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लहसुन के फायदे और नुकसान benifits of garlic in Hindi

 लहसुन के फायदे benefit of garlic in Hindi




प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथ चरक संहिता में भी लहसुन के औषधीय गुणों lahsun ke oshdhiy guno के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है
लहसुन के फायदे lahsun ke fayde से संपूर्ण चिकित्सा जगत प्राचीन काल से ही परिचित है आधुनिक चिकित्सा के जनक हिप्पोक्रेट्स ले लहसुन का प्रयोग औषधि के रूप में किया है। 



प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथ चरक संहिता में भी लहसुन के औषधीय गुणों lahsun ke oshdhiy guno के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। 


आयुर्वेद ग्रंथों में लिखा हैं 


अमृमोद्भूतममत लशुनानां रसायनम् 


अर्थात लहसुन अमृत के समान और अमृत से उत्पन्न हुआ हैं । 


भारत चीन के बाद लहसुन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत से लहसुन विश्व के कई देशों में निर्यात की जाती है।


लहसुन alliaceae कुल का पौधा है जो प्याज की श्रेणी में आता है।लहसुन का वानस्पतिक नाम "एलियम सैटाइमम् हैं। लहसुन जमीन के अंदर पैदा होती है और पकने के बाद इसकी कलियां उपयोग की जाती है।



लहसुन में पाए जानें वाले पौषक तत्व ::



1.प्रोटीन :: 6.3 प्रतिशत



2.कार्बोहाइड्रेट :: 21 प्रतिशत 



3.वसा :: 1 प्रतिशत 



4.खनिज लवण :: 1 प्रतिशत




5.वाष्पशील तेल :: 0.6 प्रतिशत



6.कैल्सियम :: 3 प्रतिशत



7.फास्फोरस :: 21 प्रतिशत



8.आयरन :: 1.3 प्रतिशत




                                  ( प्रति 100 ग्राम)


इसके  अतिरिक्त लहसुन में एलिसिन, प्रोटीन, एंजाइम, विटामिन बी,विटामिन ए,विटामिन सी, सैलेनिन, फ्लेवोनॉयड्स,मैंगनीज, एल्यूमीनियम, तांबा,गंधक, और फायबर प्रचुरता से पाए जाते हैं‌ । 








1.लहसुन के फायदे benefit of garlic in Hindi :::





वाशिंगटन विश्वविद्यालय में हुए एक शोध का नतीजा है कि लहसुन में पाया जाने वाला   डायलिल "सल्फाइड"वायरस द्वारा बनाए जाने वाली परत को तोड़ देता है जिसे वायरस का शरीर में फैलाव नियंत्रित किया जा सकता है । लहसुन के संबंध में यह शोध जनरल ऑफ एंटीमाइक्रोबॉयल कीमोथेरेपी में प्रकाशित हुआ था। अतः लहसुन का नियमित सेवन करने से वायरस से बचाव होता है।




उच्च रक्तचाप ह्रदय रोग जैसी समस्याओं में लहसुन बहुत चमत्कारिक औषधि है लगातार लहसुन का सेवन करने से न केवल रक्तचाप नियंत्रित होता है बल्कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है। 




लहसुन में मौजूद एलीसिन एंटीबैक्टीरियल तत्व है जो शरीर में उपस्थित संक्रमण को समाप्त कर देता है और यदि संक्रमण नहीं है तो संक्रमण से शरीर की सुरक्षा करता है।




लहसुन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी वृद्धावस्था की समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं साथ ही बुढ़ापे की प्रक्रिया धीमी करते हैं।





लगभग 3 ग्राम लहसुन की मात्रा में 1% विटामिन सी पाया जाता है विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और टूटे हुए ऊतकों की मरम्मत का कार्य करता है





भारत के ग्रामीण भागों में महिलाएं लहसुन की कलियों की माला बनाकर बच्चों को पहनाती है ऐसा बच्चे को खतरनाक बैक्टीरिया और अन्य संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए किया जाता है यह पूरी तरह से वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है लहसुन में मौजूद सल्फाइड़ एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी का होता है और इसकी गंध से अनेक प्रकार के दूसरे वायरस मर जाते हैं ।




प्राचीन रोम में ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधारने के लिए लहसुन खाने की सलाह दी जाती थी और लहसुन तेल से शरीर की मालिश करवाई जाती थी ताकि खिलाड़ी मजबूत और हष्टपुष्ट बन सके ।




ताजे लहसुन की गलियों में सल्फर नामक तत्व प्रचुरता से मौजूद रहता है जोकि दाद खाज खुजली और अन्य‌ त्वचा रोगों की रामबाण दवा है। 



लहसुन का नियमित रूप से सेवन लिवर किडनी फेफड़ों को लेड़ कार्बंन कण आदि प्रदूषक तत्वों से सुरक्षित रखता है यह शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है ।



