सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

LUPUS DISEASE, ल्यूपस डिसीज क्या हैं इसका आयुर्वेदिक इलाज

ल्यूपस नामक बीमारी मात्र एक बीमारी न होकर बीमारीयों का समूह हैं, जिससे शरीर के प्रत्येक अंग प्रभावित होतें हैं,इसमें शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र स्वंय के शरीर के प्रति संवेदनशील होकर शरीर के उत्तकों (Tissues) और अंगों को शत्रु मानकर हमला कर देता हैं.इस बीमारी में जो अंग प्रभावित होता हैं,उससे संबधित बीमारी भी हो जाती हैं,जैसें फेफडें प्रभावित होनें पर अस्थमा, त्वचा प्रभावित होनें खुजली, चकते निकलना, जोड़ प्रभावित होनें पर गठिया आदि बीमारीयाँ पैदा हो जाती हैं.

ल्यूपस डिसीज का कारण क्या हैं  


ल्यूपस डिसीज़ का वास्तविक कारण अभी तक पता नही चल पाया हैं.और इस पर वर्तमान समय में काफी शोध चल रहा हैं ,कुछ शोधों का निष्कर्श हैं,कि यह बीमारी शरीर की जीन संरचना में परिवर्तन की वज़ह से होती हैं,किन्तु यह परिवर्तन क्यों होता हैं,इस पर लगातार शोध जारी हैं.

● अलसी हैं गुणों की खान


ल्यूपस डिसीजन होने पर क्या करें 


यदि बीमारी का पता लगतें ही जीवनशैली को संतुलित और खानपान संतुलित कर लिया जावें तो स्वस्थ जीवन व्यतित किया जा सकता हैं जैसें


० अपनें दैनिक जीवन को समयबद्ध करें खानें - पीनें ,दैनिक क्रियाकलापों का निश्चित समय रखे क्योंकि नियमित जीवनशैली बाँड़ी क्लाक (body clock) को एक निश्चित दिशा की और ले जाती हैं, जिसमें शरीर हर क्षण में होनें वालें कार्यों का अभ्यस्त हो जाता हैं,ऐसे में बीमारी का शरीर पर आक्रमण नही होता हैं.

० नियमित व्यायाम और योग शरीर और माँसपेशियों को ताकत प्रदान कर रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं,अत : रनिंग ,प्राणायाम, सूर्यनमस्कार,जैसी क्रियाएँ अवश्य करें.


० खानें - पीनें का विशेष ध्यान रखें ऐसा भोजन लें जिसमें ओमेगा 3 फेटीएसिड़, एन्टीआँक्सीडेन्ट़ भरपूर मात्रा में हो जैसें ड्रायफ्रूट,काड लीवर आँयल,मूँगफली,पालक,मैथी आदि.


० जंकफूड़ पूर्णत :बन्द कर दे क्योंकि इसमें प्रयुक्त sodium monoglutamate प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत असर डालता हैं.


० जिन चीजों को खानें से समस्या पैदा होती हो उन्हें तुरन्त बंद कर दे जैसे कुछ लोगों को 
बैंगन,आलू,टमाटर ,दही ,छाछ अचार खानें से समस्या बढ़ती हैं, अत : इनका सेवन नहीं करें.

तम्बाकू, शराब का सेवन किसी भी रूप में नही करना चाहियें.


० तले हुये खाद्य पदार्थों के स्थान पर ताजा फलों और सलाद का प्रयोग भोजन में बढ़ायें.

० लो फेट पदार्थों और नमक का संतुलित उपयोग करें.


कोई भी बीमारी या समस्या मनुष्य के साहस से बढ़ी नहीं होती हैं,अत : इच्छाशक्ति से बढ़ी नही हैं,अत : जीनें की मज़बूत इच्छाशक्ति बनाये रखें.






टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू  आयुर्वेद की विशिष्ट औषधि हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके ल

PATANJALI BPGRIT VS DIVYA MUKTA VATI EXTRA POWER

PATANJALI BPGRIT VS DIVYA MUKTA VATI EXTRA POWER  पतंजलि आयुर्वेद ने high blood pressure की नई गोली BPGRIT निकाली हैं। इसके पहले पतंजलि आयुर्वेद ने उच्च रक्तचाप के लिए Divya Mukta Vati निकाली थी। अब सवाल उठता हैं कि पतंजलि आयुर्वेद को मुक्ता वटी के अलावा बीपी ग्रिट निकालने की क्या आवश्यकता बढ़ी। तो आईए जानतें हैं BPGRIT VS DIVYA MUKTA VATI EXTRA POWER के बारें में कुछ महत्वपूर्ण बातें BPGRIT INGREDIENTS 1.अर्जुन छाल चूर्ण ( Terminalia Arjuna ) 150 मिलीग्राम 2.अनारदाना ( Punica granatum ) 100 मिलीग्राम 3.गोखरु ( Tribulus Terrestris  ) 100 मिलीग्राम 4.लहसुन ( Allium sativam ) 100  मिलीग्राम 5.दालचीनी (Cinnamon zeylanicun) 50 मिलीग्राम 6.शुद्ध  गुग्गुल ( Commiphora mukul )  7.गोंद रेजिन 10 मिलीग्राम 8.बबूल‌ गोंद 8 मिलीग्राम 9.टेल्कम (Hydrated Magnesium silicate) 8 मिलीग्राम 10. Microcrystlline cellulose 16 मिलीग्राम 11. Sodium carboxmethyle cellulose 8 मिलीग्राम DIVYA MUKTA VATI EXTRA POWER INGREDIENTS 1.गजवा  ( Onosma Bracteatum) 2.ब्राम्ही ( Bacopa monnieri) 3.शंखपुष्पी (Convolvulus pl

होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर #1 से नम्बर #28 तक Homeopathic bio combination in hindi

  1.बायो काम्बिनेशन नम्बर 1 एनिमिया के लिये होम्योपैथिक बायोकाम्बिनेशन नम्बर 1 का उपयोग रक्ताल्पता या एनिमिया को दूर करनें के लियें किया जाता हैं । रक्ताल्पता या एनिमिया शरीर की एक ऐसी अवस्था हैं जिसमें रक्त में हिमोग्लोबिन की सघनता कम हो जाती हैं । हिमोग्लोबिन की कमी होनें से रक्त में आक्सीजन कम परिवहन हो पाता हैं ।  W.H.O.के अनुसार यदि पुरूष में 13 gm/100 ML ,और स्त्री में 12 gm/100ML से कम हिमोग्लोबिन रक्त में हैं तो इसका मतलब हैं कि व्यक्ति एनिमिक या रक्ताल्पता से ग्रसित हैं । एनिमिया के लक्षण ::: 1.शरीर में थकान 2.काम करतें समय साँस लेनें में परेशानी होना 3.चक्कर  आना  4.सिरदर्द 5. हाथों की हथेली और चेहरा पीला होना 6.ह्रदय की असामान्य धड़कन 7.ankle पर सूजन आना 8. अधिक उम्र के लोगों में ह्रदय शूल होना 9.किसी चोंट या बीमारी के कारण शरीर से अधिक रक्त निकलना बायोकाम्बिनेशन नम्बर  1 के मुख्य घटक ० केल्केरिया फास्फोरिका 3x ० फेंरम फास्फोरिकम 3x ० नेट्रम म्यूरिटिकम 6x