19 अक्तू॰ 2016

इमली के फायदे और इमली में पाये जानें वाले पौषक तत्व

इमली के बारें में सामान्य जानकारी

इमली
इमली


इमली का पेड़ पादप वर्ग के शिंबी कुल में आता हैं.यह उष्ण कटिबंधीय जलवायु का वृक्ष हैं. जो भारत में जन्मा हैं.
 
इमली के कई नाम प्रचलित हैं,जैसे संस्कृत में इसे अम्लिका,चुंचिका,दंतशठा,चिंचा बंगाली में तेतुल,गुजराती में आंवली तथा लेटिन में टेमरिण्डस इण्ड़िका लिन्न कहते हैं.

इमली के फल और पत्तियों का स्वाद खट्टा,चटपटा और स्वादिष्ट होता हैं.जिसकी वज़ह से यह भारतीय  रसोई का अभिन्न अँग हैं.


इमली में पाये जानें वाले पौषक तत्व :::


इमली के गुदे में कैल्सियम,आयरन,विटामिन बी ,सी,के साथ फास्फोरस बहुतायत में पाया जाता हैं.

इसमें टार्टरिक एसिड़ 18%,तक तथा,ग्लूकोज 20% तथा फ्रक्टोज 30% पाया जाता हैं.इसके अतिरिक्त अन्य अनेक तत्व पाये जातें हैं जैसे टरपीन,लिमोनिन,जेरा नियोल,फेनाइल,प्रोपेनाइड़स,सैफाल,सिनामिक अम्ल,इथिलसिनामेट़,मिथाइल,सैलिजिलेट,पेक्टीन,पाइजारीन,और अल्काइथाईजाल्स नामक एसिड़ भी सूक्ष्म मात्रा में पाये जाते हैं.


इमली के बीज बीज में पाए जाने वाले तत्व


इमली के बीज में अल्बूमिनयडस,वसा,कार्बोहाइड्रेट, फायबर,नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहती हैं.


इमली की जड़ों में पाए जाने वाले पौषक तत्व


विटेक्सीन,आइसोविटेक्सीन,ओरियेटीन जैसे ग्लाइकोसाइड़ पाये जातें हैं. 

छाल और तनों में :::


एल्कालाइड़ हार्डिनिन पाया जाता हैं.

इमली के फायदे 

पेट़ रोगों में इमली के फायदे :::


कब्ज होनें पर इमली के फल के गुदे में दूध मिलाकर सेवन करने से कब्ज में आराम मिलता हैं.



० इमली के गुदे में कपूर मिलाकर सेवन करने से पतले दस्त आ जाते हैं,इस तरह यह मृदु विरेचक का काम करती हैं.


० इसमें पाया जानें वाला पाइजारिन एक उत्तम कृमिनाशक हैं .इसके लिये गुदे में मक्खन मिलाकर सेवन करवाते हैं.


० इमली के बीज के चूरें में गुड़ और जीरा मिलाकर सेवन करवानें से पुरानें से पुराना आँव और पेचिस का मरीज स्वस्थ हो सकता हैं.


० कच्ची इमली को नमक के साथ खानें से पेट़ की वायु बाहर निकल जाती हैं.



० इमली की चट़नी बनाकर खानें से भूख खुलकर लगती हैं,तथा भोजन आसानी से पच जाता हैं.



भाँग का नशा कैसे उतारे  :::


० इमली के गुदे का रस भांग खानें वाले व्यक्ति को थोड़े थोड़े अन्तराल पर पिलाया जावें तो नशा तुरन्त ही उतर जाता हैं.

० इमली का रस लगातार पीनें वाला व्यक्ति मादक दृव्यों की ओर आकर्षित नहीं होता हैं.

त्वचा संबधित रोगों में इमली के फायदे 


० खुजली होनें पर गुदे को पीसकर त्वचा पर लपेटनें से खुजली दूर हो जाती हैं.

० इमली की छाल को तिल के तेल के साथ जले स्थान पर लगानें से शीघृ आराम मिलता हैं, और फफोले नही पड़ते.

० इसके बीज का बारिक चूर्ण बनाकर पके घाव पर लगानें से घाव से पीप बाहर निकल जाता हैं.


नपुसंकता नाशक उपाय 


० इमली के बीजों को दूध के साथ उबालकर इसे बारिक पीस लें और घी शक्कर मिलाकर रात को सोते समय एक चम्मच सेवन करें इस विधि से न केवल नपुसंकता खत्म होती हैं,बल्कि धातु भी पुष्ट होती हैं.


गठिया रोग में इमली के फायदे


० इमली के गुदे को नमक के साथ मिलाकर घुट़नों,शरीर के जोंड़ों पर बांधनें से गठिया रोगों में आराम मिलता हैं.

० संधियों में सूजन आने पर इमली की पत्तियों को पीसकर गरम कर लें तत्पश्चात संधियों पर बांध ले बहुत आराम मिलेगा.

लू (heat stroke)लगनें पर क्या करना चाहिए


० इमली के गुदे  का रस बनाकर पीला दें,साथ ही हाथों,तलवों पर इमली के गुदे से मालिश करें.


आँखों के रोगों में  इमली के फायदे


० इमली के बीजों को पीसकर आँखों पर बाँधनें से Digital eye strain का खतरा कम हो जाता हैं.

आयुर्वैद चिकित्सा में इमली को रूक्ष मलसारक,उष्ण और कफ वात शामक माना गया हैं.इससे अनेक औषधियों का निर्माण भी होता हैं,जैसे अम्लिकासव,चिंचा फल्लातक वटी आदि.



० प्याज के औषधीय प्रयोग




० बयोकाबिनेशन नंबर 1 से 28 तक







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