गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

गाय 😊 स्वास्थ कृषि और पर्यावरण cow health agricultural and environment

गाय 😊 स्वास्थ कृषि और पर्यावरण cow health  agricultural and environment 

गोमाता
 गाय
दुनिया के आधे से अधिक राष्ट्र कृषि अर्थव्यवस्था
की प्रधानता वाले हैं, भारत भी अपनी कृषि प्रणाली के साथ सदियों से विश्व का सर्वप्रमुख राष्ट्र था,इसका मूल कारण रासायनिक नहीं बल्कि आर्गेनिक (organic) कृषि थी.

और इस आर्गेनिक खेती के मूल में गाय (cow) का स्थान प्रमुख था.आईयें जानतें हैं,किस प्रकार से गाय के योगदान से स्वास्थ,पर्यावरण और कृषि को उन्नत बना सकतें हैं.


#स्वास्थ्य :::

गाय का दूध अमृततुल्य होता हैं,ये बात सदियों से हमारी रिषी - मुनि कहतें आयें हैं,किन्तु हमनें इस बात को विस्मृत कर दिया और जब अनेक शोधों में यह बात प्रमाणित हुई तब हमनें इसको माना.


शोधों के अनुसार गाय के दूध में जो पीलापन होता हैं वह इसमें उपस्थित सोने की वज़ह से होता हैं. और आयुर्वेदानुसार सोना सुरक्षित और सुदृढ़ शरीर के लिये आवश्यक हैं.




यदि शिशु को 6 माह से प्रतिदिन 300 ग्राम दूध पिलाया जावें तो बालक कभी कुपोषित नही होगा.




गाय का दूध अन्य पशुओं के दूध के मुकाबले हल्का और सुपाच्य होता हैं,जिसकी वजह से ये तुरन्त शरीर द्धारा ग्रहण कर लिया जाता हैं, तथा ग्लूकोज की भाँति तुरन्त शरीर को ऊर्जा प्रदान करता हैं.





इसी प्रकार गाय के पंचगव्य से अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज संभव हैं.जैसे यदि नियमित वैघकीय मार्गदर्शन में गौमूत्र Gomutra का सेवन किया जावें तो कैंसर, गठिया, lucoderma,मधुमेह, मोटापा ,pH level का असंतुलन जैसें सेकड़ों रोगों को जड़ से ठीक किया जा सकता हैं.



काउ योग cow yoga



पश्चिमी देशों में काउ योग बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है ।‌‌‌‌इस योग को गायों के चारागाह में गायों के बीच किया जाता हैं । काउ योग के माध्यम से डिप्रेशन माइग्रेन, मिर्गी,का बहुत प्रभावी इलाज किया जाता हैं ।





#पर्यावरण और कृषि :::




गाय पर्यावरण मित्र पशु हैं,गाय कभी चारें को जड़ से उखाड़कर नहीं खाती हैं,जिससे भू - क्षरण और मिट्टी कटाव की समस्या नहीं होती हैं.


रासायनिक कीट़नाशकों ने न केवल कृषि को बर्बाद किया हैं,बल्कि पर्यावरण और किसानों की आर्थिक हालात को भी प्रभावित किया हैं.


यदि इन किट़नाशको की बजाय गौमूत्र से निर्मित आर्गेनिक कीट़नाशक का प्रयोग कृषि में किया जावें तो न केवल पर्यावरण संतुलित रहेगा बल्कि फसलों के मित्र पक्षी और किसान की जेब भी सुरक्षित रहेगी.


भारत दुनिया का प्रमुख खाद आयातक राष्ट्र हैं,तथा प्रतिवर्ष अरबों रूपये भारत द्धारा विदेशो को खाद खरीदनें के लिये दिये जातें  हैं.


यदि हम किसानों को गाय पालन के लिये प्रोत्साहित कर उसके गोबर को खेत में डालनें का समुचित प्रशिक्षण दे तो किसानों का न केवल पैसा बचेगा वरन अनेक बीमारी से भी जनमानस बचा रहेगा,क्योंकि शोधों से प्रमाणित हुआ हैं,कि जिन फसलों में रासायनिक खाद और कीट़नाशकों का प्रयोग किया जाता हैं उनमें अनेक कैंसरकारक तत्व मोजूद रहते हैं. 


मृत्यु से अमरता की ओर विमर्श


देशी खाद और गौमूत्र युक्त कीट़नाशकों के प्रयोग से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती हैं,और केचुएँ जैसें कृषि मित्र के लियें आदर्श आवास परिस्थितियों का निर्माण होता हैं.


दुनिया में प्रतिवर्ष चार करोड़ लोगों की मोंत वायु प्रदूषण की वज़ह से होती होती हैं,यदि हम छोटे़ किसानों को ट्रेक्टर के विकल्प के रूप में बैल आधारित टेक्नालाजी वालें उपकरण उपलब्ध करवानें में सफल हो गये तो पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती की लागत कम करनें में मदद मिलेगी.और लागत कम होनें से किसानों का मुनाफा बढे़गा जो अन्तत : किसान आत्महत्या को रोकेगा.

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