बुधवार, 16 सितंबर 2015

MALARIA मलेरिया उपचार



मलेरिया परिचय::-

मलेरिया विश्व की दस सबसे प्रचलित बीमारींयों मे से एक है,मलेरिया संक्रामक रोग है जो प्रतिवर्ष विश्व के साठ करोड़ लोगों को अपनी  चपेट़ में लेता है.यह रोग मादा एनाफिलिज़ मच्छर के काटने से फैलता है,जब यह मच्छर  किसी बीमार व्यक्ति को काटता है तो व्यक्ति के रक्त में मोजूद प्रोट़ोजोआ मच्छर के काटने से उसके पेट में चला जाता है ,और जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को  यह मच्छर काटता है तो वह प्रोटोजोआ स्वस्थ व्यक्ति को बीमार बना देता है.मलेरिया के मुख्यत: चार परजीवी होते है.

१.प्लाज्मोडियम वायवेक्स::-

मलेरिया को फैलाने वाली यह सर्वप्रमुख प्रजाति है,यह प्रजाति लीवर और रक्तकणों में प्रवेश कर जाती है और वही विकसित होती रहती है.

२.प्लाज्मोडियम फेल्सिफेरम::-

यह मलेरिया परजीवी सबसे गंभीर किस्म का होता है, जिसमें रोगी अचेतावस्था मे चला जाता है,और
स्थिति  गंभीर होनें पर रोगी की मौत भी हो जाती है.

३.प्लाज्मोडियम ओवल::-

मलेरिया के यह परजीवी मनुष्य के लिये उतने घातक नहीं होते जितने की फेल्सिफेरम.

४.प्लाज्मोडियम मलेरी::-

मलेरिया के यह परजीवी भी मनुष्य के लिये उतने घातक नहीं जितने ऊपर के दो परजीवी होते है.

लछण::-

१.कंपकंपी लगकर तेज़ बुखार आता है,जो पसीना निकलनें पर उतर जाता है
२.सिरदर्द
३.शरीर में तेज़ ,असहनीय पीड़ा होती है.
४.उल्टी होना चक्कर आना.
५.खून की कमी.

उपचार::-

आयुर्वैद चिकित्सा में मलेरिया का वर्णन विषम ज्वर के रूप में किया गया है.मिथ्या आहार के कारण दोष प्रकुपित होकर अमाशय में स्थित हो जाती है,तो ज़ठराग्नि दुर्बल होकर भोजन का आम बना देती है,जिससे आमदोष उत्पन्न होकर ज्वर बना देता है.
१.त्रिभुवनकिर्ती रस,आनंद भैरव रस, महासुदर्शन चूर्ण को समान भाग में मिलाकर तीन समय जल के साथ लें.
२.गिलोय ,चिरायता,नीम,तुलसी,अदरक को एक एक अनुपात में मिलाकर काढ़ा बना ले व इसे तीन दिनों तक सुबह शाम १०० मि.ली.के हिसाब से लें
३.वत्सनाभ का चूर्ण रोज़ रात को सोते समय एक चम्मच दूध के साथ लें.
४.त्रिफला २ ग्राम प्रतिदिन गर्म जल के भोजन उपरान्त लें.

सावधानी::-

१.घर के आसपास पानी इकठ्ठा न होनें दे,यदि पानी में लार्वा दिखे तो केरोसिन ड़ालकर नष्ट कर दें.
२.घरों के अन्दर साफ सफाई के लिये गोमूत्र से घर का पोछा लगायें.
३.पीनें के पानी में तुलसी पत्तियाँ ज़रूर ड़ालें.
नोट- वैघकीय परामर्श आवश्यक

Svyas845@gmail.com











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