानुुुुसार बबूल की प्रकृति 



 आयुर्वेद मतानुसार बबूल कड़वा ,स्निग्ध ,शीतल होता हैं ।




बबूल का उपयोग 




1.दस्त  में 



बबूल के गोंद को 30 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे 100 मिलीलीटर पानी मेंं गला देें । इस पानी को दिन में तीन चार बार पीलायें । दस्त बंद करने की घरेलू दवा इससे उत्तम नही हैं ।




2.दाँतदर्द 



बबूल बहुत उत्तम दाँतदर्द निवारक औषधी हैं । बबूल की टहनी से दातुन करनेें वाले व्यक्ति के दाँतदर्द मेें तुरंत आराम मिलता हैं । और दांत मजबूत और चमकदार बनतें हैैं । 


यदि दाँत सड़ रहे हो तो बबूल की फली को जलाकर इसे राख बना ले और इसमें नमक मिलाकर मंजन करनें से सड़़े दाँत का और अधिक क्षरण नही होता हैं ।




3.नेत्रपीड़ा 



बबूल के पत्तें जो नरम हो ऐसे आठ दस पत्तें लेकर उनका रस निकाल ले इस रस में इतना  ही शहद मिलाकर आँखों पर अंजन करें आँखों के दर्द में बहुुुत तेेेजी से आराम मिलता हैं ।






4.बाजीकारक 



बबूल की छाल ,फल और गोंद बहुत उत्तम बाजीकारक औषधी हैं । 


यदि बबूल केे गोंद को प्रतिदिन चने के दाने बराबर लेकर चूसा जायें  तो इंसान कुुछ ही दिनों मेंं  घोडे जैसा शक्तिशाली बन जाता हैं । उसकी मैथुन करनेें की क्षमता दुगनी हो जाती हैैं । वीर्य स्खलन  का समय  लम्बा हो जाता हैं ।




5.शुक्राणुओं की वृद्धि 



बबूल की फली 500 ग्राम और 300 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण आपस में मिला लें यह चूर्ण आधा चम्मच प्रतिदिन केे हिसाब से रात्रि में सोते वक्त सेवन करनें से व्यक्ति के वीर्य मेें शुक्राणुओं की सँख्या बढ जाती हैं ।





6.श्वेत प्रदर



बबूल की छाल का क्वाथ बनाकर इसमें थोडी सी फिटकरी डाल ले और इस क्वाथ से योनि को धोंये।
श्वेत प्रदर मेें आराम मिलता हैं ।




7.टूटी हड्डी जोडनें में 




बबूल टूटी हड्डी जोड़नें की सर्वमान्य आयुर्वेदिक औषधी हैं जो लम्बेेे समय से वनवासीयों द्धारा उपयोग की जा रही हैं ।


बबूल के बीजों का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण के साथ शहद मिलाकर सुबह शाम चाटनें से टूटी हड्डी जुूूूड़़ जाती हैं ।




8.चर्म रोंग मेें



बबूल के गोंद को पानी में पीसकर दाद खाज पर लगानें से दाद खाज में आराम मिलता हैं ।




9.बिच्छू कााटनें पर 



बबूल के गोंंद को गरम कर बिच्छू काटनें वाले डंक पर चिपका दे इस  विधि से  बिच्छछू का जहर कुुछ ही क्षण में उतर जाता हैं ।



 10.मुुँह के छाले


बबूल के पत्तों का रस मुहँ में भरकर कुल्ला करनें से मुँह के छालेंं ठीक हो जातें हैंं।

बबूल के गोंंद को मुंह में लेकर चूसनें से मुँह के छाले की जलन कम होकर बहुत शीीघ्रता सेे ठीक होतेें हैं ।




11. रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानें में




बबूल की छाल को रातभर पानी में भिगोकर सुबह इस पानी से स्नान करनें से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़़ती हैं ।




12.कुपोषण 



बबूल की फली ,गोंद ,पत्तियाँ छाल सभी पोषण से भरपूर होतें हैं इनकोो खानें कुुुपोषण बहुत शीीघ्रता सेे दूर होताा हैं ।



13.रक्तस्त्राव  रोकने में



बबूल के फूल रक्तस्त्राव रोकने की बहुत उत्तम आौैषधि हैं । यदि कटनें से रक्त नह
 रूक रहा हैैं तो बबूल के फूलों का रस कटे हुये स्थान पर लगा दें रक्तस्त्राव रूूूक जावेगा
 किन्तु इस विधि का उपयोग तभी करें जब आकस्मिक चिकित्सा का कोई साधन उपलब्ध नही हो ।





14.गर्भपात मेंं




यदि स्त्री को बार बार गर्भपात  की शिकायत हो तो बबूल के गौंद को घी में तलकर प्रतिदिन 5 ग्राम गोंद गर्भावस्थथा के प्रथम मास से तीन चार माह तक खिलायें गर्भपात की संभावना समाप्त हो जाती हैं ।








15.बालों को मज़बूत बनाता हैं




बालों यदि अकारण टूटकर गिरतें हो तो बबूल की फली को रात को पानी में भिगोकर छोड़ दें । सुबह इस पानी से बाल धों लें बाल मज़बूत और टीकाऊ बने रहेंगें ।





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