एक बैटरी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों पर लहसुन के प्रयोग से यह बातचीत हुई की लहसुन का नियमित सेवन करने वाले कर्मचारियों में लेड़ जैसी खतरनाक  धातु का स्तर उन कर्मचारियों से 19% तक कम पाया गया जो लहसुन का नियमित सेवन नहीं करते हैं।






लहसुन की विशेष गंध मस्तिष्क के उन भागों को सक्रिय कर देती हैं जो याददाश्त बढ़ाने के लिए उत्तरदायी होते हैं ।‌ अतःलहसुन की गंध से याददाश्त तेज होती है।









2. लहसुन के औषधीय गुण :::




प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ चरक संहिता में लहसुन के औषधीय गुणों के बारे में वर्णन करते हुए लिखा है 



क्रिमिकुष्ठकिलासन्घोवातघ्नोगुल्मनाशन:।स्निग्धश्चोष्णच्शवृष्यश्चलशुन:कटुकोगुरु:।।


अर्थात लहसुन पेट की कृमी, कुष्ठ, वातव्याधि को दूर करता है। लहसुन प्रकृति में ऊष्ण, वृष्य,कटु,और भारी होता है ।







3. लहसुन रात में खाने के फायदे :::




लहसुन की लगभग 3 ग्राम मात्रा में 1% सेलिनियम पाया जाता है सेलिनियम स्त्री और पुरुषों की काम शक्ति को बढ़ाता है ।


काम शक्ति बढ़ाने के लिए रात को सोने से 2 घंटे पहले लहसुन को भोजन के साथ या लहसुन की चटनी के रूप में खाया जा सकता है।





लहसुन स्त्रियों की बांझपन की समस्या भी समाप्त करता है इसके लिए 3 ग्राम कच्चा लहसुन सोने से पूर्व खाएं ।








4. भूने लहसुन के गुण bhune lahsun ke gun :::




एक अध्ययन में यह बात प्रमाणित हुई है कि जो व्यक्ति नियमित अंतराल से भूने लहसुन का सेवन करता है उसे सर्दी खासी और बुखार होने की समस्या उन लोगों की अपेक्षा बहुत कम होती है जो इसका सेवन नहीं करते हैं।




भूने लहसुन की एक कली सर्दी खांसी और बुखार होने पर लगातार तीन दिन तक देने से सर्दी खांसी और बुखार की समस्या समाप्त हो जाती है ।




सर्दियों में भुने हुए लहसुन की एक दो कलियां प्रतिदिन खाने से ठंड से बचाव हो जाता है ।



सम्पूर्ण लहसुन यानि बिना छिलका निकली लहसुन को भून कर यदि उन लड़कियो को सेवन करवाया जाए जिन्हें माहवारी के समय पेट और पेडू में दर्द होता हैं तो उनकी समस्या बहुत जल्दी समाप्त होती हैं ।






5. महिलाओं के लिए लहसुन के फायदे :::




लहसुन की चटनी और लहसुन का सब्जी में इस्तेमाल उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है जो मीनोपॉज की समस्या से ग्रसित है। लहसुन ऐसी महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर  से बढ़ा देता है । जैसे मीनोपॉज की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका कम हो जाती है।





यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन UTI होने पर दो गिलास पानी में 3-4 लहसुन की कलियां डालकर उबाल लें ठंडा होने जाने पर इस पानी से योनि य को धो ले ।प्रकार योनि धोने से योनि में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। 





6. शहद और लहसुन के फायदे :::




  आयुर्वेद मतानुसार शहद गर्म प्रकृति का होता है लहसुन के साथ मिलाकर शहद खानें से शरीर में पित्त बढ़ जाता हैं। कफ प्रकृति के व्यक्ति यदि शहद लहसुन का सेवन करें तो कफ शांत होता हैं । 


खाली पेट लहसुन और शहद खानें से धमनियों में जमा वसा पिघलकर निकल जाती हैं ।






7. लहसुन के फायदे बालों के लिए 




लहसुन के तेल को बालों की जड़ों में लगाने से बाल काले और चमकदार बनते हैं साथ ही और रुसी ,खुश्की की समस्या समाप्त होती है।



लहसुन का तेल बालों में लगाने से‌ जुए मर जाती है ।








8. मोटापा दूर करने में लहसुन के फायदे ::



लहसुन गर्म प्रकृति की होती है यह गर्म प्रकृति शरीर से अतिरिक्त चर्बी को जलाने का काम करती है अतः ऐसे लोग जो शीतल प्रकृति के हैं और मोटे हो उनको लहसुन का सेवन करना चाहिए ।







9. कान दर्द में लहसुन के फायदे :::



