रविवार, 23 अक्तूबर 2016

Mushroom कुकुरमुत्ता एक उपयोगी पौधा

 

कुकुरमुत्ता (mushroom) :::

आपनें बरसात के मौसम में पेड़ों,कुड़े - कचरें के ढ़ेर के ऊपर या भूसे  पर सफेद,मट़मेला या पीलापन लिये छतरीनुमा मखमली पौधा अवश्य देखा होगा, यही पौधा मशरूम कहलाता हैं.इसकी कई किस्में होती हैं,जो भारत और दुनिया भर में उगती हैं, परन्तु खाद्य फसल के रूप में सीप मशरूम या oyster mushroom अत्यन्त लोकप्रिय हैं. oyster mushroom की  भी अनेक किस्में दुनियाभर में उगाई जाती हैं.जैसे भारत में प्लूटोरस सजोरकाजू,चीन में प्लूटोरस एबोलनस तथा प्लूटोरस सिस्टीडिओसस,यूरोप में प्लूटोरस औस्ट्रिएटस प्रमुख हैं.
कुकुरमुत्ता
 Oyster mushroom

पोषक तत्व :::

थायमीन.          | 4.8 mg
राइबोफ्लेविन    | 4.7 mg
नियासीन.         | 108 .8 mg
कैल्सियम.        | 34 mg
फाँस्फोरस.       | 1347 mg
सोड़ियम.         | 837 mg
पोटेशियम.       | 3793 mg. 
                       (per 100 gm mushroom)
इसके अतिरिक्त मशरूम में पर्याप्त मात्रा में पानी,लगभग 9 प्रकार के अमीनों एसिड़ खनिज़ लवण,  फ्रक्टोज ,कार्बोहाइड्रेट,साइलोसाइबिन कंपाउँड़ और प्रोटीन पायी जाती हैं.

•उपयोग :::

#थकावट (fatigue) में :::

यदि सम्पूर्ण शरीर पर्याप्त मात्रा में भोजन लेनें के बाद भी थका हुआ लगता हैं, चेहरा निस्तेज और कांतिहीन लगता हो तो सुबह के नाश्ते में मशरूम सोयाबीन के साथ लें दिनभर तरोताजा महसूस करेगें.इसके अलावा मशरूम को सुखाकर पावड़र बना ले इस पावड़र को चाय काँफी या दूध में एक चम्मच ड़ालकर पीतें रहें.

#हार्मोंनल समस्याओं में :::

यदि स्त्रीयों में मासिक धर्म की अनियमितता हो,शरीर पर अनचाहे बाल आ गये हो,थायरड़ कम या ज्यादा होता हो,पुरूषों में शुक्राणु की कमी हो तनाव रहता हो तो नियमित रूप से आलिव आइल के साथ मशरूम का सेवन करतें रहें,सारी समस्याओं में बहुत फायदा होगा.

#ह्रदय (heart problem) रोगों में :::

मशरूम में उपस्थित अमीनों एसिड़ शरीर में HDL कोलेस्ट्राल का स्तर बनाये रखतें फलस्वरूप ह्रदय रोग होनें की सम्भावना नहीं होती हैं.

#टाइफाइड (Typhoid)में :::

यदि टाइफाइड फीवर में दवाईयों के सेवन से भूख लगनें की इच्छा समाप्त हो गई हो,उल्टी की इच्छा बार - बार होती हो तो मशरूम को घी के साथ सेवन करवायें .इसके लिये इसकी सब्जी बनाकर खायें.

#कब्ज और अल्सर में :::

इसमें फायबर प्रचुरता में उपलब्ध रहता हैं,जिससे आंतो की बेहतर सफाई होती हैं.जो लोग कब्ज से परेशान रहते हैं उन्हे मशरूम सलाद के रूप में कच्चा सेवन करते रहना चाहियें.
यदि पेट़ में अल्सर हैं तो मशरूम रात को पानी में भीगोंकर सुबह इस पानी को पीयें,बचें हुये मशरूम को कोकोनट़ आइल के साथ सब्जी बनाकर खायें.

#पीलिया (jaundice)में :::

इसका ताजा रस निकालकर पीतें हैं,क्योंकि इसमें उपस्थित फ्रक्टोज और पानी लीवर में उपस्थित हानिकारक पदार्थों की सफाई कर शरीर को एनर्जी देता हैं.

#रक्तचाप (blood pressure) में :::

इसमें सोड़ियम और पोटेशियम प्रचुरता में पायें जातें हैं, जो रक्तचाप का संतुलन बनाते हैं.

#रोगप्रतिरोधक (immunity)क्षमता बढ़ानें में ::
मशरूम को एलोवेरा, आंवला के साथ मिलाकर जूस बनाकर पीनें से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं.

#अनिद्रा में :::

मशरूम में उपस्थित कैल्सियम गहरी नींद लाता हैं, इसके लिये मशरूम को रात को सोते समय सब्जी या सलाद की तरह ले .

#डीमेंसिया (Dementia) में :::

यदि स्मृतिलोप की समस्या हो,किसी का नाम तक भूल जातें हो तो मशरूम को मिस्री और आंवला मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे रोटी या ब्रेड़ के साथ मक्खन की तरह सेवन करें.


#मानसिक अवसाद में :::


ब्रिट़ेन के इंपीरियल कालेज में मशरूम पर हुये शोध में पता चला कि इसमें मौंजूद साइलोसाइबिन कंपाऊँड़ मानसिक अवसाद होनें की संभावना नगण्य कर देता हैं.

मानसिक अवसाद से बचनें के लियें कच्चें मशरूम का सेवन स्वादानुसार नमक मिर्च मिलाकर किया जा सकता हैं.



मशरूम की प्रकृति शीत होती हैं अत : एलर्जी, अस्थमा ,और शरीर शीत प्रकृति का होनें पर वैघकीय परामर्श अवश्य लें.









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