प्याज (ONION) खाते हो तो जान लो आखिर प्याज इतना मँहगा इसके किन गुणों की वजह से हैं

प्याज 

गंध वाली सब्जी
 प्याज 

प्याज का संस्कृत नाम :::

प्याज का संस्कृत नाम पलांडु ,भवनेष्ट,मुखदुषक,कृमिघ्न

प्याज का हिन्दी नाम :::

प्याज को हिंदी में प्याज,कांदा,लाल प्याज आदि नामों से जानतें हैं ।




० कद्दू के औषधीय उपयोग



० बैंगन के औषधीय उपयोग


० हरसिंगार के औषधीय प्रयोग



० तुलसी


० योगा


प्याज का लेटिन नाम pyaj ka Latin Nam :::



Allium cepa प्याज का लेटिन नाम "एलियन सीपा" हैं।

प्याज के गुण pyaj KE gun :::



आयुर्वेदानुसार प्याज चरपरी,बलकारक,पित्तनाशक,भारी,रोचक,स्निग्ध और वमन के दोष को शांत करने वाला हैं ।


प्याज  स्वादिष्ट ,ठंडा,कफ कारक, वातनाशक,बलकारक,वीर्यवर्धक और भारी रहता हैं ।


लाल प्याज  ठंड़़ा,पित्तशामक, और अत्यंत निद्राकारक, होता हैं ।

प्याज के बीज pyaj ke bij प्रमेह (मधुमेह),दाँतों के कीड़े,श्वास को दूर करने वाले होतें हैं ।


पूर्णत: पका हुआ प्याज आँतों की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर खुलकर दस्त लाता हैं । और पाचनशक्ति मज़बूत करता हैं ।


प्याज का सलाद pyaj ka salad  खानें से कब्ज,अर्श,भगंदर की समस्या जड़ से समाप्त हो जाती हैं ।


प्याज का रस pyaj ka ras निकालकर पीनें से मूत्र की जलन ,प्यास  और शरीर की जलन पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं ।


पित्त रोगों में  प्याज का सेवन करने से दूषित पित्त दस्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाता हैं ।और नवीन शुद्ध पैदा होकर शरीर को बल प्रदान   करता हैं ।


चर्म रोग जैसें गाँठ,फोड़े फुन्सी,आदि में प्याज  का रस गर्म कर लगानें या प्याज  को घी में सेंककर प्रभावित स्थान  पर बाँधनें से बहुत आराम मिलता हैं ।


प्याज की गाँठ में पाया जानें वाला वाष्पशील प्याज का तेल pyaj ka tel ज्वर नाशक,श्वास कास नाशक ,और सिरदर्द नाशक होता हैं ।


प्याज का रस पेट दर्द,वात रोग आदि में प्रभावकारी साबित होता हैं ।


प्याज को कच्ची हालात में खानें में माहवारी नियमित होती हैं।


जहरीले कीड़े के काटनें पर प्याज का रस मलने से जलन शांत हो जाती हैं ।


कर्णशूल में प्याज  का रस गर्म कर कान में डालनें से कर्णशूल मिट़ जाता हैं । और बहरापन दूर हो जाता हैं ।


 सफेद प्याज safed pyaj का रस आँखों में डालने से नेत्रज्योति बढ़ती हैं और रतौंधी समाप्त हो जाती हैं ।


प्याज के रस को नाक में टपकानें से बैहोश व्यक्ति की बैहोशी समाप्त हो जाती हैं । 


नकसीर में प्याज को काटकर बार - बार सूघंनें से नकसीर बँद हो जाती हैं ।


प्याज का रस लू लगनें पर पीलानें और शरीर पर मलनें से लू उतर जाती हैं ।


प्याज का रस पीलानें से गुर्दें की पथरी निकल जाती हैं ।


प्याज का रस pyaj ka ras और सरसों का तेल मिलाकर गठिया रोगी की मालिश करनें से आशातित लाभ प्राप्त होता हैं ।


प्याज का रस और कलोंजी का तेल समान मात्रा में मिलाकर  मसूड़ों और दाँतों पर मलनें से दाँत दर्द,पायरिया,आदि की समस्या समाप्त हो जाती हैं ।


शरीर में किसी ज़गह गाँठ होनें पर प्याज के बीच वाले कंद को निकालकर घी और हल्दी मिलाकर गर्म कर गाँठ पर बाँधनें से गाँठ बैठ जाती हैं ।


 सफेद प्याज safed pyaj बलवर्धक ,वीर्यवर्धक  और बाजीकरण प्रदान करता हैं,इसका नियमित भोजन के साथ सेवन करनें से उपरोक्त लाभ प्राप्त होतें हैं ।  





० च्वनप्राश



० भोजन करनें के नियम



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