कान दर्द की समस्या होने पर लहसुन का तेल या सरसों के तेल में 3‌-4‌ लहसुन की कलियां गर्म कर हल्का ठंडा हो जाने पर  प्रभावित कान में डालें, कुछ समय के प्रयोग के पश्चात कान दर्द‌ की समस्या समाप्त हो जाती है ।






10. रेडियोएक्टिव विकिरण से बचाव :::




लहसुन का नियमित सेवन रेडियोएक्टिव विकिरण से बचाव करता है जिससे कैंसर होने की संभावना समाप्त हो जाती है। मोबाइल टावर ठीक करने वाले और अस्पतालों  में एक्स रे मशीन एम आर आई मशीन के साथ काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मी यदि लहसुन का नियमित सेवन करें तो वह रेडियोएक्टिव विकिरण के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।








11. टैकीकार्डिया में लहसुन के फायदे :::



लहसुन में पोटेशियम, सोडियम और मैग्निशियम उच्च मात्रा में पाए जाते हैं इन तत्वों की कमी से टैकीकार्डिया होने की संभावना रहती है यदि लहसुन का सेवन नियमित रूप से किया जावे तो इन तत्वों की कमी से होने वाले टैकीकार्डिया से बचाव होता है।






12.  लहसुन के पत्तों‌‌ के फायदे :::




लहसुन के ताजे हरे पत्तों में फाइबर पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है यह फाइबर आंतों और पेट की सफाई कर कब्ज से निजात दिलाता है। उसके लिए लहसुन के ताजे हरे पत्तों की सब्जी बना कर खाना चाहिए।



लहसुन के पत्तों की सब्जी नपुंसकता दूर करती हैं और शरीर में प्राकृतिक  यौन उत्तेजना पैदा करती हैं अतः यौन दुर्बलता से ग्रसित व्यक्ति को लहसुन के ताजे पत्तों की सब्जी बनाकर अवश्य खाना चाहिए।




लहसुन के सूखे पत्तों को भंडारित अनाज में रखने से अनाज में घुन नहीं लगती हैं ।




लहसुन के पत्तें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण वाले होते हैं । यदि किसी के नाखून फंगस की वजह से भद्दे हो जाए तो लहसुन के पत्तों या लहसुन की कली का पेस्ट बनाकर प्रभावित भाग पर लगाने से आराम मिलता हैं ।




13. लहसुन उत्तम प्राकृतिक कीटनाशक भी माना जाता है ::



भारत में प्राकृतिक खेती करने वाले कई किसान लहसुन, नीम की निंबोली और छाछ मिलाकर प्राकृतिक कीटनाशक बनाते हैं यह  कीटनाशक रासायनिक कीटनाशकों के मुकाबले बहुत किफायती, मानव स्वास्थ्य का रक्षक और फसलों को कीटों से बचाने वाला साबित हुआ है। 






14. लहसुन के सूखे पत्तों के धुए से मच्छर भाग जाते हैं :



लहसुन के सूखे पत्तों का दुआ करने से मलेरिया फैलाने वाले मच्छर संक्रामक बीमारी फैलाने वाली मक्खियां  कीट पतंगे और टिड्डी दल तुरंत भाग जाते हैं।





15.बिच्छू और जहरीला कीड़ा काटनें पर 



लहसुन की दो चार कलिया पीसकर बिच्छू के डंक या कीड़े काटनें वाली जगह पर बांध दे । बिच्छू या कीड़े का जहर बहुत जल्दी उतर जायेगा ।






16.दूध के साथ लहसुन खानें के फायदे



दूध और लहसुन मिलाकर पीनें से गठिया,लकवा,साइटिका और शरीर के विभिन्न भागों में होनें वाले दर्द में आशातीत लाभ मिलता हैं । इसके लिए लहसुन पाक का सेवन करना चाहिए।







लहसुन पाक बनानें की विधि और लहसुन पाक के फायदे :::



सायटिका sciatica में लहसुन पाक का सेवन करनें बहुत शीघ्रता से लाभ होता हैं । इसी प्रकार कुछ जटिल प्रकार के वात रोगियों में भी लहसुन पाक बहुत फायदा पहुंचाता हैं । 



लहसुन पाक बनानें की विधि :::



सौ ग्राम लहसुन की बारिक कटी कलियों को एक लीटर दूध में डालकर मावा बननें तक पकाये और इस मिश्रण को 6 -7 घंटों तक ठंडा होनें दें ।


6 - 7 घंटे बाद इस मिश्रण को हाथ से या मिक्सर से फेंट लें और कढ़ाई में दो चम्मच गाय के शुद्ध देशी घी के साथ तब तक सेंक लें जब तक की मिश्रण सुनहरा नहीं हो जाता । इस मिश्रण को काँच या स्टील के बर्तन में भर लें ,आपका लहसुन पाक तैयार हैं ।




