शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

प्याज (ONION) खाते हो तो जान लो आखिर प्याज इतना मँहगा इसके किन गुणों की वजह से हैं

प्याज 

गंध वाली सब्जी
 प्याज 

प्याज का संस्कृत नाम :::

प्याज का संस्कृत नाम pyaj ka sanskrit name पलांडु ,भवनेष्ट,मुखदुषक,कृमिघ्न

प्याज का हिन्दी नाम :::

प्याज को हिंदी में प्याज,कांदा,लाल प्याज आदि नामों से जानतें हैं ।




० कद्दू के औषधीय उपयोग



० बैंगन के औषधीय उपयोग


० हरसिंगार के औषधीय प्रयोग



० तुलसी


० योगा


प्याज का लेटिन नाम pyaj ka Latin Nam :::



Allium cepa प्याज का लेटिन नाम "एलियन सीपा" हैं।

प्याज के गुण pyaj KE gun :::



आयुर्वेदानुसार प्याज चरपरी,बलकारक,पित्तनाशक,भारी,रोचक,स्निग्ध और वमन के दोष को शांत करने वाला हैं ।


प्याज  स्वादिष्ट ,ठंडा,कफ कारक, वातनाशक,बलकारक,वीर्यवर्धक और भारी रहता हैं ।


लाल प्याज  ठंड़़ा,पित्तशामक, और अत्यंत निद्राकारक, होता हैं ।

प्याज के बीज pyaj ke bij प्रमेह (मधुमेह),दाँतों के कीड़े,श्वास को दूर करने वाले होतें हैं ।


पूर्णत: पका हुआ प्याज आँतों की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर खुलकर दस्त लाता हैं । और पाचनशक्ति मज़बूत करता हैं ।


प्याज का सलाद pyaj ka salad khane se  खानें से कब्ज,अर्श,भगंदर की समस्या जड़ से समाप्त हो जाती हैं ।


प्याज का रस pyaj ka ras निकालकर पीनें से मूत्र की जलन ,प्यास  और शरीर की जलन पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं ।


पित्त रोगों में  प्याज का सेवन करने से pyaj ka sevan karne se दूषित पित्त दस्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाता हैं ।और नवीन शुद्ध पैदा होकर शरीर को बल प्रदान   करता हैं ।


चर्म रोग जैसें गाँठ,फोड़े फुन्सी,आदि में प्याज  का रस गर्म कर लगानें या प्याज  को घी में सेंककर प्रभावित स्थान  पर बाँधनें से बहुत आराम मिलता हैं ।


प्याज की गाँठ में पाया जानें वाला वाष्पशील प्याज का तेल pyaj ka tel ज्वर नाशक,श्वास कास नाशक ,और सिरदर्द नाशक होता हैं ।


प्याज का रस पेट दर्द,वात रोग आदि में प्रभावकारी साबित होता हैं ।


प्याज को कच्ची हालात में खानें में माहवारी नियमित होती हैं।


जहरीले कीड़े के काटनें पर प्याज का रस मलने से जलन शांत हो जाती हैं ।


कर्णशूल में प्याज  का रस गर्म कर कान में डालनें से कर्णशूल मिट़ जाता हैं । और बहरापन दूर हो जाता हैं ।


 सफेद प्याज safed pyaj का रस आँखों में डालने से नेत्रज्योति बढ़ती हैं और रतौंधी समाप्त हो जाती हैं ।


प्याज के रस को नाक में टपकानें से बैहोश व्यक्ति की बैहोशी समाप्त हो जाती हैं । 


नकसीर में प्याज को काटकर बार - बार सूघंनें से नकसीर बँद हो जाती हैं ।


प्याज का रस लू लगनें पर पीलानें और शरीर पर मलनें से लू उतर जाती हैं ।


प्याज का रस पीलानें से गुर्दें की पथरी निकल जाती हैं ।


प्याज का रस pyaj ka ras और सरसों का तेल मिलाकर गठिया रोगी की मालिश करनें से आशातित लाभ प्राप्त होता हैं ।


प्याज का रस और कलोंजी का तेल समान मात्रा में मिलाकर  मसूड़ों और दाँतों पर मलनें से दाँत दर्द,पायरिया,आदि की समस्या समाप्त हो जाती हैं ।


शरीर में किसी ज़गह गाँठ होनें पर प्याज के बीच वाले कंद को निकालकर घी और हल्दी मिलाकर गर्म कर गाँठ पर बाँधनें से गाँठ बैठ जाती हैं ।


 सफेद प्याज safed pyaj बलवर्धक ,वीर्यवर्धक  और बाजीकरण प्रदान करता हैं,इसका नियमित भोजन के साथ सेवन करनें से उपरोक्त लाभ प्राप्त होतें हैं ।  





० च्वनप्राश



० भोजन करनें के नियम



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