शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली immune system

 प्रतिरक्षा तंत्र क्या हैं ?


मनुष्य शरीर अनेक जट़िल संरचनाओं का तंत्र हैं.ये संरचनाएँ एक दूसरे पर आश्रित रहकर कार्य करती रहती हैं.

वेसे तो मनुष्य शरीर के अन्दर और बाहर करोड़ों जीवाणु निवास करतें हैं ,इनमें से कुछ मनुष्य के मित्र होतें हैं,जबकि कुछ मनुष्य के लिये हानिकारक होतें हैं,इन हानिकारक जीवाणुओं से हमारा प्रतिरक्षा तंत्र निपटता हैं और इनको नष्ट कर शरीर को रोगों से बचाता हैं.

प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता उसके स्वास्थ के अनुसार अलग - अलग होती हैं.

प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे काम करती हैं ?

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली दो प्रकार की होती हैं .


1.बाह्य प्रतिरक्षा प्रणाली  बाहरी रोगाणुओं से हमारी रक्षा करती हैं जैसें त्वचा पर पसीनें के माध्यम से बेक्टेरिया रोधी पदार्थ निकलतें रहतें हैं,जो अनेक हानिकारक बेक्टेरिया को नष्ट कर त्वचा की सुरक्षा करती हैं.

हमारें मुख की लार भी बेक्टेरिया को नष्ट कर हानिकारक जीवाणुओं को शरीर में प्रवेश करनें से रोकती हैं.इसी प्रकार नाक और फेफडों पर म्युकस का स्तर चढ़ा रहता हैं,जो रोगाणु तुरन्त नहीं मरतें वे म्युकस से चिपककर मर जातें हैं.

आँखों में 'लाइसोज़ाइम' नामक एन्जाइम होता हैं,जो प्रतिरक्षा कवच का काम करता हैं.

2. आंतरिक प्रतिरक्षा प्रणाली का जिम्मा हमारें शरीर की श्वेत रक्त कणिकाओं या lucocytes के पास होता हैं,ये ही शरीर की वास्तविक immune cells होती हैं.

ये दो प्रकार की होती हैं,B - lymphocytes जो कि Bone marrow में बनती हैं.और T - lymphocytes जो कि थाइमस में बनती हैं.जब बाहरी एण्टीजन शरीर पर आक्रमण करतें हैं तो B - lymphocytes antibody का निर्माण करती हैं,जो शरीर में आनें वालें antigen को नष्ट कर देती हैं.T - lymphocytes का प्रमुख कार्य उन कोशिकाओं को पहचान कर नष्ट करना होता हैं,जो अचानक असामान्य व्यहवार कर शरीर को नुकसान पहुँचाती हैं. जैसें कैंसर कोशिकाएँ.
हमारें शरीर पर संक्रमण की अवस्था में श्वेत रक्त कणिकाएँ उसी प्रकार से उस स्थान पर खींची चली आती हैं जैसें लोहे के पास चुम्बक खींचा चला आता हैं.

हमारें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर नयें - नयें शोध प्रतिदिन हो रहे हैं,जिसके अनुसार हमारा शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र  बाह्य कारकों जैसें प्रदूषण,अनियमित जीवनशैली, शराब ,अत्यधिक जंक फूड़ का इस्तेमाल से अपनी संरचना बदल कर बाह्य जीवाणुओं की अपेक्षा स्वंय के शरीर को दुश्मन मान लडनें लगता हैं,फलस्वरूप नयी-नयी बीमारीयाँ पैदा हो रही हैं,जैसे एलर्जी, अस्थमा, गठिया ( Rumetoid arthritis),चर्म रोग,मधुमेह,पर्किसंन,आदि .

प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसें बढ़ायें ?

कुछ लोग एक जैसी परिस्थितियों में काम करतें हैं,इनमें से कुछ लोग स्वस्थ रहतें हैं,जबकि कुछ लोग अस्वस्थ हो जातें हैं,क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति का प्रतिरक्षा तंत्र अस्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा मज़बूत होता हैं तो प्रतिरक्षा प्रणाली को कोंन मज़बूत करता हैं ? 

प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनानें के कुछ उपाय
० नियमित व्यायाम, योग,प्राणायाम,और सकारात्मक चिंतन.
० पर्याप्त मात्रा में पानी का स्तर शरीर में बनायें रखें .
० फास्ट फूड़़ की जगह fresh food लें.
० अँकुरित अनाज,फल,और सलाद का भोजन में समावेश.
० पर्याप्त नींद लेनें से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मज़बूत होता हैं,और अच्छी गहरी नींद  खूब शारीरिक मेहनत से आती हैं.अत : खूब शारीरिक मेहनत करें.









कोई टिप्पणी नहीं:

प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...