पेट में कृमि होनें पर लहसुन के फायदे



लहसुन बहुत ही उत्तम कृमि नाशक होता हैं । यदि बच्चों के पेट में कृमि हो गये हो तो दो तीन कली को पीसकर एक गिलास पानी में मिला दें और इस पानी को दिन में दो तीन बार पिलायें। ऐसा करनें से बच्चों की आँतों में स्थित कृमि बहुत जल्दी बाहर निकल जातें हैं ।








सेवन विधि ::



वैधकीय परामर्श अनुसार



15.लहसुन के नुकसान ::





लहसुन प्रकृति में गर्म होता है अतः जिन लोगों को पेट में तकलीफ, एसिडिटी, पेट में अल्सर जैसी समस्या हो उन लोगों को लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए ।




लहसुन के सेवन के बाद सांस में से बदबू आती है अतः लहसुन सेवन का समय ऐसा रखा जाना चाहिए जब आपको कहीं आना जाना नहीं हो ।



लहसुन की गंध बहुत तीव्र होती हैं अतः ऐसे व्यक्ति जिनको तेज गंध से एलर्जी हो अस्थमा की समस्या हो, माइग्रेन की समस्या हो को लहसुन का सेवन चिकित्सक के परामर्श के पश्चात ही करना चाहिए ।




लहसुन का सेवन व्यक्ति को उम्र, वजन ,शारीरिक क्षमता और प्रकृति के अनुरूप ही करना चाहिए ज्यादा मात्रा में लहसुन का सेवन करने से उल्टी, दस्त,चक्कर आना और पेट दर्द की समस्या पैदा हो जाती है इसीलिए लहसुन सेवन से पूर्व अपने डाइटिशियन या चिकित्सक का परामर्श अवश्य करें





16. लहसुन कब खाना चाहिए 





वैसे तो लहसुन 12 माह खाई जाती है परंतु शीत ऋतु में खाई हुई लहसुन बहुत उत्तम औषधि मानी जाती है।  कई लोग शीत ऋतु में लहसुन का अचार बनाकर खाते हैं , कई लोग लहसुन को भूनकर खाते हैं। कई लोग लहसुन को सब्जी में डालकर और चटनी बनाकर उपयोग करते हैं। 


लहसुन रात में या दिन में कब खाना चाहिए इस पर भी लोग प्रश्न करते हैं , वास्तव में लहसुन खाने का सबसे उत्तम समय वही है जो आपके शरीर की प्रकृति है। अर्थात आपका शरीर वात प्रधान  है ,या कफ प्रधान है या पित्त प्रधान है ,भूना हुआ लहसुन वात प्रकृति वालों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।  शहद मिला हुआ लहसुन पित्त प्रकृति वालों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है ,इसी प्रकार कफ प्रकृति वालों के लिए तेल में चला हुआ लहसुन श्रेष्ठ माना जाता है ।











लहसुन का तेल बनाने की विधि




आधा किलो लहसुन की कलिया आधा किलों तिल तेल में मिलाकर तब तक धीमी आँच पर उबाले जब तक की लहसुन पूरी तरह लाल नही हो जाती हैं । इसके पश्चात गैस बंद कर दें ।



इस तेल को ठंडा होनें पर किसी कांच की बाटल में भर लें और मालिश के लिए उपयोग करें ।





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ल्यूपस डिसीज





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म.प्र.की प्रमुख नदी [river]  म.प्र.भारत का ह्रदय प्रदेश होनें के साथ - साथ नदी,पहाड़,जंगल,पशु - पक्षी,जीव - जंतुओं के मामलें में देश का अग्रणी राज्य हैं.  river map of mp प्रदेश में बहनें वाली सदानीरा नदीयों ने प्रदेश की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर सम्पूर्ण प्रदेश को पोषित और पल्लवित किया हैं.यही कारण हैं कि यह प्रदेश "नदीयों का मायका" उपनाम से प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ प्रदेश में प्रवाहित होती हैं,जिनकी चर्चा यहाँ प्रासंगिक हैं. #१.नर्मदा नर्मदा म.प्र.की जीवनरेखा कही जाती हैं.इस नदी के कि नारें अनेक  सभ्यताओं ने जन्म लिया . #उद्गम  यह नदी प्रदेश के अमरकंटक जिला अनूपपुर स्थित " विंध्याँचल " की पर्वतमालाओं से निकलती हैं. नर्मदा प्रदेश की सबसे लम्बी नदी हैं,इसकी कुल लम्बाई 1312 किमी हैं. म.प्र.में यह नदी 1077 किमी भू भाग पर बहती हैं.बाकि 161 किलोमीटर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बहती हैं. नर्मदा प्रदेश के 15 जिलों से होकर बहती हैं जिनमें शामिल हैं,अनूपपुर,मंड़ला,डिंडोरी,जबलपुर,न

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia