सोमवार, 14 सितंबर 2015

MALNUTRITION AND AYURVEDA

#कुपोषण::-

कुपोषण
 कुपोषित बच्चा

विश्व के विकासशील देशो में कुपोषण एक गंभीर समस्या के रूप में विधमान हैं,जो बच्चों के जीवनीय छमता और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव ड़ालता हैं.
सरल भाषा में बाल कुपोषण बच्चों में उस विकार का नाम हैं जिसमें या तो शरीर के पोषण,विकास एँव स्वास्थ संरछण के लिये आवश्यक पर्याप्त संतुलित आहार बच्चें को प्राप्त नहीं होता या बच्चें का शरीर लिये गये आहार का सम्यक् उपयोग करनें में सछम नहीं होता हैं. कुपोषण के कारण बच्चों मे कृशता,दुर्बलता व अन्य अनेक लछण उतपन्न हो जाते हैं.

संतुलित आहार के बारें में रोचक जानकारी

#कुपोषण का आयुर्वैदिक उपचार::-

१.शतावरी चूर्ण ५ ग्राम, अश्वगंधा चूर्ण ५ ग्राम को रात को ५० मि.ली.पानी में गला दे सुबह इसे छलनी लगाकर अच्छे से दबाकर छान लें इस पानी में १०० मि.ली.दूध मिलाकर १० मिनिट़ तक उबालें तत्पश्चात ठंडा कर बच्चों को पिलायें.यह औषधि सन्धि,शिरा,स्नायुओं को मज़बूत कर शरीर में दृढ़ता,बल और रोग प्रतिरोधकता को बढ़ाता हैं.
२.गोघ्रत को १० ग्राम अश्वगंधा चूर्ण के साथ मिलाकर रोटी के साथ बालक को खिलायें .
३.बला तेल,महामाष तेल, को समान मात्रा में मिलाकर बच्चों को मालिश करवायें.
४.यष्टीमधु,शुंठी का चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ बच्चों को सेवन करवायें.
यहाँ एक महत्वपूर्ण ध्यान देनें वाली बात यह हैं कि बच्चों में कुपोषण न केवल संतुलित आहार की कमी से होता हैं बल्कि धात्री माता के दूध की दुष्टि से भी होता हैं अत:धात्री माता के दूध की दुष्टि दूर करनें के लिये शतावरी चूर्ण को प्रवाल पिष्टि में सम भाग में मिलाकर माता को सुबह -शाम घ्रत से सेवन करवायें.
५.धात्री माता को च्वनप्राश सुबह शाम दूध के साथ एक चम्मच देनें से दूध सुपुष्ट़ बनता हैं.
वैघकीय परामर्श आवश्यक

Svyas845@gmail.com





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